बिहार के सात डीएवी पर चल रहा जांच
- जांच के बाद इन डीएवी का जा सकता है एफिलिएशन
- 20 हजार स्टूडेंट्स पढ़ रहे इन डीएवी में
संवाददाता, पटना
एक बार फिर डीएवी संस्थान के कई डीएवी स्कूल सीबीएसइ के जांच घेरे में आ गये है. इन डीएवी पर सीबीएसइ की विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से जांच चल रही है. जल्द ही इसकी रिपोर्ट भी तैयार कर ली जायेगी. इसमें पटना के अलावा मोकामा और गया के भी दो डीएवी स्कूल शामिल है. अगर इन डीएवी स्कूल की जांच की रिपोर्ट आ जाती है और इन डीएवी की मान्यता को खत्म कर दिया जाता है तो 20 हजार स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर लग जायेगा. इस जांच के घेर में बिहार के कुल सात डीएवी शामिल हैं. ये सारे डीएवी 12वीं तक की पढ़ाई करवाता है. डीएवी सूत्रों की माने तो इन तमाम डीएवी मे अभी वर्तमान में 20 हजार के लगभग स्टूडेंट्स पढ़ रहे है. सीबीएसइ के आदेश पत्र सीबीएसइ/वीआइजी/एफण्13522(4)2014/इ-294-295 के तहत इन डीएवी की जांच सितंबर 2014 से चल रही है. जांच रिपोर्ट सीबीएसइ के पास जाने के बाद इनकी मान्यता पर खतरा हो सकता है.
- अभिभावको ने स्कूल पर लगाया था आरोप
इन डीएवी स्कूलों पर कई तरह के आरोप अभिभावकों ने लगाया है. अलग-अलग शिकायत में अभिभावकों ने स्कूल पर आरोप लगाया है कि स्टूडेंट्स से मोटी रकम स्कूल की ओर से मांगी जाती है. जरूरत से अधिक एक क्लास में स्टूडेंट्स होने के कारण पढ़ाई सही से नहीं हो रहा है. अलग-अलग डीएवी से लगभग 500 अभिभावकों ने इसकी शिकायत कंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय अन्वेषण आयोग और एचआरडी डिपार्टमेंट से किया. एचआरडी डिपार्टमेंट ने सीबीएसइ को जांच के आदेश दिये. इसके बाद सितंबर 2014 से इन डीएवी की जांच सीबीएसइ की विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से किया जा रहा है.
- 7वीं के बाद कैसे बढ़ जाते है स्टूडेंट्स की संख्या
सीबीएसइ ने अपने जांच में तमाम डीएवी से पूछा है कि 7वीं के बाद स्कूल में अचानक से स्टूडेंट्स की संख्या कैसे बढ़ जाती है. सीबीएसइ की सूत्रों की माने तो हर साल डी-एफिलिएटेड स्कूलों से 7वीं के बाद स्टूडेंट्स का नामांकन इन डीएवी में करवाया जाता है. सीबीएसइ की माने तो इसकी जांच बोर्ड की ओर से गुप्त रूप से 2015 के अप्रैल में करवाया गया था. इसमें इस बात का पता चला कि पटना में चल रहे डीएवी के अलग-अलग ब्रांच से स्टूडेट्स को इन डीएवी में लाया जाता है. इससे अचानक से स्टूडेंट्स की संख्या दुगुनी से चौगुनी तक पहुंच जाती हैं.
ये डीएवी हैं शामिल
- डीएवी पब्लिक स्कूल, शेरघाटी, गया
- डीएवी पब्लिक स्कूल, रोटरी कैंपस, कॉलेज रोड, गया
- डीएवी पब्लिक स्कूल, वाल्मी, फुलवारीसरीफ
- जीएल दत्ता डीएवी पब्लिक स्कूल, कंकड़बाग
- डीएवी पब्लिक स्कूल, कैंट रोड, खगौल
- डीएवी पब्लिक स्कूल, मोकामा
- डा. डी आर डीएवी पब्लिक स्कूल, गोला रोड
इन बिंदुओं पर चल रही जांच
- स्कूल में कमरे से अधिक स्टूडेंट्स की संख्या हैं
- रेगूलर टीचर्स की अपेक्षा यहां पर एडहॉक पर टीचर्स को अधिक रखा गया है
- टीचर्स की सैलरी पर शक है. सीबीएसइ के रेगूलेशन के अनुसार टीचर्स की सैलरी नहीं है
- एक टीचर दूसरे डीएवी के भी टीचर के पद पर एक ही समय में कार्यरत है
- टीचर और नॉन टीचिंग स्टॉफ का सैलरी का बंटवारा सही नहीं है
- इन स्कूलों में 8 से स्टूडेंट्स की संख्या काफी अधिक हो जाता हैं
- एलडीसी पर कार्यरत कर्मचारी प्लस टू में क्लास लेते है
- स्टूडेंट्स की संख्या अधिक होने के कारण अदर एक्टिविटी पर स्कूल ध्यान नहीं देता है
- जांच के बाद इन डीएवी का जा सकता है एफिलिएशन
- 20 हजार स्टूडेंट्स पढ़ रहे इन डीएवी में
संवाददाता, पटना
एक बार फिर डीएवी संस्थान के कई डीएवी स्कूल सीबीएसइ के जांच घेरे में आ गये है. इन डीएवी पर सीबीएसइ की विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से जांच चल रही है. जल्द ही इसकी रिपोर्ट भी तैयार कर ली जायेगी. इसमें पटना के अलावा मोकामा और गया के भी दो डीएवी स्कूल शामिल है. अगर इन डीएवी स्कूल की जांच की रिपोर्ट आ जाती है और इन डीएवी की मान्यता को खत्म कर दिया जाता है तो 20 हजार स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर लग जायेगा. इस जांच के घेर में बिहार के कुल सात डीएवी शामिल हैं. ये सारे डीएवी 12वीं तक की पढ़ाई करवाता है. डीएवी सूत्रों की माने तो इन तमाम डीएवी मे अभी वर्तमान में 20 हजार के लगभग स्टूडेंट्स पढ़ रहे है. सीबीएसइ के आदेश पत्र सीबीएसइ/वीआइजी/एफण्13522(4)2014/इ-294-295 के तहत इन डीएवी की जांच सितंबर 2014 से चल रही है. जांच रिपोर्ट सीबीएसइ के पास जाने के बाद इनकी मान्यता पर खतरा हो सकता है.
- अभिभावको ने स्कूल पर लगाया था आरोप
इन डीएवी स्कूलों पर कई तरह के आरोप अभिभावकों ने लगाया है. अलग-अलग शिकायत में अभिभावकों ने स्कूल पर आरोप लगाया है कि स्टूडेंट्स से मोटी रकम स्कूल की ओर से मांगी जाती है. जरूरत से अधिक एक क्लास में स्टूडेंट्स होने के कारण पढ़ाई सही से नहीं हो रहा है. अलग-अलग डीएवी से लगभग 500 अभिभावकों ने इसकी शिकायत कंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय अन्वेषण आयोग और एचआरडी डिपार्टमेंट से किया. एचआरडी डिपार्टमेंट ने सीबीएसइ को जांच के आदेश दिये. इसके बाद सितंबर 2014 से इन डीएवी की जांच सीबीएसइ की विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से किया जा रहा है.
- 7वीं के बाद कैसे बढ़ जाते है स्टूडेंट्स की संख्या
सीबीएसइ ने अपने जांच में तमाम डीएवी से पूछा है कि 7वीं के बाद स्कूल में अचानक से स्टूडेंट्स की संख्या कैसे बढ़ जाती है. सीबीएसइ की सूत्रों की माने तो हर साल डी-एफिलिएटेड स्कूलों से 7वीं के बाद स्टूडेंट्स का नामांकन इन डीएवी में करवाया जाता है. सीबीएसइ की माने तो इसकी जांच बोर्ड की ओर से गुप्त रूप से 2015 के अप्रैल में करवाया गया था. इसमें इस बात का पता चला कि पटना में चल रहे डीएवी के अलग-अलग ब्रांच से स्टूडेट्स को इन डीएवी में लाया जाता है. इससे अचानक से स्टूडेंट्स की संख्या दुगुनी से चौगुनी तक पहुंच जाती हैं.
ये डीएवी हैं शामिल
- डीएवी पब्लिक स्कूल, शेरघाटी, गया
- डीएवी पब्लिक स्कूल, रोटरी कैंपस, कॉलेज रोड, गया
- डीएवी पब्लिक स्कूल, वाल्मी, फुलवारीसरीफ
- जीएल दत्ता डीएवी पब्लिक स्कूल, कंकड़बाग
- डीएवी पब्लिक स्कूल, कैंट रोड, खगौल
- डीएवी पब्लिक स्कूल, मोकामा
- डा. डी आर डीएवी पब्लिक स्कूल, गोला रोड
इन बिंदुओं पर चल रही जांच
- स्कूल में कमरे से अधिक स्टूडेंट्स की संख्या हैं
- रेगूलर टीचर्स की अपेक्षा यहां पर एडहॉक पर टीचर्स को अधिक रखा गया है
- टीचर्स की सैलरी पर शक है. सीबीएसइ के रेगूलेशन के अनुसार टीचर्स की सैलरी नहीं है
- एक टीचर दूसरे डीएवी के भी टीचर के पद पर एक ही समय में कार्यरत है
- टीचर और नॉन टीचिंग स्टॉफ का सैलरी का बंटवारा सही नहीं है
- इन स्कूलों में 8 से स्टूडेंट्स की संख्या काफी अधिक हो जाता हैं
- एलडीसी पर कार्यरत कर्मचारी प्लस टू में क्लास लेते है
- स्टूडेंट्स की संख्या अधिक होने के कारण अदर एक्टिविटी पर स्कूल ध्यान नहीं देता है
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