Monday, June 1, 2015

फ्लाइंट कैंडिडेंट्स के रूप में पटना में 11वीं में नामांकन लेते है छात्र

फ्लाइंट  कैंडिडेंट्स के रूप में पटना में 11वीं में नामांकन लेते है छात्र

- सीबीएसइ ने स्कूलों से पूछा पटना में 60 फीसदी छात्र कोचिंग संस्थान से जुड़ कर क्यूं कर रहे प्लस टू
- फ्लाइंग कैंडिडेंट्स का नामांकन लेना बंद करें स्कूल
संवाददाता, पटना
स्कूल परिसर में कोचिंग संस्थान नहीं चल सकता है. ना ही कोई स्कूल किसी कोचिंग संस्थान से जुड़ कर किसी छात्र का नामांकन स्कूल में ले सकता है. अगर कोई स्कूल इस तरह की हरकतें करते हुए पकड़ में आयेगा तो उस स्कूल की मान्यता खत्म कर दी जायेगी. सीबीएसइ के इस आदेश के बावजूद वर्तमान में पटना के 60 फीसदी छात्र प्लस टू की पढ़ाई फ्लाइंग कैंडिडेंट्स (उस स्कूल के छात्र नहीं होकर कोचिंग संस्थान से जुड़े होते है)  के रूप में कर रहे है. हर साल इसकी संख्या बढ़ रही है. हर साल 11वीं में नामांकन लेने वाले छात्रो की संख्या बढ़ती जा रही है. स्कूलों में सीटें सीमित है. इन सीटों पर उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र का ही नामांकन हो पाता है. ऐसे में काफी संख्या छात्र फ्लाइंग कैंडिडेंट्स के रूप मे कोचिंग संस्थान से जुड़ कर प्लस टू करते है.
- स्कूल की होती है मोटी कमाई
फ्लाइंग कैंडिडेंट के रूप में नामांकित छात्रों से स्कूल और कोचिंग संस्थान दोनों की ही मोटी कमाई होती हैं. स्कूल और कोचिंग संस्थान के बीच समझौता होता है. एक कोचिंग संस्थान से मिली जानकारी के अनुसार स्कूल से पहले ही एग्रीमेंट हो जाता है. जब कोई छात्र नामांकन लेने आता है तो छात्र से फी के नाम पर मोटी रकम (चार से पांच लाख तक भी) ली जाती है. इसमें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ प्लस टू का सर्टिफिकेट भी देना शामिल होता है. छात्र से जो मोटी रकम ली जाती है. उसका 40 से 45 फीसदी रकम स्कूल को जाता है. इसके अलावा बांकी रकम कोचिंग संस्थान वाले अपने पास रखते है. जब रिजल्ट की घोषणा होती है तो कोचिंग संस्थान अपना नाम कमा लेते है.
- दो तरह से नामांकन लेते है छात्र
पटना में प्लस टू की पढ़ाई के लिए छात्र दो तरह से नामांकन लेते है. एक तो रेगूलर छात्र के रूप में सीधे किसी स्कूल से जुड़े होते हैं. स्कूल में उनका बकायदा नामांकन होता है. उन्हें 75 परसेंट क्लासेज पूरी करनी होती है. वहीं दूसरे केटेगरी में वो छात्र आते है तो सीधे स्कूल से नहीं जुड़ कर कोचिंग संस्थान के माध्यम से जुड़े होते हैं. ऐसे छात्र को स्कूल में नियमित रूप से क्लासेज नहीं करना होता है. उनके 75 परसेंट क्लासेज करने पर बाध्यता नहीं होती है. ये छात्र अपना पूरा समय कोचिंग के क्लास के लिए देते है. प्लस टू की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की भी तैयारी करते है. फ्लाइंग कैंडिडेंट्स के रूप में ये छात्र मात्र प्लस टू के सर्टिफिकेट लेने के लिए नामांकन ले कर जुड़े होते हैं.
- दो साल पहले सीबीएसइ से कोचिंग संस्थान बंद करने का दिया था आदेश
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को यह आदेश दिया था कि कोई भी कमर्शियल काम स्कूल परिसर में नहीं किया जा सकता है. ऐसे मे कोई भी स्कूल कैंपस में ना तो दुकाने चल सकती है और ना ही कोचिंग संस्थान आदि चला सकते है . ऐसे में अब स्कूल बाहर चल रहे कोचिंग संस्थान से जुड़ कर छात्रों को प्लस टू का सर्टिफिकेट देते है. एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार हर साल 200 छात्रों का नामांकन कोचिंग संस्थान के माध्यम से किया जाता है. ऐसे में छात्र स्कूल में क्लास नहीं करते है, बस वो परीक्षा का फार्म भरते है और परीक्षा देते है.

No comments:

Post a Comment