Saturday, June 20, 2015

दूसरे स्कूल में फार्म भरवाना पड़ सकता है महंगा

दूसरे स्कूल में फार्म भरवाना पड़ सकता है महंगा

- सीबीएसइ ने वेबसाइट पर डाला नोटिस
- एलओसी में शामिल स्टूडेंट्स ही केवल भर सकते है परीक्षा फार्म
संवाददाता, पटना
किसी भी स्कूल के लिए अब किसी दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का फार्म भरवाना और किसी स्टूडेंट्स के लिए किसी दूसरे स्कूल से फार्म भरना अब महंगा पर सकता हैं. क्योंकि सीबीएसइ अब ऐसे स्टूडेंट्स को बाहर का रास्ता दिखायेगी जो किसी दूसरे स्कूल से फार्म भर कर बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे. हाल के कई सालों में हुई घटना के आधार पर सीबीएसइ ने स्कूलों को सचेत करते हुए कहा है कि इस तरह की हरकतों से बाज आयें. क्योंकि ऐसे किसी भी स्कूल को माफ नहीं किया जायेगा जो डी-एफिलिएटेड स्कूल के स्टूडेंट्स का परीक्षा फार्म भरवायेंगे. उन तमाम स्कूलों पर सीबीएसइ अब नजर होगी जो इस तरह के कामों में भी शामिल होते है. ज्ञात हो कि पटना में कई ऐसे स्कूल का रैकेट चलता हैं जो दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का 10वीं और 12वीं का परीक्षा फार्म भरवा कर अपनी मोटी कमाई करते है. ऐसे में स्टूडेंट्स का दो साल भी बरबाद हो जाता हैं और स्टूडेंट्स को रिजल्ट भी नहीं मिलता है.
- एलओसी वाले ही होंगे सीबीएसइ के स्टूडेंट्स
सीबीएसइ ने स्कूलो को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जो स्टूडेंट्स एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) में शामिल होंगे वहीं उस स्कूल से परीक्षा फार्म भर सकते हैं. बोर्ड के अनुसार एलओसी में वहीं स्टूडेट्स शामिल होंगे जो उसी स्कूल में 9वीं की पढ़ाई करेंगे. उसी तरह से 12वीं बोर्ड की परीक्षा फार्म के एलओसी में भी वहीं स्कूल शामिल होंगे तो 11वीं और 12वी की पढ़ाई उसी स्कूल से किया हों. अब सीबीएसइ स्कूलों से एटेंडेंस सीट भी लेने के बारे में सोच रहा हैं.
- एलओसी से पकड़ में आ जाते स्टूडेंट्स
पिछले दो सालों से सीबीएसइ एलओसी फार्म हर स्टूडेंट्स का भरवा रही है. ऐसे में किसी भी स्टूडेंट्स को आसानी से सीबीएसइ पकड़ लेती है जो किसी दूसरे स्कूल से परीक्षा फार्म भर कर 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शामिल हो जाते है. सीबीएसइ के पास 9वीं में करवाये गये रजिस्ट्रेशन के तमाम डाटा मौजूद रहता है. ऐसे में रजिस्ट्रेशन में शामिल स्टूडेंट्स का संख्या और उनके नाम और परीक्षा फार्म के समय भराये गये एलओसी में शामिल स्टूडेंट्स की संख्या और नाम का मिलान होता है. जो स्टूडेंट्स बाहर के होते हैं. उसे आसानी से पकड़ में आ जाते हैं. क्योकि सीबीएसइ के पास तो उसी स्कूल के स्टूडेंट्स का रिकार्ड होता है बोर्ड से एफिलिएयेडेट होते हैं.
- चार बार भराया जाता है एलओसी फार्म
सीबीएसइ के नये रूल्स के अनुसार एक स्टूडेंट्स को चार बार एलओसी फार्म भराया जाता है. पहली बार 9वीं के रजिस्ट्रेशन के समय और दूसरी बार 10वीं के परीक्षा फार्म भराने के समय एलओसी भराया जाता है. उसके बार 11वीं के रजिस्ट्रेशन के समय एलओसी फार्म भराया जाता है. इसके बाद 12वीं बोर्ड में शामिल होने के लिए परीक्षा फार्म भराया जाता है. 9वीं रजिस्ट्रेशन के समय ही हर स्कूल से लिस्ट सीबीएसइ के पास पहुंच जाता हैं. इसी लिस्ट के आधार पर 10वीं और 12वीं बोर्ड के समय सीबीएसइ परीक्षा फार्म भरवाती है.
- हर साल स्कूल आता हैं पकड़ में
इस साल एवीएन इंगलिश स्कूल के 176 स्टूडेंट्स 10वीं बोर्ड के रिजल्ट में फंस गये, उसी तरह से पिछले साल 2014 में एस रजा हाई स्कूल में इसी तरह की घटना घटी थी. काफी संख्या में स्टूडेंट्स का रिजल्ट रूक गया था. सीबीएसइ के मान्यता लेने के बाद भी स्कूल ऐसी हरकतों से बाज नहीं आते है. अपने स्कूल के अलावा दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का भी परीक्षा फार्म भरवा लेते हैं. 201


कोट
एलओसी में जो स्टूडेंट्स शामिल होते है. वहीं सीबीएसइ के पास रिकार्ड में शामिल होते है. कई बार स्कूल दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का भी परीक्षा फार्म भरवा देते है. ऐसे में उन स्टूडेंट्स के बारे में सीबीएसइ को कोई जानकारी नहीं होती है. यहीं स्टूडेंट्स का रिजल्ट पेंडिंग हो जाता हैं.
रश्मि त्रिपाठी, रीजनल ऑफिसर, सीबीएसइ 

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