Thursday, June 11, 2015

सीबीएसइ मान्यता करता रदद, दुबारा मान्यता देने की नहीं करता जांच

सीबीएसइ मान्यता करता रदद, दुबारा मान्यता देने की नहीं करता जांच

- सीबीएसइ के एफिलिएशन में आसानी से शामिल हो जाते है डी-एफिलिएटेड स्कूल
- ठगे जाते है अभिभावक
संवाददाता, पटना
किस स्कूल को सीबीएसइ की मान्यता हैं और किस स्कूल को सीबीएसइ की मान्यता नहीं है. इसे समझना पटना के स्कूलों के संदर्भ में टेढ़ी खीर है. अभिभावक स्कूल के पास जाते है तो पता चलता है कि स्कूल एफिलिएशन वाले लिस्ट में शामिल है. लेकिन जांच करने पर जानकारी मिलती है कि अभी फिलहाल नहीं है, लेकिन स्कूल ने अप्लाई कर रखा है, जल्द ही स्कूल को एफिलिएशन मिल जायेगा. सीबीएसइ के नाम पर स्कूलों का मान्यता लेने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है. सीबीएसइ मान्यता तो रदद कर देती है, लेकिन इसके बाद स्कूल किस तरह से दुबारा सीबीएसइ की मान्यता लेता है, इसकी जांच सीबीएसइ नहीं करती है. जिन नॉम्स को आधार बना कर सीबीएसइ स्कूल को डी एफिलिएट करता है. दुबारा एफिलिएशन मिलने पर उन नॉम्स की जांच भी नहीं करता और मान्यता दे देती है.
- नये सत्र की शुरुआत से शुरू हो जाता स्कूल
स्कूल को मान्यता मिला है या नहीं इसकी जानकारी अभिभावक को नहीं मिलता हैं. नये सत्र के शुरू होने पर स्कूल बस जैसे भी हो नामांकन के लिए पूरा पैतरा लगा देता है. कई स्कूल तो दूसरे स्कूल के छात्रों का नामांकन भी अपने यहां ले लेते है. ऐसे में पैसे का लेन देन होता है. स्टूडेंट्स पढ़ते है किसी और स्कूल में लेकिन जब 10वीं बोर्ड का परीक्षा फार्म भराया जाता है तो स्टूडेंट्स किसी और स्कूल से परीक्षा फार्म भरते है. ऐसे स्टूडेंट्स का रिजल्ट पेंडिंग हो जाता है.
- डी-एफिलिएटेड स्कूल को बोर्ड नहीं कर पाता चिन्हिंत
कौन सा स्कूल डी एफिलिएट हो चुका है. उसे सीबीएसइ की मान्यता प्राप्त नहीं है. इसे अधिकांश अभिभावक नहीं समझ पाते है. स्कूल की मान्यता के बारें  जानना का एक मात्र माध्यम सीबीएसइ का वेबसाइट है. लेकिन अधिकांश अभिभावक को इसकी जानकारी नहीं होने से वो बोर्ड के वेबसाइट तक नहीं पहुंच पाते है. ऐसे में नामांकन लेने जाने पर आसानी से अभिभावक ठगी का शिकार हो जाते हैं. सीबीएसइ जिन स्कूलों को डी एफिलिएट करता है तो उस स्कूल का नाम, एड्रेस, एफिलिएशन नंबर के साथ ¨प्रंसिपल का नाम अपने वेबसाइट  पर जारी करता है. इसके अलावा सीबीएसइ लोकल लेवल पर कुछ नहीं करती है. स्कूल एफिलिएशन जाने के बाद भी खुलेआम सीबीएसइ के नाम का यूज करती हैं. ऐसे में सीबीएसइ ऐसे स्कूल को कोई सिंबल नहीं देती है जिससे अभिभावक आसानी से ऐसे स्कूल को पकड़ सकें.
- किस आधार पर मिलता है दुबारा मान्यता
2014 में सीबीएसइ ने पटना के 12 स्कूलों की मान्यता खत्म कर दिया था. 2015 में वहीं 12 स्कूलों में कई स्कूलों को दुबारा मान्यता सीबीएसइ ने दे दिया है. ऐसे स्कूल को किस आधार पर दुबारा सीबीएसइ मान्यता देता है. यह अभिभावक नहीं समझ पाते है. क्योंकि इन्फ्रास्ट्रर, टीचर्स की कमी आदि जिस आधार पर इन स्कूलों की मान्यता जाती है, उसे वो स्कूल एक साल में कर भी नहीं पाये हैं और उन्हें दुबारा सीबीएसइ ने मान्यता दे दिया है.

इन बातों पर ठगे जाते हैं अभिभावक
- अप्लाई कर दिया है. जल्द ही मिल जायेगा एफिलिएशन
- छह महीने में मिल जायेगा एफिलिएशन
- एलओसी में इस स्कूल के बच्चे को शामिल किया जा रहा है
- मार्च में एफिलिएशन जाने के बाद भी स्कूल इस बात की जानकारी अभिभावक को नहीं देते है
- अगस्त सितंबर में स्कूल अपने स्तर से बोर्ड परीक्षा का फार्म भी भरवा देते है
- प्रैक्टिकल की परीक्षा भी स्कूल में ले ली जाती हैं
- कई बार तो स्कूल अपने स्तर से एडमिट कार्ड भी तैयार कर लेता हैं

एफिलिएशन मिलने का होता है समय
- सीबीएसइ के एफिलिएशन मिलने के लिए पहले आवेदन करना होता है
- आवेदन के लिए 30 जून तक का ही समय होता है
- अगर 30 जून से 30 जुलाई तक मान्यता नहीं मिला तो ऐसे स्कूल को पूरे एक साल तक मान्यता नहीं मिल सकेगा
- जुलाई के बाद अगस्त और सितंबर में बोर्ड परीक्षा का फार्म भराया जाता है
- परीक्षा फार्म उसी स्कूल के छात्र भर पाते हैं जिस स्कूल के छात्र सीबीएसइ से रजिस्टर्ड होते हैं. ऐसे में छात्रों को एलओसी में शामिल किये जाना शुरू किया गया है
- 2015 से उन्हीं छात्रों को परीक्षा देने का परमिशन मिला जिनका नाम एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) में होता हैं
- स्कूल का एफिलिएशन 31 मार्च के बाद खत्म होता है. ऐसे में स्कूल की जांच होनी चाहिए

कोट
सीबीएसइ की एफिलिएशन वाला सारा काम दिल्ली से होता है. किसी स्कूल का एफिलिएशन जाने से पहले सीबीएसइ की ओर से पूरी जांच की जाती है. जांच में गलत पाये जाने के बाद ही स्कूल का एफिलिएशन खत्म होता हैं. सीबीएसइ के नाम का ऐसे स्कूल यूज नहीं कर सकते है.
अरविंद कुमार मिश्र, सेक्शन ऑफिसर, सीबीएसइ पटना

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