Thursday, June 11, 2015

एफिलिएशन के नियम ताक पर, सीबीएसइ अब भी डीएवी पर है मेहरवान

एफिलिएशन के नियम ताक पर, सीबीएसइ अब भी डीएवी पर है मेहरवान

- सीबीएसइ के नाक के नीचे डीएवी में चलता नामांकन का खेल
- छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के बावजूद सीबीएसइ डीएवी पर हैं मेहरवान
 पटना
स्कूल को एक सेक्शन चलाने का सीबीएसइ ने मान्यता दी थी. लेकिन स्कूल में 10 सेक्शन के उपर चल रहा है . सीबीएसइ ने एक सेक्शन में 40 छात्रों के नामांकन का परमिशन दिया था, लेकिन डीएवी में एक सेक्शन में 40 के उपर छात्रों के नामांकन लिये जा रहे हैं. जिस स्कूल में स्टूडेंट्स पढ़ने जाते हैं, वहां से उन्हें से दूसरे स्कूल ले जाया जाता है. स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ खिलवाड़ डीएवी बीएसइबी में हर साल होता है. इसको शह देने में डीएवी के दूसरे ब्रांच भी शामिल है. इन तमाम बातों की जानकारी सीबीएसइ के पास हैं. लेकिन सीबीएसइ डीएवी के गलत कामों को सहयोग ही कर रहीं हैं. अभी डीएवी बीएसइबी की मान्यता चली गयी, लेकिन इसके बावजूद सीबीएसइ के परमिशन पर डीएवी बीएसइबी में 11वीं में नामांकन लिये जा रहे है. सीबीएसइ एफिलिएशन बाइलॉज के अनुसार मान्यता जाने वाले स्कूल में किसी भी सूरत में नया नामांकन नहीं हो सकता हैं. फिर किस आदेश पर डीएवी बीएसइबी के अलावा दूसरे ब्रांच में 9वीं और 11वी में नामांकन की प्रक्रिया चल रही हैं.
- एफिलिएशन जाने के बाद भी ले रहे नामांकन
सीबीएसइ के एफिलिएशन वाइ लॉज के अनुसार जब भी किसी स्कूल की मान्यता को सीबीएसइ खत्म करता है तो उसके बाद उस स्कूल में कोई नया नामांकन 9वीं और 11वीं में नहीं हो सकता है. लेकिन शायद यह डीएवी पर लागू नहीं होता है. 2014 मार्च में डीएवी खगौल का एफिलिएशन डयूरेशन खत्म हो गया था. इसके बाद 2015 मार्च में डीएवी बीएसइबी की 11वीं ंऔर 12वीं की मान्यता डयूरेशन खत्म होने के बाद सीबीएसइ ने अप्रैल में डीएवी बीएसइबी की मान्यता को पूरी तरह से खत्म कर दिया था. ऐसे में दोनो की डीएवी में 9वीं और 11वीं में नामांकन नहीं लिया जा सकता है. नये छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है. लेकिन इन दोनों की स्कूल में नये सत्र के लिए 9वीं और 11वीं दोनों की क्लास के लिए नामांकन लिये जा रहे है. इसके बावजूद सीबीएसइ कुछ नहीं कर पा रही हैं.
- चलता है हर साल पास फेल का खेल
डीएवी बीएसइबी में हर साल 11वी में नामांकन लेने के बाद छात्रों को बाद में फेल कर स्कूल से निकाल दिया जाता है. ऐसे में छात्रों से मोटी रकम भी ली जाती है और उन्हें पैसे भी नहीं लौटाये जाते हैं. इतना ही नहीं 11वीं में छात्रों को फेल कर 12वीं में परीक्षा फार्म भरवाने के नाम पर भी मोटी रकम ली जाती हैं. 2011 में सेंट कैंरेंस हाई स्कूल के 25 छात्रों को फेल कर दिया गया. जब अभिभावक टीसी लेने गये तो स्कूल प्रशासन ने 10वीं का रिजल्ट फर्जी होने का कारण बताया. इसके बाद अभिभावकों को टीसी भी नहीं दिया और स्टूडेंट्स को स्कूल कैंपस में ही काफी पिटाई भी किया. इसके अलावा छात्रो को हर साल फेल कर दिया जाता है. 2015 सत्र के 12वीं बोर्ड की परीक्षा देने के नाम पर 88 छात्रो को स्कूल प्रशासन ने फेल कर दिया. इसके बाद इन छात्रों से मोटी रकम ली गयी. आज तक इन 88 छात्रों के नाम और पता का खुलासा सीबीएसइ के पास नहीं हो पाया है. जानकारी के मुताबिक इस 88 छात्रों में लगभग 30 छात्र ऐसे हैं जो डीएवी बीएसइबी के नहीं है . लेकिन इन्होंने डीएवी बीएसइबी से परीक्षा फार्म भरा था.
- चार डीएवी के नाम पर चल रहा 12 डीएवी
पटना में डीएवी के चार ब्रांच को ही सीबीएसइ ने मान्यता दिया हुआ है. लेकिन शहर में लगभग 12 डीएवी चलाये जा रहे है. इन ब्रांच डीएवी में क्लास वन से 8वीं तक छात्र पढ़ते है और 9वीं में इन स्कूलों के छात्र मान्यता प्राप्त चार डीएवी में शिफ्ट कर दिये जाते है. इससे हर डीएवी में छात्रों की संख्या दुगुनी से तीन गुणी तक बढ़ जाती है. हर एरिया में डीएवी सीबीएसइ के नाम पर चल रहा है. सीबीएसइ के इन तमाम जानकारी होने के बावजूद इन डीएवी पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है. ये डीएवी हर साल अभिभावकों को ठग कर नामांकन लेती है. सही बातों की जानकारी अभिभावकों को बाद में पता चलता है.
- फर्जी टीचर्स से चलता हैं स्कूल
डीएवी के अधिकांश ब्रांच में फर्जी टीचर्स से ही काम चलाया जाता हैं. इन टीचर्स के पास ना तो पीजीटी और ना ही बीएड की ही डिग्री है. लेकिन ये टीचर्स सीनियर क्लास तक के स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे है. अधिकांश टीचर्स अनटेंड हैं. टीचर्स अप्वाइंटमेंट में ना तो डिग्री देखी जाती है और ना ही इंटरव्यू ही लिया जाता है. बस पैसे और पहचान के बल पर टीचर्स को रखा जाता हैं. डीएवी में फर्जी टीचर्स का रैकेट लंबा हैं. सीबीएसइ की जानकारी में ये है. लेकिन अभी तक इन टीचर्स पर कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है.
- एक टीचर पढ़ाते हैं कई डीएवी में
डीएवी में जो भी टीचर्स पढ़ाते है, उनका नाम एक डीएवी में नहीं बल्कि कई डीएवी में चलता है. एक ही टीचर एक समय में कई डीएवी में रेगूलर टीचर के रूप में कार्यरत है. जो टीचर्स डीएवी बीएसइबी के टीचर हैं वहीं डीएवी इंद्रपूरी, डीएवी वाल्मी, डीएवी हाजीपुर आदि में पढ़ा रहें है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार एक टीचर एक ही समय में कई डीएवी में पढ़ा रहें है. ये टीचर दोनो ही डीएवी से सैलरी भी ले रहे है. यह खेल कोई एक साल का नहीं बल्कि कई सालो से चल रहा है. सीबीएसइ के नॉलेज में इसकी जानकारी है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है.
- धर्म के नाम पर लिया जाता हैं फी
डीएवी बीएसइबी के  अलावा तमाम डीएवी में धर्म के नाम पर स्टूडेंट्स से पैसे लिये जाते है. डीएवी बीएसइबी बिहार सरकार को प्रोजेक्ट स्कूल है. यहां पर बीएसइबी कर्मचारियों के बच्चों का नामांकन लिया जाता है. इसके बाद ही बाहर के बच्चे का नामांकन होता हैं. लेकिन इस स्कूल में भी धर्म के नाम पर पैसे लिये जाते है. इतना ही नहीं बीएसइबी के स्टूडेंट्स से बिजली के नाम पर भी साल में फी ली जाती है. सीबीएसइ की माने तो कोई भी स्कूल धर्म, जाति के नाम पर स्टूडेंट्स से पैसे नहीं लिया जा सकता है.
-  मेंटल और फिजिकल हेरेसमेंट से जुझते है स्टूडेंट्स
आये दिन डीएवी बीएसइबी से शिकायत स्थानीय शास्त्रीनगर थाना में दर्ज होती रही हैं. इसमें अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि छात्रों पर स्कूल प्रशासन मेंटल और फिजिकल हेरेसमेंट करता है. इससे छात्र स्कूल जाना तक छोड़ देते है. सेक्युअल हरेसमेंट की भी घटना स्कूल कैंपस में कई बार हो चुका है. ब्लैकमेंलिंग की घटना भी कई शास्त्रीनगर थाना में दर्ज हो चुकी है. ये सारे प्रूव होने के बाद भी इस स्कूल पर कोई कार्रवाई सीबीएसइ की ओर से नहीं किया गया है. स्थानीय प्रशासन भी इस मामले में कुछ नहीं कर पायी है.
- फर्जी डिग्री पर पूर्व प्रिंसिपल ने ले लिया सीबीएसइ अवार्ड
बीएड की डिग्री फर्जी, पीएचडी की डिग्री फर्जी लेकर डीएवी बीएसइबी के पूर्व प्राचार्य रामानुज प्रसाद ने सीबीएसइ से बेस्ट टीचर का अवार्ड भी 2005 में ले लिया था. पूर्व प्राचार्य से यह अवार्ड फर्जी तरीके से लिया था. इसकी तमाम जानकारी सीबीएसइ के पास है. लेकिन सीबीएसइ इस मामले में अभी तक कुछ नहीं कर पायी है. सीबीएसइ की ओर से हर साल बेस्ट टीचर का अवार्ड उन्हें दिया जाता है जो टीचिंग लाइन में कुछ अच्छा और बेहतर किया हों. लेकिन पूर्व प्राचार्य रामानुज प्रसाद के बारे में जानकारी होते हुए भी सीबीएसइ अभी तक कुछ नहीं कर पायी हैं.
- रेगूलर टीचर रहते हुए कर लिया बीएड
फर्जी बीएड की डिग्री लेने वाले कोई पूर्व प्राचार्य रामानुज प्रसाद ही नहीं हैं बल्कि डीएवी के कई टीचर हैं जिनके पास फर्जी बीएड की डिग्री हैं. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार डीएवी बीएसइबी के लगभग 200 टीचर्स स्कूल में पढ़ाते हुए बीएड की डिग्री भी ले लिया है. एक तरफ टीचर रेगूलर स्टूडेंट्स होते हुए बीएड की डिग्री भी ले रहे थें और साथ टीचर के रूप में डीएवी में भी पढ़ा रहे थे. ऐसे में डीएवी से उन्हें सैलरी भी मिली रही.

कोट
सीबीएसइ के एफिलिएशन बाइलॉज के अनुसार जब किसी स्कूल की मान्यता चली जाती है तो कोई नया नामांकन नहीं हो सकता है. उस स्कूल में पढ़ रहे 9वीं और 11वीं के उन स्टूडेट्स को ही सीबीएसइ 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा में बैठने का आदेश देती है जो सीबीएसइ से रजिस्ट्र्ड हो जाते है. बांकी किसी भी स्टूडेंट्स के नामांकन को लेकर सीबीएसइ उतरदायी नहीं होता है .
अरविंद कुमार मिश्र, सेक्शन ऑफिसर, सीबीएसइ पटना रीजन

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