पटना के कई स्कूल चला रहे पैरलर सीबीएसइ का बं्राच
- मान्यता प्राप्त हैं नहीं और दिला रहे हर साल सीबीएसइ के नाम पर बोर्ड परीक्षा
- हर साल स्कूलों में अभिभावकों का होता है हंगामा
संवाददाता, पटना
एक तरफ सीबीएसइ स्कूलों की मान्यता खत्म कर रहा है . वहीं दूसरी ओर वहीं स्कूल (डी एफिलिएटेड) सीबीएसइ के नाम पर हर साल 10वीं बोर्ड की परीक्षा भी अपने स्तर से ले रहे है. दो सालों तक स्कूल अपनी ओर से सारी प्रक्रिया भी करता है. एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) तैयार होती है. बोर्ड का रजिस्ट्रेशन भी होता है. 9वीं और 10वीं में एसए (समेटिव असेसमेंट) वन और एसए-टू की परीक्षाएं भी लेती है. 10वीं बोर्ड का परीक्षा फार्म भी सीबीएसइ के नाम पर भराये जाते है. स्कूल में परीक्षाएं भी आयोजित की जाती है. एडमिट कार्ड भी स्कूल की ओर से सीबीएसइ के नाम पर जारी किया जाता है. सीबीएसइ के पैरलर में सीबीएसइ के नाम पर खुद स्कूल बोर्ड की सारी प्रक्रिया पूरी करता हैं. स्कूल के इस फर्जी गिरी की जानकारी स्टूडेंट्स को तब मिलता है जब बोर्ड का रिजल्ट आने के बाद स्टूडेंट्स को सीबीएसइ के वेबसाइट पर रिजल्ट प्राप्त नहीं होता हैं.
- सीबीएसइ के डेट सीट के अनुसार चलते हैं ये स्कूल
सीबीएसइ भले डी एफिलिएटेड स्कूल को अपने लिस्ट से बाहर कर देता हैं. इन स्कूलों की कोई एक्टिविटी सीबीएसइ द्वारा संचालित नहीं होती है. इसके बावजूद डी एफिलिएटेड स्कूल सीबीएसइ के डेट सीट के अनुसार ही सारा काम करते है. स्कूल पकड़ में ना आ जायें, इस कारण सीबीएसइ जब जब जिन चीजों के लिए डेट सीट निकालता है, उसी के अनुसार ये स्कूल भी स्टूडेंट्स का सारा काम करते है. परीक्षा फार्म भराने से लेकर एडमिट कार्ड तक स्कूल अपने स्तर से जारी कर देता है. स्टूडेंट्स को इसकी भनक तक नहीं लगती है, क्योंकि स्कूल में ही बोर्ड परीक्षा ली जाती है. स्कूल प्रश्न पत्र भी खुद ही तैयार कर लेता है. क्योंकि सीबीएसइ के सूत्रों के मुताबिक बोर्ड उन्हीं स्कूलों को प्रश्न पत्र देता है जिस स्कूल का कोड सीबीएसइ के वेबसाइट से जुड़ा होता है.
- स्कूल बोर्ड होने से अधिक ठगे जा रहे स्टूडेट्स
सीबीएसइ स्कूलों में जब से बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता को खत्म कर ग्रेडिंग सिस्टम किया गया है. तब से स्टूडेंट्स स्कूल के ठगी के चक्कर में अधिक फंस रहे है. सीबीएसइ के सूत्रों की माने तो पहले 10वीं बोर्ड की परीक्षा सीबीएसइ खुद लेती थी. परीक्षा फार्म भराने के बाद बोर्ड के द्वारा एडमिट कार्ड दिया जाता था. प्रश्न पत्र भी बोर्ड की स्कूल को उनके कोड के अनुसार भेजती थी. इसके बाद बोर्ड की परीक्षा के लिए दूसरे स्कूल में परीक्षा सेंटर बनाया जाता था. लेकिन अब ऐसा नहीं होता है. सीबीएसइ ने 2014 तक स्कूलों को प्रश्न पत्र खुद भी तैयार करने की आजादी दे रही थी. लेकिन 2015 से इसे बंद कर दिया गया. इसके अलावा बोर्ड की परीक्षा स्कूल बेस्ड होने से अपने ही स्कूल में ली जाती है.
- मान्यता खत्म करने के बाद सीबीएसइ नहीं करता कोई जांच
सीबीएसइ हर साल स्कूलों की मान्यता उनके इन्फ्रास्क्चर को देखते हुए खत्म करती है. एक बार मान्यता खत्म होने के बाद सीबीएसइ उस स्कूल पर ध्यान नहीं देता है. पटना में कई ऐसे स्कूल है जिनकी मान्यता पिछले तीन सालों से सीबीएसइ ने खत्म कर रखा है. इसके बावजूद ये स्कूल सीबीएसइ के नाम का इस्तेमाल कर 9वीं और 10वीं की पढ़ाई करवाते है. और बोर्ड परीक्षा भी इन स्कूलों में आयोजित होता हैं. सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार इस तरह के स्कूल पर सीबीएसइ दिल्ली से कार्रवाई हो सकती है.
- 2014 में हुआ था एस रजा हाई स्कूल में हंगामा
बोर्ड परीक्षा के बाद स्टूडेंट्स को रिजल्ट नहीं मिलने की घटना कोई नया नहीं हैं. हर साल पटना के कई स्कूलों में इस तरह की घटना घटती है. ज्ञात हो कि एस रजा हाई स्कूल का एफिलिएशन 2012 में सीबीएसइ ने समाप्त कर दिया था. 2014 में जब 10वीं बोर्ड का रिजल्ट आया तो एस रजा हाई स्कूल के स्टूडेंट्स को रिजल्ट प्राप्त नहीं हुआ. स्कूल प्रशासन से अभिभावकों को इस बात की जानकारी नही दिया कि स्कूल की मान्यता बोर्ड ने समाप्त कर दिया है. रिजल्ट नहीं मिलने के बाद अभिभावकों ने स्कूल मे जमकर हंगामा किया. कई दिनों तक अभिभावकों ने स्कूल का चक्कर भी लगाया, लेकिन उन्हें रिजल्ट नहीं मिला. बाद में इन स्टूडेंट्स ने प्राइवेट कैंडिडेंट्स के तौर पर अगले साल बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए.
स्कूल में एडमिशन करवाने से पहले इन बातों पर अभिभावकों देना चाहिए ध्यान
अभिभावक और स्टूडेंट्स को स्कूल में नामांकन लेने से पहले स्कूल की कुछ चीजों की जांच करनी चाहिए. इस जांच के आधार पर स्कूल के सही और गलत होने का पता चल जायेगा. अभिभावक को 9वीं या 11वीं में नामांकन करवाने से पहले इन चीजों की जांच अपने स्तर से करनी चाहिए
- सीबीएसइ के एफिलिएशन वाले वेबसाइट पर जाकर स्कूल का नाम, स्कूल का कोड और एफिलिएशन कोड देकर जांच किया जा सकता हैं
- स्कूल की एक्टिविटी उसी तरह से हो रही है या नहीं जो सीबीएसइ से एफिलिएटेड स्कूल के साथ होता है
- समय-समय पर स्कूल का एफिलिएशन कोड की जांच करें
- कोई भी एग्जाम हो तो स्कूल से पूरी जानकारी ले
- स्कूल द्वारा कोई नोटिस दिये जाने के बाद सीबीएसइ के वेबसाइट पर जाकर इसकी पूरी जानकारी ले
- सीबीएसइ सारा काम ऑन लाइन करवाता है. स्कूल में मैनुअल करने के बाद स्कूल से इसकी जानकारी ले
- एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) की जांच करें
- सीबीएसइ के एलओसी में स्कूल और स्टूडेंट्स का नाम है या नहीं इसकी पूरी पड़ताल करे ं
सीबीएसइ के रिकार्ड में होता स्टूडेंट्स संबंधित ये जानकारी
- बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या
- बोर्ड परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या
- 9वीं और 10वीं में एलओस का पूरा डिटेल्स
- पीएसए (प्राब्लम सॉल्विंग असेसमेंट) का रिजल्ट
- एसए वन और एसए टू की पूरी जानकारी
- एफए (फारमेटिव असेसमेंट) वन, एफए-टू , एफए-थ्री का पूरा डिटेल्स
- परीक्षा फार्म भराये जाने के लिए फार्म की हार्ड कॉपी
नोट - सीबीएसइ को ये सारी जानकारी जब तक स्कूल उपलब्ध नहीं करवाते हैं, तब तक बोर्ड आगे की प्रक्रिया नहीं करता हैं.
कोट
कोई भी डी-एफिलिएटेड स्कूल सीबीएसइ के नाम और लोगो का इस्तेमाल नहीं कर सकता है. ऐसे में जो भी स्कूल इस तरह की हरकतें करके अभिभावकों को ठगता है तो ऐसे स्कूल पर बोर्ड की ओर से एफआइआर की जा सकती है. जिसे बोर्ड की मान्यता प्राप्त है वहीं स्कूल सीबीएसइ के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर सकता है.
जोसफ इमैन्युअल, सचिव, सीबीएसइ दिल्ली
- मान्यता प्राप्त हैं नहीं और दिला रहे हर साल सीबीएसइ के नाम पर बोर्ड परीक्षा
- हर साल स्कूलों में अभिभावकों का होता है हंगामा
संवाददाता, पटना
एक तरफ सीबीएसइ स्कूलों की मान्यता खत्म कर रहा है . वहीं दूसरी ओर वहीं स्कूल (डी एफिलिएटेड) सीबीएसइ के नाम पर हर साल 10वीं बोर्ड की परीक्षा भी अपने स्तर से ले रहे है. दो सालों तक स्कूल अपनी ओर से सारी प्रक्रिया भी करता है. एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) तैयार होती है. बोर्ड का रजिस्ट्रेशन भी होता है. 9वीं और 10वीं में एसए (समेटिव असेसमेंट) वन और एसए-टू की परीक्षाएं भी लेती है. 10वीं बोर्ड का परीक्षा फार्म भी सीबीएसइ के नाम पर भराये जाते है. स्कूल में परीक्षाएं भी आयोजित की जाती है. एडमिट कार्ड भी स्कूल की ओर से सीबीएसइ के नाम पर जारी किया जाता है. सीबीएसइ के पैरलर में सीबीएसइ के नाम पर खुद स्कूल बोर्ड की सारी प्रक्रिया पूरी करता हैं. स्कूल के इस फर्जी गिरी की जानकारी स्टूडेंट्स को तब मिलता है जब बोर्ड का रिजल्ट आने के बाद स्टूडेंट्स को सीबीएसइ के वेबसाइट पर रिजल्ट प्राप्त नहीं होता हैं.
- सीबीएसइ के डेट सीट के अनुसार चलते हैं ये स्कूल
सीबीएसइ भले डी एफिलिएटेड स्कूल को अपने लिस्ट से बाहर कर देता हैं. इन स्कूलों की कोई एक्टिविटी सीबीएसइ द्वारा संचालित नहीं होती है. इसके बावजूद डी एफिलिएटेड स्कूल सीबीएसइ के डेट सीट के अनुसार ही सारा काम करते है. स्कूल पकड़ में ना आ जायें, इस कारण सीबीएसइ जब जब जिन चीजों के लिए डेट सीट निकालता है, उसी के अनुसार ये स्कूल भी स्टूडेंट्स का सारा काम करते है. परीक्षा फार्म भराने से लेकर एडमिट कार्ड तक स्कूल अपने स्तर से जारी कर देता है. स्टूडेंट्स को इसकी भनक तक नहीं लगती है, क्योंकि स्कूल में ही बोर्ड परीक्षा ली जाती है. स्कूल प्रश्न पत्र भी खुद ही तैयार कर लेता है. क्योंकि सीबीएसइ के सूत्रों के मुताबिक बोर्ड उन्हीं स्कूलों को प्रश्न पत्र देता है जिस स्कूल का कोड सीबीएसइ के वेबसाइट से जुड़ा होता है.
- स्कूल बोर्ड होने से अधिक ठगे जा रहे स्टूडेट्स
सीबीएसइ स्कूलों में जब से बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता को खत्म कर ग्रेडिंग सिस्टम किया गया है. तब से स्टूडेंट्स स्कूल के ठगी के चक्कर में अधिक फंस रहे है. सीबीएसइ के सूत्रों की माने तो पहले 10वीं बोर्ड की परीक्षा सीबीएसइ खुद लेती थी. परीक्षा फार्म भराने के बाद बोर्ड के द्वारा एडमिट कार्ड दिया जाता था. प्रश्न पत्र भी बोर्ड की स्कूल को उनके कोड के अनुसार भेजती थी. इसके बाद बोर्ड की परीक्षा के लिए दूसरे स्कूल में परीक्षा सेंटर बनाया जाता था. लेकिन अब ऐसा नहीं होता है. सीबीएसइ ने 2014 तक स्कूलों को प्रश्न पत्र खुद भी तैयार करने की आजादी दे रही थी. लेकिन 2015 से इसे बंद कर दिया गया. इसके अलावा बोर्ड की परीक्षा स्कूल बेस्ड होने से अपने ही स्कूल में ली जाती है.
- मान्यता खत्म करने के बाद सीबीएसइ नहीं करता कोई जांच
सीबीएसइ हर साल स्कूलों की मान्यता उनके इन्फ्रास्क्चर को देखते हुए खत्म करती है. एक बार मान्यता खत्म होने के बाद सीबीएसइ उस स्कूल पर ध्यान नहीं देता है. पटना में कई ऐसे स्कूल है जिनकी मान्यता पिछले तीन सालों से सीबीएसइ ने खत्म कर रखा है. इसके बावजूद ये स्कूल सीबीएसइ के नाम का इस्तेमाल कर 9वीं और 10वीं की पढ़ाई करवाते है. और बोर्ड परीक्षा भी इन स्कूलों में आयोजित होता हैं. सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार इस तरह के स्कूल पर सीबीएसइ दिल्ली से कार्रवाई हो सकती है.
- 2014 में हुआ था एस रजा हाई स्कूल में हंगामा
बोर्ड परीक्षा के बाद स्टूडेंट्स को रिजल्ट नहीं मिलने की घटना कोई नया नहीं हैं. हर साल पटना के कई स्कूलों में इस तरह की घटना घटती है. ज्ञात हो कि एस रजा हाई स्कूल का एफिलिएशन 2012 में सीबीएसइ ने समाप्त कर दिया था. 2014 में जब 10वीं बोर्ड का रिजल्ट आया तो एस रजा हाई स्कूल के स्टूडेंट्स को रिजल्ट प्राप्त नहीं हुआ. स्कूल प्रशासन से अभिभावकों को इस बात की जानकारी नही दिया कि स्कूल की मान्यता बोर्ड ने समाप्त कर दिया है. रिजल्ट नहीं मिलने के बाद अभिभावकों ने स्कूल मे जमकर हंगामा किया. कई दिनों तक अभिभावकों ने स्कूल का चक्कर भी लगाया, लेकिन उन्हें रिजल्ट नहीं मिला. बाद में इन स्टूडेंट्स ने प्राइवेट कैंडिडेंट्स के तौर पर अगले साल बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए.
स्कूल में एडमिशन करवाने से पहले इन बातों पर अभिभावकों देना चाहिए ध्यान
अभिभावक और स्टूडेंट्स को स्कूल में नामांकन लेने से पहले स्कूल की कुछ चीजों की जांच करनी चाहिए. इस जांच के आधार पर स्कूल के सही और गलत होने का पता चल जायेगा. अभिभावक को 9वीं या 11वीं में नामांकन करवाने से पहले इन चीजों की जांच अपने स्तर से करनी चाहिए
- सीबीएसइ के एफिलिएशन वाले वेबसाइट पर जाकर स्कूल का नाम, स्कूल का कोड और एफिलिएशन कोड देकर जांच किया जा सकता हैं
- स्कूल की एक्टिविटी उसी तरह से हो रही है या नहीं जो सीबीएसइ से एफिलिएटेड स्कूल के साथ होता है
- समय-समय पर स्कूल का एफिलिएशन कोड की जांच करें
- कोई भी एग्जाम हो तो स्कूल से पूरी जानकारी ले
- स्कूल द्वारा कोई नोटिस दिये जाने के बाद सीबीएसइ के वेबसाइट पर जाकर इसकी पूरी जानकारी ले
- सीबीएसइ सारा काम ऑन लाइन करवाता है. स्कूल में मैनुअल करने के बाद स्कूल से इसकी जानकारी ले
- एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) की जांच करें
- सीबीएसइ के एलओसी में स्कूल और स्टूडेंट्स का नाम है या नहीं इसकी पूरी पड़ताल करे ं
सीबीएसइ के रिकार्ड में होता स्टूडेंट्स संबंधित ये जानकारी
- बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या
- बोर्ड परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या
- 9वीं और 10वीं में एलओस का पूरा डिटेल्स
- पीएसए (प्राब्लम सॉल्विंग असेसमेंट) का रिजल्ट
- एसए वन और एसए टू की पूरी जानकारी
- एफए (फारमेटिव असेसमेंट) वन, एफए-टू , एफए-थ्री का पूरा डिटेल्स
- परीक्षा फार्म भराये जाने के लिए फार्म की हार्ड कॉपी
नोट - सीबीएसइ को ये सारी जानकारी जब तक स्कूल उपलब्ध नहीं करवाते हैं, तब तक बोर्ड आगे की प्रक्रिया नहीं करता हैं.
कोट
कोई भी डी-एफिलिएटेड स्कूल सीबीएसइ के नाम और लोगो का इस्तेमाल नहीं कर सकता है. ऐसे में जो भी स्कूल इस तरह की हरकतें करके अभिभावकों को ठगता है तो ऐसे स्कूल पर बोर्ड की ओर से एफआइआर की जा सकती है. जिसे बोर्ड की मान्यता प्राप्त है वहीं स्कूल सीबीएसइ के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर सकता है.
जोसफ इमैन्युअल, सचिव, सीबीएसइ दिल्ली
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