गुरूकुल सिस्टम में 24 घंटे गुरु का मिला साथ, बन गये बेस्ट
- रेगुलर प्रैक्टिस और ओपनली इंवायरमेंट ने पढ़ाई से जोड़े रखा छात्रों को
- रेमेडियल क्लास से बनाये गये एक लेवल पर हर छात्र
संवाददाता, पटना
एवरेस्ट पर चढ़ने की इच्छा किसकी नहीं होती है. लेकिन एवरेस्ट पर वहीं चढ़ता है जो हर कठिनाई को दरकिनार कर अपने लक्ष्य (एवरेस्ट) की ओर नजर रखता है. कुछ ऐसा ही एक उदाहरण बिहार का नेतरहाट कहे जाने वाला सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रो ने कर दिखाया हैं. एक नहीं दो नहीं बल्कि तमाम छात्रों ने मैट्रिक में बेहतर रिजल्ट देकर यह साबित कर दिया है कि अगर एवरेस्ट (लक्ष्य) पर चढ़ने के लिए सही गाइड (गुरु) मिले तो हर कठिनाई पर विजय प्राप्त किया जा सकता है. गुरु का साथ मिला और आगे बढ़ते गये. ना दिन देखा और ना रात देखा, लक्ष्य पर बस साधा निशाना. पढ़ाई की सुविधा नहीं मिली, लेकिन लगातार अभ्यास और शिक्षकों के साथ पढ़ाई का खुला वातावरण ने आज सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रों को उदाहरण के तौर पर सामने लाकर खड़ा कर दिया है.
- 11 शिक्षकों से शुरू हुआ था स्कूल
विद्यालय की शुरुआत 11 शिक्षकों से शुरू हुआ था. 11 शिक्षक ने 120 छात्रों के बीच अपनी जिम्मेवारी पूरी तरह निभायी. सुबह 4 बजे से रात के 9 बजे तक का समय छात्रों का शिक्षको के साथ ही गुजरता हैं. शिक्षक कुमारी पुष्पा ने बताया कि छठी में नामांकन होने के बाद छात्रों का दो महीने टेस्ट लिया जाता है. इससे हमें छात्र के मेंटल लेवल का पता चल जाता है. कौन छात्र किस विषय में अच्छे या किस विषय में उनकी कैसी पकड़ हो सकती हैं, इसके बारे में जानकारी मिल जाती है. इसके बाद विद्यालय के स्ट्रेटजी के अनुसार पढ़ाई शुरू करवाया जाता हैं.
- सीबीएसइ, आइसीएसइ बोर्ड के बाद पढ़ते है बिहार बोर्ड का सिलेबस
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में हर बोर्ड के सिलेबस को फोकस किया जाता हैं. छात्रों को हर चीजों का नॉलेज हो, इसके लिए सीबीएसइ के अलावा आइसीएसइ बोर्ड के सिलेबस को भी पढ़ाया जाता है. मैथ की शिक्षिका कुमारी पुष्पा ने बताया कि जब विद्यालय खुला था तो यह सीबीएसइ बोर्ड पर आधारित था. लेकिन बाद में यह बिहार बोर्ड से जुड़ गया. लेकिन स्कूल में आज भी हर बोर्ड के सिलेबस को हम फॉलो करते है. क्लास 8वीं तक हम सीबीएसइ, आइसीएसइ बोर्ड के हर किताबों से छात्रों की प्रैक्टिस करवाते हैं. 9वीं से हमे बिहार बोर्ड को फोकस करना होता है. इस कारण उसके बाद बिहार बोर्ड के सिलेबस को भी शामिल करते है. 9वीं से भी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना शुरू कर दिया जाता हैं
- एक्टिविटी क्लास पर होता हैं फोकस
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में लाइब्रेरी और लैब दोनों की काफी कमी हैं. लेकिन इस कमी हो वहां के शिक्षक महसूस भी नहीं होने देते हैं. फिजिक्स के शिक्षक विजय कुमार ने बताया कि जो संसाधन हमारे पास है हम उसी में बेहतर शिक्षा देने की कोशिश करते हैं. साइंस विषय में बिना प्रैक्टिकल के पढ़ाई पूरी नहीं होती है. ऐसे में हम छोटा-छोटा प्रयोग कर इसे छात्रों को समझाते हैं. प्रयोगशाला की कमी हम खुद ही पूरा कर देते हैं. अधिक से अधिक एक्टिविटी क्लास के माध्यम से हर टॉपिक को छात्रो को बताने की कोशिश की जाती हैं.
स्टडी का यह अनोखा प्रयोग चलता है सिमुलतला आवासीय विद्यालय में
1. रेमेडियल क्लास - इसके अंतर्गत ऐसे छात्रों को चुना जाता हैं जो किसी विषय में कमजोर होते है. छठी क्लास में ही ऐसे छात्रों को चुन लिया जाता हैं. जो छात्र जिस भी विषय में कमजोर होते है. उनके उपर विद्यालय के शिक्षक अलग से समय देते हैं. सप्ताह में तीन दिन दो घंटे की रेमेडियल क्लास आयोजित की जाती है. इसके माध्यम से छात्रों को एक लेवल पर लाने की कोशिश की जाती हैं.
2. इच वन टीच वन - गांधी जी के सोच पर आधारित इस स्टडी के तहत जूनियर बच्चों को सिमुलतला के छात्र पढ़ाते हैं. पूर्व प्रिंसिपल शंकर प्रसाद ने बताया कि इसके तहत बच्चों में समाज सेवा का भाव आयें, इसके तहत झाझा ब्लॉक के जितने भी बच्चे होते हैं. उन्हें सिमुलतला के छात्र हर दिन तीन घंटे पढ़ाते हैं. जूनियर बच्चों को पढ़ाने से छात्रों की अपनी प्रैक्टिस भी हो जाती हैं .
3. श्रुति लेख - इसके तहत हर दिन एक ऐसा क्लास होता है जिसमें छात्रो को एक साथ जोर-जोर से पढ़ने को कहा जाता है. इससे छात्रों का उच्चरण बढ़ता है और हेजिटेशन कम होता है. हर प्रयोग हर क्लास के लिए करवाया जाता है. एक घंटे के इस क्लास में हर छात्र को बोल कर बढ़ने के लिए कहा जाता हैं.
4. खुद का करें अपना काम - सिमुलतला आवासीय विद्यालय गुरुकुल परंपरा अपनाया गया है. इस कारण यहां पर छात्रों को खाना बनाने और परोसने की भी ड्यूटी दी जाती है. छात्रों में सर्वागिण विकास हो, छात्रों में व्यवहारिकता आयें, इस कारण खुद से ही सारा काम करवाया जाता है.
5. चार घंटे की सेल्फ स्टडी, आधे घंटे का ग्रुप डिस्कशन - सिमुलतला आवासीय विद्यालय में सेल्फ स्टडी पर काफी फोकस किया जाता है. दो बजे स्कूल समाप्त होने के बाद 3 बजे से 6 बजे शाम तक छात्र सेल्फ स्टडी करते हैं. इसके बाद आधे घंटे का ग्रुप डिस्कशन भी छात्र करते है. शाम में तीन घंटे और सुबह में एक घंटे का सेल्फ स्टडी हर छात्र के लिए अनिवार्य हैं.
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में स्टडी के इन प्वाइंट पर किया जाता है फोकस
- हर दिन छह घंटे का अभ्यास करवाया जाता हैं
- 24 घंटे शिक्षकों का साथ मिलने से छात्र की हमेशा जिज्ञासा पूरी होती है
- शिक्षक पढ़ाई संबंधित फीड बैक भी छात्रों से समय-समय पर लेते हैं
- 8वीं के बाद छात्रो में प्रतियोगिता का भाव डालना शुरू कर दिया जाता हैं
- छात्रों के बीच ऐसी भावनाएं शिक्षक देते है जिससे पढ़ाई में एक दूसरे से आगे बढ़ने की ललक पैदा हो
कोट
इस विद्यालय की शुरुआत में ही तमाम अच्छे संस्थान से फीड बैक लेकर शुरू किया गया था. बेसिक सुविधाओं का भले कमी है, लेकिन यहां पर शिक्षको का माहौल ऐसा है कि हर छात्रो का एक समान विकास होता हैं. इसी का असर है कि आज शिक्षकों की मेहनत छात्रों के रिजल्ट में नजर आ रही है.
राजीव रंजन, प्राचार्य, सिमुलतला आवासीय विद्यालय
- रेगुलर प्रैक्टिस और ओपनली इंवायरमेंट ने पढ़ाई से जोड़े रखा छात्रों को
- रेमेडियल क्लास से बनाये गये एक लेवल पर हर छात्र
संवाददाता, पटना
एवरेस्ट पर चढ़ने की इच्छा किसकी नहीं होती है. लेकिन एवरेस्ट पर वहीं चढ़ता है जो हर कठिनाई को दरकिनार कर अपने लक्ष्य (एवरेस्ट) की ओर नजर रखता है. कुछ ऐसा ही एक उदाहरण बिहार का नेतरहाट कहे जाने वाला सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रो ने कर दिखाया हैं. एक नहीं दो नहीं बल्कि तमाम छात्रों ने मैट्रिक में बेहतर रिजल्ट देकर यह साबित कर दिया है कि अगर एवरेस्ट (लक्ष्य) पर चढ़ने के लिए सही गाइड (गुरु) मिले तो हर कठिनाई पर विजय प्राप्त किया जा सकता है. गुरु का साथ मिला और आगे बढ़ते गये. ना दिन देखा और ना रात देखा, लक्ष्य पर बस साधा निशाना. पढ़ाई की सुविधा नहीं मिली, लेकिन लगातार अभ्यास और शिक्षकों के साथ पढ़ाई का खुला वातावरण ने आज सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रों को उदाहरण के तौर पर सामने लाकर खड़ा कर दिया है.
- 11 शिक्षकों से शुरू हुआ था स्कूल
विद्यालय की शुरुआत 11 शिक्षकों से शुरू हुआ था. 11 शिक्षक ने 120 छात्रों के बीच अपनी जिम्मेवारी पूरी तरह निभायी. सुबह 4 बजे से रात के 9 बजे तक का समय छात्रों का शिक्षको के साथ ही गुजरता हैं. शिक्षक कुमारी पुष्पा ने बताया कि छठी में नामांकन होने के बाद छात्रों का दो महीने टेस्ट लिया जाता है. इससे हमें छात्र के मेंटल लेवल का पता चल जाता है. कौन छात्र किस विषय में अच्छे या किस विषय में उनकी कैसी पकड़ हो सकती हैं, इसके बारे में जानकारी मिल जाती है. इसके बाद विद्यालय के स्ट्रेटजी के अनुसार पढ़ाई शुरू करवाया जाता हैं.
- सीबीएसइ, आइसीएसइ बोर्ड के बाद पढ़ते है बिहार बोर्ड का सिलेबस
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में हर बोर्ड के सिलेबस को फोकस किया जाता हैं. छात्रों को हर चीजों का नॉलेज हो, इसके लिए सीबीएसइ के अलावा आइसीएसइ बोर्ड के सिलेबस को भी पढ़ाया जाता है. मैथ की शिक्षिका कुमारी पुष्पा ने बताया कि जब विद्यालय खुला था तो यह सीबीएसइ बोर्ड पर आधारित था. लेकिन बाद में यह बिहार बोर्ड से जुड़ गया. लेकिन स्कूल में आज भी हर बोर्ड के सिलेबस को हम फॉलो करते है. क्लास 8वीं तक हम सीबीएसइ, आइसीएसइ बोर्ड के हर किताबों से छात्रों की प्रैक्टिस करवाते हैं. 9वीं से हमे बिहार बोर्ड को फोकस करना होता है. इस कारण उसके बाद बिहार बोर्ड के सिलेबस को भी शामिल करते है. 9वीं से भी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना शुरू कर दिया जाता हैं
- एक्टिविटी क्लास पर होता हैं फोकस
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में लाइब्रेरी और लैब दोनों की काफी कमी हैं. लेकिन इस कमी हो वहां के शिक्षक महसूस भी नहीं होने देते हैं. फिजिक्स के शिक्षक विजय कुमार ने बताया कि जो संसाधन हमारे पास है हम उसी में बेहतर शिक्षा देने की कोशिश करते हैं. साइंस विषय में बिना प्रैक्टिकल के पढ़ाई पूरी नहीं होती है. ऐसे में हम छोटा-छोटा प्रयोग कर इसे छात्रों को समझाते हैं. प्रयोगशाला की कमी हम खुद ही पूरा कर देते हैं. अधिक से अधिक एक्टिविटी क्लास के माध्यम से हर टॉपिक को छात्रो को बताने की कोशिश की जाती हैं.
स्टडी का यह अनोखा प्रयोग चलता है सिमुलतला आवासीय विद्यालय में
1. रेमेडियल क्लास - इसके अंतर्गत ऐसे छात्रों को चुना जाता हैं जो किसी विषय में कमजोर होते है. छठी क्लास में ही ऐसे छात्रों को चुन लिया जाता हैं. जो छात्र जिस भी विषय में कमजोर होते है. उनके उपर विद्यालय के शिक्षक अलग से समय देते हैं. सप्ताह में तीन दिन दो घंटे की रेमेडियल क्लास आयोजित की जाती है. इसके माध्यम से छात्रों को एक लेवल पर लाने की कोशिश की जाती हैं.
2. इच वन टीच वन - गांधी जी के सोच पर आधारित इस स्टडी के तहत जूनियर बच्चों को सिमुलतला के छात्र पढ़ाते हैं. पूर्व प्रिंसिपल शंकर प्रसाद ने बताया कि इसके तहत बच्चों में समाज सेवा का भाव आयें, इसके तहत झाझा ब्लॉक के जितने भी बच्चे होते हैं. उन्हें सिमुलतला के छात्र हर दिन तीन घंटे पढ़ाते हैं. जूनियर बच्चों को पढ़ाने से छात्रों की अपनी प्रैक्टिस भी हो जाती हैं .
3. श्रुति लेख - इसके तहत हर दिन एक ऐसा क्लास होता है जिसमें छात्रो को एक साथ जोर-जोर से पढ़ने को कहा जाता है. इससे छात्रों का उच्चरण बढ़ता है और हेजिटेशन कम होता है. हर प्रयोग हर क्लास के लिए करवाया जाता है. एक घंटे के इस क्लास में हर छात्र को बोल कर बढ़ने के लिए कहा जाता हैं.
4. खुद का करें अपना काम - सिमुलतला आवासीय विद्यालय गुरुकुल परंपरा अपनाया गया है. इस कारण यहां पर छात्रों को खाना बनाने और परोसने की भी ड्यूटी दी जाती है. छात्रों में सर्वागिण विकास हो, छात्रों में व्यवहारिकता आयें, इस कारण खुद से ही सारा काम करवाया जाता है.
5. चार घंटे की सेल्फ स्टडी, आधे घंटे का ग्रुप डिस्कशन - सिमुलतला आवासीय विद्यालय में सेल्फ स्टडी पर काफी फोकस किया जाता है. दो बजे स्कूल समाप्त होने के बाद 3 बजे से 6 बजे शाम तक छात्र सेल्फ स्टडी करते हैं. इसके बाद आधे घंटे का ग्रुप डिस्कशन भी छात्र करते है. शाम में तीन घंटे और सुबह में एक घंटे का सेल्फ स्टडी हर छात्र के लिए अनिवार्य हैं.
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में स्टडी के इन प्वाइंट पर किया जाता है फोकस
- हर दिन छह घंटे का अभ्यास करवाया जाता हैं
- 24 घंटे शिक्षकों का साथ मिलने से छात्र की हमेशा जिज्ञासा पूरी होती है
- शिक्षक पढ़ाई संबंधित फीड बैक भी छात्रों से समय-समय पर लेते हैं
- 8वीं के बाद छात्रो में प्रतियोगिता का भाव डालना शुरू कर दिया जाता हैं
- छात्रों के बीच ऐसी भावनाएं शिक्षक देते है जिससे पढ़ाई में एक दूसरे से आगे बढ़ने की ललक पैदा हो
कोट
इस विद्यालय की शुरुआत में ही तमाम अच्छे संस्थान से फीड बैक लेकर शुरू किया गया था. बेसिक सुविधाओं का भले कमी है, लेकिन यहां पर शिक्षको का माहौल ऐसा है कि हर छात्रो का एक समान विकास होता हैं. इसी का असर है कि आज शिक्षकों की मेहनत छात्रों के रिजल्ट में नजर आ रही है.
राजीव रंजन, प्राचार्य, सिमुलतला आवासीय विद्यालय
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