माइक्रो लैब से स्कूल में होगी अब पढ़ाई
- एनसीइआरटी स्कूलों में माइक्रा लैब लाने की कर रहा तैयारी
- पोल्यूशन फ्री और सुरक्षित होगा लैब
संवाददाता, पटना
प्रैक्टिकल अब होगा आसान, न हाथ जलने का डर और ना ही होगा किसी तरह का पोल्यूशन. अब सुरक्षित और आसान होगा प्रैक्टिकल करना. एनसीइआरटी की ओर से इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. अब स्कूलों में प्रैक्टिकल का तरीका पूरी से चेंज हो जायेगा. लैब को ऑनलाइन करने के बाद अब माइक्रो लैब किट का कांसेप्ट जल्द ही स्कूलों में शुरू किया जायेगा. इससे प्रैक्टिकल करना काफी आसान हो जायेगा.
पहले सरकारी, फिर प्राइवेट स्कूलों
बिना प्रयोग के विज्ञान की पढ़ाई संभव नहीं हैं. ऐसे में आज भी सरकारी स्कूलों में प्रैक्टिकल पर फोकस नहीं किया जाता है. छात्रों को थ्योरी की जानकारी तो मिल जाती हैं, लेकिन प्रैक्टिकल के मामले में उनकी जानकारी जीरो होती है. इस संबंध में स्कूलों से मिली जानकारी के अनुसार कहीं प्रैक्टिकल के लिए कमरे की कमी है , तो कहीं प्रैक्टिकल का खर्च वहन करना संभव नहीं हो पाता है. वहीं कई स्कूलों मे तो केमिकल की कमी के कारण प्रैक्टिकल नहीं हो पाता है. कई जगहों पर एक्सपायरी केमिकल या इंस्टूमेंट क कारण भी छात्रों के लिए प्रैक्टिकल करना खतरनाक होता है. लेकिन माइक्रो लैब किट के आने से ये सारी परेशानी खत्म हो जायेगी. स्कूलों और छात्रो ंके लिए यह काफी आसान हो जायेगा.
15 लोगें की बनायी गयी हैं टीम
माइक्रो लैब किट की शुरुआत करने के लिए देश भर में 15 लोगों की टीम बनायी गयी हैं. इसमें उन लोगों को चुना गया है. जो किसी न किसी रूप में माइक्रो लैब संबंधी काम से जुड़ें हैं. इसमे पटना के एएन कॉलेज के केमेस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डा.सुभाष प्रसाद सिंह को भी शामिल किया गया है. डा. प्रसाद माइक्रो लैब के अपने डिपार्टमेंट में काम कर चुके हैं. डा. प्रसाद ने बताया कि एनसीइआरटी द्वारा इसके लिए पांच दिनों का वर्कशॉप भी आयोजित किया गया था. इस लैब को लेकर देश भर में 15 लोगों की टीम बनायी गयी हैं . जल्द ही इसे स्कूलों में शुरू किया जायेगा.
माइक्रो लैब किट से मिलने वाले फायदे
- पोल्यूशन फ्री होगा यह किट
- सुरक्षा को लेकर किसी तरह का डर नहीं होगा
- प्रैक्टिकल करना होगा आसान
- मिनिमम खर्च पर कोई भी स्कूल इसे वहन कर सकता है
- केमिकल की बरबादी नहीं होगी. जितने केमिकल की जरूरत प्रैक्टिकल के लिए होगी. उतना ही खर्च होगा
- समय की बरबादी नहीं होगी
- इसे कहीं पर भी किसी भी उपयोग में लाया जा सकेगा
- एनसीइआरटी स्कूलों में माइक्रा लैब लाने की कर रहा तैयारी
- पोल्यूशन फ्री और सुरक्षित होगा लैब
संवाददाता, पटना
प्रैक्टिकल अब होगा आसान, न हाथ जलने का डर और ना ही होगा किसी तरह का पोल्यूशन. अब सुरक्षित और आसान होगा प्रैक्टिकल करना. एनसीइआरटी की ओर से इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. अब स्कूलों में प्रैक्टिकल का तरीका पूरी से चेंज हो जायेगा. लैब को ऑनलाइन करने के बाद अब माइक्रो लैब किट का कांसेप्ट जल्द ही स्कूलों में शुरू किया जायेगा. इससे प्रैक्टिकल करना काफी आसान हो जायेगा.
पहले सरकारी, फिर प्राइवेट स्कूलों
बिना प्रयोग के विज्ञान की पढ़ाई संभव नहीं हैं. ऐसे में आज भी सरकारी स्कूलों में प्रैक्टिकल पर फोकस नहीं किया जाता है. छात्रों को थ्योरी की जानकारी तो मिल जाती हैं, लेकिन प्रैक्टिकल के मामले में उनकी जानकारी जीरो होती है. इस संबंध में स्कूलों से मिली जानकारी के अनुसार कहीं प्रैक्टिकल के लिए कमरे की कमी है , तो कहीं प्रैक्टिकल का खर्च वहन करना संभव नहीं हो पाता है. वहीं कई स्कूलों मे तो केमिकल की कमी के कारण प्रैक्टिकल नहीं हो पाता है. कई जगहों पर एक्सपायरी केमिकल या इंस्टूमेंट क कारण भी छात्रों के लिए प्रैक्टिकल करना खतरनाक होता है. लेकिन माइक्रो लैब किट के आने से ये सारी परेशानी खत्म हो जायेगी. स्कूलों और छात्रो ंके लिए यह काफी आसान हो जायेगा.
15 लोगें की बनायी गयी हैं टीम
माइक्रो लैब किट की शुरुआत करने के लिए देश भर में 15 लोगों की टीम बनायी गयी हैं. इसमें उन लोगों को चुना गया है. जो किसी न किसी रूप में माइक्रो लैब संबंधी काम से जुड़ें हैं. इसमे पटना के एएन कॉलेज के केमेस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डा.सुभाष प्रसाद सिंह को भी शामिल किया गया है. डा. प्रसाद माइक्रो लैब के अपने डिपार्टमेंट में काम कर चुके हैं. डा. प्रसाद ने बताया कि एनसीइआरटी द्वारा इसके लिए पांच दिनों का वर्कशॉप भी आयोजित किया गया था. इस लैब को लेकर देश भर में 15 लोगों की टीम बनायी गयी हैं . जल्द ही इसे स्कूलों में शुरू किया जायेगा.
माइक्रो लैब किट से मिलने वाले फायदे
- पोल्यूशन फ्री होगा यह किट
- सुरक्षा को लेकर किसी तरह का डर नहीं होगा
- प्रैक्टिकल करना होगा आसान
- मिनिमम खर्च पर कोई भी स्कूल इसे वहन कर सकता है
- केमिकल की बरबादी नहीं होगी. जितने केमिकल की जरूरत प्रैक्टिकल के लिए होगी. उतना ही खर्च होगा
- समय की बरबादी नहीं होगी
- इसे कहीं पर भी किसी भी उपयोग में लाया जा सकेगा
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