सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के108 में 30 छात्र मेरिट लिस्ट में शामिल
- सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय से पहली बार छात्र हुए थे मैट्रिक की परीक्षा में शामिल
- दो सालों से नहीं हो रहा नामांकन की प्रक्रिया
संवाददाता, पटना
बिहार का नेतरहाट कहें जाने वाला सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय ने यह साबित कर दिया कि टैलेंट को खोजने की जरूरत नहीं होती है. मौका मिले तो टैलेंट सामने आ जाता है. पहली बार सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के छात्र मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुए थे. कुल 108 छात्रों में 30 छात्रों ने मेरिट लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा लिया है. इसके अलावा इस विद्यालय के बांकी छात्रो ने भी बेहतर रिजल्ट किया हैं. 9 अगस्त 2010 को स्थापित इस विद्यालय में 120 विद्यार्थी (60 छात्र, 60 छात्रएं)का नामांकन लिया गया था. लेकिन सुविधा नहीं होने के कारण बीच में ही 12 विद्यार्थी ने विद्यालय को छोड़ दिया.
- हर साल घट रही विद्यालय में छात्रों की संख्या
सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय 2010 में खोला गया था. पहले साल में इस विद्यालय में नामांकन के लिए 32 हजार छात्रो ने आवेदन भरा था. लेकिन चयन मात्र 120 छात्रों का हुआ था. इसके बाद 2011 में छात्रों की संख्या घट कर 17 हजार पर आ गयी थी. इसके बाद 2012 में भी छात्रों की संख्या घट कर 9800 हो गयी. 2013 में मात्र 6 हजार छात्रो ने ही सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय में नामांकन के लिए आवेदन भरा था.
- नहीं हुआ दो सालो से नामांकन
सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय में क्लास छह में नामांकन लिया जाता है. इसके लिए दो बार परीक्षाएं में शामिल होना होता है. नवंबर में नामांकन की प्रक्रिया शुरू किया जाता हैं. दिसंबर में पीटी, जनवरी और फरवरी में मेन की परीक्षा के बाद मार्च में मेडिकल होने के बाद 120 विद्यार्थी को चुना जाता है. प्लस टू तक चलने वाले इस विद्यालय में पिछले दो सालो से कोई नामांकन नहीं लिया गया हैं. नामांकन प्रक्रिया ना तो 2014-15 में हुआ और ना ही 2015-16 सत्र के लिए ही किया गया हैं. ऐसे में इस विद्यालय का दो साल ऐसे ही खाली चला जायेगा.
कोट
जिस तरह से इस स्कूल ने रिजल्ट दिया है. इसने साबित कर दिया हैं कि अभी भी ग्रामीण क्षेत्र में ही टैलेंट है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए. जिस मकसद से इस विद्यालय की शुरूआत हुई थी, उसे फिर एक बार चालू करने की जरूरत हैं. सुविधा के अभाव में छात्र स्कूल छोड़ कर जा रहे हैं. यह पहला बैच था. 120 बैच में से सुविधा के अभाव में 12 छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया था. 108 छात्र की परीक्षा में शामिल हुए थे.
डा. शंकर प्रसाद, फाउंडर मेंबर, सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय
हो सकता है इस रिजल्ट का कुछ असर सरकार के उपर हो. दो सालों से विद्यालय में नामांकन की प्रक्रिया नहीं हो पायी है . दो साल इस विद्यालय का ऐसे ही चला जायेगा. लेकिन अब नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने वाली हैं. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से ही नामांकन प्रक्रिया किया जायेग.
राजीव रंजन, प्रिंसिपल, सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय
- सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय से पहली बार छात्र हुए थे मैट्रिक की परीक्षा में शामिल
- दो सालों से नहीं हो रहा नामांकन की प्रक्रिया
संवाददाता, पटना
बिहार का नेतरहाट कहें जाने वाला सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय ने यह साबित कर दिया कि टैलेंट को खोजने की जरूरत नहीं होती है. मौका मिले तो टैलेंट सामने आ जाता है. पहली बार सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के छात्र मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुए थे. कुल 108 छात्रों में 30 छात्रों ने मेरिट लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा लिया है. इसके अलावा इस विद्यालय के बांकी छात्रो ने भी बेहतर रिजल्ट किया हैं. 9 अगस्त 2010 को स्थापित इस विद्यालय में 120 विद्यार्थी (60 छात्र, 60 छात्रएं)का नामांकन लिया गया था. लेकिन सुविधा नहीं होने के कारण बीच में ही 12 विद्यार्थी ने विद्यालय को छोड़ दिया.
- हर साल घट रही विद्यालय में छात्रों की संख्या
सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय 2010 में खोला गया था. पहले साल में इस विद्यालय में नामांकन के लिए 32 हजार छात्रो ने आवेदन भरा था. लेकिन चयन मात्र 120 छात्रों का हुआ था. इसके बाद 2011 में छात्रों की संख्या घट कर 17 हजार पर आ गयी थी. इसके बाद 2012 में भी छात्रों की संख्या घट कर 9800 हो गयी. 2013 में मात्र 6 हजार छात्रो ने ही सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय में नामांकन के लिए आवेदन भरा था.
- नहीं हुआ दो सालो से नामांकन
सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय में क्लास छह में नामांकन लिया जाता है. इसके लिए दो बार परीक्षाएं में शामिल होना होता है. नवंबर में नामांकन की प्रक्रिया शुरू किया जाता हैं. दिसंबर में पीटी, जनवरी और फरवरी में मेन की परीक्षा के बाद मार्च में मेडिकल होने के बाद 120 विद्यार्थी को चुना जाता है. प्लस टू तक चलने वाले इस विद्यालय में पिछले दो सालो से कोई नामांकन नहीं लिया गया हैं. नामांकन प्रक्रिया ना तो 2014-15 में हुआ और ना ही 2015-16 सत्र के लिए ही किया गया हैं. ऐसे में इस विद्यालय का दो साल ऐसे ही खाली चला जायेगा.
कोट
जिस तरह से इस स्कूल ने रिजल्ट दिया है. इसने साबित कर दिया हैं कि अभी भी ग्रामीण क्षेत्र में ही टैलेंट है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए. जिस मकसद से इस विद्यालय की शुरूआत हुई थी, उसे फिर एक बार चालू करने की जरूरत हैं. सुविधा के अभाव में छात्र स्कूल छोड़ कर जा रहे हैं. यह पहला बैच था. 120 बैच में से सुविधा के अभाव में 12 छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया था. 108 छात्र की परीक्षा में शामिल हुए थे.
डा. शंकर प्रसाद, फाउंडर मेंबर, सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय
हो सकता है इस रिजल्ट का कुछ असर सरकार के उपर हो. दो सालों से विद्यालय में नामांकन की प्रक्रिया नहीं हो पायी है . दो साल इस विद्यालय का ऐसे ही चला जायेगा. लेकिन अब नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने वाली हैं. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से ही नामांकन प्रक्रिया किया जायेग.
राजीव रंजन, प्रिंसिपल, सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय
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