Monday, June 8, 2015

बिना कॉपी जांच के ही निकाल दिया रिजल्ट

बिना कॉपी जांच के ही निकाल दिया रिजल्ट

- उर्दू टीइटी अभ्यर्थी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पर लगाया आरोप
- तीन साल से लड़ रहे लड़ाई में अभी तक नहीं हुआ एक का भी नियोजन
संवाददाता, पटना
परीक्षा दिया. पास भी किया. नियोजन नहीं हुआ. अपने हक के लिए हाई कोर्ट तक पहुंचा.  लेकिन सफलता नहीं मिली. बिहार उर्दू और बांग्ला स्पेशल टीइटी परीक्षार्थी पिछले तीन सालों से अपने हक की मांग कर रहे है. रिजल्ट की गड़बड़ियों को देखकर हाई कोर्ट ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को दुबारा कॉपी जांच कर रिजल्ट की घोषणा करने का आदेश दिया था. लेकिन समिति ने बिना जांच किये ही 28 मई को रिजल्ट की घोषणा कर दी. इस रिजल्ट में 3300 सौ वो अभ्यर्थी भी डिसक्वालिफाई कर गये जो दिसंबर 2013 में सफल हुए थे. बिहार बोर्ड पर यह आरोप बिहार उर्दू और बांग्ला स्पेशल टीइटी अभ्यर्थियों ने लगाया है. साथ में बोर्ड से दुबारा रिजल्ट में सुधार करने की मांग की गयी है. अभ्यर्थी संघ के उपाध्यक्ष रजिया कमर ने बताया कि प्रथम चरण के रिजल्ट में ढाइ लाख अभ्यर्थी में से 15310 अभ्यर्थी को सफलता मिली थी. इसमें 3300 अभ्यर्थी डिसक्वालिफाई हो गये हैं. समिति ने अभी तक रिजल्ट का डिटेल्स भी हमें नहीं दिया हैं. जो मार्क्‍स हमें पहले मिले थे, उसमें से भी अंक काट लिये गये है .
- करेंगे आत्मदाह
अभ्यर्थियों ने समिति से मांग की है कि रिजल्ट में कट ऑफ अंक को कम किया जायें. टीइटी की परीक्षा 150 अंक पर लिया गया था. लेकिन बाद में इसे 135 कर दिया गया. ऐसे में कट ऑफ मार्क्‍स भी कम होना चाहिए. अभ्यर्थी संघ के अध्यक्ष मो अरशद ने बताया कि कट ऑफ मार्क्‍स कम करके हमारे रिजल्ट को दुबारा निकाला जायें. समिति ने बिना कॉपी जांच के ही रिजल्ट निकला दिया हैं. अगर कॉपी जांच हुई होती तो हमारे अंक इतने कम नहीं आते. सरकार हमारी मांग माने नहीं तो फिर हम कानून का सहारा लेगे और सामूहिक आत्मदाह भी करेगे.
- दो बार में निकला था रिजल्ट
बिहार उर्दू एवं बांग्ला स्पेशनल टीइटी परीक्षा का रिजल्ट दो बार प्रकाशित किया गया. पहली बार रिजल्ट दिसंबर 2013 में निकाला गया. रिजल्ट घोषित होने के बाद पता चला कि प्रश्न पत्र में 13 प्रश्न के ऑप्सन गलत थे. इसके बाद फिर दुबारा रिजल्ट की घोषणा नंवबर 2014 में किया गया. इसमें 13 नंबर का ग्रेस अभ्यर्थी को दिया गया. इसके बाद लगभग 11 हजार अभ्यर्थी दुबारा सफल हुए. पहले चरण में 15 हजार 310 अभ्यर्थी को सफलता मिली थी. ज्ञात हो कि उर्दू एंव बांग्ला स्पेशल टीइटी परीक्षा में ढाई लाख के लगभग परीक्षार्थी शामिल हुए थे.बिहार स्पेशल उर्दू बंगला टीचर्स प्रभावित परीक्षार्थी संघ, बिहार के अध्यक्ष मो. अरशद ने बताया कि दो बार रिजल्ट निकालने के बाद भी रिजल्ट को सही नहीं किया गया हैं.

नियोजन की लड़ाई चल रही तीन सालों से
- उर्दू एवं बांग्ला टीइटी के 2012 में वैकेंसी निकाली गयी
- अक्टूबर 2013 में इसकी परीक्षा ली गयी. दिसंबर 2013 में इसके रिजल्ट की घोषणा हुई
- विरोध के बाद पता चला कि पेपर फस्र्ट (वन से 5वीं तक) में 13 प्रश्न और पेपर सेकेंड (6ठीं से 8वीं तक) में 10 प्रश्न गलत थे
- इसके बाद बोर्ड की ओर से संशोधित रिजल्ट दुबारा नवंबर 2014 में निकाला गया
 मार्च 2015 में हाई कोर्ट पहुंचा मामला
- 21 जनवरी 2015 को हाई कोट ने उर्दू और बांग्ला टीचर के बहाली पर रोक लगा
- इसके बाद हाई कोर्ट ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से संशोधित रिजल्ट की घोषणा करने को कहा गया
- समिति की ओर से हाई कोर्ट को बताया गया कि 13 प्रश्न गलत थे. उसके लिए ग्रेस दिया गया है. और इससे 11 हजार और रिजल्ट का प्रकाशन किया गया.
- इसके बाद हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग से जवाब मांगा. लेकिन सरकार की ओर से किसी तरह का जवाब नहीं देने के कारण तिथि बढ़ायी जाती रही
- 12 मार्च को हाई कोर्ट इस पर फैसला देने वाली थी. लेकिन सरकारी वकील के नहीं आने के कारण इसके 12 मार्च की तिथि को बढ़ा कर 17 मार्च कर दिया गया
- 17 मार्च से 23 मार्च और फिर 31 मार्च से 1 अप्रैल फैसले की तिथि बढ़ायी गयी
- 1 अप्रैल से 3 अप्रैल को तिथि बढ़ायी गयी. 3 अप्रैल से तिथि को बढ़ा कर 10 अप्रैल किया गया
- इसके बाद हाई कोर्ट ने 6 मई को बिहार बोर्ड का आदेश दिया कि उर्दू एवं बांग्ला टीइटी स्पेशल परीक्षा का रिजल्ट दुबारा घोषित किया जायें

कोट
हाई कोर्ट के आदेश पर उर्दू और बांग्ला टीइटी स्पेशल परीक्षा का रिजल्ट निकाल दिया गया हैं. रिजल्ट को बिहार बोर्ड के वेबसाइट पर डाल दिया गया है. अभ्यर्थी अपना रिजल्ट वहां पर देख सकते है. हाई कोर्ट के आदेश पर 13 अंक घटाने के लिए कहा गया था. कॉपी जांच कर रिजल्ट देने की बात नहीं थी.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति






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