Saturday, June 6, 2015

आरटीइ से बाहर रहे कई स्कूल, 256 में मात्र 49 स्कूल में ही हुआ नामांकन

आरटीइ से बाहर रहे कई स्कूल, 256 में मात्र 49 स्कूल में ही हुआ नामांकन

- पटना जिला में आरटीइ के तहत 2014-15 में मात्र 690 ही हुआ नामांकन
- 2013-14 के मुकाबले 10 बच्चे का कम हुआ नामांकन
रिंकू झा, पटना
शिक्षा के ऊपर हर बच्चे का समान अधिकार हो, इसके लिए शिक्षा का अधिकार कानून लाया गया. लेकिन अभी भी यह समानता नजर नहीं आती है. इसकी गवाही शिक्षा के अधिकार के तहत वो आंकड़े हर साल दे रहे है जिसके अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों में नामांकन लिये जाते है. हर सत्र की तरह 2014-15 सत्र में भी पटना जिला में मात्र 49 स्कूलों मे ही नामांकन लिये गये. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार पटना जिला में कुल 256 स्कूलों में आरटीइ के तहत नामांकन होना था. लेकिन इसमें मात्र 49 स्कूलों में ही नामांकन लिये जा सके है. 2014 से 2015 तक इन तमाम स्कूलों में इस बार मात्र 690 बच्चों के ही नामांकन हो सका. इस बार नामांकन का पिछले साल की तुलना में 10 बच्चों का कम हुआ है. आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय कुमार चौरसिया ने बताया कि कोई भी स्कूल 25 फीसदी नामांकन नहीं लेता है. नामांकन के नाम पर बस खानापूर्ति ही होती है. गरीब बच्चों के नामांकन की जवाबदेही भी कोई अधिकारी नहीं लेते है.
नहीं देते है सही जानकारी
पटना जिला में किस स्कूल में 25 फीसदी नामांकन के तहत कितने बच्चों का नामांकन लिया जाना है. इसकी जानकारी किसी भी स्कूल के पास नहीं होता हैं. स्कूल सूत्रों की माने तो स्कूल अपनी मरजी से स्टूडेंट्स की संख्या सरकार के पास भेज देती है. और उतने ही बच्चे का नामांकन आरटीआइ के तहत लिया जाता हैं. इसकी जांच तक नहीं किया जाता है कि किस स्कूल में 25 फीसदी के तहत कितने बच्चे का नामांकन लेना हैं. जो स्कूल जितने बच्चे का लिस्ट विभाग को भेजता है, उतने ही बच्चे का नामांकन लिया जाता है. इसके अलावा जो स्कूल लिस्ट नहीं भेजता उस पर कोई कार्रवाई भी नहीं होता हैं.
नहीं पहुंचते स्कूल में बच्चे
शिक्षा के अधिकार कानून की बात करे तो किसी भी प्राइवेट स्कूल के तीन किलोमीटर के दायरे में रह रहें तमाम गरीब बच्चों का नामांकन उस स्कूल में लिया जायेगा. इन बच्चों को स्कूल तक कौन पहुंचाये, इसकी जिम्मेवारी ना तो सर्व शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा लिया जाता है और ना ही स्कूल ही इस जिम्मेवारी को लेने को तैयार हैं. जो बच्चे पहुंच गये, उनका नामांकन ले लिया जाता है, बाकी पर कोई ध्यान नहीं देता हैं. एक स्कूल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार जो बच्चे स्कूल नामांकन के लिए आ जाते है, उन्हीं का नामांकन ले पाते है. बांकी स्कूल यह काम करने में सक्षम नहीं होता है कि पूरे एरिया से ऐसे बच्चे को खोज कर नामांकन लेता रहे.
पैसे तो मिलते है, नहीं होती है इंक्वायरी
शिक्षा के अधिकार के तहत हर साल लाखों रुपये का बजट होता हैं. सरकार के द्वारा बजट के हिसाब से पैसों का वितरण भी स्कूलों को हर साल किया जाता है. लेकिन इसका फायदा उन गरीब बच्चों को नहीं हो पाता जिनके लिए सरकार इतना पैसे खर्च कर रही है.
जुर्माना देना करते है पसंद, नामांकन नहीं
पटना के कई बड़े प्राइवेट स्कूल तो हर साल नामांकन नहीं लेने पर जुर्माना देना पसंद करते है, लेकिन आरटीइ के तहत नामांकन लेना उन्हें पसंद नहीं. कई स्कूल तो लगातार कई सालों से आरटीइ के तहत जुर्माना भी सरकार को दे रहे है. इतना ही नहीं जो भी स्कूल शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लेने है उसमें किसी भी बड़े स्कूल का नाम शामिल नहीं होता हैं. छोटे स्तर पर चलाये जा रहे गली मुहल्ले के स्कूल में ही आरटीइ के तहत नामांकन हो पाता है. इसमें अधिकांश स्कूल सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त भी नहीं होते है. सर्व शिक्षा अभियान के तहत आने वाले स्कूल ही नामांकन ले पाते है.

पटना जिला में सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड स्कूल की कुल संख्या  - 96
सर्व शिक्षा अभियान द्वारा आइसीएसइ बोर्ड और सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या  -  88
सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रस्वीकृत प्राप्त स्कूलों की संख्या  - 168
सीबीएसइ के अंतर्गत कुल नामांकन  -  10
आइसीएसइ बोर्ड के अंतर्गत कुल नामांकन  - 6
प्रस्वीकृत प्राप्त स्कूलों में लिये गये कुल नामांकन  - 23

शिक्षा के अधिकार के तहत लिये गये अभी तक नामांकन
साल           -     नामांकन की कुल संख्या
2011-12    -         319
2012-13    -         329
2013-14    -         700
2014-15    -         690

कोट
हमारे जानकारी में अभी पूरा डाटा नहीं हैं. कितना नामांकन लिया गया है और कितना नहीं लिया गया है. अभी जानकारी में नहीं है. सोमवार का हम पूरा डिटेल्स बता पायेंगे. अगर कोई स्कूल नामांकन लेने मे लापरवाही कर रहा है तो ऐसे स्कूल की जानकारी भी हम लेंगे.
श्रीधर सी, प्राइमरी निदेशक, शिक्षा विभाग  

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