Saturday, June 13, 2015

बढ़ रहे हैंडीकैप छात्रों की संख्या, रैंप नहीं होने से छूट जाती है बीच में पढ़ाई

बढ़ रहे हैंडीकैप छात्रों की संख्या, रैंप नहीं होने से छूट जाती है बीच में पढ़ाई

- सीबीएसइ ने 2009 से 2014 के हैंडीकैंप छात्रों की लिस्ट किया जारी
- जितने पढ़ते हैं उतने स्टूडेंट्स नहीं दे पाते बोर्ड एग्जाम
संवाददाता, पटना
जोश और उत्साह स्कूल तक तो पहुंचा देता है. मेहनत भी करते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाते हैं. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की ओर से नियम तो कई बनाये गये, लेकिन इस नियम को पटना के अधिकांश स्कूल फॉलो नहीं कर रहे है. भले क्लास 9वीं में डिसएबल स्टूडेंट्स की अच्छी खासी संख्या रजिस्ट्रेशन के समय होती है. लेकिन बोर्ड परीक्षा में शामिल होने में इन स्टूडेंट्स की संख्या आधी से भी कम हो जाती है. यह खुलासा सीबीएसइ के उस डाटा से हुआ है जो हाल में जारी किया गया है. सीबीएसइ के 10वीं ओर 12वीं डाटा के अनुसार डिसएबल स्टूडेंट्स की संख्या जो रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म भरवाने के समय होती है, वो परीक्षा देते समय घट कर कम हो जाती है. इस बार सीबीएसइ 10वीं और 12वीं में कुल 12 हजार  डिसएबल स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था. इसमें हैंडीकैप स्टूडेंट्स की संख्या 6 हजार के लगभग में थी. लेकिन इसमें परीक्षा में मात्र 2 हजार के लगभग स्टूडेंट्स की शामिल हो पायें. पटना रिजन से  10वीं बोर्ड के लिए 457 स्टूडेंटस रजिस्टर्ड हुए थे. लेकिन इसमें से मात्र 429 स्टूडेंट्स ही परीक्षा में शामिल हो पाये. उसी तरह 12वीं बोर्ड की परीक्षा में 277 डिसएबल स्टूडेंट्स रजिस्र्ट हुए थे. इसमें से 180 स्टूडेंट
- स्कूलों में अब तक नहीं बना रैंप
बोर्ड परीक्षा में घट रहे स्टूडेंट्स की संख्या के पीछे स्कूलों में डिसएबल स्टूडेंट्स के लिए सुविधा नहीं होना हैं. सीबीएसइ के अनुसार अधिकांश स्कूल में उपर के किसी भी फ्लोर पर जाने के लिए बस सीढ़ी को ही माध्यम बनाया गया है. रैंप की कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसे में स्टूडेंट्स के लिए उन क्लास तक जाना संभव नहीं हो पाता है. उनके लिए 75 फीसदी क्लास पूरा करना नहीं हो पाता है. सीबीएसइ के अनुसार पटना रिजन में यह अधिक देखा गया है. पटना रिजन के अधिकांश स्कूलों में रैंप नहीं है. इस कारण इस रिजन से अधिक स्टूडेंट्स रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी स्कूल छोड़ देते है.
- स्कूल में नहीं होता डिसएबल के लिए परीक्षा की समुचित व्यवस्था
सीबीएसइ की ओर से दो साल पहले एक सक्रूलर निकाला गया था. इसके तहत हर स्कूलों को यह निर्देश दिया गया था कि जो भी परीक्षाएं स्कूल में आयोजित होगी, उसमें डिसएबल स्टूडेंट्स का खास ख्याल रखा जायेगा. हर सेंटर को पहले ही जानकारी दे दी जायेगी कि उस सेंटर पर कितने डिसएबल स्टूडेंट्स शामिल होंगे. यह नियम बोर्ड परीक्षाओं के अलावा तमाम प्रतियोगी परीक्षा के लिए भी लागू होगा. लेकिन इस नियम को अधिकांश स्कूल लागू नहीं करते है. अधिकांश स्कूल में डिसएलब स्टूडेट्स के सुविधाजनक परीक्षा दिलवाने पर फोकस नहीं किया जाता है. ज्ञात हो कि पटना के अधिकतर स्कूल कई फ्लोर के हैं. ऐसे में परीक्षा देने में डिसएबल स्टूडेंट्स को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.
- प्राइवेट कैंडिडेंट्स के रूप में भी नहीं मिल पाती सुविधा
सीबीएसइ के अनुसार हाल के कई सालों की बात करें तो डिसएबल स्टूडेंट्स प्राइवेट कैंडिडेंट्स के रूप मे बोर्ड परीक्षा में अधिक शामिल हुए है. लेकिन यहां पर भी डिसएबल स्टूडेट्स को नुकसान होता है. प्राइवेट कैंडिडेंट्स के रूप में जिस परीक्षा केंद्र पर उनका केंद्र बनाया जाता है. वहां पर सुविधा का अभाव होता है. जिससे कई डिसएबल स्टूडेंट्स परीक्षा नहीं दे पाते है. सीबीएसइ के अनुसार पटना के अलावा कई रिजन में डिसएबल स्टूडेंट इस वजह से परीक्षा नहीं दे पाते हैं, क्योंकि सेंटर पर परीक्षा देने की सुविधा नहीं होती है.

सीबीएसइ ने डिसएबल स्टूडेंट्स के लिए बनाये थे ये नियम
- डिसएबल स्टूडेंट्स के लिए हर स्कूल में रैंप की होगी व्यवस्था
- स्कूल कोशिश करें कि फस्र्ट फ्लोर पर ही अधिकांश क्लास चलाये
- स्कूल में सीढ़ी के साथ रैंप भी बनाये जायें
- सेमिनार, इवेंट, एक्टिविटी आदि का आयोजन स्कूल के ग्राउंड फ्लोर पर ही होना चाहिए
- कोई भी एग्जाम स्कूल में ग्राउंड फ्लोर पर ही हो
- बोर्ड परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षा के इंतजाम कोई भी स्कूल उपरी किसी भी मंजिल पर नहीं करेगा
- बोर्ड परीक्षा में अगर कोई डिसएबल स्टूडेंट हैं तो उसके लिए परीक्षा का इंतजाम ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए

सीबीएसइ ने 2009 से 2014 तक बोर्ड परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्र और बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की लिस्ट जारी किया हैं. इससे देखा गया हैं कि बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या से बोर्ड परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या से काफी कम हैं.
 साल       -   रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों की संख्या   -   बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या
2009       -        23                                                 -        20
2010      -        53                                                  -         51          
2011       -       97                                                   -        95
2012       -    123                                                    -      120  
2013       -    33                                                      -     23
2014       -   128                                                     -     120
नोट   -  यह 10वीं बोर्ड की परीक्षा का डाटा है

 साल       -   रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों की संख्या   -   बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या
2009       -       18                                                   -        12
2010      -        36                                                   -        25          
2011       -       55                                                   -       43
2012       -    58                                                      -      42
2013       -    67                                                     -     23
2014       -   43                                                     -    35
नोट   -  यह 12वीं बोर्ड की परीक्षा का डाटा है

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