हर दिन तलाक के दस मामले दर्ज, न्याय मिलने में लग जाते है दस साल
- जनवरी से अब तक फैमिली कोर्ट में आयें 678 तलाक के मामले
- महिला थाना में पति पत्नी के 750 मामले हुए हैं दर्ज
संवाददाता, पटना
रोहित राज और प्रियंका (बदला हुआ नाम) ने फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए केस फाइल किया. लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला. इससे इतने सालों बाद भी वो दोनो अलग नहीं हो पायें है. कुछ ऐसा ही हाल एसपी वर्मा रोड के रहने वाले पियूष अग्रवाल और रागनी (बदला हुआ नाम) का है. फैमिली कोर्ट में इनके तलाक के मामले पिछले 20 साल से घूम रहे है, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला. वहीं पटना सिटी के रहने वाले आयूष और सोनी को फैमिली कोर्ट से तलाक लेने में 11 साल लग गये. इस बीच ना तो ये लोग अपनी जिंदगी दुबारा पटरी पर ला सके और ना ही दुबारा घर की बसा सके. तलाक मिलने में इतना समय लगने के बाद बावजूद शादियां टूटने का रफ्तार काफी बढ़ गयी हैं. पटना सिविल कोर्ट स्थिति फैमिली कोर्ट की माने तो हर दिन तलाक संबंधित दस मामले फैमिली कोर्ट में दर्ज होते हैं. लेकिन इन्हें न्याय मिलने में दस साल से भी अधिक लग जाता है . ऐसे में इस टूटते रिश्ते को ढोते रहना पति और पत्नी दोनों के लिए ही काफी कठिन होता है.
- 7000 पेंडिंग और 678 मामले और हुए दर्ज
पटना फैमिली कोर्ट में अभी भी हजारों की संख्या में तलाक के मामले पेंडिंग है. ये मामले कोई एक साल के नहीं बल्कि कई साल पुराने हैं. अभी तक सात हजार तलाक के केस कोर्ट में पेंडिंग है. समय-समय पर लोग न्याय के लिए आते तो हैं लेकिन उन्हें हर बार लौटा दिया जाता है. लेकिन मामले है जो हर दिन दर्ज होते है. अभी की ही बात करें तो जनवरी से लेकर अभी तक फैमिली कोर्ट में 678 मामले दर्ज कराया जा चुका है. मामले तो दर्ज होते है, लेकिन न्याय नहीं मिलता है.
- महिला थाना में बस बनती है फाइल
पति पत्नी के झगड़े को लेकर महिला थाने में हर दिन लाइन लगी रहती हैं. थाने से मिली जानकारी के अनुसार जनवरी से जून तक 750 मामले पती पत्नी के दर्ज हुए है. इसमें दहेज प्रताड़ना, मारपीट आदि शामिल है. थाने के अनुसार हर दिन 10 से 12 केस आते है. जो पती पत्नी के झगड़े से संबंधित होते है. पहले तो थाने की ओर से काउंसेलिंग की जाती है. काउंसेलिंग मे जरिये मामले को सुलझाने की कोशिश की जाती है. कई मामले में समझौता भी होता है. लेकिन कई मामले में समझौता नहीं हो पाता है.
- महिला हेल्प लाइन में 50 फीसदी बढ़ गया घरेलू हिंसा के मामले
महिला थाना हो या महिला आयोग या फिर महिला हेल्प लाइन सभी जगहों ऐसे मामलों की लंबी लाइन लगी हुई है. महिला हेल्प लाइन की बात करें तो घरेलू हिंसा संबंधित मामले हर दिन हेल्प लाइन में आते ही आते हैं. हर साल इसकी संख्या बढ़ती ही जा रही है. जहां 2009 में घरेलू हिंसा के 174 मामले हेल्प लाइन में दर्ज किये गये थे. वहीं 2014 में यह मामला बढ़ कर 377 तक पहुंच गया है. हेल्प लाइन की माने तो 2013 से 2014 के बीच 30 फीसदी मामले मे बढ़ोतरी हो गयी है.
महिला हेल्प लाइन में घरेलू हिंसा के मामले दर्ज
वर्ष - कुल दर्ज मामले
2013 - 290
2014 - 377
2015 (जनवरी से मई तक) - 160
महिला थाना में घरेलू हिंसा से मामले दर्ज
वर्ष - कुल दर्ज मामले
2013 - 568
2014 - 670
2015 (जनवरी से जून में अब तक) - 750
पटना फैमिली कोट में घरेलू हिंसा के मामले
- कोट में अब तक 7000 हजार डायवोर्स के केस पेंडिंग हैं
- इसमें से अब तक 252 मामलों का ही डिस्पोजल किया गया है
- 2015 के जनवरी से जून तक 678 केस तलाक के लिए फाइल किये गये हैं
- फैमिली कोट में 275 महिलाओं ने मेंटेंनेस के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं
इन कारणों से बढ़ रही पति पत्नी में झगड़े
- अभी भी मेल डॉमिनेट का मामला पति पत्नी के बीच आ जाता है
- शक के कारण बढ़ती है दूरियां
- दहेज भी बनता है कई बार कारण
- परिवारिक झगड़े तलाक तक पहुंच जाता है
- आज भी महिलाओं को दबा कर रखा जाता है
कोट
फैमिली कोर्ट में मामले तो आते है. लेकिन इसे सॉल्व करने में महीनों लग जाता है. ऐसे में महिलाएं जिस न्याय के उम्मीद में आती हैं. वो यहां पर नहीं हो पाता है. उचित समाधान का अभाव है. जो सिस्टम में काफी समय लगा देता है. ऐसे में केस की संख्या तो हर साल बढ़ती हैं. लेकिन उसका समाधान नहीं हो पाता हैं.
श्रुति सिंह, एडवोकेट
पति पत्नी के झगड़े नये नहीं हैं. और ना ही यह मारपीट की कहानी नयी है. महिलाओं पर हमेशा घरेलू हिंसा होता रहा है . लेकिन अभी तक महिलाएं चूप रहती थी. लेकिन अब महिलाएं बोलने लगी हैं. ऐसे में इस तरह के झगड़े अब बाहर दिखने लगा हैं. महिलाएं अपने समस्याओं के निदान के लिए कभी थाना तो कभी हेल्प लाइन और कोर्ट तक पहुंच जाती है.
रेणू रंजन, सोसियोलॉजी डिपार्टमेंट, मगध महिला कॉलेज