Monday, June 29, 2015

एसएमएस और इ-मेल से मिलेगा परीक्षा केंद्र की जानकारी

- एआइपीएमटी के अभ्यर्थी से सीधे संपर्क में होगा सीबीएसइ
संवाददाता, पटना
ऑल इंडिया प्री मेडिकल और प्री डेंटल टेस्ट (एआइपीएमटी) के  रि-एग्जाम के लिए सीबीएसइ ने तैयारी शुरू कर दी हैं. अभ्यर्थी को अधिक परेशानी ना हो और सारी सुचनाएं समय पर मिले, इसके लिए सीबीएसइ सीधे अभ्यर्थी के संपर्क में रहेगा. सीबीएसइ की माने तो हर अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र की जानकारी एसएमएस और इ-मेल आइडी के माध्यम दिया जायेगा. परीक्षा केंद्र तो वहीं हैं, लेकिन अभ्यर्थी के सीट को बदल दिया गया हैं. किस अभ्यर्थी को कौन से परीक्षा केंद्र पर परीक्षा में शामिल होना हैं, इसकी जानकारी उन्हें एसएमएस और इ-मेल से दिया जायेगा. 

बिजली बचाओ. अंक भी मिलेगा और इनाम भी

- सीबीएसइ स्कूलों में बिजली बचाने पर मिलेगा एक्स्ट्रा मार्क्‍स
- बिजली बचाने पर मिले अंक को जोड़ा जायेगा एफए-3 में
संवाददाता, पटना
जो जितना एनर्जी (बिजली) बचायेगा, उसे उतने अंक मिलेंगे. घर से लेकर स्कूल और फिर बाहर तक एनर्जी बचाने पर मार्क्‍स दिये जायेंगे. ये मार्क्‍स स्टूडेंट्स के एक्स्ट्रा करिकुलम में जुड़ेगा. इतना ही नहीं, अंक साथ स्टूडेंट्स को इनाम भी दिये जायेंगे. सोशल वर्क में स्टूडेंट्स की अधिक से अधिक भागीदारी हो, इसके लिए सीबीएसइ देश भर में ऐसे कुछ कांपिटिशन आयोजित कर रही है जिसके अंक से स्टूडेंट्स को ना सिर्फ कांपिटिशन में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, बल्कि उन्हें फाइनल एग्जाम के रिजल्ट में भी मदद मिलेगी. पहली बार सीबीएसइ ऐसा कांपिटिशन आयोजित कर रहा है जिसमें मार्क्‍स के साथ इनाम का भी फायदा स्टूडेंट हो मिलेगा. इसी को लेकर सीबीएसइ एनर्जी कंजर्वेशन पर पेटिंग कांपिटिशन का आयोजन करने जा रहा है. स्कूल लेवल से स्टेट और फिर नेशनल लेवल तक यह कांपिटिशन आयोजित किया जायेगा. इसमें शामिल होने वाले तमाम स्टूडेंट्स को मिलने  वाले ग्रेड के अनुसार मार्क्‍स दिये जायेगे.
- स्टूडेंट्स को बांटे गये है दो केटेगरी में
पेंटिंग कांपिटिशन में शामिल होने के लिए स्टूडेंट्स को दो केटेगरी में रखा गया है. केटेगरी प्रथम में चौथी से छठी तक के स्टूडेंट्स शामिल होंगे. वहीं द्वितीय केटेगरी में 7वीं से 9वीं तक के स्टूडेंट्स शामिल होंगे. दोनों केटेगरी के लिए अलग-अलग टॉपिक रखा गया है. इस कांपिटिशन में स्टेट लेवल और नेशनल लेवल पर भी स्टूडेंट्स को इनाम दिये जायेंगे. स्टेट लेवल पर जहां 20 हजार से इनाम की राशि रखी गयी है वहीं नेशनल लेवल पर 1 लाख रुपये प्रथम पुरस्कार पाने वाले को मिलेगा. इस कांपिटिशन में शामिल होने के लिए हर स्कूल को स्कूल के नाम के साथ स्टूडेंट का नाम लिख कर सीबीएसइ को भेजना होगा.
- एफए-3 () में जुड़ेगा अंक
सीबीएसइ के अनुसार जो स्टूडेंट्स बिजली बचाओ अभियान के तहत बिजली बचाएगा, उसे एफए-3 के तहत 5 अंक दिये जायेंगे. ये अंक स्टूडेंट्स के फाइनल मार्क्‍स सीट में जुड़ेंगे. एफए-3 के तहत 10 अंक का टेस्ट स्टूडेंट्स को देना होता हैं. इसमें एक्टिविटी पर फोकस होता है. स्टूडेंट्स जो प्रोजेक्ट वर्क पर काम करते हैं. वो एफए-3 के अंतर्गत की आते हैं.

प्रथम केटेगरी वाले स्टूडेंट्स के लिए टॉपिक
- सेव एनर्जी, सेक्योर योअर लाइफ
- लाइफ के लिए बिजली का बचाव
- बिजली बजाओ, प्रकाश बढ़ाओ

द्वितीय केटेगरी वाले स्टूडेंट्स के लिए टॉपिक
- ग्लोबल वार्निग बन रहा ग्लोबल वॉर्मिग
- सही बनाओंगे तो सही पाओंगे
- उर्जा बचत की संस्कृति का करें विकास, उज्जवल होगा भविष्य और घर-घर प्रकाश

इस तरह होगा कांपिटिशन का तिथि के अनुसार आयोजन
1. स्कूल लेवल कांपिटिशन  - 30 सितंबर तक हो जाना है
- स्कूल लेवल कांपिटिशन में प्रथम केटेगरी और द्वितीय केटेगरी दोनों से 50-50 पेंटिंग को चुना जायेगा.
- स्कूल लेवल कांपिटिशन 2 घंटे का होगा
- कांपिटिशन के बाद स्कूल के प्रिंसिपल तमाम पेंटिंग में से दो बेस्ट पेंटिंग चुन कर उसे स्टेट लेवल के लिए सेलेक्ट करेंगे

2. स्टेट लेवल कांपिटिशन  -  15 नवंबर तक लेना है
- स्टेट लेवल कांपिटिशन में स्कूल लेवल में चुने गये स्टूडेंट्स ही शामिल होंगे. इसमें दोनों ही केटेगरी से 25-25 पेंटिंग को चुना जायेगा.
- स्टेट लेवल कांपिटिशन में आन द स्पॉट पेंटिंग बनाना होगा.
- इसके लिए हर स्टूडेंट को 1 हजार रुपये की राशि फी के तौर जमा करना होगा
- इसका आयोजन सीबीएसइ के नोडल ऑफिस में किया जायेगा. आने जाने का खर्च बोर्ड की ओर से स्टूडेंट को किया जायेगा

3. नेशनल लेवल कांपिटिशन  - 12 दिसंबर
- नेशनल लेवल पर कांपिटिशन में फस्र्ट, सेकेण्ड और थर्ड की चुनाव दोनों ही केटेगरी से होगा. नेशल लेवल का आयोजन दिल्ली में होगा.
- नेशनल लेवल कांपिटिशन भी 2 घंटे का होगा
- 12 दिसंबर को कांपिटिशन और इसका रिजल्ट  14 दिसंबर को निकल जायेगा

कांपिटिशन में इस बार यह होगा नया
- इस कांपिटिशन में स्कूल लेवल पर हर स्टूडेंट को शामिल होना होगा
- स्कूल स्तर पर पहले दो विजेता को हर स्कूल से स्टेट लेवल पर शामिल होने का मौका मिलेगा

प्रथम केटेगरी (स्टेट लेवल प्राइज)
फस्र्ट प्राइज  - 20 हजार
सेकेण्ड प्राइज  -  15 हजार
थर्ड प्राइज  -  5 हजार
कांसूलेशन प्राइज  -  2500

द्वितीय केटेगरी (स्टेट लेवल प्राइज)
फस्र्ट प्राइज  - 20 हजार
सेकेण्ड प्राइज  -  15 हजार
थर्ड प्राइज  -  5 हजार
कांसूलेशन प्राइज  -  2500

प्रथम केटेगरी (नेशनल लेवल प्राइज)
फस्र्ट प्राइज  - 1 लाख
सेकेण्ड प्राइज  -  50 हजार
थर्ड प्राइज  -  25 हजार
कांसूलेशन प्राइज  -  10 हजार

द्वितीय केटेगरी (नेशनल लेवल प्राइज)
फस्र्ट प्राइज  - 1 लाख
सेकेण्ड प्राइज  -  50 हजार
थर्ड प्राइज  -  25 हजार
कांसूलेशन प्राइज  -  10 हजार

अधिक जानकारी के लिए यहां पर करें संपर्क
011-23231247
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महिला थाना मांग रहा रेप होने का प्रूव, कहा मेडिकल कराओ, तभी मांनेंगे

महिला थाना मांग रहा रेप होने का प्रूव, कहा मेडिकल कराओ, तभी मांनेंगे

- नवंबर 2014 से महिला थाना का लगा रही चक्कर
- शादी से पहले लड़का ने किया अपने ही ऑफिस में बुला कर रेप
संवाददाता, पटना
जब महिला थाना में ही रेप होने का प्रूव मांगा जायेंगा तो उसे न्याय की क्या उम्मीद होगी. लेकिन ऐसी ही एक घटना महिला थाना में हुई है जिसमें पीड़िता से दुष्कर्म (रेप) होने का प्रूव मांगा जा रहा है. पीड़िता रागनी शर्मा (बदला हुआ नाम) छह महीने से महिला थाना में रेप का केस दर्ज करवाने को चक्कर लगा रही हैं, लेकिन उसका मामला अभी तक महिला थाना में दर्ज नहीं किया गया हैं. अब जब कोर्ट के आर्डर के बाद पीड़िता को महिला थाना ने शनिवार को बुलाया तो अब पीड़िता से रेप होने का प्रूव मांगा जा रहा है. रूपसपुर बेली रोड की रहने वाली पीड़िता रागनी के अनुसार शनिवार को खुद मृदुला कुमारी ने रेप होने का प्रूव मांगा हैं. कहा है कि पहले मेडिकल करवा कर लाओ, तभी मांनेगे कि तुम्हारे साथ रेप की घटना हुई हैं.
- नवंबर 2014 से थाना का लगा रही चक्कर
पीड़िता के साथ उसके ही होने वाले पति ने अपने ऑफिस में बुला कर रेप किया था. मामला नवंबर 2014 का हैं. जेडी वीमेंस कॉलेज से पीजी की पढ़ाई कर रही रागनी की शादी भिखना पहाड़ी,  थाना कदमकुंआ निवासी मनीष कुमार ने तय किया गया. शादी 30 जनवरी 2015 को होना था. दहेज के तौर पर 4 लाख 25 हजार रुपये भी लड़के वालों ने लिया था. इसके बाद शादी की तैयारी शुरू हो गयी. सारे तैयारी कर ली गयी थी. शादी का कार्ड भी छप गया था. इसी बीच नवंबर में एक दिन पीड़िता को बहला कर मनीष एग्जीविशन रोड स्थिति अपने ऑफिस में ले गया. ज्ञात हो कि मनीष शैदपुर में गल्र्स होस्टल चलाता हैं. ऑफिस ले जाकर पीड़िता के साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया. इसके बाद शादी करने से मुकर गया. दहेज के नाम पर अधिक पैसे की मांग भी करने लगा. पीड़िता 20 नवंबर 2014 को महिला थाना पहुंची. लेकिन उसका मामला दर्ज नहीं किया गया. उसके बाद से अब तब पीड़िता बस मामला दर्ज करवाने के लिए छह महीने से महिला थाना का चक्कर लगा रही हैं.
- आइपीएल की धारा 376 के तहत दर्ज हो केस
इसके बाद पीड़िता कोट पहुंची. 13 जनवरी 2015 को केस फाइल किया. 14 जनवरी 2015 को सिविल कोर्ट के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने आइपीएल की धारा 376 के तहत एफआइआर दर्ज करने को महिला थाना से कहा. एक महीने बीत जाने के बाद भी महिला थाना में मामला दर्ज नहीं हुआ. इसके बाद पीड़िता फिर कोर्ट पहुंची. फिर कोर्ट ने 27 फरवरी को महिला थाना को रिमाइंडर भेजा. लेकिन फिर भी मामला दर्ज नहीं हुआ. इसके बाद 4 मई को कोर्ट ने महिला थाना को सो कॉज नोटिस दिया. इस नोटिस में पूछा गया है कि पीड़िता का मामला महिला थाना में क्यूं दर्ज नहीं किया जा रहा है.
- 26 जून को एक्टिव हुई महिला थाना
कोर्ट के बार-बार कहने के बाद 26 जून को महिला थाना पीड़िता रागनी के मामले में एक्टिव हुई. उसे 26 जून को पीड़िता को फोन कर शनिवार को थाना बुलाया गया. जब शनिवार को पीड़िता थाना पहुंची तो पहले से ही वहां पर लड़के की पूरी फैमिली मौजूद थी. पीड़िता गयी लेकिन उसका मामला दर्ज नहीं हुआ. उल्टे महिला थाना ने उसे रेप होने का प्रूव मांगा. पीड़िता ने बताया कि उसे सोमवार (29 जून) को फिर बुलाया गया था कि उसका दर्ज किया जायेगा. लेकिन सोमवार मृदुला कुमारी ने फोन नहीं उठाया. अब उसे मंगलवार (30 जून) को फिर महिला थानाध्यक्ष ने थाना बुलाया हैं.
- एसएसपी के पास पहुंची पीड़िता
पीड़िता को सोमवार को महिला थानाध्यक्ष मृदुला कुमारी ने बुलाया था. लेकिन पीड़िता द्वारा बार-बार फोन करने के बावजूद थानाध्यक्ष ने फोन नहीं उठाया. जब दिन के एक बजे पीड़िता ने फिर फोन किया तो थानाध्यक्ष ने पीड़िता ये यह कह कर मंगलवार को आने के लिए कहा कि आज लेट हो गया है. अब पीड़िता को महिला थाना में मंगलवार को बुलाया गया हैं. पीड़िता रागनी ने बताया कि मृदुला कुमारी से तो नहीं मिल पायी तो मैने एसएसपी विकास वैभव को सोमवार को आवेदन दिया हैं.

कोट
पीड़िता मेरे पास जनवरी 2015 में आयी थी. 13 जनवरी को केस फाइल किया गया था. 14 जनवरी को सिविल कोर्ट के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट न महिला थाना को एफआइआर दर्ज करने को कहा था. अब तक कोर्ट की ओर से कई बार रिमाइंडर भी महिला थाना को दिया गया हैं. लेकिन अभी तक पीड़िता का मामला दर्ज नहीं हुआ हैं.
श्रुति सिंह,पीड़िता की वकील

नोट  - इस संबंध में थानाध्यक्ष मृदुला कुमारी ने संपर्क करने की कोशिश की गयी. उन्होंने फोन तो रिसीव किया, लेकिन बिना कुछ बोले फोन यह कह कर काट दिया कि कोई ऐसा मामला हमारे पा

जेनरल में 60 और विकलांग केटेगरी में 46 कैंडिडेंट्स का हुआ काउंसिलिंग

- नौ मेडिकल कॉलेजों में 782 सीटों के लिए नामांकन को शुरू हुआ काउंसिलिंग
संवाददाता, पटना
बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (बीसीइसीइ) के सफल अभ्यर्थी का काउंसिलिंग सोमवार से शुरू कर दी गयी हैं. काउंसिलिंग के पहले दिन 106 अभ्यर्थी को बुलाया गया था. इसमें 46 विकलांग कोटे और 60 जेनरल कोटे के अभ्यर्थी काउंसिलिंग में शामिल थे. काउंसिलिंग के पहले ही दिन 14 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहें. इसमें 8 विकलांग कोटे के और 6 जेनरल कोटे के अभ्यर्थी शामिल हैं. बीसीइसीइ के अनुसार जो अभ्यर्थी अनुपस्थिति रहें, उन्हें अब सीट खाली रहने के बाद ही नामांकन लिया जा सकेगा. काउंसिलिंग सुबह 10 बजे से शुरू हुआ जो देर शाम तक चला. मेडिकल कॉलेज में नामांकन के लिए प्रथम चरण की काउंसिलिंग आज से शुरू किया गया. हर दिन हर केटेगरी के लिए काउंसिलिंग की तिथि तय की गयी है.
- 782 सीटों के लिए लिया जायेगा नामांकन
बीसीइसीइ के अनुसार काउंसिलिंग 29 जून से 9 जुलाई तक चलेगा. पूरे प्रदेश के नौ मेडिकल कॉलेजों के लिए नामांकन लिये जायेंगे. कुल 950 सीटों में 782 सीटों पर ही नामांकन लिया जायेगा. इसमें से 15 फीसदी सीटें केंद्रीय मेडिकल कोटे के लिए सुरक्षित रखा गया है. एआइपीएमटी में माध्यम से इन 15 फीसदी सीटों पर नामांकन लिया जायेगा.  ज्ञात हो पीसीबी ग्रुप के आधार पर अभ्यर्थी एमबीबीएस, बीडीएस, बीभीएससी आदि पाठ्यक्रमों में नामांकन ले पायेंगे. सुबह 10 बजे से काउंसिलिंग शुरू किया गया जो देर शाम तक चला. पहले विकलांग अभ्यर्थी को काउंसिलिंग का मौका दिया गया. विकलांग ग्रुप में 46 अभ्यर्थी पहले दिन काउंसिलिंग में शामिल हुए. वहीं जेनरल केटेगरी में 60 अभ्यर्थी पहले दिन काउंसिलिंग में शामिल हुए.

पहले दिन काउंसिलिंग की स्थिति

विकलांग कोटे के अभ्यर्थी आयें  - 46
एबसेंट रहें  -  8 अभ्यर्थी
अनफिट रहें  - 6 अभ्यर्थी
एमबीबीएसइ नहीं लेना चाहते है  -  19 अभ्यर्थी
पीएमसीएच में नामांकन हुआ  - 4 अभ्यर्थी का
एनएमसीएच में नामांकन हुआ  -  2 अभ्यर्थी का
अन्य केटेगरी(हेमियोपैथी, आयुवेर्दिक आदि) में नामांकन हुआ  - 6 अभ्यर्थी का

जेनरल कोटे के अभ्यर्थी आयें  - 60
एबसेंट रहें  -  6 अभ्यर्थी
पीएमसीएच में नामांकन हुआ  - 54 अभ्यर्थी का

हर दिन हर केटेगरी के अभ्यर्थी को काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया हैं
कोटि           -      काउंसिलिंग के लिए निर्धारित तिथि
डिसएबल     -      29 जून को
जेनरल        -  29 जून, 30 जून, 1 से 4 जुलाई तक
एसटी        -     4 जुलाई
एससी       -     4 से 6 जुलाई तक
इबीसी       -  6 और 7 जुलाई
बीसी        -   8 और 9  जुलाई
आरसीजी   -    9  जुलाई

कोट
मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के लिए सोमवार से काउंसिलिंग शुरू कर दी गयी है. इस बार हर दिन हर केटेगरी के अभ्यर्थी को बुलाया गया है. काउंसिलिंग के पहले दिन 14 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहें. 9 जुलाई तक प्रथम चरण की काउंसिलिंग चलेगी. 782 सीटों के लिए नामांकन लिया जायेगा.
अनिल कुमार, ओएसडी, बीसीइसीइ

Sunday, June 28, 2015

तीन महीने शेष, एफिलिएशन नहीं मिला तो 4 हजार स्टूडेंट्स का साल हो जायेगा बर्बाद

- अप्लाइ करने के बावजूद दो साल बाद भी नहीं मिला एफिलिएशन
- सीबीएसइ ने नहीं भेजी कोई जांच कमेटी
संवाददाता, पटना
दो साल पहले मई 2013  में पूरे प्रदेश से आठ स्कूलों ने सीबीएसइ की मान्यता लेने के लिए अप्लाइ किया. अप्लाइ में 20 हजार रुपये भी खर्च किया. आवेदन को सीबीएसइ ने एप्रूव भी कर दिया. लेकिन अभी तक मान्यता देने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई. ना कमिटी बनी हैं और ना ही स्कूल की जांच की गयी हैं. अब जब स्कूल में 9वीं की पढ़ाई 2015 अप्रैल सेशन से शुरू हो चुका हैं. तो ऐसे में अगर इन स्कूलों को सीबीएसइ जल्द मान्यता नहीं देता हैं तो इन स्कूलों के लगभग चार हजार स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में लटक जायेगा. सीबीएसइ दिल्ली के सूत्रों की माने तो पूरे देश में 50 और बिहार में 8 ऐसे स्कूल हैं जिन्होंने दो साल पहले एफिलिएशन के लिए अप्लाइ किया, लेकिन अभी तक इसकी कोई प्रक्रिया बोर्ड की ओर से शुरू नहीं किया गया हैं. ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ने वाले 9वीं क्लास के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पायेगा.
- पटना से तीन और बांकी पांच हैं दूसरे जिलों से
मान्यता लेने की सूची में पटना के तीन बड़े स्कूलों का नाम हैं. ये वो स्कूल है जिन्होंने कई सालों पहले पटना में स्कूल खोला हैं. 7वीं तक के लिए स्कूल को खोला गया था. इन स्कूलों में इस साल से 9वीं की पढ़ाई शुरू हो गयी. पटना जिला के अलावा भागलपुर, नवादा, बिहारसरीफ, दरभंगा, मुजफ्फरपुर जिला से एक-एक स्कूल इसमें शामिल हैं. इन स्कूलों में अभी लगभग चार हजार स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं. क्लास 9वीं की बात करें तो लगभग एक हजार स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं.
- 31 मार्च 2015 तक मिल जाना चाहिए था मान्यता
सीबीएसइ सूत्रों की माने तो इन तमाम स्कूलों को 31 मार्च 2015 तक सीबीएसइ को मान्यता दे देना चाहिए था. क्योंकि 2015 में इन स्कूलों में 9वीं क्लास शुरू कर दिये गये हैं. अब इन स्कूलों के स्टूडेंट्स 9वीं क्लास में रजिस्ट्रेशन करवायेगे, तभी 10वीं बोर्ड की परीक्षा 2016 सत्र में ये दे पायेंगे. ऐसे में इन स्कूलों को 31 मार्च 2015 में मान्यता मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होती. इन स्कूल के स्टूडेट्स 9वीं की पढ़ाई तो शुरू कर दिये हैं, लेकिन मात्र तीन महीने तक ही ये पढ़ाई कर पायेंगे. सीबीएसइ की माने तो अगस्त में होने वाले 9वीं के रजिस्ट्रेशन में इन स्कूलों के स्टूडेंट्स शामिल नहीं हो पायेंगे. इससे इन स्टूडेंट्स का साल बर्बाद हो जायेगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो 31 मार्च 2015 तक मान्यता नहीं मिलने के बाद अब एक साल तक इन स्कूलों को मान्यता नहीं मिलेगी.
- मान्यता देने से पहले होती है स्कूलों की जांच
सीबीएसइ के पास हर साल नये स्कूल मान्यता के लिए आवेदन देते हैं. आवेदन के लिए मई से लेकर 30 जून तक समय भी बोर्ड की ओर से दिया जाता है. आवेदन मिलने के साल भर के अंदर बोर्ड की ओर चार-पांच लोगों की कमिटी बनायी जाती हैं. यह कमिटी उन स्कूलों में जाकर जांच करती है. इसमें कमिटी देखती हैं कि स्कूल सीबीएसइ के एफिलिएशन बाइ लॉज का पालन कर रही हैं कि नहीं. क्लास रूम की संख्या के साथ स्टूडेंट्स की संख्या, टीचर्स की संख्या, स्कूल का इन्फ्रास्ट्रर आदि पर जांच कमिटी फोकस करती हैं. स्कूल की जांच के बाद रिपोर्ट तैयार किया जाता हैं. रिपोर्ट पोजिटिव हो या निगेटिव, सीबीएसइ कारण के साथ स्कूल को भेज देता हैं. अगर स्कूल को मान्यता मिलती है तो किस बेसिस पर मान्यता दी गयी, यह भी बताया जाता है और अगर मान्यता नहीं मिलती है तो यह भी सीबीएसइ स्कूल को रिपोर्ट भेज कर बताती हैं.
- अगस्त में होगा 9वीं क्लास का रजिस्ट्रेशन
सीबीएसइ स्कूलों में रजिस्ट्रेशन का काम अगस्त में शुरू होता हैं. हर स्कूलों को इसके पहले 9वीं और 11वीं के स्टूडेंट्स का एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) बना कर बोर्ड को भेजना होता हैं. इसी लिस्ट के अनुसार बोर्ड परीक्षा के समय परीक्षा फार्म स्टूडेंट्स को भरवाया जाता हैं. रजिस्ट्रेशन का काम अगस्त के अंतिम सप्ताह में शुरू किया जाता हैं. सीबीएसइ उन्हीं स्कूलों के 9वीं क्लास के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन करता हैं जो सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त होते हैं.

कोट
मान्यता लेने

राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ

एआइपीएमटी के पहले लगेंगे सारे परीक्षा केंद्र पर सीसी टीवी कैमरा

- सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को दिया निर्देश
संवाददाता, पटना
ऑल इंडिया प्री-मेडिकल और प्री-डेंटल एंट्रांस टेस्ट (एआइपीएमटी) की दुबारा परीक्षा से पहले तमाम परीक्षा केंद्र पर सीसी टीवी कैमरा लगाया जायेगा. सीबीएसइ की ओर से यह निर्देश तमाम स्कूलों को भेजा गया हैं. जिन स्कूलों में सीसी टीवी कैमरा लगा हैं उन्हें उसकी पूरी जांच करके सही करना है. वहीं जिन स्कूलों में सीसी टीवी नहीं लगा हैं, उन्हें जल्द से जल्द लगवा कर रिपोर्ट सीबीएसइ के पास भेजनी हैं. ये तमाम चीजों की देखरेख करने की जिम्मेवारी हर रिजन के रीजनल ऑफिसर को दिया गया हैं.
- दो घंटे पहले परीक्षार्थी को सेंटर पर आने का मिला निर्देश
सीबीएसइ के अनुसार अभी किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सेंटर पर आने का समय एक घंटा पहले का दिया जाता था. लेकिन पहली बार एआइपीएमटी की परीक्षा में परीक्षार्थी को दो घंटे पहले परीक्षा केंद्र आने का निर्देश दिया गया हैं. परीक्षा शुरू होने के दो घंटे पहले परीक्षार्थी को परीक्षा केंद्र पर आ जाना हैं. इस बार हर सेंटर पर हर परीक्षार्थी की गहन पूछ ताछ और जांच भी होगी. किसी भी तरह के डिवाइस आदि लाने पर पूरी तरह से पाबंदी रखी जायेगी. पकड़ में आने वाले अभ्यर्थी को परीक्षा नहीं देने दिया जायेगा.
- रीजनल ऑफिस की देख रेख में होगा परीक्षा केंद्र
स्कूलों में एआइपीएमटी लेने की तैयारी को लेकर तमाम रीजनल ऑफिस को अभी से दिशा निर्देश दिया जाने लगा हैं. किन-किन प्वाइंट पर स्कूलों की जांच की जानी हैं इसकी भी जानकारी रीजनल ऑफिस को दी जा रही हैं. 25 जुलाई को ली जाने वाली एआइपीएमटी की परीक्षा के लिए 1026 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. 53 शहरों में इस परीक्षा का आयोजन किया जायेगा. बिहार में   पटना में 39 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. पूरे बिहार में पटना के अलावा मुजफ्फरपुर और गया में एआइपीएमटी की परीक्षा आयोजित की गयी. मुजफ्फरपुर में 20 और गया में 15 परीक्षा केंद्र बनाये गये है. पूरे बिहार से लगभग 50 हजार परीक्षार्थी एआइपीएमटी की परीक्षा में शामिल होंगे.

इन जगहों पर लगेगा सीसी टीवी कैमरा
- स्कूल के मेन गेट पर
- कैंपस में
- सीढ़ी और लिफ्ट में
- परीक्षा हॉल में
- हर क्लास रूम के मेन गेट पर 

40 फीसदी अभ्यर्थी ने नहीं दिया यूजीसी नेट

- पूरे बिहार से 18 हजार 500 अभ्यर्थी में 8 हजार के लगभग हुए एबसेंट
संवाददाता, पटना
नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) की परीक्षा में 40 फीसदी अभ्यर्थी शामिल नहीं हो पायें. पूरे बिहार में यूजीसी नेट की परीक्षा में कुल 18 हजार 500 अभ्यर्थी को शामिल होना था. इसमें से मात्र 8 हजार के लगभग अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो पायें. सीबीएसइ पटना रिजन से मिली जानकारी के अनुसार काफी संख्या में अभ्यर्थी यूजीसी नेट की परीक्षा एबसेंट थे. लगभग 40 फीसदी अभ्यर्थी ने नेट की परीक्षा नहीं दिया. इस बार नेट की परीक्षा के लिए 37 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. इसमें पटना में 29 और भागलपुर में 8 परीक्षा केंद्र बनायें गये थे. हर परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी की कमी देखी गयी हैं.
- एडमिट कार्ड के अलावा कुछ भी ले जाने की अनुमति नहीं
यूजीसी नेट देने वाले अभ्यर्थी की हर परीक्षा केंद्र पर पूरी जांच के बाद ही परीक्षा केंद्र पर जाने दिया गया. अभ्यर्थी को एडमिट कार्ड के अलावा किसी भी तरह की कागजात ले जाने की अनुमति नहीं थी. मोबाइल और किसी भी तरह की डिवाइस को ले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई थी. जिन अभ्यर्थी के पास किसी भी तरह का डिवाइस पाया गया तो उन्हें बाहर ही रखने के निर्देश दिये गये थे.
- नेट के रिजल्ट देरी से आने के कारण काफी संख्या में अभ्यर्थी ने दुबारा भरा था आवेदन
यूजीसी नेट की 28 दिसंबर की हुई परीक्षा का रिजल्ट काफी देरी से आया. इस कारण काफी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी थे, जिन्होंने 28 जून को ली जाने वाली नेट की परीक्षा के लिए फार्म भर दिया. आवेदन भरने के बाद 28 दिसंबर को ली गयी नेट की परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया गया. इससे काफी संख्या में स्टूडेंट्स क्वालिफाई कर गये. इससे 28 जून की नेट की परीक्षा में काफी संख्या में अभ्यर्थी एबसेंट पाये गये है. सीबीएसइ के अनुसार ऐसे अभ्यर्थी जो 28 दिसंबर की परीक्षा में क्वालिफाई कर गये है, उन्होंने परीक्षा नहीं दिया हैं. चुकी नेट का रिजल्ट काफी देरी से आया, इस कारण काफी संख्या में अभ्यर्थी ने दुबारा अप्लाइ कर दिया था.

कोट
नेट की परीक्षा सही से हो गया. कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए बोर्ड की ओर से पूरी एहतियात रखी गयी थी. हर छात्र की पूरी जांच के बाद ही परीक्षा हॉल में जाने की अनुमति दी गयी थी. मोबाइल आदि ले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी थी. परीक्षा में काफी संख्या में अभ्यर्थी एबसेंट थे.
रश्मि त्रिपाठी, रीजनल ऑफिसर, सीबीएसइ पटना

Friday, June 26, 2015

साइंस स्क्रूटनी के 8 हजार बचे उत्तर पुस्तिका, आर्ट्स और कॉमर्स का शुरू नहीं हुआ स्क्रूटनी


- 30 जून को नहीं जारी होगा मेरिट लिस्ट
संवाददाता, पटना
इंटर साइंस के मेरिट लिस्ट के लिए अभी छात्रों को इंतजार करना पड़ेगा. 30 जून को घोषित कार्यक्रम में फिर एक बार परिवर्तन हो गया है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा है कि  30 जून को इंटर साइंस का मेरिट लिस्ट नहीं निकाला जा सकेगा. जुलाई के प्रथम सप्ताह में मेरिट लिस्ट निकलने की संभावना हैं. अध्यक्ष प्रो. सिंह ने बताया कि इंटर साइंस के अभी भी 13 हजार  उत्तर पुस्तिका की जांच बांकी हैं. शुक्रवार को पांच हजार उत्तर पुस्तिका की जांच हो गयी. अभी 8 हजार कॉपी की जांच होनी बांकी हैं. इसके होने के बाद ही मेरिट लिस्ट निकाली जायेगी. ज्ञात हो कि आर्ट्स और कॉमर्स विषय की स्क्रूटनी का काम अभी शुरू भी नहीं हुआ हैं. बोर्ड अध्यक्ष श्री सिंह ने बताया कि आर्ट्स और कॉमर्स विषय के लिए 15 हजार आवेदन आयें हैं. लेकिन अभी तक आर्ट्स और कॉमर्स का स्क्रूटनी शुरू नहीं हो पाया हैं. ज्ञात हो कि आर्ट्स और कॉमर्स विषय के 35 हजार उत्तर पुस्तिका की जांच होनी हैं. लेकिन उत्तर पुस्तिका नहीं आने के कारण जांच कार्य नहीं हो पा रहा हैं. 

28 को यूजीसी नेट की परीक्षा, पटना में 29 परीक्षा केंद्र बनाये गये


संवाददाता, पटना
नेशनल इजिब्लिटी टेस्ट (नेट) के लिए सीबीएसइ रीजनल ऑफिस की ओर से पूरी तैयारी लगभग हो चुकी हैं. 28 जून को आयोजित होने वाले नेट के लिए पूरे प्रदेश में यूजीसी नेट के लिए 37 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. इस बार यूजीसी नेट पटना के अलावा भागलपुर में ही केवल आयोजित की जा रही है. पटना सीबीएसइ रीजनल ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार पटना में 29 परीक्षा केंद्र बनाये गये है. वहीं भागलपुर में आठ परीक्षा केंद्र पर यूजीसी नेट आयोजित की जायेगी.  इस बार यूजीसी नेट में पूरे प्रदेश से 18 हजार 500 अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं. ज्ञात हो कि सीबीएसइ दूसरी बार यूजीसी नेट ले रही हैं. इससे पहले 28 दिसंबर 2014 को लिया गया था. 

सीबीएसइ के कॉलिकुलम में योगा ट्रेनिंग होगा शामिल


- सीबीएसइ ने दिया स्कूलों को निर्देश, योगा की चले एक क्लास
संवाददाता, पटना
अब स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन के अलावा योगा की भी ट्रेनिंग दी जायेगी. सीबीएसइ के निर्देश पर इसे तमाम स्कूलों में लागू किया गया हैं. सीबीएसइ ने योगा को एकेडेमिक कॉलिकुलम में शामिल कर दिया हैं. बोर्ड क अनुसार इसी सेशन से इसे लागू किया जायेगा. इसके लिए समुचित निर्देश स्कूलों में भेज दिया गया हैं. इसी सेशन से योगा की ट्रेनिंग देने का निर्देश सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को दिया हैं. शुरुआत में यह क्लास छठी से दसवीं तक के क्लास के लिए लागू किया गया हैं. छठी से दसवी तक के स्टूडेंट्स को अभी योगा की ट्रेनिंग दी जायेगी.
- फिजिकल एजुकेशन की जगह अब योगा ट्रेनिंग
सीबीएसइ के हर स्कूलों में अब फस्र्ट क्लास योगा का होगा. फस्र्ट क्लास मे योगा की ट्रेनिंग स्टूडेंट्स को दी जायेगी. अभी तक अधिकांश स्कूलों में स्टूडेंट्स को फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई करवायी जा रही थी. लेकिन अब सीबीएसइ के निर्देश पर फिजिकल एजुकेशन को रिप्लेस कर योगा की ट्रेनिंग स्टूडेंट्स को दी जायेगी. कई स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन के तहत ही दस से 15 मिनट के लिए योगा के भी टिप्स दिये जाते थे. सीबीएसइ ने ऐसे स्कूलों को योगा का समय अधिक करने का निर्देश दिया हैं.
- स्कूलों से फीडबैक के बाद सीबीएसइ ने लिया निर्णय
इंटरनेशनल योगा डे सेलिब्रेशन के बाद सीबीएसइ ने देश भर के कई स्कूलों से योगा को लेकर फीडबैक लिया था. फीडबैक मे योगा को कॉलिकुलम में शामिल करने संबंधित कई पोजिटिव बातें सामने आयी. सीबीएसइ के अनुसार योगा को स्कूल में एकेडेमिक कॉलिकुलम में शामिल करने को लेकर कई स्कूलों ने इसे सराहा हैं. कई स्कूलों ने तो योगा की ट्रेनिंग को हर क्लास के कंप्लसरी करने का भी सलाह सीबीएसइ को दिया हैं.
- केंद्रीय विद्यालय में होती है योगा की क्लास
देश भर के केंद्रीय विद्यालय में योगा की क्लास करवायी जा रही हैं. केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के अनुसार केवी में कई सालों से योगा की क्लास चल रही हैं. इससे छात्र फिजिकल और मेंटली दोनों की तरह से फीट रहते है. छात्रों को स्ट्रेस फ्री महसूस होता हैं. केंद्रीय विद्यालय संगठन के क्षेत्रीय निदेशक पटना के एमएस चौहान के अनुसार योगा की क्लास हर दिन हर क्लास के लिए होना अनिवार्य है.

सीबीएसइ के अनुसार योगा से ये सारे हैं फायदें
- फिटनेस बना रहता है
- पढ़ाई में कंसंट्रेशन बना रहता हैं
- थकान, अनिद्रा जैसी बीमारी पैदा नहीं होता हैं
- हमेशा एनर्जी बनी रहती है
- फिजिकल और मेंटली स्टॉगनेस आता हैं
- हर दिन योगा करने से सुबह अच्छा होगा
- किसी भी तरह के स्ट्रेस से स्टूडेंट्स खुद को दूर कर पायेंगे
- कई छोटी-छोटी बीमारियों से भी स्टूडेंट्स को दूर किया जा सकेगा

कोट
योगा से फिटनेस आता हैं. सीबीएसइ के एजेंडे में योगा को शामिल करना पहले से था. लेकिन इंटरनेशनल योगा डे के बाद सीबीएसइ ने इसे एकेडेमिक कॉलिकुलम में शामिल कर दिया हैं. अब फिजिकल एजुकेशन की जगह योगा की ट्रेनिंग दी जायेगी.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

एफिलिएशन के लिए दो साल पहले देना होगा आवेदन



- सीबीएसइ ने स्कूलों को दिया छूट, अब छह महीने का मिला आवेदन के लिए समय
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की मान्यता लेने के लिए अब दो साल पहले ही आवेदन देना होगा. अभी तक छह महीने पहले आवेदन देने पर मान्यता मिल जाती थी. लेकिन अब किसी भी स्कूल को सीबीएसइ की मान्यता लेने के लिए दो साल पहले ही सीबीएसइ के पास अर्जी देनी होगी. सीबीएसइ ने यह निर्देश वेबसाइट के माध्यम से दे दिया हैं. सीबीएसइ के निर्देश के अनुसार 2017-18 सत्र में जिन स्कूलों को सीबीएसइ की मान्यता लेनी होगी, उन्हें 2015 में ही आवेदन करना होगा. ज्ञात हो कि अभी तक सीबीएसइ के मान्यता के लिए आवेदन छह महीने पहले देना होता था. इसके लिए सीबीएसइ की ओर से हर साल एक मई से लेकर 30 जून तक का समय निर्धारित की गयी थी. इस बीच ही तमाम स्कूलों को मान्यता के लिए आवेदन देना होता था.
- आवेदन के लिए मिलेगा दो बार चांस
सीबीएसइ ने एफिलिएशन बाइ लॉज में चेंज किया हैं. सीबीएसइ के अनुसार अब मान्यता लेने के लिए स्कूलों को दो महीने नहीं बल्कि छह महीने का समय मिलेगा. कोई भी स्कूल मान्यता के लिए पहली बार 1 जुलाई 2015 से 31 दिसंबर 2015 तक के बीच में आवेदन कर सकता है. वहीं स्कूल को दुबारा भी आवेदन करने की छूट अब सीबीएसइ ने दिया है. स्कूल दूसरी बार आवेदन 1 जनवरी 2016 से 1 जुलाई 2016 के बीच कर सकता हैं. इन दोंनों की समय के बीच आवेदन करने वाले स्कूलों को 2017 -18 के लिए मान्यता मिलेगी. इस बीच सीबीएसइ की ओर से जारी एफिलिएशन बाइलॉज को स्कूलों को पूरा करना पड़ेगा. 

सीबीएसइ स्कूलों में पढने वाले बच्चों के अभिभावक पर बढ़ा बोझ, फिर होगी जेब ढीली


- पढ़ाई के अलावा किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल नहीं होंगे शिक्षक
- 18 एजेंसियों के माध्यम से स्टूडेंट्स को दी जायेगी ट्रेनिंग, पांच सौ से एक हजार रुपये का बढ़ेगा बोझ
- स्टूडेंट्स के साथ ही टीचर्स और प्रिंसिपल को ट्रेनिंग देगी एजेंसियां
संवाददाता, पटना
स्टूडेंट्स लेंगे ट्रेनिंग और जेब ढीली होगी अभिभावकों की. जी हां, स्टूडेंट्स को क्लास की पढ़ाई के अलावा किसी भी तरह की ट्रेनिंग प्रोग्राम अब टीचर्स नहीं देंगे. लाइफ स्किल की ट्रेनिंग लेनी हो या मेंटल हेल्थ, एडोलसेंट इश्यू के बारे में जानना हो. पर्सनालिटी डेवलपमेंट या फिर कम्यूनिकेशन स्ट्रेटजी की जानकारी लेनी हो. इसकी ट्रेनिंग देने के लिए एजेंसियां बहाल होंगी. एजेंसियां इन तमाम चीजों के लिए स्टूडेंट्स को प्रॉपर ट्रेनिंग देंगी और इसके एवज में हर ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए स्टूडेंट्स से 5 सौ से लेकर 1000 रुपये तक का चार्ज भी लेंगी. इसी सेशन से सीबीएसइ स्कूलों में ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए एजेंसियों को नियुक्त करते हुए देश भर में 18 एजेंसी को जिम्मेवारी दी गयी हैं. इसके तहत तमाम एजेंसी एकेडमिक के अलावा कई विषयों की ट्रेनिंग स्टूडेंट्स को देंगे.
हर स्कूल में होगा ट्रेनिंग प्रोग्राम
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए निर्देश दिया हैं. जल्द ही सीबीएसइ की ओर से इसके लिए कैलेंडर भी जारी किया जायेगा. हर ट्रेनिंग प्रोग्राम का शेड्यूल क्या होगा, इसकी जानकारी बोर्ड स्कूलों को जल्द भेजेगी. सीबीएसइ के अनुसार हर क्लास के लिए अलग-अलग ट्रेनिंग प्रोग्राम करवाये जायेंगे. ये ट्रेनिंग प्रोग्राम एक दिन या तीन तीन तक का हो सकता है. ट्रेनिंग प्रोग्राम में हर स्टूडेंट्स का शामिल होना आवश्यक हैं. साल भर में लगभग 16 ट्रेनिंग प्रोग्राम स्टूडेंट्स के लिए आयोजित किये जायेंगे.
टीचर्स और प्रिंसिपल भी हुए शामिल
अब टीचर्स नहीं देंगे स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग, ना ही टीचर्स को प्रिंसिपल द्वारा ट्रेंड किया जायेगा. ना ही प्रिंसिपल को ट्रेंड करने के लिए कोई पैनल बनाया जायेगा. सीबीएसइ ने स्टूडेट्स के अलावा टीचर्स और प्रिंसिपल के लिए भी ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा हैं. सीबीएसइ की ओर से टीचर्स और प्रिंसिपल को भी ट्रेनिंग प्रोग्राम अलग-अलग फिल्ड संबंधित दिया जायेगा. इसके लिए बोर्ड जल्द ही स्कूलों को ट्रेनिंग कैलेंडर उपलब्ध करवायेगा. टीचर्स और प्रिंसिपल को भी ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए मोटी रकम फी के तौर पर देना होगा. टीचर्स को जहां 2000 से 4 हजार तक चार्ज लगेगा वहीं प्रिंसिपल को 4 से पांच हजार तक चार्ज के रूप में देना होगा. साल भर में 56 ट्रेनिंग प्रोग्राम टीचर्स के लिए और 12 ट्रेनिंग प्रोग्राम प्रिंसिपल के लिए आयोजित किये जायेंगे.

एजेंसी के द्वारा दी जाने वाली ट्रेनिंग प्रोग्राम
स्टूडेंट्स के लिए
- लाइफ स्कील
- मेंटल हेल्थ और एडोलसेंट इश्यू
- पर्सनालिटी डेवलपमेंट
- कम्यूनिकेशन स्ट्रेटजी
- क्रियेटिव राइटिंग
- स्टोरी टेलिंग, राइटिंग और ट्रांसलेशन
- लाइफ स्कील विजुलअ मीडियम के माध्यम से
- लीडरशिप स्कील

टीचर्स के लिए
- सब्जेक्ट वाइज ट्रेनिंग प्रोग्राम
- सीसीइ (कंटीन्यूअ एंड कंप्रीहेसिव इवैल्यूएशन) वन डे ट्रेनिंग प्रोग्राम
- क्लास रूम मैनेजमेंट
- मल्टीपल मोड ऑफ असेसमेंट
- कम्यूनिकेशन स्ट्रेटजी
- आर्ट एजुकेशन
- इंवायरमेंट एंड इको क्लब
- फॉमेटिस असेसमेंट
-  काउंसिलिंग स्कील इन टीचर्स
- टाइम मैनेजमेंट
- इनोवेशन एंड लीडरशिप स्कील
- स्ट्रेस मैनेजमेंट

प्रिंसिपल के लिए
- लीडरशिप स्कील
- स्कूल मैनेजमेंट एंड स्कूल लीडरशिप
- स्ट्रेटजिक लीडरशिप

कोट
पहले किसी भी ट्रेनिंग के लिए एक दो एजेंसी काम करती थी. इन एजेंसी से तमाम सिटी को-ऑर्डिनेटर को ट्रेनिंग दी जाती थी. ये सिटी को-ऑर्डिनेटर ही हर स्कूलों में जाकर ट्रेनिंग देने का काम करते थे. इसमें किसी एक्स्ट्रा चार्ज स्टूडेंट्स या टीचर्स पर नहीं पड़ता था. लेकिन अब देश भर में एजेंसी ही हर जगहों पर जाकर स्टूडेंट्स, टीचर्स और प्रिंसिपल के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम रखेगी.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑर्डिनेटर, सीबीएसइ पटना

Thursday, June 25, 2015

1217 स्कूल और कॉलेजों में होगी अब 9वीं, 10वी ं के साथ इंटर की पढ़ाई

1217 स्कूल और कॉलेजों में होगी अब 9वीं, 10वी ं के साथ इंटर की पढ़ाई

- वित्तसम्पोषित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी कल्याण महासंघ का सरकार के साथ बनी सहमति
संवाददाता, पटना
पूरे प्रदेश में अब 1217 वित्त रहित स्कूल और कॉलेजों में 9वीं , 10वीं के साथ इंटर की पढ़ाई शुरू करने का रास्ता साफ हो गया हैं. बुधवार को वित्त सम्पोषित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी कल्याण महासंघ के साथ शिक्षा विभाग की सहमति बन गयी. सहमति के तहत प्रदेश भर के 700 वित्तरहित माध्यमिक विद्यालयों (हाई स्कूल) में इंटर की पढ़ाई अब करवायी जायेगी. वहीं 517 इंटर महाविद्यालयों में 9वीं और 10वीं की पढ़ाई शुरू होगी. इसकी जानकारी वित्त सम्पोषित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी कल्याण महासंघ के अध्यक्ष प्रो. गणोश प्रसाद सिंह ने दिया. प्रो. गणोश प्रसाद सिंह ने बताया कि सरकार से सहमति बन गयी हैं. जल्द ही इसकी कार्रवाई भी शुरू कर दी जायेगी. ज्ञात हो कि आगामी सत्र से अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों में इंटर की पढ़ाई एवं इंटरमीडिएट महाविद्यालयों में 9वी और 10वीं की पढ़ाई शुरू किया जायेगा.
- अनुदान की राशि अब सीधे संस्थान के खाते में
वहीं दूसरी ओर अब विद्यालय को दी जाने वाली अनुदान की राशि का भुगतान भी अब स्कूल के संस्थान के खाते में सीधे किया जायेगा. लंबित अनुदान भुगतान की प्रक्रिया को जल्द करने को लेकर भी शिक्षा विभाग की पहल शुरू कर दिया हैं. इसके लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से तीन शैक्षणिक सत्र (2010-11, 2011-12, 2012-13) के परीक्षाफल की लिस्ट मांगी हैं. अध्यक्ष प्रो. गणोश प्रसाद ने बताया कि अभी तक अनुदान की राशि मिलने में काफी परेशानी होती थी. राशि मिलने में कई महीने लग जाते थे. लेकिन शिक्षा विभाग के पहल से इसमे काफी आसानी हो जायेगी. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के माध्यम से अब सीधे अनुदान की राशि विद्यालय के खाता में डाला जायेगा. इससे कई महीनों का काम तीन दिनों में ही हो जायेगा. 

आंसर कॉपी और ओएमआर सीट का फोटो कॉपी चाहिए तो करें अप्लाई

आंसर कॉपी और ओएमआर सीट का फोटो कॉपी चाहिए तो करें अप्लाई

- सीबीएसइ ने नेट के अभ्यर्थी को पहली बार दिया आप्सन
संवाददाता, पटना
कम अंक आयें हों, अपने अंक से संतुष्ट ना हो, अपना आंसर कॉपी देखना चाह रहें  हो तो बोर्ड से इसकी जानकारी ले सकते हैं. सेंट्रल बोर्ड सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से नेशनल एजिब्लिटी टेस्ट (नेट) के अभ्यर्थी के लिए यह सुविधा पहली बार दिया गया है. अभ्यर्थी इसके लिए आवेदन दे सकते हैं. 28 दिसंबर 2014 को आयोजित यूजीसी नेट के लिए सीबीएसइ ने अप्लाई करने की तिथि निकाली हैं. अभ्यर्थी 20 जुलाई 2015 तक इसके लिए अप्लाई कर सकता हैं. अभ्यर्थी को कौन से डाक्यूमेंट चाहिए, इसकी जानकारी अभ्यर्थी को पहले ही देना होगा. अभ्यर्थी को जो भी चाहिए, उसे सीबीएसइ की ओर से स्पीड पोस्ट से भेज दिया जायेगा.
- आसानी से दिया जायेगा
यूजीसी नेट के अभ्यर्थी को पहली बार यह सुविधा दी जा रही हैं. अभ्यर्थी अपने द्वारा दिये गये आंसर को आसानी से देख पायेंगे. उत्तर देने में कहां क्या गलती किया, इसकी भी जानकारी अभ्यर्थी को मिल सकेगा. सीबीएसइ के अनुसार इस सुविधा से अभ्यर्थी अपना एलाइसिस कर पायेंगे. इससे अगले परीक्षा के लिए भी उन्हें तैयारी करने में मदद मिलेगी. इस फोटो कॉपी को लेने में अभ्यर्थी को मात्र एक महीने का इंतजार करना पड़ेगा.

यूजीसी नेट संबंधी डाक्यूमेंट के लिए देना होगा फी भी
- जो उम्मीदवार गणना शीट और ओएमआर सीट की फोटो कॉपी प्राप्त करना चाहता हैं, उन्हें 20 जुलाई तक अप्लाई कर देना होगा. इसके लिए अभ्यर्थी को 500 रुपये फी भी सीबीएसइ के डायरेक्टर के नाम से भेजना होगा
- आंसर कॉपी के लिए  500 रुपये फी भी सीबीएसइ के डायरेक्टर के नाम से देना होगा
- फोटो कॉपी के लिए छात्र अगर अधूरा आवेदन भरेंगे तो उसे रदद कर दिया जायेगा
- उम्मीदवार अपने आवेदन में सही-सही अपना रॉल नंबर, नाम, पता अंकित करेंगे. रॉल नंबर, नाम और पता डिमांड ड्राफ्ट के पीछे भी अंकित करें

फोटो कॉपी का ना करें गलत इस्तेमाल
- सीबीएसइ के निर्देश के अनुसार फोटो कॉपी को किसी भी संस्थान या स्कूल के पास नहीं दिखाना होगा
- किसी व्यावसायिक प्रयोजन में इसका इस्तेमाल नही कर सकते हैं
- इस फोटो कॉपी को स्टूडेंट्स अपने तक ही रखेंगे
- किसी अपने फायदे के लिए अभ्यर्थी उसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं

नही बना अब तक बिहार में एजुकेशन टिबूनल

नही बना अब तक बिहार में एजुकेशन टिबूनल

- प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए हर स्टेट में बनना था एजुकेशन टिबूनल
- दिल्ली समेत कई राज्य में चल रहे कई सालों से एजुकेशन टिबूनल
संवाददाता, पटना
कभी किसी स्टूडेंट को स्कूल ने निकाल दिया. हफ्ते भर की छुट्टी लेने की सजा जुर्माना और स्कूल से निकाल कर दिया जाता हैं. होमवर्क का पनीशमेंट अक्सर स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ता हैं. फिजिकल हेरेसमेंट पर रोक के बावजूद आये दिन टीचर्स पर मारने की बातें सामने आती हैं. स्टूडेंट परीक्षा देते हैं, लेकिन उन्हें स्कूल रिजल्ट नहीं देता हैं. स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए देश भर में एजुकेशन टिबूनल का गठन करने को कहा गया था. 1989 में आये इस फैसले के बाद कई स्टेट गवर्नमेंट ने इसका गठन किया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हर स्टेट में एजुकेशन टिबूनल को बनाया जाना था. देश भर दिल्ली, केरल, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटका आदि स्टेट में इसका गठन किया गया हैं. लेकिन बिहार में अभी तक इसका गठन नहीं किया जा सका हैं.
- कहां रखें अपनी बातें, नही हैं अभिभावकों के पास कोई आप्सन
बिहार में किसी भी स्कूल के खिलाफ कोई भी अभिभावक कुछ नहीं बोल पाते हैं. स्कूलों की मनमानी को मानने को तमाम अभिभावक मजबूर हैं. अभिभावकों के उपर स्कूलों की मनमर्जी चलती हैं. स्कूल जो चाहता हैं वो करता हैं. स्कूलों के खिलाफ बाल अधिकार संरक्षण आयोग में स्टूडेंट्स जाते भी हैं, लेकिन आयोग को कोई फैसला लेने को अधिकार नहीं होने से किसी भी मामले का निदान नहीं हो पाता हैं. कई बार स्कूलों के खिलाफ स्टूडेंट्स को हाई कोर्ट तक जाना पड़ता हैं.
- 20 दिनों में होगा फैसला
एजुकेशन टिबूनल में किसी भी केस को 20 दिनों के अंदर साल्व किया जाता हैं. केस दर्ज होने के तुरंत बाद ही उसकी सुनवाई शुरू हो जाती हैं. किसी भी अभिभावक को इसके लिए इंतजार नहीं करना पड़ता हैं. किसी भी केस का निपटारा 20 दिन से लेकर 6 महीने के बीच में कर देना होता है. अभिभावकों को इंतजार नहीं करना पड़ता हैं. अभी तक दिल्ली स्कूल एजुकेशन टिबूनल की बात करें तो पांच हजार के लगभग केस का निपटारा किया जा चुका हैं. दिल्ली स्कूल एजुकेशन टिबूनल की स्थापना 2007 में किया गया  था.
- दिल्ली स्कूल एजूकेशन टिबूनल में हर महीने तीन से चार केस
दिल्ली के स्कूलों के खिलाफ आये दिन अभिभावक और शिक्षक एजुकेशन टिबूनल में केस दर्ज करवाते हैं. दिल्ली स्कूल एजुकेशन टिबूनल के मुताबिक हर महीने तीन से चार केस टिबूनल के पास आते हैं. किसी भी केस को महीने भर से अधिक नहीं रखा जाता हैं. महीने भर में इन केसों का फैसला कर लिया जाता हैं. दिल्ली स्कूल एजुकेशन टिबूनल में अधिकांश केस शिक्षा के अधिकार के तहत वाले दर्ज होते हैं. वहीं अगर तमिलनाडू स्टेट की बात करे तो प्राइवेट स्कूल के मनमानी फी लेने पर अधिकांश केस एजुकेशन टिबूनल में दर्ज किये गये हैं.

एजुकेशन टिबूनल का ये है सारा काम
-  प्राइवेट स्कूल के फी के अलावा किसी भी गलत तरीके से पैसा लेने के मामले को रोकना
- स्कूल के एफिलिएशन या एनओसी देने की अंतिम मूहर
- सीबीएसइ,आइसीएसइ बोर्ड या किसी भी बोर्ड के मान्यता देने का अंतिम निर्णय लेना
- शिक्षा के अधिकार के तहत हर तरह का फैसला लेना
- स्कूल की मनमर्जी वाले फैसले को रोकना और उसकी तह तक जाना
- स्कूल पर कार्रवाई और एनओसी रोकने का भी अधिकार
- प्राइवेट स्कूल किस केटेरिया के अंतर्गत चलना हैं, इसकी भी जानकारी समय के साथ स्कूल को देना

कोट
एजुकेशन टिबूनल के होने से कई समस्याओं का निदान हो जाता. लेकिन बिहार में इस तरह के संस्था नहीं होने से काफी परेशानी स्टूडेट्स और अभिभावकों को होती हैं. एजुकेशन टिबूनल का गठन होना चाहिए. बिहार में इसकी काफी आवश्यकता हैं.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार प्राइवेट चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन, पटना

एजुकेशन टिबूनल होने से शिक्षकों की समस्याओं का भी निदान होता. प्राइवेट स्कूल की मनमानी पर भी रोक लगती हैं. अभी कई स्कूलों में शिक्षकों की सैलरी आदि पर काफी विवाद होता हैं. इस टिबूनल के होने से स्टूडेट्स और टीचर्स मे सुरक्षा का भावना होता.
निखिल कुमार, महासचिव, डीएवी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन 

2014 में किया पास, नहीं मिला अब तक मार्क्‍स सीट

2014 में किया पास, नहीं मिला अब तक मार्क्‍स सीट

- एक साल बाद भी आकांक्षा प्रिया नहीं ले पायी 11वीं में नामांकन
- स्कूल की मनमानी की शिकार आकांक्षा प्रिया सीबीएसइ रीजनल ऑफिस को दिया है आवेदन
संवाददाता, पटना
परीक्षा दिया पास भी कर गयी. लेकिन अभी तक रिजल्ट नहीं मिला. स्कूल ने ना तो मार्क्‍स सीट दिया, ना ही माइग्रेशन सर्टिफिकेट दिया और ना ही टीसी ही दिया जिससे 11वीं में दूसरे स्कूल  में नामांकन ले पाती. अब एक साल बाद थक कर आकांक्षा प्रिया सीबीएसइ के पास पहुंची है. सीबीएसइ के पास दिये आवेदन के अनुसार आकांक्षा प्रिया 2014 मार्च में ही 10वीं बोर्ड की परीक्षा दी थी. मई में वो 10वीं बोर्ड पास भी कर गयी. लेकिन स्कूल वाले ने उसके रिजल्ट को ही रोक दिया हैं. आकांक्षा प्रिया बार-बार स्कूल जाती रही, लेकिन उसे एक साल बाद भी रिजल्ट नहीं मिला. डीएवी मुंगेर की छात्र आकांक्षा प्रिया ने सीबीएसइ रीजनल ऑफिस को आवेदन देकर सारी जानकारी दी हैं. स्कूल की गलती की वजह से आकांक्षा प्रिया अभी तक 11वीं में नामांकन नहीं ले पायी हैं.
- 7वीं में केंद्रीय विद्यालय से ट्रांसफर करवा कर डीएवी में लिया था नामांकन
आकांक्षा प्रिया क्लास 7वीं तक केंद्रीय विद्यालय जमालपुर की छात्र हैं. 7वीं में ही दिसंबर में आकांक्षा प्रिया ने डीएवी मुंगेर में नामांकन ले लिया. आाकांक्षा प्रिया ने 7वीं के दो एग्जाम केंद्रीय विद्यालय से दिया वहीं दिसंबर के बाद की परीक्षाएं डीएवी मुंगेर से दिया. इसके बाद मार्च में 8वीं में डीएवी मुंगेर में ही रही. 9वीं में रजिस्ट्रेशन भी हुआ. 10वीं की परीक्षाएं भी डीएवी मुंगेर से ही दिया. 10वी में 8.5 सीजीपीए भी आकांक्षा प्रिया ने प्राप्त किया लेकिन उसे अभी तक रिजल्ट नहीं मिल पाया हैं.
- डीएवी से लेकर सीबीएसइ तक दी जानकारी
आकांक्षा प्रिया ने इसकी जानकारी डीएवी दिल्ली के अलावा सीबीएसइ पटना रीजनल और सीबीएसइ दिल्ली को भी भेजा है. दस दिनों पहलें आकांक्षा प्रिया ने डीएवी दिल्ली को इसकी जानकारी दिया हैं. सीबीएसइ पटना रिजन की रीजनल ऑफिसर रश्मि त्रिपाठी को आवेदन दिया है. रश्मि त्रिपाठी ने जल्द से जल्द इसकी जांच करवा कर रिजल्ट देने का आश्वासन भी दिया हैं.

कोट
स्कूल ने अभी तक मार्क्‍स सीट के साथ माइग्रेशन सर्टिफिकेट और टीसी नहीं दिया. इस कारण बेटी का नामांकन 11वीं में नहीं हो पाया हैं. बार-बार स्कूल का चक्कर लगाते रहें. लेकिन अब थक हार सीबीएसइ के पास आयें हैं. मार्क्‍स सीट नहीं मिलेगा तो नामांकन नहीं हो पायेगा.
आरके मिश्र,आकांक्षा प्रिया के पिता

चार थीम पर आयोजित होगा अब साइंस एग्जीविशन

चार थीम पर आयोजित होगा अब साइंस एग्जीविशन

- सीबीएसइ के साइंस एग्जीविशन में अब चार थीम पर ही होगा फोकस
- एग्रीकल्चर के साथ एनर्जी और हेल्थ को किया गया शामिल
संवाददाता, पटना
अब साइंस एग्जीविशन में शामिल होने के लिए सोशल वर्क को भी ध्यान में रखना होगा. साइंस एग्जीविशन में वहीं अव्वल होगा, जो समाज के हित के लिए कुछ वर्क करना चाह रहा होगा. इसकी जानकारी सीबीएसइ ने अभी से ही स्कूलों के माध्यम से स्टूडेंट्स को देना शुरू कर दिया है. सीबीएसइ की ओर से आयोजित होने वाले अब साइंस एग्जीविशन उसी थीम पर स्टूडेंट्स को प्रोजेक्ट वर्क और मॉडल बनना होगा, जिसे सीबीएसइ ने स्कूलों को भेजा हैं. ज्ञात हो कि अभी तक सीबीएसइ के साइंस एग्जीविशन में स्टूडेंट्स अपनी मरजी के थीम पर मॉडल बनाते थे. इसके लिए स्कूल की ओर से ही केवल स्टूडेंट्स को गाइड किया जाता था. लेकिन अब सीबीएसइ ने स्टूडेंट्स को थीम दे दिया हैं.
 - स्टूडेंट्स के आइडिया पर सीबीएसइ करता हैं काम
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों की साइंस एग्जीविशन की थीम की जानकारी देना शुरू कर दिया है. बोर्ड द्वारा आयोजित साइंस एग्जीविशन से जो भी आइडिया प्राप्त होता हैं, उसे कई बार स्कूलों में लागू किया जाता है. स्कूलों में डिस्एबल स्टूडेंट्स के लिए रैंप की व्यवस्था, जंक फूड से होने वाले नुकसान आदि के बारे में जानकारी सीबीएसइ को एग्जीविशन से ही मिला हुआ है. बोर्ड के अनुसार साइंस एग्जीविशन में स्टूडेंट्स के एक ग्रुप ने रैंप की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी था. इसमें स्टूडेंट्स ने बताया था कि किस तरह से बड़े क्लास में जाने के बाद सीढ़ी के कारण डिस्एबल स्टूडेंट्स स्कूल जाना बंद कर देते हैं
- एग्रीकल्चर के क्षेत्र में इनोवेशन की हैं जरूरत
सीबीएसइ के अनुसार हर साल साइंस एग्जीविशन का आयोजन किया जाता है. ऐसे में स्टूडेंट्स अपनी मरजी के किसी टॉपिक पर काम करते हैं. स्टूडेंट्स को किसी भी मॉडल को बनाने मे लंबा टाइम लग जाता हैं. इससे अगर किसी ऐसे थीम पर स्टूडेंट्स काम करें, जिससे सोसायटी को कुछ फायदा हों. इस कारण सीबीएसइ ने एग्रीकल्चर और हेल्थ दो थीम दिया हैं. बोर्ड के अनुसार इन दो थीमों पर स्टूडेट्स काफी कम मॉडल बनाते हैं. इन दो थीमों पर अगर स्टूडेंट्स काम करेंगे तो कुछ नये इनोवेशन हो सकते हैं.
- साइंस एग्जीविशन में अधिकांश थीम बस कामचलाउ
सीबीएसइ ने पिछले पांच सालों के साइंस एग्जीविशन का सर्वे किया हैं. इस सर्वे के अनुसार सीबीएसइ ने स्कूलों को जानकारी दिया हैं के बोर्ड द्वारा आयोजित साइंस एग्जीविशन में जो भी थीम पर काम हो रहा है, उसमें अधिकांश थीम काम चलाउ ही होते हैं. ऐसे में स्टूडेंट्स द्वारा दिया गया मॉडल पर सीबीएसइ कुछ आगे काम नहीं कर पाती हैं. बोर्ड के अनुसार देश भर के साइंस एग्जीविशन में 55 फीसदी मॉडल बस बेकार ही चले जाते हैं. इन मॉडल पर सीबीएसइ कुछ आगे नहीं कर पाती हैं. इस कारण इस बार से थीम बेस्ड मॉडल देने का विचार बोर्ड की ओर से दिया गया हैं.
- अगस्त में शुरू होगा साइंस एग्जीविशन का दौर
सीबीएसइ की ओर से हर साल साइंस एग्जीविशन का आयोजन किया जात है. तीन स्टेज में आयोजित साइंस एग्जीविशन के पहला स्टेज अगस्त में होता हैं. स्कूल लेवल पर स्टूडेंट्स को चुने जाने के बाद स्टेट लेवल और फिर नेशनल लेवल (फाइनल राउंड) का आयोजन दिल्ली में किया जाता है. इस राउंड में फस्र्ट, सेकेंड और थर्ड चुने जाते हैं. इन स्टूडेट्स को बोर्ड की ओर से इनाम भी दिया जाता हैं.

इन टॉपिक पर ही अब होगा साइंस एग्जीविशन
- एग्रीकल्चर
- एनर्जी
- हेल्थ
- इंवायरमेंट

कोट
साइंस एग्जीविशन से स्टूडेंट्स को काफी आइडिया आते हैं. ऐसे में अगर थीम बेस्ड मॉडल स्टूडेंट्स द्वारा बनाया जायेगा तो एक टॉपिक पर कई आइडिया आयेंगे. इससे बोर्ड को काफी मदद मिलेगी. स्टूडेट्स के मॉडल पर भी सीबीएसइ कई बार स्कूल के रूल्स में इंप्लीमेंट करता हैं.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया 

11वीं में नामांकन की धज्जियां उड़ा रहे सीबीएसइ स्कूल, अपने ही स्टूडेंट्स को लौटा रहे

11वीं में नामांकन की धज्जियां उड़ा रहे सीबीएसइ स्कूल, अपने ही स्टूडेंट्स को लौटा रहे

- 10वीं बोर्ड में कम मार्क्‍स आने पर अपने ही स्कूल में देना पड़ रहा एंट्रांस टेस्ट
- दूसरे स्कूल और बाहर जाने को मजबूर हो रहे स्टूडेंट्स
संवाददाता, पटना
10वीं बोर्ड की परीक्षा में कम अंक आयें. स्कूल के नामांकन की केटेरिया में स्टूडेंट्स सीजीपीए को पूरा नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे स्टूडेंट्स के लिए उनके अपने ही स्कूल बेगाने हो जा रहे हैं. पटना में अधिकांश स्कूलों के स्टूडेंट्स का यही हाल हैं. जिस स्कूल में स्टूडेंट्स ने क्लास वन से 10वीं तक की पढ़ाई किया हैं, उसी स्कूल में 11वीं में नामांकन स्टूडेंट्स को नहीं मिल पा रहा हैं. इससे काफी संख्या में ऐसे स्टूडेट्स है जिन्हें 11वीं मे नामांकन नहीं मिल पा रहा हैं. सीबीएसइ के 11वी में नामांकन की धज्जियां उड़ा रहे इन स्कूलों पर कोई लगाम नहीं हैं. स्कूल अपनी मनमानी कर रहें हैं.
- बदल लिया हैं नामांकन की प्रक्रिया
अब हर स्कूलों ने नामांकन की प्रक्रिया बदल दिया है. अब उन्हीं स्टूडेंट्स का नामांकन 11वीं में किसी भी स्कूल में होता है जिनके मार्क्‍स अधिक आये होते हैं. कई स्कूल तो 11वीं में नामांकन के लिए एंट्रांस एग्जाम तक लेते हैं. इस एग्जाम में उस स्कूल से पास करने वाले 10वीं बोर्ड के स्टूडेंट्स भी शामिल होते हैं. जो इस एंट्रांस परीक्षा में पास करता है, उसे ही 11वीं में नामांकन मिलता हैं. वहीं कई स्कूल डायरेक्टर एडमिशन भी 11वीं में लेते हैं. लेकिन इसमें अधिक मार्क्‍स लाने वाले ही स्टूडेंट्स शामिल होते हैं.
- स्कूल से लौटा दिये जाते हैं स्टूडेंट्स
कम अंक लाने वाले स्टूडेंट्स को उनके ही स्कूल वाले यह कह कर लौटा दे रहे है कि उनके मार्क्‍स 11वी में नामांकन को पूरा नहीं करते हैं. इन दिनों अधिकांश स्कूलों में ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या की भीड़ लगी होती है जो अपने ही स्कूल से लौटाये जा रहे हैं. उन्हें 11वी में नामांकन नहीं मिल रहा हैं.
- सेशन शुरू होने के बाद भी स्टूडेट्स लगा रहे स्कूल का चक्कर
कई स्कूलों में 11वीं का सेशन शुरू हो चुका हैं. इसके बावजूद जिन स्टूडेंट्स का अपने स्कूल में नामांकन नहीं लिया गया हैं, वो स्टूडेंट्स स्कूल का चक्कर लगा रहे हैं. कोई अभिभावक के साथ तो कोई खुद ही अपने रिजल्ट को लेकर स्कूल प्रशासन से मिलने आ रहा हैं. पटना के अधिकांश स्कूलों की माने तो स्कूल में 60 फीसदी स्टूडेंट्स का नामांकन अपने स्कूल से लिया गया हैं, बांकी 40 फीसदी स्टूडेंट्स बाहर से 11वीं में नामांकन ली हैं. स्कूल की 40 फीसदी स्टूडेंट्स का नामांकन नहीं लिया जा सका हैं. क्योंकि इन स्टूडेंट्स को सीजीपीए कम था और ये स्कूल की नामांकन की केटेरिया को पूरा नहीं कर पा रहे थे. पटना में अधिकांश स्कूलों की यहीं स्थिति रही हैं.
- 10वीं में टीसी नहीं दे सकता है स्कूल
सीबीएसइ के नियम के अनुसार जो स्टूडेंट्स 10वीं बोर्ड की परीक्षा के बाद 11वीं की पढ़ाई उसी स्कूल से करना चाहता है तो उसे स्कूल नहीं रोक सकता हैं. ऐसे में अगर उस स्टूडेंट्स को मार्क्‍स भी कम क्यूं ना आयें हों. स्कूल 11वीं में दुबारा उसी स्टूडेंट्स का नामांकन नही ले सकता हैं जो 10वीं की पढ़ाई उसी स्कूल से किया हो. अगर स्टूडेंट्स चाहे तभी वो 11वीं में दूसरे स्कूल में जा सकता हैं. लेकिन पटना में तमाम स्कूल 10वी के बाद स्टूडेंट्स को टीसी देकर दुबारा नामांकन लेने को बाध्य कर रहे हैं.

पटना के स्कूलों में 11वीं में नामांकन की है केटेरिया
- 10वीं में टीसी दे दिया जाता हैं
- 11वीं में फ्रेस नामांकन होता हैं
- 11वीं मे नामांकन के लिए एंट्रांस एग्जाम पास करना जरूरी हैं
- 10वी के रिजल्ट का अपने ही स्कूल में कोई महत्व नहीं हैं
- 11वीं में नामांकन के लिए आवेदन फार्म भरना ही पड़ता हैं
- नामांकन की पूरी प्रक्रिया नये के साथ पुराने स्टूडेंट्स को भी पूरा करना पड़ता हैं
- आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट को अधिक मार्क्‍स आने से सीबीएसइ में डायरेक्ट नामांकन 11वी में हो जाता हैं

कोट
11वीं में बाहर के स्टूडेंट्स का नामांकन लिया जा सकता हैं. लेकिन जो स्टूडेंट्स उसी स्कूल में 10वीं की पढ़ाई किया हो, उसे बाहर नहीं किया जा सकता हैं. 11वी में नामांकन स्टूडेंट्स अपनी मरजी से जहां चाहे ले सकते हैं. स्कूल का दबाव नहीं होना चाहिए.
रश्मि त्रिपाठी, रीजनल ऑफिसर, सीबीएसइ

इनोवेशन करें और एपीजे अबुल कलाम से मिलने का मौका पायें

इनोवेशन करें और एपीजे अबुल कलाम से मिलने का मौका पायें

- सीबीएसइ स्कूलों के 12वीं के स्टूडेंट्स के लिए सुनहरा मौका
संवाददाता, पटना
क्रियेटिव थिकिंग ही सही आइडिया देता हैं. जिसे सही आइडिया मिला वहीं वेस्ट इनोवेशन कर सकता है . पूर्व राष्ट्रपति और साइंटिस्ट एपीजे अबुल कलाम के निर्देश पर स्कूलों मे क्रियेटिव एंड इनोवेशन प्रोग्राम की शुरुआत की जा रही हैं. नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन-इंडिया (एनआइफ) और हनी बी नेटवर्क के द्वारा इस प्रोग्राम को चलाया जायेगा. आइजीएनआइटीइ-15 नाम से चलने वाले इस कैंपेन के तहत एक कंपीटिशन का भी आयोजन किया जायेगा. इसमें क्लास 12वीं के छात्रों को शामिल होने का मौका मिलेगा. जिसका बेस्ट इनोवेशन होगा उसे एपीजे अबुल कलाम से मिलने का मौका मिलेगा. सीबीएसइ स्कूलों ने इसका आयोजन किया जायेगा. सीबीएसइ ने इसके लिए तमाम स्टूडेंट्स से 31 अगस्त तक अपना आवेदन देने को कहा है. आवेदन के साथ स्टूडेंट्स को अपना इनोवेशन आइडिया भी देना होगा. स्टूडेंट्स को अपना प्रोजेक्ट वर्क बताना होगा. सीबीएसइ के अनुसार जिन छात्रों के इनोवेशन सेलेक्ट किये जायेगे उन्हें एपीजे अबुल कलाम के जन्म दिवस (15 अक्टूबर) 

Tuesday, June 23, 2015

25 जुलाई को लिया जायेगा AIPMT

25 जुलाई को होगा AIPMT. सीबीएसई ने डेट की घोसना मंगल वार को किया है. देश भर में 54 सहर में टेस्ट लिया जायेगा. देश भर में इसके लिए 1026 केंद बनाये गए है. मालूम हो की 4 मई को AIPMT का टेस्ट लिया गया था. लेकिन चोरी होने के कारन कैंसिल कर दिया गया था

Monday, June 22, 2015

स्कूल रहें तैयार, जल्द जारी होगी एआइपीएमटी की तिथि

स्कूल रहें तैयार, जल्द जारी होगी एआइपीएमटी की तिथि

संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की ओर से ऑल इंडिया प्री मेडिकल और प्री डेंटल एग्जामिनेशन (एआइपीएमटी) की तैयारी को लेकर स्कूलों को सूचना दी गयी हैं. सूचना के अनुसार सीबीएसइ ने पुराने परीक्षा केंद्र पर ही एआइपीएमटी की परीक्षा लेने की जानकारी स्कूलों को दिया है. इस बार एआइपीएमटी की परीक्षा के लिए देश भर में 1060 परीक्षा केंद्र बनाये जायेगे. एआइपीएमटी के एग्जामिनेशन कंट्रोलर केके चौधरी की ओर से सूचना तमाम स्कूलों को भेजा गया हैं. इस संबंध में सीबीएसइ के सिटी को-ऑडिनेटर जी जे गॉल्सटॉन ने बताया कि सीबीएसइ की ओर से सूचना हमें सोमवार को मिली है. जल्द ही एआइपीएमटी की तिथि की घोषणा कर दी जायेगी. परीक्षा संबंधी तैयारी के बारे में अभी जानकारी दी गयी हैं. 

30 को जारी होगा साइंस विषय का मेरिट लिस्ट

30 को जारी होगा साइंस विषय का मेरिट लिस्ट

- जेइइ मेन पास सारे छात्रों के रिजल्ट को आज कर दिया जायेगा वेबसाइट पर अपलोड
संवाददाता, पटना
इंटर साइंस के रिवाइज्ड मेरिट लिस्ट को 30 जून को प्रकाशित किया जायेगा. वहीं जेइइ मेन में सफल हुए तमाम छात्र के स्क्रूटनी के रिजल्ट मंगलवार को लोड कर दिये जायेंगे. इससे जेइइ मेन के तमाम छात्रों को उनका 12वीं का रिजल्ट मंगलवार को मिल जायेगा. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि जेइइ मेन के तमाम छात्रों के उत्तर पुस्तिका की जांच पूरी हो गयी है. मंगलवार को सारे छात्रों के रिजल्ट को वेबसाइट पर डाल दिये जायेंगे. उन्होंने 30 जून को मेरिट लिस्ट निकालने का आश्वासन दिया हैं. अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि  इंटर साइंस विषय के स्क्रूटनी का काम लगभग पूरा होने को हैं. अभी तक 70 हजार उत्तर पुस्तिका की स्क्रूटनी की जा चुकी हैं. 17 हजार छात्रों के रिजल्ट को बिहार बोर्ड के वेबसाइट पर भी डाल दिया गया हैं. वहीं 50 हजार उत्तर पुस्तिका को वेबसाइट पर लोड कर दिया गया हैं. जल्द ही इन छात्रों के रिजल्ट भी वेबसाइट पर मिल जायेंगे. ज्ञात हो कि इस बार साइंस स्क्रूटनी के लिए 85 हजार उत्तर पुस्तिका की जांच होनी थी. एक सप्ताह मे सारे कॉपी की जांच हो जायेगी. आर्ट्स और कॉमर्स विषय के स्क्रूटनी का काम भी शुरू कर दिया गया हैं. 

मैट्रिक रिजल्ट की गड़बड़ी को लेकर छात्र पहुंचे समिति, किया हंगामा, मुख्य गेट को किया बंद

मैट्रिक रिजल्ट की गड़बड़ी को लेकर छात्र पहुंचे समिति, किया हंगामा, मुख्य गेट को किया बंद

इसकी फोटो जेपी भैया के पास हैं. छात्रों से बातचीत की फोटो भी हैं

- सारे विषय में पास, कर दिया एक विषय में फेल
- मैथ और संस्कृत में अधिकांश छात्र हो गये फेल
संवाददाता, पटना
शनिवार को मैट्रिक का रिजल्ट निकला और सोमवार को सैकड़ों छात्र बिहार विद्यालय परीक्षा समिति कार्यालय में पहुंच गये. रिजल्ट को लेकर छात्रों में काफी नाराजगी थी. सुबह से ही छात्र समिति कार्यालय पहुंचना शुरू कर दिया था. छात्रों का आरोप था कि उन्हें जानबूझ कर फेल कर दिया गया हैं. छात्रों की नाराजगी इतनी अधिक थी कि छात्रों ने समिति के मुख्य गेट को लगभग तीन घंटों तक बंद रखा. आक्रोशित छात्रों की भीड़ को देखते हुए समिति कर्मचारियों ने मुख्य गेट को बंद करवा दिया. इसके बाद छात्र ना तो किसी को बाहर से समिति कार्यालय में जाने दे रहें थे और ना ही समिति कार्यालय से कोई बाहर आ सकता था. यह स्थिति समिति कार्यालय में घंटों तक बनी रही. छात्र का एक ही मांग की हर विषय में पास तो एक विषय में कैसे फेल कर गये. बाद में कर्मचारियों ने भी छात्रों को समझाने की काफी कोशिश की. इस दौरान समिति कार्यालय में बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह और सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी भी मौजूद नहीं थे.
साइंस में 80 तो मैथ में कैसे आ गया 17 अंक
रिजल्ट की गड़बड़ी को लेकर आये छात्रों के अनुसार मैथ और संस्कृत विषय में अधिकांश छात्र फेल कर गये है. छात्र राजकुमार ( रॉल नंबर 1500318) ने बताया कि उसे सारे विषयों में काफी अच्छे अंक हैं. लेकिन वो मैथ में मात्र 15 अंक हैं. वहीं शत्रुघ्न प्रसाद ( रॉल नंबर 1500373) ने बताया कि उसे साइंस में 80 अंक आये हैं और मैथ में 17 अंक आये हैं. मुङो मैथ में 71 अंक आये होंगे, लेकिन इसे 17 कर दिया गया हैं. मैथ और संस्कृत विषय में कम अंक के कारण काफी संख्या में छात्र फेल हो गये हैं.
स्क्रूटनी आवेदन लेने की कर रहे थे मांग
छात्र समिति कार्यालय में स्क्रूटनी के आवेदन लेने की मांग भी कर रहे थे. छात्र का मांग था कि स्कूल मे आवेदन जमा होगा तो स्क्रूटनी होने में काफी समय लग जायेगा. ऐसे में नामांकन की प्रक्रिया समाप्त हो जायेगी. इस कारण समिति ही अपने स्तर से स्क्रूटनी के आवेदन हमने ले. इससे हमारा रिजल्ट जल्द से जल्द ठीक हो जायेगा.
तीन लाख के ऊपर छात्र हो गये फेल
इस बार मैट्रिक की परीक्षा में 3, 46,845 (24.61 फीसदी) विद्यार्थी फेल कर दिये गये हैं. इसमें छात्र की संख्या 1,67,697 (22.09 फीसदी) हैं. वहीं छात्रओ की संख्या 1,79,148 (27.67 फीसदी) हैं. यह संख्या पिछले साल से लगभग 50 हजार अधिक है. 2014 में मैट्रिक में तीन लाख छात्र फेल हुए थे. इस बार फेल छात्रो का परसेंटेज उस जिला से अधिक है जहां पर कदाचार अधिक हुआ था.

छात्रों की बात :
मै सारे विषयों में पास हूं. लेकिन एक विषय संस्कृत में मुङो फेल कर दिया गया हैं. हिंदी में मुङो 78 मार्क्‍स हैं और संस्कृत में मात्र 18 अंक दिये गये हैं. मै संस्कृत में कभी फेल नहीं हो सकती हूं. अब कह रहे है स्क्रूटनी करवाना पड़ेगा.
रूपम शर्मा, छात्र

मुङो कॉलेज में नामांकन लेना है. लेकिन मुङो मैथ में फेल कर दिया गया हैं. साइंस में मुङो 59 अंक आये हैं, लेकिन मैथ में मात्र 7 अंक हैं. ऐसे में मैं फेल हो गया हूं. स्क्रूटनी का जब तक रिजल्ट होगा, नामांकन प्रक्रिया खत्म हो जायेगी. मुङो जानबूझ कर फेल कर दिया गया हैं.
इंद्रजीत कुमार, छात्र

कोट
छात्रों को परेशानी ना हो इस कारण इस बार स्क्रूटनी के आवेदन स्कूल में ही जमा करवाये गये हैं. स्कूल में छात्र अपना आवेदन 30 जून तक जमा कर ले. उनका रिजल्ट जल्द से जल्द देने की बोर्ड कोशिश करेगी. 15 जुलाई से रिजल्ट मिलना शुरू हो जायेगा. छात्र संयम रखें, सबका रिजल्ट सही हो जायेगा.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

सीबीएसइ ने स्कूलों से मांगा डेवलपमेंट रिपोर्ट

सीबीएसइ ने स्कूलों से मांगा डेवलपमेंट रिपोर्ट

- 13 प्वाइंट पर स्कूलों को देना हैं डेवलपमेट रिपोर्ट
- स्कूल की गतिविधियों पर सीबीएसइ की अब सीधी नजर
संवाददाता, पटना
स्कूल के कैंलेंडर में कितनी एक्टिविटीज शामिल की गयी हैं. फी में इस बार कितनी बढ़ोतरी की गयी हैं. हर महीने स्कूल में डेवलपमेंट को लेकर क्या कुछ किया गया हैं. अब इन तमाम चीजों की जानकारी स्कूल केवल अपने तक सीमित नहीं रख सेंकेंगे. ये तमाम  जानकारी स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होगी. साल में दो बार सीबीएसइ को डेवलपमेंट रिपोर्ट भी भेजनी होगी. जिसमें स्कूल संबंधी तमाम जानकारी देनी होगी. छह माह में स्कूल में एकेडेमिक लेवल पर किस तरह का डेवलपमेंट हुआ, सभी जानकारी सीबीएसइ को 15 सितंबर तक भेजनी होगी.
डोमेन नेम से जांच
स्कूलों द्वारा जो भी डेवलपमेंट रिपोर्ट तैयार किया जायेगा, उसकी जांच सीबीएसइ स्कूल की वेबसाइट देख कर करेगी. सीबीएसइ की ओर से तमाम स्कूलों को एक ही डोनेम नेम से जोड़ने का निर्देश पहले ही दिया जा चुका हैं. इस डोनेम नेम के माध्यम से बोर्ड स्कूल पर नजर रखेगा.
हेल्थ अवेयरनेस टीचर्स
सभी स्कूलों को अब हेल्थ अवेयरनेस टीचर्स नियुक्त करने का भी निर्देश सीबीएसइ की ओर से दिया गया हैं. ये टीचर्स स्टूडेंट्स को हेल्थ टिप्स देंगे. सीबीएसइ के अनुसार टीचर्स को जंक फूड खाने से होनेवले नुकसान तथा अन्य स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी बच्चों को देनी शामिल किया गया हैं.

इन प्वाइंट पर तैयार करनी है डेवलपमेट रिपोर्ट
डोनेशन के नाम पर फी  -  जुलाई से सितंबर तक कितनी बार स्कूल की ओर से स्टूडेंट्स से डोनेशन के नाम पर रुपये लिये गये.
व्यावसायिक संस्थान तो नहीं है स्कूल परिसर  - स्कूलों को इस बात की जानकारी देनी हैं कि स्कूल परिसर में व्यावसायिक रूप में किसी तरह की एक्टिविटी तेा नहीं हो रही हैं. स्कूल के नाम, मोटो और लोगो को फ्रेंचाइजी के नाम पर बेचा तो नहीं जा रहा हैं
स्टूडेट्स को सजा देने वाले ईचर्स की सूची  -  हर स्कूल को उन टीचर्स की सूची तैयार करनी हैं जो क्लास के दौरान स्टूडेंट्स की पिटाई करते हैं. टीचर्स स्टूडेंट्स को किसी भी कीमत पर फिजिकली या मेंटली पनिशमेंट नहीं कर दे सकते हैं. हर स्कूल को ऐसे टीचर्स की सूची डेवलपमेंट रिपोर्ट में शामिल करनी हैं
स्कूल एडमिशन, ट्रांसफर और माइग्रेशन संबंधी - सीबीएसइ के परीक्षा नियमों के अनुसार किसी भी छात्र का एडमिशन सत्र के दौरान नहीं लिया जा सकता हैं. ट्रांसफर वाले स्टूडेंट्स का एडमिशन स्कूलों को लेना होगा. ऐसे स्टूडेंट्स के एडमिशन में माइग्रेशन सर्टिफिकेट होना बहुत ही जरूरी है .
सेक्सुअल हैरेसमेंट संबंधी  -  स्कूल की ओर से वीमेन टीचर्स और गर्ल स्टूडेंट्स के लिए सेक्सुल हेरेसमेट के संबंध में क्या व्यवस्था अपनायी गयी हैं. इसके लिए हर स्कूल को सीबीएसइ की वेबसाइट पर सकरुलर देख कर नियम लागू करना चाहिए. इसके लिए स्कूल क्या व्यवस्था कर रहा हैं. इसकी जानकारी सितंबर तक देनी होगी.
सैलरी और सर्विस कंडीशन संबंधी  -  टीचर्स स्कूल में किस तरह की सेवा दे रहे है, उन्हें कितनी सैलरी मिल रही हैं. स्कूल की छुट्टी के बाद टीचर्स स्कूल में किस तरह की सेवा दे रहे हैं. उन्हें कितनी सैलरी मिल रही हैं. स्कूल की छुट्टी के बाद टीचर्स स्कूल में कितनी देर तक रूकते हैं.  टीचर्स की सैलरी का डिटेल्स भी रिपोर्ट में देना होगा.
स्टूडेंट्स प्रेजेंट इन क्लास रूम  - हर स्कूल को सितंबर तक स्टूडेंट्स के स्कूलों आने की रिपोर्ट देनी हैं. 9वीं से 12वीं तक के छात्र स्कूल में कितना प्रेजेंट रहे. इसका लिस्ट स्कूल को बोर्ड के पास भेजनी होगी. 2इसके अलावा एफए-वन अंौर एफए-टू (फार्मेटिव असेसमेंट)  की पूरी एक्टिविटी की रिपोर्ट भी स्कूल को भेजनी हैं.
स्कूल में नहीं चल सकेगें कोचिंग संस्थान  - स्कूल को सीबीएसइ को इस बात की जानकारी देनी होगी कि उनके यह किसी तरह की कोचिंग संस्थान नहीं चलाये जा रहे हैं
रैंप की व्यवस्था  -  फिजिकल हैंडिकैंप स्टूडेंट्स के लिए स्कूल क्या व्यवस्था कर रहा हैं. स्कूल परिसर में ऐसे स्टूडेंट्स के लिए रैंप बनाया गया है या नहीं. इसकी रिपोर्ट हर स्कूल को सीबीएसइ के पास भेजनी हैं. डिसएब्लिटी एक्ट 1995 के तहत हर स्कूल को यह नियम लागू करना हैं
हेल्थ, सेनिटेशन और फायर सेफ्टी  -  हेल्थ, सेनिटेशन और आग से बचने के लिए स्कूल में किस तरह के इंतजाम हैं. स्कूल कैंपस में हेल्थ कैंप आदि कितनी बार लगाये गये हैं. इसके अलावा साफ  सफाई के नाम पर किस तरह के काम स्कूल कैंपस में किये जाते है. इसकी तीन महीने की रिपोर्ट स्कूल को भेजनी हैं
मूल्यांकन प्रक्रिया  -  क्लास वर्क और बोर्ड परीक्षा का मूल्यांकन किस तरह किया जा रहा हैं. इसकी जानकारी बोर्ड के पास भेजनी होगी. इसके अलावा आंसर कॉपी भी स्कूल को बोर्ड के पास भेजनी होगी. जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच होगी.
स्कूल वेबसाइट का डेवलपमेंट  - स्कूल ने सीबीएसइ के अनुसार स्कूल वेबसाइट को डेवलप किया है या नहीं. इसकी भी जानकारी स्कूल को बोर्उ के पास सितंबर भेजनी होगी
टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम  - इवेंट, सीबीएसइ नियम और करेंट अफेयर्स से अवगत करवाने के लिए समय समय पर ट्रेनिंग प्रोग्राम दी जायेगी. 

- सिमुलतला आवासीय विद्यालय की ओर से तैयार किया जा रहा प्रस्ताव

- सिमुलतला आवासीय विद्यालय की ओर से तैयार किया जा रहा प्रस्ताव
- 2014-15 और 2015-16 सत्र के नामांकन की भरपायी सरकारी स्कूलों के छात्रों से किये जाने की होगी तैयारी
संवाददाता, पटना
 अस्तित्व पर प्रश्न चिह्न् लग रहा सिमुलतला आवासीय विद्यालय एक बार फिर अस्तित्व को बचाने की शुरुआत करने लगा हैं. विद्यालय को पुराने र्ढे पर लाने के लिए इसके बेसिक जरूरत को लेकर तैयारी शुरू करने की कवायद शुरू कर दी गयी है. वहीं विद्यालय की ओर से पिछले दो सालों के नामांकन के गैप को भरने की तैयारी भी की जा रही हैं. इसके लिए विद्यालय की ओर से एक प्रस्ताव सरकार के पास भेजने की तैयारी की जा रही हैं. प्रस्ताव के मुताबिक पूरे प्रदेश में जितने भी सरकारी विद्यालय हैं वहां से क्लास 6ठीं और क्लास 7वीं के छात्रों को इस विद्यालय में नामांकन के लिए आवेदन भरवाया जायें. इससे दोनों ही सत्र के लिए आसानी से 120-120 छात्रों को चयन किया जा सकेगा. इस संबंध में सिमुलतला आवासीय विद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा. शंकर प्रसाद ने बताया कि पिछले दो साल विद्यालय में नामांकन प्रक्रिया नहीं किया गया है. ऐसे में दो साल विद्यालय में एक भी छात्र नहीं रहेंगे. इसे बचाना बहुत ही जरूरी हैं.
सरकारी स्कूलों से चुने कर नामांकन को किया जायें पूरा
विद्यालय की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार पूरे प्रदेश से सरकारी विद्यालयों के क्लास छठी और सातवीं के बेस्ट पांच छात्रों की सूची तैयार किया जाये. यह काम जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से करवाया जाये. हर सरकारी विद्यालय से छठीं और सातवीं के पांच बेस्ट छात्रों को लेने के बाद इन छात्रों के बीच नामांकन प्रक्रिया के लिए लिखित परीक्षा ली जायेगी. लिखित परीक्षा के माध्यम से दोनों सत्र के लिए 120-120 छात्रों को चुना जाये. इससे दोनों की सत्र के गैप को पूरा किया जा सकेगा. ज्ञात हो कि सिमुलतला आवासीय विद्यालय में पिछले दो सत्रों से नामांकन नहीं हो पाया हैं. इसमे 2014-15 सत्र और 2015-16 सत्र शामिल हैं. ऐसे में आगे चल कर दो साल बोर्ड परीक्षा के लिए गैप चला जायेगा. इससे विद्यालय के एकेडमिक स्तर पर असर पड़ेगा.
हर साल ड्रॉप आउट हो रहे छात्र
सिमुलतला आवासीय विद्यालय के अस्तित्व को नहीं बचाना जायेगा तो बेहतर रिजल्ट देने के बावजूद छात्र यहां से छोड़ कर चले जायेंगे. 2015 में रिजल्ट बेहतर देने के बावजूद टॉपर लिस्ट में शामिल छात्र के अलावा 108 में से 50 से अधिक छात्र विद्यालय को छोड़ चुके है. टॉपर नीरज और कुणाल ने बताया कि प्लस टू सिमुलतला आवासीय विद्यालय से नहीं करेंगे. विद्यालय में पढ़ाई का माहौल तो हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं हैं. इससे प्लस टू करना हमारे लिए संभव नहीं हो पायेगा. ऐसे शिक्षकों की भी कमी है जो प्लस टू लेवल की स्टडी करवा सकें.
चार शिक्षकों ने छोड़ दिया विद्यालय
विद्यालय के स्थापना के बाद अब तक चार शिक्षक स्कूल को छोड़ कर जा चुके है. इसमें प्राचार्य डा. शंकर प्रसाद, साइंस के शिक्षक शंकराचार्य और के पंडित व हिंदी के शिक्षक क्रांति कुमार शामिल हैं. इन शिक्षकों ने विद्यालय की खराब व्यवस्था और शिक्षक नियुक्ति में गड़बड़ी होने के कारण विद्यालय को छोड़ दिया था.

कोट
जल्द ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. पिछले दो सत्र से नामांकन नहीं होने से विद्यालय के अस्तित्व पर पड़ आया है. ऐसे में सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए. दो सालों के गैप को भरना बहुत ही जरूरी हैं. इसकी कवायद भी हम शुरू करने जा रहें हैं.
राजीव रंजन, प्राचार्य, सिमुलतला आवासीय विद्यालय 

Sunday, June 21, 2015

नवादा जिले का सबसे बेहतर रहा रिजल्ट, 94 फीसदी छात्र हुए उतीर्ण

नवादा जिले का सबसे बेहतर रहा रिजल्ट, 94 फीसदी छात्र हुए उतीर्ण

- नवादा जिला ने लगभग दो फीसदी रिजल्ट हुआ बेहतर
- सबसे खराब रहा मुजफ्फरपुर जिला का रिजल्ट, मात्र 56.907 फीसदी छात्र हुए पास
संवाददाता, पटना
मैट्रिक रिजल्ट में इस बार कई जिलों के छात्रों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया तो कई जिले पिछले साल के मुकाबले भी अच्छा रिजल्ट नहीं कर पायें. इस बार मैट्रिक के रिजल्ट में  नवादा जिला का सबसे बेहतर रिजल्ट रहा. नवादा जिला ने पिछले साल के मुकाबले बेहतर रिजल्ट करते हुए 94.587 फीसदी रिजल्ट देकर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है. नवादा जिला ने 2014 के तुलना में लगभग दो फीसदी बेहतर रिजल्ट दिया हैं. वहीं दूसरे स्थान पर शेखपुरा जिला का रिजल्ट रहा. शेखपुरा जिला ने 93.924 फीसदी रिजल्ट रहा. शेखपुरा जिला के छात्रों ने भी पिछले साल की तुलना में लगभग 12 फीसदी बढ़िया रिजल्ट दिया हैं. बेहतर रिजल्ट देने में तीसरे स्थान पर अरवल जिला हैं. अरवल जिला में 92.673 फीसदी छात्रों को सफलता मिली हैं. अरवल जिलों के छात्रों का रिजल्ट पिछले साल की तुलना में एक फीसदी अधिक हुआ हैं. वहीं इस बार पूरे प्रदेश में सबसे खराब रिजल्ट मुजफ्फरपुर जिला का रहा. मुजफ्फरपुर जिला में इस बार मात्र 56.907 फीसदी छात्र ही सफल हो पायें हैं. वहीं भभुआ जिला और अररिया जिला दूसरे और तीसरे स्थान पर रहा, जहां पर मात्र 60 फीसदी के लगभग ही छात्र उतीर्ण हो पायें हैं. मुजफ्फरपुर जिला का इस बार रिजल्ट 2014 के मुकाबले छह फीसदी कम हो गया है. वहीं अररिया का रिजल्ट 2014 के मुकाबले ग्यारह फीसदी कम हुआ है. सुपौल जिला का रिजल्ट 2014 के मुकाबले पंद्रह फीसदी कम हो गया हैं. देखा जायें तो 2014 के मुकाबले 2015 में  22 जिलों के रिजल्ट ने बेहतर हुआ है वहीं 16 जिलों का रिजल्ट पिछले साल के मुकाबले घट गया हैं.
- 22 जिलों का प्रदर्शन गिरा, 16 ने किया बेहतर
इस बार पूरे प्रदेश में कई ऐसे जिलें हैं जिनका रिजल्ट पिछले साल की तुलना में घट गयी है. वहीं कई जिलों ने पिछले साल की तुलना में बेहतर रिजल्ट किया है. पिछले साल जहां जमुई जिला का रिजल्ट सबसे बेहतर 93.291 फीसदी रहा, वहीं इस बार नवादा के छात्रों ने बाजी मारी. इस बार 22 जिलों के रिजल्ट में कमी आयी है. वहीं 16 जिलो का रिजल्ट बेहतर हुआ है. कई जिलों ने तो इस बार रिजल्ट में काफी सुधार भी किया है.
- वैशाली का पांच फीसदी रिजल्ट घट गया
मैट्रिक  की परीक्षा में सबसे अधिक चर्चा में रहा वैशाली जिला रिजल्ट मे बेहतर नहीं कर पाया. जिलें में परीक्षा के दौरान तो कदाचार की काफी घटनाएं हुई. लेकिन रिजल्ट देने में वैशाली मात्र 81.80 फीसदी ही रहा. लगभग 82 फीसदी पर आकर वैशाली जिले का रिजल्ट सिमट कर रह गया. अगर 2014 की बात करें तो वैशाली जिले का रिजल्ट पिछले साल की तुलना मे भी कम रहा. लगभग पांच फीसदी वैशाली जिला के रिजल्ट में कमी आ गयी है. 2014 में जहां वैशाली से 86.60 फीसदी रिजल्ट हुआ था वहीं इस बार 81.80 फीसदी रिजल्ट पर सिमट गया. 

176 स्टूडेंट्स को नहीं मिला रिजल्ट, दोषी कौन

176 स्टूडेंट्स को नहीं मिला रिजल्ट, दोषी कौन

- छात्रों का दो साल हो गया बरबाद
- बच्चे के स्कूल परफार्मेस रिजल्ट को ले अभिभावक लगा रहे चक्कर
संवाददाता, पटना
9वीं में रजिस्ट्रेशन हुआ. 10वीं में बोर्ड परीक्षा का फार्म भरा. एडमिट कार्ड मिला और मार्च में परीक्षा में शामिल भी हुए. लेकिन रिजल्ट नहीं मिला. पिछले 21 दिनों से अपने रिजल्ट के लिए लड़ रहे एवीएन इंगलिश स्कूल के 176 स्टूडेंट्स को आखिर अब रिजल्ट नहीं मिलेगा. सीबीएसइ ने स्कूल को दोषी बताते हुए 176 स्टूडेंट्स को रिजल्ट नहीं दिया. वहीं स्कूल ने सीबीएसइ को रिजल्ट नहीं देने का दोषी बताते हुए छात्र और अभिभावकों को बताया कि सीबीएसइ जानबूझ कर 176 छात्रों का रिजल्ट रोके हुए हैं. सीबीएसइ और स्कूल के इस दोषारोपण के बीच अब 176 छात्रों के भविष्य बरबाद हो गया हैं. छात्रों को समझ में नहीं आ रहा कि इन सबों में वो कहां दोषी हैं. उन्होंने ऐसा क्या कि जिससे उन्हें रिजल्ट नहीं मिला.
- भटक रहे अभिभावक, नहीं मिल रहा उत्तर
20 दिनों बाद भी बच्चे का रिजल्ट नहीं मिलने से अब अभिभावक भी कभी स्कूल तो कभी सीबीएसइ ऑफिस में जाकर रिजल्ट के लिए भटक रहे हैं. अभिभावक जयेंद्र कुमार ने बताया कि अगर स्कूल की मान्यता खत्म कर दी गयी तो सीबीएसइ ने हमें बताया क्यूं नहीं. ऐसे में बच्चे का परीक्षा हुआ. सारा कुछ हुआ. लेकिन रिजल्ट नहीं मिला. अगर स्कूल गलत है तो सीबीएसइ को इस पर पहले ही ध्यान देना चाहिए. अब अगर सीबीएसइ बच्चे का रिजल्ट नहीं देगी तो हमारे बच्चे का दो साल बरबाद हो जायेगा. फिर 9वीं में नामांकन लेना होगा. वहीं अभिभावक मुमताज अहमद ने बताया कि हम मीडिल क्लास के लोग है. हम कोर्ट नहीं जा सकते है. सीबीएसइ को उन स्टूडेंट्स के बारे में सोचना चाहिए. जो फर्जी नहीं बल्कि सही स्टूडेंट्स हैं.

- 212 को दिया 176 को नहीं मिला रिजल्ट
एवीएन इंगलिश स्कूल के छात्र 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए. 388 छात्रों के रिजल्ट सीबीएसइ के वेबसाइट पर पब्लिश नहीं हुआ. इसके बार छात्रों ने हंगामा किया तो 212 छात्रो ंको रिजल्ट सीबीएसइ ने स्कूल से डाक्टूमेंट लेकर घोषित किया. बांकी बचे हुए 176 छात्रों के रिजल्ट भी देने की बात हुई थी. लेकिन स्कूल द्वारा डाक्टूमेंट नहीं दिये जाने के कारण  सीबीएसइ ने रिजल्ट पर रोक लगा दि

सीबीएसइ से अभिभावक मांग रहे जवाब
- बच्चे फर्जी हैं तो सीबीएसइ ने बताया क्यूं नहीं
- दो साल बच्चे का बरबाद हो जायेगा. ऐसे में बच्चे क्या करेंगे
- स्कूल के बारे में सीबीएसइ ने पहले ही क्यूं नहीं अभिभावकों को अवेयर किया
- परीक्षा फार्म कैसे भरवा दिया गया
- हर महीने स्कूल का फी कैसे लिया जाता था
- एडमिट कार्ड कैसे मिल गया
- नेट पर सर्च करने पर रॉल नंबर और रॉल कोड सीबीएसइ के वेबसाइट पर कैसे डिस्प्ले हो रहा है
- स्कूल की गलती की सजा स्टूडेंट्स को कैसे दिया जा रहा हैं
- सीबीएसइ प्रत्येक स्टूडेंटस का सारा डाक्टूमेंट सर्च कर रिजल्ट उसे क्यूं नहीं दे रही है

अभिभावकों का दर्द
मेरी बेटी एवीएन इंगलिश स्कूल में क्लास वन से पढ़ रही है. हर क्लास में एक्टिविटी में पार्टिसिपेट भी किया है. रिजल्ट में अव्वल रही हैं. 9वीं और 10वी क्लास के भी सारे डाक्टूमेंट भी हमारे है. तो ऐसे में बेटी हमारी फर्जी स्टूडेंट कैसे हो गये. क्यूं मेरी बेटी का रिजल्ट रोका गया है.
लीला सिंह, अभिभावक, एवीएन इंगलिश स्कूल

9वीं में रजिस्ट्रेशन हुआ, परीक्षा फार्म सीबीएसइ ने भरवाया. एडमिट कार्ड डाउन लोड कर सीबीएसइ के वेबसाइट से स्कूल ने छात्रों को दिया. बोर्ड परीक्षा में बच्चे शामिल हुए. ऐसे में रिजल्ट कैसे नहीं मिला. सारा कुछ हुआ तो बच्चे फर्जी कैसे हो गये.
राजेंद्र कुमार, अभिभावक, एवीएन इंगलिश स्कूल


1952 के मैट्रिक के रिजल्ट के रिकार्ड को तोड़ा सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रों ने

1952 के मैट्रिक के रिजल्ट के रिकार्ड को तोड़ा सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रों ने

- सीबीएसइ के बोर्ड टॉपर से भी अधिक आया बिहार बोर्ड के टॉपर को अंक
संवाददाता, पटना
उत्तर पुस्तिका में अगर उत्तर सही से लिखा हो तो एग्जामिनर भी अंक देने को मजबूर हो जाते हैं. कुछ ऐसा ही इस बार सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रों के साथ हुआ. सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रों ने ना सिर्फ सीबीएसइ 10वीं बोर्ड के टॉपर से अधिक अंक लाये, बल्कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के 1952 के रिजल्ट का भी रिकार्ड तोड़ा. समिति से मिली जानकारी के अनुसार 1952 में 96 परसेंट पर टॉपर को मार्क्‍स आयें थे. इसके बाद के तमाम वर्षो में इतने मार्क्‍स किसी भी टॉपर को नहीं आया. हमेशा 90 से 95 परसेंट के बीच टॉपर के अंक होते थे. लेकिन इस बार सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्र ने 97.40 फीसदी अंक प्राप्त कर समिति के रिजल्ट का रिकार्ड तोड़ा हैं.  2015 मे सीबीएसइ बोर्ड के पटना रिजन में 10वी बोर्ड के टॉपर छात्र को 92 सीजीपीए आया था. लेकिन बिहार बोर्ड टॉपर नीरज और कुणाल ने 97.40 फ
- 90 से 97 के बीच 89 छात्र हैं शामिल
इस बार सारे स्कूलो के रिजल्ट को पीछे छोड़ कर सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रों ने रिजल्ट पर कब्जा कर लिया हैं. मैट्रिक के इस बार के रिजल्ट में 90 परसेंट से लेकर 97 परसेंट के बीच तमाम अंक में सिमुलतला आवासीय विद्यालय के ही छात्र शामिल हैं. रिजल्ट के मुताबिक 90 से 97.40 के बीच 89 छात्र हैं और ये सारे के सारे सिमुलतला आवासीय विद्यालय के ही छात्र हैं. छात्रों के बीच प्रतियोगिता इतनी है कि प्वाइंट में इनका अंतर आता है.

कोट
सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रों ने काफी बेहतर रिजल्ट किया है. सारे के उत्तर पुस्तिका पर काफी अच्छे से उत्तर लिखे थे. इस कारण इतना अंक देने को एग्जामिनर भी मजबूर हो गया. कई सालों के बाद मैट्रिक में इतने अंक छात्रों को आये हैं.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 

गुरूकुल सिस्टम में 24 घंटे गुरु का मिला साथ, बन गये बेस्ट

गुरूकुल सिस्टम में 24 घंटे  गुरु का मिला साथ, बन गये बेस्ट

- रेगुलर प्रैक्टिस और ओपनली इंवायरमेंट ने पढ़ाई से जोड़े रखा छात्रों को
-  रेमेडियल क्लास से बनाये गये एक लेवल पर हर छात्र
संवाददाता, पटना
एवरेस्ट पर चढ़ने की इच्छा किसकी नहीं होती है. लेकिन एवरेस्ट पर वहीं चढ़ता है जो हर कठिनाई को दरकिनार कर अपने लक्ष्य (एवरेस्ट) की ओर नजर रखता है. कुछ ऐसा ही एक उदाहरण बिहार का नेतरहाट कहे जाने वाला सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रो ने कर दिखाया हैं. एक नहीं दो नहीं बल्कि तमाम छात्रों ने मैट्रिक में बेहतर रिजल्ट देकर यह साबित कर दिया है कि अगर एवरेस्ट (लक्ष्य) पर चढ़ने के लिए सही गाइड (गुरु) मिले तो हर कठिनाई पर विजय प्राप्त किया जा सकता है. गुरु का साथ मिला और आगे बढ़ते गये. ना दिन देखा और ना रात देखा, लक्ष्य पर बस साधा निशाना. पढ़ाई की सुविधा नहीं मिली, लेकिन लगातार अभ्यास और शिक्षकों के साथ पढ़ाई का खुला वातावरण ने आज सिमुलतला आवासीय विद्यालय के छात्रों को उदाहरण के तौर पर सामने लाकर खड़ा कर दिया है.
- 11 शिक्षकों से शुरू हुआ था स्कूल
विद्यालय की शुरुआत 11 शिक्षकों से शुरू हुआ था. 11 शिक्षक ने 120 छात्रों के बीच अपनी जिम्मेवारी पूरी तरह निभायी. सुबह 4 बजे से रात के 9 बजे तक का समय छात्रों का शिक्षको के साथ ही गुजरता हैं. शिक्षक कुमारी पुष्पा ने बताया कि छठी में नामांकन होने के बाद छात्रों का दो महीने टेस्ट लिया जाता है. इससे हमें छात्र के मेंटल लेवल का पता चल जाता है. कौन छात्र किस विषय में अच्छे या किस विषय में उनकी कैसी पकड़ हो सकती हैं, इसके बारे में जानकारी मिल जाती है. इसके बाद विद्यालय के स्ट्रेटजी के अनुसार पढ़ाई शुरू करवाया जाता हैं.
- सीबीएसइ, आइसीएसइ बोर्ड के बाद पढ़ते है बिहार बोर्ड का सिलेबस
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में हर बोर्ड के सिलेबस को फोकस किया जाता हैं. छात्रों को हर चीजों का नॉलेज हो, इसके लिए सीबीएसइ के अलावा आइसीएसइ बोर्ड के सिलेबस को भी पढ़ाया जाता है. मैथ की शिक्षिका कुमारी पुष्पा ने बताया कि जब विद्यालय खुला था तो यह सीबीएसइ बोर्ड पर आधारित था. लेकिन बाद में यह बिहार बोर्ड से जुड़ गया. लेकिन स्कूल में आज भी हर बोर्ड के सिलेबस को हम फॉलो करते है. क्लास 8वीं तक हम सीबीएसइ, आइसीएसइ बोर्ड के हर किताबों से छात्रों की प्रैक्टिस करवाते हैं. 9वीं से हमे बिहार बोर्ड को फोकस करना होता है. इस कारण उसके बाद बिहार बोर्ड के सिलेबस को भी शामिल करते है. 9वीं से भी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना शुरू कर दिया जाता हैं
- एक्टिविटी क्लास पर होता हैं फोकस
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में लाइब्रेरी और लैब दोनों की काफी कमी हैं. लेकिन इस कमी हो वहां के शिक्षक महसूस भी नहीं होने देते हैं. फिजिक्स के शिक्षक विजय कुमार ने बताया कि जो संसाधन हमारे पास है हम उसी में बेहतर शिक्षा देने की कोशिश करते हैं. साइंस विषय में बिना प्रैक्टिकल के पढ़ाई पूरी नहीं होती है. ऐसे में हम छोटा-छोटा प्रयोग कर इसे छात्रों को समझाते हैं. प्रयोगशाला की कमी हम खुद ही पूरा कर देते हैं. अधिक से अधिक एक्टिविटी क्लास के माध्यम से हर  टॉपिक को छात्रो को बताने की कोशिश की जाती हैं.

स्टडी का यह अनोखा प्रयोग चलता है सिमुलतला आवासीय विद्यालय में
1. रेमेडियल क्लास  - इसके अंतर्गत ऐसे छात्रों को चुना जाता हैं जो किसी विषय में कमजोर होते है. छठी क्लास में ही ऐसे छात्रों को चुन लिया जाता हैं. जो छात्र जिस भी विषय में कमजोर होते है. उनके उपर विद्यालय के शिक्षक अलग से समय देते हैं. सप्ताह में तीन दिन दो घंटे की रेमेडियल क्लास आयोजित की जाती है. इसके माध्यम से छात्रों को एक लेवल पर लाने की कोशिश की जाती हैं.
2. इच वन टीच वन -  गांधी जी के सोच पर आधारित इस स्टडी के तहत जूनियर बच्चों को सिमुलतला के छात्र पढ़ाते हैं. पूर्व प्रिंसिपल शंकर प्रसाद ने बताया कि इसके तहत बच्चों में समाज सेवा का भाव आयें, इसके तहत झाझा ब्लॉक के जितने भी बच्चे होते हैं. उन्हें सिमुलतला के छात्र हर दिन तीन घंटे पढ़ाते हैं. जूनियर बच्चों को पढ़ाने से छात्रों की अपनी प्रैक्टिस भी हो जाती हैं .
3. श्रुति लेख  - इसके तहत हर दिन एक ऐसा क्लास होता है जिसमें छात्रो को एक साथ जोर-जोर से पढ़ने को कहा जाता है. इससे छात्रों का उच्चरण बढ़ता है और हेजिटेशन कम होता है. हर प्रयोग हर क्लास के लिए करवाया जाता है. एक घंटे के इस क्लास में हर छात्र को बोल कर बढ़ने के लिए कहा जाता हैं.
4. खुद का करें अपना काम -  सिमुलतला आवासीय विद्यालय गुरुकुल परंपरा अपनाया गया है. इस कारण यहां पर छात्रों को खाना बनाने और परोसने की भी ड्यूटी दी जाती है. छात्रों में सर्वागिण विकास हो, छात्रों में व्यवहारिकता आयें, इस कारण खुद से ही सारा काम करवाया जाता है.
5. चार घंटे की सेल्फ स्टडी, आधे घंटे का ग्रुप डिस्कशन - सिमुलतला आवासीय विद्यालय में सेल्फ स्टडी पर काफी फोकस किया जाता है.  दो बजे स्कूल समाप्त होने के बाद 3 बजे से 6 बजे शाम तक छात्र सेल्फ स्टडी करते हैं. इसके बाद आधे घंटे का ग्रुप डिस्कशन भी छात्र करते है. शाम में तीन घंटे और सुबह में एक घंटे का सेल्फ स्टडी हर छात्र के लिए अनिवार्य हैं.

सिमुलतला आवासीय विद्यालय में स्टडी के इन प्वाइंट पर किया जाता है फोकस
- हर दिन छह घंटे का अभ्यास करवाया जाता हैं
- 24 घंटे शिक्षकों का साथ मिलने से छात्र की हमेशा जिज्ञासा पूरी होती है
- शिक्षक पढ़ाई संबंधित फीड बैक भी छात्रों से समय-समय पर लेते हैं
- 8वीं के बाद छात्रो में प्रतियोगिता का भाव डालना शुरू कर दिया जाता हैं
- छात्रों के बीच ऐसी भावनाएं शिक्षक देते है जिससे पढ़ाई में एक दूसरे से आगे बढ़ने की ललक पैदा हो

कोट
इस विद्यालय की शुरुआत में ही तमाम अच्छे संस्थान से फीड बैक लेकर शुरू किया गया था. बेसिक सुविधाओं का भले कमी है, लेकिन यहां पर शिक्षको का माहौल ऐसा है कि हर छात्रो का एक समान विकास होता हैं. इसी का असर है कि आज शिक्षकों की मेहनत छात्रों के रिजल्ट में नजर आ रही है.
राजीव रंजन,  प्राचार्य, सिमुलतला आवासीय विद्यालय

Saturday, June 20, 2015

ऑफ लाइन के साथ ऑन लाइन भरे जायेंगे मैट्रिक स्क्रूटनी का आवेदन

ऑफ लाइन के साथ ऑन लाइन भरे जायेंगे मैट्रिक स्क्रूटनी का आवेदन

- 22 से 30 जून तक जमा होगा स्क्रूटनी का आवेदन
संवाददाता, पटना
मैट्रिक के छात्रों को अपना रिजल्ट पर दावा करने और स्क्रूटनी के आवेदन के लिए अब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति आने की जरूरत नहीं हैं. अब उन्हे घर बैठे ही यह सुविधा दी जा रही हैं. पहली बार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से मैट्रिक स्क्रूटनी के लिए ऑफ लाइन के साथ ऑन लाइन आवेदन फार्म देने की व्यवस्था की गयी हैं. छात्र स्क्रूटनी का आवेदन इस बार दो तरह से कर सकते हैं. इस बार स्क्रूटनी के लिए आवेदन अपने स्कूल में ही छात्र करेंगे. इसके लिए उन्हें बिहार बोर्ड के वेबसाइट से निकाला हुआ मार्क्‍स सीट लगाकर आवेदन के साथ जमा करने होगा. वहीं दूसरी ओर ऑन लाइन आवेदन देने की भी व्यवस्था समिति की ओर से किया गया है. समिति के वेबसाइट पर जाकर छात्र आवेदन दे सकते हैं. ऑन लाइन आवेदन की तिथि समिति द्वारा 22 से 30 जून तक रखी गयी हैं. वहीं स्कूल में स्क्रूटनी के आवेदन जमा करने की तिथि 2 जुलाई तक रखी गयी हैं. समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि छात्रों को असुविधा ना हो इसके लिए यह व्यवस्था की गयी है. प्रदेश भर के छात्रों को स्क्रूटनी का आवेदन जमा करने के लिए बोर्ड का चक्कर लगाना पड़ता था. अब उन्हें यह नहीं करना पड़ेगा. आवेदन आने के बाद स्क्रूटनी का काम शुरू हुआ. जुलाई अंतिम तक स्क्रूटनी का काम पूरा कर लिया जायेगा. 

दूसरे स्कूल में फार्म भरवाना पड़ सकता है महंगा

दूसरे स्कूल में फार्म भरवाना पड़ सकता है महंगा

- सीबीएसइ ने वेबसाइट पर डाला नोटिस
- एलओसी में शामिल स्टूडेंट्स ही केवल भर सकते है परीक्षा फार्म
संवाददाता, पटना
किसी भी स्कूल के लिए अब किसी दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का फार्म भरवाना और किसी स्टूडेंट्स के लिए किसी दूसरे स्कूल से फार्म भरना अब महंगा पर सकता हैं. क्योंकि सीबीएसइ अब ऐसे स्टूडेंट्स को बाहर का रास्ता दिखायेगी जो किसी दूसरे स्कूल से फार्म भर कर बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे. हाल के कई सालों में हुई घटना के आधार पर सीबीएसइ ने स्कूलों को सचेत करते हुए कहा है कि इस तरह की हरकतों से बाज आयें. क्योंकि ऐसे किसी भी स्कूल को माफ नहीं किया जायेगा जो डी-एफिलिएटेड स्कूल के स्टूडेंट्स का परीक्षा फार्म भरवायेंगे. उन तमाम स्कूलों पर सीबीएसइ अब नजर होगी जो इस तरह के कामों में भी शामिल होते है. ज्ञात हो कि पटना में कई ऐसे स्कूल का रैकेट चलता हैं जो दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का 10वीं और 12वीं का परीक्षा फार्म भरवा कर अपनी मोटी कमाई करते है. ऐसे में स्टूडेंट्स का दो साल भी बरबाद हो जाता हैं और स्टूडेंट्स को रिजल्ट भी नहीं मिलता है.
- एलओसी वाले ही होंगे सीबीएसइ के स्टूडेंट्स
सीबीएसइ ने स्कूलो को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जो स्टूडेंट्स एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) में शामिल होंगे वहीं उस स्कूल से परीक्षा फार्म भर सकते हैं. बोर्ड के अनुसार एलओसी में वहीं स्टूडेट्स शामिल होंगे जो उसी स्कूल में 9वीं की पढ़ाई करेंगे. उसी तरह से 12वीं बोर्ड की परीक्षा फार्म के एलओसी में भी वहीं स्कूल शामिल होंगे तो 11वीं और 12वी की पढ़ाई उसी स्कूल से किया हों. अब सीबीएसइ स्कूलों से एटेंडेंस सीट भी लेने के बारे में सोच रहा हैं.
- एलओसी से पकड़ में आ जाते स्टूडेंट्स
पिछले दो सालों से सीबीएसइ एलओसी फार्म हर स्टूडेंट्स का भरवा रही है. ऐसे में किसी भी स्टूडेंट्स को आसानी से सीबीएसइ पकड़ लेती है जो किसी दूसरे स्कूल से परीक्षा फार्म भर कर 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शामिल हो जाते है. सीबीएसइ के पास 9वीं में करवाये गये रजिस्ट्रेशन के तमाम डाटा मौजूद रहता है. ऐसे में रजिस्ट्रेशन में शामिल स्टूडेंट्स का संख्या और उनके नाम और परीक्षा फार्म के समय भराये गये एलओसी में शामिल स्टूडेंट्स की संख्या और नाम का मिलान होता है. जो स्टूडेंट्स बाहर के होते हैं. उसे आसानी से पकड़ में आ जाते हैं. क्योकि सीबीएसइ के पास तो उसी स्कूल के स्टूडेंट्स का रिकार्ड होता है बोर्ड से एफिलिएयेडेट होते हैं.
- चार बार भराया जाता है एलओसी फार्म
सीबीएसइ के नये रूल्स के अनुसार एक स्टूडेंट्स को चार बार एलओसी फार्म भराया जाता है. पहली बार 9वीं के रजिस्ट्रेशन के समय और दूसरी बार 10वीं के परीक्षा फार्म भराने के समय एलओसी भराया जाता है. उसके बार 11वीं के रजिस्ट्रेशन के समय एलओसी फार्म भराया जाता है. इसके बाद 12वीं बोर्ड में शामिल होने के लिए परीक्षा फार्म भराया जाता है. 9वीं रजिस्ट्रेशन के समय ही हर स्कूल से लिस्ट सीबीएसइ के पास पहुंच जाता हैं. इसी लिस्ट के आधार पर 10वीं और 12वीं बोर्ड के समय सीबीएसइ परीक्षा फार्म भरवाती है.
- हर साल स्कूल आता हैं पकड़ में
इस साल एवीएन इंगलिश स्कूल के 176 स्टूडेंट्स 10वीं बोर्ड के रिजल्ट में फंस गये, उसी तरह से पिछले साल 2014 में एस रजा हाई स्कूल में इसी तरह की घटना घटी थी. काफी संख्या में स्टूडेंट्स का रिजल्ट रूक गया था. सीबीएसइ के मान्यता लेने के बाद भी स्कूल ऐसी हरकतों से बाज नहीं आते है. अपने स्कूल के अलावा दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का भी परीक्षा फार्म भरवा लेते हैं. 201


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एलओसी में जो स्टूडेंट्स शामिल होते है. वहीं सीबीएसइ के पास रिकार्ड में शामिल होते है. कई बार स्कूल दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का भी परीक्षा फार्म भरवा देते है. ऐसे में उन स्टूडेंट्स के बारे में सीबीएसइ को कोई जानकारी नहीं होती है. यहीं स्टूडेंट्स का रिजल्ट पेंडिंग हो जाता हैं.
रश्मि त्रिपाठी, रीजनल ऑफिसर, सीबीएसइ 

मैट्रिक की परीक्षा में छात्र की संख्या में कमी तो छात्रओ की संख्या में हो रही बढ़ोतरी

मैट्रिक की परीक्षा में छात्र की संख्या में कमी तो छात्रओ की संख्या में हो रही बढ़ोतरी

- मैट्रिक परीक्षा में 85 हजार 735 छात्रों की हुई बढ़ोतरी
- हर साल घट रहे छात्रों की संख्या
संवाददाता, पटना
साइकिल योजना का असर कहें या फिर महिला सशक्तिकरण का असर हो, लेकिन मैट्रिक की परीक्षा में हर साल छात्रओं की संख्या बढ़ रही हैं. लेकिन इसका उलटा छात्रों की संख्या में हर साल कमी आ रही हैं. समिति की माने तो कुल मैट्रिक परीक्षा देने में हर साल छात्र ही अधिक होते हैं. लेकिन छात्रों की संख्या कर अगर पिछले साल से तुलना की जायें तो इसमें हर साल कमी आ रही हैं. 2013 से 2015 सत्र के मैट्रिक परीक्षा की बात करें तो हर साल छात्रो की संख्या में कमी देखी जा रही है.  2013 में जहां 55.62 छात्र परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुए वहीं 2014 में इस संख्या में 1.29 फीसदी की कमी आ गयी. 2014 में  54.33 फीसदी छात्र परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुए. लेकिन अभी 2015 में फिर एक बार यह कमी देखी जा रही है. 2014 के मुकाबले इस बार 0.27 फीसदी की कमी फिर छात्र परीक्षार्थी के मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होने की जानकारी मिली हैं.
- आगे बढ़ रही बेटियां
वहीं अगर बेटियों की बात करें तो हर साल इनकी संख्या में बढ़ रही हैं. जहां 2013 में कुल 44.37 फीसदी छात्रएं मैट्रिक परीक्षा में शामिल हुई थी. वहीं 2014 में यह संख्या बढ़ कर 1.29 फीसदी हो गयी. 2014 में 45.66 फीसदी छात्रएं मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुई. वहीं 2015 में छात्रओं के मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होने की संख्या में 0.36 फीसदी की बढ़ोतरी हो गयी हैं.  2015 में 45.93 फीसदी छात्रएं मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुई.
- 85 हजार 735 अधिक छात्रों ने दिया परीक्षा
मैट्रिक की परीक्षा में पिछले कुछ सालों में छात्रों के शामिल होने की संख्या में उतार चढ़ाव रहा है. इस बार 2015 में कुल परीक्षार्थी की संख्या में बढ़ोतरी हुई हैं. 2014 की तुलना में 2015 में  85 हजार 735 परीक्षार्थी की बढ़ोतरी हुई हैं. इस बार मैट्रिक की परीक्षा में भले 15 हजार 246 परीक्षार्थी ने परीक्षा नहीं दिया. अगर ये परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हो जाते तो परीक्षार्थी की संख्या में और बढ़ोतरी होती. अगर हम बात 2013 और 2014 की करें तो परीक्षा में शामिल कुल परीक्षार्थी की संख्या में कमी आयी थी.  2013 के मुकाबले 2014 में 25 हजार 293 परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा में कम शामिल हुए.

पिछले कुछ सालों का आंकड़ा
2011 में शामिल परीक्षार्थी की कुल संख्या  - 11, 50, 098
2012 में शामिल परीक्षार्थी की कुल संख्या  - 12,52,069
2013 में शामिल परीक्षार्थी की कुल संख्या   - 13,48,731
2014 में शामिल परीक्षार्थी की कुल संख्या  -  13,23,438
2015 में शामिल परीक्षार्थी की कुल संख्या  -  14,09,173

2011 में शामिल छात्र का कुल प्रतिशत  -  55.01
2012 में शामिल छात्र का कुल प्रतिशत  -  55.13
2013 में शामिल छात्र का कुल प्रतिशत   -  55.62
2014 में शामिल छात्र का कुल प्रतिशत  -  54.33
2015 में शामिल छात्र का कुल प्रतिशत  - 54.06

2011 में शामिल छात्रओं का कुल प्रतिशत  -  40.01
2012 में शामिल छात्रओं का कुल प्रतिशत  -  43.13
2013 में शामिल छात्रओं का कुल प्रतिशत   -  44.37
2014 में शामिल छात्रओं का कुल प्रतिशत  -  45.66
2015 में शामिल छात्रओं का कुल प्रतिशत  - 45.93

उत्तीर्ण परीक्षार्थियों की प्रतिशत
2011 में कुल उत्तीर्ण परीक्षार्थी का  प्रतिशत  -   72.32
2012 में कुल उत्तीर्ण परीक्षार्थी का  प्रतिशत  -  72.56
2013 में कुल उत्तीर्ण परीक्षार्थी का  प्रतिशत  -   73.48
2014 में कुल उत्तीर्ण परीक्षार्थी का  प्रतिशत  -  76.05
2015 में कुल उत्तीर्ण परीक्षार्थी का  प्रतिशत  -  75.17


सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के108 में 30 छात्र मेरिट लिस्ट में शामिल

सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के108 में 30 छात्र मेरिट लिस्ट में शामिल

- सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय से पहली बार छात्र हुए थे मैट्रिक की परीक्षा में शामिल
- दो सालों से नहीं हो रहा नामांकन की प्रक्रिया
संवाददाता, पटना
बिहार का नेतरहाट कहें जाने वाला सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय ने यह साबित कर दिया कि टैलेंट को खोजने की जरूरत नहीं होती है. मौका मिले तो टैलेंट सामने आ जाता है. पहली बार सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के छात्र मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुए थे. कुल 108 छात्रों में 30 छात्रों ने मेरिट लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा लिया है. इसके अलावा इस विद्यालय के बांकी छात्रो ने भी बेहतर रिजल्ट किया हैं. 9 अगस्त 2010 को स्थापित इस विद्यालय में 120 विद्यार्थी (60 छात्र, 60 छात्रएं)का नामांकन लिया गया था. लेकिन सुविधा नहीं होने के कारण बीच में ही 12 विद्यार्थी ने विद्यालय को छोड़ दिया.
- हर साल घट रही विद्यालय में छात्रों की संख्या
सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय 2010 में खोला गया था. पहले साल में इस विद्यालय में नामांकन के लिए 32 हजार छात्रो ने आवेदन भरा था. लेकिन चयन मात्र 120 छात्रों का हुआ था. इसके बाद 2011 में छात्रों की संख्या घट कर 17 हजार पर आ गयी थी. इसके बाद 2012 में भी छात्रों की संख्या घट कर 9800 हो गयी. 2013 में मात्र 6 हजार छात्रो ने ही सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय में नामांकन के लिए आवेदन भरा था.
- नहीं हुआ दो सालो से नामांकन
सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय में क्लास छह में नामांकन लिया जाता है. इसके लिए दो बार परीक्षाएं में शामिल होना होता है. नवंबर में नामांकन की प्रक्रिया शुरू किया जाता हैं. दिसंबर में पीटी, जनवरी और फरवरी में मेन की परीक्षा के बाद मार्च में मेडिकल होने के बाद 120 विद्यार्थी को चुना जाता है. प्लस टू तक चलने वाले इस विद्यालय में पिछले दो सालो से कोई नामांकन नहीं लिया गया हैं. नामांकन प्रक्रिया ना तो 2014-15 में हुआ और ना ही 2015-16 सत्र के लिए ही किया गया हैं. ऐसे में इस विद्यालय का दो साल ऐसे ही खाली चला जायेगा.

कोट
जिस तरह से इस स्कूल ने रिजल्ट दिया है. इसने साबित कर दिया हैं कि अभी भी ग्रामीण क्षेत्र में ही टैलेंट है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए. जिस मकसद से इस विद्यालय की शुरूआत हुई थी, उसे फिर एक बार चालू करने की जरूरत हैं. सुविधा के अभाव में छात्र स्कूल छोड़ कर जा रहे हैं. यह पहला बैच था. 120 बैच में से सुविधा के अभाव में 12 छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया था. 108 छात्र की परीक्षा में शामिल हुए थे.
डा. शंकर प्रसाद, फाउंडर मेंबर, सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय

हो सकता है इस रिजल्ट का कुछ असर सरकार के उपर हो. दो सालों से विद्यालय में नामांकन की प्रक्रिया नहीं हो पायी है . दो साल इस विद्यालय का ऐसे ही चला जायेगा. लेकिन अब नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने वाली हैं. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से ही नामांकन प्रक्रिया किया जायेग.
राजीव रंजन, प्रिंसिपल, सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय

मैट्रिक का रिजल्ट घोषित, सिमुतल्ला स्कूल ने किया क्लिन स्विप

मैट्रिक का रिजल्ट घोषित, सिमुतल्ला स्कूल ने किया क्लिन स्विप

- मैट्रिक की परीक्षा में 75.17 प्रतिशत छात्र हुए उत्तीर्ण
- मैट्रिक में इस बार टॉप थ्री में दो-दो टॉपर, 487 अंक प्राप्त कर कुणाल जिज्ञाषु और नीरज रंजन बने स्टेट टॉपर
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा मैट्रिक का परिणाम शनिवार को घोषित कर दिया गया. समिति परिसर में बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने मैट्रिक परीक्षा के परिणाम की घोषणा किया. इसके साथ ही बिहार बोर्ड के वेबसाइट .. पर मैट्रिक के रिजल्ट को भी डाल दिया गया. मैट्रिक के रिजल्ट के टॉप टेन में सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के छात्रों का पूरी तरह से कब्जा रहा. बोर्ड द्वारा घोषित प्रदेश के टॉप टेन टॉपर लिस्ट में इस बार 31 विद्यार्थी शामिल किये गये हैं. इसमें 30 विद्यार्थी सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के छात्र ही शामिल हैं. मैट्रिक की परीक्षा में इस बार दो-दो टॉपर घोषित किये गये है. पिछले दस सालों में यह पहली बार हुआ है जब मैट्रिक की परीक्षा में एक जैसे अंक प्राप्त कर दो छात्रों टॉपर बने हैं. सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के छात्र कुणाल जिज्ञाषु और छात्र नीरज रंजन ने कुल 487 अंक प्राप्त कर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया हैं. वहीं दूसरे स्थान पर ही सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय के ही दो छात्र मौजूद हैं. 485 अंक प्राप्त कर अभिनव कुमार और मुकुल रंजन ने मैट्रिक में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. तीसरे स्थान पर भी दो छात्र शामिल हैं. सोनू कुमार और विवेक वैभव ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है.  इस बार मैट्रिक की परीक्षा में 14 लाख 09 हजार 173 छात्र शामिल हुए थे. इसमें 10 लाख 59 हजार 346 छात्रों को सफलता मिली. मैट्रिक में इस बार 3 लाख 46 हजार 845 छात्र असफल हो गये. रिजल्ट जारी करते हुए अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि इस बार सिमुतल्ला आवासीय विद्यालय  के छात्रों ने काफी अच्छा प्रदर्शन दिया है. काफी बेहतर रिजल्ट उस विद्यालय का हुआ है. रिजल्ट जारी करते समय समिति के सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी के साथ तमाम बोर्ड कर्मचारी मौजूद थे.
- टॉप टेन पर मात्र सात छात्रएं ही शामिल
इस बार मैट्रिक के टॉप टेन की लिस्ट में छात्रओं ने अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पायी. बोर्ड द्वारा जारी टॉप टेन में 31 विद्यार्थियों की लिस्ट मे मात्र सात ही छात्रओं ने ही अपना जगह बना पायी हैं. इसमें चौथे नंबर पर प्रतिभा कुमारी छात्रओं में सबसे अधिक अंक 483 प्राप्त हुआ है. वहीं पांचवें स्थान पर खुशबू कुमारी पल्लवी गुदान और प्रीति कुमारी ने अपना स्थान बनाया हैं. पिछली बार की तरह इस बार भी छात्रओं का रिजल्ट टॉप टेन में बेहतर नहीं हो पाया हैं.
- द्वितीय श्रेणी में सबसे अधिक 40.01 प्रतिशत छात्र हुए सफल
इस बार प्रथम श्रेणी में सफल होने वाले छात्र की संख्या द्वितीय श्रेणी में सफल होने वाले छात्रों से कम रहा. मैट्रिक परीक्षा में जहां प्रथम श्रेणी में 21.45 प्रतिशत छात्र सफल रहे, वहीं द्वितीय श्रेणी में सफल होने वाले छात्र का प्रतिशत 40.01 रहा. वहीं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र की संख्या 13.68 प्रतिशत रहा. प्रथम और तृतीय श्रेणी में सफल होने वाले छात्रों की संख्या में इस बार बढ़ोतरी हुई हैं. लेकिन द्वितीय श्रेणी में सफल होने वाले छात्रों की संख्या पिछले साल की अपेक्षा कम रहा है. पिछले साल से 1.89 प्रतिशत कम रहा हैं.  इस बार काफी संख्या में छात्र असफल भी हो गये है. 3 लाख 46 हजार 845 छात्र मैट्रिक की परीक्षा में असफल हो गये है.
-208 छात्र का रिजल्ट पेंडिंग
इस बार मैट्रिक के परिणाम में 208 छात्र ऐसे है जिनका रिजल्ट पेंडिं्रग हो गया. इस बार पिछले साल की तुलना में पेंडिंग रिजल्ट की संख्या कम हुई हैं. पिछले साल 512 छात्रों का रिजल्ट पेंडिंग हो गया था. लेकिन इस बार बोर्ड ने इसे कम से कम करने की कोशिश किया है. पेंडिंग रिजल्ट को बोर्ड की ओर से जल्द से जल्द सही किया जायेगा. बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार कई कारणों से रिजल्ट पेंडिंग हो जाता है. कभी रॉल नंबर तो कभी किसी एक विषय का नंबर नहीं होना या फिर नाम आदि में गड़बड़ी के कारण भी रिजल्ट पेंडिंग हो जाता है. छात्र अपना रिजल्ट लेकर आयेंगे तो उनका रिजल्ट सही कर दिया जायेगा. वहीं परीक्षा के दौरान इस बार 2146 छात्र को निष्कासित किया गया था. यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में काफी अधिक हैं. पिछले साल मात्र 839 छात्र को ही निष्कासित किया गया था.
- जुलाई में होगा कंपार्टमेंटल परीक्षा
जो छात्र मैट्रिक की परीक्षा में असफल हो गये है. उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है. बोर्ड की ओर से जल्द ही कंपार्टमेंटल परीक्षा लिया जायेगा. इस संबंध में बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि कंपार्टमेंटल परीक्षा की तैयारी जल्द से जल्द शुरू किया जायेगा. इसके लिए जल्द ही तिथि भी निकाली जायेगी. हमारी कोशिश हैं कि जुलाई के दूसरे या तीसरे सप्ताह में कंपार्टमेंटल की परीक्षा लिया जायेगा.

मैट्रिक परीक्षा संबंधित जानकारी
 कुल परीक्षार्थी की संख्या   - 14,09,173
छात्रों की कुल संख्या   - 7,61,913 (54.06)
छात्रओं की कुल संख्या  - 6,47,260 (45.93)

कुल उत्तीर्ण परीक्षार्थी   - 10,59,346 (75.17)
प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षार्थी  -  3,02,342 (21.42)
द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षार्थी  - 5,63,871 (40.01)
तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षार्थी   - 19, 28,79 (13.68)

कुल असफल परीक्षार्थी की संख्या  - 3,46,845 (24.61)
कुल असफल छात्र की संख्या   - 1, 67,697 (22.09)
कुल असफल छात्रओं की संख्या  - 1, 79, 148 (27.67)

अनुपस्थित परीक्षार्थी की संख्या  - 15246
निष्कासित छात्रों की संख्या  -  2146
लंबित परीक्षाफल   -   512 (0.01)

Friday, June 19, 2015

उत्तर पुस्तिका के साथ छेड़छाड़ पर समिति हुआ गंभीर, केंद्रों पर की जायेगी कार्रवाई

उत्तर पुस्तिका के साथ छेड़छाड़ पर समिति हुआ गंभीर, केंद्रों पर की जायेगी कार्रवाई

- परीक्षा केंद्र और मूल्यांकन केंद्र को लेकर समिति जल्द लेगी फैसला
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति जल्द ही उन परीक्षा केंद्रों और मूल्यांकन केंद्रो पर कार्रवाई करने जा रही है जहां पर छात्रो के उत्तर पुस्तिका के साथ छेड़छाड़ की जाती हैं. समिति के पास पिछले कई सालों के रिकार्ड हैं, जिसमें छात्रों के उत्तर पुस्तिका को चेंज कर दिया गया हैं. इससे छात्रों की तो परेशानी बढ़ती ही है, बोर्ड की भी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लग जा रहा हैं. ऐसे में अब समिति इस मामले को गंभीरता से ले रहा है. जल्द ही उन स्कूल, कॉलेजों और शिक्षकों को चिन्हित किया जायेगा जो इस तरह की हरकतों में शामिल होते है. ज्ञात हो कि अक्सर समिति के पास छात्रों द्वारा ऐसी शिकायत की जाती है जिसमें छात्र यह दावा करते है कि उनकी उत्तर पुस्तिका को चेंज कर दिया गया हैं.
- अंकिता और अंनत के कॉपी को कर दिया गया चेंज
2015 में साइंस स्ट्रीम से 12वीं की परीक्षा में अंकुर अंकिता और अंनत ने परीक्षा दिया. एचएमके प्लस टू स्कूल, आरा के दोनों परीक्षार्थी ने इंगलिश में परीक्षा दिया और परीक्षा हॉल में ही इनके उत्तर पुस्तिका को चेंज कर दिया गया. दोनों ही परीक्षार्थी के साथ ऐसा संजय गांधी कॉलेज आरा और टाउन हाई स्कूल, आरा परीक्षा केंद्र पर किया गया. अब जब समिति इसके तह तक पहुंची है तो इसका खुलासा हुआ है कि दोनों की छात्रों के कुछ विषयों की कॉपियां परीक्षा केंद्र पर ही चेंज कर दी गयी थी.
- कॉपी के उपर अंक, अंक गायब
इस बार साइंस स्क्रूटनी के कई कॉपी में अंकों का भी हेरा फेरी शिक्षको द्वारा किया गया है. समिति सूत्रो की माने तो कई उत्तर पुस्तिका में उपर के अंक और अंदर के पृष्ठो के अंक में अंतर है. इसके साथ शिक्षकों ने कॉपी जांचे बिना उपर में पृष्ठ पर अंक दे दिया है. और अंदर के पृष्ठ के उत्तर को जांचा भी नहीं गया है. ऐसे उत्तर पुस्तिकाओं को समिति अलग करके रख रही है. बाद में इसकी जांच की जायेगी.
- उत्तर पुस्तिका पर नहीं करते शिक्षक हस्ताक्षर
समिति के पास अभी साइंस स्क्रूटनी का काम चल रहा हैं. ऐसे में कई उत्तर पुस्तिका समिति के पास ऐसे आते है जिसमें शिक्षक का हस्ताक्षर तक नहीं हुआ है. समिति सूत्रों की माने तो शिक्षक उत्तर पुस्तिका की जांच तो करते है लेकिन हस्ताक्षर नहीं करते है. ऐसे में किस उत्तर पुस्तिका को किस शिक्षक ने जांची है, यह अब केंद्राधीक्षक ही बता सकते है. यह भी अब एक जांच का विषय बन गया है.
- स्क्रूटनाइजर नहीं आया काम
इस बार उत्तर पुस्तिका की जांच सही से हो, किसी तरह की गलती ना हो इसके लिए समिति ने स्क्रूटनाइजर की नियुक्ति की थी. इस स्क्रूटनाइजर को एग्जामिनर और हेड एग्जामिनर के उत्तर पुस्तिका की जांच के बाद की जांच करनी थी. इसके लिए समिति ने तमाम परीक्षा केंद्रों स्क्रूटनाइजर को लगाया था. इसके बावजूद मूल्यांकन में भारी गलती पायी जा रही हैं.

कोट
मूल्यांकन केंद्र और परीक्षा केंद्र पर उत्तर पुस्तिका के साथ छेड़छाड़ की बातें हमारे सामने आयी है. यह काफी गंभीर मामला है. ऐसे केंद्रों को हम चिन्हित कर रहे है. इनके उपर कार्रवाई की जायेगी.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 

कहीं ठप ना करना पड़ जाये स्क्रूटनी का काम

कहीं ठप ना करना पड़ जाये स्क्रूटनी का काम

- मधेपुरा, पटना, जमुई  के साथ कई जिलों की स्क्रूटनी पर लगा ब्रेक
- 30 हजार उत्तर पुस्तिका नहीं पहुंच पायी है बोर्ड
संवाददाता, पटना
इंटर स्क्रूटनी के लिए जो भी उत्तर पुस्तिका बोर्ड के पास मौजूद थे. उसकी जांच हो चुकी है. अगर शनिवार को उत्तर पुस्तिका बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पास नहीं पहुंच पायेगी तो बोर्ड को शनिवार को स्क्रूटनी का काम बीच में ही बंद करना पड़ सकता हैं. ऐसे में 30 हजार उत्तर पुस्तिका स्क्रूटनी के बिना रह जायेगा. प्रदेश भर के एएन कॉलेज, पटना, लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर, सीएम साइंस कॉलेज, दरभंगा, कॉपोरेटिव कॉलेज, बेगूसराय आदि मूल्यांकन केंद्र से उत्तर पुस्तिका अभी तक समिति कार्यालय में नहीं आया है. ज्ञात हो कि इन कॉलेजों ने समिति से मूल्यांकन कार्य के बांकी पैसे देने की मांग की है. इसके बाद ही स्क्रूटनी के लिए उत्तर पुस्तिका समिति को सौंपा जायेगा. इस संबंध में बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि मूल्यांकन कार्य बांकी बचे हुए पैसे कॉलेजों को गुरुवार को भी भेज दिया गया था. लेकिन शुक्रवार तक इन केंद्रों से उत्तर पुस्तिका नहीं आ पायी है. ऐसे में अगर शनिवार को भी उत्तर पुस्तिका नहीं आयेगा तो स्क्रूटनी का काम बीच में ही रोकना पड़ सकता हैं .
- कई जिलों की स्क्रूटनी गयी फंस
पूरे प्रदेश में लगभग आठ दस मूल्यांकन केंद्रों ने उत्तर पुस्तिका देने से इंकार कर दिया हैं. ऐसे में इन केंद्रों पर जिन जिलों के उत्तर पुस्तिका की मूल्यांकन की गयी थी, उसे समिति कार्यालय में अभी तक नहीं लाया जा सका है. समिति सूत्रों की माने तो जमुई, मधेपुरा, मोतीहारी, सुपौल, पूर्णिया, पटना आदि जिलों की उत्तर पुस्तिका इन मूल्यांकन केंद्रों पर जांचे गये थे. ऐसे में इन जिलों से जो भी अभ्यर्थी ने स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया है . उन्हें अभी कुछ दिन और रिजल्ट के लिए इंतजार करना पड़ेगा.
- मेरिट लिस्ट में होगी देरी
इस बार साइंस विषय के स्क्रूटनी के लिए 85 हजार कॉपी की जांच की जानी थी. इसमें 57 हजार उत्तर पुस्तिका की जांच हो चुकी है. इसमें से लगभग 16 हजार छात्रों को रिजल्ट भी बोर्ड के वेबसाइट पर डाल दिया गया है. लेकिन अभी भी 30 हजार उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन केंद्र से आना बांकी है. इसके आने के बाद ही मूल्यांकन कार्य किया जा सकेगा. मूल्यांकन कार्य में देरी होने से मेरिट लिस्ट में भी देरी हो सकती है. बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि मेरिट लिस्ट 25 जून को निकाल दी जाती. लेकिन स्क्रूटनी कार्य बीच में रोके जाने से इसमें देरी हो सकती हैं. 

हर दिन तलाक के दस मामले दर्ज, न्याय मिलने में लग जाते है दस साल

हर दिन तलाक के दस मामले दर्ज, न्याय मिलने में लग जाते है दस साल

-  जनवरी से अब तक फैमिली कोर्ट में आयें 678 तलाक के मामले
- महिला थाना में पति पत्नी के 750 मामले हुए हैं दर्ज
संवाददाता, पटना
रोहित राज और प्रियंका (बदला हुआ नाम) ने फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए केस फाइल किया. लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला. इससे इतने सालों बाद भी वो दोनो अलग नहीं हो पायें है. कुछ ऐसा ही हाल एसपी वर्मा रोड के रहने वाले पियूष अग्रवाल और रागनी (बदला हुआ नाम) का है. फैमिली कोर्ट में इनके तलाक के मामले पिछले 20 साल से घूम रहे है, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला. वहीं पटना सिटी के रहने वाले आयूष और सोनी को फैमिली कोर्ट से तलाक लेने में 11 साल लग गये. इस बीच ना तो ये लोग अपनी जिंदगी दुबारा पटरी पर ला सके और ना ही दुबारा घर की बसा सके. तलाक मिलने में इतना समय लगने के बाद बावजूद शादियां टूटने का रफ्तार काफी बढ़ गयी हैं. पटना सिविल कोर्ट स्थिति फैमिली कोर्ट की माने तो हर दिन तलाक संबंधित दस मामले फैमिली कोर्ट में दर्ज होते हैं. लेकिन इन्हें न्याय मिलने में दस साल से भी अधिक लग जाता है . ऐसे में इस टूटते रिश्ते को ढोते रहना पति और पत्नी दोनों के लिए ही काफी कठिन होता है.
- 7000 पेंडिंग और 678 मामले और हुए दर्ज
पटना फैमिली कोर्ट में अभी भी हजारों की संख्या में तलाक के मामले पेंडिंग है. ये मामले कोई एक साल के नहीं बल्कि कई साल पुराने हैं. अभी तक सात हजार तलाक के केस कोर्ट में पेंडिंग है. समय-समय पर लोग न्याय के लिए आते तो हैं लेकिन उन्हें हर बार लौटा दिया जाता है. लेकिन मामले है जो हर दिन दर्ज होते है. अभी की ही बात करें तो जनवरी से लेकर अभी तक फैमिली कोर्ट में 678 मामले दर्ज कराया जा चुका है. मामले तो दर्ज होते है, लेकिन न्याय नहीं मिलता है.
- महिला थाना में बस बनती है फाइल
पति पत्नी के झगड़े को लेकर महिला थाने में हर दिन लाइन लगी रहती हैं. थाने से मिली जानकारी के अनुसार जनवरी से जून तक 750 मामले पती पत्नी के दर्ज हुए है. इसमें दहेज प्रताड़ना, मारपीट आदि शामिल है. थाने के अनुसार हर दिन 10 से 12 केस आते है. जो पती पत्नी के झगड़े से संबंधित होते है. पहले तो थाने की ओर से काउंसेलिंग की जाती है. काउंसेलिंग मे जरिये मामले को सुलझाने की कोशिश की जाती है. कई मामले में समझौता भी होता है. लेकिन कई मामले में समझौता नहीं हो पाता है.
- महिला हेल्प लाइन में 50 फीसदी बढ़ गया घरेलू हिंसा के मामले
महिला थाना हो या महिला आयोग या फिर महिला हेल्प लाइन सभी जगहों ऐसे मामलों की लंबी लाइन लगी हुई है. महिला हेल्प लाइन की बात करें तो घरेलू हिंसा संबंधित मामले हर दिन हेल्प लाइन में आते ही आते हैं. हर साल इसकी संख्या बढ़ती ही जा रही है. जहां 2009 में घरेलू हिंसा के 174 मामले हेल्प लाइन में दर्ज किये गये थे. वहीं 2014 में यह मामला बढ़ कर 377 तक पहुंच गया है. हेल्प लाइन की माने तो 2013 से 2014 के बीच 30 फीसदी मामले मे बढ़ोतरी हो गयी है.

महिला हेल्प लाइन में घरेलू हिंसा के मामले दर्ज
वर्ष        -     कुल दर्ज मामले
2013    -      290
2014    -     377
2015 (जनवरी से मई तक)  - 160

महिला थाना में घरेलू हिंसा से मामले दर्ज
वर्ष       -     कुल दर्ज मामले
2013   -     568
2014   -    670
2015 (जनवरी से जून में अब तक)  -  750

पटना फैमिली कोट में घरेलू हिंसा के मामले
- कोट में अब तक 7000 हजार डायवोर्स के केस पेंडिंग हैं
- इसमें से अब तक 252 मामलों का ही डिस्पोजल किया गया है
- 2015 के जनवरी से जून तक 678 केस तलाक के लिए फाइल किये गये हैं
- फैमिली कोट में 275 महिलाओं ने मेंटेंनेस के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं

इन कारणों से बढ़ रही पति पत्नी में झगड़े
- अभी भी मेल डॉमिनेट का मामला पति पत्नी के बीच आ जाता है
- शक के कारण बढ़ती है दूरियां
- दहेज भी बनता है कई बार कारण
- परिवारिक झगड़े तलाक तक पहुंच जाता है
- आज भी महिलाओं को दबा कर रखा जाता है

कोट
 फैमिली कोर्ट में मामले तो आते है. लेकिन इसे सॉल्व करने में महीनों लग जाता है. ऐसे में महिलाएं जिस न्याय के उम्मीद में आती हैं. वो यहां पर नहीं हो पाता है. उचित समाधान का अभाव है. जो सिस्टम में काफी समय लगा देता है. ऐसे में केस की संख्या तो हर साल बढ़ती हैं. लेकिन उसका समाधान नहीं हो पाता हैं.
श्रुति सिंह, एडवोकेट

पति पत्नी के झगड़े नये नहीं हैं. और ना ही यह मारपीट की कहानी नयी है. महिलाओं पर हमेशा घरेलू हिंसा होता रहा है . लेकिन अभी तक महिलाएं चूप रहती थी. लेकिन अब महिलाएं बोलने लगी हैं. ऐसे में इस तरह के झगड़े अब बाहर दिखने लगा हैं. महिलाएं अपने समस्याओं के निदान के लिए कभी थाना तो कभी हेल्प लाइन और कोर्ट तक पहुंच जाती है.
रेणू रंजन, सोसियोलॉजी डिपार्टमेंट, मगध महिला कॉलेज