स्कूलों की गलती की सजा सुनायेगा सुप्रीम कोर्ट
- आरटीइ में गलती की सजा जायेगी सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास
- 2014 से होगी पूरी समीक्षा
- बिहार सरकार ने जारी किया शिकायत निवारण प्रक्रिया
संवाददाता, पटना
तीन साल बीत चुके है. अब अगर स्कूल में सही से शिक्षा का अधिकार कानून लागू नहीं हुआ तो इसकी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगी. उसके बाद स्कूल का भविष्य सीधे सुप्रीम कोर्ट तय करेगा. आरटीइ में तीन साल की छूट के बाद अब कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग की ओर से शुरूआत कर दी गयी है. विभाग की ओर से आरटीइ को कड़ाई से लागू करने के लिए 2014 से प्रक्रिया में तेजी लायी जा रही है. राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग के माध्यम से पूरे प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों का आकलन किया जा रहा है. इसके तहत स्कूलों का रिकार्ड देखा जायेगा कि स्कूल में पिछले तीन साल में आरटीइ के तहत कितने नामांकन हुए. इसके अलावा 2014 में नामांकन कुल संख्या का कितना है. 30 जुलाई तक नामांकन का लिस्ट तैयार कर, 15 अगस्त
- 25 फीसदी से कम हुआ तो जुर्माना
2014 से तमाम स्कूलों का रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगा. इसके तहत क्लास वन में छात्र के कुल संख्या का 25 फीसदी नामांकन की प्रक्रिया की पूरी जांच होगी. स्कूल में क्लास वन में जितने छात्र है उसका 25 फीसदी नामांकन लिया गया है या नहीं, यह देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस पर स्कूल पर कार्रवाई कर सकता है. अगर स्कूल 25 फीसदी से कम नामांकन लेते हुए पकड़ में आयेंगे तो स्कूल पर 1 लाख से लेकर 10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट चाहे तो स्कूल का रजिस्ट्रेशन भी खत्म कर सकता है.
- विभाग ने बनाया शिकायत निवारण प्रक्रिया
बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बच्चों की शिक्षा के अधिकार के संबंध में शिकायतों के लिए बिहार शिक्षा विभाग की ओर से शिकायत निवारण की शुरूआत की गयी है. इस निवारण के माध्यम से एक प्रक्रिया शुरू की गयी है. अगर कोई स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेता है तो इस निवारण प्रक्रिया के माध्यम से अभिभावक विभाग के पास शिकायत कर सकते है. इस शिकायत के बाद स्कूल पर कार्रवाई की जायेगी. इसके लिए विभाग ने 5 स्तर पर प्रक्रिया निभायी जायेगी. इसमें स्थानीय प्राधिकार, शिकायत प्राप्ति स्थल, शिकायत पंजी, शिकायत दाखिल करना एवं निष्पादन की प्रक्रिया और प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन करना आवश्यक है.
स्थानीय प्राधिकार - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति को तथा नगर निगम, नगर परिषद एवं नगर पंचायत की सशक्त स्थायी समिति को स्थानीय प्राधिकार घोषित किया गया है. ग्राम पंचायत की शिक्षा समिति प्राथमिक विद्यालय तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति मध्य विद्यालय के लिए स्थानीय प्राधिकार घोषित है.
शिकायत प्राप्ति स्थल - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति तथा नगर निकाय की शिक्षा सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय स्थल पर शिक्षा के अधिकार संबंधित शिकायत प्राप्त किया जायेगा. इसके लिए स्थानीय प्राधिकार के द्वारा प्राप्तकर्ता का नाम एवं पदनाम घोषित किया जायेगा. स्थानीय प्राधिकार का यह दायित्व होगा कि इसकी जानकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में आम लोगों को दे.
शिकायत पंजी - स्थानीय प्राधिकार की शिक्षा समिति एवं सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय में शिकायत पत्रों की प्राप्ति हेतु एक शिकायत पंजी भेजी जायेगी. इस शिकायत पंजी में दर्ज शिकायत को शिकायत कर्ता के पास तिथि के साथ रसीद दी जायेगी.
शिकायत दाखिल करना एंव निष्पादन की प्रक्रिया - शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायतों की एक सूची तैयार की जायेगी. प्रत्येक शिकायत के संबंध में कार्रवाई सक्षम प्राधिकार तथा अपील हेतु अपीलीय प्राधिकार के पास जायेगा. शिकायत प्राप्ति के 7 दिनों के अंदर स्थानीय प्राधिकार द्वारा शिकायत का निष्पादन किया जायेगा. अगर वो निष्पादन नहीं कर पायेगे तो उसे सक्षम प्राधिकार के पास भेज दिया जायेगा. सक्षम प्राधिकार शिकायत को 30 दिनों के अंदर निष्पादन करेंगे.
प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन - आरटीइ के तहत अब आम लोगों को भी जोड़ने का प्रयास किया जायेगा. प्राप्त शिकायतों के निष्पादन हेतु प्रखंड एवं जिला स्तर पर प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को एक शिक्षा संवाद का आयोजन किया जायेगा. इसमें राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के राज्य इकाई के द्वारा सहयोग दिया जायेगा.
कोट
सुप्रीम कोर्ट के आरटीइ को लागू करने के लिए तीन सालों की सुविधा तमाम प्राइवेट स्कूलों को दिया था. इसके लिए स्कूल तीन सालों में आरटीइ को समझ कर इसे अपने यहां लागू करेंगे. यह तीन साल 2013 में पूरा हो गया है. इस कारण 2014 से इस पर पूरी गंभीरता से हम कार्य कर रहे है. अगस्त में इसे पूरा कर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट भेंजेंगे.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल संरक्षण अधिकार आयोग
- आरटीइ में गलती की सजा जायेगी सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास
- 2014 से होगी पूरी समीक्षा
- बिहार सरकार ने जारी किया शिकायत निवारण प्रक्रिया
संवाददाता, पटना
तीन साल बीत चुके है. अब अगर स्कूल में सही से शिक्षा का अधिकार कानून लागू नहीं हुआ तो इसकी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगी. उसके बाद स्कूल का भविष्य सीधे सुप्रीम कोर्ट तय करेगा. आरटीइ में तीन साल की छूट के बाद अब कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग की ओर से शुरूआत कर दी गयी है. विभाग की ओर से आरटीइ को कड़ाई से लागू करने के लिए 2014 से प्रक्रिया में तेजी लायी जा रही है. राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग के माध्यम से पूरे प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों का आकलन किया जा रहा है. इसके तहत स्कूलों का रिकार्ड देखा जायेगा कि स्कूल में पिछले तीन साल में आरटीइ के तहत कितने नामांकन हुए. इसके अलावा 2014 में नामांकन कुल संख्या का कितना है. 30 जुलाई तक नामांकन का लिस्ट तैयार कर, 15 अगस्त
- 25 फीसदी से कम हुआ तो जुर्माना
2014 से तमाम स्कूलों का रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगा. इसके तहत क्लास वन में छात्र के कुल संख्या का 25 फीसदी नामांकन की प्रक्रिया की पूरी जांच होगी. स्कूल में क्लास वन में जितने छात्र है उसका 25 फीसदी नामांकन लिया गया है या नहीं, यह देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस पर स्कूल पर कार्रवाई कर सकता है. अगर स्कूल 25 फीसदी से कम नामांकन लेते हुए पकड़ में आयेंगे तो स्कूल पर 1 लाख से लेकर 10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट चाहे तो स्कूल का रजिस्ट्रेशन भी खत्म कर सकता है.
- विभाग ने बनाया शिकायत निवारण प्रक्रिया
बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बच्चों की शिक्षा के अधिकार के संबंध में शिकायतों के लिए बिहार शिक्षा विभाग की ओर से शिकायत निवारण की शुरूआत की गयी है. इस निवारण के माध्यम से एक प्रक्रिया शुरू की गयी है. अगर कोई स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेता है तो इस निवारण प्रक्रिया के माध्यम से अभिभावक विभाग के पास शिकायत कर सकते है. इस शिकायत के बाद स्कूल पर कार्रवाई की जायेगी. इसके लिए विभाग ने 5 स्तर पर प्रक्रिया निभायी जायेगी. इसमें स्थानीय प्राधिकार, शिकायत प्राप्ति स्थल, शिकायत पंजी, शिकायत दाखिल करना एवं निष्पादन की प्रक्रिया और प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन करना आवश्यक है.
स्थानीय प्राधिकार - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति को तथा नगर निगम, नगर परिषद एवं नगर पंचायत की सशक्त स्थायी समिति को स्थानीय प्राधिकार घोषित किया गया है. ग्राम पंचायत की शिक्षा समिति प्राथमिक विद्यालय तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति मध्य विद्यालय के लिए स्थानीय प्राधिकार घोषित है.
शिकायत प्राप्ति स्थल - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति तथा नगर निकाय की शिक्षा सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय स्थल पर शिक्षा के अधिकार संबंधित शिकायत प्राप्त किया जायेगा. इसके लिए स्थानीय प्राधिकार के द्वारा प्राप्तकर्ता का नाम एवं पदनाम घोषित किया जायेगा. स्थानीय प्राधिकार का यह दायित्व होगा कि इसकी जानकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में आम लोगों को दे.
शिकायत पंजी - स्थानीय प्राधिकार की शिक्षा समिति एवं सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय में शिकायत पत्रों की प्राप्ति हेतु एक शिकायत पंजी भेजी जायेगी. इस शिकायत पंजी में दर्ज शिकायत को शिकायत कर्ता के पास तिथि के साथ रसीद दी जायेगी.
शिकायत दाखिल करना एंव निष्पादन की प्रक्रिया - शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायतों की एक सूची तैयार की जायेगी. प्रत्येक शिकायत के संबंध में कार्रवाई सक्षम प्राधिकार तथा अपील हेतु अपीलीय प्राधिकार के पास जायेगा. शिकायत प्राप्ति के 7 दिनों के अंदर स्थानीय प्राधिकार द्वारा शिकायत का निष्पादन किया जायेगा. अगर वो निष्पादन नहीं कर पायेगे तो उसे सक्षम प्राधिकार के पास भेज दिया जायेगा. सक्षम प्राधिकार शिकायत को 30 दिनों के अंदर निष्पादन करेंगे.
प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन - आरटीइ के तहत अब आम लोगों को भी जोड़ने का प्रयास किया जायेगा. प्राप्त शिकायतों के निष्पादन हेतु प्रखंड एवं जिला स्तर पर प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को एक शिक्षा संवाद का आयोजन किया जायेगा. इसमें राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के राज्य इकाई के द्वारा सहयोग दिया जायेगा.
कोट
सुप्रीम कोर्ट के आरटीइ को लागू करने के लिए तीन सालों की सुविधा तमाम प्राइवेट स्कूलों को दिया था. इसके लिए स्कूल तीन सालों में आरटीइ को समझ कर इसे अपने यहां लागू करेंगे. यह तीन साल 2013 में पूरा हो गया है. इस कारण 2014 से इस पर पूरी गंभीरता से हम कार्य कर रहे है. अगस्त में इसे पूरा कर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट भेंजेंगे.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल संरक्षण अधिकार आयोग
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