ऑन द स्पॉट फैसला लेती नारी अदालत
- बिहार के 21 जिलों में चलता है नारी अदालत
- 8962 मामले को सुलझा चुका है नारी अदालत ने
संवाददाता, पटना
केस वन - 11 साल की फिरदौस की शादी उसके परिवार वालों ने ठीक कर दिया. मुजफ्फरपुर जिला के बोचहां प्रखंड के पटियासा गांव की रहने वाली फिरदौस की बाल विवाह करने की जानकारी स्कूल के शिक्षकों को दिया गया. मध्यम विद्यालय पटियासा की इसकी जानकारी नारी अदालत को दे दिया. फिर क्या था नारी अदालत से माता पिता को समझाया, काफी प्रयास के बाद नारी अदालत से फिरदौस की शादी होने से रोका. साथ में अदालत से माता पिता को सख्त हिदायत देते हुए फैसला सुनाया कि 18 साल के पहले फिरदौस की शादी नहीं किया जायेगा.
केस टू - शोभा कुमारी की शादी एक साल पहले 2014 में हुआ. बांका जिला के बड़का गांव की रहने वाली शोभा कुमारी की शादी के दो दिनों के बाद ही ससुराल वालों ने दहेज नहीं देने के कारण पागल घोषित कर दिया. शोभा को ससुराल वालों ने घर से भी निकाल दिया. इसकी सूचना नारी अदालत के पास पहुंची. नारी अदालत ने विशेष बैठक बुलायी. सास ससुर को समझाया गया. नारी अदालत से फैसला सुनाया कि शोभा को ससुराल में रहते हुए किसी तरह की हानि होगी तो थाना में केस होगा.
दहेज प्रताड़ना, सामाजिक हिंसा, बाल विवाह जैसी कुरीतियां अभी भी हमारे समाज में धड़ल्ले से चल रही है. कुछ केस पुलिस तक पहुंच पाती है तो कुछ केस दब सी जाती है. आज भी समाज के कई मुददें बाहर नहीं निकल पाते है. समाज की हर कुरीतियां बाहर निकल कर आयें और उसका समाधान हो, इसको लेकर नारियों ने अपना एक अदालत बना रखा है. महिला सामाख्या के अंतर्गत चल रहे नारी अदालत में लोकल महिलाओं को ही रखा जाता है. पूरे बिहार में 21 जिलों में अभी नारी अदालत बनी हुई है. इन 21 जिलों में 24 हजार 192 महिलाएं नारी अदालत से जुड़ी हुई है. नारी अदालत का गठन 2006 में किया गया. हर साल किसी ना किसी जिले में इसका गठन किया जाता है.
- दहेज से लेकर बाल विवाह पर काम करती है नारी अदालत
नारी अदालत का मुख्य फोकस गांव स्तर पर महिलाओं के साथ हो रहे प्रताड़ना को सुलझाना है. शुरुआत में तो नारी अदालत खुद ही किसी केस को सुलझाने का प्रयास करती है. अगर यह संभव नहीं हो पाता है और कोई केस फंस जाता है तो ऐसे में नारी अदालत दूसरे सहयोगी संस्थाओं से मदद लेती है. इसमें न्यायालय एवं वकील, विभागीय सरकारी पदाधिकारी, स्थानीय पुलिस, महिला हेल्प लाइन आदि से भी मामले को लोकल लेवल पर सुलझाया जाता है. नारी अदालत मुख्य रूप से दहेज संबंधी, घरेलू हिंसा, पति प्रताड़ना, सामाजिक हिंसा, बाल विवाह, सास बहु विवाह आदि को निपटारा खुद करती है. इसके अलावा बलात्कार, जमीन संबंधी मामले के नहीं सुलझा पाने की स्थिति में सहयोगी संस्थाओं से मदद ली जाती है.
- आज भी बाल विवाह से ग्रसित है समाज
हम भले बाल विवाह को गलत मानते है. लेकिन आज भी हमारे समाज में बाल विवाह काफी संख्या में हो रहा है. यह हम नहीं बल्कि नारी अदालत में आयें मामले की सूची बयां कर रही है. बिहार के 21 जिलों की बात करें तो नारी अदालत के पास 783 बाल विवाह के मामले आयें है जिसमें बाल विवाह हो जाने के बाद नारी अदालत को जानकारी मिली. वहीं 1343 ऐसे बाल विवाह के मामले हैं जिसे नारी अदालत ने होने से रोका. नारी अदालत की माने तो 21 जिलों में सबसे अधिक बाल विवाह सीतामढ़ी जिला (299) में हुआ है. वहीं नारी अदालत के प्रयास से सबसे अधिक सीतामढ़ी में ही 313 बाल विवाह को होने से रोका गया.
नारी अदालत का गठन
- प्रखंड स्तर पर हिंसा कमेटी बनायी जाती है. इसमें 11 सदस्यों का चयन किया जाता है
- 11 सदस्यों में 3 सदस्य का चयन तीन महीने के लिए होता है
- सभी सदस्यों में से बारी-बारी से परिवर्तन होता है
नारी अदालत की बैठक
- नारी अदालत की बैठक नियमिति रूप से होता है
- बैठक में 11 सदस्यों में 8 सदस्य की उपस्थिति आवश्यक है
- नारी अदालत की बैठक का स्थान परिवर्तन भी होता है
- प्रत्येक महीने में एक या दो बार बैठक निश्चित रूप से होता है
- बैठक आपातकालीन और जरूरत पड़ने पर घटनास्थल पर भी अदालत लगाया जाता है
ऐसे काम करता है नारी अदालत
- नारी अदालत के पास मामला पहुंचता है
- मामले को पूरे तह तक तहकीकात की जाती है
- द्वितीय पक्ष को सूचना पत्र के माध्यम से रजिस्टर्ड डाक द्वारा सूचना भेजी जाती है
- फिर पहले और द्वितीय पक्ष के बीच बैठक बुलायी जाती है. केस की सुनवायी दोनों पक्षों के रहने पर होता है
- केस की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस की मदद ली जाती है
- कानूनी मदद के लिए वकील को रखा जाता है
- कई केस नारी अदालत थाना भी भेजती है
- केस की प्रक्रिया की निगरानी खुद नारी अदालत करती है.
इन जिलों में चलता नारी अदालत
रोहतास, प. चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा, भोजपुर, गया, शिवहर, गया, कैमूर, सुपौल, बांका, किशनगंज, जमुई, पूर्णिया, खगड़िया, कटिहार, मधेपुरा, मधुबनी, अररिया, वैशाली, पूर्वी चंपारण
इन मुददों पर नारी अदालत करता है काम
मुददा - केसों की संख्या
दहेज प्रताड़ना - 2165
बलात्कार - 277
घरेलू हिंसा - 5483
सामाजिक हिंसा - 3575
कोट
समाज में कई ऐसी घटनाएं होती है जो पुलिस या स्थानीय थाना तक नहीं पहुंच पाती है. वहीं दूसरी ओर गरीब और अनपढ़ महिलाएं अभी भी विरोध करने से घबराती है. उन्हें अपने हक की जानकारी नहीं है. ऐसे में नारी अदालत स्थानीय स्तर पर कार्य करती है. नारी अदालत में जो भी महिलाएं जुड़ती है, उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है. नारी अदालत के बनने से कई केस ऐसे सामने आयें जो दब कर रह जाती थी.
संगीता दत्ता, स्टेट लेवल ऑफिसर, नारी अदालत, महिला सामाख्या
- बिहार के 21 जिलों में चलता है नारी अदालत
- 8962 मामले को सुलझा चुका है नारी अदालत ने
संवाददाता, पटना
केस वन - 11 साल की फिरदौस की शादी उसके परिवार वालों ने ठीक कर दिया. मुजफ्फरपुर जिला के बोचहां प्रखंड के पटियासा गांव की रहने वाली फिरदौस की बाल विवाह करने की जानकारी स्कूल के शिक्षकों को दिया गया. मध्यम विद्यालय पटियासा की इसकी जानकारी नारी अदालत को दे दिया. फिर क्या था नारी अदालत से माता पिता को समझाया, काफी प्रयास के बाद नारी अदालत से फिरदौस की शादी होने से रोका. साथ में अदालत से माता पिता को सख्त हिदायत देते हुए फैसला सुनाया कि 18 साल के पहले फिरदौस की शादी नहीं किया जायेगा.
केस टू - शोभा कुमारी की शादी एक साल पहले 2014 में हुआ. बांका जिला के बड़का गांव की रहने वाली शोभा कुमारी की शादी के दो दिनों के बाद ही ससुराल वालों ने दहेज नहीं देने के कारण पागल घोषित कर दिया. शोभा को ससुराल वालों ने घर से भी निकाल दिया. इसकी सूचना नारी अदालत के पास पहुंची. नारी अदालत ने विशेष बैठक बुलायी. सास ससुर को समझाया गया. नारी अदालत से फैसला सुनाया कि शोभा को ससुराल में रहते हुए किसी तरह की हानि होगी तो थाना में केस होगा.
दहेज प्रताड़ना, सामाजिक हिंसा, बाल विवाह जैसी कुरीतियां अभी भी हमारे समाज में धड़ल्ले से चल रही है. कुछ केस पुलिस तक पहुंच पाती है तो कुछ केस दब सी जाती है. आज भी समाज के कई मुददें बाहर नहीं निकल पाते है. समाज की हर कुरीतियां बाहर निकल कर आयें और उसका समाधान हो, इसको लेकर नारियों ने अपना एक अदालत बना रखा है. महिला सामाख्या के अंतर्गत चल रहे नारी अदालत में लोकल महिलाओं को ही रखा जाता है. पूरे बिहार में 21 जिलों में अभी नारी अदालत बनी हुई है. इन 21 जिलों में 24 हजार 192 महिलाएं नारी अदालत से जुड़ी हुई है. नारी अदालत का गठन 2006 में किया गया. हर साल किसी ना किसी जिले में इसका गठन किया जाता है.
- दहेज से लेकर बाल विवाह पर काम करती है नारी अदालत
नारी अदालत का मुख्य फोकस गांव स्तर पर महिलाओं के साथ हो रहे प्रताड़ना को सुलझाना है. शुरुआत में तो नारी अदालत खुद ही किसी केस को सुलझाने का प्रयास करती है. अगर यह संभव नहीं हो पाता है और कोई केस फंस जाता है तो ऐसे में नारी अदालत दूसरे सहयोगी संस्थाओं से मदद लेती है. इसमें न्यायालय एवं वकील, विभागीय सरकारी पदाधिकारी, स्थानीय पुलिस, महिला हेल्प लाइन आदि से भी मामले को लोकल लेवल पर सुलझाया जाता है. नारी अदालत मुख्य रूप से दहेज संबंधी, घरेलू हिंसा, पति प्रताड़ना, सामाजिक हिंसा, बाल विवाह, सास बहु विवाह आदि को निपटारा खुद करती है. इसके अलावा बलात्कार, जमीन संबंधी मामले के नहीं सुलझा पाने की स्थिति में सहयोगी संस्थाओं से मदद ली जाती है.
- आज भी बाल विवाह से ग्रसित है समाज
हम भले बाल विवाह को गलत मानते है. लेकिन आज भी हमारे समाज में बाल विवाह काफी संख्या में हो रहा है. यह हम नहीं बल्कि नारी अदालत में आयें मामले की सूची बयां कर रही है. बिहार के 21 जिलों की बात करें तो नारी अदालत के पास 783 बाल विवाह के मामले आयें है जिसमें बाल विवाह हो जाने के बाद नारी अदालत को जानकारी मिली. वहीं 1343 ऐसे बाल विवाह के मामले हैं जिसे नारी अदालत ने होने से रोका. नारी अदालत की माने तो 21 जिलों में सबसे अधिक बाल विवाह सीतामढ़ी जिला (299) में हुआ है. वहीं नारी अदालत के प्रयास से सबसे अधिक सीतामढ़ी में ही 313 बाल विवाह को होने से रोका गया.
नारी अदालत का गठन
- प्रखंड स्तर पर हिंसा कमेटी बनायी जाती है. इसमें 11 सदस्यों का चयन किया जाता है
- 11 सदस्यों में 3 सदस्य का चयन तीन महीने के लिए होता है
- सभी सदस्यों में से बारी-बारी से परिवर्तन होता है
नारी अदालत की बैठक
- नारी अदालत की बैठक नियमिति रूप से होता है
- बैठक में 11 सदस्यों में 8 सदस्य की उपस्थिति आवश्यक है
- नारी अदालत की बैठक का स्थान परिवर्तन भी होता है
- प्रत्येक महीने में एक या दो बार बैठक निश्चित रूप से होता है
- बैठक आपातकालीन और जरूरत पड़ने पर घटनास्थल पर भी अदालत लगाया जाता है
ऐसे काम करता है नारी अदालत
- नारी अदालत के पास मामला पहुंचता है
- मामले को पूरे तह तक तहकीकात की जाती है
- द्वितीय पक्ष को सूचना पत्र के माध्यम से रजिस्टर्ड डाक द्वारा सूचना भेजी जाती है
- फिर पहले और द्वितीय पक्ष के बीच बैठक बुलायी जाती है. केस की सुनवायी दोनों पक्षों के रहने पर होता है
- केस की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस की मदद ली जाती है
- कानूनी मदद के लिए वकील को रखा जाता है
- कई केस नारी अदालत थाना भी भेजती है
- केस की प्रक्रिया की निगरानी खुद नारी अदालत करती है.
इन जिलों में चलता नारी अदालत
रोहतास, प. चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा, भोजपुर, गया, शिवहर, गया, कैमूर, सुपौल, बांका, किशनगंज, जमुई, पूर्णिया, खगड़िया, कटिहार, मधेपुरा, मधुबनी, अररिया, वैशाली, पूर्वी चंपारण
इन मुददों पर नारी अदालत करता है काम
मुददा - केसों की संख्या
दहेज प्रताड़ना - 2165
बलात्कार - 277
घरेलू हिंसा - 5483
सामाजिक हिंसा - 3575
कोट
समाज में कई ऐसी घटनाएं होती है जो पुलिस या स्थानीय थाना तक नहीं पहुंच पाती है. वहीं दूसरी ओर गरीब और अनपढ़ महिलाएं अभी भी विरोध करने से घबराती है. उन्हें अपने हक की जानकारी नहीं है. ऐसे में नारी अदालत स्थानीय स्तर पर कार्य करती है. नारी अदालत में जो भी महिलाएं जुड़ती है, उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है. नारी अदालत के बनने से कई केस ऐसे सामने आयें जो दब कर रह जाती थी.
संगीता दत्ता, स्टेट लेवल ऑफिसर, नारी अदालत, महिला सामाख्या


wha rinku!!!! good report!!!
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