भारी बस्ता पर स्कूल क्यूं करता है अनदेखी
- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों में भारी बस्ता को लेकर 2004 में बनाया गया था नियम
- किसी भी स्कूल में नहीं होता है फॉलो
संवाददाता, पटना
भारी स्कूल बैग को लेकर हर सत्र के पहले स्कूलों को निर्देश दिये जाते है. स्कूल बैग का वजन कितना हो, इसकी भी जानकारी सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के तमाम स्कूलों को दिया गया है. लेकिन इसके बावजूद कोई भी स्कूल इसको लेकर अवेयर नहीं है. भारी बस्ता को लेकर अधिकांश स्कूलों में अनदेखी की जा रही है. मानव संसाधन विभाग द्वारा सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड को एक लेटर लिखा गया है. इसमें स्कूल को भारी बस्ता को लेकर अवेयर करने को कहा गया है. अब सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की ओर से तमाम स्कूलों को नये सत्र में भारी स्कूल बैग संबंधी नियम को फॉलो करने का निर्देश जारी किया गया है.
- 90 फीसदी स्कूल नहीं फॉलो करते है निर्देश
भारी बस्ता और जरूरत से ज्यादा किताबें ढोने संबंधित निर्देश कोई भी स्कूल फॉलो नहीं करता है. 2004 में नियम बनाने के बावजूद कोई भी स्कूल इन डायरेक्शन को नहीं मानता है. हर स्कूलों में छोटे बड़े तमाम क्लासेज में भारी बस्ता उठाने को स्टूडेंट्स मजबूर है. इस पर किसी भी तरह की पाबंदी स्कूल नहीं लगा पा रही है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के अनुसार 90 फीसदी स्कूलों में भारी बस्ता का नियम फॉलो नहीं हो रहा है. नर्सरी, क्लास वन, क्लास टू, क्लास थ्री आदि के स्टूडेंट्स कंधे पर भारी भरकम बैग उठा कर स्कूल आते जाते हैं. मानो स्टूडेंट्स के पीठ पर स्कूल बैग नहीं बल्कि कोई बोझ हो. सीबीएसइ के अनुसार इस सत्र से हर स्कूलों को भारी बस्ता संबंधित जो भी डायरेक्शन दिये गये है, उसे फॉलो करना है.
- भारी बस्ता में किताबों के अलावा कई चीजें
हर स्कूलों में बड़े-बड़े बैग का इस्तेमाल बच्चे करते है. इसके लिए एक तो स्कूल जिम्मेवार है वहीं दूसरी ओर अभिभावक भी बच्चों को बड़े बैग देना ही पसंद करते है. बड़ा बैग होने से एक ही बैग में बच्चे के बड़े टिफिन, वाटर बोतल, 10 से 12 किताबें आदि डाल दिया जाता है. किताबों के अलावा नोट बुक, टिफिन और पानी का वजन भी बच्चों को उठाना पड़ता है. इस संबंध में सीबीएसइ ने निर्देश दिया है कि छोटे बच्चों के लिए लंच की व्यवस्था स्कूल की ओर से ही होना चाहिए.
- क्लास थ्री के बच्चे उठाते है 7 किलो वजन
सीबीएसइ ने स्कूलों को निर्देश देते हुए कहा कि भारी बस्ता का नियम फॉलो किया जायें. सीबीएसइ के एक सर्वे के अनुसार क्लास थ्री का एक बच्च 7 किलो तक का वजन अपने बैग का उठाते है. जबकि क्लास 8वीं के बच्चे 13 किलो भारी बस्ता का वजन उठाते हैं. ऐसे में बच्चों में कम उम्र में ही कंधे और बैक पेन आदि का प्राब्लम देखा जा रहा है.
- सिलेबस को कम करने का निर्देश
मानव संसाधन मंत्रलय की ओर से सीबीएसइ और तमाम स्टेट बोर्ड को अपना सिलेबस कम करने का भी निर्देश दिया गया है. इसके अलावा एनसीइआरटी बुक को पूरी तरह से हर क्लास में लागू करने का निर्देश जारी किया गया है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड सूत्रों के मुताबिक अधिकांश स्कूलों में एनसीइआरटी बुक को जूनियर क्लासेज में फॉलो नहीं किया जाता है. एनसीइआरटी बुक का वजन कम होता. लेकिन दूसरे पब्लिकेशन के बुक की वजन भी अधिक होता है. इससे स्कूल बैग अधिक भारी हो जाता है.
एक स्कूल बैग में इन चीजों को रखा जाता है
- 10 से 12 किताबें
- 7 से 8 नोट बुक
- लंच बाक्स या टिफिन
- वाटर बोतल
- इंस्ट्रमेंट बाक्स
क्लास वाइज स्कूल बैग का वजन
क्लास - वजन
वन और टू - 5 से 6 किलो
थ्री - 7 से 8 किलो
फोन और फाइव - 8 से 10 किलो
सिक्स और सेवन - 11 से 12 किलो
8वीं - 13 किलो
9वीं और 10वीं - 14 से 15 किलो
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की ओर से जारी निर्देश
पहला डायरेक्शन - इस निर्देश को 2004 में दिया गया था. डायरेक्शन नंबर 31/2004 के अनुसार नर्सरी से क्लास दो तक के बच्चे किसी भी तरह के स्कूल बैग के साथ स्कूल नहीं आयेंगे. बच्चों के पढ़ाई संबंधित जो भी चीजों होंगी, वो स्कूल के पास ही रखें जायेंगे. इसके लिए स्कूल की ओर से हर बच्चों को एक लॉकर प्रोवाइड करवाया जायेगा. इस क्लास तक के बच्चों को किसी प्रकार का होम वर्क भी नहीं दिया जायेगा.
दूसरा डायरेक्शन - इस निर्देश के तहत स्कूलों में क्लास वन से 8वीं तक कम से कम किताबें चलाने को कहा गया था. जिन किताबों की बेहद जरूरत हो, उन्हीं किताबों को वन से 8वीं तक के स्टूडेंट्स के कोर्स में शामिल किया जायें. कम से कम किताबें देने का डायरेक्शन दिया गया था. कम से कम किताबें संबंधित डायरेक्शन पहली बार 2006 (डायरेक्शन नंबर 07/2006), दूसरी बार 2007 (डायरेक्शन नंबर 21/2007), तीसरी बार 2008 (डायरेक्शन नंबर 43/2008) दिया गया था. इसके बावजूद अभी तक कोई भी डायरेक्शन स्कूलों द्वारा माना नहीं जा रहा है.
तीसरा डायरेक्शन - इसके अंतर्गत स्कूलों को डायरेक्शन दिया था कि स्कूल बैग के अंदर वाटर बोतल और टिफिन नहीं रखा जायेगा. डायरेक्शन नंबर 8/2007 के अनुसार लंच बाक्स को स्कूल बैग के बाहर रखने की शुरुआत की जाये. सीबीएसइ के इस निर्देश को दक्षिण भारत के स्कूलों में फॉलो किया जाता हैं. सीबीएसइ के अनुसार दक्षिण भारत के तमाम स्कूलों में स्कूल बैग के अलावा एक छोटा लंच बाक्स बैग स्टूडेंट्स को रखना होता है.
कोट
भारी बस्ता को लेकर सीबीएसइ की ओर से कई साल पहले ही स्कूलों को कई डायरेक्शन दिये गये थे. लेकिन स्कूल इस तरफ अवेयर नहीं है. छोटे क्लास में भी 7 से 8 किताबें चलायी जाती है. कौन से स्कूल कितनी किताबें चलाये इसको लेकर कोई अवेयरनेस नहीं है. इस सत्र में एक बार फिर अभिभावकों की शिकायत पर सीबीएसइ ने यह कदम उठाया है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों में भारी बस्ता को लेकर 2004 में बनाया गया था नियम
- किसी भी स्कूल में नहीं होता है फॉलो
संवाददाता, पटना
भारी स्कूल बैग को लेकर हर सत्र के पहले स्कूलों को निर्देश दिये जाते है. स्कूल बैग का वजन कितना हो, इसकी भी जानकारी सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के तमाम स्कूलों को दिया गया है. लेकिन इसके बावजूद कोई भी स्कूल इसको लेकर अवेयर नहीं है. भारी बस्ता को लेकर अधिकांश स्कूलों में अनदेखी की जा रही है. मानव संसाधन विभाग द्वारा सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड को एक लेटर लिखा गया है. इसमें स्कूल को भारी बस्ता को लेकर अवेयर करने को कहा गया है. अब सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की ओर से तमाम स्कूलों को नये सत्र में भारी स्कूल बैग संबंधी नियम को फॉलो करने का निर्देश जारी किया गया है.
- 90 फीसदी स्कूल नहीं फॉलो करते है निर्देश
भारी बस्ता और जरूरत से ज्यादा किताबें ढोने संबंधित निर्देश कोई भी स्कूल फॉलो नहीं करता है. 2004 में नियम बनाने के बावजूद कोई भी स्कूल इन डायरेक्शन को नहीं मानता है. हर स्कूलों में छोटे बड़े तमाम क्लासेज में भारी बस्ता उठाने को स्टूडेंट्स मजबूर है. इस पर किसी भी तरह की पाबंदी स्कूल नहीं लगा पा रही है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के अनुसार 90 फीसदी स्कूलों में भारी बस्ता का नियम फॉलो नहीं हो रहा है. नर्सरी, क्लास वन, क्लास टू, क्लास थ्री आदि के स्टूडेंट्स कंधे पर भारी भरकम बैग उठा कर स्कूल आते जाते हैं. मानो स्टूडेंट्स के पीठ पर स्कूल बैग नहीं बल्कि कोई बोझ हो. सीबीएसइ के अनुसार इस सत्र से हर स्कूलों को भारी बस्ता संबंधित जो भी डायरेक्शन दिये गये है, उसे फॉलो करना है.
- भारी बस्ता में किताबों के अलावा कई चीजें
हर स्कूलों में बड़े-बड़े बैग का इस्तेमाल बच्चे करते है. इसके लिए एक तो स्कूल जिम्मेवार है वहीं दूसरी ओर अभिभावक भी बच्चों को बड़े बैग देना ही पसंद करते है. बड़ा बैग होने से एक ही बैग में बच्चे के बड़े टिफिन, वाटर बोतल, 10 से 12 किताबें आदि डाल दिया जाता है. किताबों के अलावा नोट बुक, टिफिन और पानी का वजन भी बच्चों को उठाना पड़ता है. इस संबंध में सीबीएसइ ने निर्देश दिया है कि छोटे बच्चों के लिए लंच की व्यवस्था स्कूल की ओर से ही होना चाहिए.
- क्लास थ्री के बच्चे उठाते है 7 किलो वजन
सीबीएसइ ने स्कूलों को निर्देश देते हुए कहा कि भारी बस्ता का नियम फॉलो किया जायें. सीबीएसइ के एक सर्वे के अनुसार क्लास थ्री का एक बच्च 7 किलो तक का वजन अपने बैग का उठाते है. जबकि क्लास 8वीं के बच्चे 13 किलो भारी बस्ता का वजन उठाते हैं. ऐसे में बच्चों में कम उम्र में ही कंधे और बैक पेन आदि का प्राब्लम देखा जा रहा है.
- सिलेबस को कम करने का निर्देश
मानव संसाधन मंत्रलय की ओर से सीबीएसइ और तमाम स्टेट बोर्ड को अपना सिलेबस कम करने का भी निर्देश दिया गया है. इसके अलावा एनसीइआरटी बुक को पूरी तरह से हर क्लास में लागू करने का निर्देश जारी किया गया है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड सूत्रों के मुताबिक अधिकांश स्कूलों में एनसीइआरटी बुक को जूनियर क्लासेज में फॉलो नहीं किया जाता है. एनसीइआरटी बुक का वजन कम होता. लेकिन दूसरे पब्लिकेशन के बुक की वजन भी अधिक होता है. इससे स्कूल बैग अधिक भारी हो जाता है.
एक स्कूल बैग में इन चीजों को रखा जाता है
- 10 से 12 किताबें
- 7 से 8 नोट बुक
- लंच बाक्स या टिफिन
- वाटर बोतल
- इंस्ट्रमेंट बाक्स
क्लास वाइज स्कूल बैग का वजन
क्लास - वजन
वन और टू - 5 से 6 किलो
थ्री - 7 से 8 किलो
फोन और फाइव - 8 से 10 किलो
सिक्स और सेवन - 11 से 12 किलो
8वीं - 13 किलो
9वीं और 10वीं - 14 से 15 किलो
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की ओर से जारी निर्देश
पहला डायरेक्शन - इस निर्देश को 2004 में दिया गया था. डायरेक्शन नंबर 31/2004 के अनुसार नर्सरी से क्लास दो तक के बच्चे किसी भी तरह के स्कूल बैग के साथ स्कूल नहीं आयेंगे. बच्चों के पढ़ाई संबंधित जो भी चीजों होंगी, वो स्कूल के पास ही रखें जायेंगे. इसके लिए स्कूल की ओर से हर बच्चों को एक लॉकर प्रोवाइड करवाया जायेगा. इस क्लास तक के बच्चों को किसी प्रकार का होम वर्क भी नहीं दिया जायेगा.
दूसरा डायरेक्शन - इस निर्देश के तहत स्कूलों में क्लास वन से 8वीं तक कम से कम किताबें चलाने को कहा गया था. जिन किताबों की बेहद जरूरत हो, उन्हीं किताबों को वन से 8वीं तक के स्टूडेंट्स के कोर्स में शामिल किया जायें. कम से कम किताबें देने का डायरेक्शन दिया गया था. कम से कम किताबें संबंधित डायरेक्शन पहली बार 2006 (डायरेक्शन नंबर 07/2006), दूसरी बार 2007 (डायरेक्शन नंबर 21/2007), तीसरी बार 2008 (डायरेक्शन नंबर 43/2008) दिया गया था. इसके बावजूद अभी तक कोई भी डायरेक्शन स्कूलों द्वारा माना नहीं जा रहा है.
तीसरा डायरेक्शन - इसके अंतर्गत स्कूलों को डायरेक्शन दिया था कि स्कूल बैग के अंदर वाटर बोतल और टिफिन नहीं रखा जायेगा. डायरेक्शन नंबर 8/2007 के अनुसार लंच बाक्स को स्कूल बैग के बाहर रखने की शुरुआत की जाये. सीबीएसइ के इस निर्देश को दक्षिण भारत के स्कूलों में फॉलो किया जाता हैं. सीबीएसइ के अनुसार दक्षिण भारत के तमाम स्कूलों में स्कूल बैग के अलावा एक छोटा लंच बाक्स बैग स्टूडेंट्स को रखना होता है.
कोट
भारी बस्ता को लेकर सीबीएसइ की ओर से कई साल पहले ही स्कूलों को कई डायरेक्शन दिये गये थे. लेकिन स्कूल इस तरफ अवेयर नहीं है. छोटे क्लास में भी 7 से 8 किताबें चलायी जाती है. कौन से स्कूल कितनी किताबें चलाये इसको लेकर कोई अवेयरनेस नहीं है. इस सत्र में एक बार फिर अभिभावकों की शिकायत पर सीबीएसइ ने यह कदम उठाया है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
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