Sunday, April 5, 2015

स्कूल बोलता रहा झूठ, रौल नंबर ने खोला प्रिया राय का सच

स्कूल बोलता रहा झूठ, रौल नंबर ने खोला प्रिया राय का सच

-  सीबीएसइ के 12वीं के परीक्षा एलओसी में प्रिया रॉय का नाम है शामिल
- सेंट माइकल हाई स्कूल में प्रिया रॉय का रौल नंबर चिपकाया जाता हैं
संवाददाता, पटना
प्रिया राय डीएवी बीएसइबी की छात्र नहीं है. प्रिया राय को 11वीं में ही फेल होने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया था. 12वीं के रजिस्टर पर उसका नाम दर्ज नहीं हैं. 12वीं में वो एक भी दिन स्कूल में क्लास करने नहीं आयी. वो डीएवी बीएसइबी की छात्र ही नहीं थी तो उसे एडमिट कार्ड कहां से मिलता. ये तमाम झूठ भरे आरोप प्रिया राय पर डीएवी बीएसइबी प्रशासन लगाता रहा और बचता रहा. लेकिन डीएवी बीएसइबी का झूठ तब सामने आ गया जब प्रिया राय का 12वीं का रौल नंबर स्कूल से प्राप्त किया गया. प्रिया राय को भरे स्कूल ने 12वीं की परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड नहीं दिया हो लेकिन प्रिया राय का रौल नंबर 7620304 उसके परीक्षा केंद्र पर चिपकाये जा रहे हैं. साइंस की छात्र प्रिया राय की परीक्षा 3 मार्च, 9 मार्च, 12 मार्च और अब 18 मार्च को होना हैं. सेंट माइकल हाई स्कूल में डीएवी बीएसइबी के परीक्षा केंद्र बनाया गया है. ज्ञात हो कि डीएवी बीएसइबी की छात्र प्रिया रॉय 28 फरवरी को 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड लेने स्कूल गयी थी. उसे एडमिट कार्ड नहीं मिला और उसी दिन से स्कूल कैंपस से गायब हो गयी. 17 दिन होने को जा रहा हैं लेकिन अभी तक प्रिया राय का कोई पता नहीं चला है. एडमिट कार्ड नहीं मिलने के कारण प्रिया राय 12वीं की परीक्षा भी नहीं दे पायी हैं.
- 12वीं के एलओसी में हैं प्रिया रॉय का नाम
सीबीएसइ सूत्रों के मुताबिक प्रिया रॉय 11वीं में फेल नहीं थी. उसका 12वीं की परीक्षा देने वाले (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) वाले लिस्ट में नाम भी शामिल था. उसी के आधार पर उसका एडमिट कार्ड भी जारी किया गया था. स्कूल के कोड पर प्रिया रॉय का एडमिट कार्ड सीबीएसइ की ओर से भेजा भी गया है. अगर प्रिया राय 11वीं में फेल हो गयी होती तो वो 12वीं क्लास में जाती ही नहीं.   इतना ही नहीं प्रिया रॉय अगर 11वी में फेल थी तो उसने 12वीं में परीक्षा फार्म कैसे भर दिया. सीबीएसइ के अनुसार अगर कोई छात्र 11वीं में एक दो विषयों में फेल रहता है तो स्कूल अपनी ओर से कंपार्टमेंटल की परीक्षा लेकर उसे 12वीं प्रमोट कर सकता है. अगर छात्र सारे विषयों में फेल रहते है तो उसे दुबारा 11वीं में ही पढ़ना पड़ता है. ऐसे में छात्र 12वीं की परीक्षा में किसी भी हालत में शामिल नहीं हो सकता है.
- रौल नंबर पर होता है जोन और स्कूल का डिटेल्स
सीबीएसइ की ओर से भी जो रौल नंबर दिया जाता है. उस रौल नंबर पर संबंधित रीजनल ऑफिस के नाम के साथ स्कूल के डिटेल्स और छात्र 10वीं और 12वीं किस क्लास से आता है. इसकी पूरी जानकारी होती हैं. सीबीएसइ के 10वीं और 12वीं का रौल नंबर सात डिजिट का होता है. इसमें पहला डिजिट रीजनल ऑफिस का होता है. उसके बाद की संख्या स्टूडेंट्स के 10वीं या 12वीं के होने को दर्शाता है. इसके बाद स्कूल और फिर स्टूडेंट का रौल नंबर होता हैं. पटना रीजनल ऑफिस के अंतर्गत आने वाले तमाम रौल नंबर 7 संख्या से शुरू होता है. उसके बाद की 6 नंबर की संख्या 12वीं को दर्शाता है. इसके बाद 20304 डीएवी बीएसइबी स्कूल और स्टूडेंट को दिया गया रौल नंबर है.
- 11वीं में फेल तो कैसे भर दिया 12वीं में परीक्षा फार्म
अगर प्रिया राय 11वीं में फेल हो गयी थी तो उसे 12वीं क्लास करने की अनुमति क्यूं दी गयी. इतना ही नहीं प्रिया रॉय ने 12वीं में परीक्षा फार्म कैसे भर दिया. सीबीएसइ के अनुसार अगर कोई छात्र 11वीं में एक दो विषयों में फेल रहता है तो स्कूल अपनी ओर से कंपार्टमेंटल की परीक्षा लेकर उसे 12वीं प्रमोट कर सकता है. अगर छात्र सारे विषयों में फेल रहते है तो उसे दुबारा 11वीं में ही पढ़ना पड़ता है. ऐसे में छात्र 12वीं की परीक्षा में किसी भी हालत में शामिल नहीं हो सकता है. सीबीएसइ के सूत्रों की माने तो प्रिया राय 11वीं में पास थी, और उसका नाम 12वीं के एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) में शामिल था.
- सीबीएसइ ने मांगी थी 11वीं रिजल्ट की कॉपी
2014 में पहली बार सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से 11वीं  का रिजल्ट मांगा था. जो भी छात्र 11वीं पास किये है उसका ही पूरा डिटेल्स सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को देने का कहा था. इसके लिए हर स्कूल को सीबीएसइ के वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट अपलोड करना था. सारे स्कूलों ने 11वीं में पास करने वाले तमाम छात्र का रिजल्ट सीबीएसइ को जून 2014  में भेजा था. डीएवी बीएसइबी की ओर से भेजे गये लिस्ट में प्रिया राय का नाम भी शामिल था. सीबीएसइ सूत्रों के मुताबिक 12वीं के एलओसी में छात्र प्रिया राय का नाम शामिल हैं.  उसी के आधार पर प्रिया राय का एडमिट कार्ड भी बना था. क्योंकि सीबीएसइ के पास 11वीं में सफल छात्रों को ही 12वीं में परीक्षा फार्म भरने की अनुमति दी गयी थी.
- दो तरीके का होता है एलओसी
सीबीएसइ ने स्कूलों में छात्रों की पारदर्शिता और सही संख्या को लाने के लिए एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) की शुरुआत की हैं. इसके तहत सीबीएसइ स्कूल के छात्र को दो बार एलओसी में शामिल किया जाता है. पहला एलओसी 9वीं और 11वीं के रजिस्ट्रेशन के बाद छात्र के पूरा डिटेल्स शामिल किया जाता है. वहीं दूसरी बार 10वीं और 12वीं के परीक्षा में शामिल होने परीक्षार्थियों का नाम एलओसी में शामिल किया जाता है. इसमें उन छात्रों के नाम छांट दिये जाते है तो 11वीं में सारे विषयों में फेल कर जाते है. इससे सीबीएसइ को पता चलता कि कि इस बार रजिस्ट्रेंशन वाले कितने छात्र 10वीं बोर्ड और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल नहीं होंगे.

- स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों को आगे बढ़ाया डीएवी
आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती के सपनों को साकार करने के लिए उनके अनुयानियों ने दयानंद एंग्लों वैदिक (डीएवी) कॉलेज ट्रस्ट तथा प्रबंधन समिति की स्थापना 1 जून 1886 में किया गया. इसके माध्यम से वेदों की ओर वापस जाने का आवहान किया गया जिसका वास्तवित अर्थ शिक्षा का प्रसार करना था. इस शैक्षिक आंदोलन को लाला लाजपत राय, भाई परमानंद, लाला द्वाका दास आदि राष्ट्रवादी नेताओं ने आगे बढ़ाया. वैदिक परंपरा पर आधारित इस स्कूल भारतीय संस्कार, संस्कृति, भारतीय चिंतन आदि की शिक्षा दी जाती है. लेकिन आज डीएवी का रूप कुछ अलग होता जा रहा है. सीबीएसइ के मान्यता लेने के बाद जिस तरह से नियमों की धज्जियां यहां पर उड़ती है वो हर किसी के सामने आया है.

- सच जानने के बाद भी सीबीएसइ है चुप
डीएवी बीएसइबी की गलती के कारण 12वीं की बोर्ड में  प्रिया राय शामिल नहीं हो पायी. प्रिया राय का दो साल बर्बाद हो गया. सीबीएसइ के पास यह मामला गया है. सीबीएसइ के अनुसार सीधे रूप में इन मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती है. लेकिन ऐसे मामले उन समय काम आते है जब स्कूल को एफिलिएशन लेना होता है. जब स्कूल एफिलिएशन के लिए बोर्ड के पास अप्लाई करता है तो उस समय इन प्वाइंट पर फोकस किया जाता है. इस तरह की जानकारी बोर्ड को मिलने के बाद एफिलिएशन मिलना कठिन हो जाता है.

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