डीएवी, बीएसइबी के एलओसी की होगी जांच, सीबीएसइ हुआ सख्त
- 11वीं और 12वीं के एलओसी के लिस्ट में कैसे हो जाता है अंतर
- प्रिया रॉय के अभिभावक करें लिखित शिकायत हो लिया जायेगा स्पेशल एग्जाम
संवाददाता, पटना
डीएवी की हरकतों पर लगातार सीबीएसइ नजर रखे हुए है. कई सालों से ऐसी रिपोर्ट आ रही है कि डीएवी में जो छात्र 11वीं में रजिस्ट्रेशन करवाते हैं, वहीं छात्र 12वीं की परीक्षा में शामिल नहीं होते. उसमें काफी अंतर पाया जाता है. सीबीएसइ अब पटना रिजन के तमाम डीएवी के 11वीं और 12वीं एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) की जांच करेगी. यह जांच पिछले कई सालों के प्लस टू के स्टूडेंट्स को लेकर किया जायेगा. सीबीएसइ के सूत्रों के मुताबिक डीएवी को लेकर हाल में सीबीएसइ के विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से जांच करवायी गयी है. इस रिपोर्ट में स्कूल की कई गड़बड़ियां सामने आयी है. ऐसे में जल्द ही सीबीएसइ की ओर से स्कूल पर एफिलिएशन संबंधित कार्रवाई होगी.
- लिखित शिकायत के बाद करेंगे मदद
सीबीएसइ दिल्ली से जब प्रभात खबर, पटना की ओर से बात की गयी और डीएवी बीएसइबी की 12वीं की छात्र प्रिया रॉय के बारे में तमाम बातों की जानकारी दी गयी. इसके बाद सीबीएसइ की ओर से प्रिया रॉय संबंधित तमाम न्यूज की क्लिपिंग मांगी गयी. प्रभात खबर की ओर से 1 मार्च से लेकर 18 मार्च तक के तमाम घटनाओं की क्लिपिंग भेज कर सीबीएसइ को अवगत करवाया गया. सीबीएसइ के अनुसार प्रिया रॉय के अभिभावक को लिखित शिकायत बोर्ड से करनी होगी. अभिभावक या तो रीजनल ऑफिस में प्रिया रॉय को परीक्षा नहीं देने से संबंधित शिकायत करें या हेड क्वार्टर दिल्ली सीबीएसइ ऑफिस में शिकायत करें. ऐसे में प्रिया रॉय के साथ न्याय किया जायेगा. बोर्ड की ओर से लिया जाने वाला कंपार्टमेंटल परीक्षा के दौरान उसके लिए स्पेशल परीक्षा का इंतजाम किया जा सकता है.
- आज खत्म हो गयी प्रिया रॉय की परीक्षा
प्रिया रॉय सीबीएसइ 12वीं की मैथ स्ट्रीम की स्टूडेंट थी. सेंट माइकल हाई स्कूल में प्रिया रॉय का एग्जामिनेशन सेंटर था. 2 मार्च से उनकी परीक्षा थी. लेकिन वो अपनी किसी भी विषय की परीक्षा में शामिल नहीं हो पायी. 18 मार्च को प्रिया का अंतिम विषय मैथेमेटिक्स विषय की परीक्षा थी. लेकिन प्रिया अपना अंतिम विषय की परीक्षा भी नहीं दे पायी.
- गलत आरोप लगा कर निकाल दिया जाता है स्कूल से
डीएवी के गलत आरोप की शिकार एक मात्र प्रिया राय नहीं हुई है, बल्कि हर साल स्कूल की ओर से कई छात्र को गलत आरोप लगा कर स्कूल से निकाल दिया जाता है. 2013 में ऐसी ही घटना घटी थी. 11वीं के लगभग 25 छात्रों को इस बेसिस पर निकाल दिया गया कि उनके पास 10वीं का ऑरिजनल मार्क्स सीट नहीं हैं. स्कूल ने ऐसे समय में इन छात्रों को स्कूल से निकाल दिया जब 11वीं में रजिस्ट्रेशन करवाने का समय था. अब इन छात्रों का नामांकन दूसरे स्कूल में भी नहीं हो सकता था. हर साल डीएवी इस तरह से स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता हैं. गलत आरोप लगाकर स्कूल से निकाल दिये जाने वाले उन स्टूडेंट की संख्या अधिक होती है जो 10वीं पास करने के बाद प्लस टू में डीएवी में मानं
- 11वीं में 38 और 12वीं में 32 सेक्शन कैसे चलते है
सीबीएसइ के विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से हाल मे पटना के तमाम डीएवी स्कूलों का जांच करवायी गयी थी. इस रिपोर्ट के अनुसार डीएवी बीएसइबी में 11वीं में 38 सेक्शन चलते है. लेकिन सेक्शन की संख्या 12वीं में जाकर 32 हो जाती है. विजिलेंस डिपार्टमेंट के रिपोर्ट के अनुसार जब शहर के टॉप स्टूडेंट्स का नामांकन स्कूल में किया जाता है तो छह सेक्शन के स्टूडेंट्स फेल कैसे कर जाते है. यह कोई एक साल की नहीं बल्कि हर साल यह स्थिति होती है. रिपोर्ट में यह कहा गया है कि स्कूल प्लस टू में एक साथ 70 सेक्शन चला रहा है. लेकिन इसके मुताबिक स्कूल के पास उतनी संख्या में ना तो कमरे हैं और ना ही टीचर्स की संख्या. ऐसे क्वालिटी एजुकेशन पर संशय हैं.
- डीएवी के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने कॉमेंट करने से किया इंकार
डीएवी हेड क्वार्टर दिल्ली में प्रभात खबर की ओर से संपर्क किया गया. डीएवी के ज्वाइंट सेक्रेटरी आरएस शर्मा से जब स्कूल के इस धांधली और धोखा देने पर बात की गयी तो ज्वाइंट सेक्रेअरी आरएस शर्मा ने किसी तरह के कांमेंट करने से इंकार किया. उन्होंने बताया कि इस संबंध में वो कुछ नहीं बोल सकते है. डीएवी की डायरेक्टर नीशा पेशिया ने बात की जायें. जब नीश पेशिया से संपर्क किया गया तो उन्होने फोन नहीं उठाया. दिन के 1 बजे से शाम के 6 बजे तक डायरेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की गयी.
कोट
हमारे पास पूरे डिटेल्स की जानकारी नहीं है. अगर किसी स्टूडेंट के साथ किसी भी स्कूल में गलत होता है तो अभिभावक और स्टूडेंट को लिखित शिकायत करनी चाहिए. जब तक लिखित शिकायत सीबीएसइ के पास नहीं आयेगी तब तक हम अपनी ओर से स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते है.
जोसफ इमैनुल, ज्वाइंट सेक्रेटरी, सीबीएसइ
- 11वीं और 12वीं के एलओसी के लिस्ट में कैसे हो जाता है अंतर
- प्रिया रॉय के अभिभावक करें लिखित शिकायत हो लिया जायेगा स्पेशल एग्जाम
संवाददाता, पटना
डीएवी की हरकतों पर लगातार सीबीएसइ नजर रखे हुए है. कई सालों से ऐसी रिपोर्ट आ रही है कि डीएवी में जो छात्र 11वीं में रजिस्ट्रेशन करवाते हैं, वहीं छात्र 12वीं की परीक्षा में शामिल नहीं होते. उसमें काफी अंतर पाया जाता है. सीबीएसइ अब पटना रिजन के तमाम डीएवी के 11वीं और 12वीं एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) की जांच करेगी. यह जांच पिछले कई सालों के प्लस टू के स्टूडेंट्स को लेकर किया जायेगा. सीबीएसइ के सूत्रों के मुताबिक डीएवी को लेकर हाल में सीबीएसइ के विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से जांच करवायी गयी है. इस रिपोर्ट में स्कूल की कई गड़बड़ियां सामने आयी है. ऐसे में जल्द ही सीबीएसइ की ओर से स्कूल पर एफिलिएशन संबंधित कार्रवाई होगी.
- लिखित शिकायत के बाद करेंगे मदद
सीबीएसइ दिल्ली से जब प्रभात खबर, पटना की ओर से बात की गयी और डीएवी बीएसइबी की 12वीं की छात्र प्रिया रॉय के बारे में तमाम बातों की जानकारी दी गयी. इसके बाद सीबीएसइ की ओर से प्रिया रॉय संबंधित तमाम न्यूज की क्लिपिंग मांगी गयी. प्रभात खबर की ओर से 1 मार्च से लेकर 18 मार्च तक के तमाम घटनाओं की क्लिपिंग भेज कर सीबीएसइ को अवगत करवाया गया. सीबीएसइ के अनुसार प्रिया रॉय के अभिभावक को लिखित शिकायत बोर्ड से करनी होगी. अभिभावक या तो रीजनल ऑफिस में प्रिया रॉय को परीक्षा नहीं देने से संबंधित शिकायत करें या हेड क्वार्टर दिल्ली सीबीएसइ ऑफिस में शिकायत करें. ऐसे में प्रिया रॉय के साथ न्याय किया जायेगा. बोर्ड की ओर से लिया जाने वाला कंपार्टमेंटल परीक्षा के दौरान उसके लिए स्पेशल परीक्षा का इंतजाम किया जा सकता है.
- आज खत्म हो गयी प्रिया रॉय की परीक्षा
प्रिया रॉय सीबीएसइ 12वीं की मैथ स्ट्रीम की स्टूडेंट थी. सेंट माइकल हाई स्कूल में प्रिया रॉय का एग्जामिनेशन सेंटर था. 2 मार्च से उनकी परीक्षा थी. लेकिन वो अपनी किसी भी विषय की परीक्षा में शामिल नहीं हो पायी. 18 मार्च को प्रिया का अंतिम विषय मैथेमेटिक्स विषय की परीक्षा थी. लेकिन प्रिया अपना अंतिम विषय की परीक्षा भी नहीं दे पायी.
- गलत आरोप लगा कर निकाल दिया जाता है स्कूल से
डीएवी के गलत आरोप की शिकार एक मात्र प्रिया राय नहीं हुई है, बल्कि हर साल स्कूल की ओर से कई छात्र को गलत आरोप लगा कर स्कूल से निकाल दिया जाता है. 2013 में ऐसी ही घटना घटी थी. 11वीं के लगभग 25 छात्रों को इस बेसिस पर निकाल दिया गया कि उनके पास 10वीं का ऑरिजनल मार्क्स सीट नहीं हैं. स्कूल ने ऐसे समय में इन छात्रों को स्कूल से निकाल दिया जब 11वीं में रजिस्ट्रेशन करवाने का समय था. अब इन छात्रों का नामांकन दूसरे स्कूल में भी नहीं हो सकता था. हर साल डीएवी इस तरह से स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता हैं. गलत आरोप लगाकर स्कूल से निकाल दिये जाने वाले उन स्टूडेंट की संख्या अधिक होती है जो 10वीं पास करने के बाद प्लस टू में डीएवी में मानं
- 11वीं में 38 और 12वीं में 32 सेक्शन कैसे चलते है
सीबीएसइ के विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से हाल मे पटना के तमाम डीएवी स्कूलों का जांच करवायी गयी थी. इस रिपोर्ट के अनुसार डीएवी बीएसइबी में 11वीं में 38 सेक्शन चलते है. लेकिन सेक्शन की संख्या 12वीं में जाकर 32 हो जाती है. विजिलेंस डिपार्टमेंट के रिपोर्ट के अनुसार जब शहर के टॉप स्टूडेंट्स का नामांकन स्कूल में किया जाता है तो छह सेक्शन के स्टूडेंट्स फेल कैसे कर जाते है. यह कोई एक साल की नहीं बल्कि हर साल यह स्थिति होती है. रिपोर्ट में यह कहा गया है कि स्कूल प्लस टू में एक साथ 70 सेक्शन चला रहा है. लेकिन इसके मुताबिक स्कूल के पास उतनी संख्या में ना तो कमरे हैं और ना ही टीचर्स की संख्या. ऐसे क्वालिटी एजुकेशन पर संशय हैं.
- डीएवी के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने कॉमेंट करने से किया इंकार
डीएवी हेड क्वार्टर दिल्ली में प्रभात खबर की ओर से संपर्क किया गया. डीएवी के ज्वाइंट सेक्रेटरी आरएस शर्मा से जब स्कूल के इस धांधली और धोखा देने पर बात की गयी तो ज्वाइंट सेक्रेअरी आरएस शर्मा ने किसी तरह के कांमेंट करने से इंकार किया. उन्होंने बताया कि इस संबंध में वो कुछ नहीं बोल सकते है. डीएवी की डायरेक्टर नीशा पेशिया ने बात की जायें. जब नीश पेशिया से संपर्क किया गया तो उन्होने फोन नहीं उठाया. दिन के 1 बजे से शाम के 6 बजे तक डायरेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की गयी.
कोट
हमारे पास पूरे डिटेल्स की जानकारी नहीं है. अगर किसी स्टूडेंट के साथ किसी भी स्कूल में गलत होता है तो अभिभावक और स्टूडेंट को लिखित शिकायत करनी चाहिए. जब तक लिखित शिकायत सीबीएसइ के पास नहीं आयेगी तब तक हम अपनी ओर से स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते है.
जोसफ इमैनुल, ज्वाइंट सेक्रेटरी, सीबीएसइ
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