सीबीएसइ ने दिया था एक सेक्शन चलाने की मान्यता और डीएवी बीएसइबी में चल रहा 15 सेक्शन तक
- प्रोजेक्ट स्कूल होने के कारण सीबीएसइ ने डीएवी बीएसइबी को दिया था कई सुविधा
- एक सेक्शन का इन्फ्रांस्ट्रर और चला रहे 15 सेक्शन
संवाददाता, पटना
डीएवी बीएसइबी बिहार सरकार की प्रोजेक्ट स्कूल है. इस कारण इसे चलाने के लिए सीबीएसइ की ओर से कई छूटें दी गयी थी. सीबीएसइ ने ट्यिूशन फी के साथ एनूअल चार्ज को भी मिनिमम लेने का परमिशन लिया था. इतना ही नहीं प्रोजेक्ट स्कूल होने के कारण सीबीएसइ ने डीएवी बीएसइबी को क्लास वन से लेकर 10वीं तक एक सेक्शन चलाने की मान्यता दिया हुआ है. सीबीएसइ के अनुसार डीएवी बीएसइबी में 80 फीसदी बच्चे विद्युत कोलोनी के नामांकित होंगे. बचे हुए 20 फीसदी पर बाहर के स्टूडेंट्स का नामांकन लिया जा सकता है. हर क्लास 40 छात्रों का ही होगा. लेकिन समय के साथ डीएवी बीएसइबी में छात्रों की संख्या बढ़ती गयी और इसके साथ सेक्शन की भी संख्या बढ़ती चली गयी. सीबीएसइ ने क्लास वन से 10वीं तक एक सेक्शन चलाने की मान्यता दी थी, लेकिन फिलहाल डीएवी बीएसइबी में क्लास वन में 2 सेक्शन और 10वीं तक जाते-जाते सेक्शन की संख्या 15 हो गयी है.
- ट्यूशन फी के साथ बस लिये जायें एनूअल चाजर्
सीबीएसइ की ओर से डीएवी बीएसइबी के लिए विशेष व्यवस्था की गयी थी. जुलाई 1993 में विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों के बच्चों के लिए डीएवी की स्थापना की गयी थी. बिहार सरकार के प्रोजेक्ट स्कूल होने के कारण सीबीएसइ ने इस स्कूल के छात्रों से मंथली टियूशन फी के अलावा अदर चार्ज के रूप में 20 रूपये लेने को कहा गया था. इसके साथ एनुअल चार्ज के रूप में बीएसइबी के बच्चों से 250 और बीएसइबी से बाहर के बच्चों से 500 रुपये लेने को कहा था. लेकिन वर्तमान में डीएवी कई अलग-अलग चार्ज के रूप में छात्रों से पैसे वसूलते हैं.
- एक शिफ्ट की मान्यता और चल रहे है दो शिफ्ट
सीबीएसइ ने डीएवी बीएसइबी को एक शिफ्ट चलाने की मान्यता दी थी. लेकिन डीएवी बीएसइबी दो शिफ्ट में चलता है. स्कूल को सप्ताह में 504 क्लास लेने की अनुमति दी गयी थी. हर क्लास 40 मिनट का होना चाहिए था. डीएवी बीएसइबी में एलकेजी और यूकेजी चलाने की अनुमति सीबीएसइ ने नहीं दिया था.
- 9वीं और 10वीं में सेक्शन की संख्या में है अंतर
सीबीएसइ के अनुसार 9वीं से 12वी तक छात्रों की संख्या भले एक दो कम हो जायें. लेकिन सेक्शन की संख्या कम नहीं हो सकती है. सीबीएसइ ने डीएवी बीएसइबी से सवाल पूछा है कि डीएवी बीएसइबी में 9वीं से 10वीं क्लास के बीच 3 सेक्शन कम कैसे हो गये. वहीं 11वीं से 12वीं के बीच भी हालत कुछ ऐसा ही है. 11वीं में जहां 38 सेक्शन चलाये जाते है वहीं 12वीं में सेक्शन की संख्या 6 कम हो जाती है. इतने सेक्शन के छात्र एक साथ कैसे फेल हो गये. अगर बात 10वीं की करें तो डीएवी में 9वी में 12 सेक्शन चलता है. लेकिन यह सेक्शन 10वीं में अधिक होकर 15 पर पहुंच जाता है. इसका मतलब 10वीं में भी इस स्कूल में नामांकन लिये जाते है.
सीबीएसइ के अनुसार डीएवी बीएसइबी में होना चाहिए एक सेक्शन लेकिन डीएवी बीएसइबी में चल रहे 15 सेक्शन तक
क्लास - सेक्शन की संख्या (सीबीएसइ के अनुसार होना चाहिए) - चलाये जा रहे सेक्शन
वन - 1 - 2
दो, थ्री - 1, 1 - 3 और 3
फोर, फाइव - 1, 1 - 5, 5
6ठीं - 1 - 9
7वीं - 1 - 11
8वीं - 1 - 14
9वीं - 1 - 12
10वीं - 1 - 15
- प्रोजेक्ट स्कूल होने के कारण सीबीएसइ ने डीएवी बीएसइबी को दिया था कई सुविधा
- एक सेक्शन का इन्फ्रांस्ट्रर और चला रहे 15 सेक्शन
संवाददाता, पटना
डीएवी बीएसइबी बिहार सरकार की प्रोजेक्ट स्कूल है. इस कारण इसे चलाने के लिए सीबीएसइ की ओर से कई छूटें दी गयी थी. सीबीएसइ ने ट्यिूशन फी के साथ एनूअल चार्ज को भी मिनिमम लेने का परमिशन लिया था. इतना ही नहीं प्रोजेक्ट स्कूल होने के कारण सीबीएसइ ने डीएवी बीएसइबी को क्लास वन से लेकर 10वीं तक एक सेक्शन चलाने की मान्यता दिया हुआ है. सीबीएसइ के अनुसार डीएवी बीएसइबी में 80 फीसदी बच्चे विद्युत कोलोनी के नामांकित होंगे. बचे हुए 20 फीसदी पर बाहर के स्टूडेंट्स का नामांकन लिया जा सकता है. हर क्लास 40 छात्रों का ही होगा. लेकिन समय के साथ डीएवी बीएसइबी में छात्रों की संख्या बढ़ती गयी और इसके साथ सेक्शन की भी संख्या बढ़ती चली गयी. सीबीएसइ ने क्लास वन से 10वीं तक एक सेक्शन चलाने की मान्यता दी थी, लेकिन फिलहाल डीएवी बीएसइबी में क्लास वन में 2 सेक्शन और 10वीं तक जाते-जाते सेक्शन की संख्या 15 हो गयी है.
- ट्यूशन फी के साथ बस लिये जायें एनूअल चाजर्
सीबीएसइ की ओर से डीएवी बीएसइबी के लिए विशेष व्यवस्था की गयी थी. जुलाई 1993 में विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों के बच्चों के लिए डीएवी की स्थापना की गयी थी. बिहार सरकार के प्रोजेक्ट स्कूल होने के कारण सीबीएसइ ने इस स्कूल के छात्रों से मंथली टियूशन फी के अलावा अदर चार्ज के रूप में 20 रूपये लेने को कहा गया था. इसके साथ एनुअल चार्ज के रूप में बीएसइबी के बच्चों से 250 और बीएसइबी से बाहर के बच्चों से 500 रुपये लेने को कहा था. लेकिन वर्तमान में डीएवी कई अलग-अलग चार्ज के रूप में छात्रों से पैसे वसूलते हैं.
- एक शिफ्ट की मान्यता और चल रहे है दो शिफ्ट
सीबीएसइ ने डीएवी बीएसइबी को एक शिफ्ट चलाने की मान्यता दी थी. लेकिन डीएवी बीएसइबी दो शिफ्ट में चलता है. स्कूल को सप्ताह में 504 क्लास लेने की अनुमति दी गयी थी. हर क्लास 40 मिनट का होना चाहिए था. डीएवी बीएसइबी में एलकेजी और यूकेजी चलाने की अनुमति सीबीएसइ ने नहीं दिया था.
- 9वीं और 10वीं में सेक्शन की संख्या में है अंतर
सीबीएसइ के अनुसार 9वीं से 12वी तक छात्रों की संख्या भले एक दो कम हो जायें. लेकिन सेक्शन की संख्या कम नहीं हो सकती है. सीबीएसइ ने डीएवी बीएसइबी से सवाल पूछा है कि डीएवी बीएसइबी में 9वीं से 10वीं क्लास के बीच 3 सेक्शन कम कैसे हो गये. वहीं 11वीं से 12वीं के बीच भी हालत कुछ ऐसा ही है. 11वीं में जहां 38 सेक्शन चलाये जाते है वहीं 12वीं में सेक्शन की संख्या 6 कम हो जाती है. इतने सेक्शन के छात्र एक साथ कैसे फेल हो गये. अगर बात 10वीं की करें तो डीएवी में 9वी में 12 सेक्शन चलता है. लेकिन यह सेक्शन 10वीं में अधिक होकर 15 पर पहुंच जाता है. इसका मतलब 10वीं में भी इस स्कूल में नामांकन लिये जाते है.
सीबीएसइ के अनुसार डीएवी बीएसइबी में होना चाहिए एक सेक्शन लेकिन डीएवी बीएसइबी में चल रहे 15 सेक्शन तक
क्लास - सेक्शन की संख्या (सीबीएसइ के अनुसार होना चाहिए) - चलाये जा रहे सेक्शन
वन - 1 - 2
दो, थ्री - 1, 1 - 3 और 3
फोर, फाइव - 1, 1 - 5, 5
6ठीं - 1 - 9
7वीं - 1 - 11
8वीं - 1 - 14
9वीं - 1 - 12
10वीं - 1 - 15
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