Sunday, April 5, 2015

8 हजार स्टूडेंट्स के लिए चाहिए 177 क्लास रूम, डीएवी बीएसइबी में 127 कमरे में चल रहा सारा स्कूल

8 हजार स्टूडेंट्स के लिए चाहिए 177 क्लास रूम, डीएवी बीएसइबी में 127 कमरे में चल रहा सारा स्कूल

- 54 टीचर मिल कर 10 हजार स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं
- 9वीं से 12वीं तक बदलता रहता है सेक्शन
रिंकू झा, पटना
नामांकन तो ले लिये जाते है, लेकिन पढ़ाने के लिए जगह नहीं हैं. क्लास वन में भले दो सेक्शन में ही नामांकन लिये जाते हों, लेकिन यह 10वीं जाते-जाते 15 सेक्शन हो जाता है. और फिर प्लस टू में जाकर इन सेक्शन की संख्या 74  ( 11वीं में 42 और 12वीं में 32 सेक्शन) हो जाती है. डीएवी बीएसइबी में हर क्लास में सेक्शन और स्टूडेंट्स के नामांकन लेने का खेल तो खूब चलता है, लेकिन इसके लिए इन्फ्रास्ट्रर की काफी कमी है. ना तो प्रॉपर लैब है ना ही लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स रूम. सीबीएसइ की विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से जांच में ये सारी चीजें निकल कर आयी है. 9 अक्तूबर 2014 और 16 अक्तूबर 2014 को डीएवी बीएसइबी कैंपस का जांच किया गया. जांच में पता चला कि स्कूल में कुल 149 सेक्शन चल रहे है. इस 149 सेक्शन के लिए स्कूल के पास 177 कमरे होंने चाहिए. लेकिन फिलहाल स्कूल के पास मात्र 127 कमरे हैं.
127 कमरे में चलता है सारा स्कूल
डीएवी बीएसइबी में वर्तमान में लगभग दस हजार स्टूडेंट्स पढ़ रहें हैं. अलग-अलग क्लास मिला कर स्कूल में कुल 149 सेक्शन चल रहे हैं. जांच रिपोर्ट के अनुसार सीबीएसइ के नॉर्म्स से अलग हट कर हर सेक्शन में स्टूडेंट्स की संख्या 40 से अधिक रखी गयी है. पेपर में भले स्कूल ने 40 स्टूडेंट्स की संख्या दिखायी है, लेकिन सेक्शन की संख्या जितना स्कूल दिखा रहा हैं, उतनी संख्या में सेक्शन खोलने के लिए क्लास रूम भी उतनी ही होनी चाहिए. जो डीएवी बीएसइबी के पास नहीं है. अगर बात प्लस टू की करें तो जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि स्कूल कैंपस में 11वीं में क्लास करने में 50 फीसदी छात्र नदारद रहते है. स्कूल ने जांच कमेटी को 11वी में 40 सेक्शन दिखाये, जिसमें 1507 छात्र का नामांकन हुआ हैं. वहीं यही स्टूडेंटस की संख्या 12वीं में आकर 1327 पर अटक जाती है.
35 रेगुलर और 19 एडहॉक टीचर से चल रहा काम
सीबीएसइ के नॉर्म्स के अनुसार 40 स्टूडेंट्स पर तीन टीचर होने चाहिए. लेकिन डीएवी बीएसइबी ने इसे भी ठेंगा दिखा दिया है. वर्तमान में डीएवी बीएसइबी के प्लस टू में 74 सेक्शन चल रहा हैं. इसमें पढ़ाने के लिए मात्र 35 टीचर परमानेंट हैं, जो पीजीटी ( पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) लेवल के हैं. इसके अलावा स्कूल की ओर से 19 टीचर को एडहॉक पर बुलाया जाता है. बाकी की खानापूर्ति सेकेंडरी लेवल के टीचर करते है. जांच टीम ने इस बात की ओर सीबीएसइ का इशारा किया है कि स्कूल में टीचर और स्टूडेंट्स के रेसियो का बिलकुल ही ख्याल नहीं रखा गया है. टीचर स्टूडेंट्स रेशियो के नियम का पालन नहीं हो रहा हैं.
स्कूल कर रहा एलओसी में गड़बड़ी
विजिलेंस डिपार्टमेंट की ओर से दो मेंबर्स की जांच टीम बनायी. इसमें पटना रीजनल ऑफिस की रीजनल ऑफिसर रश्मि त्रिपाठी और नवोदय विद्यालय स्कूल के रिटायर ज्वाइंट डायरेक्टर डीएस सिंह में शामिल थे. जांच में कई ऐसी बातें निकल कर आयी जो सीबीएसइ के एफिलिएशन बाइ लॉज के नियम का उल्लंघन करता है. बोर्ड के एफिलिएशन के नियम 3.3, 8, 10, 13.12 का उल्लंघन स्कूल पूरी तरह से कर रहा है. इसमें सबसे बड़ी बात निकल आयी है कि स्कूल ने सीबीएसइ के एलओसी रिकार्ड के साथ भी छेड़छाड़ कर रहा है. इसके अलावा 9वीं और 11वीं में रजिस्ट्रेशन और एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) के रिकार्ड में काफी अंतर पाया जा रहा है. कई ऐसे छात्र जिनका नाम रजिस्ट्रेशन के दौरान है, लेकिन एलओसी में गायब कर दिया गया है. एलओसी के समय किसी और स्टूडेंट का नाम डाला गया है.
31 मार्च 2015 को खत्म हो जायेगा प्रोविजनल एफिलिएशन
सीबीएसइ के अनुसार देश भर के कई स्कूलों के प्रोविजनल एफिलिएशन 31 मार्च 2015 को खत्म हो जायेगा. एक बार में तीन साल के लिए सीबीएसइ की ओर से प्रोविजनल एफिलिएशन मिलता है. तीन साल का टर्म पूरा होने के बाद दुबारा फिर प्रोविजनल एफिलिएशन के लिए स्कूल को आवेदन देना होता है. ऐसे में सीबीएसइ की ओर से ऑन द स्पॉट स्कूल कैंपस में जाकर औचक निरीक्षण किया जाता है. औचक निरीक्षण में सही पाये जाने पर ही बोर्ड की ओर से प्रोविजनल एफिलिएशन स्कूल को दिया जाता हैं. औचक निरीक्षण में स्टूडेंट्स की संख्या, टीचर्स की संख्या, क्लास रूम की संख्या, रेगुलर क्लासेज, लैब, लाइब्रेरी के साथ तमाम इंफ्रांस्ट्रक्चर आदि को देखा जाता है. सीबीएसइ की माने तो 2015 में जिन स्कूलों का प्रोविजनल एफिलिएशन समाप्त हो रहा है. उन स्कूलों का औचक निरीक्षण 2014 अक्टूबर से मार्च 2015 तक किया जा रहा है. ऐसे में अप्रैल के सेशन शुरू होने से पहले सीबीएसइ वेबसाइट पर सूची को डाल देगी जिसमें जिन स्कूलों को एफिलिएशन मिला होगा और जिनको एफिलिएशन नहीं मिला होगा, दोनों की स्कूल शामिल होंगे.

सीबीएसइ के पास भेजे गये रिपोर्ट में 149 सेक्शन चलते है डीएवी बीएसइबी
क्लास          -    सेक्शन
पहला क्लास     -    02 सेक्शन
दूसरा क्लास    -   03 सेक्शन
 तीसरा क्लास      -    03 सेक्शन
 चौथा क्लास      -    05 सेक्शन
पांचवीं क्लास    -  05 सेक्शन
छठा क्लास    -  09 सेक्शन
सातवीं क्लास  -  11 सेक्शन
आठवीं क्लास  -  14 सेक्शन
नवमीं क्लास   -  12 सेक्शन
दसवीं क्लास   -  15 सेक्शन
ग्यारहवीं क्लास   -  38 सेक्शन
बारहवीं क्लास   - 32 सेक्शन
नोट  - सेक्शन की यह जानकारी जांच के दौरान स्कूल के रजिस्टर से प्राप्त किया गया था

 प्लस टू में स्टूडेंट्स की संख्या के अनुसार ये होना चाहिए इन्फ्रास्ट्रर
क्लास रूम   - 162
साइंस लैब  - 5
कम्प्यूटर साइंस लैब  - 3
मैथ लैब  - 1
कम्प्यूटर लैब  - 1
जोगरफी लैब  - 1
लाइब्रेरी   - 2
स्पोर्ट्स रूम   - 2 

No comments:

Post a Comment