ड ीएवी बीएसइबी में11वीं में नामांकन से लेकर परीक्षा तक चलता खेल
- जरूरत से अधिक नामांकन लेने के बाद स्कूल से निकाल दिये जाते है स्टूडेंट्स
- 2014 में 88 परीक्षार्थी को 11वीं में कर दिया गया फेल तो 2013 में 25 छात्र को फर्जी बता कर स्कूल से निकाल दिया गया
संवाददाता, पटना
केस वन - सन्नी कुमार सेंट कैरेंस हाई स्कूल, गोला रोड से 10वीं बोर्ड की परीक्षा पास किया. आइसीएसइ बोर्ड का छात्र सन्नी कुमार ने 90.3 फीसदी अंक 10वीं बोर्ड में प्राप्त किये. मैथेमेटिक्स विषय में सन्नी कुमार को ग्रेड ए प्लस आया था. सन्नी ने स्कूल के एंट्रांस परीक्षा में अच्छे अंक लायें और उसका नामांकन डीएवी बीएसइबी में हो गया. नामांकन के दो महीने के बाद सन्नी कुमार को स्कूल से फर्जी 10वीं का सर्टिफिकेट होने का आरोप लगा कर निकाल दिया गया.
केस टू - सुभव आर्या सेंट कैरेंस हाई स्कूल, गोला रोड का आइसीएसइ बोर्ड का छात्र था. 10वी परीक्षा 2013 में देने के बाद सुभव आर्या ने भी डीएवी बीएसइबी में 11वीं में नामांकन के लिए आवेदन दिया. आवेदन के बाद सुभव आर्या एंट्रांस परीक्षा में अच्छे अंक से पास किया और उसका नामांकन हो गया. सुभव आर्या को 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 91.6 फीसदी अंक आयें थे. सुभव आर्या को मैथ में ग्रेड ए आया था. सुभव आर्या ने दो महीने क्लास किया. इंटर्नल असेसमेंट में अच्छे अंक भी आयें. लेकिन बाद में स्कूल ने 10वीं का फर्जी सर्टिफिकेट होने का आरोप लगा कर स्कूल से निकाल दिया.
- 25 स्टूडेंट्स को निकाल दिया स्कूल से
सन्नी कुमार और सुभव आर्या जैसे कुल 25 स्टूडेंट्स थे, जिनके साथ डीएवी बीएसइबी में यह घटना घटी. अगस्त 2013 के पहले सप्ताह में डीएवी बीएसइबी से अचानक से 25 स्टूडेंट्स को निकाल दिया गया. इसके बाद तमाम अभिभावक ने स्कूल से स्टूडेंट्स का टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) मांगा तो अभिभावकों को स्कूल ने 12 अगस्त 2013 को स्कूल बुलाया. 12 अगस्त को जब तमाम अभिभावक स्टूडेंट्स के साथ स्कूल आयें, तो स्कूल का मुख्य गेट बंद कर स्कूल प्रशासन ने प्राचार्य के इशारे पर 25 स्टूडेंटस को लाठी से पीटा. अभिभावकों के साथ गलत हरकतें किया. अंत में अभिभावक जैसे तैसे स्कूल से जान बचाकर निकले और शास्त्रीनगर थाना में प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद के खिलाफ मामला दर्ज करवाया. 307/13 नाम से प्राथमिकी दर्ज हुआ. थाने की ओर से प्रिंसिपल से पूछताछ की गयी. लेकिन मामला बाद में खत्म हो गया.
- नहीं मिला नामांकन
स्कूल ने आरोप लगाया कि इन 25 स्टूडेंट्स के मार्क्स सीट फर्जी हैं. स्टूडेंट्स ने जो मार्क्स सीट स्कूल के पास जमा किया वो फर्जी स्कूल के हैं. आइसीएसइ बोर्ड के सेंट कैरेंस हाई स्कूल को स्कूल नहीं मानता है. अभिभावकों ने शास्त्रीनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाये थे. प्राथमिकी के अनुसार अगस्त में बच्चे को स्कूल से निकाल दिया गया. तो अब बच्चे का नामांकन भी कहीं नहीं होगा. नामांकन के समय आवेदन के साथ ही मार्क्ससीट दिया गया था. आइसीएसइ बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूल का मार्क्ससीट है. इन 25 स्टूडेंट्स ने बाद में कई दूसरे स्कूल में 11वीं में नामांकन लेना चाहा. लेकिन उनका नामांकन कहीं पर नहीं हुआ. अंत में कई स्टूडेंट ओपेन स्क्रूलिंग से प्लस टू किया तो कई स्टूडेट्स प्राइवेट कैंडिडेंट्स के रूप में सीबीएसइ से 2014 में प्लस टू की परीक्षा में शामिल हुए.
- 11वीं में कर दिया फेल
प्रिया रॉय 12वीं बोर्ड की परीक्षा नहीं दे पायी. डीएवी बीएसइबी की छात्र प्रिया रॉय को 11वीं में एक विषय में फेल कर मोटी रकम देने के बाद परीक्षा में शामिल होने का शर्त रखा गया था. प्रिया रॉय कोई पहली या अंतिम छात्र नहीं है जिसके साथ डीएवी बीएसइबी में ऐसा हुआ हो, प्रिया रॉय की तरह हर साल कई ऐसे छात्र है तो 11वीं में फेल कर दिये जाते है. एक साल तक उन्हें स्कूल में रखा जाता है. फिर फेल कर स्कूल से निकाल दिया जाता है. कुछ ऐसा ही घटना 2010-11 सत्र में दिल्ली पब्लिक स्कूल से 10वीं परीक्षा पास कर कॉसिक के साथ भी हुआ. कॉसिक ने प्लस टू में डीएवी बीएसइबी में नामांकन लिया. 56.2 मार्क्स से कॉसिक 11वीं में पास किया. लेकिन फिजिक्स थ्योरी में 12 अंक आने के कारण कॉसिक को स्कूल ने इस बेसिस पर निकाल दिया कि वो 11वीं में फेल कर गया है. कॉसिक ने कई दूसरे स्कूल में नामांकन लेना चाहा. लेकिन कहीं पर उसका नामांकन नहीं हुआ.
- प्रमोट कमेटी नहीं है डीएवी बीएसइबी में
सीबीएसइ स्कूलों में प्लस टू लेवल पर एक प्रमोट कमेटी चलायी जाती है. इस कमेटी का काम यह होता है कि जो छात्र 11वीं में फेल कर जाते है तो उनके रिजल्ट को देखना और फिर उन्हें 12वीं के लिए प्रमोट करना होता है. लेकिन डीएवी बीएसइबी में यह प्रमोट कमेटी काम नहीं करती है. डीएवी के सूत्रों की माने तो स्कूल पहले से ही डिसाइड कर लेता है कि उसे 12वीं में क्या करना है. प्रमोट कमेटी किसी भी तरह का काम नहीं करती है.
- जरूरत से अधिक नामांकन लेने के बाद स्कूल से निकाल दिये जाते है स्टूडेंट्स
- 2014 में 88 परीक्षार्थी को 11वीं में कर दिया गया फेल तो 2013 में 25 छात्र को फर्जी बता कर स्कूल से निकाल दिया गया
संवाददाता, पटना
केस वन - सन्नी कुमार सेंट कैरेंस हाई स्कूल, गोला रोड से 10वीं बोर्ड की परीक्षा पास किया. आइसीएसइ बोर्ड का छात्र सन्नी कुमार ने 90.3 फीसदी अंक 10वीं बोर्ड में प्राप्त किये. मैथेमेटिक्स विषय में सन्नी कुमार को ग्रेड ए प्लस आया था. सन्नी ने स्कूल के एंट्रांस परीक्षा में अच्छे अंक लायें और उसका नामांकन डीएवी बीएसइबी में हो गया. नामांकन के दो महीने के बाद सन्नी कुमार को स्कूल से फर्जी 10वीं का सर्टिफिकेट होने का आरोप लगा कर निकाल दिया गया.
केस टू - सुभव आर्या सेंट कैरेंस हाई स्कूल, गोला रोड का आइसीएसइ बोर्ड का छात्र था. 10वी परीक्षा 2013 में देने के बाद सुभव आर्या ने भी डीएवी बीएसइबी में 11वीं में नामांकन के लिए आवेदन दिया. आवेदन के बाद सुभव आर्या एंट्रांस परीक्षा में अच्छे अंक से पास किया और उसका नामांकन हो गया. सुभव आर्या को 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 91.6 फीसदी अंक आयें थे. सुभव आर्या को मैथ में ग्रेड ए आया था. सुभव आर्या ने दो महीने क्लास किया. इंटर्नल असेसमेंट में अच्छे अंक भी आयें. लेकिन बाद में स्कूल ने 10वीं का फर्जी सर्टिफिकेट होने का आरोप लगा कर स्कूल से निकाल दिया.
- 25 स्टूडेंट्स को निकाल दिया स्कूल से
सन्नी कुमार और सुभव आर्या जैसे कुल 25 स्टूडेंट्स थे, जिनके साथ डीएवी बीएसइबी में यह घटना घटी. अगस्त 2013 के पहले सप्ताह में डीएवी बीएसइबी से अचानक से 25 स्टूडेंट्स को निकाल दिया गया. इसके बाद तमाम अभिभावक ने स्कूल से स्टूडेंट्स का टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) मांगा तो अभिभावकों को स्कूल ने 12 अगस्त 2013 को स्कूल बुलाया. 12 अगस्त को जब तमाम अभिभावक स्टूडेंट्स के साथ स्कूल आयें, तो स्कूल का मुख्य गेट बंद कर स्कूल प्रशासन ने प्राचार्य के इशारे पर 25 स्टूडेंटस को लाठी से पीटा. अभिभावकों के साथ गलत हरकतें किया. अंत में अभिभावक जैसे तैसे स्कूल से जान बचाकर निकले और शास्त्रीनगर थाना में प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद के खिलाफ मामला दर्ज करवाया. 307/13 नाम से प्राथमिकी दर्ज हुआ. थाने की ओर से प्रिंसिपल से पूछताछ की गयी. लेकिन मामला बाद में खत्म हो गया.
- नहीं मिला नामांकन
स्कूल ने आरोप लगाया कि इन 25 स्टूडेंट्स के मार्क्स सीट फर्जी हैं. स्टूडेंट्स ने जो मार्क्स सीट स्कूल के पास जमा किया वो फर्जी स्कूल के हैं. आइसीएसइ बोर्ड के सेंट कैरेंस हाई स्कूल को स्कूल नहीं मानता है. अभिभावकों ने शास्त्रीनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाये थे. प्राथमिकी के अनुसार अगस्त में बच्चे को स्कूल से निकाल दिया गया. तो अब बच्चे का नामांकन भी कहीं नहीं होगा. नामांकन के समय आवेदन के साथ ही मार्क्ससीट दिया गया था. आइसीएसइ बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूल का मार्क्ससीट है. इन 25 स्टूडेंट्स ने बाद में कई दूसरे स्कूल में 11वीं में नामांकन लेना चाहा. लेकिन उनका नामांकन कहीं पर नहीं हुआ. अंत में कई स्टूडेंट ओपेन स्क्रूलिंग से प्लस टू किया तो कई स्टूडेट्स प्राइवेट कैंडिडेंट्स के रूप में सीबीएसइ से 2014 में प्लस टू की परीक्षा में शामिल हुए.
- 11वीं में कर दिया फेल
प्रिया रॉय 12वीं बोर्ड की परीक्षा नहीं दे पायी. डीएवी बीएसइबी की छात्र प्रिया रॉय को 11वीं में एक विषय में फेल कर मोटी रकम देने के बाद परीक्षा में शामिल होने का शर्त रखा गया था. प्रिया रॉय कोई पहली या अंतिम छात्र नहीं है जिसके साथ डीएवी बीएसइबी में ऐसा हुआ हो, प्रिया रॉय की तरह हर साल कई ऐसे छात्र है तो 11वीं में फेल कर दिये जाते है. एक साल तक उन्हें स्कूल में रखा जाता है. फिर फेल कर स्कूल से निकाल दिया जाता है. कुछ ऐसा ही घटना 2010-11 सत्र में दिल्ली पब्लिक स्कूल से 10वीं परीक्षा पास कर कॉसिक के साथ भी हुआ. कॉसिक ने प्लस टू में डीएवी बीएसइबी में नामांकन लिया. 56.2 मार्क्स से कॉसिक 11वीं में पास किया. लेकिन फिजिक्स थ्योरी में 12 अंक आने के कारण कॉसिक को स्कूल ने इस बेसिस पर निकाल दिया कि वो 11वीं में फेल कर गया है. कॉसिक ने कई दूसरे स्कूल में नामांकन लेना चाहा. लेकिन कहीं पर उसका नामांकन नहीं हुआ.
- प्रमोट कमेटी नहीं है डीएवी बीएसइबी में
सीबीएसइ स्कूलों में प्लस टू लेवल पर एक प्रमोट कमेटी चलायी जाती है. इस कमेटी का काम यह होता है कि जो छात्र 11वीं में फेल कर जाते है तो उनके रिजल्ट को देखना और फिर उन्हें 12वीं के लिए प्रमोट करना होता है. लेकिन डीएवी बीएसइबी में यह प्रमोट कमेटी काम नहीं करती है. डीएवी के सूत्रों की माने तो स्कूल पहले से ही डिसाइड कर लेता है कि उसे 12वीं में क्या करना है. प्रमोट कमेटी किसी भी तरह का काम नहीं करती है.
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