Sunday, April 12, 2015

1759 छात्रों के लिए बिहार बोर्ड खर्च करता है 10 लाख

1759 छात्रों के लिए बिहार बोर्ड खर्च करता  है 10 लाख

- 1998 से चल रहा बिहार बोर्ड में वोकेशनल कोर्स
- अवेयरनेस की कमी और सर्टिफिकेट की मान्यता नहीं मिलने से घट रहें छात्र
संवाददाता, पटना
छात्रों में कमी आ रही है. लेकिन खर्च जस का तस है. स्कूल में पढ़ाई हो या ना हो, लेकिन परीक्षा के इंतजाम पूरा करना पड़ता है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के वोकेशनल कोर्स की लोकप्रियता हर साल कम होती जा रही है. छात्र अब बिहार बोर्ड से वोकेशनल कोर्स करना नहीं चाहते है, लेकिन बोर्ड परीक्षा की तैयारी में बोर्ड हर साल लाखों रुपये खर्च करता है. 2013 और 2014 सत्र की बात करें तो वोकेशनल कोर्स की परीक्षा और मूल्यांकन में समिति के 8 और 9 लाख रुपये खर्च हुए थे. वहीं अगर इस सत्र यानी 2015 की बात करें तो समिति ने इस बार वोकेशनल कोर्स पर 10 लाख रुपये खर्च कर रही हैं. समिति में 1998 से वोकेशनल कोर्स किया जा रहा है. शुरुआत में तो छात्र बढ़े, लेकिन अवेयरनेस की कमी और सर्टिफिकेट की मान्यता नहीं होने के कारण अब छात्र इन कोर्स में नामांकन नहीं लेते है.
- 27 कोर्स और 179 विषय
वोकेशनल कोर्स की परीक्षा की तैयारी में समिति को हर साल काफी मशक्कत करनी पड़ती है. वर्तमान में बिहार बोर्ड प्लस टू में 27 वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करवाता है. हर एक कोर्स में 6 सब्जेक्ट की पढ़ाई होती है. इन छह सब्जेक्ट के अलावा इंगलिश और हिंदी दो कंप्लसरी पेपर लेने होते है. इसके अलावा 15 पेपर ऐसे है जिसमें से एक पेपर हर वोकेशनल कोर्स करने वाले छात्रों को पढ़ना पड़ता है. समिति की माने तो स्कूल में पढ़ाई हो या ना हो, लेकिन इन तमाम विषयों के प्रश्न पत्र को तैयार करना पड़ता है. वोकेशनल कोर्स के प्रैक्टिकल पर समिति का विशेष खर्च होता हैं.
- प्लस टू के बराबर है बस मान्यता
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से वोकेशनल कोर्स को अभी भी बस प्लस टू के बराबर की ही मान्यता मिली हुई है. कोबसे (काउंसिल ऑफ बोडर्स ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया) से अभी भी इसे मान्यता नहीं दिया गया है. वोकेशनल कोर्स भले छात्र करते है. वोकेशनल कोर्स का सर्टिफिकेट भी बोर्ड द्वारा उन्हें प्राप्त होता है. लेकिन इसे भारत सरकार के वोकेशनल कोर्स की मान्यता नहीं मिली हुई हैं.
- राजस्थान के साथ कई स्टेट में नहीं मिलती नौकरी
बिहार बोर्ड से वोकेशनल कोर्स की डिग्री लेकर दूसरे स्टेट में जाने वालें छात्रों को खासा परेशानी होती है. समिति की माने तो कई ऐसे केस आयें है जिसमें बोर्ड के वोकेशनल कोर्स की मान्यता का वेरिफिकेशन किया जाता है. जब भी कोई स्टेट से ऐसे मैटर आते है तो हम उसे तुरंत वेरिफिकेशन करके भेजते है. समिति सूत्रों की माने तो बिहार बोर्ड से वोकेशनल कोर्स बस बिहार बोर्ड से मान्यता प्राप्त है. इसके लिए भारत सरकार के वोकेशनल कोर्स से मान्यता प्राप्त नहीं है. इस कारण खासा परेशानी छात्रों को उठाना पड़ता है.

इन विषयों से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में होता है वोकेशनल कोर्स
ऑफिस मैनेजमेंट, लाइब्रेरी साइंस, एकाउंट एंड ऑडिटिंग, कंप्यूटर साइंस, ऑटो इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मल्टी हेल्थ वर्कर, नर्सिग, एग्रीकल्चर फार्म मशीन, इंलैंड फिजरीज, पाल्ट्री प्रोडक्शन, सेरिकल्चर, मेडिकल लैब टेक्निशियन, डायरी, कॉमन जर्म मेकिंग, बैंकिंग, स्ट्रेनोग्राफर, रेडियो, टीवी टेक्निशियन, हेल्थकेयर एंड ब्यूटीकल्चर, टेक्सटाइल एंड डिजाइन, फूड प्रिजविंग एंड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रिकल डोमेस्टिक एंड एप्रीयासेज, एक्स-रे, बेकरी, मिनिंग जीरोलॉजी, मैकेनिकल सर्विसिंग, सिल्क टेक्नोलॉजी

पिछले पांच साल में वोकेशनल कोर्स में छात्रों की घट रही संख्या
सत्र                -          छात्रों की संख्या
2009-10     -             2853
2010-11      -            2535      
2011-12      -            2241
2012-13      -           2102
2013-14     -           1861
2014 - 15  -           1759


कोट
हम कोशिश कर रहे है कि वोकेशनल कोर्स के प्रति छात्रों को अवेयर किया जायें. कई कोर्स है जिसमें नामांकन होता ही नहीं है. मान्यता भी लेने की कोशिश की जा रही है. ये तो सही है कि इस कोर्स की परीक्षा लेने में हमें काफी खर्च आते है. लेकिन इसका फायदा पूरी तरह से छात्रों को नहीं हो

श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

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