क्लास वन से 8वीं तक सीबीएसइ गाइड लाइन पर चलेगी किताबें
- सीबीएसइ स्कूल अपनी मरजी से नहीं चला सकते है किताबें
- सीबीएसइ का एफिलिएशन चाहिए तो करना होगा इसका पालन
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) के एफिलिएशन के लिए स्कूलों को वहीं किताबें चलानी होगी, जो बोर्ड के गाइड लाइन में शामिल होगा. सीबीएसइ की ओर से यह गाइड लाइन स्कूलों को जारी कर दिया गया हैं. क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड क्लास वन से 8वीं तक के स्कूलों में किस तरह की किताबें चलायी जायें, इसके लिए निर्देश जारी किया है. जो स्कूल सीबीएसइ के गाइड लाइन के अनुसार किताबें चलायेगी, उन्हें सीबीएसइ के एफिलिएशन मिलने में आसानी होगी. बोर्ड के अनुसार इन क्लासों में चलने वाले सिलेबस को एनसीइआरटी पर फोकस किया जायें.
- टेक्स्ट बुक पर हो अधिक फोकस
नेशनल कॉलिकुलम फ्रेमवर्क 2005 के अनुसार स्कूल में टेक्स्ट बुक पर अधिक फोकस होना चाहिए. स्कूल जो भी बुक को सेलेक्ट करें, उसमें क्वालिटी का ध्यान रखा जायें. सीबीएसइ बाइ लॉज 15.1(डी) के अनुसार स्कूलों को एनसीइआरटी के बेसिक कॉलिकुलम के सिलेबस को ध्यान में रखना होगा.
- एफिलिएशन के समय होगी इसकी जांच
अब जब कोई भी स्कूल सीबीएसइ के पास एफिलिएशन के लिए अप्लाई करेंगे तो उनकी जांच में अब किताबें भी शामिल होंगी. सीबीएसइ के अनुसार जिन स्कूलों में सीबीएसइ के गाइड लाइन के अनुसार बुक को स्कूल में चलायेगी, उसे एफिलिएशन मिलने में मदद मिल सकती है.
- स्कूल में नहीं चलायें इंसाइक्लोपीडिया
सीबीएसइ के अनुसार स्कूल में इंसाइक्लोपीडिया से पढ़ाई बंद किया जायें. क्योंकि इंसाइक्लोपीडिया में जो भी जानकारी होती हैं, उसे स्टूडेंट्स के लिए याद करना और रखना दोनों की कठिन हैं. इंसाइक्लोपीडिया में काफी संख्या में जानकारी दी गयी होती है. जिसे याद रखना बच्चों के लिए संभव नहीं हो पाता है. सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से इंसाइक्लोपीडिया को हर क्लास से हटाने का निर्देश दिया है.
- हर क्लास में हो जेंडर की पढ़ाई
सीबीएसइ के एफिलिएशन के लिए हर स्कूलों को अब जेंडर की पढ़ाई करवानी होगी. इसके अलावा प्रायमरी लेवल के स्टूडेंट्स के लिए विशेष शिक्षा की व्यवस्था की जायेगी. गुड टच बैड टच आदि की जानकारी देने के अलावा उनके लिए क्या अच्छा और क्या बुरा है, इसे भी बताना होगा. टेक्स्ट बुक में एथिकली, संस्कार, वातावरण, संविधान आदि का ख्याल रखना चाहिए.
सीबीएसइ ने किताबों में इन कंटेंट रखने की कहीं बातें
- एक्टिविटी बेस्ड लर्निग
- चाइल्ड डेवलपमेंट बुक
- चाइल्ड सेंटर्ड एजुकेशन
- एक्सपेरियेंस ऑफ चिल्ड्रेन
- सोशल कल्चरल संबंधित
- इंवायरमेंटली
कोट
क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए यह किया जा रहा है. अभी तक स्कूल अपनी मरजी से किताबें चला रहे थे. इससे किताबों की संख्या काफी रहती थी. बोझ भी स्टूडेंट्स पर अधिक पड़ रहा था. लेकिन इस सिस्टम से किताबें को क्लास में शुरू किया जायेगा तो कम किताबों में अधिक जानकारी स्टूडेंट्स को मिल जायेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना
- सीबीएसइ स्कूल अपनी मरजी से नहीं चला सकते है किताबें
- सीबीएसइ का एफिलिएशन चाहिए तो करना होगा इसका पालन
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) के एफिलिएशन के लिए स्कूलों को वहीं किताबें चलानी होगी, जो बोर्ड के गाइड लाइन में शामिल होगा. सीबीएसइ की ओर से यह गाइड लाइन स्कूलों को जारी कर दिया गया हैं. क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड क्लास वन से 8वीं तक के स्कूलों में किस तरह की किताबें चलायी जायें, इसके लिए निर्देश जारी किया है. जो स्कूल सीबीएसइ के गाइड लाइन के अनुसार किताबें चलायेगी, उन्हें सीबीएसइ के एफिलिएशन मिलने में आसानी होगी. बोर्ड के अनुसार इन क्लासों में चलने वाले सिलेबस को एनसीइआरटी पर फोकस किया जायें.
- टेक्स्ट बुक पर हो अधिक फोकस
नेशनल कॉलिकुलम फ्रेमवर्क 2005 के अनुसार स्कूल में टेक्स्ट बुक पर अधिक फोकस होना चाहिए. स्कूल जो भी बुक को सेलेक्ट करें, उसमें क्वालिटी का ध्यान रखा जायें. सीबीएसइ बाइ लॉज 15.1(डी) के अनुसार स्कूलों को एनसीइआरटी के बेसिक कॉलिकुलम के सिलेबस को ध्यान में रखना होगा.
- एफिलिएशन के समय होगी इसकी जांच
अब जब कोई भी स्कूल सीबीएसइ के पास एफिलिएशन के लिए अप्लाई करेंगे तो उनकी जांच में अब किताबें भी शामिल होंगी. सीबीएसइ के अनुसार जिन स्कूलों में सीबीएसइ के गाइड लाइन के अनुसार बुक को स्कूल में चलायेगी, उसे एफिलिएशन मिलने में मदद मिल सकती है.
- स्कूल में नहीं चलायें इंसाइक्लोपीडिया
सीबीएसइ के अनुसार स्कूल में इंसाइक्लोपीडिया से पढ़ाई बंद किया जायें. क्योंकि इंसाइक्लोपीडिया में जो भी जानकारी होती हैं, उसे स्टूडेंट्स के लिए याद करना और रखना दोनों की कठिन हैं. इंसाइक्लोपीडिया में काफी संख्या में जानकारी दी गयी होती है. जिसे याद रखना बच्चों के लिए संभव नहीं हो पाता है. सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से इंसाइक्लोपीडिया को हर क्लास से हटाने का निर्देश दिया है.
- हर क्लास में हो जेंडर की पढ़ाई
सीबीएसइ के एफिलिएशन के लिए हर स्कूलों को अब जेंडर की पढ़ाई करवानी होगी. इसके अलावा प्रायमरी लेवल के स्टूडेंट्स के लिए विशेष शिक्षा की व्यवस्था की जायेगी. गुड टच बैड टच आदि की जानकारी देने के अलावा उनके लिए क्या अच्छा और क्या बुरा है, इसे भी बताना होगा. टेक्स्ट बुक में एथिकली, संस्कार, वातावरण, संविधान आदि का ख्याल रखना चाहिए.
सीबीएसइ ने किताबों में इन कंटेंट रखने की कहीं बातें
- एक्टिविटी बेस्ड लर्निग
- चाइल्ड डेवलपमेंट बुक
- चाइल्ड सेंटर्ड एजुकेशन
- एक्सपेरियेंस ऑफ चिल्ड्रेन
- सोशल कल्चरल संबंधित
- इंवायरमेंटली
कोट
क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए यह किया जा रहा है. अभी तक स्कूल अपनी मरजी से किताबें चला रहे थे. इससे किताबों की संख्या काफी रहती थी. बोझ भी स्टूडेंट्स पर अधिक पड़ रहा था. लेकिन इस सिस्टम से किताबें को क्लास में शुरू किया जायेगा तो कम किताबों में अधिक जानकारी स्टूडेंट्स को मिल जायेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना
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