चार साल में शुरू नहीं हो सका बिहार बोर्ड में सोलर सिस्टम प्रोजेक्ट
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का सोलर सिस्टम प्रोजेक्ट गया ठंडे बस्ते में
- सोलर सिस्टम से तमाम स्कूल होता कंप्यूटरीकृत
संवाददाता, पटना
चार साल बीत गये, लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का मास्टर प्रोजेक्ट प्लान सोलर सिस्टम शुरू नहीं हो सका. समिति द्वारा जनवरी 2012 में इस प्रोजेक्ट की शुरूआत की गयी थी. इसके लिए 23 करोड़ रूपये भी समिति द्वारा बजट में रखा गया. लेकिन यह कागज तक ही सिमट तक रह गया. हर साल बोर्ड के बजट में इस प्रोजेक्ट पर पैसे खर्च करने की सहमति तो बनती है, लेकिन हर बार यह ठंडे बस्ते में चला जाता हैं. अभी तक शुरूआत भी नहीं हो पायी है. 50 करोड़ का यह प्रोजेक्ट 2014 के बजट सत्र में मुख्य रूप से शामिल किया गया. लेकिन यह फिर भी शुरू नहीं हो सका. अब इसे दुबारा 2015-16 बजट सत्र में रखे जाने की उम्मीद की जा रही हैं. नये अध्यक्ष और सचिव के आने से इस साल इस प्रोजेक्ट के शुरू किये जाने की योजना बनायी जा रही है.
- राज्य सरकार को देना था 10 फीसदी
केंद्र सरकार का यह नेशनल प्रोजेक्ट तमाम राज्य में स्टेट बोर्ड में शुरू किया गया. इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 30 परसेंट और राज्य सरकार की ओर से 10 परसेंट ग्रांट देना था. समिति की ओर से इसमें 10 परसेंट का ग्रांट लगाना हैं. समिति की ओर से बनायें गये बजट में 23 करोड़ रूपये सोलर सिस्टम लगाने के लिए रखा गया. लेकिन राज्य सरकार की ओर से ग्रांट नहीं मिलने के कारण यह प्रोजेक्ट शुरू भी नहीं हो सका. इस प्रोजेक्ट के तहत बोर्ड, काउंसिल और बिहार के तमाम उच्च माध्यमिक विद्यालय में सोलर सिस्टम लगाना शामिल हैं.
- सुदूर गांव के स्कूलों में भी होता कंप्यूटर
आज बिहार बोर्ड से संबंधित काफी ऐसे स्कूल है जहां पर कंप्यूटर का नामो निशां नहीं है. इन स्कूलों में पढ़ने वाले तमाम बच्चे कंप्यूटर की एबीसी तक नहीं जाते है. केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत हर छात्र को कंप्यूटर की जानकारी देनी थी. सोलर सिस्टम प्रोजेक्ट के शुरू होने से हर स्कूलों में आसानी से कंप्यूटराइजेशन को शुरू किया जा सकता था. हर स्कूलों में कंप्यूटर लगाना संभव हो सकता था. समिति से मिली जानकारी के अनुसार कई जगहों पर बिजली नहीं होने से स्कूलों में कंप्यूटर लगाना संभव नहीं सकता है. इस कारण सोलर सिस्टम को शुरू किया गया.
सोलर सिस्टम लगने से कुछ ऐसा होता बोर्ड को फायदा
- बोर्ड को पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत किया जा सकता
- बोर्ड का सारा काम कंप्यूटर से करना आसान हो जाता
- अभी कंप्यूटर पर होने वाले सारे काम जेनरेटर पर चलते है. इससे बोर्ड को काफी खर्च वहन करना पड़ रहा है
- जेनरेटर पर होने वाले अतिरिक्त खर्च बंद हो जाता
- तमाम स्कूल सोलर सिस्टम के माध्यम से बोर्ड से जुड़ जाते.
- स्कूल के सोलर सिस्टम से जुड़ने से फाइन का स्कूल भेजना और वहां से लाने जैसे मैन्यूअल काम बोर्ड बंद कर देता
- सारा कुछ ऑन लाइन करने से रिजल्ट आदि निकलने में गलतियां कम होती
- सुदूर गांव के भी स्कूलों तक कंप्यूटर पहुंच पाता
इन मदों में पैसा हर साल रह जाते है जस के तस
सोलर सिस्टम - 50 करोड़
कंस्ट्रक्शन ऑफ एक्जामिनेशन हॉल - 10 करोड़
मशीन एंड इक्यूपमेंट - 2 करोड़
गाड़ियों की खरीदारी - 40 करोड़
फर्नीचर - 60 करोड़
बिल्डिंग इनोवेशन - 6 करोड़ 5 लाख
कोट
इस प्रोजेक्ट की शुरूआत जनवरी 2012 में ही किया गया. लेकिन इसे शुरू नहीं किया जा सका. सोलर सिस्टम लगने से बोर्ड के कामों में काफी सहूलियत होती. हर काम काफी फास्ट हो जाता और स्कूल से काफी काम ऑन लाइन करने में मदद मिलती. लेकिन इसे अभी तक शुरू नहीं किया जा सका हैं.
राजमणि प्रसाद, पूर्व अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
अभी सोलर सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं है. मैट्रिक की परीक्षा खत्म हो जाने के बाद इसे देखते है. बोर्ड के लिए अगर यह बेहतर है तो हम जरूर इस पर काम करेंगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का सोलर सिस्टम प्रोजेक्ट गया ठंडे बस्ते में
- सोलर सिस्टम से तमाम स्कूल होता कंप्यूटरीकृत
संवाददाता, पटना
चार साल बीत गये, लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का मास्टर प्रोजेक्ट प्लान सोलर सिस्टम शुरू नहीं हो सका. समिति द्वारा जनवरी 2012 में इस प्रोजेक्ट की शुरूआत की गयी थी. इसके लिए 23 करोड़ रूपये भी समिति द्वारा बजट में रखा गया. लेकिन यह कागज तक ही सिमट तक रह गया. हर साल बोर्ड के बजट में इस प्रोजेक्ट पर पैसे खर्च करने की सहमति तो बनती है, लेकिन हर बार यह ठंडे बस्ते में चला जाता हैं. अभी तक शुरूआत भी नहीं हो पायी है. 50 करोड़ का यह प्रोजेक्ट 2014 के बजट सत्र में मुख्य रूप से शामिल किया गया. लेकिन यह फिर भी शुरू नहीं हो सका. अब इसे दुबारा 2015-16 बजट सत्र में रखे जाने की उम्मीद की जा रही हैं. नये अध्यक्ष और सचिव के आने से इस साल इस प्रोजेक्ट के शुरू किये जाने की योजना बनायी जा रही है.
- राज्य सरकार को देना था 10 फीसदी
केंद्र सरकार का यह नेशनल प्रोजेक्ट तमाम राज्य में स्टेट बोर्ड में शुरू किया गया. इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 30 परसेंट और राज्य सरकार की ओर से 10 परसेंट ग्रांट देना था. समिति की ओर से इसमें 10 परसेंट का ग्रांट लगाना हैं. समिति की ओर से बनायें गये बजट में 23 करोड़ रूपये सोलर सिस्टम लगाने के लिए रखा गया. लेकिन राज्य सरकार की ओर से ग्रांट नहीं मिलने के कारण यह प्रोजेक्ट शुरू भी नहीं हो सका. इस प्रोजेक्ट के तहत बोर्ड, काउंसिल और बिहार के तमाम उच्च माध्यमिक विद्यालय में सोलर सिस्टम लगाना शामिल हैं.
- सुदूर गांव के स्कूलों में भी होता कंप्यूटर
आज बिहार बोर्ड से संबंधित काफी ऐसे स्कूल है जहां पर कंप्यूटर का नामो निशां नहीं है. इन स्कूलों में पढ़ने वाले तमाम बच्चे कंप्यूटर की एबीसी तक नहीं जाते है. केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत हर छात्र को कंप्यूटर की जानकारी देनी थी. सोलर सिस्टम प्रोजेक्ट के शुरू होने से हर स्कूलों में आसानी से कंप्यूटराइजेशन को शुरू किया जा सकता था. हर स्कूलों में कंप्यूटर लगाना संभव हो सकता था. समिति से मिली जानकारी के अनुसार कई जगहों पर बिजली नहीं होने से स्कूलों में कंप्यूटर लगाना संभव नहीं सकता है. इस कारण सोलर सिस्टम को शुरू किया गया.
सोलर सिस्टम लगने से कुछ ऐसा होता बोर्ड को फायदा
- बोर्ड को पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत किया जा सकता
- बोर्ड का सारा काम कंप्यूटर से करना आसान हो जाता
- अभी कंप्यूटर पर होने वाले सारे काम जेनरेटर पर चलते है. इससे बोर्ड को काफी खर्च वहन करना पड़ रहा है
- जेनरेटर पर होने वाले अतिरिक्त खर्च बंद हो जाता
- तमाम स्कूल सोलर सिस्टम के माध्यम से बोर्ड से जुड़ जाते.
- स्कूल के सोलर सिस्टम से जुड़ने से फाइन का स्कूल भेजना और वहां से लाने जैसे मैन्यूअल काम बोर्ड बंद कर देता
- सारा कुछ ऑन लाइन करने से रिजल्ट आदि निकलने में गलतियां कम होती
- सुदूर गांव के भी स्कूलों तक कंप्यूटर पहुंच पाता
इन मदों में पैसा हर साल रह जाते है जस के तस
सोलर सिस्टम - 50 करोड़
कंस्ट्रक्शन ऑफ एक्जामिनेशन हॉल - 10 करोड़
मशीन एंड इक्यूपमेंट - 2 करोड़
गाड़ियों की खरीदारी - 40 करोड़
फर्नीचर - 60 करोड़
बिल्डिंग इनोवेशन - 6 करोड़ 5 लाख
कोट
इस प्रोजेक्ट की शुरूआत जनवरी 2012 में ही किया गया. लेकिन इसे शुरू नहीं किया जा सका. सोलर सिस्टम लगने से बोर्ड के कामों में काफी सहूलियत होती. हर काम काफी फास्ट हो जाता और स्कूल से काफी काम ऑन लाइन करने में मदद मिलती. लेकिन इसे अभी तक शुरू नहीं किया जा सका हैं.
राजमणि प्रसाद, पूर्व अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
अभी सोलर सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं है. मैट्रिक की परीक्षा खत्म हो जाने के बाद इसे देखते है. बोर्ड के लिए अगर यह बेहतर है तो हम जरूर इस पर काम करेंगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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