उर्दू टीइटी अभ्यर्थी की एक ही मांग, जल्दी करों नियोजन
- 2013 में किये पास, अभी तक नौकरी नहीं
- उर्दू और बांग्ला टीइटी अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति को लेकर किया प्र्दशन
संवाददाता, पटना
तीन साल हो गये, अभी तक शिक्षक के पद पर नियुक्त नहीं किये गये है. धरना और अनशन किया, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला. यह हाल उर्दू और बांग्ला टीइटी अभ्यर्थी का है. अक्टूबर 2013 में परीक्षा और दिसंबर 2013 में रिजल्ट आ गया, लेकिन नियुक्त नहीं किया गया. नियुक्ति की मांग पूरी हो, इसको लेकर ऑल बिहार उर्दू टीइटी संघ की ओर से शांति मार्च बुधवार को निकाला गया. कारगिल चौक से आर ब्लॉक तक शांति मार्च निकालने की योजना थी. उसके बाद अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाती. लेकिन डाक बंगला चौराहे पर पुलिस के साथ झड़प हो जाने के कारण मार्च वहीं पर खत्म हो गया. इस संबंध में संघ की उपाध्यक्ष रजिया कमर ने बताया कि हम लोग शांति मार्च निकाल रहे थे. पुलिस के साथ थोड़ी झड़प होने के बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया. पांच महिला अभ्यर्थी पर पुलिस ने लाठी बरसाया. लाठी चार्ज में महिला उर्दू टीइटी घायल हो गयी. बाद में उन्हें हम लोग पीएमसीएच लेकर गये.
- 12 मार्च से 10 अप्रैल तक मिला बस फैसले की तारीख
रजिया कमर ने बताया कि नियोजन को लेकर हाई कोट में केस चल रहा है. सरकारी वकील के नहीं आने के कारण 12 मार्च से अभी तक बस हमें तारीख की दी जा रही है. 12 मार्च को हाई कोर्ट में फैसला आने वाला था. लेकिन 12 मार्च को तिथि बढ़ा कर 17 मार्च कर दी गयी. 17 मार्च को तिथि बढ़ा कर 23 मार्च कर दिया गया. इसके बाद 31 मार्च और फिर 1 अप्रैल और फिर 3 अप्रैल को किया गया. 3 मार्च को भी कोई फैसला नहीं किया गया. 3 मार्च की तिथि बढ़ा कर अब 10 अप्रैल कर दिया गया है. रजिया कमर ने बताया कि हमारी एक ही मांग है कि 10 अप्रैल को हमारे लिए फैसला किया जायें ना कि अगली तारीख दी जायें. उस दिन सरकारी वकील को बुलाया जायें. इस बीच संघ की ओर से अनिश्चितकालीन हड़ताल आर ब्लॉक पर जारी रहेगा.
- 27 हजार उर्दू टीइटी का नियोजन हैं फंसा हुआ
बिहार उर्दू और बांग्ला स्पेशल टीइटी परीक्षा के तहत पूरे बिहार से 27 हजार अभ्यर्थी को सफलता मिली है. अक्टूबर 2013 में परीक्षा ली गयी और दिसंबर 2013 में रिजल्ट निकला. लेकिन अभी तक एक भी अभ्यर्थी को नियुक्त नहीं किया गया है. संघ के उपाध्यक्ष रजिया कमर ने बताया कि 21 जनवरी 2015 को हाई कोट ने उर्दू और बांग्ला टीचर के बहाली पर रोक लगा दिया है. इसके बाद हाई कोट ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से संशोधित रिजल्ट की घोषणा करने का आधार बताने को कहा. समिति की ओर से 30 जनवरी को हाई कोट को बताया कि जो 13 प्रश्न गलत थे, उसे ग्रेस दिया गया और इससे 11 हजार और रिजल्ट का प्रकाशन किया गया. इसके बाद हाई कोट ने सरकार से जवाब मांगा है. लेकिन सरकार की ओर से किसी तरह का जवाब नहीं देने के कारण अभी तक बहाली नहीं हो पायी है.
- दो बार में निकला था रिजल्ट
बिहार उर्दू एवं बांग्ला स्पेशनल टीइटी परीक्षा का रिजल्ट दो बार प्रकाशित किया गया. पहली बार रिजल्ट दिसंबर 2013 में निकाला गया. रिजल्ट घोषित होने के बाद पता चला कि प्रश्न पत्र में 13 प्रश्न के ऑप्सन गलत थे. इसके बाद फिर दुबारा रिजल्ट की घोषणा नंवबर 2014 में किया गया. इसमें 13 नंबर का ग्रेस अभ्यर्थी को दिया गया. इसके बाद लगभग 11 हजार अभ्यर्थी दुबारा सफल हुए. पहले चरण में 15 हजार 310 अभ्यर्थी को सफलता मिली थी. ज्ञात हो कि उर्दू एंव बांग्ला स्पेशल टीइटी परीक्षा में ढाई लाख के लगभग परीक्षार्थी शामिल हुए थे. अभ्यर्थी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बाकी अंसारी ने कहा कि जब तक सरकार हमारी मांगे को नहीं मानेगी तब तक हम अनशन पर बैठे रहेंगे.
- 2013 में किये पास, अभी तक नौकरी नहीं
- उर्दू और बांग्ला टीइटी अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति को लेकर किया प्र्दशन
संवाददाता, पटना
तीन साल हो गये, अभी तक शिक्षक के पद पर नियुक्त नहीं किये गये है. धरना और अनशन किया, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला. यह हाल उर्दू और बांग्ला टीइटी अभ्यर्थी का है. अक्टूबर 2013 में परीक्षा और दिसंबर 2013 में रिजल्ट आ गया, लेकिन नियुक्त नहीं किया गया. नियुक्ति की मांग पूरी हो, इसको लेकर ऑल बिहार उर्दू टीइटी संघ की ओर से शांति मार्च बुधवार को निकाला गया. कारगिल चौक से आर ब्लॉक तक शांति मार्च निकालने की योजना थी. उसके बाद अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाती. लेकिन डाक बंगला चौराहे पर पुलिस के साथ झड़प हो जाने के कारण मार्च वहीं पर खत्म हो गया. इस संबंध में संघ की उपाध्यक्ष रजिया कमर ने बताया कि हम लोग शांति मार्च निकाल रहे थे. पुलिस के साथ थोड़ी झड़प होने के बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया. पांच महिला अभ्यर्थी पर पुलिस ने लाठी बरसाया. लाठी चार्ज में महिला उर्दू टीइटी घायल हो गयी. बाद में उन्हें हम लोग पीएमसीएच लेकर गये.
- 12 मार्च से 10 अप्रैल तक मिला बस फैसले की तारीख
रजिया कमर ने बताया कि नियोजन को लेकर हाई कोट में केस चल रहा है. सरकारी वकील के नहीं आने के कारण 12 मार्च से अभी तक बस हमें तारीख की दी जा रही है. 12 मार्च को हाई कोर्ट में फैसला आने वाला था. लेकिन 12 मार्च को तिथि बढ़ा कर 17 मार्च कर दी गयी. 17 मार्च को तिथि बढ़ा कर 23 मार्च कर दिया गया. इसके बाद 31 मार्च और फिर 1 अप्रैल और फिर 3 अप्रैल को किया गया. 3 मार्च को भी कोई फैसला नहीं किया गया. 3 मार्च की तिथि बढ़ा कर अब 10 अप्रैल कर दिया गया है. रजिया कमर ने बताया कि हमारी एक ही मांग है कि 10 अप्रैल को हमारे लिए फैसला किया जायें ना कि अगली तारीख दी जायें. उस दिन सरकारी वकील को बुलाया जायें. इस बीच संघ की ओर से अनिश्चितकालीन हड़ताल आर ब्लॉक पर जारी रहेगा.
- 27 हजार उर्दू टीइटी का नियोजन हैं फंसा हुआ
बिहार उर्दू और बांग्ला स्पेशल टीइटी परीक्षा के तहत पूरे बिहार से 27 हजार अभ्यर्थी को सफलता मिली है. अक्टूबर 2013 में परीक्षा ली गयी और दिसंबर 2013 में रिजल्ट निकला. लेकिन अभी तक एक भी अभ्यर्थी को नियुक्त नहीं किया गया है. संघ के उपाध्यक्ष रजिया कमर ने बताया कि 21 जनवरी 2015 को हाई कोट ने उर्दू और बांग्ला टीचर के बहाली पर रोक लगा दिया है. इसके बाद हाई कोट ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से संशोधित रिजल्ट की घोषणा करने का आधार बताने को कहा. समिति की ओर से 30 जनवरी को हाई कोट को बताया कि जो 13 प्रश्न गलत थे, उसे ग्रेस दिया गया और इससे 11 हजार और रिजल्ट का प्रकाशन किया गया. इसके बाद हाई कोट ने सरकार से जवाब मांगा है. लेकिन सरकार की ओर से किसी तरह का जवाब नहीं देने के कारण अभी तक बहाली नहीं हो पायी है.
- दो बार में निकला था रिजल्ट
बिहार उर्दू एवं बांग्ला स्पेशनल टीइटी परीक्षा का रिजल्ट दो बार प्रकाशित किया गया. पहली बार रिजल्ट दिसंबर 2013 में निकाला गया. रिजल्ट घोषित होने के बाद पता चला कि प्रश्न पत्र में 13 प्रश्न के ऑप्सन गलत थे. इसके बाद फिर दुबारा रिजल्ट की घोषणा नंवबर 2014 में किया गया. इसमें 13 नंबर का ग्रेस अभ्यर्थी को दिया गया. इसके बाद लगभग 11 हजार अभ्यर्थी दुबारा सफल हुए. पहले चरण में 15 हजार 310 अभ्यर्थी को सफलता मिली थी. ज्ञात हो कि उर्दू एंव बांग्ला स्पेशल टीइटी परीक्षा में ढाई लाख के लगभग परीक्षार्थी शामिल हुए थे. अभ्यर्थी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बाकी अंसारी ने कहा कि जब तक सरकार हमारी मांगे को नहीं मानेगी तब तक हम अनशन पर बैठे रहेंगे.
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