Thursday, April 23, 2015

यह 4300 सौ किस मद में जाता है, ना डीइओ को पता और ना स्कूल प्रशासन को

यह 4300 सौ किस मद में जाता है, ना डीइओ को पता और ना स्कूल प्रशासन को

- आरटीइ के तहत पैसे तो मिलते है, खर्च की जानकारी नहीं है स्कूल के पास
- स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से बस भेज दिया जाता है राशि
संवाददाता, पटना
शिक्षा के अधिकार के तहत हर बच्चे स्कूल जायें.  इसके लिए  सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून तो बना दिया, लेकिन इसकी प्लानिंग सही से नहीं किया गया. इसका एक बड़ा उदाहरण तब सामने आता है जब स्कूल के पास आरटीइ के मद में दी जाने वाली राशि (4300) पहुंचती है. जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से प्रति बच्चे के हिसाब से राशि स्कूल के  प्रिंसिपल के नाम से भेजी तो जाती है. लेकिन इस राशि को आरटीइ के तहत आये बच्चों के लिए किस तरह से खर्च करना है, इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन के पास नहीं होती है. साल में एक बार भेजी जाने वाली यह राशि हर स्कूल अपने हिसाब से खर्च करता है. कहीं पर ट्यूशन फी को माफ कर दिया जाता है तो कहीं पर फ्री एजुकेशन के नाम पर उस राशि को रखा जाता है.
- बच्चों की संख्या के हिसाब से दी जाती है राशि
जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से राशि प्रति बच्चे की संख्या के अनुसार स्कूल को भेजा जाता है. नये सत्र के शुरू होने के बाद आरटीइ के तहत नामांकन ली जाती है. इसके लिए हर स्कूल को एक महीने का समय दिया जाता है. नामांकन की प्रक्रिया होने के बाद बच्चो की संख्या की लिस्ट हर जिले के स्कूल के अनुसार सर्व शिक्षा अभियान के पास भेजा जाता है. जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के अनुसार सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से किस स्कूल में कितने बच्चों के नामांकन होने है. इसका लिस्ट कार्यालय को उपलब्ध करवाया जाता है. डीइओ कार्यालय से फिर स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से राशि भेजा जाता है. सूत्रों के अनुसार किस मद में इस राशि को जाना है, यह स्पष्ट नहीं होता है. बस स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से राशि का चेक भेजा जाता है.
- नामांकन जून में राशि मिलता है सितंबर में
आरटीइ के तहत हर स्कूल में नामांकन मई से जून तक लिया जाता है. नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से फ्री होती है. दो महीने नामांकन की प्रक्रिया करने के बाद जुलाई से अगस्त तक पूरे स्कूल से बच्चों की संख्या का डाटा तैयार किया जाता है. फिर उस डाटा के अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से राशि का आवंटन होता है. फिर उस राशि को सर्व शिक्षा अभियान प्रत्येक जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास भेजता है. जिला शिक्षा पदाधिकारी फिर उस राशि को हर स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से बच्चों के शिक्षा के लिए भेजती है.

इन स्कूलों को मिला 2012-13 में यह राशि

स्कूल                                      मिलने वाली राशि (हजार में)
 डीएवी पब्लिक स्कूल, वाल्मी     -           24616
एसवीएम रेजिडेंसियल पब्लिक स्कूल   -  30770
प्रेमालोक मिशन स्कूल    -   21539
डीएवी पब्लिक स्कूल, खगौल    -   58463
कृष्णा निकेतन, वाइपास    -  21539
सेंट जोसफ हाई स्कूल, कंकड़बाग  -  76925
मेय फ्लावर स्कूल, दीघा    -  24616
पटना सेंट्रल स्कूल, न्यू वाइपास   -  123080
एवीएन इंगलिश स्कूल, पाटलिपुत्र   -  83079
पटना मुसलिम हाई स्कूल, बीएम दास   -  76925
लोहिया नगर माउंस कार्मेल हाई स्कूल, कंकड़बाग   - 30770
रेड कार्पेट हाइ स्कूल, राजेन्द्र नगर   -  15385
स्कूल ऑफ क्रियेटिव लर्निग, दानापुर  -   307770
किड्डी कांवेंट हाई स्कूल, गुलजारबाग    -   61540
डा. डी राम डीएवी पब्लिक स्कूल, गोला रोड   -  6154
कृष्णा पब्लिक स्कूल, बिहटा    -  12308
शिवम स्कूल, बिहटा      -   36924
आरपीएस पब्लिक स्कूल,  गुलजार बाग   -  30770
एवीएन स्कूल, राजीव नगर    -    46155
दी अर्थ पब्लिक स्कूल,  पुनपुन   -  30770
सेंट मैरिज स्कूल, मसौढ़ी     -   138465

कोट
सर्व शिक्षा अभियान की ओर से हम स्कूल के अनुसार बच्चों की लिस्ट मांगते है. जिस स्कूल में जितने शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन होना होता है. वहां पर उतनी राशि प्रति बच्चों के हिसाब से भेजते है. यह राशि बस स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से भेजा जाता है.
महेश सिंह, डीइओ, पटना

स्कूल के पास पैसे डीइओ के माध्यम से ही भेजा जाता है. सर्व शिक्षा अभियान की ओर से स्कूलों की रिपोर्ट तैयार की जाती है. जिसमें यह देखा जाता है कि किस स्कूल में कितने बच्चों का आरटीइ के तहत नामांकन हो रहा है. उस फीगर के अनुसार राशि विभाग की ओर से दी जाती है. प्रति बच्चों के अनुसार विभाग से राशि मिलता है.
कौशल किशोर, कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान

No comments:

Post a Comment