वेबसाइट है नहीं तो कैसे ले स्कूल की जानकारी
- सीबीएसइ के कई स्कूलों ने नही बनाया है अपना वेबसाइट
- आधी अधूरी जानकारी से प्लस टू में नामांकन की जानकारी लेने में हो रही दिक्कतें
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के 10वीं बोर्ड की परीक्षा समाप्त हो चुकी है. प्लस टू में नामांकन लेने के लिए स्कूलों की इक्वायरी भी शुरू हो चुकी है. एक तरफ जहां अभिभावक अपने स्तर से स्कूलों के बारे में जानने की कोशिश कर रहे है. वहीं स्टूडेंट्स खुद ही स्कूल के इन्फ्रास्क्ट्रचर के बारे में जानकारी लेना चाह रहे है. लेकिन पटना के कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जायें तो कई स्कूलों की वेबसाइट नहीं है, अगर है भी तो पूरी तरह से तैयार नहीं है. कई स्कूलों ने वेबसाइट बना भी लिया है तो उस पर पूरी जानकारी नहीं दी है. नामांकन और नोटिस संबंधी कई चीजें अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोसेस में बताया जाता है. ऐसे में अभी से स्कूल पहुंच कर ही अभिभावक और स्टूडेंट्स जानकारी लेना शुरू कर दिये है.
- स्कूल का नाम और कॉमेंट की मिलती है जानकारी
पटना के कई ऐसे स्कूल है जिन्होंने अपना स्कूल का वेबसाइट नहीं बनाया है. इन स्कूल के बारे में जानकारी लेने के लिए अगर गुगल की मदद ली जाती है तो वहां पर स्कूल का नाम और उसके बारे में कुछ कॉमेट के अलावा कुछ नहीं मिलता है. भले इन स्कूलों का नाम गुगल में नजर आ जायें, इन स्कूलों के एड्रेंस भी मिल जायेंगे, लेकिन अगर स्कूल के बारे में जानकारी लेना चाहेंगे तो फिर कुछ भी जानकारी नहीं मिलेगा. पटना में डीएवी के पांच मान्यता प्राप्त स्कूल है. लेकिन डीएवी में अगर नामांकन संबंधी या स्कूल संबंधी कोई जानकारी लेना होगा तो अभिभावकों को स्कूल में जाकर ही लेना होगा.
- अप्रैल से मई इंक्वायरी और जून में नामांकन
10वीं बोर्ड की परीक्षा खत्म होने के साथ अच्छे स्कूल की इक्वायरी और वहां पर प्लस टू में नामांकन की जानकारी लेना शुरू हो जाता है. इसके बाद मई में नामांकन फार्म और एंट्रांस की परीक्षा और जून में नामांकन की प्रक्रिया होती है. समय काफी कम होता है. ऐसे में छात्र चाहते है कि उन्हें समय रहते सारी जानकारी उपलब्ध हो जायें. जानकारी उपलब्ध होने का सबसे बड़ा माध्यम स्कूल का वेबसाइट होता हैं. होली मिशन स्कूल की बात करें तो इस स्कूल का कोई वेबसाइट नहीं है. स्कूल ने लोकल ब्रांचेच पटना में खोल रखें हैं. ऐसे में नये स्टूडेंट्स को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती कि कौन स्कूल सही है और कौन गलत तरीके से नामांकन लेता है.
- काफी संख्या में बाहर के स्टूडेंट्स पहुंचते है पटना
प्लस टू करने और साथ मे मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करने के लिए काफी संख्या में स्टूडेंट्स पटना आते है. ऐसे में स्टूडेंट्स उन स्कूलों में प्लस टू में नामांकन लेना चाहते हैं जहां पर कम फी में उनका नामांकन हो जायें. लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिल पाती है. बाहर से आने वाले स्टूडेंट्स को स्कूल के बारे मे आइडिया नहीं होने के कारण दलालों के चक्कर में फंस जाते है.
स्टूडेंट्स की जरूरत की चीजें, जो स्कूल वेबसाइट पर होना चाहिए
- स्कूल के इन्फ्रास्ट्रर के बारे में
- नामांकन संबंधी जानकारी
- स्कूल का फी स्ट्रर के बारे में
- स्कूल के एक्टिविटी के बारे में
- साइंस विषय के साथ दूसरे विषय के लैब के बारे में
- स्कूल लाइब्रेरी के बारे में
- स्कूल में प्ले ग्राउंड आदि के बारे में
- एडमिशन की अंतिम तिथि और दूसरी अन्य जानकारी
- एडमिशन लेने के लिए कुल सीटों की संख्या
कोट
हर स्कूलों को स्कूल का वेबसाइट बनाना है. वेबसाइट पर स्कूल संबंधी तमाम जानकारी भी डालनी है. स्टूडेंट्स या अभिभावकों को नामांकन और स्कूल की जानकारी लेने में किसी तरह की परेशानी ना हो इसके लिए सीबीएसइ ने दो साल पहले हर स्कूलों को वेबसाइट अपडेट करने का निर्देश दिया था.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना
- सीबीएसइ के कई स्कूलों ने नही बनाया है अपना वेबसाइट
- आधी अधूरी जानकारी से प्लस टू में नामांकन की जानकारी लेने में हो रही दिक्कतें
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के 10वीं बोर्ड की परीक्षा समाप्त हो चुकी है. प्लस टू में नामांकन लेने के लिए स्कूलों की इक्वायरी भी शुरू हो चुकी है. एक तरफ जहां अभिभावक अपने स्तर से स्कूलों के बारे में जानने की कोशिश कर रहे है. वहीं स्टूडेंट्स खुद ही स्कूल के इन्फ्रास्क्ट्रचर के बारे में जानकारी लेना चाह रहे है. लेकिन पटना के कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जायें तो कई स्कूलों की वेबसाइट नहीं है, अगर है भी तो पूरी तरह से तैयार नहीं है. कई स्कूलों ने वेबसाइट बना भी लिया है तो उस पर पूरी जानकारी नहीं दी है. नामांकन और नोटिस संबंधी कई चीजें अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोसेस में बताया जाता है. ऐसे में अभी से स्कूल पहुंच कर ही अभिभावक और स्टूडेंट्स जानकारी लेना शुरू कर दिये है.
- स्कूल का नाम और कॉमेंट की मिलती है जानकारी
पटना के कई ऐसे स्कूल है जिन्होंने अपना स्कूल का वेबसाइट नहीं बनाया है. इन स्कूल के बारे में जानकारी लेने के लिए अगर गुगल की मदद ली जाती है तो वहां पर स्कूल का नाम और उसके बारे में कुछ कॉमेट के अलावा कुछ नहीं मिलता है. भले इन स्कूलों का नाम गुगल में नजर आ जायें, इन स्कूलों के एड्रेंस भी मिल जायेंगे, लेकिन अगर स्कूल के बारे में जानकारी लेना चाहेंगे तो फिर कुछ भी जानकारी नहीं मिलेगा. पटना में डीएवी के पांच मान्यता प्राप्त स्कूल है. लेकिन डीएवी में अगर नामांकन संबंधी या स्कूल संबंधी कोई जानकारी लेना होगा तो अभिभावकों को स्कूल में जाकर ही लेना होगा.
- अप्रैल से मई इंक्वायरी और जून में नामांकन
10वीं बोर्ड की परीक्षा खत्म होने के साथ अच्छे स्कूल की इक्वायरी और वहां पर प्लस टू में नामांकन की जानकारी लेना शुरू हो जाता है. इसके बाद मई में नामांकन फार्म और एंट्रांस की परीक्षा और जून में नामांकन की प्रक्रिया होती है. समय काफी कम होता है. ऐसे में छात्र चाहते है कि उन्हें समय रहते सारी जानकारी उपलब्ध हो जायें. जानकारी उपलब्ध होने का सबसे बड़ा माध्यम स्कूल का वेबसाइट होता हैं. होली मिशन स्कूल की बात करें तो इस स्कूल का कोई वेबसाइट नहीं है. स्कूल ने लोकल ब्रांचेच पटना में खोल रखें हैं. ऐसे में नये स्टूडेंट्स को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती कि कौन स्कूल सही है और कौन गलत तरीके से नामांकन लेता है.
- काफी संख्या में बाहर के स्टूडेंट्स पहुंचते है पटना
प्लस टू करने और साथ मे मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करने के लिए काफी संख्या में स्टूडेंट्स पटना आते है. ऐसे में स्टूडेंट्स उन स्कूलों में प्लस टू में नामांकन लेना चाहते हैं जहां पर कम फी में उनका नामांकन हो जायें. लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिल पाती है. बाहर से आने वाले स्टूडेंट्स को स्कूल के बारे मे आइडिया नहीं होने के कारण दलालों के चक्कर में फंस जाते है.
स्टूडेंट्स की जरूरत की चीजें, जो स्कूल वेबसाइट पर होना चाहिए
- स्कूल के इन्फ्रास्ट्रर के बारे में
- नामांकन संबंधी जानकारी
- स्कूल का फी स्ट्रर के बारे में
- स्कूल के एक्टिविटी के बारे में
- साइंस विषय के साथ दूसरे विषय के लैब के बारे में
- स्कूल लाइब्रेरी के बारे में
- स्कूल में प्ले ग्राउंड आदि के बारे में
- एडमिशन की अंतिम तिथि और दूसरी अन्य जानकारी
- एडमिशन लेने के लिए कुल सीटों की संख्या
कोट
हर स्कूलों को स्कूल का वेबसाइट बनाना है. वेबसाइट पर स्कूल संबंधी तमाम जानकारी भी डालनी है. स्टूडेंट्स या अभिभावकों को नामांकन और स्कूल की जानकारी लेने में किसी तरह की परेशानी ना हो इसके लिए सीबीएसइ ने दो साल पहले हर स्कूलों को वेबसाइट अपडेट करने का निर्देश दिया था.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना
No comments:
Post a Comment