9 मेस, 300 शेफ, मेहमान 5 हजार.. यह है बिहार का मास्टर शेफ किचेन
- सुबह 4 बजे से रात के 10 बजे तक बिहार मास्टर शेफ किचेन रहता है खुला
- बिहार दिवस मेहमानवाजी का कहना ही क्या
संवाददाता, पटना
यहां पर एक नहीं सैकड़ों शेफ है. हर के अपने किचेन है. एप्रेम पहन कर मेहमानों का स्वागत में जुटी है. इनके पास मेहमानों का लिस्ट है. बस स्वाद अलग है. जी हां, यहां पर बात इंडिया मास्टर शेफ की नहीं हो रही है. बल्कि हमारे बिहार के मास्टर शेफ टीम की बात हो रही हैं. इन्हें ना तो ट्रेनिंग दी गयी और ना ही स्वाद को सही करने का गुर बताया गया, बस यह बनाती है और लोग इनके स्वाद के कायल होते रहते है. तभी तो बिहार के हर किचेन स्टार के रूप में इन्हें याद किया जाता है. बिहार दिवस पर एक बार फिर ये किचेन स्टार अपने स्वाद से हर किसी को बांध रहे रहें हैं. तीन दिनों के बिहार दिवस के कार्यक्रम में महिला सामाख्या की फेडरेशन की टीम की ओर से मेहमानवाजी की जा रही है. बिहार दिवस पर लगभग 5 हजार मेहमान पटना हुए है. इन मेहमान के स्वागत में फेडरेशन लगा हुआ है.
- हर जिले के लिए अलग-अलग मेस
इन किचेन स्टार ने हर जिले के लिए अलग-अलग मेस बनाया था. हर मेस में मेहमानों की संख्या की लिस्ट दे दी गयी थी. साथ में उन्हें नाश्ता और खाने का समय बता दिया गया था. फिर क्या था चार बजे सुबह से रात के 8 बजे रात तक महिलाएं बस अपना डिश तैयार करने में लगी रही. जहानाबाद फेडरेशन की सचिव सुनीता किशोर ने बताया कि उनके मेस में दूसरे जिलों से आयें बच्चों के लिए खाने का इंतजाम किया गया है. वहीं फेडरेशन की कार्यकारी सदस्य विभा ने बताया कि एक हजार मेहमानों के लिए खाना बनाया जाता है. हर दिन का हमारा मेन्यू फिक्स है. सुबह 4 बजे से खाना बनाना शुरू करते हैं. साफ सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता हैं. किसी भी कार्यक्रम में आने से पहले एक बैठक होती है. उस बैठक में सारी तैयारी की जाती है.
- बिहार में चलता है महिलाओं का होटल
गांव हो या शहर हो, होटल में अभी तक पुरूष ही काम करते आयें है. महिलाएं खाना जरूर बनाती है, लेकिन बस अपने घरों में. इसके लिए उन्हें किसी तरह की पारिश्रमिक नहीं मिलता है. ऐसे में महिला सामाख्या की ओर से इसकी शुरूआत 2006 में किया गया. इसके तहत हर जिले से महिलाओं को जोड़ा गया. इसमें दलित और दबी कुचली महिलाओ को शामिल किया गया. इस संबंध में महिला सामाख्या की कुंदन जी ने बताया कि शुरू में तो फेडरेशन से महिलाओं को जोड़ना काफी कठिन होता था. परिवार वाले इसके लिए तैयार नहीं होते थे. काफी कोशिश के बाद हर जिले में महिलाओं का ग्रुप तैयार किया गया.
- 6 साल से चला रही महिलाएं होटल
गांव से निकली ये महिलाएं बिहार में अलग-अलग जगहों पर होटल चला रही है. इसके साथ हर बड़े कार्यक्रम में भी इन महिलाओं की मदद ली जाती है. कुंदन जी ने बताया कि बिहार दिवस में छह साल से वो अपना सहयोग दे रही हैं. इसके अलावा तंरग कार्यक्रम, शिक्षा दिवस कार्यक्रम, कराटे प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिला स्तर पर स्थापना दिवस कार्यक्रम आदि शामिल है .
इन जिलों की महिलाओं ने लगाया है मेस
सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, शिवहर, कैमूर, बेतिया, गया, भोजपुर, रोहतास, दरभंगा
मेहमानों को खाने की लिस्ट
22 मार्च
सुबह का नाश्ता - पूड़ी या रोटी, छोला (हरा मटर), बुंदिया एवं चाय
दोपहर का भोजन - चावल, दाल, सब्जी(आलू कटहल), कददू का रायता, पापड़, अचार, मिक्स सलाद (खीरा, प्याज, मूली, गाजर, चुकंदर, मुंग, चना), मिष्टी दही
शाम का नाश्ता - बंगला निमकी (दो पीस), गाजा (दो पीस), चाय
रात का भोजन - चावल, दाल, रोटी या पूड़ी, सब्जी (आलू और बैगन), भूजिया (आलू और बीम), अचार, पापड़, काला जामुन
23 मार्च
सुबह का नाश्ता - दही चूड़ा, आलूदम एवं चाय
दोपहर का भोजन - चावल (जीरा राइस), दाल, सब्जी(आलू गोभी मटर), बैगन का भाजा, पापड़, अचार, केला और आइसक्रीम
शाम का नाश्ता - ब्रेड पकौड़ा, बेसन का लडडू, टमाटर का मीठा चटनी एवं चाय
रात का भोजन - चावल, दाल, मटर पनीर की सब्जी, अचार,भूजिया, टमाअर की चटनी, रसगुल्ला
24 मार्च
सुबह का नाश्ता - पूड़ी, मिक्स सब्जी, पेड़ा
दोपहर का भोजन - चावल, दाल, सब्जी(बंधा गोभी की कोफ्ता), भूजिया (आलू), पापड़, अचार, मिक्स सलाद (खीरा, मूली, गाजर, प्याज) सेब
शाम का नाश्ता - सेब बुंदिया एवं चाय
रात का भोजन - पूड़ी या रोटी, सब्जी (आलू गोभी मटर), भूजिया (आलू गाजर), अचार, पापड़ एवं खीर
- सुबह 4 बजे से रात के 10 बजे तक बिहार मास्टर शेफ किचेन रहता है खुला
- बिहार दिवस मेहमानवाजी का कहना ही क्या
संवाददाता, पटना
यहां पर एक नहीं सैकड़ों शेफ है. हर के अपने किचेन है. एप्रेम पहन कर मेहमानों का स्वागत में जुटी है. इनके पास मेहमानों का लिस्ट है. बस स्वाद अलग है. जी हां, यहां पर बात इंडिया मास्टर शेफ की नहीं हो रही है. बल्कि हमारे बिहार के मास्टर शेफ टीम की बात हो रही हैं. इन्हें ना तो ट्रेनिंग दी गयी और ना ही स्वाद को सही करने का गुर बताया गया, बस यह बनाती है और लोग इनके स्वाद के कायल होते रहते है. तभी तो बिहार के हर किचेन स्टार के रूप में इन्हें याद किया जाता है. बिहार दिवस पर एक बार फिर ये किचेन स्टार अपने स्वाद से हर किसी को बांध रहे रहें हैं. तीन दिनों के बिहार दिवस के कार्यक्रम में महिला सामाख्या की फेडरेशन की टीम की ओर से मेहमानवाजी की जा रही है. बिहार दिवस पर लगभग 5 हजार मेहमान पटना हुए है. इन मेहमान के स्वागत में फेडरेशन लगा हुआ है.
- हर जिले के लिए अलग-अलग मेस
इन किचेन स्टार ने हर जिले के लिए अलग-अलग मेस बनाया था. हर मेस में मेहमानों की संख्या की लिस्ट दे दी गयी थी. साथ में उन्हें नाश्ता और खाने का समय बता दिया गया था. फिर क्या था चार बजे सुबह से रात के 8 बजे रात तक महिलाएं बस अपना डिश तैयार करने में लगी रही. जहानाबाद फेडरेशन की सचिव सुनीता किशोर ने बताया कि उनके मेस में दूसरे जिलों से आयें बच्चों के लिए खाने का इंतजाम किया गया है. वहीं फेडरेशन की कार्यकारी सदस्य विभा ने बताया कि एक हजार मेहमानों के लिए खाना बनाया जाता है. हर दिन का हमारा मेन्यू फिक्स है. सुबह 4 बजे से खाना बनाना शुरू करते हैं. साफ सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता हैं. किसी भी कार्यक्रम में आने से पहले एक बैठक होती है. उस बैठक में सारी तैयारी की जाती है.
- बिहार में चलता है महिलाओं का होटल
गांव हो या शहर हो, होटल में अभी तक पुरूष ही काम करते आयें है. महिलाएं खाना जरूर बनाती है, लेकिन बस अपने घरों में. इसके लिए उन्हें किसी तरह की पारिश्रमिक नहीं मिलता है. ऐसे में महिला सामाख्या की ओर से इसकी शुरूआत 2006 में किया गया. इसके तहत हर जिले से महिलाओं को जोड़ा गया. इसमें दलित और दबी कुचली महिलाओ को शामिल किया गया. इस संबंध में महिला सामाख्या की कुंदन जी ने बताया कि शुरू में तो फेडरेशन से महिलाओं को जोड़ना काफी कठिन होता था. परिवार वाले इसके लिए तैयार नहीं होते थे. काफी कोशिश के बाद हर जिले में महिलाओं का ग्रुप तैयार किया गया.
- 6 साल से चला रही महिलाएं होटल
गांव से निकली ये महिलाएं बिहार में अलग-अलग जगहों पर होटल चला रही है. इसके साथ हर बड़े कार्यक्रम में भी इन महिलाओं की मदद ली जाती है. कुंदन जी ने बताया कि बिहार दिवस में छह साल से वो अपना सहयोग दे रही हैं. इसके अलावा तंरग कार्यक्रम, शिक्षा दिवस कार्यक्रम, कराटे प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिला स्तर पर स्थापना दिवस कार्यक्रम आदि शामिल है .
इन जिलों की महिलाओं ने लगाया है मेस
सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, शिवहर, कैमूर, बेतिया, गया, भोजपुर, रोहतास, दरभंगा
मेहमानों को खाने की लिस्ट
22 मार्च
सुबह का नाश्ता - पूड़ी या रोटी, छोला (हरा मटर), बुंदिया एवं चाय
दोपहर का भोजन - चावल, दाल, सब्जी(आलू कटहल), कददू का रायता, पापड़, अचार, मिक्स सलाद (खीरा, प्याज, मूली, गाजर, चुकंदर, मुंग, चना), मिष्टी दही
शाम का नाश्ता - बंगला निमकी (दो पीस), गाजा (दो पीस), चाय
रात का भोजन - चावल, दाल, रोटी या पूड़ी, सब्जी (आलू और बैगन), भूजिया (आलू और बीम), अचार, पापड़, काला जामुन
23 मार्च
सुबह का नाश्ता - दही चूड़ा, आलूदम एवं चाय
दोपहर का भोजन - चावल (जीरा राइस), दाल, सब्जी(आलू गोभी मटर), बैगन का भाजा, पापड़, अचार, केला और आइसक्रीम
शाम का नाश्ता - ब्रेड पकौड़ा, बेसन का लडडू, टमाटर का मीठा चटनी एवं चाय
रात का भोजन - चावल, दाल, मटर पनीर की सब्जी, अचार,भूजिया, टमाअर की चटनी, रसगुल्ला
24 मार्च
सुबह का नाश्ता - पूड़ी, मिक्स सब्जी, पेड़ा
दोपहर का भोजन - चावल, दाल, सब्जी(बंधा गोभी की कोफ्ता), भूजिया (आलू), पापड़, अचार, मिक्स सलाद (खीरा, मूली, गाजर, प्याज) सेब
शाम का नाश्ता - सेब बुंदिया एवं चाय
रात का भोजन - पूड़ी या रोटी, सब्जी (आलू गोभी मटर), भूजिया (आलू गाजर), अचार, पापड़ एवं खीर
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