Sunday, April 5, 2015

10 हजार लोगों ने जाना थर्ड जेंडर को

10 हजार लोगों ने जाना थर्ड जेंडर को

- बिहार दिवस पर पहली बार थर्ड जेंडर का लगा है स्टॉल
संवाददाता, पटना
थर्ड जेंडर क्या होता है. इसे समाज में क्यूं सही जगह नहीं दिया जाता है. क्यूं इस जेंडर के लोगों के साथ आज भी भेदभाव की स्थिति हैं. इन तमाम प्रश्नों के उत्तर और अपनी जिज्ञासा को लेकर लोग पहुंच रहे थे और उन्हें खुले मन से जवाब दिया जा रहा था. अभी तक भले किन्नर, कोती, ट्रांसजेंडर, हिजड़ा कम्यूनिटी के लोग पर्दे के पीछे ही नजर आते थे, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ जो यह पर्दे के सामने खुल कर आयी है और लोगो से खुाद रूबरू हो रही हैं. अपने बारे में पूरी जानकारी दे रहीं है.  पहली बार बिहार दिवस पर थर्ड जेंडर को अपना स्टॉल लगाने का मौका दिया गया है. दोस्तानासफर के नाम से इस स्टॉल पर अभी तक दस हजार के लगभग लोग जानकारी लेने पहुंच चुके है. जन शिक्षा पवेलियन के बगल में लगे इस स्टॉल को जानने के लिए लोग एक दूसरे से पूछ कर पहुंच रहे है.
- हमें सही परिभाषा मिले
अपनी सही पहचान की लड़ाई कर रही किन्नर समुदाय को सही परिभाषा की तलाश है. दोस्ताना सफर की रेशमा ने बताया कि हमें पहली बार यह स्टॉल दिया गया हैं. हम लोगों को अपने बारे में बता रहे है. हमारी कम्यूनिटी को लोग आज भी सही नजर से नहीं देखते है. ऐसे में हम लोगो को अवेयर कर रहे है. हमारे कम्यूनिटी में अलग-अलग तरह के लोग है. लेकिन उसे एक ही तरह से देखा जाता है. किन्नर, कोती, ट्रांसजेंडर, हिजड़ा अलग-अलग रूप हैं. लेकिन उन्हें अभी तक परिभाषित नहीं किया गया. लोग हमारे पास आ रहे हैं तो हम उन्हें हमारे कम्यूनिटी के अलग-अलग लिंग के बारे में जानकारी दे रहे हैं.
- महिला होने का अधिकार क्यूं नहीं देता समाज
अधिकांश किन्नर खुद को महिला मानती है, लेकिन वोटर आइडी कार्ड हो या जन्म प्रमाण पत्र उन्हें पुरूष का दर्जा दे दिया जाता है. ऐसे में किन्नर समाज अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड जेंडर को खुद को आइडेंटिटी चूनने के लिए का अधिकार दिया है. इसके बावजूद अभी तक उन्हें राज्य सरकार की ओर से यह अधिकार नहीं मिला है. दोस्तानासफर की सचिव रेशमा प्रसाद ने बताया कि हम मानसिक रूप से खुद को महिला मानते है, लेकिन शरीर हमारा पुरूषों वाला हैं. शरीर को देखकर हमें पुरूष का दर्जा दे दिया जाता है. हम इस बात की लगातार मांग कर रहे है. लेकिन अभी तक हमारी मांगे नहीं मानी जा रही हैं. अभी लोगों के पास हम अपनी बातें रख रहे हैं.
- किन्नर सलाहकार की हो नियुक्ति
किन्नर समाज के लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतें शौचालय की होती हैं. रेशमा ने लोगो को बताया कि हमारे लिये पूरे बिहार में कोई शौचालय नहीं होता है. हमें समझ में नहीं आता है कि हम क्या करें. पुरूष के शौचालय में जायें या महिला के शौचालय में. इसके अलावा हमारे दिनचार्या संबंधी कई प्राब्लम है. हमें सही सलाकार की जरूरत हैं. हम बिहार सरकार से किन्नर समाज के लिए एक किन्नर सलाहकार की मांग करते है. इससे हमें हर दिन के दिक्कतों का सामना नहीं करना  पड़ेगा.
- व्यजन मेला में खिला रही बिरयानी
मुख्य समारोह स्थल पर स्टॉल के अलावा इस बार व्यजन मेला में भी किन्नर समाज ने अपना स्टॉल लगा रखा हैं. इस स्टॉल पर बिरयानी दी जा रही है. रेशमा प्रसाद ने बताया कि हमें अब अधिक से अधिक लोगों के बीच जा रहें है. हम भी आम महिलाओं की तरह समाज का हर काम अच्छे से कर सकते है, इसकी जानकारी देना चाहते है. इस कारण बिरयानी का स्टॉल लगाया गया है .
आज हैं नाटक का मंचन
बिहार दिवस के अंतिम दिन दोस्ताना सफर की ओर से एक नाटक का मंचन भी किया जायेगा. अक्षरा प्रोग्राम के नाम से इस नाटक का आयोजन 24 मार्च को 2 बजे प्राथमिक शिक्षा पवेलियन में किया जायेगा.

किन्नर समाज लोगों दे रहा प्रश्नोतरी और पूछ रहा यह सवाल
- किन्नर के बारे में आपको क्या जानकारी है
- किन्नर के सभी रूप को आप जानते हैं या नहीं
- किन्नर पर होने वाले छेड़ छाड़ को आप सही मानते है या नहीं
- किन्नर पर होने वाले शारीरिक, मानसिक उत्पीड़न को सही मानते हैं या नहीं
- किन्नर को एक महिला के रूप में जीने का अधिकार क्यूं नहीं दिया जाता है
- किन्नर को समाज के मुख्य धारा में रहने का अधिकार है या नहीं
- किन्नर को सभी तरह के विकास के लिए आप किस तरीके से सहयोग कर सकते है
- किन्नर को सरकारी सहयोग दिलाने के लिए आप क्या सहयोग करेंगे

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