Monday, April 20, 2015

स्कूल से ही स्टेशनरी और किताबें लेने का दिया जाता है दबाव

स्कूल से ही स्टेशनरी और किताबें लेने का दिया जाता है दबाव

- स्कूल की मनमानी की शिकायत लेकर सीबीएसइ रीजनल ऑफिस पहुंच रहे अभिभावक
- स्टेशनरी और किताबों की दुकानें चलती है कई स्कूलों में
संवाददाता, पटना
स्टेशनरी स्कूल से ही लेना होगा. किताबों की लिस्ट स्कूल से प्रोवाइड करवायी जायेगी. स्कूल से ही किताबें भी लेना होगा. स्कूल के इस नियम को हर अभिभावकों को मानना होगा. जो अभिभावक इन नियम को नहीं मानेगे, वो अपने बच्चे का नामांकन दूसरे स्कूल में करवा ले. अभिभावक अनिल कुमार ने स्कूल के खिलाफ यह शिकायत सीबीएसइ रीजनल ऑफिस के पास किया है. सम्पतचक गोपालपुर के रहने वाले अनिल कुमार ने सीबीएसइ के पास लिखित शिकायत की है. इसमें उन्होंने लिखा है कि अगर स्कूल के नियम को अभिभावक नहीं मानते है तो स्कूल की ओर से बच्चों को स्कूल से निकाल देने की धमकी दी जाती है. अभिभावकों के उपर सोशन जैसा व्यवहार किया जाता है. सीबीएसइ रीजनल ऑफिस में एक मात्र अनिल कुमार शिकायत करने वाले नहीं हैं बल्कि आये दिन अभिभावक स्कूल की मनमानी की बातें सीबीएसइ के पास लिखित रूप में दे रहे है.
- किताबों से लेकर स्टेशनरी तक स्कूल की मरजी से
स्कूल से ही किताबें लेना है. नोट बुक वहीं स्कूल में चलेगा जिस पर स्कूल का लोगो होगा. स्टेशनरी स्कूल से ही लेना होगा. किताबें और स्टेशनरी की खरीदारी स्कूल कैंपस से करना होता है, लेकिन इसके लिए स्कूल की ओर से कोई रसीद नहीं दी जाती है. जो नोट बुक सस्ते दाम में बाहर के किसी दुकान से मिल जाती है, वो नोट बुक स्कूल कैंपस से लेने पर मोटी रकम देनी होती है. कई स्कूलों ने नोट बुक पर भी स्कूल का नाम और लोगो लगा रखा है. ऐसे में स्कूल कैंपस से नोट बुक लेना अभिभावकों की मजबूरी हो जाती है. कुछ ऐसा ही हाल यूनिफार्म और स्कूल बैग खरीदने पर भी होता हैं. इन चीजों की खरीदारी पर भी स्कूल की मरजी के अनुसार ही अभिभावकों को चलना पड़ता है.
- शिकायत करने पर स्कूल से निकाल देने का मिलता है धमकी
स्कूल के मनमानी पर अगर कोई अभिभावक स्कूल में शिकायत करते हैं तो उनके बच्चें को स्कूल से बाहर निकाल देने की धमकी भी दी जाती है. स्कूल का नाम बताये बिना अभिभावक राहुल सिंह ने बताया कि अब स्कूल किसी भी तरह की शिकायत नहीं सूनना चाहता है. नये सेशन में किताबों और स्टेशनरी की खरीदारी में काफी परेशानी अभिभावकों को उठाना होता है. स्कूल की इतनी मनमानी रहता है कि अगर भूल से भी शिकायत कर दिया तो फिर बच्चे को स्कूल से निकाल देने तक की धमकी मिल जाती है. जब एक ही कोर्स की किताबें चलती है तो फिर फिक्स जगहों से लेने को क्यूं कहा जाता है. नोट बुक पर स्कूल का नाम और लोगो देने से स्कूल से ही लेना हमारी मजबूरी बन जाती है.
- कई स्कूलों ने खोल रखे है कैंपस में दुकानें
पटना के कई बड़े स्कूलों में किताबों और स्टेशनरी की दुकानें खुले हुए है. इन दुकानों में पढ़ाई संबंधित तमाम चीजें आसानी से मिल जाती है. लेकिन दुगुने दाम पर. साल भर तो स्टूडेंट्स के लिए आप्सनल होता है कि वो इस दुकानों से समान ले या ना ले. लेकिन नये सेशन में यहां से ही समान की खरीदारी करनी होती है. क्योंकि स्कूल बैग, नोट बुक आदि पर स्कूल का नाम और लोगो अंकित रहता है. सीबीएसइ के अनुसार कोई भी स्कूल कैंपस में बिजनेस संबंधी किसी भी चीज को नहीं चला सकता है. इसके बावजूद पटना के कई स्कूलों में दुकानें चलती है. नये सेशन में तो कई और स्टॉल खुल जाते है.
- नहीं चलती अब पुरानी किताबें
स्कूलों में अब पुरानी किताबें का चलन नहीं है. हर साल किताबें चेंज हो जाती है. ऐसे में एक साल पुरानी किताबों को कोई नहीं लेता है. ज्ञान गंगा लिमिटेड, कदमकुआं से मिली जानकारी के अनुसार एक साल पहले की किताबें अगर नया भी होगा, तो हमारे कोई काम का नहीं है, क्योंकि वो किताब हम दूसरे किसी भी क्लास में नहीं चलता है. दुकान से मिली जानकारी के अनुसार स्कूलों द्वारा कुछ ऐसे किताबें चलाये जाते है जो एक साल के लिए ही सिलेबस में होता है. हर साल वो चेंज हो जाता है.
- ऐसे स्कूलों की रिपोर्ट हो रही तैयार
सीबीएसइ रीजनल ऑफिस के पास जो भी अभिभावक स्कूल की मनमानी पर शिकायत कर रहे है, उसकी रिपोर्ट सीबीएसइ दिल्ली भेजी जायेगी. वहीं सीबीएसइ की ओर से ऐसे स्कूलों को सीबीएसइ के नाम्ॅस से अवगत करवाया जा रहा है. सीबीएसइ के अनुसार स्कूल एक शिक्षक संस्थान होता है. ऐसे में कोई भी स्कूल कैंपस में दुकान या कोचिंग संस्थान नहीं चला सकता हैं. नोट बुक पर स्कूल का नाम रखना गलत है. अभिभावक अपनी मरजी से किताबों और स्टेशनरी का समान खरीदेंगे. सीबीएसइ द्वारा स्कूलों


ये सारी शिकायतें पहुंच रही है सीबीएसइ
- एक ही दुकान या स्कूल कैंपस से किताबें खरीदने का दबाव
- स्टेशनरी में मोटी रकम वसूलता है स्कूल
- जो स्टेशनरी कम दाम में दुकानों मे मिलते है, उसे स्कूल कैंपस से खरीदने में महंगा पड़ता है
- स्कूल की ओर लिस्ट तो दिया जाता है, लेकिन खरीदारी करने पर पक्का रसीद नहीं मिलता हैं
- स्कूल बैग और यूनिफार्म की खरीदारी में भी दुकान फिक्स होता है
- एनसीइआरटी की बुक्स भी अधिक दाम पर स्कूल कैंपस में मिलता है
- रिफ्रेसर बुक जरूरत से अधिक खरीदवाते है स्कूल वाले


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