Thursday, April 23, 2015

आरटीइ में एडमिशन तो मिल गया, बांकी का खर्च कैसे उठायें

आरटीइ में एडमिशन तो मिल गया, बांकी का खर्च कैसे उठायें

- आरटीइ के तहत एडमिशन लेने वाले छात्रों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
- फीस की जगह एक्स्ट्रा एक्टिविटीज के नाम पर ले लिये जाते है हजारों रुपये
संवाददाता, पटना
केस वन  - रोहित (बदला हुआ नाम) का एडमिशन शिक्षा के अधिकार के तहत दो साल पहले पटना के एक स्कूल में किया गया. रोहित के अभिभावक को हर दो महीने पर हजार रुपये देना होता है. इसे तो जैसे तैसे रोहित के अभिभावक जमा कर भी देते है. लेकिन अभी नये सत्र की शुरुआत में रोहित को स्कूल के बुक्स के लिस्ट के साथ यूनिफार्म भी लेने को कहा गया है. इस पर पूरा खर्च करने में रोहित के अभिभावक असमर्थ है. अब रोहित के अभिभावक ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग का दरवाजा खटखटाया है.
यह कहानी किसी एक रोहित की नहीं है बल्कि कई अभिभावक स्कूल के द्वारा मांगे जा रहे किसी दूसरे मद के चार्ज से परेशान है. सीबीएसइ स्कूलों की मनमानी अभी तक आम अभिभावक ही ङोल रहे है, लेकिन अब इसका असर उन अभिभावकों को महसूस होने लगा है जिनके बच्चे का एडमिशन शिक्षा के अधिकार कानून के तहत लिया गया है. स्कूल वालों को इस अधिकार के तहत नामांकन लेने वाले बच्चों का फी तो सरकर की ओर से दे दिया जाता है, लेकिन एक्स्ट्रा खर्च का बोझ इन अभिभावकों को समय-समय पर करना पड़ता है. अब तो ये मामले बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंच रहे है. लेकिन आयोग इसमें कुछ भी नहीं कर पा रहा
- निशुल्क शिक्षा के बाद भी इतना खर्च
आरटीइ से एडमिशन लेने वाले बच्चे को टयूशन फी भले ही स्कूल नहीं ले रहे, लेकिन अन्य खर्च पर नजर डाली जायें तो एक तरह से इसका खर्च हजारों में जा रहा है. आरटीइ के तहत पढ़ने वाले छात्रों के लिए ज्यादातर स्कूलों में    कई सुविधा लेना अनिवार्य कर रखा है. एडमिशन के समय कम से कम 4 हजार रूपये की किताब कॉपी,  500 सौ रुपये की ड्रेसेस, साल भर में होने वाले एक्टिविटीज के करीब 1000 रुपये लिये जा रहे है. इस तरह निशुल्क शिक्षा के बाद भी जरूरतमंद परिवारों की साल भर के करीब हजारों रूपये खर्च हो जा रहे है. अब इस खर्च को वहन करना अभिभावकों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है.
हर दो महीने में एक्टिविटी
कई स्कूल ऐसे है जहां पर हर दिन कुछ ना कुछ एक्टिविटी करवायी जाती है. इन एक्टिविटी में शामिल होना हर बच्चों के लिए अनिवार्य है. ऐसे में अभिभावकों की मजबूरी है कि उन्हें ना चाहते हुए भी एक्टिविटी में बच्चों को शामिल करें. इसके लिए उन्हें कई बार पैसे भी देने होते है. सीबीएसइ के अनुसार अब हर स्कूल एक्टिविटी पर अधिक फोकस करता है. ऐसे में हर अभिभावकों को स्कूल फी के अलावा 400 से 500 रुपये हर महीने देना होता है. इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल एफ हसन ने बताया कि स्कूल में कोई एक्टिविटी हर छात्र के लिए होता है. ऐसे में 25 परसेंट आरटीइ छात्र को अलग हटा कर तो नही किया जा सकता है. और एक बार की बात तो है नहीं जो स्कूल अपनी ओर से एक्टिविटी पर पैसे खर्च करेगा.
- शिक्षा का अधिकार कानून में कमियां ही कमियां
छह से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने में पिछले तीन सालों के दौरान पूरे देश में कुल 1.13 लाख करोड़ रुपये खर्च किये गये. लेकिन इसमें कमियां बरकरार है. स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 फीसदी सीट आरक्षित करने जैसे मुददे अभी तक पूरे नहीं किये जा सके.  नये सत्र के लिए प्राइवेट स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया चल रही है. आरटीइ के तहत अब फी का ब्योरा देना हर स्कूलों के लिए अनिवार्य है. जानकारी के अनुसार आरटीइ के तहत राज्य सरकार की ओर से हर बच्चों के लिए  साल में 4200 सौ रुपये दिये जाते है. लेकिन ये पैसे भी स्कूल को समय पर नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में स्कूल को ही सारा कुछ वहन करना पड़ता है.
इन चीजों पर लिया जाता है एक्स्ट्रा चाजर्
- एक्टिविटी के नाम पर
- साइंस एग्जीविशन के नाम पर
- प्रोजेक्ट वर्क के नाम पर
- स्कूल डेवलपमेंट के नाम पर
- एनूअल स्पोर्टस डे के नाम पर
- कंप्यूटर एजूकेशन के नाम पर
- साइंस और लैग्वेज लैब के नाम पर

कोट
सरकारी स्कूलों में छात्रों पर हर महीने सरकार हजारों रुपये खर्च करती है. लेकिन प्राइवेट स्कूलों में साल में 4200 सौ रूपये देकर सरकार भूल जाती है. ऐसे में एक प्राइवेट स्कूल अपने घर से तो पैसे लगा कर  तो 25 परसेंट बच्चों को नहीं पढ़ायेगा. स्कूल में कई तरह के खर्च होते है. सारा कुछ स्कूल तो नहीं कर सकता है. इसके लिए या तो सरकार करें या फिर अभिभावकों को करना पड़ेगा.
शमायल अहमद, प्राइवेट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन

30 अगसत तक डीइओ को डाला है प्राइवेट स्कूल की पूरी जानकारी

30 अगसत तक डीइओ को डाला है प्राइवेट स्कूल की पूरी जानकारी

प्रभात खबर इंपैक्ट

- 2014 में आरटीइ नामांकन को लेकर शिक्षा विभाग हुआ सख्त
- तमाम डीइओ के बैठक में दिये गये निर्देश
संवाददाता, पटना
प्राइवेट स्कूल में शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन को लेकर बिहार शिक्षा विभाग काफी सख्त हो गया है. प्रभात खबर में छपी आरटीइ के खबर को लेकर विभाग ने आरटीइ के नामांकन की प्रक्रिया की पूरी जांच करने का फैसला लिया है. विभाग की ओर से पूरे प्रदेश के जिला शिक्षा पदाधिकारी के साथ एक बैठक किया गया. इसमें तमाम डीइओ को यह निर्देश दिया गया है कि 2014 में जिस जिले में जितने प्राइवेट स्कूल है, उसकी पूरी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करें. ये प्राइवेट स्कूल मान्यता प्राप्त है या नहीं, स्कूल में क्लास वन में छात्रों की संख्या कितनी है, स्कूल में आरटीइ के तहत बैंक खाता खुला है या नहीं, कुल बच्चों की संख्या का 25 फीसदी नामांकन लिया गया है या नहीं. इन तमाम बातों की जानकारी अब जिला शिक्षा पदाधिकारी को वेबसाइट पर डालना होगा. इससे आरटीइ के तहत नामांकन की पूरी पारदर्शिता लायी जायेगी.

कोट
अब हर जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी को प्राइवेट स्कूल के नामांकन की जानकारी स्पष्ट रूप से सारे डाटा के साथ वेबसाइट पर डालना होगा. किस जिले के प्राइवेट स्कूल में कुल कितने बच्चे है और वहां पर 25 फीसदी नामांकन हुआ या नही. तमाम डीइओ को 30 अगस्त तक वेबसाइट पर सारी जानकारी देने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा अलग से हर जिले से प्राइवेट स्कूल का डाटा शिक्षा विभाग को भी उपलब्ध करवाना है.
आरएस सिंह, प्रवक्ता, बिहार शिक्षा विभाग 

बिना नामांकन के आरटीइ के तहत 29 बच्चों के नाम निकल गया 1 लाख 20 हजार 118 रुपये

बिना नामांकन के आरटीइ के तहत 29 बच्चों के नाम निकल गया 1 लाख 20 हजार 118 रुपये

- बक्सर में दो प्राइवेट स्कूल को बिना मान्यता के ही दे दी गयी राशि
- 4 लाख 47 हजार 336 रुपये के भुगतान पर विभाग ने लगाया है प्रश्न चिन्ह
संवाददाता, पटना
शिक्षा के अधिकार के तहत होने वाले नामांकन में स्कूलों को कुछ नियमों को पालन करना होता है. इसमें नामांकन के लिए अलग से आवेदन फार्म के अलावा बैंक अकाउंट प्रत्येक स्कूल में खोलना अनिवार्य है. प्रत्येक स्कूल को आरटीइ के तहत नामांकन लेने वाले बच्चों के लिए अलग से बैंक अकाउंट खोलना है जिसमें सरकार द्वारा भेजा गया बच्चों के नाम की राशि जमा होगी. लेकिन इस नियम का पालन प्राइवेट स्कूल में कितना किया गया है. इस बात का खुलासा बक्सर के तीन प्राइवेट स्कूलों में जांच के बाद सामने आया है. बक्सर के इन तीनों स्कूलों में जब आरटीइ के नामांकन की जांच की गयी तो पता चला कि स्कूल में नामांकन हुआ नहीं और वहां पर राशि भेज दी गयी. डीएवी पब्लिक स्कूल, बक्सर और फाउंडेशन स्कूल, बक्सर में 29 ऐसे बच्चों के नाम से राशि का भुगतान कर दिया गया जिनका नामांकन हुआ ही नहीं था. इन बच्चों के 2011 और 2012 के तहत 1 लाख 20 हजार 118 रुपये का भुगतान कर दिया गया.
-  4 लाख 47 हजार 336 रुपये के भुगतान पर हो रही जांच
शिक्षा विभाग के पत्रंक 8/व3-55-2012/137 के द्वारा राज्य योजना मद अंतर्गत बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार के क्रियान्वयन के अंतर्गत मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों के लिए बक्सर जिला के प्राइवेट स्कूल में वर्ष 2011 में 72 एवं वर्ष 2012 में नामांकित 36 बच्चों के लिए प्रति बच्च 4142 रुपया के दर से कुल 4 लाख 47 हजार 336 भुगतान किया गया. नामांकन तो हो गया. राशि की भुगतान भी कर दिया गया. शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा आरटीइ के तहत उन्हीं स्कूलों में नामांकन लिया जायेगा जो स्कूल बिहार सरकार से निबंधित हो. इसके अलावा स्कूल को क्लास वन में कुल छात्रों की संख्या बतानी होगी.

विभाग द्वारा जांच के बाद इन बिंदुओं पर उठा है प्रश्न चिन्ह
- तीन में से दो स्कूल किसी भी बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है. लेकिन इन्हें राशि का भुगतान कर दिया गया
- स्कूलों के द्वारा क्लास वन के कुल छात्रों की संख्या नहीं बतायी गयी है.
- डीएवी पब्लिक स्कूल, बक्सर द्वारा दिखाया गया कि 14 बच्च फस्र्ट डिवीजन से पास किया है. जो स्पष्ट नहीं था, क्योंकि राशि क्लास वन में नामांकन के लिए दिया जाना था. इस प्रकार 57988 रुपये की राशि संदिग्ध है
- फाउंडेशन स्कूल, बक्सर में 2012 का छह बच्चों का जिक्र किया गया था. लेकिन स्कूल ने इसकी संख्या काट कर 2011 में 10 और 2012 में 11 नामांकन की गलत प्रति बना डाली. जिससे कुल 15 बच्चों के नामांकन का गलत भुगतान राशि 62130 रुपये का कर दिया गया
- किसी भी विद्यालय द्वारा प्रीरिसिट में यह जिक्र नहीं किया गया था कि क्लास वन में कुल सीट का कितना नामांकन किया गया

इन स्कूल पर लगा है पैसे देने को लेकर प्रश्न चिन्ह
1. डीएवी पब्लिक स्कूल, बक्सर
2011 में नामांकन की संख्या  - 32
निर्गत की गयी राशि   - 1 लाख 32 हजार 544
2012 में नामांकन की संख्या  -  14
निर्गत की गयी राशि   -  57 हजार 988
2. फाउंडेशन स्कूल, बक्सर
2011 में नामांकन की संख्या  - 10
निर्गत की गयी राशि   - 41 हजार 420
2012 में नामांकन की राशि  -  11
3. बिहार पब्लिक स्कूल, बक्सर
2011 और 2012 में नामांकन की संख्या  - स्कूल ने नहीं दिया है
लेकिन इस स्कूल को 2011 में 1 लाख 24 हजार 260 और 2012 में 45 हजार 562 रुपये की राशि का भुगतान कर दिया गया

कोट
 उनकी पूरी जांच की जा रही है. लेखा परीक्षा को इस अनियमितता के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है. शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन के नियम को स्कूल ने कितना पालन किया. स्कूल अगर मान्यता प्राप्त नहीं था तो फिर राशि का भुगतान कैसे किया गया. स्कूल में बैंक खाता से लेकर राशि का भुगतान नगद या चेक किससे किया गया, इन बातों की भी जांच की जायेगी.
आरएस सिंह, प्रवक्ता, बिहार शिक्षा विभाग 

नामांकन भी नहीं हुआ, आरटीइ के तहत निकल गयी राशि

नामांकन भी नहीं हुआ, आरटीइ के तहत निकल गयी राशि

-- बक्सर के तीन निजी स्कूलों का मामला
-- 2011 व 2012 में 120118 रुपये का किया भुगतान
संवाददाता,पटना
शिक्षा का अधिकार (आरटीइ) के तहत नामांकन में स्कूलों को कुछ नियमों का पालन करना होता है. नामांकन के लिए अलग से आवेदन फॉर्म के अलावा बैंक अकाउंट हर स्कूल में खोलना अनिवार्य है. खाते में बच्चों के नाम से राशि जमा होगी, लेकिन नियम का पालन प्राइवेट स्कूल ने कितना किया है. खुलासा बक्सर के तीन निजी स्कूलों में जांच के बाद सामने आया है. बक्सर के तीनों स्कूलों में जब आरटीइ के नामांकन की जांच हुई  तो पता चला कि तीन में दो स्कूलों में नामांकन हुआ ही नहीं है और वहां राशि भेज दी गयी है. दो स्कूल डीएवी पब्लिक स्कूल,बक्सर और फाउंडेशन स्कूल,बक्सर में 2011 और 2012 में कुल 29 ऐसे बच्चों के नाम से 1 लाख 20 हजार 118 रुपये की राशि का भुगतान कर दिया गया, जिनका नामांकन ही नहीं हुआ था. इसमें डीएवी पब्लिक स्कूल, बक्सर में 2012 में 14 बच्चों का नामांकन की गलत लिस्ट तैयार की गयी. वहीं फाउंडेशन स्कूल, बक्सर में 2011 और 2012 सत्र में 6 बच्चे का नामांकन लिया गया, लेकिन लिस्ट 15 बच्चों का तैयार कर दिया गया. कहा जायें तो दोनों स्कूलों में मिलाकर 29 ऐसे बच्चे है जिनका नामांकन नही हुआ लेकिन उनके नाम से  1 लाख 20 हजार 118 रुपये का भुगतान कर दिया गया.
447336 रुपये के भुगतान की जांच : राज्य योजना मद के अंतर्गत मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों के लिए बक्सर जिला के प्राइवेट स्कूल में 2011 में 72 एवं 2012 में नामांकित 36 बच्चों के लिए प्रति बच्च 4142 रुपया के दर से 447336 रुपये का भुगतान किया गया. शिक्षा विभाग आरटीइ के तहत उन्हीं स्कूलों में नामांकन लेगा, जो स्कूल बिहार सरकार से निबंधित हो. इसके अलावा स्कूल को क्लास वन में छात्रों की संख्या बतानी होगी.
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जांच के बाद उठे सवाल
- तीन में दो स्कूल किसी भी बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं हैं, लेकिन इन्हें राशि का भुगतान किया गया.
- स्कूलों ने क्लास वन के छात्रों की संख्या नहीं बतायी.
- डीएवी पब्लिक स्कूल,बक्सर ने दिखाया है कि 14 बच्चे फस्र्ट डिवीजन से उत्तीर्ण हुए हैं. जो स्पष्ट नहीं था. राशि क्लास वन में नामांकन के लिए दिया जाना था. इस प्रकार 57988 रुपये की राशि संदिग्ध है.
 - फाउंडेशन स्कूल,बक्सर में 2012 के छह बच्चे की चर्चा थी. स्कूल ने 2011 में 10 और 2012 में 11 नामांकन की गलत प्रति बना डाली. 15 बच्चों के नाम से गलत भुगतान 62130 रुपये कर दिया गया.
- किसी भी विद्यालय ने जिक्र नहीं किया कि क्लास वन में कुल सीट का कितना नामांकन हुआ.
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इन स्कूल पर लगे हैं आरोप
1. डीएवी पब्लिक स्कूल, बक्सर
एफिलिएशन नंबर  -  330195
2011 में नामांकन : 32
निर्गत राशि  : 1 लाख 32 हजार 544
2012 में नामांकन :  14
निर्गत राशि :  57 हजार 988
2. फाउंडेशन स्कूल,बक्सर
एफिलिएशन नहीं है
2011 में नामांकन : 10
निर्गत राशि : 41 हजार 420
2012 में नामांकन :  11
3. बिहार पब्लिक स्कूल, बक्सर
एफिलिएशन नहीं है
2011 और 2012 में नामांकन : स्कूल ने जानकारी नहीं दी
निर्गत राशि : स्कूल को 2011 में 1 24260 और 2012 में 45562 रुपये का किया भुगतान
कोट
मामले की जांच हो रही है. लेखा परीक्षा को अनियमितता के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया है. शिक्षा का अधिकार के तहत नामांकन के नियम को स्कूल ने कितना पालन किया. स्कूल को अगर मान्यता नहीं थी,तो फिर राशि का भुगतान कैसे हुआ. राशि का भुगतान नगद या चेक किससे किया गया. इसकी जांच होगी.
                                                             आरएस सिंह, प्रवक्ता सह संयुक्त निदेशक, प्राथमिक शिक्षा

स्कूलों की गलती की सजा सुनायेगा सुप्रीम कोर्ट

स्कूलों की गलती की सजा सुनायेगा सुप्रीम कोर्ट

- आरटीइ में गलती की सजा जायेगी सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास
- 2014 से होगी पूरी समीक्षा
- बिहार सरकार ने जारी किया शिकायत निवारण प्रक्रिया
संवाददाता, पटना
तीन साल बीत चुके है. अब अगर स्कूल में सही से शिक्षा का अधिकार कानून लागू नहीं हुआ तो इसकी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगी. उसके बाद स्कूल का भविष्य सीधे सुप्रीम कोर्ट तय करेगा.  आरटीइ में तीन साल की छूट के बाद अब कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग की ओर से शुरूआत कर दी गयी है.  विभाग की ओर से आरटीइ को कड़ाई से लागू करने के लिए 2014 से प्रक्रिया में तेजी लायी जा रही है. राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग के माध्यम से पूरे प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों का आकलन किया जा रहा है. इसके तहत स्कूलों का रिकार्ड देखा जायेगा कि स्कूल में पिछले तीन साल में आरटीइ के तहत कितने नामांकन हुए. इसके अलावा 2014 में नामांकन कुल संख्या का कितना है. 30 जुलाई तक नामांकन का लिस्ट तैयार कर, 15 अगस्त
- 25 फीसदी से कम हुआ तो जुर्माना
2014 से तमाम स्कूलों का रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगा. इसके तहत क्लास वन में छात्र के कुल संख्या का 25 फीसदी नामांकन की प्रक्रिया की पूरी जांच होगी. स्कूल में क्लास वन में जितने छात्र है उसका 25 फीसदी नामांकन लिया गया है या नहीं, यह देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस पर स्कूल पर कार्रवाई कर सकता है. अगर स्कूल 25 फीसदी से कम नामांकन लेते हुए पकड़ में आयेंगे तो स्कूल पर 1 लाख से लेकर 10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट चाहे तो स्कूल का रजिस्ट्रेशन भी खत्म कर सकता है.
- विभाग ने बनाया शिकायत निवारण प्रक्रिया
बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बच्चों की शिक्षा के अधिकार के संबंध में शिकायतों के लिए बिहार शिक्षा विभाग की ओर से शिकायत निवारण की शुरूआत की गयी है. इस निवारण के माध्यम से एक प्रक्रिया शुरू की गयी है. अगर कोई स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेता है तो इस निवारण प्रक्रिया के माध्यम से अभिभावक विभाग के पास शिकायत कर सकते है. इस शिकायत के बाद स्कूल पर कार्रवाई की जायेगी. इसके लिए विभाग ने 5 स्तर पर प्रक्रिया निभायी जायेगी. इसमें स्थानीय प्राधिकार, शिकायत प्राप्ति स्थल, शिकायत पंजी, शिकायत दाखिल करना एवं निष्पादन की प्रक्रिया और प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन करना आवश्यक है.
स्थानीय प्राधिकार   - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति को तथा नगर निगम, नगर परिषद एवं नगर पंचायत की सशक्त स्थायी समिति को स्थानीय प्राधिकार घोषित किया गया है. ग्राम पंचायत की शिक्षा समिति प्राथमिक विद्यालय तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति मध्य विद्यालय के लिए स्थानीय प्राधिकार घोषित है.
शिकायत प्राप्ति स्थल  - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति तथा नगर निकाय की शिक्षा सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय स्थल पर शिक्षा के अधिकार संबंधित शिकायत प्राप्त किया जायेगा. इसके लिए स्थानीय प्राधिकार के द्वारा प्राप्तकर्ता का नाम एवं पदनाम घोषित किया जायेगा. स्थानीय प्राधिकार का यह दायित्व होगा कि  इसकी जानकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में आम लोगों को दे.
शिकायत पंजी  - स्थानीय प्राधिकार की शिक्षा समिति एवं सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय में शिकायत पत्रों की प्राप्ति हेतु एक शिकायत पंजी भेजी जायेगी. इस शिकायत पंजी में दर्ज शिकायत को शिकायत कर्ता के पास तिथि के साथ रसीद दी जायेगी.
शिकायत दाखिल करना एंव निष्पादन की प्रक्रिया - शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायतों की एक सूची तैयार की जायेगी. प्रत्येक शिकायत के संबंध में कार्रवाई सक्षम प्राधिकार तथा अपील हेतु अपीलीय प्राधिकार के पास जायेगा. शिकायत प्राप्ति के 7 दिनों के अंदर स्थानीय प्राधिकार द्वारा शिकायत का निष्पादन किया जायेगा. अगर वो निष्पादन नहीं कर पायेगे तो उसे सक्षम प्राधिकार के पास भेज दिया जायेगा. सक्षम प्राधिकार शिकायत को 30 दिनों के अंदर निष्पादन करेंगे.
प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन - आरटीइ के तहत अब आम लोगों को भी जोड़ने का प्रयास किया जायेगा. प्राप्त शिकायतों के निष्पादन हेतु प्रखंड एवं जिला स्तर पर प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को एक शिक्षा संवाद का आयोजन किया जायेगा. इसमें राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के राज्य इकाई के द्वारा सहयोग दिया जायेगा.

कोट
सुप्रीम कोर्ट के आरटीइ को लागू करने के लिए तीन सालों की सुविधा तमाम प्राइवेट स्कूलों को दिया था. इसके लिए स्कूल तीन सालों में आरटीइ को समझ कर इसे अपने यहां लागू करेंगे. यह तीन साल 2013 में पूरा हो गया है. इस कारण 2014 से इस पर पूरी गंभीरता से हम कार्य कर रहे है. अगस्त में इसे पूरा कर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट भेंजेंगे.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल संरक्षण अधिकार आयोग

यह 4300 सौ किस मद में जाता है, ना डीइओ को पता और ना स्कूल प्रशासन को

यह 4300 सौ किस मद में जाता है, ना डीइओ को पता और ना स्कूल प्रशासन को

- आरटीइ के तहत पैसे तो मिलते है, खर्च की जानकारी नहीं है स्कूल के पास
- स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से बस भेज दिया जाता है राशि
संवाददाता, पटना
शिक्षा के अधिकार के तहत हर बच्चे स्कूल जायें.  इसके लिए  सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून तो बना दिया, लेकिन इसकी प्लानिंग सही से नहीं किया गया. इसका एक बड़ा उदाहरण तब सामने आता है जब स्कूल के पास आरटीइ के मद में दी जाने वाली राशि (4300) पहुंचती है. जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से प्रति बच्चे के हिसाब से राशि स्कूल के  प्रिंसिपल के नाम से भेजी तो जाती है. लेकिन इस राशि को आरटीइ के तहत आये बच्चों के लिए किस तरह से खर्च करना है, इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन के पास नहीं होती है. साल में एक बार भेजी जाने वाली यह राशि हर स्कूल अपने हिसाब से खर्च करता है. कहीं पर ट्यूशन फी को माफ कर दिया जाता है तो कहीं पर फ्री एजुकेशन के नाम पर उस राशि को रखा जाता है.
- बच्चों की संख्या के हिसाब से दी जाती है राशि
जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से राशि प्रति बच्चे की संख्या के अनुसार स्कूल को भेजा जाता है. नये सत्र के शुरू होने के बाद आरटीइ के तहत नामांकन ली जाती है. इसके लिए हर स्कूल को एक महीने का समय दिया जाता है. नामांकन की प्रक्रिया होने के बाद बच्चो की संख्या की लिस्ट हर जिले के स्कूल के अनुसार सर्व शिक्षा अभियान के पास भेजा जाता है. जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के अनुसार सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से किस स्कूल में कितने बच्चों के नामांकन होने है. इसका लिस्ट कार्यालय को उपलब्ध करवाया जाता है. डीइओ कार्यालय से फिर स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से राशि भेजा जाता है. सूत्रों के अनुसार किस मद में इस राशि को जाना है, यह स्पष्ट नहीं होता है. बस स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से राशि का चेक भेजा जाता है.
- नामांकन जून में राशि मिलता है सितंबर में
आरटीइ के तहत हर स्कूल में नामांकन मई से जून तक लिया जाता है. नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से फ्री होती है. दो महीने नामांकन की प्रक्रिया करने के बाद जुलाई से अगस्त तक पूरे स्कूल से बच्चों की संख्या का डाटा तैयार किया जाता है. फिर उस डाटा के अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से राशि का आवंटन होता है. फिर उस राशि को सर्व शिक्षा अभियान प्रत्येक जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास भेजता है. जिला शिक्षा पदाधिकारी फिर उस राशि को हर स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से बच्चों के शिक्षा के लिए भेजती है.

इन स्कूलों को मिला 2012-13 में यह राशि

स्कूल                                      मिलने वाली राशि (हजार में)
 डीएवी पब्लिक स्कूल, वाल्मी     -           24616
एसवीएम रेजिडेंसियल पब्लिक स्कूल   -  30770
प्रेमालोक मिशन स्कूल    -   21539
डीएवी पब्लिक स्कूल, खगौल    -   58463
कृष्णा निकेतन, वाइपास    -  21539
सेंट जोसफ हाई स्कूल, कंकड़बाग  -  76925
मेय फ्लावर स्कूल, दीघा    -  24616
पटना सेंट्रल स्कूल, न्यू वाइपास   -  123080
एवीएन इंगलिश स्कूल, पाटलिपुत्र   -  83079
पटना मुसलिम हाई स्कूल, बीएम दास   -  76925
लोहिया नगर माउंस कार्मेल हाई स्कूल, कंकड़बाग   - 30770
रेड कार्पेट हाइ स्कूल, राजेन्द्र नगर   -  15385
स्कूल ऑफ क्रियेटिव लर्निग, दानापुर  -   307770
किड्डी कांवेंट हाई स्कूल, गुलजारबाग    -   61540
डा. डी राम डीएवी पब्लिक स्कूल, गोला रोड   -  6154
कृष्णा पब्लिक स्कूल, बिहटा    -  12308
शिवम स्कूल, बिहटा      -   36924
आरपीएस पब्लिक स्कूल,  गुलजार बाग   -  30770
एवीएन स्कूल, राजीव नगर    -    46155
दी अर्थ पब्लिक स्कूल,  पुनपुन   -  30770
सेंट मैरिज स्कूल, मसौढ़ी     -   138465

कोट
सर्व शिक्षा अभियान की ओर से हम स्कूल के अनुसार बच्चों की लिस्ट मांगते है. जिस स्कूल में जितने शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन होना होता है. वहां पर उतनी राशि प्रति बच्चों के हिसाब से भेजते है. यह राशि बस स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से भेजा जाता है.
महेश सिंह, डीइओ, पटना

स्कूल के पास पैसे डीइओ के माध्यम से ही भेजा जाता है. सर्व शिक्षा अभियान की ओर से स्कूलों की रिपोर्ट तैयार की जाती है. जिसमें यह देखा जाता है कि किस स्कूल में कितने बच्चों का आरटीइ के तहत नामांकन हो रहा है. उस फीगर के अनुसार राशि विभाग की ओर से दी जाती है. प्रति बच्चों के अनुसार विभाग से राशि मिलता है.
कौशल किशोर, कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान

बजट तीन करोड़, फिर भी नहीं मिलेगा सीबीएसइ सर्टिफिकेट

बजट तीन करोड़, फिर भी नहीं मिलेगा सीबीएसइ सर्टिफिकेट

- आरटीइ के तहत नामांकन लेने वाले अधिकांश स्कूल है सीबीएसइ से नॉन एफिलिएयेटेड
- कई बड़े स्कूल भरते है जुर्माना, नहीं लेते नामांकन
संवाददाता, पटना
हर साल शिक्षा के अधिकार के लिए गवर्नमेंट करोड़ो रुपये खर्च करती है. आरटीइ के तहत नामांकित बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ने के लिए विभाग की ओर से हर महीने तीन सौ रुपये भी छात्र की संख्या के अनुसार स्कूल के एकाउंट में भेजे जा रहे है. प्राइवेट स्कूल में  बच्चे एडमिशन तो ले रहे है, लेकिन ये सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से 10वीं या मैट्रिक  नहीं कर पायेंगे और इन बोर्ड के सर्टिफिकेट भी इन बच्चों को नहीं मिल पायेगी. क्योंकि अभी पटना जिला के जितने स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन लिया है. उसमें अधिकांश स्कूल सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने मान्यता प्राप्त नहीं है. ऐसे में ये बच्चे बस आठवीं तक ही आरटीइ के तहत प्राइवेट स्कूल में पढ़ पायेंगे. आठवीं के बाद इन्हें सरकारी स्कूल में आना होगा.
- 61 स्कूल में 35 को नहीं है सीबीएसइ की मान्यता
पटना शहरी क्षेत्र के लगभग 61 स्कूल अपने यहां पर आरटीइ के तहत नामांकन ले रहे है. इन स्कूलों में सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड की पढ़ाई होती है. इसमें लगभग 35 स्कूलों को सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की मान्यता नहीं मिली हुई है. ऐसे में नौवीं क्लास के रजिस्ट्रेशन के समय इन छात्रों को स्कूल से निकाल दिया जायेगा. आइसीएसइ बोर्ड के एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार मान्यता नहीं होने के कारण स्कूल के छात्र किसी दूसरे स्कूल से नौवीं में रजिस्टट्रेशन करवाते है. ऐसे में आरटीइ के तहत नामांकन लिये छात्रों को स्कूल बाहर कर देगा. वहीं सीबीएसइ का एक स्कूल ने बताया कि आठवीं तक ही बच्चों का नामांकन लिया गया है.
- 3070 से बढ़कर 4300 रुपया हो गया
शिक्षा के अधिकार के तहत पहले 3070 रुपये दिये जाते थे. साल भर के लिए दिये जाने वाले इन पैसे से बच्चों को एडमिशन और महीने का चार्ज होता था. लेकिन स्कूलों की ओर से शिकायत करने के बाद 2011-12 सत्र से इस पैसे को बढ़ा कर 4142 रुपया कर दिया गया. लेकिन फिर 2013-14 में इसे बढ़ा कर 4300 रुपया किया गया है.  विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हर महीने बच्चों के नाम के अनुसार स्कूल को पैसे भेजे जाते है.
- आठवीं तक ही पढ़ पायेंगे स्टूडेंट्स
जिन स्कूलों को सीबीएसइ की मान्यता नहीं है. वो तमाम स्कूल आठवीं के बाद छट जायेंगे. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से वो रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पायेंगे. फिर उन्हें बिहार बोर्ड के स्कूलों से ही मैट्रिक की परीक्षा देनी होगी. शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिन स्कूलों को सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की मान्यता नहीं है, लेकिन अगर वो बिहार राज्य से निबंधित है तो ऐसे छात्र को बिहार बोर्ड के स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा दे सकते है.
- नामांकन से अधिक जुर्माना देना पसंद करते है स्कूल
 मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को लागू तो कर दिया गया, लेकिन अभी भी यह स्कूलों तक पहुंच नहीं पाया है. पटना शहर में कई बड़े स्कूल पिछले कुछ सालों में खुले है. लेकिन इसमें कोई भी स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेता है. दिल्ली पब्लिक स्कूल, बिड़ला स्कूल, त्रिभुवन स्कूल आदि जितने भी स्कूल है, वहां पर अभी तक एक भी नामांकन आरटीइ के तहत नहीं लिया गया है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश वहीं स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन ले रहे है जो शहर के छोटे और बिना मान्यता के चलने वाले स्कूल है.

पिछले तीन सालों का आरटीइ के तहत इतने रुपये हो गये खर्च
 2011-12 में खर्च राशि  -  2, 04, 13, 654 करोड़ रुपये
2012-13 में खर्च राशि   -  3,12,05,828 करोड़ रुपये
2013-14 में खर्च राशि  -   4,32,45, 678 करोड़ रुपये


कोट
जो स्कूल सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त है, वो हमारे पास आते ही नहीं है. एक तो अल्पसंख्यक के नाम पर मिसनरी ने खुद को इससे अलग कर रखा है. वहीं जो नामी और बड़े स्कूल है वो जुर्माना देना पसंद करते है, लेकिन जरूरतमंद गरीब बच्चों का नामांकन नहीं लेते है. हर नामी स्कूल हर साल जुर्माना भरने हमारे पास आते है. लेकिन आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेते है.
कौशल किशोर, कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्वशिक्षा अभियान

स्कूल 15 हजार और 2011 में नामांकन हुए 3228

स्कूल 15 हजार और 2011 में  नामांकन हुए 3228

- आरटीइ के तहत पूरे बिहार के प्राइवेट स्कूलों में 50 फीसदी भी नहीं हो पाया नामांकन
- पांच प्रमंडल के कई जिलों में 2011 और 2012 में 25 फीसदी नामांकन रहा शून्य
संवाददाता, पटना
शिक्षा लेने का अधिकार हर किसी को है. शिक्षा में समानता लाने के लिए इसे प्राइवेट स्कूलों में लागू किया गया. लेकिन बिहार में शिक्षा के तहत बच्चों में कितनी समानता है यह 2011 और 2012 सत्र के आरटीइ के तहत लिये गये नामांकन में पता चल रहा है. अभी तक हमने राजधानी पटना के प्राइवेट स्कूलों में आरटीइ के तहत नामांकन की स्थिति ही देखी. लेकिन अगर बात पूरे प्रदेश की होगी तो उसका भी हाल बहुत अच्छा नहीं है.  पटना सहित पूरे बिहार में आरटीइ के नाम पर बस खानापूर्ति ही की गयी है. प्राइवेट स्कूलों ने अपनी मर्जी से जो चाहा  नामांकन लिया. बाल अधिकार संरक्षण आयोग की माने तो अभी बिहार में कुल 15 हजार के लगभग में प्राइवेट स्कूलों की संख्या है. लेकिन यहां पर आरटीइ के तहत नामांकन की दर बहुत ही निम्न है. 2011 में जहां 3228 बच्चों का नामांकन पूरे प्रदेश में लिया गया वहीं 2012 में आरटीइ के तहत नामांकन की कुल संख्या 4306 रही. कहा जायें तो 2011-12 और 2012-13 सत्र में आरटीइ के तहत कुल 7534 बच्चों का नामांकन पूरे प्रदेश में लिया गया. इन बच्चों की पढ़ाई के खर्च के लिए सरकार ने 31205828 करोड़ रुपये की खर्च भी किया है.
- कई जिलों में नामांकन शून्य पर रहा
 प्रदेश के तमाम जिलों की रिपोर्ट देखी जायें तो कई प्राइवेट स्कूल ऐसे है जहां 2011 में तो नामांकन का प्रतिशत बढ़िया रहा, लेकिन अगले साल यानी 2012 में आकर यह आधे से भी कम हो गया. वहीं कई स्कूल बस खुद को बचाने के लिए आरटीइ के तहत नामांकन लिये. कई जिलों के स्कूलों का तो यह हाल है जहां पहले साल तो नामांकन बढ़िया रहा, लेकिन 2012 में घट कर आधे से भी कम हो गया. सबसे आश्चर्य की बात है कि प्रदेश के कई जिलें की स्थिति तो ऐसी है जहां पर एक भी नामांकन आरटीइ के तहत नहीं हो पाया. नागरिक अधिकार मंच बिहार के शिव प्रकाश राय की माने तो 2011 और 2012 के रिपोर्ट देखने के बाद पता चलता है कि आरटीइ के नाम पर बस स्कूल वाले सरकार से पैसे ले रहे है. सरकार भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है. इन स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.

पूर्णिया प्रमंडल में नामांकन की संख्या  - 507
जिला     -    2011 में      -    2012
अररिया  -     58            -     60
कटिहार   -   23            -      40
किशनगंज  -  40           -      204
पूर्णिया     -    37           -      45  

मगध प्रमंडल में नामांकन  की संख्या  -  857
जिला           -    2011 में      -    2012
औरंगाबाद     -      0             -   40
गया               -     201          -   98
अरवल          -      0             -   0
जहानाबाद     -      198          -   193
नवादा           -      62            -   65

भागलपुर प्रमंडल में नामांकन की संख्या   -  824
जिला           -    2011 में      -    2012
बांका          -      79            -    90
भागलपुर     -      603          -    52

मुंगेर प्रमंडल में नामांकन की संख्या  -   724
जिला           -    2011 में      -    2012
बेगूसराय     -        68          -     62
जमूई          -          0           -     81
खगड़िया     -          0           -    125
लखीसराय   -        10           -      9
मुंगर           -         74          -     130
शेखपुरा       -         46          -      47

पटना प्रमंडल में नामांकन की संख्या   -  1417
जिला           -    2011 में      -    2012
भोजपुर       -       58            -     227
बक्सर        -        72            -      36
कैमूर         -        38            -      50
नालंदा       -        65             -      50
पटना         -       350            -      329
रोहतास     -          64            -       78

दरभंगा प्रमंडल में नामांकन की संख्या   -  524
जिला           -    2011 में      -    2012
दरभंगा        -       120          -     149
मधुबनी       -         34          -      67
समस्तीपुर    -         73          -       81

सारण प्रमंडल में नामांकन की संख्या   -  556
जिला           -    2011 में      -    2012
गोपालगंज     -       0            -     76
सारण           -     213          -      97
सिवान          -       95          -       75

कोशी प्रमंडल में नामांकन की संख्या  -  364
जिला           -    2011 में      -    2012
मधेपुरा         -       0            -      113
सुपौल          -       0             -      32
सहरसा        -       41           -      178

तिरहुत प्रमंडल में नामांकन की संख्या  -  1833
जिला           -    2011 में      -    2012
पूर्वी चंपारण    -      33            -    127
मुजफ्फरपुर     -      229          -     272
शिवहर            -      82           -    0
सीतामढ़ी         -      28           -    10
वैशाली           -       114         -    96
पश्चिम चंपारण   -       20         -    822

कोट
आरटीइ के तहत अब संख्या में सुधार हो रहा है. शुरूआत में तो इसकी स्थिति बहुत ही खराब थी. स्कूलों का रजिस्ट्रेशन की संख्या में बढ़ायी जा रही है. इससे अब संख्या बढ़ेगी. अब धीरे-धीरे स्कूलों में नामांकन की गति बढ़ी है. इस साल से इस पर और ध्यान दिया जा रहा है.  2014 में नामांकन की गति और तेज होने की संभावना है.
आर एस सिंह, प्रवक्ता, शिक्षा विभाग

आयोग की ओर से समय समय पर समीक्षा की जाती है. 2011 में कई जिलों नामांकन कम होने के कारण वहां पर नामांकन करवाया गया. अभी स्कूलों हर स्कूलों से दूबारा रिपोर्ट मंगवायी जा रही है. ऐसे स्कूलों की रिपोर्ट तैयार की जायेगी जहां पर नामांकन काफी कम है.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग 

2440 की जगह 700 बच्चे को ही मिला शिक्षा का अधिकार

2440 की जगह 700 बच्चे को ही मिला शिक्षा का अधिकार

- शिक्षा के नाम पर बस खानापूर्ति हो रही है प्राइवेट स्कूलों में
- 120 की जगह 8 से 10 बच्चें के एडमिशन पर ही सिमट गया स्कूल
संवाददाता, पटना
सब पढ़े सब बढ़े के तहत आरटीइ लागू किया गया. इसके तहत हर प्राइवेट स्कूलों को नामांकन लेना था. जब राजधानी पटना में प्राइवेट स्कूलों में आरटीइ का पूरा उल्लघंन हो रहा है तो दूसरे जिलों की बात ही क्या करें. पटना शहरी क्षेत्र के स्कूलों की बात करें तो कुल 120 स्कूल बिहार सरकार से रजिस्ट्र्ड है. इसमें अभी तक मात्र 61 स्कूलों ने ही अपने यहां पर आरटीइ के तहत नामांकन लिया है. यह नामांकन बस नाम मात्र का है. बस खानापूर्ति की गयी है. किसी स्कूल में 5 नामांकन तो किसी स्कूल में 10 नामांकन हुए है. कई स्कूल तो ऐसे है जहां पर 2013-14 में जीरो नामांकन किया गया है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार 2013-14 सत्र में पटना शहरी क्षेत्र मात्र 7 सौ बच्चे का ही आरटीइ में नामांकन हो पाया.
- हर स्कूल में चलता है तीन सेक्शन
हर प्राइवेट स्कूल में क्लास वन में तीन सेक्शन चलता है . हर सेक्शन में कम से कम 40 बच्चे होते है. ऐसे में क्लास वन में 120 सीट हुआ. जिसमें बच्चों का एडमिशन लिया जाना था. अगर बात आरटीइ के तहत नामांकन लेने की बात हो तो हर स्कूल को 40 बच्चों का नामांकन लेना चाहिए था. लेकिन किसी भी स्कूल ने ऐसा नहीं किया है. आरटीइ के नाम का बस खानापूर्ति किया गया है. अगर बस 61 स्कूलों के नामांकन की बात करें तो यहां पर 2440 बच्चों का नामांकन आरटीइ के तहत लिया जाना चाहिए था. लेकिन हजार का आंकड़ा भी बच्चे छू नहीं पायें. नागरिक अधिकार मंच के शिव प्रकाश राय ने बताया कि आरटीआइ से मिली जानकारी के अनुसार आरटीइ के तहत नामांकन काफी कमजोर है. प्राइवेट स्कूलों में नामांकन नहीं के बराबर है.   एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार जो बच्चे आरटीइ के तहत हमारे पास आते है तो उनका नामांकन हम लेते है. ऐसे बच्चों के लिए हम अलग से तैयारी करनी पड़ती है.

सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों में 2013-14 में हुआ आरटीइ के तहत एडमिशन
आरटीइ के तहत इन स्कूलों में रहा जीरो नामांकन  -
 ज्ञान निकेतन,
 डा. जी एल दत्ता डीएवी पब्लिक स्कूल, ट्रांसपोर्ट नगर,
 ज्ञानोदय गुरुकुल, गोला रोड,
एकलव्य एजुकेशन काम्पलेक्स, पलंगा,
शिवम स्कूल, बिहटा

आरटीइ के तहत इन स्कूलों में हुआ 10 से कम नामांकन  -
 डीएवी पब्लिक स्कूल, वाल्मी, फुलवारी ( 8)
रेड कार्पेट, राजेन्द्र नगर (4)
आदर्श ज्ञानोदय विद्यालय, बाढ़ (8)
ब्लू बेल्स एकेडमी,  खगौल रोड, पटना (3)
द अर्थ पब्लिक स्कूल, श्रीपालपुर, पुनपुन  (8)
प्रेमालोक मिशन स्कूल,  बैरिया (7)
एमएस मेमोरियल एकेडमी, बेली रोड (7)
मे फ्लावर स्कूल, दीघाघाट (8)
शिवम विद्या मंदिर, विक्रम (5)
कृष्णा पब्लिक स्कूल, नउरा (7)
सेंट अगस्टिन एकेडमी, लोहानीपुर (1)
कैथेड्रल पब्लिक स्कूल, पंडारक (5)
जीएमजे कांवेंट हाई स्कूल, नूरानी बाग (4)
गायत्री इंटरनेशनल स्कूल, कदमकुआं (8)
जीसरा मेरी कांवेंट, जमाल रोड (7)
प्रभु तारा स्कूल, गुलजारबाग (5)
मॉर्डन पब्लिक स्कूल, विवेकानंद नगर, पटना सिटी (6)

आरटीइ के तहत इन स्कूलों में हुआ 10 नामांकन   -
विद्या निकेतन, दानापुर
 एसवीएम रेजिडेंसियल पब्लिक स्कूल, राजीव नगर
 कृष्णा निकेतन, न्यू वायपास रोड
विद्या निकेतन गल्र्स हाई स्कूल, बैरिया, पटना
बीडी पब्लिक स्कूल, बुद्धा कोलोनी
आरपीएस रेजिडेंसिलय स्कूल, न्यू बेली रोड
डोनी पोला पब्किल स्कूल लक्ष्मणपुर, बिहटा
स्कूल ऑफ क्रिएटिव लर्निग, दानापुर कैंट
एवी पब्लिक स्कूल, बुद्धा कोलोनी
पटना कांवेंट, रामकृष्णा नगर
किड्स प्राइड, कंकड़बाग
लिटिल गार्डेन प्ले स्कूल
मगध पब्लिक स्कूल, भूपतिपुर

आरटीइ के तहत इन स्कूलों में हुआ 10 के उपर नामांकन
सेंट जोसफ हाई स्कूल, भूतनाथ रोड (20)
स्कॉलर एबॉड, जानीपुर (16)
सत्यम इंटरनेशनल स्कूल, बैरिया, पटना (15)
शिवम कांवेंट, कंकड़बाग (15)
 सत्यम इंटरनेशनल, गौरीचक (20)
 एवीएन स्कूल, राजीव नगर (15)
 डा. दुखनराम डीएवी पब्लिक स्कूल, दानापुर (17)
इस्ट एंड वेस्ट हाई स्कूल, बेला (16)
हिमालय पब्लिक स्कूल, बाटागंज (15)
 डीएवी पब्लिक स्कूल, खगौल, पटना   -  18
ओगेगा मिशन स्कूल, दानापुर कैंट (11)
एवीएन इंगलिश स्कूल, पाटलिपुत्र (40)
आधुनिक शिक्षा मध्य विद्यालय, कदमकुआं ( 15)
मनेर सेंट्रल स्कूल, मनेर (18)
आदर्श इंटरनेशनल स्कूल, खेमनीचक (12)
बीडी पांडेय पब्लिक स्कूल, बिहटा (16)
द इंडियन पब्लिक स्कूल, गुलजारबाग (25)
ज्ञानदीप विद्यालय, फुलवारीशरीफ (11)
शारदा विकास मंदिर, पटना सिटी (25)
सरस्वती शिशु मंदिर, पंडारक (25)
मदर टेरेसा हाई स्कूल, सिपारा (24)
राष्ट्रीय पब्लिक स्कूल, विक्रम (15)
फेयरी लैंड पब्लिक स्कूल, कदमकुआं (13)
पाटलिपुत्र पब्लिक स्कूल, फुलवारी (20)

कोट
हर प्राइवेट स्कूलों को 25 फीसदी नामांकन लेना है. इसके लिए हर साल स्कूलों से रिपोर्ट मंगायी जाती है. अगर स्कूल 25 फीसदी से कम एडमिशन लेता है उनके उपर कार्रवाई होती है. इसके लिए हम स्कूलों से नामांकन की सूची मंगवाते है.
कौशल किशोर, कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान

जब आरटीइ लागू हुआ तो सुप्रीम कोर्ट ने तीन सालों तक के लिए स्कूलों आरटीइ लागू करने का समय दिया गया था. लेकिन 2014 से इसे पूरी तरह लागू करना है. हर स्कूलों को 25 फीसदी नामांकन लेना ही होगा. इसके लिए हम जल्द ही समीक्षा बैठक करेंगे.
निशा झा, अध्यक्ष,  बाल अधिकार संरक्षण आयोग

Wednesday, April 22, 2015

मैथ के साथ बदल गया साइंस का सिलेबस

मैथ के साथ बदल गया साइंस का सिलेबस

- सीबीएसइ 9वीं और 10वीं के सिलेबस को किया सीमित
- सिलेबस के साथ परीक्षा पैटर्न में किया गया चेंज
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने नये सत्र से 9वीं और 10वीं के सिलेबस को चेंज कर दिया है. चेंज करने के साथ सीबीएसइ ने इन क्लासों के सिलेबस को सीमित कर दिया है. कई चैप्टर को हटा दिया है तो वहीं कई नये चैप्टर को जोड़ा गया है. नया सिलेबस इसी सत्र से सीबीएसइ ने लागू कर दिया है. 2015-16 सत्र के लिए बनाया गया यह सिलेबस हर स्कूलों को भेज दिया गया है. सीबीएसइ की माने तो नये सिलेबस से स्कूलों में पढ़ाई शुरू की जायेगी. इसी आधार पर सितंबर में होने वाले एसए-वन (समेटिव असेसमेंट) की परीक्षा ली जायेगी. इसके बाद 9वीं फाइनल और 10वीं बोर्ड परीक्षा भी नये पैटर्न पर ली जायेगी.
- मैथेमेटिक्स में आठ और साइंस में 7 चैप्टर की होगी अब पढ़ाई
सीबीएसइ ने 9वीं और 10वीं के साइंस और मैथेमेटिक्स विषय के सिलेबस को सीमित कर दिया है. अब मैथेमेटिस विषय में 9वीं और 10वीं क्लास मिलाकर आठ चैप्टर की पढ़ाई सीबीएसइ स्कूलों में किया जायेगा. वहीं साइंस विषय में 7 चैप्टर की पढ़ाई 9वीं और 10वीं क्लास में किया जायेगा. सीबीएसइ के अनुसार कई चैप्टर को अब हटा दिया गया है. इंजीनियरिंग और मेडिकल के साथ सिविल सर्विसेज की परीक्षाओं में जिन चैप्टर से अधिक प्रश्न आते है. उन चैप्टर की पढ़ाई अब सेकेंडरी लेबल पर किया जायेगा. इन्हीं चैप्टर को फोकस कर सीबीएसइ ने 9वीं और 10वीं का सिलेबस तैयार किया है.
- ज्योमेट्री से आयेंगे अब सबसे अधिक प्रश्न
सीबीएसइ ने मैथेमेटिक्स विषय का सिलेबस चेंज कर दिया हैं. अभी तक ज्योमेट्री से 40 अंक के प्रश्न 9वीं और 10वीं में पूछे जाते थे. लेकिन बोर्ड ने अब इसमें चेंज कर दिया है. सीबीएसइ के 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स अब सबसे अधिक ज्योमेट्री चैप्टर को पढ़ेगे. क्योकि अब बोर्ड परीक्षा और 9वीं फाइनल परीक्षा में इस चैप्टर से सबसे अधिक प्रश्न आयेंगे. मैथेमेटिक्स के नये सिलेबस की माने तो ज्योमेट्री में 109 मार्क्‍स के प्रश्न पूछे जायेंगे. इसमें 9वीं में 75 अंक के और 10वीं में 3 अंक के सवाल आयेंगे. इसके बाद मैनसूरेशन और नंबर सिस्टम चैप्टर को रखा गया है.
- प्राकृतिक घटनाओं को साइंस में पढ़ेंगे स्टूडेंट्स
सीबीएसइ ने प्राकृतिक घटनाओं को साइंस के सिलेबस में शामिल किया है. अभी तक डिजास्टर मैनेजमेंट की पढ़ाई सोशल साइंस के तहत की जाती थी. लेकिन अब साइंस में प्राकृति घटनाओं से संबंधित चैप्टर को शामिल किया गया है. इसके तहत देश और देश के बाहर आये दिन घट रही प्राकृतिक घटनाओं को साइंस के प्वाइंट ऑफ व्यू से स्टूडेंट्स पढ़ पायेंगे. 10वीं क्लास में इस नये चैप्टर को सीबीएसइ ने जोड़ा है. इस चैप्टर से 29 मार्क्‍स का प्रश्न भी बोर्ड परीक्षा में पूछे जायेंगे. इसके अलावा साइंस में नेचुरल रिसोर्स चैप्टर को नये रूप में सीबीएसइ ने जोड़ा है. इस चैप्टर से बोर्ड परीक्षा में 8 मार्क्‍स के प्रश्न पूछे जायेंगे.

9वीं और 10वीं मैथेमेटिक्स में इन चैप्टर की होगी अब पढ़ाई
नंबर सिस्टम, अल्जेब्रा, ज्योमेट्री, कॉडिनेट ज्योमेट्री, मैनसूरेशन, स्टैट्रिक्स, प्रोवैबिलिटी, टीगAोमेंट्री

9वीं और 10वीं साइंस में इन चैप्टर की होगी अब पढ़ाई
ऑग्रेनाइजेशन इन दी लिविंग वर्ल्ड, मोशन, फूड प्रोडक्शन, इंवायरमेंट, नेचुरल र्सिोस, इफेक्टस ऑफ करेंट, नेचुरल फेनोमेनन

कोट
कई सालों के बाद साइंस और मैथेमेटिक्स के सिलेबस में चेंज किया गया है. करेंट इश्यूज से संबधित कई नये चैप्टर को जोड़ा गया है. इससे स्टूडेंट्स को कोर्स की पढ़ाई के साथ करेंट अफेयर्स संबंधित तैयारी भी हो जायेगी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में भी स्टूडेंट्स को मदद मिलेगी.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर सीबीएसइ पटना

बीएसइबी के 20 फीसदी और बाहर के 80 फीसदी बच्चे पढ़ते है डीएवी में

बीएसइबी के 20 फीसदी और बाहर के 80 फीसदी बच्चे पढ़ते है डीएवी में

- डीएवी बीएसइबी की लोकल मैनेजमेंट कमेटी ने डीएवी से मांगा स्टूडेंट्स के आंकड़े
- सीबीएसइ ने दिया 10 सेक्शन की मान्यता, चल रहे 79 सेक्शन
संवाददाता, पटना
डीएवी बीएसइबी को सीबीएसइ ने बिहार सरकार के प्रोजेक्ट स्कूल के तौर पर मान्यता दिया हुआ है. इसके तहत इस स्कूल में बीएसइबी स्टाफ के 80 फीसदी बच्चों का नामांकन होना है. बाकी बचे 20 फीसदी सीट पर बाहरी बच्चों को नामांकन लेना तय किया गया था. लेकिन वर्तमान में हकीकत कुछ और है. वर्तमान में डीएवी बीएसइबी में बीएसइबी स्टाफ के कितने बच्चे पढ़ रहे है. इसकी जानकारी ना तो डीएवी प्रबंधन के पास है और ना ही डीएवी बीएसइबी के लोकल मैनेजिंग कमेटी के पास. लोकल मैनेजिंग कमेटी की माने तो बीएसइबी के 20 फीसदी और बाहर के 80 फीसदी बच्चों का डीएवी बीएसइबी में पढ़ाया जाता है. बीएसइबी के कितने बच्चे इस स्कूल में पढ़ रहे है. इसका डाटा तैयार करने के लिए एलएमसी (लोकल मैनेजिंग कमेटी) ने डीएवी बीएसइबी से स्टूडेंट्स को कुल आंकड़े देने को कहा है. इस आंकड़े को देखने के बाद ही एलएमसी को पता चलेगा कि डीएवी बीएसइबी में बीएसइबी के कितने स्टूडेंट्स हैं.
क्लास वन के बाद सीन बदल जाता है स्कूल का
डीएवी बीएसइबी में क्लास वन के बाद स्टूडेंट्स की संख्या का आंकड़ा बदल जाता हैं. क्लास वन में इस स्कूल में बाहरी छात्रों का मात्र 20 फीसदी नामांकन होता है. लेकिन क्लास वन के बाद सीन चेंज होने लगता है. क्लास वन में इस स्कूल में 80 स्टूडेंट्स का नामांकन लिया जाता है. इसमें 60 स्टूडेंट्स बीएसइबी के और बाकी 20 स्टूडेंट्स बाहर के होते है. लेकिन क्लास वन के बाद क्लास टू में एक सेक्शन बढ़ जाता है. बढ़े हुए सेक्शन में बाहर के ही स्टूडेंट्स का नामांकन होता है. इसके बाद जैसे-जैसे क्लास ऊपर जाता है. क्लास में सेक्शन की संख्या बढ़ती जाती है. बढ़े हुए सेक्शन में बाहरी स्टूडेंट्स को ब्रांच डीएवी से ट्रांसफर करवा कर रखा जाता है.
सीबीएसइ ने दिया था हर क्लास के लिए एक सेक्शन की मान्यता
सीबीएसइ ने डीएवी बीएसइबी को मान्यता जुलाई 1993 में दिया था. स्कूल को प्रोजेक्ट स्कूल के रूप में मान्यता मिला था. इसके तहत हर क्लास में  एक सेक्शन चलाना था. हर क्लास के लिए 40 से 42 स्टूडेंट्स का सेक्शन होना तय था. क्लास वन से 10वीं तक कुल स्टूडेंट्स की संख्या 405 होनी थी. इसमें 5वीं, 6ठीं और 7वीं क्लास के लिए 42-42 और 41 स्टूडेंट्स को लेने की मान्यता दी गयी थी. लेकिन वर्तमान में स्कूल में इस नियम को फॉलो नहीं किया जा रहा है. फिलहाल डीएवी बीएसइबी मे 3160 स्टूडेंट्स क्लास वन से 10वीं तक पढ़ते है. कुल सेक्शन 79 चल रहा है.

कोट
डीएवी बीएसइबी में बीएसइबी के कितने बच्चे पढ़ते है. इसका कोई रिकार्ड हमारे पास नहीं हैं. हमें किसी तरह की जानकारी नहीं दी जाती है. सीबीएसइ के सो कॉज नोटिस के बारे में भी हमें जानकारी नहीं दी गयी थी. अब हम स्कूल से सारी जानकारी ले रहे है. बीएसइबी के 80 फीसदी बच्चे ही इस स्कूल में पढ़ेंगे. लेकिन फिलहाल इस स्कूल में बीएसइबी के कितने बच्चे पढ़ रहे हैं. इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है. हमने स्कूल से फीगर मांगा है.
राजीव रंजन सिन्हा, अध्यक्ष, डीएवी एलएमसी (लोकल मैनेजिंग कमेटी)

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स्कूल को पैसे खर्च करने की मिली इजाजत, नहीं रुकेगी अब सैलरी
डीएवी बीएसइबी के प्रभारी प्राचार्य इंद्रजीत राय को डीएवी लोकल मैनेजिंग कमेटी ने फिलहाल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया वाले एकाउंट से पैसे खर्च करने की इजाजत दे दिया है. मंगलवार को हुई एलएमसी और प्रभारी प्राचार्य के साथ बैठक में यह तय किया गया है. इस संबंध में एलएमसी के अध्यक्ष राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि डीएवी के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया वाले एकाउंट से ही टीचर्स और नॉन टीचिंग स्टाफ को सैलरी आदि दिया जाता है. बैंक में इतने पैसे है कि यह काम आसानी से हो जायेगा. प्रभारी प्राचार्य को इस एकाउंट से पैसे खर्च करने की इजाजत दी गयी हैं. बाकी अगर स्कूल को जरूरत होगी तो बैंक ऑफ इंडिया से निकासी की जायेगी. लेकिन फिलहाल यह नहीं किया जायेगा. अभी स्कूल के बिल्डिंग आदि बनाने वाले मद में पैसे खर्च नहीं किये जायेंगे. इस कारण इस मद में किसी भी तरह के पैसे की निकासी बैंक एकाउंट से नहीं किया जायेगा. बैंक से पैसे की निकासी के बाद अब डीएवी बीएसइबी के तमाम टीचर्स को सैलरी मिल जायेगी.  

Tuesday, April 21, 2015


जेइइ मेन में आये अच्छे अंक, पर्सेटाइल सही करने के लिए काउंसिल में भटक रहे छात्र

जेइइ मेन में आये अच्छे अंक, पर्सेटाइल सही करने के लिए काउंसिल में भटक रहे छात्र

- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में 2014 के स्क्रूटनी का रिजल्ट अभी तक नहीं हुआ सही
- जेइइ मेन में अपना अंक देखने के बाद स्क्रूटनी का रिजल्ट लेने पहुंच रहे 2014 के छात्र
रिंकू झा, पटना
रंधीर कुमार को जेइइ मेन में 152 अंक आये हैं. इसकी जानकारी रंधीर कुमार को सीबीएसइ द्वारा जारी जेइइ मेन के आंसर की से पता चला. लेकिन रंधीर कुमार को अभी तक अपना इंटर स्क्रूटनी का रिजल्ट प्राप्त नहीं हुआ है. नवादा के रहने वाले रंधीर कुमार (रौल नंबर 10479, रौल कोड 2308) आठ महीने से इंटर काउंसिल का चक्कर लगा रहे हैं. कुछ ऐसा ही हाल कुंदन कृष्णन का भी हैं. छपरा का रहने वाल कुंदन कृष्णन ( रौल नंबर 10579, रौल कोड 4105) को एग्रीकल्चर कॉलेज, बलिया में नामांकन हो चुका है. लेकिन मार्क्‍स सीट जमा नहीं करने के कारण उसके नामांकन को मान्यता नहीं मिली है. कुंदन कृष्णन ने स्क्रूटनी के लिए दो विषयों फिजिक्स और केमेस्ट्री के लिए आवेदन दिया था. फिजिक्स में 59 से 62 अंक बढ़े तो वहीं केमेस्ट्री में 63 से 69 अंक हुआ. वहीं, रंधीर कुमार ने फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ और इंगलिश में स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया था. मैथ में 71 अंक से बढ़ कर 75 अंक हुआ. बाकी दूसरे विषय में अभी तक स्क्रूटनी किया ही नहीं जा सका है. यह हाल कोई एक छात्र का नहीं बल्कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में हर दिन कई ऐसे छात्र है जो अपने स्क्रूटनी के रिजल्ट के लिए इंटर काउंसिल का चक्कर लगा रहे है. ऐसे में अभी उन स्टूडेंट्स की संख्या अधिक है, जिन्होंने जेइइ मेन में अच्छे अंक प्राप्त किये है.
जेइइ मेन के आंसर की के बाद पहुंच रहे छात्र
जेइइ मेन के 2015 में ली गयी परीक्षा का आंसर की सीबीएसइ के वेबसाइट पर 18 अप्रैल को अपलोड कर दिया गया है. इससे जेइइ मेन में शामिल हुए छात्र को अपने अंक का पता चल गया है. लेकिन इंटर का रिजल्ट अभी तक लटका हुआ है. स्क्रूटनी के लिए जून 2014 में ही आवेदन दिया, लेकिन दस महीने बाद भी छात्र को रिजल्ट प्राप्त नहीं हुआ है. रंधीर कुमार के पिता ने बताया कि बेटे को इंटर में कम अंक आयें थे. इस कारण स्क्रूटनी के लिए अप्लाई 4 जून 2014 को ही किया. बिहार बोर्ड के वेबसाइट पर स्क्रूटनी का रिजल्ट जनवरी में आया. मैथ में चार अंक बढ़ें है. 71 अंक से 75 अंक मैथ में हुआ है. लेकिन फिजिक्स और केमेस्ट्री का अभी तक स्क्रूटनी हुआ ही नहीं है. अब मै कई दिनों से इंटर काउंसिल का चक्कर लगा रहा हूं. अगर अंक बढ़ जायेंगे तो इंटर में अच्छा पर्सेटाइल आ जायेगा. इससे अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन मिल जायेगा.
इंटरमीडिएट का 60 फीसदी मार्क्‍स का महत्व
जेइइ मेन और जेइइ एडवांस के बाद आइआइटी और दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन के लिए इंटरमीडिएट के अंक का विशेष महत्व दिया जाता है. जेइइ मेन के 40 फीसदी तो इंटरमीडिएट के अंक का 60 फीसदी अंक का वेटेज इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन को लेकर होता है. ऐसे में जिन छात्रों के इंटर में अच्छा पर्सेटाइल होता हैं तो उन्हें अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन हो जाता है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के जिन छात्रों को 2014 में पर्सेटाइल कम था, उन्होंने पर्सेटाइल को सही करवाने के लिए स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया. लेकिन अभी तक उन्हें स्क्रूटनी का रिजल्ट नहीं मिला है.
2014 से 2015 हो गया, लेकिन स्क्रूटनी समाप्त नहीं हुआ
एक साल के बाद भी इंटर का सही रिजल्ट बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के छात्रों को नहीं मिल पाया है. अब तो हद ही हो गयी. 2014 के इंटर का रिजल्ट खराब होने के बाद अब 2015 हो गया, लेकिन अभी तक छात्रों को स्क्रूटनी का रिजल्ट नहीं मिला है.  इन दिनों बिहार बोर्ड के इंटर काउंसिल में हर दिन छात्र अपना स्क्रूटनी का रिजल्ट लेने को आते है. लेकिन उन्हें बैरंग वापस जाना पड़ रहा है. रिजल्ट देना तो दूर कर्मचारी छात्रों से बात तक सही से नहीं करते है.
 इंतजार करता रहा, नहीं मिला अब तक इंटर का मार्क्‍स सीट
मैं अभी तक दस बार से अधिक इंटर काउंसिल आ चुका हूं. हर बार आने में मुङो हजार रुपये से अधिक खर्च करना पड़ रहा है. लेकिन अभी तक स्क्रूटनी का रिजल्ट सही नहीं हुआ है. इंटरमीडिएट 2014 में कम अंक आने के कारण मैने स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया था. 60 फीसदी अंक आता तभी इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन होगा. एग्रीकल्चर कॉलेज, बलिया में नामांकन हो गया हैं. बोर्ड के वेबसाइट पर से अंक पत्र देकर तो नामांकन ले लिया गया. लेकिन अब ऑरिजनल मार्क्‍स सीट की मांग कॉलेज वाले कर रहे है. जनवरी से दौर रहा हूं. लेकिन अभी तक मार्क्‍स सीट नहीं मिला है.
कुंदन कृष्णन, पीड़ित छात्र

कोट
हम प्रयास करेंगे कि ऐसे छात्रों के उत्तर पुस्तिका को दुबारा निकलवा कर रिजल्ट को सही करवाया जायें. इंटर में अच्छे अंक आने से छात्र को अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन होगा तो ऐसे छत्र को इंटर काउंसिल से पूरी मदद दी जायेगी. स्क्रूटनी का मार्क्‍स सीट तैयार कर कॉलेज भेजा जा रहा है.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति  

Monday, April 20, 2015

नहीं होगा परीक्षा देने में फर्जीवाड़ा, एलओसी में छात्र सीधे कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन

नहीं होगा परीक्षा देने में फर्जीवाड़ा, एलओसी में छात्र सीधे कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन


-  9वीं और 11वीं के लिए सीबीएसइ ने अभिभावकों को दिया निर्देश
-  दूसरे स्कूल से परीक्षा फार्म नहीं भरवा सकेंगे स्कूल
संवाददाता, पटना
अब स्टूडेंट्स सीधे अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे. इसके लिए अब उन्हें स्कूल के उपर निर्भर नहीं होना पड़ेगा. एक बार रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद उन्हें एक कोड नंबर मिलेगा, जिसकी मदद से स्टूडेंट्स को आगे परीक्षा संबंधित अपडेट बोर्ड की ओर से सीधे मिलता रहेगा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से यह व्यवस्था इस सेशन से शुरू किया जा रहा है. 9वीं और 11वीं के रजिस्ट्रेशन के लिए अब स्टूडेंट्स को अब स्कूल पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी. स्टूडेंट्स बोर्ड से रजिस्टर्ड होने के बाद बोर्ड के सीधे संपर्क में आ जायेंगे. इसके बाद जो भी जानकारी होगी बोर्ड सीधे स्टूडेंट को अपडेट करता रहेगा. ऐसे में उन स्कूलों के फर्जीवाड़ा पर लगाम कसा जा सकेगा जो दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन करते है. इसके अलावा उन स्कूलों को पकड़ा जा सकेगा जहां के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन दूसरे स्कूल से करवाया जाता है.
- स्कूल के कोड के साथ ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन फार्म भर पायेंगे स्टूडेंट्स
सीबीएसइ ने इस सेशन से रजिस्ट्रेशन फार्म भरने में परिवर्तन किया है. जून में सीबीएसइ स्कूलों में 9वीं और 11वीं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होता है. इस बार स्टूडेंट्स स्कूल कोड और पासवर्ड लेकर खुद ही एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) में रजिस्ट्रेशन फार्म भर सकेंगे. स्टूडेंट द्वारा भरे गये रजिस्ट्रेशन फार्म के बाद सीबीएसइ स्टूडेंट को एक कोड नंबर देगा. इस कोड नंबर से स्टूडेंट्स अपनी एकेडेमिक आगे की जानकारी बोर्ड से सीधे ले पायेगा. सीबीएसइ की माने तो 9वीं और 11वीं के फाइनल रिजल्ट संबंधित जानकारी के साथ एफए (फार्मेटिव असेसमेंट), एसए (समेटिव असेसमेंट), पीएसए (प्रॉब्लम सॉल्विंग असेसमेंट)आदि के बारे मे स्टूडेंट्स जानकारी सीधे बोर्ड से ले पायेगे. इसके लिए अब स्टूडेंट्स को स्कूल पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा.
- एलओसी में शामिल स्टूडेंट्स पर दो सालों तक बोर्ड की रहेगी नजर
 जो स्टूडेंट्स एलओसी में शामिल होंगे. उनके उपर दो सालों तक सीबीएसइ की नजर रहेगी. 9वीं में रजिस्ट्रेशन करवा चुके स्टूडेंट्स में कितने स्टूडेंट्स 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होंगे. वहीं 11वीं और 12वीं में शामिल स्टूडेंट्स की एकेडेमिक पर सीबीएसइ की नजर रहेगी. इसी के तहत सीबीएसइ ने 2014 से 11वीं के रिजल्ट की ऑन लाइन मार्क्‍स सीट स्कूलों से मांगना शुरू किया है. जिस स्कूल में 11वीं में स्टूडेंट्स फेल कर जाते है तो उन्हें स्कूल की ओर से कंपार्टमेंटल परीक्षा दिलवाया जाता है.
 - चार बार एलओसी से जुड़ते है स्टूडेंट्स
सीबीएसइ द्वारा 9वीं से 12वीं तक चार बार एक स्टूडेट्स को एलओसी से जोड़ा जाता है. 9वीं और 11वीं में रजिस्ट्रेशन के समय स्टूडेंट्स के सारे डिटेल्स लिये जाते है. वहीं 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स के एलओसी तैयार किया जाता है. ऐसे में स्कूल के साथ बोर्ड के पास भी स्टूडेंट्स संबंधित सारी जानकारी रहती है. सीबीएसइ द्वारा एलओसी से जोड़े गये स्टूडेंट्स के नाम, एड्रेस, कांटैक्ट नंबर, विषय की जानकारी आदि प्रमुख रूप से ली जाती है.
- नामांकन और रजिस्ट्रेशन का चलता खेल
पटना के कई स्कूलों में नामांकन से लेकर रजिस्ट्रेशन का खेल चलता है. स्टूडेंट्स पढ़ते तो किसी और स्कूल में है और 9वीं में रजिस्ट्रेशन किसी और स्कूल से करवा लेते है. ऐसे में उन स्टूडेंट्स को सीबीएसइ आसानी से पकड़ पायेगा. स्टूडेंट्स के 8वीं तक के रिकार्ड देखा जायेगा. उन स्टूडेंट्स के 9वीं और 10वीं में स्कूल जाने और एटेंडेंस सीट की जांच होगी. पकड़ में आने वाले स्कूल और स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन खत्म कर दिया जायेगा. कुछ ऐसी ही प्रक्रिया 11वीं और 12वीं के स्टूडेट्स के साथ भी की जायेगी. 

सीटीइटी के प्रायमरी लेवल की परीक्षा में दो लाख में 37 हजार हुए पास

सीटीइटी के प्रायमरी लेवल की परीक्षा में दो लाख में 37 हजार हुए पास

- सीटीइटी की परीक्षा में प्राथमिक में 17.90 फीसदी और माध्यमिक में 9.16 फीसदी अभ्यर्थी हुए पास
- पटना रिजन में 9.13 फीसदी ही रही रिजल्ट
संवाददाता, पटना
टीचर्स को ना तो बच्चों के बारे में सही जानकारी है और ना ही बच्चों के साइकोलॉजी को ही टीचर्स पकड़ पा रहे है. मैथ से लेकर साइंस और सोशल साइंस में भी टीचर टीचिंग एक्सपेरियेंस नहीं रखते है. यही वजह है कि टीचिंग क्वालिटी कम होती जा रही हैं. टीचर्स के प्रति यह संदेह सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने व्यक्त किया है. फरवरी में ली गयी सीटीइटी (सेंट्रल टीचर्स इजिब्लिटी टेस्ट) के रिजल्ट की घोषणा करने के साथ सीबीएसइ ने टीचर्स की क्वालिटी को लेकर कहा है कि हर साल टीचर्स की क्वालिटी कम होती जा रही है. इसी का परिणाम है कि सीटीइटी में 25 फीसदी भी अभ्यर्थी पास नहीं कर पायें. इस बार सीटीइटी की प्रायमरी लेवल की परीक्षा में 207522 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. इसमें 37153 (17.90 फीसदी) अभ्यर्थी को सफलता मिली. वहीं इलिमेंट्री (माध्यमिक) लेवल की परीक्षा में 470032 अभ्यर्थी शामिल हुए. इसमें 43034 (9.16 फीसदी) अभ्यर्थी को सफलता मिली.
- पटना रिजन अंतिम पायदान पर
सीटीइटी की परीक्षा में सीबीएसइ के तमाम रिजन की बात करें तो पटना रिजन अंतिम पायदान पर है. पटना रिजन से लगभग दो लाख अभ्यर्थी सीटीइटी की परीक्षा में शामिल हुए. इसमें मात्र 10 हजार अभ्यर्थी को सफलता मिल पायी है. पटना रिजन के 9.13 फीसदी अभ्यर्थी को ही सीटीइटी में सफलता मिल पायी है. ज्ञात हो कि देश भर में 96 शहरों में 988 परीक्षा केंद्र पर सीटीइटी की परीक्षा आयोजित की गयी थी. इसमें अधिकांश परीक्षा केंद्र का रिजल्ट जीरो फीसदी पर रहा है.
- घट रहा है जेनरल अभ्यर्थी की संख्या
सीटीइटी की परीक्षा देने में जेनरल अभ्यर्थी की संख्या हर साल कम होती जा रही है. 22 फरवरी 2015 को आयोजित सीटीइटी की परीक्षा में जेनरल अभ्यर्थी से ओबीसी केटेगरी अभ्यर्थी की संख्या अधिक थी. सीबीएसइ की माने तो पेपर फस्र्ट में जेनरल अभ्यर्थी से 8495 अधिक अभ्यर्थी ओबीसी के शामिल हुए. वहीं पेपर सेकेंड में 20 हजार ओबीसी अभ्यर्थी जेनरल अभ्यर्थी से अधिक थे.
- सब्जेक्ट वाइज जानकारी भी कम हैं
सीबीएसइ की माने तो सीटीइटी के रिजल्ट में जिन विषयों संबंधित जानकारी टीचर्स से टेस्ट के दौरान ली गयी है. उसमें अधिकांश टीचर फेल कर गये है. जिन विषयों में टीचर्स ने ग्रेजुएशन किया है. उस विषय में भी अच्छे अंक टीचर्स नहीं ला पायें हैं. मैथ, सोशल साइंस, साइंस आदि विषय में बेसिक जानकारी भी सीबीएसइ स्कूल में पढ़ा रहे टीचर्स को नहीं है.

यह है रिजल्ट का सेनेरियो
पेपर फस्र्ट (क्लास वन से 5वीं तक)
रजिस्ट्रेशन करवाने वाले अभ्यर्थी   -  239961
परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी  - 207522
क्वालिफाई होने वाले अभ्यर्थी   -   37153 (17.90 फीसदी)

पेपर सेकेंड (क्लास 6ठीं से 8वीं तक)
रजिस्ट्रेशन करवाने वाले अभ्यर्थी   - 561706
परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी  - 470032
क्वालिफाई होने वाले अभ्यर्थी   -  43034 (09.16 फीसदी)

कोट
टीचर्स की क्वालिटी की जांच के लिए सीटीइटी की परीक्षा ली जाती है. लेकिन हर साल इसका रिजल्ट पिछले साल से भी खराब होता है. टीचर्स की क्वालिटी कम होती जा रही है. जिन टीचर्स को पांच साल का टीचिंग एक्सपेरियेंस होता है. वहीं इस परीक्षा में शामिल होते है. हर छह महीने पर सीटीइटी की परीक्षा ली जाती है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना

स्कूल से ही स्टेशनरी और किताबें लेने का दिया जाता है दबाव

स्कूल से ही स्टेशनरी और किताबें लेने का दिया जाता है दबाव

- स्कूल की मनमानी की शिकायत लेकर सीबीएसइ रीजनल ऑफिस पहुंच रहे अभिभावक
- स्टेशनरी और किताबों की दुकानें चलती है कई स्कूलों में
संवाददाता, पटना
स्टेशनरी स्कूल से ही लेना होगा. किताबों की लिस्ट स्कूल से प्रोवाइड करवायी जायेगी. स्कूल से ही किताबें भी लेना होगा. स्कूल के इस नियम को हर अभिभावकों को मानना होगा. जो अभिभावक इन नियम को नहीं मानेगे, वो अपने बच्चे का नामांकन दूसरे स्कूल में करवा ले. अभिभावक अनिल कुमार ने स्कूल के खिलाफ यह शिकायत सीबीएसइ रीजनल ऑफिस के पास किया है. सम्पतचक गोपालपुर के रहने वाले अनिल कुमार ने सीबीएसइ के पास लिखित शिकायत की है. इसमें उन्होंने लिखा है कि अगर स्कूल के नियम को अभिभावक नहीं मानते है तो स्कूल की ओर से बच्चों को स्कूल से निकाल देने की धमकी दी जाती है. अभिभावकों के उपर सोशन जैसा व्यवहार किया जाता है. सीबीएसइ रीजनल ऑफिस में एक मात्र अनिल कुमार शिकायत करने वाले नहीं हैं बल्कि आये दिन अभिभावक स्कूल की मनमानी की बातें सीबीएसइ के पास लिखित रूप में दे रहे है.
- किताबों से लेकर स्टेशनरी तक स्कूल की मरजी से
स्कूल से ही किताबें लेना है. नोट बुक वहीं स्कूल में चलेगा जिस पर स्कूल का लोगो होगा. स्टेशनरी स्कूल से ही लेना होगा. किताबें और स्टेशनरी की खरीदारी स्कूल कैंपस से करना होता है, लेकिन इसके लिए स्कूल की ओर से कोई रसीद नहीं दी जाती है. जो नोट बुक सस्ते दाम में बाहर के किसी दुकान से मिल जाती है, वो नोट बुक स्कूल कैंपस से लेने पर मोटी रकम देनी होती है. कई स्कूलों ने नोट बुक पर भी स्कूल का नाम और लोगो लगा रखा है. ऐसे में स्कूल कैंपस से नोट बुक लेना अभिभावकों की मजबूरी हो जाती है. कुछ ऐसा ही हाल यूनिफार्म और स्कूल बैग खरीदने पर भी होता हैं. इन चीजों की खरीदारी पर भी स्कूल की मरजी के अनुसार ही अभिभावकों को चलना पड़ता है.
- शिकायत करने पर स्कूल से निकाल देने का मिलता है धमकी
स्कूल के मनमानी पर अगर कोई अभिभावक स्कूल में शिकायत करते हैं तो उनके बच्चें को स्कूल से बाहर निकाल देने की धमकी भी दी जाती है. स्कूल का नाम बताये बिना अभिभावक राहुल सिंह ने बताया कि अब स्कूल किसी भी तरह की शिकायत नहीं सूनना चाहता है. नये सेशन में किताबों और स्टेशनरी की खरीदारी में काफी परेशानी अभिभावकों को उठाना होता है. स्कूल की इतनी मनमानी रहता है कि अगर भूल से भी शिकायत कर दिया तो फिर बच्चे को स्कूल से निकाल देने तक की धमकी मिल जाती है. जब एक ही कोर्स की किताबें चलती है तो फिर फिक्स जगहों से लेने को क्यूं कहा जाता है. नोट बुक पर स्कूल का नाम और लोगो देने से स्कूल से ही लेना हमारी मजबूरी बन जाती है.
- कई स्कूलों ने खोल रखे है कैंपस में दुकानें
पटना के कई बड़े स्कूलों में किताबों और स्टेशनरी की दुकानें खुले हुए है. इन दुकानों में पढ़ाई संबंधित तमाम चीजें आसानी से मिल जाती है. लेकिन दुगुने दाम पर. साल भर तो स्टूडेंट्स के लिए आप्सनल होता है कि वो इस दुकानों से समान ले या ना ले. लेकिन नये सेशन में यहां से ही समान की खरीदारी करनी होती है. क्योंकि स्कूल बैग, नोट बुक आदि पर स्कूल का नाम और लोगो अंकित रहता है. सीबीएसइ के अनुसार कोई भी स्कूल कैंपस में बिजनेस संबंधी किसी भी चीज को नहीं चला सकता है. इसके बावजूद पटना के कई स्कूलों में दुकानें चलती है. नये सेशन में तो कई और स्टॉल खुल जाते है.
- नहीं चलती अब पुरानी किताबें
स्कूलों में अब पुरानी किताबें का चलन नहीं है. हर साल किताबें चेंज हो जाती है. ऐसे में एक साल पुरानी किताबों को कोई नहीं लेता है. ज्ञान गंगा लिमिटेड, कदमकुआं से मिली जानकारी के अनुसार एक साल पहले की किताबें अगर नया भी होगा, तो हमारे कोई काम का नहीं है, क्योंकि वो किताब हम दूसरे किसी भी क्लास में नहीं चलता है. दुकान से मिली जानकारी के अनुसार स्कूलों द्वारा कुछ ऐसे किताबें चलाये जाते है जो एक साल के लिए ही सिलेबस में होता है. हर साल वो चेंज हो जाता है.
- ऐसे स्कूलों की रिपोर्ट हो रही तैयार
सीबीएसइ रीजनल ऑफिस के पास जो भी अभिभावक स्कूल की मनमानी पर शिकायत कर रहे है, उसकी रिपोर्ट सीबीएसइ दिल्ली भेजी जायेगी. वहीं सीबीएसइ की ओर से ऐसे स्कूलों को सीबीएसइ के नाम्ॅस से अवगत करवाया जा रहा है. सीबीएसइ के अनुसार स्कूल एक शिक्षक संस्थान होता है. ऐसे में कोई भी स्कूल कैंपस में दुकान या कोचिंग संस्थान नहीं चला सकता हैं. नोट बुक पर स्कूल का नाम रखना गलत है. अभिभावक अपनी मरजी से किताबों और स्टेशनरी का समान खरीदेंगे. सीबीएसइ द्वारा स्कूलों


ये सारी शिकायतें पहुंच रही है सीबीएसइ
- एक ही दुकान या स्कूल कैंपस से किताबें खरीदने का दबाव
- स्टेशनरी में मोटी रकम वसूलता है स्कूल
- जो स्टेशनरी कम दाम में दुकानों मे मिलते है, उसे स्कूल कैंपस से खरीदने में महंगा पड़ता है
- स्कूल की ओर लिस्ट तो दिया जाता है, लेकिन खरीदारी करने पर पक्का रसीद नहीं मिलता हैं
- स्कूल बैग और यूनिफार्म की खरीदारी में भी दुकान फिक्स होता है
- एनसीइआरटी की बुक्स भी अधिक दाम पर स्कूल कैंपस में मिलता है
- रिफ्रेसर बुक जरूरत से अधिक खरीदवाते है स्कूल वाले


Sunday, April 19, 2015

बैंक खाते पर लगी रोक, अब डीएवी बीएसइबी के टीचर्स की सैलरी पर संकट

बैंक खाते पर लगी रोक, अब डीएवी बीएसइबी के टीचर्स की सैलरी पर संकट

- टीचर्स और स्कूल स्टॉफ को सैलरी देने के लिए दो करोड़ रुपये ट्रांसफर चाहते थे वर्तमान प्राचार्य
संवाददाता, पटना
पहले स्टूडेंट्स की पढ़ाई पर संकट हो रहा था. अब डीएवी बीएसइबी के तमाम टीचर्स के मेहनतनामा पर रोक लग गयी है. पिछले दो महीनों से इंतजार कर रहे स्कूल के स्टॉफ को इस महीने भी सैलरी नहीं मिल पायेगी. डीएवी बीएसइबी के एलएमसी (लोकल मैनेजिंग कमेटी) की ओर से बैंक ऑफ इंडिया के पास स्कूल संबंधित सारे खाते पर रोक लगा दी गयी है. बैंक ऑफ इंडिया में चल रहे डीएवी बीएसइबी के स्कूल खाते के रोक लगने से डीएवी बीएसइबी के तमाम टीचर्स के साथ तमाम स्टॉफ (ट्रांसपोटर्स, गार्ड, माली) की सैलरी रूक जायेगी.
- दो बैंक से चलता है डीएवी बीएसइबी का काम
डीएवी बीएसइबी में दो बैंक से स्कूल का संचालन होता है. बैंक ऑफ इंडिया में स्टूडेंट्स का फी जमा होता है. वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, राजवंशी नगर से टीचर्स और नॉन टिचिंग स्टॉफ को सैलरी मिलती है. हर महीने स्कूल मैनेजमेंट की ओर से बैंक ऑफ इंडिया से पैसे को स्टेट बैंक ऑॅफ इंडिया में ट्रांसफर करवाया जाता है. इस राशि से टीचर्स के साथ नॉन टीचिंग स्टॉफ को सैलरी दी जाती है. हर महीने की तरह इस बार भी वर्तमान प्रभारी प्राचार्य ने पैसे ट्रांसफर करने के लिए चेक बैंक ऑफ इंडिया के पास भेजा. इसकी जानकारी बैंक की ओर से बीएसइबी के लोकल मैनेजमेंट कमेटी को दिया गया. इसके बाद बीएसइबी के लोकल मैनेजमेंट कमेटी ने रुपये के ट्रांसफर पर रोक लगा दी.

कोट
डीएवी बीएसइबी एक प्रोजेक्ट स्कूल हैं. स्कूल डेवलपमेंट संबंधित पैसे बैंक ऑफ इंडिया में जमा होते है. ऐसे में अगर बैंक ऑफ इंडिया से पैसे निकाली जाती है तो उस पर एलएमसी के तीन सदस्यों में से दो की अनुमति जरूरी है. चुकी वर्तमान प्राचार्य प्रभारी के रूप में कार्यरत है. ऐसे में उन्हें इस पैसे का ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं है. वर्तमान प्राचार्य ने दो करोड़ रुपये निकालने की वजह भी नही बताया है.
राजीव रंजन सिन्हा, अध्यक्ष, डीएवी लोकल मैनेजमेंट कमेटी

हर महीने बैक ऑफ इंडिया से पैसे निकाल कर टीचर्स को सैलरी दी जाती है. चुकी स्कूल की फी बैंक ऑफ इंडिया में जमा होता है. इस कारण हर महीने पैसे को ट्रांसफर एक बैंक से दूसरे बैंक में किया जाता है. चुकी दो महीने से नॉन टीचिंग स्टॉफ को सैलरी नहीं मिली है. वहीं इस महीने की टीचर्स की सैलरी भी अभी दिया जाना था. हर महीने बैंक ऑफ इंडिया के इस खाते से पैसे ट्रांसफर होते रहे है. इस कारण वजह नहीं बताया हैं.
इंद्रजीत राय, प्रभारी प्राचार्य, डीएवी बीएसइबी 

नहीं होगा परीक्षा देने में फर्जीवाड़ा, एलओसी में छात्र सीधे कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन

नहीं होगा परीक्षा देने में फर्जीवाड़ा, एलओसी में छात्र सीधे कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन


-  9वीं और 11वीं के लिए सीबीएसइ ने अभिभावकों को दिया निर्देश
-  दूसरे स्कूल से परीक्षा फार्म नहीं भरवा सकेंगे स्कूल
संवाददाता, पटना
अब स्टूडेंट्स सीधे अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे. इसके लिए अब उन्हें स्कूल के उपर निर्भर नहीं होना पड़ेगा. एक बार रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद उन्हें एक कोड नंबर मिलेगा, जिसकी मदद से स्टूडेंट्स को आगे परीक्षा संबंधित अपडेट बोर्ड की ओर से सीधे मिलता रहेगा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से यह व्यवस्था इस सेशन से शुरू किया जा रहा है. 9वीं और 11वीं के रजिस्ट्रेशन के लिए अब स्टूडेंट्स को अब स्कूल पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी. स्टूडेंट्स बोर्ड से रजिस्टर्ड होने के बाद बोर्ड के सीधे संपर्क में आ जायेंगे. इसके बाद जो भी जानकारी होगी बोर्ड सीधे स्टूडेंट को अपडेट करता रहेगा. ऐसे में उन स्कूलों के फर्जीवाड़ा पर लगाम कसा जा सकेगा जो दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन करते है. इसके अलावा उन स्कूलों को पकड़ा जा सकेगा जहां के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन दूसरे स्कूल से करवाया जाता है.
- स्कूल के कोड के साथ ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन फार्म भर पायेंगे स्टूडेंट्स
सीबीएसइ ने इस सेशन से रजिस्ट्रेशन फार्म भरने में परिवर्तन किया है. जून में सीबीएसइ स्कूलों में 9वीं और 11वीं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होता है. इस बार स्टूडेंट्स स्कूल कोड और पासवर्ड लेकर खुद ही एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) में रजिस्ट्रेशन फार्म भर सकेंगे. स्टूडेंट द्वारा भरे गये रजिस्ट्रेशन फार्म के बाद सीबीएसइ स्टूडेंट को एक कोड नंबर देगा. इस कोड नंबर से स्टूडेंट्स अपनी एकेडेमिक आगे की जानकारी बोर्ड से सीधे ले पायेगा. सीबीएसइ की माने तो 9वीं और 11वीं के फाइनल रिजल्ट संबंधित जानकारी के साथ एफए (फार्मेटिव असेसमेंट), एसए (समेटिव असेसमेंट), पीएसए (प्रॉब्लम सॉल्विंग असेसमेंट)आदि के बारे मे स्टूडेंट्स जानकारी सीधे बोर्ड से ले पायेगे. इसके लिए अब स्टूडेंट्स को स्कूल पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा.
- एलओसी में शामिल स्टूडेंट्स पर दो सालों तक बोर्ड की रहेगी नजर
 जो स्टूडेंट्स एलओसी में शामिल होंगे. उनके उपर दो सालों तक सीबीएसइ की नजर रहेगी. 9वीं में रजिस्ट्रेशन करवा चुके स्टूडेंट्स में कितने स्टूडेंट्स 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होंगे. वहीं 11वीं और 12वीं में शामिल स्टूडेंट्स की एकेडेमिक पर सीबीएसइ की नजर रहेगी. इसी के तहत सीबीएसइ ने 2014 से 11वीं के रिजल्ट की ऑन लाइन मार्क्‍स सीट स्कूलों से मांगना शुरू किया है. जिस स्कूल में 11वीं में स्टूडेंट्स फेल कर जाते है तो उन्हें स्कूल की ओर से कंपार्टमेंटल परीक्षा दिलवाया जाता है.
 - चार बार एलओसी से जुड़ते है स्टूडेंट्स
सीबीएसइ द्वारा 9वीं से 12वीं तक चार बार एक स्टूडेट्स को एलओसी से जोड़ा जाता है. 9वीं और 11वीं में रजिस्ट्रेशन के समय स्टूडेंट्स के सारे डिटेल्स लिये जाते है. वहीं 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स के एलओसी तैयार किया जाता है. ऐसे में स्कूल के साथ बोर्ड के पास भी स्टूडेंट्स संबंधित सारी जानकारी रहती है. सीबीएसइ द्वारा एलओसी से जोड़े गये स्टूडेंट्स के नाम, एड्रेस, कांटैक्ट नंबर, विषय की जानकारी आदि प्रमुख रूप से ली जाती है.
- नामांकन और रजिस्ट्रेशन का चलता खेल
पटना के कई स्कूलों में नामांकन से लेकर रजिस्ट्रेशन का खेल चलता है. स्टूडेंट्स पढ़ते तो किसी और स्कूल में है और 9वीं में रजिस्ट्रेशन किसी और स्कूल से करवा लेते है. ऐसे में उन स्टूडेंट्स को सीबीएसइ आसानी से पकड़ पायेगा. स्टूडेंट्स के 8वीं तक के रिकार्ड देखा जायेगा. उन स्टूडेंट्स के 9वीं और 10वीं में स्कूल जाने और एटेंडेंस सीट की जांच होगी. पकड़ में आने वाले स्कूल और स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन खत्म कर दिया जायेगा. कुछ ऐसी ही प्रक्रिया 11वीं और 12वीं के स्टूडेट्स के साथ भी की जायेगी. 

टीचर मीनाक्षी ने कहा असली गुनहगार रामानुज प्रसाद

टीचर मीनाक्षी ने कहा असली गुनहगार रामानुज प्रसाद


- रामानुज प्रसाद स्कूल में करते थे पास फेल का खेल
- खिलाफ बोलने वाले टीचर को देते थे मानसिक प्रताड़ना
संवाददाता, पटना
डीएवी बीएसइबी में स्टूडेंट्स के साथ पास फेल का खेल किया जाता है तो वहीं इसके खिलाफ बोलने वाले टीचर्स को मानसिक प्रताड़ना दी जाती है. डीएवी बीएसइबी के पूर्व प्राचार्य रामानुज प्रसाद को असली गुनहगार बताते हुए डीएवी बीएसइबी की इंगलिश की सीनियर टीचर ई एच मीनाक्षी ने कहा कि  मै पिछले तीन सालों से (2013 से) पूर्व प्राचार्य रामानुज प्रसाद के मानसिक प्रताड़ना की शिकार हूं. तंग आकर मैने निर्भया विमेंस नेटवर्क के पास कार्यस्थल पर मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़ना के संदर्भ में 27 मार्च 2013 में केस भी दर्ज करवाया था. हाल में प्रिया राय के साथ घटी घटना के बारे में एच मीनाक्षी ने बताया कि असली गुनहगार पूर्व प्राचार्य रामानुज प्रसाद है. प्रिया राय की तरह उन्होंने काफी संख्या में स्टूडेंट्स की जिंदगी बर्बाद की है. उनकी प्रताड़ना का शिकार स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स भी हैं. पूर्व प्राचार्य ने मुङो गाली दिया और खिलाफ बोलने पर हमेशा डराया और धमकाया भी. निर्भया विमेंस नेटवर्क कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान एच मीनाक्षी ने बताया कि कई बार पूर्व प्राचार्य ने खिलाफ जाने पर बर्बाद कर देने की धमकी भी दिया हैं. उन्होंने बताया कि स्कूल में टीचर्स के कई ग्रुप है. कुछ टीचर्स को उन्होंने अपने में मिलाकर रखा हुआ है. उन टीचर्स को सारी सुविधाएं दी जाती है, वहीं जो छात्र हित की बात करते हैं, उन टीचर्स को अलग-अलग तरीके से प्रताड़ित किया जाता है.
- पांच घंटे की क्लास करवायी जाती थी
एच मीनाक्षी ने बताया कि डीएवी बीएसइबी में टीचर्स को रखा तो जाता है, लेकिन उन्हें परमानेंट टीचर का लेटर नहीं दिया जाता है. अगर टीचर उसका मांग करते है तो इसको लेकर कई तरह से प्रताड़ना मिलती है. 2004 से डीएवी बीएसइबी में कार्यरत एच मीनाक्षी पीजीटी टीचर है. अप्वाइंटमेंट होने के बाद कई बार लेटर मांगा गया, लेकिन लेटर नहीं दिया गया. इसके बदले पांच-पांच पीरियड क्लास लेने का दबाव डाला जाता था. इससे एच मीनाक्षी बीमार रहने लगी. डाक्टर की सलाह पर स्कूल से छुट्टी मांगा तो छुट्टी के आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया. एच मीनाक्षी ने बताया कि जातिवाद की नीति स्कूल के एजुकेशन व्यवस्था में भी हैं.
- स्कूल में नहीं है सेक्सुल हेरेसमेंट सेल
डीएवी बीएसइबी में ना तो सीसी टीवी कैमरा लगा हुआ है और ना ही सेक्सुल हेरेसमेंट सेल ही अभी तक बना है. स्कूल कोयेड होने के कारण आये दिन स्कूल कैंपस में गलत हरकतें करते हुए छात्र पकड़े जाते है. स्कूल की टीचर्स प्रिंसिपल की बैठक में कई बार टीचर्स ने प्रिंसिपल से स्कूल में (खासकर वॉसरूम, क्लासरूम) सीसी टीवी कैमरे लगाने की मांग किया हैं. लेकिन पूर्व प्राचार्य रामानुज प्रसाद इसको नजरअंदाज करते रहे. इसकी जानकारी देते हुए एच मीनाक्षी ने कहा कि स्कूल में सेक्सुल हेरेसमेंट से आये दिन गल्र्स स्टूडेंट्स को सामना करना पड़ता है. लेकिन अभी तक स्कूल सेक्सुल हेरेसमेंट सेल नहीं बनाया.
- बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में भी होती है धांधली
एच मीनाक्षी ने 2012 प्लस टू मूल्यांकन प्रक्रिया में डीएवी को पोल खोलते हुए बताया कि सीबीएसइ की ओर से मुङो डीएवी वाल्मी में हेड एग्जामिनर के रूप में नियुक्त किया गया था. लेकिन पूर्व प्राचार्य ने मुङो वाल्मी डीएवी हेड एग्जामिनर के रूप में नहीं जाने दिया और वहां पर अपने किसी लोग को भेज दिया. मुङो डीएवी बीएसइबी में ही रखा गया. जब इस बात की भनक सीबीएसइ दिल्ली को लगा तो उन्होंने तुरंत फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए वहां से टीम भेजी. डीएवी बीएसइबी में टीम के आने की जानकारी रामानुज प्रसाद को मिलते ही उन्होंने मुङो एक कमरे में बंद कर दिया. टीम लौट गयी. दूसरे दिन जब टीम वाल्मी डीएवी गयी तो मुङो वाल्मी डीएवी पहले ही भेज दिया गया था. सीबीएसइ की टीम ने मुझसे कई जांच भरे सवाल भी किये.

Sunday, April 12, 2015

सीबीएसइ का नया एफिलिएशन रूल, छठी क्लास के लिए भी लेना होगा परमिशन

सीबीएसइ का नया एफिलिएशन रूल, छठी क्लास के लिए भी लेना होगा परमिशन

- बिना एफिलिएशन के सीबीएसइ का नाम यूज करने पर होगी कार्रवाई
- एफिलिएशन मिलने के बाद ही स्कूल लेगा नामांकन
रिंकू झा, पटना
अभी तक स्कूलों को सीबीएसइ से क्लास 9वीं और क्लास 11वीं का एफिलिएशन लेना होता था. लेकिन अब कोई भी स्कूल सीबीएसइ के नाम ओर लोगो का तभी इस्तेमाल कर सकता है, जब उस स्कूल के पास सीबीएसइ का छठी क्लास चलाने का परमिशन मिला हो. सीबीएसइ के 2015-16 एफिलिएशन बाइ लॉज के अनुसार अब स्कूलों को मिडिल क्लास सिलेबस को चलाने के लिए सीबीएसइ का परमिशन लेना होगा. सीबीएसइ के एफिलिएशन बाइ लॉज के धारा 15.9 के अनुसार 6ठी में परमिशन लेने के बाद ही 8वीं तक सीबीएसइ का नाम इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं, सेकेंडरी लेवल का एफिलिएशन मिलने के बाद ही 9वीं में नामांकन स्कूल ले सकता है. इसके अलावा सीनियर सेकेंडरी लेवल का एफिलिएशन मिलने के बाद ही स्कूल 11वीं में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर सकता है.
बिना एफिलिएशन सीबीएसइ का इस्तेमाल तो एफआइआर
सीबीएसइ ने तमाम उन स्कूलों को चेतावनी दी है कि अगर कोई भी ऐसा स्कूल जो बिना एफिलिएशन सीबीएसइ के नाम का इस्तेमाल कर रहा है. सीबीएसइ के नाम से स्कूल में नामांकन ले रहा है तो ऐसे स्कूल पर एफआइआर किया जायेगा. क्योंकि सीबीएसइ के नाम का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब क्लास छठी चलाने का परमिशन सीबीएसइ से उस स्कूल ने लिया हो. अगर सीबीएसइ उस स्कूल के मिडिल क्लास सिलेबस को परमिशन देता है तो वो स्कूल सीबीएसइ के नाम का इस्तेमाल कर सकता है. ऐसे में उस स्कूल को एक नंबर दिया जाता है. इसी नंबर से वो खुद का प्रूव भी कर सकता है.
दो सालों का मिलेगा परमिशन
सीबीएसइ के अनुसार किसी भी स्कूल को क्लास छठी में सीबीएसइ का परमिशन दो सालों के लिए मिलेगा. दो सालों के अंदर स्कूल को सीबीएसइ से सेकेंडरी लेवल का परमिशन लेना होगा. इस एफिलिएशन मिलने के बाद ही 9वीं में स्कूल स्टूडेंटस का रजिस्ट्रेशन करेगा. ऐसा ही नियम सीनियर सेकेंडरी लेवल पर भी लागू होता है. सीबीएसइ के सिटी को-ऑर्डिनेटर राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि छठी का परमिशन मिलने के बाद ही सीबीएसइ बोर्ड का एफिलिएशन आगे के क्लास के लिए मिलेगा. सीबीएसइ ने यह नियम उन स्कूलों को लेकर किया है जो सीबीएसइ के नाम का गलत इस्तेमाल करते है.
अप्लाइ के नाम पर नहीं ठगे अभिभावकों को
सीबीएसइ ने उन स्कूलों को चेताया है जिसमें स्कूल की ओर से अभिभावकों को कहा जाता है कि सीबीएसइ में एफिलिएशन के लिए अप्लाइ किया गया है. जल्द ही एफिलिएशन मिल जायेगा. ऐसे स्कूलों पर सीबीएसइ ने कहा है कि अगर किसी स्कूल का एफिलिएशन समाप्त हो जाता है तो उस स्कूल में एक साल पहले ही रि-एफिलिएशन के लिए अप्लाइ करना होता है. अगर किसी स्कूल का एफिलिएशन मार्च 2016 में समाप्त होता है तो ऐसे में उस स्कूल को मार्च 2015 से जून 2015 तक एफिलिएशन के लिए अप्लाइ करना होगा.

कोट
सीबीएसइ के नाम और लोगो का इस्तेमाल करने वाले स्कूल पर कार्रवाई होगी. हम राज्य सरकार को इस ओर ध्यान देने के लिए कहेंगे. क्योंकि किसी भी स्कूल को पहले राज्य सरकार से स्कूल चलाने का परमिशन लेना होता है. अगर कोई स्कूल सीबीएसइ के नाम का इस्तेमाल कर अभिभावकों और बच्चों के भविष्य को दांव लगा रहा है तो ऐसे स्कूल पर एफआइआर करने की सिफारिश की जायेगी.
जोसफ इमैन्युअल, सेक्रेटरी, सीबीएसइ दिल्ली

डीएवी बीएसइबी के अलग-अलग आंकड़ों से सीबीएसइ कर रहा कंफ्यूज

डीएवी बीएसइबी के अलग-अलग आंकड़ों से सीबीएसइ कर रहा कंफ्यूज

- सीबीएसइ को खुद नहीं पता डीएवी बीएसइबी में कितने स्टूडेंट्स 12वीं बोर्ड में हुए शामिल
- पटना पुलिस के पास सीबीएसइ ने 1299 स्टूडेंट्स की भेजी लिस्ट
- सीबीएसइ विजिलेंस विभाग के फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट में डीएवी बीएसइबी में थे 1239 स्टूडेंट्स
संवाददाता, पटना
डीएवी बीएसइबी में कितने स्टूडेंट्स 2015 में 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए. कितने स्टूडेंट्स का नाम सीबीएसइ के एलओसी ( लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) में शामिल था. कितने स्टूडेंट्स का 12वीं का एडमिट कार्ड निर्गत हुआ. कितने स्टूडेंट्स डीएवी बीएसइबी में 12वीं क्लास में पढ़ते थे. इस संबंध में सीबीएसइ खुद ही कंफ्यूज्ड हैं. कभी सीबीएसइ पटना रीजनल ऑफिस से यह जानकारी दी जा रही है कि डीएवी बीएसइबी में 1239 स्टूडेंट्स 12वीं के अटेंडेंस रजिस्टर पर नामांकित हैं और यही स्टूडेंट्स 12वीं की बोर्ड परीक्षा में भी शामिल हुए. वहीं, कभी सीबीएसइ रीजनल ऑफिस से यह जानकारी दी जाती है डीएवी बीएसइबी में 1327 का नामांकन लिया गया था. लेकिन अब सीबीएसइ कह रही है कि डीएवी बीएसइबी में 1299 स्टूडेंट्स 2015 में 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए हैं.
पटना पुलिस को दी गयी 1299 स्टूडेंट्स की जानकारी
हाल में पटना पुलिस ने सीबीएसइ रीजनल ऑफिस और डीएवी बीएसइबी से 12वीं के स्टूडेंट्स संबंधित जानकारी मांगी थी. इस जानकारी के अनुसार सीबीएसइ ने पटना पुलिस को पत्र संख्या 1208/15 का जवाब देते हुए बताया कि डीएवी बीएसइबी के 12वीं के एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) 1299 स्टूडेंट्स शामिल थे. सीबीएसइ के पास यह 1299 स्टूडेंट्स का लिस्ट स्कूल की ओर से भेजा गया था. सीबीएसइ की ओर से यह लेटर पुलिस निरीक्षक सह थानाध्यक्ष, शास्त्री नगर को भेजा गया है.
सीबीएसइ के खुद का रिपोर्ट गड़बड़
सीबीएसइ की ओर से डीएवी बीएसइबी को लेकर दिया गया रिपोर्ट खुद ही गड़बड़ है. सीबीएसइ विजिलेंस विभाग की ओर से 9 और 16 अक्तूबर 2014 को डीएवी बीएसइबी स्कूल का फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया. इसमें सीबीएसइ की ओर से दो सदस्य की कमेटी बनायी गयी. इस कमेटी के रिपोर्ट के अनुसार डीएवी बीएसइबी में 9 और 16 अक्तूबर को 12वीं क्लास में 131 स्टूडेंट्स उपस्थित थे. 12वीं के अटेंडेंस रजिस्टर पर 1239 स्टूडेंट्स का अटेंडेंस 9 और 16 अक्तूबर 2014 को बना था. वहीं, जब कमेटी ने 12वीं का नामांकन रजिस्टर देखा तो पता चला कि 12वीं में नामांकित स्टूडेंट्स की संख्या 1327 है. ऐसे में 88 स्टूडेंट्स को स्कूल ने गायब कर दिया. पटना पुलिस के पास ये 88 स्टूडेंट्स भी जांच के घेरे में है.
1299 स्टूडेंट्स हैं तो अटेंडेंस रजिस्टर पर 1239 कैसे
डीएवी बीएसइबी में 12वीं के एलओसी में अगर 1299 स्टूडेंट्स हैं तो फिर स्कूल के एटेंडेंस रजिस्टर पर 1239 ही स्टूडेंट्स क्यूं है. अब 60 स्टूडेंट्स कहां गये. जब सीबीएसइ के पास 1299 स्टूडेंट्स का एलओसी 12वीं के लिए भेजा गया था तो फिर स्कूल में 1239 स्टूडेंट्स की क्यूं एटेंडेंस रजिस्टर पर नजर आ रहे थे. बाकी 60 स्टूडेंट्स कैसे एलओसी में शामिल हो गये. इसके अलावा जब 1327 स्टूडेंट्स 12वीं में नामांकित थे तो 1299 का ही केवल एलओसी क्यूं भरवाया गया. ये तमाम प्रश्न अभी भी डीएवी 12वीं को लेकर कंफ्यूजन में है.
88 स्टूडेंट्स के मामले पर कोई कार्रवाई नहीं
सीबीएसइ रीजनल ऑफिस ने अभी तक डीएवी बीएसइबी के उन 88 स्टूडेंट्स पर कोई कार्रवाई नहीं किया है, जिसका लिस्ट रीजनल ऑफिस को डीएवी के पूर्व प्राचार्य रामानुज प्रसाद ने उपलब्ध करवाया था. ये 88 स्टूडेंट्स 11वीं में फेल होने के बाद 12वीं की बोर्ड परीक्षा में कैसे शामिल हो गये. इन 88 स्टूडेंट्स का 11वीं का रिजल्ट भी सीबीएसइ के पास मौजूद है.
2011 से डीएवी बीएसइबी में बढ़ने लगी स्टूडेंट्स की संख्या
सीबीएसइ द्वारा पटना पुलिस को 28 मार्च को दी गयी लिखित सूचना के अनुसार डीएवी बीएसइबी में 2011 सत्र से स्टूडेंट्स की संख्या अचानक से प्लस टू में बढ़ने लगी. जहां स्कूल में 2011 में 730 स्टूडेंट्स 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए. वहीं 2012 में 784, 2013 में 929, 2014 में 1290 और 2015 में 1299 स्टूडेंट्स ने 12वीं बोर्ड की परीक्षा दिया. 

सीबीएसइ हिंदी और इंगलिश का परीक्षा पैटर्न करेगा चेंज

सीबीएसइ हिंदी और इंगलिश का परीक्षा पैटर्न करेगा चेंज

- सीबीएसइ के 9वीं और 10वीं में लैग्वेज पेपर में किया गया चेंज
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से इस सेशन से 9वीं और 10वीं क्लास के परीक्षा पैटर्न में चेंज करने जा रहा है. मुख्य रूप से इंगलिश और हिंदी विषय में परिवर्तन किया जायेगा. लैंग्वेज के अलावा सोशल साइंस में भी इस बार से परीक्षा पैटर्न अलग तरीके का होगा. हिंदी अ (कोड 002) और हिंदी ब (कोड 085) विषय में जहां हर चैप्टर में प्रश्नों के निर्धारित अंकों में बदलाव होगा. वहीं इंगलिश में वोकैवलरी प्रोरसन को जोड़ा जायेगा. सीबीएसइ के अनुसार हिंदी विषय में अभी तक प्रश्न पत्र के प्रारूप में बदलाव होता था. हर प्रश्न के लिए अंक निर्धारित रहते थे. लेकिन अब हिंदी विषय के प्रश्नों के अंकों में बदलाव किया जायेगा. कुछ चैप्टर से कम तो कुछ चैप्टर से अधिक अंकों के प्रश्न पूछे जायेंगे.
- स्कूल लेवल पर दी जायेगी जानकारी
बदले हुए परीक्षा पैटर्न की जानकारी सीबीएसइ स्कूल लेवल पर अभी से देना शुरू कर दिया है. सीबीएसइ के अनुसार नये सत्र के साथ स्कूलों को चेज पैटर्न की जानकारी दी जा रही हैं. इससे स्टूडेंट्स अभी से परीक्षा पैटर्न को लेकर अवगत हो जायेंगे. कितने प्रश्न रेगूलर कोर्स से और कितने प्रश्न ओटवा (ओपेन टेक्स्ट बेस्ड असेसमेंट) के तहत पूछे जायेंगे, इसकी जानकारी भी सीबीएसइ ने दिया है.
- इकोनॉमिक्स में जोड़ा गया नया चैप्टर
9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स अब फूड सेक्योरिटी ऑफ इंडिया चैप्टर को पढ़ेंगे. सीबीएसइ ने इसकी जानकारी दे दी है. सीबीएसइ के अनुसार  इकोनॉमिक्स विषय में यूनिट फोर में चेंज किया गया है. अभी तक पोवर्टी एड ए चैलेंज फेसिंग इंडिया चैप्टर को स्टूडेंट्स पढ़ते थे. लेकिन अब इसके बदले  फूड सेक्योरिटी ऑफ इंडिया को यूनिट फोर में जोड़ा गया है. सीबीएसइ के अनुसार ओटवा (ओपेन टेक्स्ट बेस्ड असेसमेंट) के तहत इस बार से इकोनॉमिक्स में भी प्रश्न पूछे जायेंगे. ज्ञात हो कि साइंस और इंगलिश कम्यूनिकेशन के परीक्षा पैटर्न में कोई चेंज नहीं किया गया हैं.

कोट
सीबीएसइ ने कुछ चेंजेज 2015 की बोर्ड परीक्षा के पहले किया था. अब कुछ चेंज 2016 की बोर्ड परीक्षा में किया जायेगा. इसकी तैयारी अभी से कर दी गयी हैं. एसए-वन की सितंबर में होने वाली परीक्षा नये पैटर्न पर ही ली जायेगी.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ 

सीबीएसइ की वोकेशनल कोर्स को यूजीसी ने दिया मान्यता

सीबीएसइ की वोकेशनल कोर्स को यूजीसी ने दिया मान्यता

- सीबीएसइ के वोकेशनल कोर्स के कई विषयों से ग्रेजुएशन कर पायेंगे 12वीं के स्टूडेंट्स
- 2015 से होगा लागू
संवाददाता, पटना
वोकेशनल कोर्स से प्लस टू का सर्टिफिकेट लेने वाले सीबीएसइ स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी है. जो स्टूडेंट्स ने वोकेशनल कोर्स से प्लस टू कर रहें है, उन्हें अब डायरेक्टर एडमिशन  कॉलेंजों में हो जायेगा. जिस वोकेशनल कोर्स से स्टूडेंट्स प्लस टू का सर्टिफिकेट लिया है, उसी विषय से वो ग्रेजुएशन की डिग्री भी ले पायेंगे. इस बात का फैसला सीबीएसइ और यूजीसी के बीच हुआ है. 2015 में वोकेशनल कोर्स से प्लस टू करने वाले स्टूडेंट्स को इसका फायदा होगा. क्योंकि इसी सत्र से इसे लागू किया जा रहा है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो इसकी जानकारी तमाम यूनिवर्सिटी के पास भेज दिया गया है. ग्रेजुएशन का नामांकन शुरू होने के बाद ऐसे छात्र सीधे अपना नामांकन करवा सकेंगे.
- कॉलेजों में पढ़ाई जायेगी अब सीबीएसइ कोर्स
वोकेशनल कोर्स को बढ़ावा देकर ही एजूकेशन सिस्टम को सही किया जा सकता है. कई ऐसे क्षेत्र है जहां पर जॉब ऑपरच्यूनिटी काफी अच्छी है, लेकिन छात्रों को पता नहीं होने के कारण वो भटक जाते है. यूथ को सही दिशा में सही मंजिल मिले, इसके लिए अब यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) और सीबीएसइ ने साथ मिलकर इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया है. सीबीएसइ स्कूलों में चलाये जा रहे कुछ वोकेशनल कोर्स को यूजीसी ने इसी फैसला के अंतर्गत मान्यता दिया है. अब स्टूडेंट्स 9वीं और 11वीं में जो वोकेशनल कोर्स को लेकर पढ़ाई शुरू करेंगे, उन्हें कॉलेजों में उस वोकेशनल कोर्स को करने के मौका मिलेगा. इससे वो एक ही विषय में हायर लेवल की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे.
- 13 वोकेशनल कोर्स को मिली मान्यता
स्टूडेंट्स वोकेशनल कोर्स में स्टडी करना चाहते हे तो उन्हें अपने कॉलेज से ही यह सुविधा इस वर्ष से मिलेगी. यूजीसी ने कॉलेजों में 13 वोकेशनल कोर्स शुरू करने का फैसला लिया है. यह वोकेशनल कोर्स यूजी लेवल के होंगे. इसमें स्टूडेंट्स को स्पेशनलाइज्ड क्षेत्र का सर्टिफिकेट प्रोफाइड किया जायेगा. वोकेशनल कोर्स के लिए मिनिस्ट्री ऑफ हयूमन रिसोर्स ने नेशनल वोकेशनल एजूकेशनल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क का गठन किया है. यह कोर्स स्टूडेंट्स अपनी पसंद के हिसाब से सेलेक्ट कर सकते है.
यूजी लेवल पर किसी संस्थान में नहीं है कोर्स
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन और यूजीसी ने इन कोर्स को शुरू करने के पीछे मकसद है कि ग्रेजुएशन लेवल पर इस कोर्स को पढ़ाने वाले संस्थान न के बराबर है. यदि स्टूडेंट्स इन कोर्स में ग्रेजुएशन करते है, तो उनकी नॉलेज तो बढ़ेगी ही, साथ ही उन्हें रोजगार के नये अवसर प्राप्त होंगे. यूजीसी ने जिन पाठयक्रमों की लिस्ट भेजी है, ये अब तक सीबीएसइ में पढ़ाये जाते रहे है.
- पटना के स्कूलों में भी शुरू होगा वोकेशनल कोर्स
सीबीएसइ ने देश भर के स्कूलों को यह निर्देश दिया है कि 2014-15 सत्र से हर स्कूलों में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू किया जायें. इससे छात्र रेगूलर क्लास के अलावा वोकेशनल कोर्स भी कर पायेंगे. हर छात्र को एक ना एक वोकेशनल कोर्स करना ही होगा. अब छात्र अपने पसंद के अनुसार कोर्स चुन सकते है. छात्र के चुने गये विषयों के आधार पर स्कूल उन्हें सुविधा मुहैया करवायेगा. ज्ञात हो कि बोर्ड द्वारा 40 वोकेशनल कोर्स चलाये जा रहे है. इसमें 13 कोर्स को यूजीसी द्वारा कॉलेजों में चलायें जायेंगे.

यूजीसी ने इन कोर्स को दिया है मान्यता
लीगल स्टडीज,
हयूमन एंड जेंडर स्टडीज,
थिएटर स्टडीज,
 एनसीसी,
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कोट
सीबीएसइ कई सालों से इस प्रयास में था कि यूजीसी ने वोकेशनल कोर्स को मान्यता मिल जायें. इससे छात्र में काफी उत्साह होगा. अभी यूजीसी ने 13 कोर्स को मान्यता दिया है, लेकिन जल्द ही दूसरे और भी कोर्स में यह सुविधा दी जायेगी.
सीबी सिंह, सचिव, सीबीएसइ पाटलिपुत्र सहोदया 

दो सालों के परफार्मेंस पर होगा 11वीं में एडमिशन

दो सालों के परफार्मेंस पर होगा 11वीं में एडमिशन

- 10वीं के रिजल्ट निकलने से पहले ही 11वीं में होगा एडमिशन
- ऑरिजिनल एडमिशन के बदले स्कूल लेगा प्रोविजनल एडमिशन
संवाददाता, पटना
बोर्ड की परीक्षा भले खत्म हो गयी हो, लेकिन इसके रिजल्ट का इंतजार ना तो स्कूल को है और ना ही छात्रों को. कुछ ऐसा ही इस बार सीबीएसइ और आइसीएसइ के स्कूलों में देखने को मिल रहा है. मैट्रिक की परीक्षा खत्म होते ही 11वीं के एडमिशन प्रक्रिया स्कूलों में शुरू हो गयी है. लेकिन इस एडमिशन में उन्हीं छात्रों को पहले मौका मिलता है जिनके बोर्ड के रिजल्ट बढ़िया होता है. कहा जायें तो 9वीं और 10वीं के स्कूल रिजल्ट के आधार पर 11वी में प्रोविजनल एडमिशन प्रक्रिया चलता है. स्कूलों से मिली जानकारी के अनुसार रिजल्ट के पहले स्कूलों में 11वीं के एडमिशन प्रक्रिया शुरू तो हो गयी है, लेकिन यह एडमिशन प्रोविजनल होता है. दिल्ली पब्लिक स्कूल, पटना से मिली जानकारी के अनुसार रिजल्ट के पहले एक प्री एडमिशन प्रक्रिया होता है. इस एडमिशन में बाहर के छात्र एडमिशन नहीं लेते है. स्कूल बोर्ड के आधार पर स्कूल के ही छात्र का एडमिशन होता है.
- दो सालों के परफार्मेस पर मिलता है एडमिशन
11वीं में प्रोविजनल एडमिशन के लिए छात्रों का 9वीं और 10वीं के रिजल्ट को देखा जाता है. 9वीं और 10वीं में जिन छात्रों से जिस विषय में अच्छा किया होता है, अंक के आधार पर उन्हें उसी विषय को रखने को कहा जाता है. अगर कोई छात्र साइंस पढ़ना चाहता है लेकिन उसे साइंस में अच्छे अंक नहीं आये है तो वो साइंस नहीं ले सकते है. इसकी जानकारी भी तमाम स्कूल पहले ही दे देता है.
 - एडमिशन प्रक्रिया में जुट गये स्कूल
 जहां कई स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन की तिथि निकाल दिया है वहीं कई स्कूल तिथि निकालने की तैयारी में है. इतना ही नहीं छात्र भी 11वीं में न्यू एडमिशन प्रक्रिया में जुट गये है. स्कूल में इंक्वायरी के अलावा एडमिशन टेस्ट देने की तैयारी भी छात्रों ने शुरू कर दिया है. क्योंकि अगर अभी छात्र एडमिशन नहीं ले पायेंगे तो उन्हें रिजल्ट निकलने के बाद मौका नहीं मिलेगा. सेंट माइकल हाई स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार 11वीं में एडमिशन के लिए टेस्ट लिया जाता है. इसमें स्कूल के अपने छात्र के अलावा बाहर दूसरे स्कूल के भी छात्र होते है. जिन्हें 90 परसेंट के उपर अंक आते है, उन्हें ही पहले मौका दिया जाता है. वहीं
- मई में निकलेगा रिजल्ट
सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड के रिजल्ट मई में थर्ड वीक में निकलता है. उसके बाद प्लस टू में एडमिशन प्रक्रिया होने से सेशन  लेट होने की संभावना होती है. ऐसे में कई स्कूल रिजल्ट के पहले ही प्लस टू में एडमिशन लेकर पढ़ाई शुरू कर देते है. सेंट माइकल हाई स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार अगर अप्रैल में प्लस टू का सेशन शुरू हो जाता है तो गर्मी की छुटटी के लगभग दो महीने पहले काफी कोर्स पूरा हो जाता है. छात्र भी काफी कुछ पढ़ाई कर पाते है. रिजल्ट के इंतजार में सेशन लेट होने का डर बना रहता है.
- सेंट माइकल में चलेगा ब्रिज क्लास
सेंट माइकल हाई स्कूल में 11वीं में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए ब्रिज क्लास चलाये जायेंगे. स्कूल के बोर्ड दे चुके छात्रों के लिए किये जा रहे इस क्लास में प्लस टू के साइंस और कॉमर्स में बेसिक चीजों की जानकारी दी जायेगी. इस संबंध में स्कूल के कामर्स टीचर बीपी राय ने बताया कि दो महीने ब्रिज क्लास होता है. इससे छात्रों के प्लस टू की बेसिक जानकारी मिल जाती है. वहीं लोयेला हाई स्कूल में प्लस टू में एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है.

उर्दू टीइटी अभ्यर्थी की एक ही मांग, जल्दी करों नियोजन

उर्दू टीइटी अभ्यर्थी की एक ही मांग, जल्दी करों नियोजन

- 2013 में किये पास, अभी तक नौकरी नहीं
- उर्दू और बांग्ला टीइटी अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति को लेकर किया प्र्दशन
संवाददाता, पटना
तीन साल हो गये, अभी तक शिक्षक के पद पर नियुक्त नहीं किये गये है. धरना और अनशन किया, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला. यह हाल उर्दू और बांग्ला टीइटी अभ्यर्थी का है. अक्टूबर 2013 में परीक्षा और दिसंबर 2013 में रिजल्ट आ गया, लेकिन नियुक्त नहीं किया गया. नियुक्ति की मांग पूरी हो, इसको लेकर ऑल बिहार उर्दू टीइटी संघ की ओर से शांति मार्च बुधवार को निकाला गया. कारगिल चौक से आर ब्लॉक तक शांति मार्च निकालने की योजना थी. उसके बाद अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाती. लेकिन डाक बंगला चौराहे पर पुलिस के साथ झड़प हो जाने के कारण मार्च वहीं पर खत्म हो गया. इस संबंध में संघ की उपाध्यक्ष रजिया कमर ने बताया कि हम लोग शांति मार्च निकाल रहे थे. पुलिस के साथ थोड़ी झड़प होने के बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया. पांच महिला अभ्यर्थी पर पुलिस ने लाठी बरसाया. लाठी चार्ज में महिला उर्दू टीइटी घायल हो गयी. बाद में उन्हें हम लोग पीएमसीएच लेकर गये.
- 12 मार्च से 10 अप्रैल तक मिला बस फैसले की तारीख
रजिया कमर ने बताया कि नियोजन को लेकर हाई कोट में केस चल रहा है. सरकारी वकील के नहीं आने के कारण 12 मार्च से अभी तक बस हमें तारीख की दी जा रही है. 12 मार्च को हाई कोर्ट में फैसला आने वाला था. लेकिन 12 मार्च को तिथि बढ़ा कर 17 मार्च कर दी गयी.  17 मार्च को तिथि बढ़ा कर 23 मार्च कर दिया गया. इसके बाद 31 मार्च और फिर 1 अप्रैल और फिर 3 अप्रैल को किया गया. 3 मार्च को भी कोई फैसला नहीं किया गया. 3 मार्च की तिथि बढ़ा कर अब 10 अप्रैल कर दिया गया है. रजिया कमर ने बताया कि हमारी एक ही मांग है कि 10 अप्रैल को हमारे लिए फैसला किया जायें ना कि अगली तारीख दी जायें. उस दिन सरकारी वकील को बुलाया जायें. इस बीच संघ की ओर से अनिश्चितकालीन हड़ताल आर ब्लॉक पर जारी रहेगा.
- 27 हजार उर्दू टीइटी का नियोजन हैं फंसा हुआ
बिहार उर्दू और बांग्ला स्पेशल टीइटी परीक्षा के तहत पूरे बिहार से 27 हजार अभ्यर्थी को सफलता मिली है. अक्टूबर 2013 में परीक्षा ली गयी और दिसंबर 2013 में रिजल्ट निकला. लेकिन अभी तक एक भी अभ्यर्थी को नियुक्त नहीं किया गया है. संघ के उपाध्यक्ष रजिया कमर ने बताया कि 21 जनवरी 2015 को हाई कोट ने उर्दू और बांग्ला टीचर के बहाली पर रोक लगा दिया है.  इसके बाद हाई कोट ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से संशोधित रिजल्ट की घोषणा करने का आधार बताने को कहा. समिति की ओर से 30 जनवरी को हाई कोट को बताया कि जो 13 प्रश्न गलत थे, उसे ग्रेस दिया गया और इससे 11 हजार और रिजल्ट का प्रकाशन किया गया. इसके बाद हाई कोट ने सरकार से जवाब मांगा है. लेकिन सरकार की ओर से किसी तरह का जवाब नहीं देने के कारण अभी तक बहाली नहीं हो पायी है.
- दो बार में निकला था रिजल्ट
बिहार उर्दू एवं बांग्ला स्पेशनल टीइटी परीक्षा का रिजल्ट दो बार प्रकाशित किया गया. पहली बार रिजल्ट दिसंबर 2013 में निकाला गया. रिजल्ट घोषित होने के बाद पता चला कि प्रश्न पत्र में 13 प्रश्न के ऑप्सन गलत थे. इसके बाद फिर दुबारा रिजल्ट की घोषणा नंवबर 2014 में किया गया. इसमें 13 नंबर का ग्रेस अभ्यर्थी को दिया गया. इसके बाद लगभग 11 हजार अभ्यर्थी दुबारा सफल हुए. पहले चरण में 15 हजार 310 अभ्यर्थी को सफलता मिली थी. ज्ञात हो कि उर्दू एंव बांग्ला स्पेशल टीइटी परीक्षा में ढाई लाख के लगभग परीक्षार्थी शामिल हुए थे. अभ्यर्थी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बाकी अंसारी ने कहा कि जब तक सरकार हमारी मांगे को नहीं मानेगी तब तक हम अनशन पर बैठे रहेंगे.

10 लाख आबादी वाले शहर के बारे में पढ़ेंगे 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स

10 लाख आबादी वाले शहर के बारे में पढ़ेंगे 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स

- सीबीएसइ ने जारी किया नोटिस
- जोगरफी के साथ कई विषयों के सिलेबस में किया गया चेंज
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ के स्टूडेंट्स अब देश भर के उन तमाम शहरों की स्टडी करेंगे जिसकी आबादी 10 लाख के उपर की है. इसके अलावा सीबीएसइ स्कूलों में उन स्टेट की पढ़ाई करवायी जायेगी जहां का जेंडर रेसियो सबसे अधिक और सबसे कम हैं. सीबीएसइ ने इसकी जानकारी स्कूलों के पास भेज दिया है. इसकी पढ़ाई 11वीं और 12वीं के स्कूलों में किया जायेगा. इसके बाद अब प्लस टू में जोगरफी विषय में पापूलेशन विषय को समाप्त कर दिया गया है. ज्ञात हो कि सीबीएसइ प्लस टू जोगरफी विषय में 2001-2011 पापूलेशन की पढ़ाई करवायी जा रही थी. इसके अंतर्गत छात्र हर स्टेट के अलग-अलग पापूलेशन की पढ़ाई करते थे. इसके अलावा 2011 के अब देश भर के 53 मेट्रोपोलिटन सिटीज को भी सीबीएसइ स्कूलों में पढ़ाई नहीं होगी.
- 15 अंक का ओटबा से प्रश्न आयेगा इकोनॉमिक्स में
प्लस टू लेवल पर इकोनॉमिक्स विषय में भी मार्क्‍स में कई तरह के चेंजेज किये गये है. 2014 तक करेंट चैलेंज इकोनॉमिक्स मे 10 अंक का ओटबा से प्रश्न आते थे. लेकिन अब इसमें 15 अंक के ओटवा के प्रश्न पूछे जायेंगे. वहीं बायॉलोजी के अंकों के वितरण में भी चेंज किया गया है. बायोलॉजी में पहले 10 अंक के डायवसिटी इन लिविंग ऑग्रेनिज्म से प्रश्न पूछे जाते थे. लेकिन अब इसमें अंक कम कर 7 कर दिया गया है. अब बायोलॉजी के स्टूडेंट्स प्लांट साइकोलॉजी में 17 अंक के पढ़ेंगे. हिम्यूमन साइकोलॉजी से पहले 17 अंक के प्रश्न आते थे. अब इसमें 11 अंक के प्रश्न पूछे जायेंगे.
- एसए-वन से शुरू करना है नया पैटर्न
सीबीएसइ ने इस नये पैटर्न को सितंबर में होने वाले एसए-वन की परीक्षा से ही शुरू करने का निर्देश दिया है. इसी सिलेबस के आधार पर अब स्कूलों में पढ़ाई भी शुरू किया गया है. एसए-वन की परीक्षा से छात्रों को सही जानकारी मिल जायेगी. इस पैटर्न को लेकर सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को निर्देश जारी किया है. सीबीएसइ की ओर से इस संबंध में एक प्रश्न पत्र तैयार कर भी स्कूलों को भेजा जायेगा. जिससे स्कूल 2016 बोर्ड के प्री बोर्ड की परीक्षा इसी पैटर्न पर ले सकेगा.

कोट
सीबीएसइ ने समय के साथ पैटर्न में चेज किया है. अभी जानकारी मिलने से छात्रों और स्कूल को पैटर्न को जानने का मौका मिलेगा. एसए-वन भी इसी पैटर्न पर होगा तो छात्रों को समय रहते सारी जानकारी मिल जायेगी.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ

कैमरे की नजर में इंटर के 9 लाख उत्तर पुस्तिका

कैमरे की नजर में इंटर के 9 लाख उत्तर पुस्तिका

इस खबर की फोटो भी है. मॉनिटरिंग करते हुए बिहार बोर्ड के सचिव वाली फोटो टीम व्हॉट्स अप पर भेजी गयी है

- उत्तर पुस्तिका के हर एक पóो पर बिहार बोर्ड के सचिव की नजर
- पांच मूल्यांकन केंद्रों के सीसी टीवी कैमरा की मॉनिटरिंग हो रही है बिहार बोर्ड से
संवाददाता, पटना
मोबाइल पर मैसेज आयेगा या मोबाइल पर किसी का कॉल आयेगा. उत्तर पुस्तिका पर मूल्यांकन कार्य सही रिपोर्ट, एग्जामिनर की लापरवाही हो या हेड एग्जामिनर की अनदेखी, अब इन तमाम गतिविधियों पर लाइव मॉनिटरिंग बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव खुद कर रहे है. बिहार बोर्ड के इंटरमीडिएट का मूल्यांकन कार्य चल रहा है. मूल्यांकन कार्य में पारदर्शिता लाने और मूल्यांकन की हर एक गतिविधि पर नजर रखने के लिए समिति से ही मूल्यांकन केंद्र को कंट्रोल किया जा रहा है. समिति की माने तो फिलहाल यह पूरे प्रदेश के पांच मूल्यांकन केंद्र को चुना गया है. इन पांचों मूल्यांकन केंद्र को समिति कार्यालय से लिंक किया गया है. ऐसे में लगभग 9 लाख उत्तर पुस्तिका और 15 सौ एग्जामिनर पर समिति में बैठे सचिव खुद मॉनिटरिंग कर रहे है.
- साइंस और आर्ट्स विषयों पर पैनी नजर
इन मूल्यांकन केंद्र पर अधिकांश में साइंस और आर्ट्स विषय की कॉपी जांची जा रही है. ऐसे में इन विषयों के मूल्यांकन में किसी तरह की गलती ना हो. उत्तर पुस्तिका में मार्किग स्कीम पर पूरा ख्याल रखा जायें. एग्जामिनर समय पर उत्तर पुस्तिका की जांच करें, को समिति से लाइव मॉनिटरिंग हो रही है. समिति की माने तो ये पांचों मूल्यांकन केंद्र पूरे बिहार में सबसे बड़ा है. यहां पर सबसे अधिक उत्तर पुस्तिका की जांच होती है. काफी संख्या में एग्जामिनर यहां पर होते है. इस कारण इन केंद्रों पर लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गयी है.
- एक एग्जामिनर दे रहे है एक कॉपी पर 30 मिनट
उत्तर पुस्तिका में मार्किग की बात हो या एक एग्जामिनर एक उत्तर पुस्तिका पर समय देने की बात हो, हर एग्जामिनर पर इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है. समिति की माने तो सीसी टीवी कैमरे में हर एग्जामिनर को उत्तर पुस्तिका जांचते हुए देखा जा रहा है. इससे सचिव उत्तर पुस्तिका की हर एक पóो पर सचिव मॉनिटरिंग कर रहे है. समिति के सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी के मैट्रिक कार्यालय और इंटर काउंसिल के कार्यालय दोनों में ही बड़ा सा स्क्रीन लगाया गया है. इस स्क्रीन पर जिन मूल्यांकन केंद्रों पर सीसी टीवी लगाया गया है, उन्हें लिंक किया गया है.
- सचिव के मोबाइल पर भी 24 घंटे की मॉनिटरिंग
सीसी टीवी कैमरे को समिति कार्यालय से लिंक करने के बाद अब सचिव के मोबाइल पर भी उसे लिंक किया गया है. इससे अब बिहार बोर्ड के सचिव 24 घंटे इन मूल्यांकन केंद्रों की मॉनिटरिंग कर पायेंगे. पांच मूल्यांकन केंद्र पर सीसी टीवी लगाया गया है. सीसी टीवी पर लाइव दिखने के अलावा इसकी रिकॉडिंग भी की जा रही है. जिसे बाद में समिति दुबारा देख सकता है. इसके अलावा इंटरमीडिएट के 74 मूल्यांकन केंद्र की वीडियो रिकॉर्डिग भी की जा रही है. अगर किसी केंद्र पर पैरवी आदि की जायेगी तो इसकी जानकारी सचिव को तुरंत लग जायेगा.

इन मूल्यांकन केंद्र पर लगा है सीसी टीवी कैमरा
- एएन कॉलेज पटना, कॉमर्स कॉलेज पटना, एलएस कॉलेज मुजफ्फरपुर, गया कॉलेज, नालंदा कॉलेज बिहारसरीफ

कोट
इंटर का मूल्यांकन कार्य के लिए पूरे प्रदेश में 74 परीक्षा केंद्र बनाये गये है. पहली बार समिति की ओर से मूल्यांकन कार्य में सीसी टीवी लगाया गया है. सीसी टीवी को समिति के दोनों की कार्यालय से लिंक किया गया है. इससे समिति से ही पांचों मूल्यांकन केंद्र की मॉनिटरिंग की जा रही है. मूल्यांकन संबंधित जो भी नियम बनाये गये है सारे चीजों पर नजर रखी जा रही है.
श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 

सितंबर में हुआ सीबीएसइ का आदेश, नहीं की गयी स्पॉट इंक्वायरी

सितंबर में हुआ सीबीएसइ का आदेश, नहीं की गयी  स्पॉट इंक्वायरी

- डीएवी के पांचों मान्यता प्राप्त स्कूलों की करनी थी सीबीएसइ रीजनल ऑफिस को फिजिकल वेरिफिकेशन
- फरवरी में सीबीएसइ को पता चला,  नहीं हुआ पांचों डीएवी का फिजिकल वेरिफिकेशन
संवाददाता, पटना
स्कूल में शिक्षक-छात्र का रेसियो क्या है. हर क्लास में स्टूडेंट्स की संख्या कितनी है. टीचर्स की संख्या कितना है. रेगुलर और एडहॉक पर कितने टीचर स्कूल में कार्यरत है. हर क्लास में सेक्शन की कितनी संख्या है. स्कूल कितने एकड़ में है, स्कूल में सीबीएसइ नाम्स का पालन कितना हो रहा है. इन तमाम बिंदुओं पर पटना स्थिति तमाम डीएवी की जांच करनी थी. 8 सितंबर 2014 को सीबीएसइ ने पटना रीजनल ऑफिस को जांच के आदेश दिये गये थे. आदेश के तहत डीएवी बीएसइबी के अलावा डीएवी खगौल, डीएवी वाल्मी, डीएवी ट्रांसपोर्ट नगर, डीएवी गोला रोड में जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन भी करना था. सीबीएसइ का आदेश तो आ गया. लेकिन जांच कमेटी ने मात्र डीएवी बीएसइबी और उनके ब्रांच डीएवी का स्पॉट इंक्वायरी किया. बांकी डीएवी की जांच की गयी या नहीं, इसको लेकर सीबीएसइ ने जांच कमेटी के सदस्यों से जवाब मांगा है. जांच कमेटी में सीबीएसइ की रीजनल ऑफिसर रशिम त्रिपाठी और नवोदय विद्यालय के रिटायर ज्वाइंट डायरेक्टर डीएस सिंह शामिल थे. 18 मार्च  2015 को भेजे गये लेटर में सीबीएसइ ने जांच कमेटी से जवाब देने को कहा हैं.
सीबीएसइ ने मांगा ट्रांसपोर्ट नगर डीएवी की जांच रिपोर्ट
सीबीएसइ ने जांच कमेटी से जल्द से जल्द ट्रांसपोर्ट नगर डीएवी की जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया है. सीबीएसइ ने 8 सितंबर 2014 को भेजे गये सीबीएसइ/वीआइजी/एफ/13522/(4)/इ-288-289 ऑडर नंबर के तहत ट्रांसपोर्ट नगर डीएवी संबंधित सारी जांच रिपोर्ट मांगा हैं. इसके साथ सीबीएसइ ने तीन और डीएवी खगौल, वाल्मी और गोला रोड की जांच रिपोर्ट भी जांच कमेटी से मांगी है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो सितंबर 2014 में आदेश देने के बावजूद इन डीएवी की जांच नहीं की गयी है.
सूचना के अधिकार के तहत निकल कर आयी बातें
सीबीएसइ ने सितंबर 2014 में जांच के तो आदेश दे दिया. लेकिन इसकी इंक्वायरी नहीं किया. जब फरवरी 2015 में एक आरटीइ एक्टिविस्ट ने सीबीएसइ दिल्ली से पटना स्थित तमाम डीएवी की जांच रिपोर्ट देने को कहा. इसके बाद सीबीएसइ ने रिपोर्ट की खोज की तो पता चला कि मात्र एक डीएवी बीएसइबी की रिपोर्ट सीबीएसइ रीजनल ऑफिस से प्राप्त हुआ है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो सीबीएसइ के पास डीएवी बीएसइबी के अलावा किसी भी मान्यता प्राप्त डीएवी की फिजिकल वेरिफिकेशन या स्पॉट इंक्वायरी की रिपोर्ट रीजनल ऑफिस पटना से प्राप्त नहीं हुआ है.  मामला सामने आने के बाद सीबीएसइ ने रीजनल ऑफिस से पूरी जानकारी देने का आदेश दिया है.
पेंडिंग पड़ी है डीएवी बीएसइबी की मान्यता
डीएवी बीएसइबी की प्लस टू की मान्यता 31 मार्च को खत्म हो गया. सीबीएसइ के अनुसार 2015-17 सत्र के लिए नामांकन लेने वाले छात्र सीबीएसइ के तब तक नहीं माने जायेंगे जब तक डीएवी बीएसइबी को दुबारा प्लस टू की मान्यता नहीं मिल जाती है. डीएवी बीएसइबी को प्लस टू मान्यता दिया जाये या नहीं, इस फाइल अभी सीबीएसइ के पास पेंडिंग पड़ा हुआ है. सीबीएसइ की माने तो डीएवी बीएसइबी का प्लस टू की मान्यता समाप्त हो गयी है.

कोट
डीएवी की जो भी जांच करने के लिए हमें दायित्व दिया गया था. उसे हमने सीबीएसइ को दे दिया था. दुबारा लेटर सीबीएसइ ने दिया है. इसकी जानकारी सीबीएसइ को दुबारा हम भेज देंगे.
डीएस सिंह, जांच कमेटी के सदस्य