Saturday, February 21, 2015

फर्जी सर्टिफिकेट निकलाना पड़ सकता है महंगा

फर्जी सर्टिफिकेट निकलाना पड़ सकता है महंगा

- बीएड में नामांकन के लिए फर्जी सर्टिफिकेट देने से पहले सोच ले
- 2014 में नामांकन लेने वाले कई  नामांकन हो गया कैंसिल
संवाददाता, पटना
टीचर बनने के लिए अगर फर्जी सर्टिफिकेट की मदद ली तो आपके लिए यह महंगा पड़ सकता है. बीएड के लिए लिया जाने वाला टेस्ट भी पास कर गये, तो भी पकड़ में आने के बाद आपके नामांकन को रदद कर दिया जायेगा. ऐसा ही कुछ नामांकन को रदद हाल में किया गया है. 2013 में नामांकित होने वाले कई छात्रों के नामांकन को वेरिफिकेशन के बाद रदद कर दिया गया है. इसको लेकर बीएड के नामांकन के लिए गाइड लाइन जारी किया गया है. जिसके तहत कहा गया है कि फर्जी सर्टिफिकेट बनवा कर नामांकन लेने के बाद अभ्यर्थी को परेशानी हो सकती है.
- नामांकन के बाद होता है वेरिफिकेशन
बीएड में नामांकन के बाद इगAू और नालंदा ओपेन यूनिवर्सिटी के द्वारा वेरिफिकेशन का काम किया जाता है. इसके लिए जिस स्कूल का टिचिंग एक्सपेरियेंस अभ्यर्थी देते है. बाद में उस स्कूल से सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन करवाया जाता है. एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार कई बार अभ्यर्थी उस स्कूल के टीचर नहीं होते है, लेकिन पैसे के बल पर सर्टिफिकेट स्कूल से बनवा लेते है. ऐसे में वेरिफिकेशन के समय स्कूल को झूठ बोलना पड़ता है. कई बार स्कूल इसे छुपा लेता है. क्योकि जब वेरिफिकेशन ऑन द स्पॉट होता है तो स्कूल के लिए काफी मुश्किल भरा हो जाता है. वहीं एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार कई बार अभ्यर्थी फर्जी सर्टिफिकेट गांव के किसी स्कूल से बनवा लेते है. ऐसे में अगर वो स्कूल किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से एफिलिएटेड नहीं होता है तो नामांकन रदद कर दिया जाता है.

बीएड करें तो रखें इन बातों का ख्याल
- अभ्यर्थी किसी स्कूल में टीचर के रूप में कार्यरत हो
- पिछले दो सालों से स्कूल में पढ़ा रहें हों
- वर्तमान में भी किसी स्कूल में पढ़ा रहे हों
- बीएड का टेस्ट देते समय स्कूल में कार्यरत हो
- स्कूल की सैलरी स्लिप देना होगा
- पीएफ एकांउट होना चाहिए
- मान्यता प्राप्त बोर्ड के अंतर्गत स्कूल आता हो

कोट
बीएड में नामांकन के लिए नियम तो है. लेकिन फिर भर फर्जी सर्टिफिकेट के मामले सामने आते हैं. वेरिफिकेशन के लिए जब स्कूलों के पास भेजा जाता है तो कई जगहों से तो जवाब भी नहीं आता है. ऐसे में कई वेरिफिकेशन पेंडिंग में ही पड़ा रहता है. कोई पकड़ में आता है तो उसका नामांकन हम रदद करते है.
क्यू हैदर, डायरेक्टर, इग्नू

नामांकन प्रक्रिया काफी टाइट है. हम उन्हें ही परीक्षा में बैठने की अनुमति देते हैं जो स्कूल में रहने की वर्तमान स्थिति बताते हैं. इसके अलावा सैलरी स्टेटस भी मांगा जाता है. लेकिन फिर भी कई केस आते है जो फर्जी पकड़ में आते है. ऐसी स्थिति में उनके नामांकन को रदद कर दिया जाता है.
रास बिहारी सिंह, डायरेक्टर, नालंदा ओपेन यूनिवर्सिटी

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