Sunday, February 22, 2015

स्क्रूटनी में भी सुप्रिया दयाल के उत्तर पुस्तिका की नहीं हुई जांच

स्क्रूटनी में भी सुप्रिया दयाल के उत्तर पुस्तिका की नहीं हुई जांच

- सुचना के अधिकार के तहत बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की एक बार फिर खुली पोल
- मैट्रिक 2013 के मूल्यांकन प्रक्रिया के कारण सुप्रिया दयाल को मिला द्वितीय स्थान, दो साल से लगा रही बोर्ड की चक्कर
संवाददाता, पटना
उत्तर पुस्तिका में सही उत्तर लिखा. उत्तर पुस्तिका की जांच भी हुई. उत्तर में एग्जामिनर से सही उत्तर का निशान भी लगाया. लेकिन अंक देना भूल गये. रिजल्ट में कम अंक आने पर स्क्रूटनी के लिए अप्लाई भी किया गया. स्क्रूटनी के दौरान भी अंक में सुधार नहीं हुआ. इसके बाद जब सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका निकाली गयी तो पता चला कि कि प्रश्न के उत्तर तो सही थे. लेकिन एग्जामिनर पूरा अंक देना ही भूल गये. 2013 सत्र में मैट्रिक के रिजल्ट में हुई गड़बड़ी के बाद यह मामला अब बिहार बोर्ड के सामने आया है. लखीसराय स्थिति जनता हाई स्कूल, अलीनगर की छात्र सुप्रिया दयाल को उम्मीद थी कि वो टॉपर लिस्ट में शामिल होगी. लेकिन दो विषयों में कम अंक आने के कारण वो प्रथम श्रेणी में भी पहुंच नहीं पायी.
- संस्कृत और मैथ में कई उत्तर में नहीं दिये गये अंक
सुप्रिया दयाल ने 2013 में रिजल्ट आने के बाद सेकेंड डिवीजन होने के कारण दो विषयों संस्कृत और मैथ के लिए  स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया. स्क्रूटनी में पूरा एक साल लग गया. इस बीच सुप्रिया दयाल ने सेकेंड डिवीजन पर ही प्लस टू में नामांकन ले लिया. स्क्रूटनी के होने के बाद मैथ में एक अंक बढ़ा. वहीं संस्कृत में 5 अंक दिये गये. लेकिन इससे सुप्रिया को संतुष्टि नहीं हुई. सुप्रिया बताती हैं कि स्क्रूटनी के बाद भी अंक कम थे. इसके बाद मैने सूचना के अधिकार के तहत मैथ और संस्कृत विषय का उत्तर पुस्तिका निकलवाया. फिर मुङो पता चला कि मेरे दोनों ही विषय में कई प्रश्न के उत्तर ऐसे है जिसे सही तो कर दिया गया लेकिन अंक नहीं दिये गये. मैथ में तो दो दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के अंक नहीं दिये गये. इसके अलावा संस्कृत में चार लघु उत्तरीय प्रश्न और ऑब्जेक्टिव प्रश्न है जिसके अंक मुङो नहीं दिये गये है.
- बोर्ड के लगा रही दो सालों से चक्कर
सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका मिलने के बाद सुप्रिया दयाल बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का चक्कर पिछले दो महीनों से लगा रही है, लेकिन उसे अभी तक न्याय नहीं मिला है. सुप्रिया दयाल के भाई हंस दयाल ने बताया कि रिजल्ट आने के बाद 280 अंक मिले थे. वहीं स्क्रूटनी होने के बाद 286  अंक हुए . जब सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका देखा गया तो पता चला कि कई प्रश्न की जांच तो की गयी है. उत्तर को सही भी किया गया है. लेकिन उसके अंक नहीं दिये गये है. अब इसको लेकर जब बिहार बोर्ड के लखीसराय विंग में गये तो उन्होंने यह कह कर लौटा दिया कि बोर्ड की ओर से यह गलती तो हुई है, लेकिन इसमें कुछ किया नही जा सकता है. क्योंकि अब पुराना मामला हो गया है.
- प्रथम श्रेणी में होती पास तो मिलता 10 हजार रुपये
14 अंक से प्रथम श्रेणी में पीछे हो रही सुप्रिया दयाल को अगर अंक मिल जाता तो उसे 10 हजार रुपये का फायदा होता. सुप्रिया ने बताया कि प्रथम श्रेणी में रिजल्ट हो जायेगा तो मुङो फस्र्ट डिवीजन में पास होने वाली योजना के तहत 10 हजार रुपये मिल जाते. मैने जो लिखा वो भी अंक नहीं मिले.

ये अंक मिले है सुप्रिया दयाल को
विषय     -    अंक पत्र में मिले अंक
हिंदी      -     50
इंगलिश  -    30
साइंस   -     68
सोशल साइंस  -  61
मैथ  -  70
संस्कृति  -  37

कोट
हमारे जानकारी में यह मामला नहीं था. 2013 का मामला है. स्क्रूटनी के बाद भी उत्तर पुस्तिका में अंक नहीं दिया गया. हम इसकी जांच करते है कि कहां पर चूक हुई है. छात्र को न्याय मिलेगा. हम जल्द से जल्द इसके दोनों ही विषय में पूरे अंक देने की कोशिश करें.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

14 feb. 2015 on prabhat khabar patna 

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