समारोह के नाम पर मोटी रकम ले रहे स्कूल
- एनुअल फंक्शन और जुबली के नाम पर लेते है स्टूडेंट से मनमाना चाजर्
- अभिभावक पहुंच रहे बाल अधिकार संरक्षण आयोग
संवाददाता, पटना
केस वन - प्रियंका (बदला हुआ नाम) सेंट कैंरेंस हाई स्कूल गोला रोड में पढ़ती है. कुछ दिनों पहले स्कूल के गोल्डेन जुबली के नाम पर 5 सौ रुपये प्रियंका से जमा करवायें गये. इसके बाद फंक्शन से दो दिनों पहले फिर कहा गया कि फंक्शन के दिन स्कूल में इंट्री के लिए 250-250 सौ रुपये हर स्टूडेंट को जमा करना है. एक फंक्शन में 750 रुपये लेने की शिकायत को लेकर प्रियंका के अभिभावक बाल अधिकार सरंक्षण आयोग पहुंचे. आयोग की ओर से सोमवार को स्कूल को नोटिस भेजा जायेगा.
केस टू - श्रुति (बदला हुआ नाम) प्रारंभिका स्कूल नासिरगंज में पढ़ती है. कुछ दिनों पहले स्कूल का एनुअल फंक्शन आयोजित किया गया. फंक्शन के नाम पर स्कूल वालों ने तमाम स्टूडेंट्स से 12-12 सौ रुपये की राशि जमा करने को कहा. जब अभिभावकों ने इसका विरोध किया तो एनुअल फंक्शन में शामिल होने के लिए राशि जमा करना ही पड़ेगा का नसीहत दिया गया.
यह कोई एक या दो स्कूल का हाल नहीं बल्कि तमाम स्कूल है जो समारोह के नाम पर मोटी रकम स्टूडेंट्स से जमा करवाते है. अभिभावक डर से जमा कर भी देते है. विरोध करने पर बच्चे को स्कूल से निकाल देने तक की धमकी मिल जाती है. इसको लेकर अब कई अभिभावक बाल अधिकार संरक्षण आयोग का दरवाजा खटखटाना शुरू किया है. अभिभावकों के अनुसार रकम इतनी ज्यादा मांगी जाती है कि इसे पूरा करने में महीने का बजट तक बिगड़ जाता है. कई अभिभावक ने तो बताया कि दिसंबर से फरवरी तक फंक्शन के नाम पर 2 हजार से 4 हजार तक रुपये स्कूल वाले वसूल लेते है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग में कई स्कूलों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है. इसके अलावा कई मामले तो मौखिक ही फोन से हुआ. इसके बाद आयोग की ओर से स्कूल को इसके बारे में सख्त हिदायत दी जा रही है.
- संबंधित बोर्ड को भेजने की तैयारी
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास आयें दिन इस तरह के मामले आते है. स्कूल के खिलाफ अभिभावक शिकायत करते है कि समारोह, जयंती आदि के नाम पर साल भर में स्कूल कई बार पैसे वसूलते है. इससे ट्यूशन फी के अलावा महीने में एक हजार के उपर पैसे खर्च हो जाता है. इसका कोई लेखा जोखा भी नहीं होता है. इतना ही नहीं इससे बचने के लिए स्कूल वाले रसीद तक नहीं देते है. आयोग से मिली जानकारी के अनुसार कई केस में सबूत नहीं होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाता है. ऐसे में उन स्कूलों के बारे में शिकायत होते हुए भी आयोग कुछ नहीं कर पाती है. अब इन तमाम जानकारी को आयोग संबंधित बोर्ड के पास भेजने की तैयारी कर रहा है.
- एनुअल फंक्शन स्कूल फंड से हो आयोजित
सीबीएसइ के अनुसार एनुअल फंक्शन साल मे एक बार आयोजित किया जाता है. ऐसे में स्कूल अपने फंड से इसे आयोजित करेगा. अगर स्कूल के द्वारा एनुअल फंक्शन पर पैसे लिये जाते है तो स्कूल पर कार्रवाई होती. इसके लिए अभिभावकों को बोर्ड के पास शिकायत करना होगा. अगर कोई स्कूल स्टूडेंटस पर टयूशन फी के अलावा मंथली कुछ पैसे लेता है तो इसकी शिकायत अभिभावक को बोर्ड के पास करनी चाहिए. सीबीएसइ के अनुसार इन फंक्शन को आयोजित करने के लिए स्कूल फंड होता है.
- अभिभावक के शिकायत पर ही बंद हुआ प्रोजेक्ट वर्क
प्रोजेक्ट वर्क के नाम पर सारी जिम्मेवारी स्कूलों ने अभिभावकों पर डाल दिया था. ऐसे में अभिभावक को पैसे के साथ समय भी देना पड़ता था. यहां तक की प्रोजेक्ट वर्क तैयार करने में भी अभिभावक को लगना पड़ता था. कई सालों से चल रहें इस प्रोजेक्ट वर्क को लेकर अभिभावकों ने सीबीएसइ के पास शिकायत की. इसके बाद सीबीएसइ ने इसको लेकर देश भर के अभिभावकों से ऑन लाइन फीड बैक लिया. इसके बाद अब 2015 सत्र से प्रोजेक्ट वर्क के नियम में परिवर्तन किया गया है. अब जो भी प्रोजेक्ट वर्क होगा, उसे स्कूल में टीचर ही संपन्न करवायेंगे. सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों के लिए सकरूलर निकाला है. इसके तहत हर स्कूल प्रोजेक्ट वर्क खुद करवायेंगे. होम वर्क के नाम पर प्रोजेक्ट वर्क का काम नहीं चलेगा.
इन चीजों के लिए लिये जाते है एक्स्ट्रा चार्ज
- एनुअल फंक्शन के नाम पर
- स्कूल में किसी सेमिनार के आयोजन के नाम पर
- स्पोर्ट्स मीट या स्पोर्ट्स डे के नाम पर
- एजुकेशनल टूर के नाम पर
- आउट रिच प्रोग्राम के नाम पर
- जयंती समारोह आदि के नाम पर
कोट
आयें दिन अभिभावक स्कूल के द्वारा समारोह के नाम पर मोटी रकम संबंधित पैसे वसूलने की शिकायत करते है. कई अभिभावक की बात तो हम स्कूल के पहुंचाते है. लेकिन कई शिकायत में सबूत नहीं होने से हम कुछ नहीं कर पाते है. लेकिन अब इसको लेकर सीबीएसइ के रीजनल ऑफिस में शिकायत पहुंचायी जायेगी.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग
7 dec. 2015 on prabhat khabar patna
- एनुअल फंक्शन और जुबली के नाम पर लेते है स्टूडेंट से मनमाना चाजर्
- अभिभावक पहुंच रहे बाल अधिकार संरक्षण आयोग
संवाददाता, पटना
केस वन - प्रियंका (बदला हुआ नाम) सेंट कैंरेंस हाई स्कूल गोला रोड में पढ़ती है. कुछ दिनों पहले स्कूल के गोल्डेन जुबली के नाम पर 5 सौ रुपये प्रियंका से जमा करवायें गये. इसके बाद फंक्शन से दो दिनों पहले फिर कहा गया कि फंक्शन के दिन स्कूल में इंट्री के लिए 250-250 सौ रुपये हर स्टूडेंट को जमा करना है. एक फंक्शन में 750 रुपये लेने की शिकायत को लेकर प्रियंका के अभिभावक बाल अधिकार सरंक्षण आयोग पहुंचे. आयोग की ओर से सोमवार को स्कूल को नोटिस भेजा जायेगा.
केस टू - श्रुति (बदला हुआ नाम) प्रारंभिका स्कूल नासिरगंज में पढ़ती है. कुछ दिनों पहले स्कूल का एनुअल फंक्शन आयोजित किया गया. फंक्शन के नाम पर स्कूल वालों ने तमाम स्टूडेंट्स से 12-12 सौ रुपये की राशि जमा करने को कहा. जब अभिभावकों ने इसका विरोध किया तो एनुअल फंक्शन में शामिल होने के लिए राशि जमा करना ही पड़ेगा का नसीहत दिया गया.
यह कोई एक या दो स्कूल का हाल नहीं बल्कि तमाम स्कूल है जो समारोह के नाम पर मोटी रकम स्टूडेंट्स से जमा करवाते है. अभिभावक डर से जमा कर भी देते है. विरोध करने पर बच्चे को स्कूल से निकाल देने तक की धमकी मिल जाती है. इसको लेकर अब कई अभिभावक बाल अधिकार संरक्षण आयोग का दरवाजा खटखटाना शुरू किया है. अभिभावकों के अनुसार रकम इतनी ज्यादा मांगी जाती है कि इसे पूरा करने में महीने का बजट तक बिगड़ जाता है. कई अभिभावक ने तो बताया कि दिसंबर से फरवरी तक फंक्शन के नाम पर 2 हजार से 4 हजार तक रुपये स्कूल वाले वसूल लेते है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग में कई स्कूलों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है. इसके अलावा कई मामले तो मौखिक ही फोन से हुआ. इसके बाद आयोग की ओर से स्कूल को इसके बारे में सख्त हिदायत दी जा रही है.
- संबंधित बोर्ड को भेजने की तैयारी
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास आयें दिन इस तरह के मामले आते है. स्कूल के खिलाफ अभिभावक शिकायत करते है कि समारोह, जयंती आदि के नाम पर साल भर में स्कूल कई बार पैसे वसूलते है. इससे ट्यूशन फी के अलावा महीने में एक हजार के उपर पैसे खर्च हो जाता है. इसका कोई लेखा जोखा भी नहीं होता है. इतना ही नहीं इससे बचने के लिए स्कूल वाले रसीद तक नहीं देते है. आयोग से मिली जानकारी के अनुसार कई केस में सबूत नहीं होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाता है. ऐसे में उन स्कूलों के बारे में शिकायत होते हुए भी आयोग कुछ नहीं कर पाती है. अब इन तमाम जानकारी को आयोग संबंधित बोर्ड के पास भेजने की तैयारी कर रहा है.
- एनुअल फंक्शन स्कूल फंड से हो आयोजित
सीबीएसइ के अनुसार एनुअल फंक्शन साल मे एक बार आयोजित किया जाता है. ऐसे में स्कूल अपने फंड से इसे आयोजित करेगा. अगर स्कूल के द्वारा एनुअल फंक्शन पर पैसे लिये जाते है तो स्कूल पर कार्रवाई होती. इसके लिए अभिभावकों को बोर्ड के पास शिकायत करना होगा. अगर कोई स्कूल स्टूडेंटस पर टयूशन फी के अलावा मंथली कुछ पैसे लेता है तो इसकी शिकायत अभिभावक को बोर्ड के पास करनी चाहिए. सीबीएसइ के अनुसार इन फंक्शन को आयोजित करने के लिए स्कूल फंड होता है.
- अभिभावक के शिकायत पर ही बंद हुआ प्रोजेक्ट वर्क
प्रोजेक्ट वर्क के नाम पर सारी जिम्मेवारी स्कूलों ने अभिभावकों पर डाल दिया था. ऐसे में अभिभावक को पैसे के साथ समय भी देना पड़ता था. यहां तक की प्रोजेक्ट वर्क तैयार करने में भी अभिभावक को लगना पड़ता था. कई सालों से चल रहें इस प्रोजेक्ट वर्क को लेकर अभिभावकों ने सीबीएसइ के पास शिकायत की. इसके बाद सीबीएसइ ने इसको लेकर देश भर के अभिभावकों से ऑन लाइन फीड बैक लिया. इसके बाद अब 2015 सत्र से प्रोजेक्ट वर्क के नियम में परिवर्तन किया गया है. अब जो भी प्रोजेक्ट वर्क होगा, उसे स्कूल में टीचर ही संपन्न करवायेंगे. सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों के लिए सकरूलर निकाला है. इसके तहत हर स्कूल प्रोजेक्ट वर्क खुद करवायेंगे. होम वर्क के नाम पर प्रोजेक्ट वर्क का काम नहीं चलेगा.
इन चीजों के लिए लिये जाते है एक्स्ट्रा चार्ज
- एनुअल फंक्शन के नाम पर
- स्कूल में किसी सेमिनार के आयोजन के नाम पर
- स्पोर्ट्स मीट या स्पोर्ट्स डे के नाम पर
- एजुकेशनल टूर के नाम पर
- आउट रिच प्रोग्राम के नाम पर
- जयंती समारोह आदि के नाम पर
कोट
आयें दिन अभिभावक स्कूल के द्वारा समारोह के नाम पर मोटी रकम संबंधित पैसे वसूलने की शिकायत करते है. कई अभिभावक की बात तो हम स्कूल के पहुंचाते है. लेकिन कई शिकायत में सबूत नहीं होने से हम कुछ नहीं कर पाते है. लेकिन अब इसको लेकर सीबीएसइ के रीजनल ऑफिस में शिकायत पहुंचायी जायेगी.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग
7 dec. 2015 on prabhat khabar patna
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