लर्निग सेफ इंवायरमेंट दे स्कूल
- सीबीएसइ तैयार कर रहा सुरक्षा संबंधी निर्देश
- कैंपस के अंदर और बाहर स्टूडेंट्स को सुरक्षा देने की जिम्मेवारी स्कूल की
संवाददाता, पटना
किसी भी बच्चे का 5 से 6 घंटे का समय स्कूल में निकलता है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा का दायित्व स्कूल की उतनी है जितना घर में अभिभावक की होती है. हर स्कूल को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल में पढ़ने वाले तमाम स्टूडेंट्स के लिए सुरक्षा के क्या और कैसे इंतजाम है. सीबीएसइ जल्द ही इस संबंध में एक सकरूलर जारी करने जा रहा है. इसके तहत स्कूलों को स्टूडेंट्स के सुरक्षा के लिए कई निर्देश जारी किये जायेंगे. हाल में बोर्ड के पास अभिभावकों की शिकायत आयी है. इस शिकायत में स्कूल की लापरवाही को दिखाया गया है. सेफ्टी नहीं मिलने के कारण जहां कई स्कूलों में लैब वर्क के समय स्टूडेंट को शारीरिक नुकसान हुआ तो वहीं प्ले ग्राउंड सेफ नही होने से गिरने और पांव और हाथ टूटने की घटना घटी है. इसके अलावा सीबीएसइ ने देश के लगभग 4 हजार स्कूलों पर एक सर्वे भी किया है. जिसके रिपोर्ट में यह देखा गया है कि अधिकांश स्कूल सेफ्टी के नाम पर जीरो है.
- स्कूलों में चलेगा सेफ्टी का क्लास
एकेडेमिक सेशन के अलावा अब स्कूल में सेफ्टी के लिए भी एक क्लास चलाये जायेंगे. इसके लिए हर दिन एक क्लास के स्टूडेंट को दिया जायेगा. इसमें स्कूल कैंपस में सेफ्टी के साथ कैंपस के बाहर भी खुद को कैसे सुरक्षित रखें, इनकी जानकारी दी जायेगी. सीबीएसइ के अनुसार सुरक्षा संबंधी लिस्ट स्कूलों को भेजा जायेगा. इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के साथ भूकंप आदि आने पर स्टूडेंट्स को क्या कुछ सेफ्टी के लिए करना चाहिए, इन चीजों की जानकारी दी जायेगी.
- हर प्रोग्राम का थीम होगा सेफ्टी
सीबीएसइ नये सेशन 2015 में हर कार्यक्रम का थीम भी सेफ्टी ही रखेगा. इससे सेफ्टी को लेकर स्टूडेंट्स अधिक से अधिक अवेयर होंगे. सीबीएसइ के अनुसार आज भी काफी संख्या में स्टूडेंट्स है जिन्हें सुरक्षा को लेकर बेसिक बातों की जानकारी नहीं है. स्कूल भी इस संबंध में जानकारी नहीं देता है. यहां तक की सेल्फ सेफ्टी के बारे में भी स्टूडेंट्स अंजान होते है. इस कारण अलग-अलग थीम पर सेफ्टी के बारे में स्टूडेंट्स को अवेयर किया गया था.
- लैब को सुरक्षित रखें स्कूल
स्कूल में साइंस लैब पर अधिक फोकस करना चाहिए. हर स्कूल को लैब में नये कैमिकल और नये इंट्रमेंट को रखना होगा. लैब में काम करते समय कई बार दुर्घटना हो जाती है. ऐसे मे बच्चे घायल हो जाते है. सीबीएसइ के एक डाटा के अनुसार देश में 10 फीसदी बच्चों लैब मे काम करते समय घायल हो जाते है. जिसकी मुख्य वजह एक्सपायरी केमिकल और लापरवाही होती है. इसको देखते हुए लैब मे हर दस स्टूडेंट्स पर एक लैब एटेंडेंट होना जरूरी है. लैब में लाइट के साथ बाहर से आने वाली रोशनी का पूरा इंतजाम होना चाहिए. लैब में उपयोग में आने वाले गैस को बाहर निकालने की पूरी और सही व्यवस्था हो.
- स्कूल आने जाने में मिले सुरक्षा
हर स्कूल को अब अपना कंवियेंस रखना होगा. स्टूडेंट के स्कूल आने और स्कूल से घर तक पहुंचने में स्कूल की पूरी जिम्मेवारी होगी. इसके लिए स्कूल को सुनिश्चत करना होगा कि वो हर बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें. पटना के कई स्कूल हैं जिनके पास अपना कंवियेंस नहीं है. ऐसे में वो स्टूडेंट्स की सुरक्षा बस स्कूल कैंपस तक ही दे पाते है. ऐसे तमाम स्कूल सीबीएसइ के जांच के कटघरे में आयेंगे. बोर्ड के अनुसार आये दिन अपहरण की मामले सामने आयें जिसमें यह देखा गया है कि बच्चों का अपहरण स्कूल आने और जाने के क्रम में हुआ है.
- स्कूल टूर से हुई शुरुआत
सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत स्कूल टूर से किया है. पिछले कई महीनों में एकेडेमिक टूर को लेकर घटी घटनाओं पर सीबीएसइ ने स्कूल टूर के नियम में परिवर्तन कर दिया है. अब कोई भी स्कूल जबदस्ती किसी भी बच्चों को स्कूल टूर पर नहीं ले जा सकता है. अभिभावक के चाहने पर ही स्टूडेंट को स्कूल टूर पर भेजा जायेगा. बच्चों जहां एकेडेमिक टूर के लिए जायेंगे, इसकी जानकारी संबंधित शहर के जिला प्रशासन को पहले ही दिया जायेगा. हर बच्चे का हेल्थ इंशोरेंस होना जरूरी होगा
कोट
सहोदया के हाल में हुए नेशनल कांफ्रेंस में भी स्कूलों में सेफ इंवायरमेंट पर फोकस किया गया था. सेफ इंवायरमेंट संबंधी जानकारी स्टूडेंट्स को अधिक से अधिक मिले, इस बार नेशनल कांफ्रेंस का एक टॉपिक था. बोर्ड के अनुसार आज भी अधिकांश स्कूल इस पर ध्यान नहीं देते है, जिस कारण कई तरह की घटनाएं स्कूल कैंपस या बाहर में घटती है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
8 nev. 2014 on prabhat khabar patna
- सीबीएसइ तैयार कर रहा सुरक्षा संबंधी निर्देश
- कैंपस के अंदर और बाहर स्टूडेंट्स को सुरक्षा देने की जिम्मेवारी स्कूल की
संवाददाता, पटना
किसी भी बच्चे का 5 से 6 घंटे का समय स्कूल में निकलता है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा का दायित्व स्कूल की उतनी है जितना घर में अभिभावक की होती है. हर स्कूल को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल में पढ़ने वाले तमाम स्टूडेंट्स के लिए सुरक्षा के क्या और कैसे इंतजाम है. सीबीएसइ जल्द ही इस संबंध में एक सकरूलर जारी करने जा रहा है. इसके तहत स्कूलों को स्टूडेंट्स के सुरक्षा के लिए कई निर्देश जारी किये जायेंगे. हाल में बोर्ड के पास अभिभावकों की शिकायत आयी है. इस शिकायत में स्कूल की लापरवाही को दिखाया गया है. सेफ्टी नहीं मिलने के कारण जहां कई स्कूलों में लैब वर्क के समय स्टूडेंट को शारीरिक नुकसान हुआ तो वहीं प्ले ग्राउंड सेफ नही होने से गिरने और पांव और हाथ टूटने की घटना घटी है. इसके अलावा सीबीएसइ ने देश के लगभग 4 हजार स्कूलों पर एक सर्वे भी किया है. जिसके रिपोर्ट में यह देखा गया है कि अधिकांश स्कूल सेफ्टी के नाम पर जीरो है.
- स्कूलों में चलेगा सेफ्टी का क्लास
एकेडेमिक सेशन के अलावा अब स्कूल में सेफ्टी के लिए भी एक क्लास चलाये जायेंगे. इसके लिए हर दिन एक क्लास के स्टूडेंट को दिया जायेगा. इसमें स्कूल कैंपस में सेफ्टी के साथ कैंपस के बाहर भी खुद को कैसे सुरक्षित रखें, इनकी जानकारी दी जायेगी. सीबीएसइ के अनुसार सुरक्षा संबंधी लिस्ट स्कूलों को भेजा जायेगा. इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के साथ भूकंप आदि आने पर स्टूडेंट्स को क्या कुछ सेफ्टी के लिए करना चाहिए, इन चीजों की जानकारी दी जायेगी.
- हर प्रोग्राम का थीम होगा सेफ्टी
सीबीएसइ नये सेशन 2015 में हर कार्यक्रम का थीम भी सेफ्टी ही रखेगा. इससे सेफ्टी को लेकर स्टूडेंट्स अधिक से अधिक अवेयर होंगे. सीबीएसइ के अनुसार आज भी काफी संख्या में स्टूडेंट्स है जिन्हें सुरक्षा को लेकर बेसिक बातों की जानकारी नहीं है. स्कूल भी इस संबंध में जानकारी नहीं देता है. यहां तक की सेल्फ सेफ्टी के बारे में भी स्टूडेंट्स अंजान होते है. इस कारण अलग-अलग थीम पर सेफ्टी के बारे में स्टूडेंट्स को अवेयर किया गया था.
- लैब को सुरक्षित रखें स्कूल
स्कूल में साइंस लैब पर अधिक फोकस करना चाहिए. हर स्कूल को लैब में नये कैमिकल और नये इंट्रमेंट को रखना होगा. लैब में काम करते समय कई बार दुर्घटना हो जाती है. ऐसे मे बच्चे घायल हो जाते है. सीबीएसइ के एक डाटा के अनुसार देश में 10 फीसदी बच्चों लैब मे काम करते समय घायल हो जाते है. जिसकी मुख्य वजह एक्सपायरी केमिकल और लापरवाही होती है. इसको देखते हुए लैब मे हर दस स्टूडेंट्स पर एक लैब एटेंडेंट होना जरूरी है. लैब में लाइट के साथ बाहर से आने वाली रोशनी का पूरा इंतजाम होना चाहिए. लैब में उपयोग में आने वाले गैस को बाहर निकालने की पूरी और सही व्यवस्था हो.
- स्कूल आने जाने में मिले सुरक्षा
हर स्कूल को अब अपना कंवियेंस रखना होगा. स्टूडेंट के स्कूल आने और स्कूल से घर तक पहुंचने में स्कूल की पूरी जिम्मेवारी होगी. इसके लिए स्कूल को सुनिश्चत करना होगा कि वो हर बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें. पटना के कई स्कूल हैं जिनके पास अपना कंवियेंस नहीं है. ऐसे में वो स्टूडेंट्स की सुरक्षा बस स्कूल कैंपस तक ही दे पाते है. ऐसे तमाम स्कूल सीबीएसइ के जांच के कटघरे में आयेंगे. बोर्ड के अनुसार आये दिन अपहरण की मामले सामने आयें जिसमें यह देखा गया है कि बच्चों का अपहरण स्कूल आने और जाने के क्रम में हुआ है.
- स्कूल टूर से हुई शुरुआत
सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत स्कूल टूर से किया है. पिछले कई महीनों में एकेडेमिक टूर को लेकर घटी घटनाओं पर सीबीएसइ ने स्कूल टूर के नियम में परिवर्तन कर दिया है. अब कोई भी स्कूल जबदस्ती किसी भी बच्चों को स्कूल टूर पर नहीं ले जा सकता है. अभिभावक के चाहने पर ही स्टूडेंट को स्कूल टूर पर भेजा जायेगा. बच्चों जहां एकेडेमिक टूर के लिए जायेंगे, इसकी जानकारी संबंधित शहर के जिला प्रशासन को पहले ही दिया जायेगा. हर बच्चे का हेल्थ इंशोरेंस होना जरूरी होगा
कोट
सहोदया के हाल में हुए नेशनल कांफ्रेंस में भी स्कूलों में सेफ इंवायरमेंट पर फोकस किया गया था. सेफ इंवायरमेंट संबंधी जानकारी स्टूडेंट्स को अधिक से अधिक मिले, इस बार नेशनल कांफ्रेंस का एक टॉपिक था. बोर्ड के अनुसार आज भी अधिकांश स्कूल इस पर ध्यान नहीं देते है, जिस कारण कई तरह की घटनाएं स्कूल कैंपस या बाहर में घटती है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
8 nev. 2014 on prabhat khabar patna
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