विद्यालय हट जायेगा तो हमारी पढ़ाई रूक जायेगी
- 113 साल पुराने नारायणी कन्या विद्यालय की 350वीं गुरू पर्व को लेकर शिफ्ट करने की चल रही बात
- स्कूल दूर चले जाने से सैकड़ों छात्रएं की बंद हो जायेगी पढ़ाई
संवाददाता, पटना
केस वन - सलोनी शर्मा नारायणी कन्या मध्य विद्यालय में क्लास तीसरी की छात्र है. दोनों पांव से विकलांग (पोलियो ग्रस्त) सलोनी को उसके पिता रीतेश शर्मा हर दिन गोदी में उठा कर विद्यालय ले जाते है. इसमें उन्हें 10 से 15 मिनट का समय लगता है. अब जब विद्यालय के दूसरे जगह पर जाने की बात हो रही है तो रीतेश शर्मा को सबसे दुख इस बात का है कि वो अपनी बेटी को आगे नहीं पढ़ा पायेंगे. क्योंकि आस पास कोई विद्यालय नहीं होने से वो सलोनी को शिक्षा नहीं दिलवा पायेंगे. डाक्टर बनने की इच्छा रख रही सलोनी को जब कोई विद्यालय के हट जाने की बात कहता है तो वो उदास हो जाती है.
केस टू - नीता कुमारी नारायणी कन्या उच्च विद्यालय में 10वीं क्लास में पढ़ती है. एक साल पहले उसकी शादी कर दी गयी थी. लेकिन पढ़ने की तीव्र इच्छा के कारण नीता दुबारा मायके आ गयी. ससुराल के विरोध क बावजूद वो मायके में रह कर शिक्षा पूरी कर रही है. टीचर बनने की इच्छा लिये नीता ने बताया कि अगर नारायणी कन्या उच्च विद्यालय दूसरी जगह पर चला जायेगा तो उसकी पढ़ायी छूूट जायेगी. क्योंकि अभी विद्यालय पास में है तो मां बाप का सहयोग मिलता है. लेकिन दूर होने पर उसकी पढ़ाई बीच में ही रूक जायेगी.
यह हाल विकलांग सलोनी और नीता जैसी केवल एक दो छात्रओं का ही नहीं है, बल्कि सैकड़ों छात्रएं ऐसी है जिसका पढ़ाई बीच में रूक जायेगी अगर नारायणी कन्या मध्य और उच्च विद्यालय को कचौड़ी गली से हटा कर दूसरे जगहों पर ले जाया जायेगा. पटना सिटी स्थिति गुरूद्वारे के बगल में कचौड़ी गली में मौजूद इस विद्यालय में 5 हजार के लगभग लड़कियां शिक्षा ले रही है. अभी 2017 में गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती समारोह को लेकर विद्यालय के यहां से शिफ्ट होने की बात की जा रही है. विद्यालय समिति के भोला पासवान ने बताया कि गुरु पर्व को लेकर तैयारी चल रही है. चुकी यह विद्यालय गुरुद्वारा के बगल में है . इससे गुरुद्वारा प्रबंध समिति इस विद्यालय के जमीन पर धर्मशाला बनाना चाहती है. इस स्कूल को मालसलामी में शिफ्ट करने की बात कहीं जा रही है.
- 113 साल पुराना है यह विद्यालय
10 कट्ठा में बना यह विद्यालय वर्तमान में आस पास के लगभग 5 से 6 लाख लोगों से जुड़ा है. नारायणी कन्या मध्य विद्यालय की स्थापना 1899 में हुआ वहीं 1938 में नारायणी कन्या उच्च विद्यालय की स्थापना की गयी. एक ही परिसर में चल रहे इस विद्यालय को जमीन दान स्वरूप मिला था. पटना सिटी की रहने वाली राजकुंवर देवी ने लड़कियों की शिक्षा के लिए एक विद्यालय हो, इसको लेकर अपनी जमीन दान स्वरूप दिया था. स्कूल के आस पास के चार किमी तक में कोई भी कन्या विद्यालय नहीं है. पटना सिटी की पहली गल्र्स स्कूल में विख्यात नारायणी कन्या विद्यालय में नामांकन लेना अपने आप में बड़ी बात है. स्कूल का माहौल, पास में चौक थाना, हास्पीटल की उपलब्धता के कारण आस पास के लोग दूसरी जगह पर बेटी का नामांकन नहीं करवा कर इसी विद्यालय में नामांकन करवाते है.
- 18 सौ से 5 हजार हो गयी छात्रएं
शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इस विद्यालय के प्राचार्य के साथ तमाम शिक्षक भी लोगों को जागरूक करते है. लड़कियों का पढ़ाने और स्कूल भेजने को लेकर लोगों से बात करते है. पिछले दस सालों से विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत अशोक कुमार ने बताया कि पिछले कई सालों में यहां पर लड़कियों की संख्या काफी बढ़ी है. दस साल पहले जहां 18 सौ लड़कियां ही इस विद्यालय में पढ़ती थी. वहीं दस सालों के बाद वर्तमान में 5 हजार से अधिक छात्रएं यहां पर शिक्षा ग्रहण कर रही है. वहीं शिक्षक ललित किशोर ने बताया कि पिछले एक साल से विद्यालय के बिजली कनेक्शन को काट दिया गया है. क्योंकि 2007 से बिजली बिल बकाया है. कई क्लास रूम में काफी अंधेरा रहता है. इसके बावजूद हर साल सैकड़ों लड़कियों यहां पर नामांकन लेती है.
- मुख्यमंत्री को किया गया है फैक्स
एक तरफ जहां विद्यालय प्रशासन विद्यालय के जाने और रहने को लेकर कंफ्यूज्ड है. वहीं इसको लेकर तमाम जानकारी भी जुटाये जाने लगे है. नारायणी कन्या मध्य विद्यालय की छात्रओं ने कुछ दिनों पहले मशाल जुलूस निकाला, वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कपूर ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांग डाली है. पटना जिला सुधार समिति के सचिव राकेश कपूर ने बताया कि 28 नवंबर को मुख्यमंत्री को फैक्स किया है. इसमें इस विद्यालय के हट जाने से सैकड़ों लड़कियों की पढ़ाई कैसे रूक जायेगी, इसकी जानकारी दी गयी है. इसके अलावा पर्यटन मंत्री और नगर विकास मंत्री को भी फैक्स पर इसकी जानकारी दी गयी है.
- जनवरी के पहले सप्ताह से धरने पर बैठेंगे लोग
मुख्यमंत्री को सूचना देने के बाद अब लोग धरने पर बैठने की तैयारी कर रहे है. छात्रएं, अभिभावक और आस पास के लोग गुरु पर्व के बाद जनवरी के प्रथम सप्ताह में विद्यालय को हटाये जाने के विरोध मे धरने पर बैठने की तैयारी कर रहे है. सामाजिक कार्यकर्ता वैजनाथ प्रसाद गुप्ता ने बताया कि हमने कई बैठक की है. हर साल गुरुपर्व को लेकर विद्यालय को बंद कर दिया जाता है. डीएम के आदेश पर गुरु पर्व में शामिल होने आये हजारों लोग स्कूल परिसर में रूकते है. एक सप्ताह के लिए गुरुद्वारे को विद्यालय परिसर दे दिया जाता है. हम लोग सहयोग करते है. लेकिन अब विद्यालय को हटाने की बात हो रही है. ऐसे में सैकड़ों लड़कियां पढ़ नहीं पायेगी. आस पास कोई और विद्यालय नहीं है. ऐसे में हम लोग अब धरने पर बैठेंगे जब तक हमें यह आश्वासन नहीं मिल जाता कि यह विद्यालय यहीं पर रहेगा.
कोट
मै इस विद्यालय में 1998 से टीचर के रूप में कार्यरत हूं. यहां पर जो लड़की क्लास वन में नामांकन लेती है वो 12वीं तक पढ़ाई करती हैं. ऐसे में एक परिवार की तरह शिक्षक और छात्रओं का संबंध बन जाता है. काफी संख्या में ऐसी छात्रएं हैं जो काफी गरीब है और वो दूर जाकर पढ़ाई नही कर पायेंगी. ऐसे में इस विद्यालय के यहां से हटाये जाने से सैकड़ों छात्रओं की पढ़ाई बीच में ही रूक जायेगी. हर साल गुरू पर्व को लेकर हम स्कूल बंद करते है. इस बार भी 26 से 1 जनवरी तक स्कूल बंद रहेगा.
कुमारी माया, प्राचार्य, नारायणी कन्या उच्च विद्यालय
2017 में गुरु गोविंद सिंह जी ही 350वीं जयंती को लेकर तैयारी अभी शुरू कर दिया गया है. आस पास के एरिया में होटल और धर्मशालाएं बनायी जायेगी. हम कई स्कूल को शिफ्ट करने की सोच रहे है. नारायणी कन्या विद्यालय को सरकार खुद शिफ्ट करने की सोच रही है. इसका एक प्रपोजल भी सरकार की ओर से हमारे पास आया है.
चरणजीत सिंह, जेनरल सेक्रेटरी, तख्त श्री हरिमंदिर ही पटना साहिब
24 dec. 2015 on prabhat khabar patna
- 113 साल पुराने नारायणी कन्या विद्यालय की 350वीं गुरू पर्व को लेकर शिफ्ट करने की चल रही बात
- स्कूल दूर चले जाने से सैकड़ों छात्रएं की बंद हो जायेगी पढ़ाई
संवाददाता, पटना
केस वन - सलोनी शर्मा नारायणी कन्या मध्य विद्यालय में क्लास तीसरी की छात्र है. दोनों पांव से विकलांग (पोलियो ग्रस्त) सलोनी को उसके पिता रीतेश शर्मा हर दिन गोदी में उठा कर विद्यालय ले जाते है. इसमें उन्हें 10 से 15 मिनट का समय लगता है. अब जब विद्यालय के दूसरे जगह पर जाने की बात हो रही है तो रीतेश शर्मा को सबसे दुख इस बात का है कि वो अपनी बेटी को आगे नहीं पढ़ा पायेंगे. क्योंकि आस पास कोई विद्यालय नहीं होने से वो सलोनी को शिक्षा नहीं दिलवा पायेंगे. डाक्टर बनने की इच्छा रख रही सलोनी को जब कोई विद्यालय के हट जाने की बात कहता है तो वो उदास हो जाती है.
केस टू - नीता कुमारी नारायणी कन्या उच्च विद्यालय में 10वीं क्लास में पढ़ती है. एक साल पहले उसकी शादी कर दी गयी थी. लेकिन पढ़ने की तीव्र इच्छा के कारण नीता दुबारा मायके आ गयी. ससुराल के विरोध क बावजूद वो मायके में रह कर शिक्षा पूरी कर रही है. टीचर बनने की इच्छा लिये नीता ने बताया कि अगर नारायणी कन्या उच्च विद्यालय दूसरी जगह पर चला जायेगा तो उसकी पढ़ायी छूूट जायेगी. क्योंकि अभी विद्यालय पास में है तो मां बाप का सहयोग मिलता है. लेकिन दूर होने पर उसकी पढ़ाई बीच में ही रूक जायेगी.
यह हाल विकलांग सलोनी और नीता जैसी केवल एक दो छात्रओं का ही नहीं है, बल्कि सैकड़ों छात्रएं ऐसी है जिसका पढ़ाई बीच में रूक जायेगी अगर नारायणी कन्या मध्य और उच्च विद्यालय को कचौड़ी गली से हटा कर दूसरे जगहों पर ले जाया जायेगा. पटना सिटी स्थिति गुरूद्वारे के बगल में कचौड़ी गली में मौजूद इस विद्यालय में 5 हजार के लगभग लड़कियां शिक्षा ले रही है. अभी 2017 में गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती समारोह को लेकर विद्यालय के यहां से शिफ्ट होने की बात की जा रही है. विद्यालय समिति के भोला पासवान ने बताया कि गुरु पर्व को लेकर तैयारी चल रही है. चुकी यह विद्यालय गुरुद्वारा के बगल में है . इससे गुरुद्वारा प्रबंध समिति इस विद्यालय के जमीन पर धर्मशाला बनाना चाहती है. इस स्कूल को मालसलामी में शिफ्ट करने की बात कहीं जा रही है.
- 113 साल पुराना है यह विद्यालय
10 कट्ठा में बना यह विद्यालय वर्तमान में आस पास के लगभग 5 से 6 लाख लोगों से जुड़ा है. नारायणी कन्या मध्य विद्यालय की स्थापना 1899 में हुआ वहीं 1938 में नारायणी कन्या उच्च विद्यालय की स्थापना की गयी. एक ही परिसर में चल रहे इस विद्यालय को जमीन दान स्वरूप मिला था. पटना सिटी की रहने वाली राजकुंवर देवी ने लड़कियों की शिक्षा के लिए एक विद्यालय हो, इसको लेकर अपनी जमीन दान स्वरूप दिया था. स्कूल के आस पास के चार किमी तक में कोई भी कन्या विद्यालय नहीं है. पटना सिटी की पहली गल्र्स स्कूल में विख्यात नारायणी कन्या विद्यालय में नामांकन लेना अपने आप में बड़ी बात है. स्कूल का माहौल, पास में चौक थाना, हास्पीटल की उपलब्धता के कारण आस पास के लोग दूसरी जगह पर बेटी का नामांकन नहीं करवा कर इसी विद्यालय में नामांकन करवाते है.
- 18 सौ से 5 हजार हो गयी छात्रएं
शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इस विद्यालय के प्राचार्य के साथ तमाम शिक्षक भी लोगों को जागरूक करते है. लड़कियों का पढ़ाने और स्कूल भेजने को लेकर लोगों से बात करते है. पिछले दस सालों से विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत अशोक कुमार ने बताया कि पिछले कई सालों में यहां पर लड़कियों की संख्या काफी बढ़ी है. दस साल पहले जहां 18 सौ लड़कियां ही इस विद्यालय में पढ़ती थी. वहीं दस सालों के बाद वर्तमान में 5 हजार से अधिक छात्रएं यहां पर शिक्षा ग्रहण कर रही है. वहीं शिक्षक ललित किशोर ने बताया कि पिछले एक साल से विद्यालय के बिजली कनेक्शन को काट दिया गया है. क्योंकि 2007 से बिजली बिल बकाया है. कई क्लास रूम में काफी अंधेरा रहता है. इसके बावजूद हर साल सैकड़ों लड़कियों यहां पर नामांकन लेती है.
- मुख्यमंत्री को किया गया है फैक्स
एक तरफ जहां विद्यालय प्रशासन विद्यालय के जाने और रहने को लेकर कंफ्यूज्ड है. वहीं इसको लेकर तमाम जानकारी भी जुटाये जाने लगे है. नारायणी कन्या मध्य विद्यालय की छात्रओं ने कुछ दिनों पहले मशाल जुलूस निकाला, वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कपूर ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांग डाली है. पटना जिला सुधार समिति के सचिव राकेश कपूर ने बताया कि 28 नवंबर को मुख्यमंत्री को फैक्स किया है. इसमें इस विद्यालय के हट जाने से सैकड़ों लड़कियों की पढ़ाई कैसे रूक जायेगी, इसकी जानकारी दी गयी है. इसके अलावा पर्यटन मंत्री और नगर विकास मंत्री को भी फैक्स पर इसकी जानकारी दी गयी है.
- जनवरी के पहले सप्ताह से धरने पर बैठेंगे लोग
मुख्यमंत्री को सूचना देने के बाद अब लोग धरने पर बैठने की तैयारी कर रहे है. छात्रएं, अभिभावक और आस पास के लोग गुरु पर्व के बाद जनवरी के प्रथम सप्ताह में विद्यालय को हटाये जाने के विरोध मे धरने पर बैठने की तैयारी कर रहे है. सामाजिक कार्यकर्ता वैजनाथ प्रसाद गुप्ता ने बताया कि हमने कई बैठक की है. हर साल गुरुपर्व को लेकर विद्यालय को बंद कर दिया जाता है. डीएम के आदेश पर गुरु पर्व में शामिल होने आये हजारों लोग स्कूल परिसर में रूकते है. एक सप्ताह के लिए गुरुद्वारे को विद्यालय परिसर दे दिया जाता है. हम लोग सहयोग करते है. लेकिन अब विद्यालय को हटाने की बात हो रही है. ऐसे में सैकड़ों लड़कियां पढ़ नहीं पायेगी. आस पास कोई और विद्यालय नहीं है. ऐसे में हम लोग अब धरने पर बैठेंगे जब तक हमें यह आश्वासन नहीं मिल जाता कि यह विद्यालय यहीं पर रहेगा.
कोट
मै इस विद्यालय में 1998 से टीचर के रूप में कार्यरत हूं. यहां पर जो लड़की क्लास वन में नामांकन लेती है वो 12वीं तक पढ़ाई करती हैं. ऐसे में एक परिवार की तरह शिक्षक और छात्रओं का संबंध बन जाता है. काफी संख्या में ऐसी छात्रएं हैं जो काफी गरीब है और वो दूर जाकर पढ़ाई नही कर पायेंगी. ऐसे में इस विद्यालय के यहां से हटाये जाने से सैकड़ों छात्रओं की पढ़ाई बीच में ही रूक जायेगी. हर साल गुरू पर्व को लेकर हम स्कूल बंद करते है. इस बार भी 26 से 1 जनवरी तक स्कूल बंद रहेगा.
कुमारी माया, प्राचार्य, नारायणी कन्या उच्च विद्यालय
2017 में गुरु गोविंद सिंह जी ही 350वीं जयंती को लेकर तैयारी अभी शुरू कर दिया गया है. आस पास के एरिया में होटल और धर्मशालाएं बनायी जायेगी. हम कई स्कूल को शिफ्ट करने की सोच रहे है. नारायणी कन्या विद्यालय को सरकार खुद शिफ्ट करने की सोच रही है. इसका एक प्रपोजल भी सरकार की ओर से हमारे पास आया है.
चरणजीत सिंह, जेनरल सेक्रेटरी, तख्त श्री हरिमंदिर ही पटना साहिब
24 dec. 2015 on prabhat khabar patna
No comments:
Post a Comment