Saturday, February 21, 2015

छात्रों ने बिल्ंिडंग से बिजली पैदा करने को बनाया हाइड्रो इलेक्ट्रीकल जेनरेटर

छात्रों ने बिल्ंिडंग से बिजली पैदा करने को बनाया हाइड्रो इलेक्ट्रीकल जेनरेटर

-  सीबीएसइ साइंस एग्जीविशन में पटना से पांच मॉडल हुआ सेलेक्ट
-  दिल्ली पब्लिक स्कूल के साथ ज्ञान निकेतन और डीएवी, बीएसइबी के स्टूडेंट्स के मॉडल हुए सेलेक्ट
संवाददाता, पटना
अब हर बिल्ंिडंग से बिजली पैदा की जा सकती है. बस इसके लिए एक पानी के टंकी के पास एक इंस्ट्रमेंट लगाना होगा. आम तौर पर तमाम बिल्डिंग के उपरी मंजिल पर पानी की टंकी होती है. जहां से हर घरों में पानी सप्लाई होता हैं वहां पर पानी की गति काफी तेज होती है. यहां से इतनी बिजली पैदा कर ली जा सकती है जिससे उस बिल्ंिडग की 50 फीसदी बिजली की जरूरत को पूरा किया जा सकता है.  पानी के टंकी से बिजली पैदा करने को लेकर एक मिनी हाइड्रो इलेक्ट्रिकल जेनरेटर को निजाद करने का काम सम्राट और शिवम सनानंद ने किया है. ज्ञान निकेतन हाई स्कूल के 11वीं क्लास के इन दोनों के इस मॉडल को सीबीएसइ के रीजनल साइंस एग्जीविशन में चुना गया है. दिल्ली पब्लिक स्कूल, रांची में आयोजित तीन दिनों (5, 6 और 7 फरवरी) के साइंस एग्जीविशन में पंद्रह बेस्ट मॉडल में इसे चुना गया है. इस हाइड्रो इलेक्ट्रिकल जेनरेटर को आसानी से किसी भी बिल्डिंग में लगाया जा सकेगा. मॉडल के बारे में जानकारी देते हुए शिवम सनानंद और सम्राट ने बताया कि इस जेनरेटर को बनाने में काफी कम खर्च आता है. हर बिल्डिंग के सबसे उपरी तल्ले पर पानी की टंकी में पानी निकलने वाले फोर्स के पास इस इंस्ट्रूमेंट को लगा देने से बिजली पैदा किया जा सकेगा. अब जेनरेटर जितना पावर का होगा बिजली उतना अधिक पैदा किया जा सकेगा.
- पंद्रह मॉडल में पांच पटना के स्कूलों से
सीबीएसइ के साइंस एग्जीविशन में कुल 86 मॉडल पेश किये गये थे. इसमें पटना जोन (बिहार झारखंड) से 56 स्कूलों शामिल हुए थे. सारे स्कूलों से दो सौ स्टूडेंट्स ने अपने मॉडल को पेश किया. तीन दिनों के साइंस एग्जीविशन में कुल 15 मॉडल में पांच मॉडल पटना के स्कूलों से चुने गये. इसमें ज्ञान निकेतन स्कूल से दो मॉडल, डीएवी, बीएसइबी से दो मॉडल और दिल्ली पब्लिक स्कूल से एक मॉडल शामिल हैं. अब इन मॉडल के साथ स्टूडेंट्स जुलाई में होने वाले नेशनल साइंस एग्जीविशन में शामिल होंगे.

इन मॉडल को हुआ चुनाव

एग्री नॉमिकली एसेंसियल इलीमेंट सिलीकॉन - इस मॉडल को ज्ञान निकेतन स्कूल के 11वीं के स्टूडेंट्स सृजन स्वराज और आदित्य वर्मा ने तैयार किया. इस मॉडल की जानकारी देते हुए को ऑडिनेटर नीतू सिंह ने बताया कि जिस तरह से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म होती जा रही है. उसमें इस विधि से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ायी जा सकेगी. स्टूडेंट्स ने बिहार के अलग-अलग एरिया से मिट्टी को लेकर उनकी जांच करवायी. इसमें यह देखा गया कि किस मिट्टी में किस तरह की कमी होती जा रही है . धान की फसल पर मॉडल तैयार किया गया. धान के अलग-अलग पार्ट के उपयोग को भी दर्शाया गया. मिट्टी में सिलिकॉन का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है.
एडवांटेज इन एग्रीकल्चर एंड फूड सेक्योरिटी  - अगर घरों में इको सैनिटेशन बनाया जायें तो इको एग्रीकल्चर में काफी मदद मिलेगी. दिल्ली पब्लिक स्कूल के 11वीं के स्टूडेंट अमोलक नारायण और सुभव कुमार ने यह मॉडल तैयार किया है. मॉडल की जानकारी देते हुए को ऑडिनेटर संजय कुमार ने बताया कि इस विधि से एडवांस शौचालय का कांसेप्ट शुरू किया जा सकता है. इसे आसानी से घरों में तैयार किया जा सकता है. बाहर खतों में शौचालय जाने और गंदगी जैसी चीजों से निजाद मिल सकता है. इसके बनाने में मात्र एक हजार रुपये का खर्च आयेगा.

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