विकलांग स्टूडेंट्स के लिए स्कूल में हो व्यवस्था, नहीं तो जायेगी मान्यता
- सीबीएसइ ने पटना के सयश कुमार के प्रोजेक्ट को स्कूलों में लागू करने को कहा
- नये सत्र के शुरू होने से पहले तमाम स्कूल में बने विकलांग बच्चों के लिए स्लोपिंग
संवाददाता, पटना
डिसएबल स्टूडेंट्स को यह फील ना हो कि वो मजबूर है. उनकी सुविधा के लिए हर स्कूल में ऐसी व्यवस्था हो जिससे डिसएबल स्टूडेंट्स को शिक्षा ग्रहण करने में किसी तरह की परेशानी ना हो. क्लास रूम के साथ प्ले ग्राउंड, लंच रूम और स्कूल बस में स्लोपिंग (रैंप) बनायी जायें. जिससे डिसएबल स्टूडेंट्स दूसरे पर निर्भर ना होकर, आत्मनिर्भर बने. सीबीएसइ की ओर से यह निर्देश तमाम स्कूलों को दिया गया है. बोर्ड की ओर से इसके लिए स्कूलों को नये सत्र शुरू होने तक का समय दिया है. नये सत्र 2015 के शुरू होने से पहले हर स्कूल को डिसएबल स्टूडेंट्स के एजुकेशन की व्यवस्था को सही करना होगा. बोर्ड ने अपने निर्देश में कहा है कि अगर नये सत्र के शुरू होने तक स्कूलों में यह स्लोपिंग के साथ और दूसरी व्यवस्था नहीं की जायेगी, उस स्कूल की मान्यता पर असर हो सकता है. समान शिक्षा प्रणाली को लागू करने के लिए सीबीएसइ की ओर से यह व्यवस्था की जा रही है.
- पटना के सयश कुमार के प्रोजेक्ट कों करे प्रमोट
सीबीएसइ ने पटना के वाल्डविन एकेडमी का 12वीं का स्टूडेंट सयश कुमार के प्रोजेक्ट को स्कूलों में लागू करने को कहा है. वाल्डविन एकेडमी का स्टूडेंट सयश कुमार ने कुछ सालों पहले डिसएबल स्टूडेंट्स को स्कूल में किसी तरह की दिक्कतें ना हो, इसके लिए स्लोपिंग (रैंप) कांसेप्ट पर एक प्रोजेक्ट बनाया था. इसको लेकर सयश कुमार को एनसीइआरटी के नेशनल साइंस एग्जीविशन और सीबीएसइ के साइंस एग्जीविशन में प्रथम पुरस्कार दिया गया था. सयश कुमार ने बताया कि प्रोजेक्ट के चुने जाने के बाद पटना के तमाम स्कूलों में भी उसका प्रेजेंटेशन हुआ था. लेकिन एक दो स्कूलों को छोड़ कर किसी भी स्कूल ने इसे एडाप्ट नहीं किया था. सयश ने बताया कि अगर इस प्रोजेक्ट को स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी लेवल पर लागू किया जायें तो शारीरिक रूप से असमर्थ स्टूडेंट्स के लिए काफी सुविधाजनक होगी.
- सीबीएसइ ने मांगा है डिसएबल स्टूडेंट्स की लिस्ट
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से डिसएलब स्टूडेंट्स की लिस्ट मांगी है. किस क्लास में कितने स्टूडेंट्स शारीरिक रूप से विकलांग है, उसकी जानकारी देनी होगी. बोर्ड के अनुसार डिसएबल बच्चें दूसरे बच्चों से बिल्कुल ही अलग होते है. कई बार ऐसे बच्चे डिप्रेशन में चले जाते है. इन बच्चों को स्पेशल ट्रीटमेंट ना मिले तो इन्हें सफलता मिलने में काफी कठिनाई आयेगा. ऐसे बच्चों के लिए टीचर्स के साथ अभिभावक की जिम्मेवारी भी बढ़ जाती है. स्कूल में उनके लिए स्पेशल व्यवस्था होने से उनका कांफिडेंस बढ़ेगा.
- हर स्कूल में है 50 से 100 बच्चे है विकलांग
पटना के लगभग स्कूलों में विकलांग बच्चे मिल जायेंगे. शारीरिक रूप से कमजोर इन स्टूडेंट्स के लिए स्कूलों में किसी तरह की व्यवस्था नहीं है. उन्हें हमेशा अपने फ्रेंड आदि पर निर्भर रहना पड़ता है. पटना के एक स्कूल 9वीं में पढ़ रहा रोहित ने बताया कि मेरा क्लास रूम नीचे के फ्लोर पर है और वाशरूम, पीने के पानी पीने का व्यवस्था फस्र्ट फ्लोर पर है. ऐसे में मुङो उपर जाने में काफी दिक्कतें होती है. पीने के पानी तो फिर भी फ्रेंड आदि की मदद से मिल जाता है. लेकिन वाशरूम जाने में मुङो काफी समय लग जाता है. सीढ़ी चढ़ने में मुङो काफी परेशानी होती है. वहीं अंजली सिंह ने बताया कि एक एक्सीडेंट में मेरे एड़ी के पास थोड़ा मुड़ गया है. इससे मुङो चलने में परेशानी होती है. क्लास रूम सेकेंड फ्लोर पर होने से मुङो दिक्कतें होती है. एक बार क्लास रूम में जाने के बाद मै स्कूल में छुट्टी के बाद ही निकल पाती हूं.
सीबीएसइ ने स्कूलों ने कहा ये सारी हो व्यवस्था
- डिसएबल स्टूडेंट के लिए व्हील चेयर की हो व्यवस्था
- स्कूल में जहां पर भी सीढ़ी हो, वहां पर स्लोपिंग बनाया जायें
- डिसएबल बच्चों की बेसिक जरूरत की चीजें क्लास रूम या क्लास रूम के बाहर रखी रहें. जिससे उन्हें दूसरे पर निर्भर ना रहना पड़े
- स्कूल बस में भी सीढ़ी के पास स्लोपिंग बनाया जायें, जिससे बच्चे आसानी से बस में चढ़ सके
- बस में डिसएबल स्टूडेंट्स के बैठने की अलग से व्यवस्था हो
- डिसएबल स्टूडेंट्स के लिए सप्ताह में एक दिन मोटिवेशनल क्लास होना चाहिए
- प्ले ग्राउंड में डिसएबल स्टूडेंट्स के खेलने के लिए अलग से व्यवस्था हो
कोट
बोर्ड की ओर से कई सालों से स्कूल में डिसएबल बच्चों के लिए व्यवस्था करने को कहा गया है. कई स्कूलों ने इसे शुरू भी किया है. लेकिन पूरी तरह से इसे लागू नहीं किया जा सका है. इस पर हमें ध्यान देना होगा. स्कूल में बच्चे अधिक समय रहते है, ऐसे में स्कूल में स्लोपिंग की व्यवस्था होने से डिसएबल बच्चों में कांफिडेंस आयेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना
14 nev. 2015 on prabhat khabar patna
- सीबीएसइ ने पटना के सयश कुमार के प्रोजेक्ट को स्कूलों में लागू करने को कहा
- नये सत्र के शुरू होने से पहले तमाम स्कूल में बने विकलांग बच्चों के लिए स्लोपिंग
संवाददाता, पटना
डिसएबल स्टूडेंट्स को यह फील ना हो कि वो मजबूर है. उनकी सुविधा के लिए हर स्कूल में ऐसी व्यवस्था हो जिससे डिसएबल स्टूडेंट्स को शिक्षा ग्रहण करने में किसी तरह की परेशानी ना हो. क्लास रूम के साथ प्ले ग्राउंड, लंच रूम और स्कूल बस में स्लोपिंग (रैंप) बनायी जायें. जिससे डिसएबल स्टूडेंट्स दूसरे पर निर्भर ना होकर, आत्मनिर्भर बने. सीबीएसइ की ओर से यह निर्देश तमाम स्कूलों को दिया गया है. बोर्ड की ओर से इसके लिए स्कूलों को नये सत्र शुरू होने तक का समय दिया है. नये सत्र 2015 के शुरू होने से पहले हर स्कूल को डिसएबल स्टूडेंट्स के एजुकेशन की व्यवस्था को सही करना होगा. बोर्ड ने अपने निर्देश में कहा है कि अगर नये सत्र के शुरू होने तक स्कूलों में यह स्लोपिंग के साथ और दूसरी व्यवस्था नहीं की जायेगी, उस स्कूल की मान्यता पर असर हो सकता है. समान शिक्षा प्रणाली को लागू करने के लिए सीबीएसइ की ओर से यह व्यवस्था की जा रही है.
- पटना के सयश कुमार के प्रोजेक्ट कों करे प्रमोट
सीबीएसइ ने पटना के वाल्डविन एकेडमी का 12वीं का स्टूडेंट सयश कुमार के प्रोजेक्ट को स्कूलों में लागू करने को कहा है. वाल्डविन एकेडमी का स्टूडेंट सयश कुमार ने कुछ सालों पहले डिसएबल स्टूडेंट्स को स्कूल में किसी तरह की दिक्कतें ना हो, इसके लिए स्लोपिंग (रैंप) कांसेप्ट पर एक प्रोजेक्ट बनाया था. इसको लेकर सयश कुमार को एनसीइआरटी के नेशनल साइंस एग्जीविशन और सीबीएसइ के साइंस एग्जीविशन में प्रथम पुरस्कार दिया गया था. सयश कुमार ने बताया कि प्रोजेक्ट के चुने जाने के बाद पटना के तमाम स्कूलों में भी उसका प्रेजेंटेशन हुआ था. लेकिन एक दो स्कूलों को छोड़ कर किसी भी स्कूल ने इसे एडाप्ट नहीं किया था. सयश ने बताया कि अगर इस प्रोजेक्ट को स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी लेवल पर लागू किया जायें तो शारीरिक रूप से असमर्थ स्टूडेंट्स के लिए काफी सुविधाजनक होगी.
- सीबीएसइ ने मांगा है डिसएबल स्टूडेंट्स की लिस्ट
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से डिसएलब स्टूडेंट्स की लिस्ट मांगी है. किस क्लास में कितने स्टूडेंट्स शारीरिक रूप से विकलांग है, उसकी जानकारी देनी होगी. बोर्ड के अनुसार डिसएबल बच्चें दूसरे बच्चों से बिल्कुल ही अलग होते है. कई बार ऐसे बच्चे डिप्रेशन में चले जाते है. इन बच्चों को स्पेशल ट्रीटमेंट ना मिले तो इन्हें सफलता मिलने में काफी कठिनाई आयेगा. ऐसे बच्चों के लिए टीचर्स के साथ अभिभावक की जिम्मेवारी भी बढ़ जाती है. स्कूल में उनके लिए स्पेशल व्यवस्था होने से उनका कांफिडेंस बढ़ेगा.
- हर स्कूल में है 50 से 100 बच्चे है विकलांग
पटना के लगभग स्कूलों में विकलांग बच्चे मिल जायेंगे. शारीरिक रूप से कमजोर इन स्टूडेंट्स के लिए स्कूलों में किसी तरह की व्यवस्था नहीं है. उन्हें हमेशा अपने फ्रेंड आदि पर निर्भर रहना पड़ता है. पटना के एक स्कूल 9वीं में पढ़ रहा रोहित ने बताया कि मेरा क्लास रूम नीचे के फ्लोर पर है और वाशरूम, पीने के पानी पीने का व्यवस्था फस्र्ट फ्लोर पर है. ऐसे में मुङो उपर जाने में काफी दिक्कतें होती है. पीने के पानी तो फिर भी फ्रेंड आदि की मदद से मिल जाता है. लेकिन वाशरूम जाने में मुङो काफी समय लग जाता है. सीढ़ी चढ़ने में मुङो काफी परेशानी होती है. वहीं अंजली सिंह ने बताया कि एक एक्सीडेंट में मेरे एड़ी के पास थोड़ा मुड़ गया है. इससे मुङो चलने में परेशानी होती है. क्लास रूम सेकेंड फ्लोर पर होने से मुङो दिक्कतें होती है. एक बार क्लास रूम में जाने के बाद मै स्कूल में छुट्टी के बाद ही निकल पाती हूं.
सीबीएसइ ने स्कूलों ने कहा ये सारी हो व्यवस्था
- डिसएबल स्टूडेंट के लिए व्हील चेयर की हो व्यवस्था
- स्कूल में जहां पर भी सीढ़ी हो, वहां पर स्लोपिंग बनाया जायें
- डिसएबल बच्चों की बेसिक जरूरत की चीजें क्लास रूम या क्लास रूम के बाहर रखी रहें. जिससे उन्हें दूसरे पर निर्भर ना रहना पड़े
- स्कूल बस में भी सीढ़ी के पास स्लोपिंग बनाया जायें, जिससे बच्चे आसानी से बस में चढ़ सके
- बस में डिसएबल स्टूडेंट्स के बैठने की अलग से व्यवस्था हो
- डिसएबल स्टूडेंट्स के लिए सप्ताह में एक दिन मोटिवेशनल क्लास होना चाहिए
- प्ले ग्राउंड में डिसएबल स्टूडेंट्स के खेलने के लिए अलग से व्यवस्था हो
कोट
बोर्ड की ओर से कई सालों से स्कूल में डिसएबल बच्चों के लिए व्यवस्था करने को कहा गया है. कई स्कूलों ने इसे शुरू भी किया है. लेकिन पूरी तरह से इसे लागू नहीं किया जा सका है. इस पर हमें ध्यान देना होगा. स्कूल में बच्चे अधिक समय रहते है, ऐसे में स्कूल में स्लोपिंग की व्यवस्था होने से डिसएबल बच्चों में कांफिडेंस आयेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना
14 nev. 2015 on prabhat khabar patna
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