Sunday, February 22, 2015

गैर मुस्लिम छात्रों की पसंद बन रही फोकानियां और मौलवी

गैर मुस्लिम छात्रों की पसंद बन रही फोकानियां और मौलवी

- मदरसा बोर्ड में हर साल बढ़ते है गैर  मुसलिम  छात्र-छात्रओं की संख्या
- रिजल्ट में भी आगे रहते है गैर मुसलिम
 संवाददाता, पटना
उर्दू की पढ़ाई तो बिहार बोर्ड में भी होता है. भाषा के तौर पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के भी विद्यार्थी उर्दू की पढ़ाई करते है. इसमें उन विद्यार्थी की संख्या अधिक होती है जो मुसलिम होते हैं. लेकिन इसका उलटा मदरसा बोर्ड में उर्दू पढ़ने वाले में गैर मुसलिम विद्यार्थी की संख्या लगातार बढ़ रही हैं. विद्यार्थी को उर्दू से रूचि तो है ही इसके अलावा फोकानिया (मैट्रिक) और मौलवी (इंटरमीडिएट) करने की इच्छा उन्हें इस ओर ला रहा है. अगर पिछले चार सालों की बात करें तो हर साल मदरसा बोर्ड में गैर मुसलिम विद्यार्थी की संख्या बढ़ती है. इसमें छात्र के साथ छात्रओं की संख्या भी अच्छी खासी है. पिछले कई सालों का रिकार्ड देखे तो पता चलेगा कि मदरसा बोर्ड में विद्यार्थी की संख्या काफी बढ़ी है. इसमें गैर मुसलिम भी हर साल बढ़ रहे है.
- मेरिट लिस्ट में शामिल होते है गैर मुसलिम
मदरसा बोर्ड जब फोकानियां और मौलवी का रिजल्ट घोषित करती है तो मुसलिम विद्यार्थियों के मेरिट लिस्ट के साथ गैर मुसलिम विद्यार्थी का भी मेरिट लिस्ट अलग से प्रकाशित करती है. मदरसा बोर्ड के अनुसार गैर मुसलिम विद्यार्थी को रिजल्ट काफी बेहतर होता है. इस कारण बोर्ड हर साल अलग से मेरिट लिस्ट निकालती है. 2014 के मदरसा बोर्ड के फोकानिया रिजल्ट के अनुसार 2014 में मौलवी परीक्षा के लिए दस गैर मुसलिम विद्यार्थी का मेरिट लिस्ट निकाला गया था. इसमें सारे के सारे प्रथम श्रेणी प्राप्त किये थे. वहीं फोकानियां के लिए भी टॉप टेन का मेरिट लिस्ट निकाला गया था. मदरसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मुमताज आलम ने बताया कि हर साल मुसलिम विद्यार्थी की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है. रिजल्ट भी अच्छा आता है. इस कारण गैर मुसलिम छात्रों का मेरिट लिस्ट अलग से निकाला जाता है.
- नौकरी मिलने में होती है सुविधा
फोकानियां और मौलवी पढ़ने के पीछे आसानी से मिलने वाली नौकरी है. गैर मुसलिम छात्रों के अनुसार फोकानियां और मौलवी करने से आगे हमें आसानी से नौकरी मिल जाती है. हमारे लिए दो ऑप्सन होती है. एक तो हिंदी भाषी होने का फायदा मिलता है. वहीं उर्दू के क्षेत्र में जो भी हमें नौकरी मिलना आसान हो जाता है. इस 2012 सत्र का फोकानिया परीक्षा का गैर मुसलिम मेरिट लिस्ट का टॉपर सुप्रिया राज के अनुसार शिक्षण कार्य के लिए उर्दू माध्यम से काफी फायदा होगा. अभी हाल में उर्दू टीइटी में पास होने के बाद अब शिक्षक की बहाली में सुविधा मिल जायेगी. वहीं 2014 की मौलवी की गैर मुसलिम सेकेंड टॉपर पूजा कुमारी ने बताया कि दूसरे विषय में ग्रेजुएशन करने पर काफी परेशानी होती, क्योंकि हर विषय में काफी कांपिटिशन है. लेकिन उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थी की संख्या अभी भी कम है. खास कर सिविल सर्विसेज की ओर इस विषय को लेकर पढ़ने वाले काफी कम है. ऐसे में हमें प्रतियोगी परीक्षा निकालना आसान हो जाता है.

फोकानियां के लिए
साल      -       कुल विद्यार्थी की संख्या      -   गैर मुसलिम
2011     -           64565                        -    987
2012     -          70798                        -      1102  
2013     -          50733                        -     1582
2014     -         74648                       -      2466

मौलवी के लिए
साल      -       कुल विद्यार्थी की संख्या      -   गैर मुसलिम
2011     -             69723                     -     1824  
2012     -            66972                      -    2033
2013     -           73814                       -    2276
2014     -           50435                       -    2637

4 jan. 2015 on prabhat khabar. patna 

No comments:

Post a Comment