Tuesday, February 24, 2015

हर प्रश्न के जवाब पर मिले जीरो अंक

हर प्रश्न के जवाब पर मिले जीरो अंक

- कटिहार की पिंकी मैट्रिक के हर विषय मे है पास और हिंदी में कर गयी फेल
- सूचना के अधिकार के तहत निकाली उत्तर पुस्तिका तो निकला सादा कागज
संवाददाता, पटना
मैट्रिक परीक्षा केंद्र से ऑरिजनल उत्तर पुस्तिका गायब हो जाता है और उसकी जगह पर दूसरे उत्तर पुस्तिका को डाल दिया जाता है, जो पूरा सादा है. यह सारा कुछ मुख्य परीक्षक के आंखों के सामने होता है और कोई इसे रोकने की कोशिश नहीं करता है. जब उत्तर पुस्तिका की जांच होती है तो परीक्षक उसमें जीरो अंक देते है. इसका परिणाम यह हुआ कि छात्र मैट्रिक की परीक्षा में फेल कर गयी. इस बात का खुलासा तब हुआ जब सूचना के अधिकार के तहत इस उत्तर पुस्तिका को मांगा गया. उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बारसोईघाट, कटिहार की मैट्रिक 2014 की छात्र पिंकी प्रकाश (रॉल नंबर 1400008, रॉल कोड 14315) हर विषय में प्रथम श्रेणी का अंक लायी, लेकिन वो मातृभाषा हिंदी में फेल हो गयी. जब इस बात का पता लगाने के लिए सूचना के अधिकार के तहत पिंकी प्रकाश ने उत्तर पुस्तिका बिहार बोर्ड से प्राप्त किया तो पता चला कि स्टूडेंट ने जिस उत्तर पुस्तिका में अपना उत्तर लिखा था, वो कॉपी गायब है और उसकी जगह पर दूसरी उत्तर पुस्तिका है. उत्तर पुस्तिका का उपर का पेज और अंतिम पेज तो सही है, लेकिन बीच के सारे पेज की जगह दूसरे पेज को डाल दिया गया है. ये सारे पेज सादे थे और जब उत्तर पुस्तिका की जांच हुई तो सादा पेज रहने के कारण उसे परीक्षक ने हिंदी में जीरो अंक दे दिया.
- पांच महीने बात मिला उत्तर पुस्तिका
रिजल्ट खराब होने की सही जानकारी पिंकी प्रकाश को तब मिला जब सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका प्राप्त हुआ. रिजल्ट निकलने के तुरंत बाद पिंकी ने सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका की मांग की. लेकिन सूचना के अधिकार के तहत एक महीने के बदले उसे पांच महीने बाद ऑरिजनल उत्तर पुस्तिका प्राप्त हुआ. अब इस उत्तर पुस्तिका को लेकर पिंकी प्रकाश के पिता सुशील कुमार गुप्ता बिहार बोर्ड का चक्कर लगा रहे है. ना तो अध्यक्ष से मिल पा रहे है और ना ही सचिव के पास ही अपनी बात पहुंचा पा रहे है. सुशील कुमार गुप्ता ने बताया कि बोर्ड के कर्मचारी मोटी रकम का डिमांड कर रहे है. कई दिनों तक दौड़ने के बाद मंगलवार को बोर्ड संयुक्त सचिव के पास अपनी बातें रखने का मौका मिला. जब संयुक्त सचिव ने उत्तर पुस्तिका देखा तो उन्होंने कहा कि इस उत्तर पुस्तिका के अंदर का सारा पेज बदला हुआ है.
- स्क्रूटनी के लिए भी दिया आवेदन
रिजल्ट खराब होने के बाद पिंकी प्रकाश ने अंक पत्र में सुधार के आवेदन भी किया. 21 जून 2014 को पिंकी प्रकाश ने स्क्रूटनी के आवेदन के लिए शुल्क जमा कर आवेदन किया. पांच महीने बीत जाने के बाद भी उसे अभी तक रिजल्ट नहीं मिला. पिंकी प्रकाश के पिता सुशील कुमार गुप्ता ने बताया कि कई महीनों से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन अभी तक अंक पत्र में सुधार नहीं हुआ है. रिजल्ट नहीं होने के कारण बेटी का नामांकन अभी तक नहीं किया जा सका है. एक साल बरबाद हो गया. समय पर पिंकी के रिजल्ट  में सुधार हो इसके लिए सुशील कुमार गुप्ता ने बिहार बोर्ड के सचिव के नाम से 24 जुलाई 2014 को एक आवेदन के माध्यम से सारी बातों से अवगत करवाया.
- उत्तर पुस्तिका सामने आने पर परेशान है बिहार बोर्ड
सूचना के अधिकार के तहत निकले इस उत्तर पुस्तिका के बाद बिहार बोर्ड में अफरा तफरी मची हुई है. सूत्रों के मुताबिक बोर्ड परीक्षा में पूरी तरह से सर्तकता बरती जाती है. ऐसे में किसी टीचर द्वारा किया गया यह काम बोर्ड परीक्षा के उपर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है. बोर्ड ने पिंकी प्रकाश के एटेंडेंस सीट की भी जांच की. पता चला कि पिंकी प्रकाश उस दिन परीक्षा में शामिल हुई थी. उत्तर पुस्तिका की प्रथम पृष्ठ पर पिंकी के हैंडराइटिंग में महत्वपूर्ण सूचना भरी हुई है. 11 मार्च 2014 को हिंदी की परीक्षा हुई थी. इस पृष्ठ पर परीक्षक के हस्ताक्षर भी मौजूद है. उत्तर पुस्तिका का नंबर 3379609 है और इस पर केंद्राधीक्षक का पूर्ण हस्ताक्षर भी है. लेकिन इसके अंदर के तमाम पृष्ठ बदला हुआ है.

पिंकी ने इन विषयों में प्राप्त किये अंक
मैथ     -   62 अंक
साइंस  -   57  अंक
सोशल साइंस  -  62 अंक
संस्कृत    -  73 अंक
इंगलिश   -   41 अंक
हिंदी   -  00

कोट
यह काफी गंभीर मामला है. हमारे पास अभी तक यह आया नहीं है. लेकिन मै इसे तुरंत देख कर इस पर जांच करवायेंगे. क्योंकि इससे तो एक स्टूडेंट का साल बरबाद हो गया है. इसकी पूरी जांच करवायी जायेगी.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

20 nev. 2015 on prabhat khabar patna 


पिंकी प्रकाश के साधे उत्तर पुस्तिका पर बिहार बोर्ड ने दिया 60 अंक

- प्रभात खबर में छपी खबर के बाद बोर्ड हुई एक्टिव, 309 अंक के साथ पिंकी प्रकाश हुई मैट्रिक पास 
संवाददाता, पटना
आखिर पिंकी प्रकाश की मेहनत सामने आया. तमाम विषयों के अंक देखकर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने  पिंकी प्रकाश को हिंदी में एवरेज मार्किग कर 60 अंक दिया है. इस अंक के मिलने से पिंकी प्रकाश मैट्रिक 309 अंक से प्रथम श्रेणी में पास हुई. लेकिन यहां तक पहुंचने में पिंकी प्रकाश को लंबा इंतजार करना पड़ा. बिहार बोर्ड का कई बार चक्कर लगाने के बाद भी उसे न्याय नहीं मिल रहा था. लेकिन प्रभात खबर ने पिंकी प्रकाश की परेशानी समझी और उसकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. प्रभात खबर के 20 नवंबर के अखबार में इस खबर को काफी प्रमुखता से छापा गया. प्रभात खबर को धन्यवाद देते हुए पिंकी प्रकाश के अभिभावक सुशील कुमार गुप्ता ने कहा कि प्रभात खबर के कारण ही मेरी बेटी को न्याय मिला है. मै जून से ही बिहार बोर्ड में न्याय के लिए आ रहा था, लेकिन प्रभात खबर में छपने के बाद इस मामले में गति आयी और मेरी बेटी का रिजल्ट सही हुआ. 
- हिंदी में जीरो अंक थे पिंकी को 
ज्ञात हो कि उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बारसोईघाट, कटिहार की मैट्रिक 2014 की छात्र पिंकी प्रकाश (रॉल नंबर 1400008, रॉल कोड 14315) हर विषय में प्रथम श्रेणी का अंक लायी, लेकिन वो मातृभाषा हिंदी में फेल हो गयी.  सूचना के अधिकारी के तहत पिंकी प्रकाश के हिंदी के उत्तर पुस्तिका को निकाला गया. तब इस बात का पता चला कि पिंकी प्रकाश ने जिस उत्तर पुस्तिका में आंसर लिखा है वो ये उत्तर पुस्तिका नहीं है.  जिस उत्तर पुस्तिका में अपना उत्तर लिखा था, वो कॉपी गायब है और उसकी जगह पर दूसरी उत्तर पुस्तिका है. उत्तर पुस्तिका का उपर का पेज और अंतिम पेज तो सही है, लेकिन बीच के सारे पेज की जगह दूसरे पेज को डाल दिया गया है. ये सारे पेज सादे थे और जब उत्तर पुस्तिका की जांच हुई तो सादा पेज रहने के कारण उसे परीक्षक ने हिंदी में जीरो अंक दे दिया. इसके बाद बिहार बोर्ड की ओर से इसकी जांच हुई. और इसके बाद पिंकी प्रकाश को एवरेज मार्किग हिंदी में किया गया. 

कोट
पिंकी प्रकाश का अंक पत्र शुक्रवार को मेरे पास आया है. इसमें उसे हिंदी मे 60 अंक दिया गया है. पिंकी प्रकाश प्रथम श्रेणी से पास हुई है. हमने अभिभावक को बुलाकर मार्क्‍स 

महेंद्र पाल, अनुमंडल पदाधिकारी, बारसोई

28 nov 2015 

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