Sunday, February 22, 2015

सीबीएसइ कोर्स में हेल्थ एजुकेशन होगा अनिवार्य

सीबीएसइ कोर्स में हेल्थ एजुकेशन होगा अनिवार्य

- क्लास फोर से 10वीं तक होगी पढ़ाई
- 2015 सेशन से होगा लागू, जल्द ही स्कूलों को भेजा जायेगा सिलेबस
संवाददाता, पटना
स्वस्थ रहने के लिए अवेयरनेस जरूरी है. इसकी शुरुआत बचपन से ही होना चाहिए. इसके लिए स्कूल से बड़ा कोई जगह नहीं हो सकता है. क्योंकि बच्चे सबसे अधिक समय स्कूल में रहते है और टीचर्स की बात का उनके उपर असर अधिक होता है. तभी स्वास्थ्य मंत्रलय के निर्देश पर स्वास्थ्य के प्रति बच्चों को जागरूक करने के लिए सेट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) हेल्थ एजुकेशन को अनिवार्य करने जा रहा है. 2015 सेशन से इसे हर सीबीएसइ स्कूलों में चालू किया जायेगा. इसकी पढ़ाई क्लास फोर से 10वीं तक होगा.
- फिनलैंड से इंस्पायर है सिलेबस
 राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रलय की मदद से सिलेबस को तैयार किया गया है. सिलेबस में हेल्थ संबंधी हर विषय को सरलता से रखने की कोशिश की गयी है. इसके सिलेबस तैयार करने में फिनलैंड के शैक्षिक मॉडल को प्रेरणाश्रोत्र के रूप में बनाया गया है. सीबीएसइ के अनुसार फिनलैंड में स्वास्थ्य शिक्षा को मुख्य शिक्षा के अंतर्गत रखा जाता है. फिनलैंड को दुनिया का सबसे स्वास्थ्य समृद्ध  देश माना जाता है. यहां पर स्कूल लेवल से ही हेल्थ एजुकेशन दिया जाता है. सीबीएसइ द्वारा अभी सिलेबस को अंतिम रूप दिया जा रहा है. नये सत्र के पहले हर स्कूल को सिलेबस उपलब्ध करवा दिया जायेगा.
- जंक फूड से वीडियो गेम तक की जानकारी
हेल्थ एजुकेशन के माध्यम से बच्चों को कई चीजों के प्रति अवेयर किया जायेगा. जंक फूड बच्चे खाते है. वह उनके स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है. इसकी जानकारी मिलेगी. इसके अलावा मैदान में खेलने जाने की अपेक्षा वीडियो गेम खेलना ज्यादा पसंद करने वाले बच्चों को पता चलेगा कि वीडियो गेम उनके लिए कितना खतरनाक है. कम उम्र में शरीरिक कमजोरी से वह आगे चलकर डायबिटिज, ब्लडप्रेशर, हार्ट आदि की बीमारी के शिकार हो जाते है.

इन चीजों को किया जायेगा सिलेबस में शामिल
1. अपने बॉडी के बारे में जानना  - हर किसी के बॉडी का अपना सिस्टम होता है. बचपन में क्या खाये जिससे अच्छे हाइट के साथ हाइजिन भी सही रहे. बॉडी के हर पार्ट का खाने और लाइफ स्टाइल पर क्या असर पड़ता है. इसकी जानकारी दी जायेगी.
2. फूड और न्यूट्रिशन - बच्चों के लिए सही फूड क्या है. क्या कुछ खाये जिससे न्यूट्रिशन बनी रहे. न्यूट्रिशन सही रहने से पोजिटिव एनर्जी बनती है और ऐसे में सिखने पर अधिक जोर रहेगा. फूड सही रहने से एनर्जी लेवल बढ़ती है और कंस्ट्रेशन अधिक होता है.
3. परसर्नल हाइजिन, इंवायरमेंट और सैनिटेशन - अलग-अलग बॉडी स्ट्रक्चर होने के साथ हाइजिन लेवल भी हर बच्चे में अलग होती है. अपने हाइजिन लेवल के अनुसार ही डाइट होनी चाहिए. हाइजिन के लिए साफ सफाई का कितना फर्क पड़ता है इसकी जानकारी बच्चों में होना बहुत ही जरूरी है. उदाहरण के लिए हाथ घोकर खाना और खाने के बीच पानी पीने से क्या नुकसान आदि होता है. इसके अलावा आस पास की सफाई और सैनिटेशन का बच्चे के हेल्थ पर क्या असर डाल सकता है. इसे भी बताया जायेगा.
4. फिजिकल फिटनेस -  इस कोर्स से बच्चे को यह समझ में आयेगा कि उनके लिए फिजिकल फिटनेस की कितनी जरूरत है. फिटनेस को कैसे मेनटेन रखें. अपने रिस्पेरेटरी सिस्टम को बनाये रखने के लिए क्या करें. हड्डी और बॉडी को स्ट्रॉग रखने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए. फिजिकल फिटनेस से डिप्रेशन, माइग्रेन, स्ट्रेश आदि प्राब्लम नहीं होता है.
5. खुद को सेफ करने की जिम्मेवारी -  खान पान को सही रख कर आप खुद को सेफ रख सकते है. कई बीमारियों से निजाद मिल जायेगा. इसकी जानकारी बच्चों को हेल्थ एजुकेशन के माध्यम से दिया जायेगा. फिजिकली और इमेाशनल सेफ रहने के लिए बच्चों क्या करना चाहिए.
6. लाइफ स्कील और लाइफ स्टाइल - आपके हेल्थ से लाइफ स्टाइल पर पूरा असर होता है. इस कारण लाइफ स्टाइल के लिए हेल्थ को सही रखना बहुत ही जरूरी है. हेल्थ एजुकेशन के तहत लाइफ स्टाइल के साथ स्कील्स की भी जानकारी दी जायेगी. लाइफ स्टाइल के लिए लर्निग प्रोसेस क्या हो, इसके प्रति अवेयर किया जायेगा.

कोट
हेल्थ एजुकेशन को लेकर एक मैनुअल पहले भी बोर्ड की ओर से दिया गया था. लेकिन हेल्थ एजुकेशन के लिए एक पीरियड की पढ़ाई होना और इसे अनिवार्य बनाना अपने आप में सही प्रयास होगा. बोर्ड का यह प्रयास काफी अच्छा है. इससे बच्चों को हेल्थ संबंधी अवेयरनेस आयेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ
 14 dec. 2015 on prabhat khabar patna 

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