Sunday, February 22, 2015

स्कूल को टॉपर बनने के लिए चाहिए 518 मार्क्‍स

स्कूल को टॉपर बनने के लिए चाहिए 518 मार्क्‍स

- सीबीएसइ के तीन दिनों के वर्कशॉप में निकल कर आयी बातें
- स्टूडेंट की तरह अब स्कूल को भी देना होगा परीक्षा
संवाददाता, पटना
अभी तक स्टूडेंट्स का ही टॉपर लिस्ट बनता था. लेकिन अब इस केटेगरी में स्कूलों को भी शामिल किया जायेगा. स्टूडेंट्स को टॉपर बनने के लिए मैट्रिक में एक साल और प्लस टू में दो सालों का समय दिया जाता है. लेकिन स्कूल को टॉपर बनने के लिए पांच साल का समय दिया जायेगा. अब यह स्कूल पर निर्भर करता है कि वो टॉपर बनने के लिए कितना अंक प्राप्त करते है. क्योंकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से इसके लिए 518 अंक रखा गया है. बोर्ड द्वारा लिये गये टेस्ट में जो स्कूल 518 अंक प्राप्त करेगा वो टॉपर लिस्ट में शामिल होगा. इतना ही नहीं उस स्कूल को देश भर के स्कूलों के लिए मॉडल स्कूल के रूप में पायलेट स्कूल के रूप में सीबीएसइ शामिल करेगी. ये तमाम जानकारी सीबीएसइ की ओर से आयोजित एक वर्कशॉप के दौरान स्कूलों के प्रिंसिपल को दिया जा रहा था. तीन दिनों तक चले इस वर्कशॉप का आयोजन होटल विंडसर में चला. इस मौके पर सीबीएसइ की ओर से रिसोर्स पर्सन रूचिरा मुखर्जी मौजूद थीं.
- पांच सालों का दिया जायेगा समय
इस वर्कशॉप में 34 स्कूलों के प्रिंसिपल शामिल हुए. वर्कशॉप के बारे में पटना सीबीएसइ सिटी को-ऑडिनेटर राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि अब हर स्कूलों को सीबीएसइ का एक्रेडेशन लेना होगा. इसके लिए बोर्ड में स्कूल को अप्लाई करना होगा. अप्लाई के कुछ दिनो बाद सीबीएसइ की एक टीम स्कूल की जांच करने आयेगी. अगर टीम सैटिसफाइड हो गयी तो मार्क्‍स देकर जायेगी. अगर नहीं हुई तो एक निश्चित समय स्कूल को दिया जायेगा. इस समय के अंतर्गत स्कूल को टारगेट पूरा करना होगा. पांच साल के इस समय में स्कूल को 518 अंक प्राप्त करने होंगे. इतना अंक प्राप्त करने के बाद ही स्कूल को सीबीएसइ का एक्रेडेशन मिल पायेगा.

सीबीएसइ अब होगा स्कोर कार्ड
1. स्कूलिस्टीक प्रोसेस
कुल अंक -  126 (25 फीसदी)
2. को-स्कूलिस्टीक प्रोसेस
कुल अंक  -  56 (15 फीसदी)
3. इन्फ्रास्ट्रर
कुल अंक  -  84  (15 फीसदी)
4. हिन्यूम रिसोर्स
कुल अंक  -  77 (10 फीसदी)
5. मैनेजमेंट एंड एडमिनिस्ट्रेशन
कुल अंक  -  77 (10 फीसदी)
6. लीडरशिप
कुल अंक  -  42  (15 फीसदी)
7. वेनिफिसियल सैटिसफैक्शन
कुल अंक   -  56 (10 फीसदी)

ये सारी नियम को स्कूलों को पूरा करना होगा
- सीबीएसइ के तमाम कॉरिकुलम की जानकारी प्रिंसिपल और टीचर को होनी चाहिए
- स्कूलिस्टीक स्कील के विकास के लिए वार्षिक प्लानिंग हो
- टीचर और स्टूडेंट का रेसियो बोर्ड के अनुसार हो
- समय पर सिलेबस पूरा हो
- म्यूजिक, डांस, थियेटर, मैथ लैब, इको क्लब, हेल्थ एंड वेलनेस क्लब, इंवायरमेंटल क्लब आदि होनी चाहिए
- स्कूल इनोवेटिव प्रोग्राम को मोटिवेट करें
- सीसीइ इंप्लीमेंटेशन
- स्टूडेंट्स की संख्या
- 75 फीसदी एटेंडेंस पर फोकस
- हेल्थ एंड फिजिकल एक्टिविटी, हेल्थ कार्ड
- क्लास रूम, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब, प्ले ग्राउंड
- स्पोर्ट्स एंड गेम फैसिलिटी, हॉबी रूम, आर्ट्स एंड म्यूजिक फैसिलिटी
- मेडिकल रूम, पीने की पानी और सैनिटेशन, हेल्थ एंड मैनेजमेंट फैसिलिटी
- फर्निचर, लाइटिंग और आपदा प्रबंधन की सुविधा
- अभिभावक का स्कूल में इंवाल्वमेंट

कोट
सीबीएसइ की ओर से अब हर साल प्रिंसिपल के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया जायेगा. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के माध्यम से प्रिंसिपल को बोर्ड के नियमों आदि की जानकारी दी जायेगी. कई बार नियम को लेकर कंफ्यूजन और जानकारी का अभाव होता है. ऐसे में बोर्ड के रिसोर्स पर्सन से तमाम कंफ्यूजन दूर हो जाती है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

17 dec. 2015 on prabhat khabar patna 

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