अब हर बोर्ड में साइंस और मैथ का एक होगा सिलेबस
- नयी शिक्षा नीति के तहत जोड़ा जायेगा हर स्टेट बोर्ड से
- इंजीनियरिंग और मेडिकल में शामिल होने के लिए किया जा रहा यह प्रयास
संवाददाता, पटना
नेशनल बोर्ड हो या स्टेट बोर्ड हो, अब हर बोर्ड में एक ही मैथ और साइंस की किताबें पढ़ी जायेगी. अब छात्रों को कंप्लेन नहीं रहेगी कि किसी बोर्ड का पेपर कठिन था तो किसी का आसान, क्योंकि अब सीबीएसइ हो या स्टेट बोर्ड हो, 12वीं के स्टूडेंट्स मैथ और साइंस का एक जैसा किताब पढ़ेंगे और परीक्षाएं भी इन विषयों के एक जैसे ही होंगे. 2016 के बोर्ड परीक्षा के दौरान पूरे देश में 12वीं के मैथ और साइंस का सिलेबस और एग्जामिनेशन पैटर्न एक जैसा रहेगा. यह बात नयी शिक्षा नीति के तहत लागू किया जायेगा. मानव संसाधन विभाग की ओर से इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. काउंसिल ऑफ बोर्डस ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया (कोबसे) की ओर से मिली जानकारी के अनुसार हर बोर्ड को एक समान करने की पहल की जा रही हैं. इसके लिए सबसे पहले मैथ और साइंस के बुक को एक किया जायेगा.
कोर्स हो रहा डिजाइन
काउंसिल ऑॅफ बोर्डस ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया ने एक कमेटी बनायी है. इसमें सभी स्टेट बोर्ड के मेंबर कोर्स डिजाइन करेंगे. मार्किग पैटर्न एक जैसा रहेगा. कोबसे के सूत्रों ने बताया कि अगले साल से इसे लागू किया जा सकेगा. क्योंकि सिलेबस बनाया जा रहा हैं. सिलेबस बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. जो चार से पांच महीने में पूरा हो पायेगा. इसके लिए एनसीइआरटी को गाइड लाइन भी जारी किया गया हैं. सीबीएसइ के सिटी को-ऑडिनेटर डा. राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि नये सिस्टम का फायदा प्रतियोगी परीक्षा देने वाले छात्रों को होगा. सीबीएसइ 12वीं के टॉप 20 स्टूडेंट्स के साथ आइसीएसइ बोर्ड या स्टेट बोर्ड के टॉप 20 स्टूडेंट्स से तुलना नहीं किया जा सकेगा. बिहार बोर्ड के एग्जाम एक्सपर्ट आरपी सिंह ने बताया कि बिहार बोर्ड के कोर्स में कई बार साइंस टॉपिक सीबीएसइ से अलग होते है. बिहार बोर्ड में सीबीएसइ पैटर्न पर ही परीक्षा ली जाती हैं और सिलेबस भी मैथ और साइंस के लगभग एक जैसे है. लेकिन एक सिलेबस होने से इंजीनियरिंग और मेडिकल के लिए पर्सेटाइल अलग-अलग नहीं होगा और इससे छात्रों को काफी राहत मिलेगी.
20 राज्य में चल रहा सीबीएसइ पैटर्न आधारित बुक
पिछले एक साल के दौरान कई स्टेट बोर्ड ने सीबीएसइ पैटर्न को अपनाया है. इसमें परीक्षा पैटर्न के साथ कोर्स भी शामिल किया गया है. कोबसे की ओर से तमाम स्टेट बोर्ड से एक सिलेबस करने का आग्रह किया गया है. हाल में हुए कोबसे की बैठक में भी एक सिलेबस करने पर विचार किया गया हैं. 2014 में आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, राजस्थान के साथ कुल 20 स्टेट हैं जहां पर अभी एनसीइआरटी के ही मैथ और साइंस की किताबें चलायें जा रहे है. अभी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां पर राज्य का अपना सिलेबस चलाये जा रहे है. इसमें तमिलानाडू, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर आदि राज्य शामिल है. कोबसे की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि ये राज्य भी एनसीइआरटी के ही मैथ और साइंस की किताबें लागू करें.
कोट
चुकी इंजीनियरिंग और मेडिकल की परीक्षा में देश भर के छात्र शामिल होते है. ऐसे में पूरे देश में मैथ और साइंस का सिलेबस एक होने से किसी तरह की शिकायत नहीं रह जायेगी. इस कारण ऐसा किया जा रहा है.
विनीत जोशी, पूर्व चेयरमैन, सीबीएसइ
कोबसे की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई थी. अगर पूरे देश में मैथ और साइंस की किताब एक हो जायेगी तो बिहार के छात्रों को काफी फायदा होगा. इंजीनियरिंग और मेडिकल के अलावा दूसरे प्रतियोगी परीक्षा में भी यह मददगार होगा.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
पिछले एक साल में कई स्टेट में मैथ और साइंस के सिलेबस को सीबीएसइ के अनुसार ही एनसीइआरटी के बुक चलाने शुरू किये है. क्योंकि एनसीइआरटी के बुक ही आदर्श बुक माने जा रहे है, जो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में उपयोग किया जाता है. इस कारण नयी शिक्षा नीति में साइंस और मैथ का एक सिलेबस करने का प्लान है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया कांप्लेक्स
21 feb. 2015 on prabhat khabar, patna
- नयी शिक्षा नीति के तहत जोड़ा जायेगा हर स्टेट बोर्ड से
- इंजीनियरिंग और मेडिकल में शामिल होने के लिए किया जा रहा यह प्रयास
संवाददाता, पटना
नेशनल बोर्ड हो या स्टेट बोर्ड हो, अब हर बोर्ड में एक ही मैथ और साइंस की किताबें पढ़ी जायेगी. अब छात्रों को कंप्लेन नहीं रहेगी कि किसी बोर्ड का पेपर कठिन था तो किसी का आसान, क्योंकि अब सीबीएसइ हो या स्टेट बोर्ड हो, 12वीं के स्टूडेंट्स मैथ और साइंस का एक जैसा किताब पढ़ेंगे और परीक्षाएं भी इन विषयों के एक जैसे ही होंगे. 2016 के बोर्ड परीक्षा के दौरान पूरे देश में 12वीं के मैथ और साइंस का सिलेबस और एग्जामिनेशन पैटर्न एक जैसा रहेगा. यह बात नयी शिक्षा नीति के तहत लागू किया जायेगा. मानव संसाधन विभाग की ओर से इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. काउंसिल ऑफ बोर्डस ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया (कोबसे) की ओर से मिली जानकारी के अनुसार हर बोर्ड को एक समान करने की पहल की जा रही हैं. इसके लिए सबसे पहले मैथ और साइंस के बुक को एक किया जायेगा.
कोर्स हो रहा डिजाइन
काउंसिल ऑॅफ बोर्डस ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया ने एक कमेटी बनायी है. इसमें सभी स्टेट बोर्ड के मेंबर कोर्स डिजाइन करेंगे. मार्किग पैटर्न एक जैसा रहेगा. कोबसे के सूत्रों ने बताया कि अगले साल से इसे लागू किया जा सकेगा. क्योंकि सिलेबस बनाया जा रहा हैं. सिलेबस बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. जो चार से पांच महीने में पूरा हो पायेगा. इसके लिए एनसीइआरटी को गाइड लाइन भी जारी किया गया हैं. सीबीएसइ के सिटी को-ऑडिनेटर डा. राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि नये सिस्टम का फायदा प्रतियोगी परीक्षा देने वाले छात्रों को होगा. सीबीएसइ 12वीं के टॉप 20 स्टूडेंट्स के साथ आइसीएसइ बोर्ड या स्टेट बोर्ड के टॉप 20 स्टूडेंट्स से तुलना नहीं किया जा सकेगा. बिहार बोर्ड के एग्जाम एक्सपर्ट आरपी सिंह ने बताया कि बिहार बोर्ड के कोर्स में कई बार साइंस टॉपिक सीबीएसइ से अलग होते है. बिहार बोर्ड में सीबीएसइ पैटर्न पर ही परीक्षा ली जाती हैं और सिलेबस भी मैथ और साइंस के लगभग एक जैसे है. लेकिन एक सिलेबस होने से इंजीनियरिंग और मेडिकल के लिए पर्सेटाइल अलग-अलग नहीं होगा और इससे छात्रों को काफी राहत मिलेगी.
20 राज्य में चल रहा सीबीएसइ पैटर्न आधारित बुक
पिछले एक साल के दौरान कई स्टेट बोर्ड ने सीबीएसइ पैटर्न को अपनाया है. इसमें परीक्षा पैटर्न के साथ कोर्स भी शामिल किया गया है. कोबसे की ओर से तमाम स्टेट बोर्ड से एक सिलेबस करने का आग्रह किया गया है. हाल में हुए कोबसे की बैठक में भी एक सिलेबस करने पर विचार किया गया हैं. 2014 में आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, राजस्थान के साथ कुल 20 स्टेट हैं जहां पर अभी एनसीइआरटी के ही मैथ और साइंस की किताबें चलायें जा रहे है. अभी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां पर राज्य का अपना सिलेबस चलाये जा रहे है. इसमें तमिलानाडू, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर आदि राज्य शामिल है. कोबसे की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि ये राज्य भी एनसीइआरटी के ही मैथ और साइंस की किताबें लागू करें.
कोट
चुकी इंजीनियरिंग और मेडिकल की परीक्षा में देश भर के छात्र शामिल होते है. ऐसे में पूरे देश में मैथ और साइंस का सिलेबस एक होने से किसी तरह की शिकायत नहीं रह जायेगी. इस कारण ऐसा किया जा रहा है.
विनीत जोशी, पूर्व चेयरमैन, सीबीएसइ
कोबसे की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई थी. अगर पूरे देश में मैथ और साइंस की किताब एक हो जायेगी तो बिहार के छात्रों को काफी फायदा होगा. इंजीनियरिंग और मेडिकल के अलावा दूसरे प्रतियोगी परीक्षा में भी यह मददगार होगा.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
पिछले एक साल में कई स्टेट में मैथ और साइंस के सिलेबस को सीबीएसइ के अनुसार ही एनसीइआरटी के बुक चलाने शुरू किये है. क्योंकि एनसीइआरटी के बुक ही आदर्श बुक माने जा रहे है, जो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में उपयोग किया जाता है. इस कारण नयी शिक्षा नीति में साइंस और मैथ का एक सिलेबस करने का प्लान है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया कांप्लेक्स
21 feb. 2015 on prabhat khabar, patna
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