Sunday, February 22, 2015

90 फीसदी स्कूलों में सुरक्षा गार्डो का वेरिफिकेशन नहीं

90 फीसदी स्कूलों में सुरक्षा गार्डो का वेरिफिकेशन नहीं

- बिना वेरिफिकेशन के स्कूलों में है सुरक्षा गार्ड
- सीबीएसइ के अनुसार जिस थाना का स्कूल वहां पर हो सुरक्षा गार्ड का वेरिफिकेशन
संवाददाता, पटना
क्राइस्ट चर्च का सुरक्षा गार्ड मंटू पिछले तीन सालों से स्कूल में कार्यरत है. स्कूल में बच्चों के आने-जाने की देखभाल करना मंटू के जिम्मे ही है. लेकिन मंटू के बारे में पटना पुलिस के पास कोई रिकार्ड नहीं है. कुछ ऐसा ही हाल लोयेला हाई स्कूल के सुरक्षा गार्ड की है. स्कूल के मुख्य द्वार पर बंग बहादुर नाम का सुरक्षा गार्ड पिछले 20 साल से कार्यरत है. लेकिन बंग बहादुर के बारे में संबंधित थाने के पास कोई रिकार्ड नहीं है. यह हाल कोई एक दो स्कूलों का नहीं है, बल्कि तमाम स्कूलों के पास सुरक्षा गार्ड का यहीं हाल है. कई स्कूलों ने प्राइवेट तो कई स्कूलों ने एजेंसी के माध्यम से सुरक्षा गार्ड को नियुक्त कर रखा है. किस स्कूल के पास एजेंसी के माध्यम से सुरक्षा गार्ड है या फिर प्राइवेट सुरक्षा गार्ड को स्कूल ने रखा है. इसकी कोई जानकारी संबंधित थाना के पास नहीं होता है. और ना ही अभी तक एक भी स्कूल के किसी सुरक्षा गार्ड का वेरिफिकेशन ही किया जा सका है.  संबंधित थाना को यहां तक नहीं पता कि किस स्कूल के पास कितने सुरक्षा गार्ड, कितने माली, कितने चपरासी है. लेकिन अब सीबीएसइ ने स्कूलों को यह निर्देश दिया है कि वो संबंधित थाने में इसकी जानकारी उपलब्ध करवायें.
स्कूल प्रशासन के विश्वास पर नियुक्त होते है सुरक्षा गार्ड
पटना में अधिकांश स्कूलों में सुरक्षा गार्ड विश्वास पर नियुक्त किये जाते है. किसी टीचर या फिर प्राचार्य के जान पहचान वाले किसी व्यक्ति को सुरक्षा गार्ड के रूप में रख लिया जाता है. ऐसे में स्कूल यह भी नहीं देखती है कि यह सुरक्षा गार्ड ट्रेंड है भी या नहीं. एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार वहां पर प्राइवेट सुरक्षा गार्ड को रखा गया है. प्राइवेट सुरक्षा गार्ड को स्कूल के एक टीचर ने रखवाया था. क्योंकि वह सुरक्षा गार्ड को वो टीचर कई सालों से जान रहे थे. सुरक्षा गार्ड को हथियार संबंधी कितनी जानकारी है, इससे भी स्कूल अनभिज्ञ रहता है. कई स्कूल तो ऐसे है
संबंधित थाने के पास हो रिकार्ड
सीबीएसइ के अनुसार जो भी स्कूल जिस थाना क्षेत्र में आता है. उस थाना क्षेत्र में उस स्कूल के सुरक्षा गार्ड, माली, कीपर आदि का पूरा रिकार्ड होना चाहिए. सीबीएसइ ने इसके लिए कई बार स्कूलों को नोटिस भी जारी किया है. बोर्ड के अनुसार स्कूल का मुख्य द्वार और अंदर सुरक्षा गार्ड, माली, चपरासी आदि के बारे में पूरी जानकारी संबंधित थाने के पास होना चाहिए. अगर कोई स्कूल इन लोगों में किसी तरह की परिवर्तन करता है. या फिर नये सुरक्षा गार्ड को नियुक्त करता है तो ऐसे में संबंधित थाना को तुरंत जानकारी दी जायें. बोर्ड के अनुसार जब भी स्कूल सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति करें तो वो ट्रेंड सुरक्षा गार्ड होने चाहिए. क्योंकि अगर किसी तरह की घटना घटती है तो सुरक्षा गार्ड के बारे पूरी जानकारी स्कूल के पास मौजूद हो.
नहीं मिली आज तक ट्रेनिंग
स्कूल के गेट पर सुरक्षा को लेकर सुरक्षा गार्ड को रखा तो जाता है, लेकिन इन्हें कभी किसी तरह की ट्रेनिंग नहीं दी जाती है. ऐसे में भगवान भरोसे ही स्कूल कैंपस मे सुरक्षा गार्ड रहते है. जिन स्कूलों ने प्राइवेट सुरक्षा गार्ड को रखा है उन्हें तो हथियार चलाने तक नहीं आती है. एक स्कूल के मुख्य द्वार पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड ने बताया कि वो एजेंसी से स्कूल के गेट पर नियुक्त है. लेकिन अभी तक उसे बस एक बार ट्रेनिंग दी गयी थी. इसके बाद कोई ट्रेनिंग अभी तक नहीं दिया गया है. वहीं एक सुरक्षा गार्ड ने बताया कि नियुक्ति के समय एक बार ट्रेनिंग दी गयी थी. उसके बाद पिछले चार साल से कोई ट्रेनिंग नहीं दी गयी हैं.

कोट
शहर के लगभग हर थाने क्षेत्र में कोई ना कोई स्कूल आता है. स्कूल में कार्यरत सुरक्षा गार्डो के बारे में किसी भी थाना में कोई रिकार्ड नहीं है. हर स्कूल को जल्द से जल्द अपने सुरक्षा गार्ड के बारे में जानकारी संबंधित थाना को देना चाहिए. अभी तक एक भी स्कूल ने ऐसा नहीं किया है. बच्चों की सिक्यूरिटी को लेकर हम जल्द ही स्कूलों को नोटिस देने वाले है. ... जितेंद्र राणा, एसएसपी, पटना पुलिस

सीबीएसइ की ओर से कई बार सुरक्षा गार्ड को लेकर बोर्ड को सूचना देने के लिए कहा गया है. लेकिन कोई भी स्कूल ने अभी तक ऐसा नहीं किया है. सुरक्षा गार्ड के अलावा स्कूल के माली, स्वीपर, चपरासी आदि की भी जानकारी बोर्ड के पास स्कूलों के पास उपलब्ध करवाना है. ... सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

22 dec 2015 on prabhat khabar patna 

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