Sunday, February 22, 2015

60 फीसदी राज्य के बच्चे तो क्यूं नहीं मिल रहे केंद्रीय विद्यालय को जमीन

60 फीसदी राज्य के बच्चे तो क्यूं नहीं मिल रहे केंद्रीय विद्यालय को जमीन

- स्कूल खुलने के साल भर बाद से अब तक केंद्रीय विद्यालय को मिल रहे आश्वासन
- केंद्रीय कर्मी से अधिक राज्य कर्मी और स्थानीय बच्चों को किया जा रहा शिक्षित
संवाददाता, पटना
जब केंद्रीय विद्यालय में राज्य के बच्चों की संख्या केंद्रीय कर्मी के बच्चों से अधिक है तो फिर इन केंद्रीय विद्यालय को जमीन क्यूं नहीं दी जा रही है. जिन 16 केंद्रीय विद्यालय को आश्वासन के बाद भी अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं हुआ है. उन केंद्रीय विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों की संख्या का परसेंटेज निकाला गया है. इस लिस्ट के अनुसार इन तमाम केंद्रीय विद्यालय में 60 फीसदी या इसके उपर की संख्या में स्थानीय बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है. अब विद्याथियों की यह लिस्ट संगठन की ओर से सरकार को भेजा जायेगा. इस अंतिम प्रयास के बाद केंद्रीय विद्यालय संगठन विद्यालय को हटाने की प्रक्रिया तेज कर देगा. सूचना के अधिकार के तहत पता चला है कि बिहार में चल रहे कुल केंद्रीय विद्यालय में केंद्रीय कर्मी के बच्चे से अधिक स्थानीय बच्चों की संख्या ज्यादा है. आरटीआइ एक्टिविटी अजय कुमार चौरसिया ने बताया कि जिन केंद्रीय विद्यालय को सरकार जमीन के लिए इतना इंतजार करवा रही है. उन केंद्रीय विद्यालय में स्थानीय लोगों (किसान, बिजनेस मैन आदि) के बच्चे अधिक संख्या में शिक्षा ग्रहण कर रहे है. ऐसे में इन इलाकों में केंद्रीय विद्यालय बंद होने से शिक्षा का माहौल खत्म हो जायेगा.
- 35.61 फीसदी पूरे प्रदेश में शिक्षा ग्रहण करते है केंद्रीय विद्यालय में
अगर बिहार प्रदेश के कुल 45 केंद्रीय विद्यालय की बात करें तो यहां पर 35.61 फीसदी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते है. केवीएस से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में केंद्रीय विद्यालय में 42078 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे है. इसमें 14986 विद्यार्थी पांचवीं केटगरी में आते है. वहीं 6846 विद्यार्थी थर्ड केटेगरी और 1280 विद्यार्थी फोर्थ केटेगरी के तहत नामांकन लेते है. केवीएस के अनुसार जो 16 केंद्रीय विद्यालय के पास जमीन की दिक्कतें है वहां पर स्थानीय विद्यार्थी की संख्या अधिक पढ़ते है.
- मुख्यमंत्री ने शिक्षा मंत्री तक दिया गया चिट्ठी
केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से लगातार कई सालों से जमीन देने के लिए पत्रचार सरकार से किया जाता रहा है. केवीएस क्षेत्रीय कार्यालय पटना के सहायक आयुक्त एमएल मिश्र ने बताया कि 9 मार्च 2009 को तात्कालिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा गया था. इसमें उन्हें बांका, मोतीहारी, बरौनी, सीवान, गोपालगंज आदि केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन देने के आश्वासन की याद दिलायी गयी. इसके बाद  16 जून 2009 को ही रेवेन्यू एंड लैंड रि-फार्म डिपार्टमेंट के तात्कालिक प्रधान सचिव को भी लेटर लिखा गया. रेवेन्यू एंड लैंड रि-फार्म डिपार्टमेंट के प्रधान सचिव को हाल में 7 मार्च 2014 को भी चिट्ठी भेजी गयी है. जिसमें तात्कालिक 13 केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन की बात दुहरायी गयी. इससे पहले 5 अप्रैल 2005 को केवीएस की ओर से सेंकेंडरी एंड हायर एजुकेशन के सेक्रेटरी, बिहार सरकार के पास चिट्ठी भेजी गयी थी. जिसमें 13 केंद्रीय विद्यालय के जमीन के स्थानांतरित करने के बारे में बताया गया था.

इन अधिकारी के पास जा चुका है चिट्ठी
- अमरजीत सिन्हा (तात्कालिक प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग) को 4 नवंबर 2013 को
- तात्कालिक प्रधान सचिव रेवेन्यू एंड लैंड रि-फार्म डिपार्टमेंट को 16 जून 2009 और 7 मार्च 2014 को
- रंगलाल जामुदा, तात्कालिक आयुक्त को 13 अक्तूबर 2004
- सचिव, सेंकेंडरी एंड हायर एजुकेशन के सेक्रेटरी, बिहार सरकार को 5 अप्रैल 2005
- मुख्य सचिव, बिहार सरकार को 18 फरवरी 2009 को
- चीफ सेक्रेटरी ऑफ बिहार को 18 मई 2009 को
- नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री को 9 मार्च 2009 को

चार केटेगरी में चलता है केंद्रीय विद्यालय
फस्र्ट केटेगेरी  - केंद्रीय सरकार के स्थानांतरणीय और अस्थानांतरणीय कर्मचारी के बच्चे. इसमें पूर्व सैनिकों के बच्चे भी शामिल है
सेंकेण्ड केटेगरी -  भारत सरकार के स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, उच्च शिक्षण संस्थानों के स्थानांतरणीय और अस्थानांतरणीय कर्मचारियों के बच्चे
थर्ड केटेगरी   -  राज्य सरकार के  स्थानांतरणीय और अस्थानांतरणीय कर्मचारियों के बच्चे
फोर्थ केटेगरी   - राज्य सरकार के स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, उच्च शिक्षण संस्थानों के स्थानांतरणीय और अस्थानांतरणीय कर्मचारियों के बच्चे
फाइव केटेगरी   -  अन्य श्रेणी के बच्चे जो स्थानीय क्षेत्र में किसान, बिजनेस आदि से जुड़े हो.

प्रदेश भर के केंद्रीय विद्यालय में राज्य के कुल बच्चे
केंद्रीय विद्यालय का नाम            -    कुल फीसदी और कुल विद्यार्थी में राज्य के बच्चे
1. औरंगाबाद केवी                 -       67.96 फीसदी (362 में 246)
2. बांका केवी                         -      59.42 फीसदी  (313 में 186)
3. बेला केवी                           -      79.31 फीसदी  (232 में 184)
4. बक्सर केवी                        -     68.57 फीसदी  (350 में 251)
5. छपरा केवी                        -      40  फीसदी     (200 में 80)
6. दरभंगा नंबर टू                   -     60.21 फीसदी   (289 में 174)
7 गोपालगंज केवी                  -     54.41 फीसदी   (408 में 202)
8. हाजीपुर केवी                   -   29.63 फीसदी  (162 में 48)
9. हरनौत केवी                    -   55.05  फीसदी  (327 में 180)
10. जहानाबाद केवी          -    40.34 फीसदी   (414 में 167)
11. महाराजगंज केवी        -   79.08 फीसदी   (196 में 155)
12. मोतीहारी केवी            -  47.87 फीसदी   (375 में 231)
13. पूर्णिया केवी                -   47.03 फीसदी   (404 में 190)
14. सीवान केवी               -   36.93 फीसदी  (566 में 206)
15. पूसा केवी                   -   44.83 फीसदी  (513 में 230)


कोट
केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से जो भी स्कूल खोले जाते है. उसके लिए हम पहले राज्य सरकार से आश्वासन लेते है. राज्य सरकार एक साल के अंदर जमीन उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिये थे. लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी हमें 16 केंद्रीय विद्यालय के जमीन को लेकर इंतजार की करना पड़ रहा है. सरकार अभी तक बस आश्वासन दे रही है. शिक्षा विभाग से लेकर सचिवालय और मुख्यमंत्री तक हमने लिखित आवेदन दिया है. लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई है.
एमएस चौहान, डिप्टी कमीशनर, केंद्रीय विद्यालय संगठन, पटना क्षेत्रीय कार्यालय

6 dec. 2015 on prabhat khabar patna 

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