Tuesday, February 24, 2015

गोवा के लिए पटना से सीधी फ्लाइट 17 मार्च से

गोवा के लिए पटना से सीधी फ्लाइट 17 मार्च से

- पटना एयरपोर्ट से शुरू हो रही जेट और इंडियो की दो नयी फ्लाइट
- इंडियो की पटना मुबंई 6ई167 फ्लाइट  11 मार्च से होगी रेगुलर
संवाददाता, पटना
अब पटना से गोवा जाने के लिए पटना के लोगों को ट्रेन की लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी. अब चंद घंटों में ही गोवा की दूरी तय कर पाने का मौका पटना के लोगों को भी मिलेगा. यह संभव हो रहा है 17 मार्च से. जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल एयरपोर्ट पटना से गोवा की सीधी उड़ान शुरू होने जा रही है. 17 मार्च से शुरू होने जा रही इंडिगो (फ्लाइट  नंबर 6इ638 और फ्लाइट  नंबर 6इ633) की यह फ्लाइट कोलकाता होते हुए गोवा पहुंचेगी. यह फ्लाइट हर दिन पटना से गोवा और गोवा से पटना आयेगी. इससे पटना के पैसेंजर को गोवा जाने में समय की बचत के साथ पैसे भी कम खर्च होंगे. पटना से गोवा के लिए पहली बार कोई एयरवेज सीधी उड़ान शुरू करने जा रहा है. वहीं पटना एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए भी एक नयी फ्लाइट एक अप्रैल से शुरू की जा रही है. जेट ऐयरवेज की फ्लाइट नंबर 9डब्ल्यू 730 और 9डब्ल्यू731 में पैसेंजर की बैठने के लिए कुल 148 सीटें हैं. एक तरफ जहां पटना से दो एयरवेज की दो नयी फ्लाइट शुरू हो रही है. वहीं इंडिगो की एक फ्लाइट को नियमित किया गया है. पटना से मुंबई जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट नंबर 6इ167 का विस्तार किया गया हैं. अब यह फ्लाइट पटना से मुंबई हर दिन दोपहर 3 बज कर 15 मिनट पर चलेगी और रांची होते हुए 6 बज कर 45 मिनट पर मुंबई पहुंचेगी. ऐसे में वैसे पैसेंजर को सुविधा मिल पायेगी जो रेगूलर मुंबई तक का सफर फ्लाइट से करते हैं.
- चल रही बुकिंग
जेट और इंडिगो की दो फ्लाइट के शुरू होने के बाद पटना एयरपोर्ट से अब कुल 14 फ्लाइट नियमित रूप से चलेगी. नयी दो फ्लाइट में गोवा और दिल्ली की पटना वालों ने टिकट की बुकिंग भी करवानी शुरू कर दी है. गर्मी की छुट्टी को लेकर अभी से लोगों ने इसकी इंक्वायरी के साथ टिकट बुकिंग भी शुरू कर दिया है. ट्रैवेल एजेंट अखिलेश ने बताया कि 17 मार्च के पटना टू गोवा के लिए कई लोगों ने बुकिंग भी करवा ली है. खासकर बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद स्टूूडेंट्स के कई ग्रुप ने टिकट की बुकिंग करवायी है. उन्होंने बताया कि पटना से गोवा के लिए इंडिगाो की फ्लाइट शुरू होने से घुमने वालों के लिए काफी अच्छा रहेगा. गर्मी और जाड़े की छुट्टी को लेकर इसकी शुरुआत की गयी है.

दो नयी फ्लाइट पटना से
इंडिगो (नयी फ्लाइट)
सीटों की संख्या  - 180
- पटना टू गोवा (वाया कोलकाता) - 17 मार्च से शुरू होगी
- पटना से गोवा  - 10.25 में खुलेगी और 2.50 मिनट पर पहुंचेगी (फ्लाइट नंबर 6इ638)
- गोवा से पटना  - 2.55 में खुलेगी और 7.30 बजे शाम में पटना पहुंचेगी (फ्लाइट नंबर 6इ633)
कुल फेयर  - 5 हजार 500 रुपया

पटना से दिल्ली (नयी फ्लाइट)
जेट एयरवेज
सीटों की संख्या  - 148
- पटना टू दिल्ली -  1 अप्रैल से शुरू होगी
- पटना से दिल्ली  - पटना से 4.30 बजे खुलेगी और 6.20 बजे दिल्ली पहुंचेगी (फ्लाइट नंबर 9डब्ल्यू730)
- दिल्ली से पटना  - 2.50 बजे खुलेगी और 4.05 बजे पटना पहुंचेगी (फ्लाइट नंबर 9डब्ल्यू731)

ये प्लाइट होगी नियमित (रेगूलर)
इंडिगो  - पटना से मुबंई वाया रांची
सीटों की संख्या  -  180
- पटना से मुबई  - पहले ये सप्ताह में चार दिन जाती थी. अब यह हर दिन जायेगी
नियमित होने की तिथि  - 11 मार्च से
पटना से मुबंई   -  3.15 मिनट पर खुलेगी और 6.45 मिनट पर मुबंइ पहुंचेगी (फ्लाइट नंबर 6इ167)
मुबंई से पटना  -  12.30 मिनट पर खुलेगी और 2.50 मिनट पर पटना पहुंचेगी (फ्लाइट नंबर 6इ167)

कोट
पटना से मुंबई की जो फ्लाइट हफ्ते में चार दिन जा रही थी. उसे नियमित कर दिया गया है. अब वो हर दिन जायेगी. वहीं पटना से गोवा के लिए नयी फ्लाइट शुरू किया जा रहा है. पटना से गोवा के लिए हर दिन सुबह 10.30 बजे खुलेगी और 2.50 मिनट पर गोवा पहुंचेगी. गोवा से भी हर दिन पटना के लिए इंडिगो की फ्लाइट शुरू की जा रही है. यह 17 मार्च से शुरू होगा.
रूपेश सिंह, मैनेजर, इंडिगो एयरवेज, पटना

25 feb. 2015 on pabhat khabar, patna 

केंद्रीय विद्यालय में नये सेशन में नये सिलेबस से होगी पढ़ाई

केंद्रीय विद्यालय में नये सेशन में नये सिलेबस से होगी पढ़ाई

- क्लास वन से 12वीं तक के सिलेबस में किया गया संशोधन
- प्लस टू में संस्कृत को किया गया आप्सनल
संवाददाता, पटना
नये सेशन की शुरुआत होने में अभी एक महीने से अधिक का समय है. लेकिन इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी गयी है. केंद्रीय विद्यालय में नये सेशन से हर क्लास के सिलेबस में संशोधन किया गया है. कई चीजों को कोर्स से हटा दिया गया है तो कई चीजों को नये कोर्स में शामिल किया गया है. कोर्स में संशोधन का फैसला केंद्रीय विद्यालय संगठन की एकेडेमिक एडवायजरी कमेटी की बैठक में ली गयी है. 23 फरवरी 2015 को आयोजित इस बैठक में एकेडेमिक लेवल पर कई चेंज किये गये है. वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई को स्कूलिस्टीक के रूप में क्लास वन से ही शुरू की जा रही है. वहीं 9वीं ओर 10वीं लेवल पर चार वोकेशनल कोर्स की शुरुआत 2015 से शुरू किया जा रहा है.
- क्लास वन से ही होगी अब पर्यावरण की पढ़ाई
केंद्रीय विद्यालय के स्कूलों में तीसरे क्लास से इंवायरमेंटल स्टडीज की पढ़ाई शुरू होती थी. लेकिन अब नये सिलेबस में संशोधन कर क्लास वन से ही इंवायरमेंटल स्टडीज को जोड़ दिया गया है. केवीएस के अनुसार पहले क्लास वन और क्लास टू के सिलेबस एक जैसा होता था. वहीं तीसरा से पांचवी तक के सिलेबस एक जैसा रहता था. लेकिन अब इसमें परिवर्तन कर दिया गया है. अब क्लास वन से पांचवी तक एक सिलेबस को मान्यता दी गयी है. 2
- साइंस स्ट्रीम वाले 12वीं के स्टूडेंट्स भी पढ़ सकेंगे इकोनॉमिक्स
केद्रीय विद्यालय के साइंस 12वीं के स्टूडेंट्स अब कॉमर्स विषय पढ़ सकते हैं. उसी तरह आर्ट्स वाले साइंस और कॉमर्स विषय के स्टूडेंट्स अब आर्ट्स और साइंस विषय को अपने पांच विषयों में रख पायेंगे. केवीएस के अनुसार साइंस स्ट्रीम में इस बार से इकोनॉमिक्स विषय को जोड़ा गया है. उसी तरह से आर्ट्स में मैथेमेटिक्स और कॉमर्स में जोगरफी और मैथेमेटिक्स को जोड़ा गया हैं.
- प्लस टू में अब पांच विषयों को अपने मरजी से चुन पायेंगे स्टूडेंट्स
केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से अब केवी के स्टूडेंट्स प्लस टू में पांच विषयों का चुनाव अपनी मरजी से कर पायेंगे. उदाहरण के लिए साइंस का स्टूडेंट्स फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ के साथ हिंदी और इंगलिश पढ़ सकता है. अगर स्टूडेंट्स एक ही भाषा पढ़ना चाहे तो वो फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ के साथ एक भाषा (हिंदी या इंगलिश या संस्कृत) पढ़ सकता है. लेकिन फिर उसे इलेक्टिव सब्जेक्ट के रूप में चार विषय का चुनाव करना होगा. इसी तरह आर्ट्स और कॉमर्स वाले स्टूडेंट्स को भी छूट दी गयी है.

क्लास वन से पांचवी तक का संशोधित प्रावधान
- हिंदी, इंगलिश, मैथेमेटिक्स और इंवायरमेंटल स्टडीज
अदर एक्टिविटी के लिए
- आर्ट एजुकेशन (म्यूजिक, ड्राइंग, डांस और ड्रामा), वर्क एजुकेशन, हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन, आइसीटी स्कील्स

क्लास छठी से आठवीं तक का संशोधित प्रावधान
- हिंदी, इंगलिश, संस्कृत, मैथेमेटिक्स, साइंस और सोशल साइंस
अदर एक्टिविटी के लिए
- वर्क एजुकेशन, आर्ट एजुकेशन, हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन, योगा

क्लास 9वीं से 10वीं तक का संशोधित प्रावधान
1.  संस्कृत, हिंदी और इंगलिश में से किन्हीं दो भाषा की पढ़ाई करनी होगी
2. मैथेमेटिक्स, 3. साइंस, 4 सोशल साइंस
वोकेशनल कोर्स
1. वर्क एजुकेशन, 2. आर्ट एजुकेशन, 3. हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन, 4. योगा

क्लास 11वीं और 12वीं तक के कोर्स का संशोधित प्रावधान
साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए
कोर सब्जेक्ट -  इंगलिश, हिंदी और संस्कृत में से एक या दो विषय चुन सकते हैं
इलेक्टिव सब्जेक्ट  - फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, मैथेमेटिक्स, कंप्यूटर साइंस, मल्टीमीडिया एंड वेब टेक्नोलॉजी, इकोनॉमिक्स, बायोटेक्नोलॉजी

कॉमर्स स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए
कोर सब्जेक्ट  -   इंगलिश, हिंदी और संस्कृत में से एक या दो विषय चुन सकते हैं
इलेक्टिव सब्जेक्ट  - एकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडीज, इकोनॉमिक्स, मैथेमेटिक्स, जोगरफी, कंप्यूटर साइंस, मल्टी मीडिया एंड वेब टेक्नोलॉजी

आर्ट्स स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए
कोर सब्जेक्ट  - इंगलिश, हिंदी और संस्कृत में से एक या दो विषय चुन सकते हैं
इलेक्टिव सब्जेक्ट  - हिस्ट्री, जोगरफी, इकोनॉमिक्स, मैथेमेटिक्स, पोलिटिकल साइंस, सोशियोलॉजी

नोट
- कोर विषय के रूप में प्लस टू में तीनों ही स्ट्रीम में हिंदी, इंगलिश और संस्कृत में से कोई एक या दो भाषा को स्टूडेंट्स कोर्स में शामिल कर पायेंगे
- इलेक्टिव विषय के रूप में प्लस टू में तीनों ही स्ट्रीम में अब तीन या चार विषय को कोर्स के रूप में रख सकते है.

25 feb 2015 on prabhat khabhat patna 

goa se patna airpiain





22 साल से सात वोकेशनल कोर्स कर रहा मान्यता का इंतजार

22 साल से सात वोकेशनल कोर्स कर रहा मान्यता का इंतजार

- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में सात वोकेशनल कोर्स चलते है बिना मान्यता के
- मान्यता नहीं होने से पड़ रहा नामांकन पर असर
संवाददाता, पटना
वोकेशनल कोर्स करने से सेल्फ इंप्लाइमेंट का रास्ता साफ होता है. प्लस टू लेवल पर जो भी रिक्तियां केंद्र या राज्य सरकार की ओर से संबंधित पद के लिए निकलता है तो आसानी से उसमें नौकरी भी लग जाती है. लेकिन जब सर्टिफिकेट को संबंधित संस्थान मान्यता ही नहीं देगा तो ऐसे कोर्स करने का फायदा ही क्या होगा. कुछ ऐसा ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के छात्रों के साथ हो रहा है. छात्र वोकेशनल कोर्स तो करते है, लेकिन नौकरी के समय उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है. समिति की ओर से वर्तमान में 25 वोकेशनल कोर्स चलाये जा रहे है . इसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल से संबंधित सात वोकेशनल कोर्स को संबंधित संस्थान से मान्यता नहीं मिला हुआ है. इस कारण इन कोर्स को छात्र करते भी है तो उन्हें नौकरी के साथ सेल्फ इंप्लाइमेंट में भी दिक्कतें हो रही है. इसको लेकर आये दिन इंटर काउंसिल में भी छात्र पहुंच रहे है. लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ है.
- 25 में सात वोकेशनल कोर्स बिना मान्यता के
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के तहत 1988 से वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू की गयी. शुरुआत में 16 कोर्स वोकेशनल के तहत चलाये जाते थे. लेकिन बाद में 1991 के बाद कुछ और कोर्स को शामिल किया गया, जिसके बाद समिति में 25 वोकेशनल कोर्स हो गये. बिहार और झारखंड जब एक साथ था तो 148 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई होती थी. झारखंड के अलग होने के बाद वर्तमान में बिहार 91 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स चलता है.  22 साल से चल रहे सात वोकेशनल कोर्स को अभी तक मान्यता नहीं दिया गया है.
- एनसीवीटी और नर्सिग काउंसिल से लेनी होगी मान्यता
बिहार बोर्ड के तहत जो इंजीनियरिंग के कोर्स होते है, उन्हें एनसीवीटी (नेशनल काउंसिल ऑफ कंवोकेशन ट्रेनिंग, नयी दिल्ली) से मान्यता लेनी होती है. एनसीवीटी के मापदंड के अनुसार वोकेशनल की पढ़ाई नहीं होने के कारण एनसीवीटी मान्यता नहीं देता है. वहीं हाल मेडिकल संबंधित वोकेशनल कोर्स का है. इन कोर्स को नर्सिग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता लेनी होती है. तभी बिहार स्तर पर किसी तरह की रिक्तियां निकलने पर छात्रों को नियुक्त किया जायेगा. लेकिन मेडिकल कोर्स भी नर्सिग काउंसिल के मापदंड के अनुसार नहीं चलने के कारण मान्यता से दूर है.
- बस मिलता है ग्रेजुएशन में नामांकन
बिहार बोर्ड से वोकेशनल कोर्स करने के बाद बस छात्रों को ग्रेजुएशन में नामांकन मिलता है. छात्र निहारिका ने बताया कि उसने नर्सिग का कोर्स दो साल पहले किया है. लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिली है. प्राइवेट में कहीं नौकरी मांगने जाती है तो सर्टिफिकेट पर नर्सिंग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता नहीं होने से लौटा दिया जाता है. कुछ ऐसा ही हाल ऑटो मोबाइल का कोर्स कर चुका प्रदीप सिंह का है. प्रदीप सिंह के अनुसार कोई भी कंपनी सर्टिफिकेट में एनसीवीटी की मान्यता को देखता है.

इन वोकेशनल कोर्स को नहीं है मान्यता
इंजीनियरिंग संबंधित
- इलेक्ट्रॉनिक
- इलेक्ट्रिकल
- ऑटो मोबाइल
- मेकेनिक सर्विस
मेडिकल संबंधित
- नर्सिग
- हेल्थ वर्कर
- लैब टेक्निशियन

कोर्ट
हमारे पास छात्र अपनी दिक्कतें ले कर आते है. वो दो साल का वोकेशनल कोर्स तो कर लेते है, लेकिन जब नौकरी के लिए जाते है तो उन्हें नहीं मिलती है. क्योंकि बिहार बोर्ड के सर्टिफिकेट पर संबंधित संस्थान की मान्यता नहीं मिली रहती है. इसका नतीजा अब ऐसा हो गया है कि इन कोर्स में छात्र अब नामांकन ही नहीं लेते है. काफी संख्या में छात्र है जो कोर्स करने के बाद ऐसे ही बैठे है.
एसएन सिंह, इंचाजर्, वोकेशनल कोर्स, शास्त्रीनगर गल्र्स हाई स्कूल

छात्रों के साथ अगर ऐसा होता है तो उन्हें हमसे मिलना चाहिए. अगर ऐसी बात है तो हम एनसीवीटी से बात करेंगे. वोकेशनल कोर्स को इसी उदेदश्य से चलाया जाता है कि छात्रों को तुरंत नौकरी मिल जायें. व्यवसाय कर सकें. ऐसे में अगर उन्हें परेशानी है तो उन्हें मिलना चाहिए.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

27 nov 2015 on prabhat khabar patna 

परीक्षा के पहले देखें प्रश्न पत्र

परीक्षा के पहले देखें प्रश्न पत्र

- सीबीएसइ ने ओपेन बुक टेक्स्ट असेसमेंट के प्रश्न पत्र को डाला वेबसाइट पर
- 11वीं और पहली बार 9वीं फाइनल परीक्षा में आयेंगे ओटबा से प्रश्न
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) फाइनल परीक्षा मार्च में शुरू होगा. इस बार परीक्षा को लेकर सीबीएसइ ने कई फैसले लिये है. पहला फैसला लिया गया है कि इस बार 12वीं बोर्ड में ओटवा (ओपेन बुक टेक्स्ट असेसमेंट) से प्रश्न नहीं पूछे जायेंगे. वहीं पहली बार 9वीं की फाइनल परीक्षा (एसए-2) में ओटवा से प्रश्न आयेंगे.  परीक्षा की तैयारी के लिए बोर्ड ने स्टूडेंट्स को प्रश्न पत्र दे दिया है. इसी प्रश्न पत्र को पढ़ कर स्टूडेंट्स बोर्ड परीक्षा देंगे. ओपेन बुक टेक्स्ट असेसमेंट (ओटबा) में अंतर्गत आने वालें प्रश्नों की सूची सीबीएसइ ने वेबसाइट पर डाल दिया है. इसमें चैप्टर के साथ टॉपिक्स को भी डाला गया है कि किस टॉपिक्स से प्रश्न आयेंगे. इसके अलावा बोर्ड ने तमाम विषयों के लिए अलग-अलग सिलेबस भी बना कर दे दिया है. इन सिलेबस को पढ़कर स्टूडेंट्स फाइनल परीक्षा की तैयारी आसानी से कर सकते है.
- सैंपल पेपर और मार्किम स्कीम की भी दी गयी जानकारी
प्रश्न पत्र के साथ सीबीएसइ ने मार्किम स्कीम की भी जानकारी दी है. कौन से प्रश्न कितने अंक का आयेगा, इसकी भी जानकारी प्रश्नों के साथ दे दिया गया है. क्लास 9वीं के लिए बोर्ड ने हर चैप्टर से दो प्रश्नों की सूची बनायी है. हर प्रश्न 2 अंक से लेकर 5 अंक तक निर्धारित किया गया है. वहीं 11वीं के फाइनल में तमाम प्रश्न 5-5 अंक के होंगे. सीबीएसइ ने उन टॉपिक्स को इस बार परीक्षा के लिए चुना है जो स्टूडेंट्स के करेंट अफेयर से संबंधित हो.
- चैप्टर के साथ टॉपिक को किया गया फिक्स
सीबीएसइ ने 9वीं और 10वीं के एसए -2 (समेटिव असेसमेंट) के लिए पांचों विषयों के लिए चैप्टर को अंकित कर दिया है. इन्हीं चैप्टर से बोर्ड परीक्षा और 9वीं के फाइनल परीक्षा में प्रश्न आयेंगे. किस चैप्टर से किस टॉपिक के प्रश्न आयेंगे, इसके लिए भी बोर्ड ने लिस्ट जारी कर दिया है. स्टूडेंट्स अगर इन टॉपिक्स को पढ़ कर जायेंगे तो उन्हें प्रश्नों के उत्तर देने में आसानी होगी. क्योंकि इसके बाहर के किसी चैप्टर से प्रश्न नहीं आयेगा.
- टीचर्स देंगे जानकारी
ओटबा के सिलेबस की जानकारी टीचर्स को भी देना है. बोर्ड के वेबसाइट से टीचर्स उस सिलेबस को निकाल कर स्टूडेंट्स को इसकी जानकारी देंगे. जिन चैप्टर से प्रश्न आयेंगे उसके बारे में स्टूडेंट्स की सोच क्या है. किस सिच्युएशन में स्टूडेंट्स उसका उपयोग करेंगे. स्टूडेंट्स को हर टॉपिक पर समीक्षा करना होगा.

इन टॉपिक्स से आयेंगे क्लास 9वीं और 10वीं में ओटबा के प्रश्न
1. इंगलिश
चैप्टर   -  इंवायरमेंट और ट्यूरिज्म
टॉपिक्स  -  इंडियाज टाइस्ट विद मार्स और दी क्लिनिंग अप कैंपेन स्वीप्स अकॉस दी कंट्री
2. हिंदी अ एवं ब
चैप्टर   -  एजुकेशन और हेल्थ
टॉपिक्स  -   स्वास्थ्य और मंगल पर भारत का मंगलागमन
3. सोशल साइंस
चैप्टर  -  चैप्टर-3 का (गरीबी एक चैलेंज है)
टॉपिक्स  -  ए स्टोरी ऑफ टू बदर्स और लिविंग ऑन द एज
4.  साइंस
चैप्टर  - यूनिट फोर ( हमारा पर्यावरण)
टॉपिक्स  - मंगल ग्रह के वातावरण को समझना
5. मैथेमेटिक्स
चैप्टर  -  यूनिट-फोर (स्टैटिस्टिक्स)
टॉपिक्स  -  अतिथि देवो भव, इंपावर टू लर्न

इन टॉपिक्स से आयेंगे क्लास 11वीं और 12वीं में ओटबा के प्रश्न
1. इकोनॉमिक्स
चैप्टर  -  यूनिट-5 करेंट चैलेंजेज
टॉपिक्स - ऑयल पॉलिसी प्राइस इन इंडिया, पंजाब के किसानों की दयनीय स्थिति पर समीक्षा
2. जोगरफी
चैप्टर  -  यूनिट-4 क्लाइमेट
टॉपिक्स  - अंर्टाटिका से अच्छी खबर =  ओजोन लेयर का छिद्र कम हो रहा है, साइक्लोन
3. बॉयोलॉजी
चैप्टर  - यूनिट-1  जीवाणुओं की जीवन की यात्र
टॉपिक्स  -  जीवन की साक्ष्य की मात्र, पर्यावरण की सफाई


25 nov 2015 on prabhat khabar patna 

स्कूल टूर के पहले लेनी होगी बोर्ड से इजाजत

स्कूल टूर के पहले लेनी होगी बोर्ड से इजाजत

- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने भेजा स्कूलों को नोटिस
संवाददाता, पटना
विंटर वैकेंशन दिसंबर के थर्ड वीक से शुरू होगा. अभी तक स्कूल अपनी मरजी से स्कूल टूर की योजना बना रहे थे.  लेकिन अब इसके लिए संबंधित बोर्ड से उन्हें आदेश लेनी होगी. इसके लिए स्कूल को टूर की योजना बनाने के पहले ही बोर्ड को सूचित करना होगा. बोर्ड के आदेश के बाद ही कोई स्कूल अब विंटर टूर के साथ समर टूर की प्लानिंग बनायेगा. इस संबंधी नोटिस तमाम सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों को भेज दिया गया है. हर स्कूल को इसका पालन करना है.
- बोर्ड के आदेश के बाद स्कूल देगा ट्रेनिंग
टूर का आदेश मिलने के बाद स्कूल को अभिभावक का भी आदेश लेना होगा. अभिभावक के मरजी के बाद स्कूल द्वारा विंटर टूर पर जाने से पहले उस जगह की पूरी जानकारी स्टूडेंट्स के साथ अभिभावक को देना होगा. अभिभावक की पूरी जानकारी स्कूल की ओर से दी जायेगी कि उनके बच्चे कहां जा रहे है. ठहरने के स्थान, उस जगह का पूरा लोकेशन, संबंधित शहर के बारे में जानकारी दी जायेगी कि  बच्चों को कहां-कहां घुमाया जायेगा. बोर्ड के आदेश के बाद बोर्ड द्वारा उस शहर के प्रशासन को स्कूल टूर के बारे में पूरी जानकारी दी जायेगी. इसके अलावा बोर्ड स्कूल को उस शहर के भागोलिक स्थिति से भी अवगत करवायेगा. इससे सुरक्षा के मामले में किसी तरह की चूक नहीं हो सके.
- जरूरत हो तभी करें एजुकेशन टूर
सीबीएसइ ने स्कूलों को भेजे आदेश में कहा है कि अगर उस शहर में रहते हुए एजुकेशन टूर की कमी को पूरा किया जा सकता है तो स्कूल को स्टूडेंट्स को टूर पर ले जाने से बचना चाहिए. जब जरूरत हो तभी एजुकेशन टूर करवाना चाहिए. इसके अलावा उन स्टूडेंट को एजुकेशन टूर पर नही ले जाया जायेगा जो बीमार हो. डायबिटीज, ब्लड सूअर, दमा आदि से ग्रस्त स्टूडेंट के एजुकेशनल टूर के साथ विंटर और समर टूर पर पूरी तरह से रोक लगा दिया जायें. बोर्ड के अनुसार टूर के दौरान स्टूडेंट्स के ट्रेनिंग के अनुसार उनसे एक्टिविटी करवाया जायें. जैसे अगर किसी स्टूडेंट को स्विमिंग नहीं आती हो तो इन चीजों से स्टूडेंट को दूर रखना चाहिए.

इन चीजों को स्कूलों को रखना होगा ख्याल
- टूर के लिए बोर्ड से लेनी होगी इजाजत
- प्रिंसिपल यह तय करेंगे कि जिस कोर्स को बच्चे कर रहे है उसी से संबंधित प्रोजेक्ट के लिए टूर पर जायें
- टूर पर जाने से पहले स्टूडेंट, अभिभावक और टीचर्स के लिए  एक ओरिएंटेशन सेशन चलाया जायेगा.
- टूर पर जाने वाले जगह शहर के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए
- स्टूडेंट्स की सुरक्षा पर स्कूल का पूरा ध्यान होना चाहिए
- टूर पर जाने वले स्टूडेंट्स के साथ सिक्यूरिटी गार्ड होना चाहिए
- टूर पर जाने से पहले स्टूडेंट्स से लिखित आश्वासन लिया जाये कि हर नियम का पालन वो करेंगे
- 10 से ज्यादा मेंबर होने पर वहां के लोकल टूर ऑपरेटर का साथ जाना जरूरी है.
- समुद्री तट आदि पर टूर के लिए जाने पर वहां के डीएम को जानकारी देना होगा

25 nev 2015 on prabhat khabar patna 

मैट्रिक के बाद नाम परिवर्तन करना पड़ेगा भारी

मैट्रिक के बाद नाम परिवर्तन करना पड़ेगा भारी

- कई की चली गयी नौकरी
- बिहार बोर्ड के पास आयें कई केस, नहीं होता कोई परिवर्तन
संवाददाता, पटना
मैट्रिक पास करने के बाद अपना नाम परिवर्तन ना करवायें, क्योंकि अगर कोई छात्र मैट्रिक पास करने के बाद अपना नाम परिवर्तन करवाता है तो उसे महंगा पड़ सकता है. एक बार मैट्रिक में जिस नाम का रजिस्ट्रेशन हो जाता है, उसके बाद किसी भी सूरत में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है. बिहार बोर्ड के पास आये दिन ऐसे केस आते है. जिसमें छात्र अपने मैट्रिक के नाम में परिवर्तन चाहते है. लेकिन बोर्ड से उन्हें वापस जाना होता है. बोर्ड के अनुसार एक बार मैट्रिक के सर्टिफिकेट पर जो नाम और जन्म तिथि आ जाता है, उसे किसी भी तरह से परिवर्तन नहीं किया जा सकता है.
- लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है
अगर कोई छात्र मैट्रिक के नाम में परिवर्तन करना चाहता है तो इसे बोर्ड और छात्र को लंबी प्रक्रिया करना पड़ता है. इसकी शुरुआत स्कूल लेवल पर होती है. छात्र के आवेदन देने के बाद उस स्कूल से उस साल का रजिस्टर मंगवाया जाता है जिसमें उस छात्र का नाम स्कूल के दिनों में है. उस रजिस्टर के साथ स्कूल के दिनों के और भी कई चीजों को छात्र के नाम के साथ मिलान किया जाता है. सूत्रों के मुताबिक किसी भी स्कूल के पास इतने सालों का रजिस्टर नहीं होता है. इस कारण यह प्रैक्टिकली संभव नहीं हो पाता है. स्कूल के बेस पर ही छात्र के नाम में परिवर्तन हो सकता है. इसमें मात्र प्राचार्य के कहने मात्र से काम नहीं चलेगा.

- राहुल शर्मा को नहीं मिली नौकरी (केस वन)
राहुल शर्मा ने मैट्रिक 1998 में पास किया. मैट्रिक में पिता के नाम के स्पेलिंग (मनीष शर्मा की जगह मनीषी शर्मा) में चेंज हो गया. मैट्रिक में इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और राहुल शर्मा मैट्रिक की परीक्षा पास कर गये. इंटर में राहुल शर्मा ने नये रजिस्ट्रेशन के समय पिता के सही नाम लिखवाया. पिता के इसी नाम से उन्होंने इंटर के बाद तमाम उच्च शिक्षा भी ली. जब नौकरी के लिए अप्लाई करने में मैट्रिक के साथ इंटर का सर्टिफिकेट मांगा गया और राहुल शर्मा ने जमा किया. सारी क्वाफिकेशन होने के बावजूद राहुल शर्मा के आवेदन के इस बेस का रिजेक्ट कर दिया गया कि उनके दोनों सर्टिफिकेट पर पिता के दो नाम है. फिर राहुल ने बिहार बोर्ड के पास आवेदन दिया जिसमें उन्होंने पिता कि वास्तविक नाम डालने को कहा. लेकिन बिहार बोर्ड ने यह कह कर राहुल शर्मा को वापस कर दिया कि इंटर के बेस पर मैट्रिक सर्टिफिकेट में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है.

- सात महीने भटकने के बाद भी नहीं मिला इंटर का सर्टिफिकेट (केस टू)
अमिताभ चंद्रा 1986 में मैट्रिक पास किये. फिर इन्होंने अपने नाम में परिवर्तन कर अमिताभ चंद्रा की जगह अमिताभ दीक्षित कर दिया. अमिताभ दीक्षित के नाम से ही तमाम उच्च शिक्षा ग्रहण किया. अब एक जगह आवेदन करने के लिए अमिताभ दीक्षित को इंटर का सर्टिफिकेट चाहिए. इसके लिए उन्होंने पहले इंटर काउंसिल में आवेदन दिया. काउंसिल ने पिता का नाम जानने के लिए मैट्रिक का सर्टिफिकेट मांगा. इनके भी आवेदन को रिजेक्ट कर दिया गया. बोर्ड के अनुसार अगर अमिताभ दीक्षित को इंटर का सर्टिफिकेट दिया जायेगा तो बस अमिताभ चंद्रा के नाम से. क्योकि स्कूल को आधार मान कर मैट्रिक में अमिताभ चंद्रा लिखा हुआ है. सात महीने बोर्ड का चक्कर लगाने के बाद भी अमिताभ दीक्षित को न्याय नहीं मिला.

- साल में 15 से 20 केस आ जाते है
बिहार बोर्ड के पास आयें दिन ऐसे केस आते है. इसमें मैट्रिक के बाद नाम परिवर्तन के कारण फंसे मामले को बिहार बोर्ड सुलझा नहीं पाती है. सूत्रों के मुताबिक साल में 15 से 20 ऐसे केस आ जाते है. लेकिन सभी को वापस जाना पड़ता है. पहले बिहार बोर्ड और इंटर काउंसिल अलग-अलग था. ऐसे में इंटर के सर्टिफिकेट बन जाते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होता है. कई बार बोर्ड के पास छात्र के सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के लिए भी आवेदन आते है. ऐसे में बोर्ड मैट्रिक का नाम के साथ तमाम जानकारी उन्हें उपलब्ध करवाता है.

- 10वीं के रजिस्ट्रेशन से ही होता था प्लस टू की परीक्षा
नाम में परिवर्तन आदि मामले में छात्र नहीं फंसे, इसके लिए बोर्ड ने एक व्यवस्था की. मैट्रिक और इंटर के एक साथ बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में हो जाने के बाद 10वीं के रजिस्ट्रेशन पर ही 12वीं में भी छात्र परीक्षा फार्म भर सकते थे. इससे नाम परिवर्तन की संभावना नहीं होती थी. अगर किसी छात्र ने नाम में परिवर्तन किया भी तो उसे तुरंत सही कर दिया जाता था. क्योंकि एक ही जगह पर परिवर्तन करने की जरूरत होती थी. अब फिर दुबारा 10वीं और 12वीं के लिए अलग से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया होती है.

कोट
बोर्ड के पास ऐसे केस आते है. लेकिन इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है. क्योंकि स्कूल में छात्र के नाम को आधार मान कर मैट्रिक की सारी प्रक्रिया होती है. उसके बाद सारा बेसिक मैट्रिक हो जाता है. इस कारण जो परिवर्तन करें, मैट्रिक में कर ले. इसके बाद नाम और जन्म तिथि में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है.
राजमणि प्रसाद, पूर्व अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

इस तरह के कई केस आयें है. लेकिन इसमें कोई परिवर्तन नहीं हो सकता है. क्योकि इसमें बोर्ड को कोई नुकसान नहीं होगा. छात्र खुद ही फंस जायेंगे. क्योकि भविष्य में अगर हमारे पास वेरिफिकेशन के लिए मामले आयेंगे तो हम मैट्रिक का नाम ही देंगे. इससे उनकी नौकरी चली जायेगी.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

23 nev 2015 on prabhat khabar patna 

घोड़ा-गाड़ी में गाड़ी तो है, घोड़ा हो रहा गायब

घोड़ा-गाड़ी में गाड़ी तो है, घोड़ा हो रहा गायब

- मीना और जवाहरात के लिए प्रसिद्ध सोनपुर मेला  नहीं दिखता सोना और कीमती जवाहरात की निकासी
- पशुओं की तुलना में मोटर गाड़ी खरीदने को आते है खरीदार
संवाददाता, पटना
पांच लाख और 10 लाख के कार की खरीदार तो सैकड़ों मिल रहे है, लेकिन हजारों में मिलने वाले घोड़ा को लेने के लिए खरीदार नहीं है. मोटर गाड़ियों की बुकिंग के लिए हर दिन खरीदार की लाइन लगी रहती है, लेकिन 20 लीटर दूध देने वाली मालती गाय को कोई पूछता तक नहीं है. कभी घरों के दरवाजे पर शान की सवारी होने वाले हाथी की तो हालत और खराब है. खरीदने वाले तो दूर अब इसे देखने तक का नसीब लोगों को नहीं मिल पा रहा है. कभी पशुओं की खरीदारी के लिए प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में खोजने पर भी पशु नहीं दिखायी देते है. कहा जायें तो मेला में गाड़ियां तो तमाम कंपनियों के मिल जायेंगे, लेकिन 20-25 नस्ल के आने वाले घोड़े अब 5-6 पर आकर सिमट गया है.
- पशु बाजार सिमट गया, फैल मीना बाजार
हर साल सोनपुर मेला के जगहों का फैलाव होता जा रहा है. भीड़ को तितर बितर करने के लिए प्रशासन की ओर से मेला परिसर बढ़ा दिया गया है. स्थानीय निवासी अमरेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि महेश चौक, सवाइच, अंग्रेजी बाजार, राहड़ दीयरा आदि तक इस बार मेला परिसर को बढ़ाया गया है. लेकिन इन जगहों पर बस मीना बाजार ही लगा हुआ है. कभी हरिहर नाथ मंदि के आस पास तक मीना बाजार लगता था. बांकी बकरी बाजार, चिड़ियां बाजार और घोड़ा बाजार, गाय भैंस बाजार होता था. अब यह सारा कुछ बदल गया है. अब ये नाम मात्र के रह गये है. खोजने पर भी अब पशु यहां पर शायद की मिलते है. 44 साल से सोनपुर मेला में घोड़ा की खरीद बिक्री करने आते मो. इमाम खान ने बताया कि इस बार 70 फीसदी खरीदारी कम हुई है. जो घोड़ा मुंबई और कानपुर आदि पशु मेला में 5 लाख में घोड़ा बिकता है, वो घोड़ा यहां पर डेढ़ लाख रुपया में भी लोग लेने को तैयार नहीं है. अरबी, मुलतानी, बलहोत्र, पंजाब आदि नस्ल के घोड़ा कम दामों में भी लोग लेने को तैयार नहीं है.
- एक महीने से पहले ही खत्म हो जाता है पशु मेला
सोनपुर मेला भले एक महीने तक चलता हो, लेकिन अब पशु मेला इतने दिनों तक नहीं रहता है. खरीदार नहीं मिलने के कारण व्यापारी दस दिनों के बाद पशुओं को वापस ले जाने लगते है. चारा खिलाने के पैसे भी नहीं निकलने के कारण व्यापारी पशुओं को लेकर चले जाते है. सीवान से आयें व्यापारी मो. सलीम ने बताया कि पशुओं को जहां रखा जाता है. वहां पर किसी तरह की व्यवस्था नहीं होती है. एक तो खरीदार नहीं मिलते और ना ही पशुओं और व्यापारी के लिए कोई व्यवस्था होती है. पशुओं को खिलाने के लिए चारा के पैसे भी हमें नहीं मिलता. इस कारण हम मेला शुरू होने के दस दिन के बाद सारे व्यापारी जाने लगते है. सोनपुर मेला में गाय और भैंस का जा चुके है. हाथी एक दो है, बस प्रदर्शनी के लिए. बकरी बाजार में बकरी को भी हटाया जा रहा है. घोड़ा बाजार से दो से तीन दिनों घोड़ा भी व्यापारी हटा लेगे.
- कार की बुकिंग के साथ खरीदार भी बढ़ रहे
किस कंपनी की गाड़ी अच्छी होती है. कंपनी की ओर से लोन का यहां व्यवस्था है. कार में सुविधाएं किस तरह की है. इन तमाम बातों की जानकारी लेने के लिए हर दिन सैकड़ों लोग मेला में आते है. परिसर में लगे तमाम कंपनियों से मिली जानकारी के अनुसार हर साल इसकी संख्या बढ़ती जा रही है. मारूती सूजुकी स्टॉल के रूरल सेल्स मैनेजर पंकज कुमार ने बताया कि हर दिन 10 से 12 लोग कार की बुकिंग करवा रहे है. वहीं टीवीएस और होंडा कंपनी स्टॉल पर भी अभी तक 100 के उपर गाड़ी की खरीदारी हो चुकी है. होंडा कंपनी के नेटवर्क मैनेजर निशांत श्रीवास्तव ने बताया कि हम लोग पिछले चार सालों से आ रहे है. हर साल खरीदारी और बुकिंग की संख्या बढ़ती जा रही है.
- कभी हीरा और जवाहरात मिलता था मीना बाजार में
सोनपुर मेला में कभी सोनार पट्टी लगता था. इस सोनार पट्टी में बनारस, सूरत आदि जगहों से कारीगर आते थे. हीरा, जवाहरात, सोने के लिए सांचे पर सामने में डिजाइन कर दिया जाता था. पिछले 60 साल से सोनपुर मेला के मीना बाजार के गवाह बने सीता राम साहनी ने बताया कि मीना बाजार बस अब नाम मात्र का रह गया है. कभी यहां पर हीरा, जवाहरात और सोने की खरीदारी करने वालों की भीड़ लगी रहती  थी, लेकिन अब वो बाजार उठ गया है. अब ना तो कारीगर आते है और ना ही खरीदार आते है. सिंदूर गली से अब रंग-बिरंगे सिंदूर तैयार नहीं होता है. सिंदूर गली में पंडित अनिल कुमार द्विवेदी ने बताया कि पहले यहां के सिंदूर गली से सिंदूर तैयार किया जाता था. इस गली में बस सिंदूर की खरीदारी होती थी. लेकिन अब तीन चार सालों से यह भी खत्म हो गया है.

22 nev 2015 on prabhat khabar patna 

सीबीएसइ करेगा सीसीइ में बदलाव, एफए और पीएसए होगा आसान

सीबीएसइ करेगा सीसीइ में बदलाव, एफए और पीएसए होगा आसान

- अभिभावक और स्टूडेंट्स से फीडबैक लेने के बाद बोर्ड कर रहा बदलाव
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) 2015 सत्र से कई बदलाव करने जा रहा है. स्टूडेंट्स की सुविधा के लिए सीसीइ (कंटीन्यूअस एंड कंप्रीहेंसिव असेसमेंट) के अंतर्गत यह बदलाव किया जायेगा. बोर्ड ने फॉर्मेटिव असेसमेंट (एफए) स्कीम में सबसे ज्यादा चेंज किये है. अब फॉर्मेटिव असेसमेंट में जो भी प्रोजेक्ट वर्क होगा वह स्कूल द्वारा करवाया जायेगा. वहीं असाइमेंट को भी स्कूल में ही स्टूडेंट्स का करवाया जायेगा. प्रोजेक्ट वर्क को स्कूल वाले होमवर्क का हिस्सा नहीं बना सकते है. बोर्ड के अनुसार स्टूडेंट्स और पैरेंट्स के फीडबैक से सामने आया है कि अधिकांश स्कूल एफए को होमवर्क का पार्ट बना दिया है. इसके कारण स्टूडेंट्स के साथ पैरेंट्स भी परेशान रहते है.
प्रोजेक्ट वर्क अब होंगे स्कूल में ही कम्पलीट
 बोर्ड की ओर से समेटिव असेसमेंट (एसए) और फार्मेटिव असेसमेंट (एफए) ली जाती है. समेटिव असेसमेंट में क्लास टेस्ट और पेपर होते है. वहीं फार्मेटिव असेसमेंट में प्रोजेक्ट वर्क, असाइनमेंट व को-करिकुलम एक्टिविटी. अब बोर्ड ने फॉमेटिव असेसमेंट में बदलाव किया है. 12वीं में रीवैलुएशन स्कीम में इस वर्ष बदलाव किया जायेगा. अब स्टूडेंट्स 10 की बजाय 15 क्वेशचन का रीवैलुएशन करा सकेंगे. इसी प्रकार सीसीइ पैटर्न को लेकर स्टूडेंट्स, टीचर्स, स्कूल मैनेजमेंट से मिले फीडबैक के आधार पर नये सेशन से इसेक लिए नया फमरूला तैयार कर लिया है. बोर्ड की करिकुलम कमेटी ने जरूरी बदलावों को अप्रूवल दे दी है. 2015 सत्र से इसे लागू कर दिया जायेगा. इसी के अनुसार अब क्लास वर्क भी स्कूल तैयार करेंगे.

ये हुए है बदलाव
1. एफए का प्रेशर होगा कम
फीडबैक से पता चला है कि एफए की होमवर्क का पार्ट बना दिया गया है. इस कारण बोर्ड ने एफए में प्रोजेक्ट का प्रेशर कम करने के लिए स्टूडेंट्स को एक्टिविटी या फिर क्लास असाइमेंट में से किसी एक को चुनने की सुविधा देगा.
2. पीएसए की परसेंटेज
9वीं और 11वीं में लिया जाने वाला अभी तक प्रॉब्लम सॉल्विंग असेसमेंट (पीएसए) टेस्ट की वेटेज 10 परसेंट है. 2015 से पीएसए की वेटेज 5 परसेंट होगी और बांकी पांच परसेंट एफए-4  की दूसरी एक्टिविटी के साथ जोड़ा जायेगा.
3. नया टेस्ट शामिल
फॉमेटिव असेसमेंट मे ंएक टेस्ट शामिल किया गया है. इससे पांच ऑप्शंस में से एक सेलेक्ट करना होगा. इसमें कांसेप्ट मैप, असाइनमेंट, एमसीक्यू बेस्ड टेस्ट, अप्लीकेशन बेस्ड टेस्ट, क्रियेटिव वर्क आदि शामिल है. क्रियेटिव वर्क में स्टूडेंट साइंस काटरून बना सकते है या फिर इंगलिश में शार्ट स्टोरी लिख सकते है.
4. स्मॉल ग्रुप एक्टिविटी
स्माल ग्रुप डिस्कशन, स्मॉल ग्रुप प्रेजेंटेशन, डिबेट, क्लब एक्टिविटी, रोल इन प्ले से स्टूडेंट्स को एक एक्टिविटी में हिस्सा लेना होगा. बोर्ड ने कहा है कि एफए में अब प्रोजेक्ट का प्रेशर कम किया जायेगा. स्टूडेंट्स को इनमें से कोई एक एक्टिविटी में हिस्सा लेना होगा और क्लास में ही असेसमेंट होगा.
5. इंटरडिसिप्लिनरी ग्रुप प्रोजेक्ट
इन प्रोजेक्ट की वेटेज 5 पर्सेट होगी. स्टूडेंट्स को ग्रुप में बांटा जायेगा. एफए 4 में ये प्रोजेक्ट करने होंगे. होमवर्क में इन प्रोजेक्ट को बिल्कुल शामिल नहीं किया जायेगा. टीचर्स की गाइडेंस में ये प्रोजेक्ट करने होंगे. स्टूडेंट्स को अलग-अलग ग्रुप में बांटा जायेगा. बोर्ड सूत्रों का कहना है कि जो भी चेंज किये जा रहे है, उनसे बच्चों की कम्यूनिकेशन स्किल बेहतर हेागी और उनमें विश्वास भी होगा.

कोट
इस बदलाव से स्टूडेंट्स को काफी सुविधा मिलेगी. प्रोजेक्ट वर्क या असाइमेंट आदि आसान हो जायेगा. स्टूडेंट्स की सुविधा के लिए बोर्ड द्वारा यह किया जा रहा है. पीएसए कम अंक के होने के कारण स्टूडेंट्स के रिजल्ट खराब होने की संभावना कम हो जायेगा. स्टूडेंट्स का प्रेशर कम होगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ

21 nev. 2015 on prabhat khabar patna 

स्कूल बेस्ड बोर्ड होगा खत्म, अब सिर्फ बोर्ड परीक्षा लेगा सीबीएसइ 

- 2016 के 10वीं बोर्ड परीक्षा में लागू होगी नयी प्रक्रिया
- स्कूल बेस्ड बोर्ड देने वाले स्टूडेंट्स की संख्या लगातार घट रही 
संवाददाता, पटना
स्कूल बेस्ड बोर्ड देना है या बोर्ड बेस्ड बोर्ड की परीक्षा में शामिल होना है. 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने के लिए अब सीबीएसइ स्टूडेंट्स को इस उधेड़बुन में नहीं रहना पड़ेगा. क्योंकि सीबीएसइ 2016 से बोर्ड परीक्षा के सिस्टम में पूरी तरह से परिवर्तन करने जा रही है. 2016 से सीबीएसइ पूरी तरह से पुराने सिस्टम से बोर्ड परीक्षा पैटर्न करने जा रही है. अब स्कूल बेस्ड बोर्ड नहीं बल्कि सीबीएसइ स्कूलों में भी बोर्ड परीक्षा ही अब आयोजित होगा. अभी हाल में कोच्चि में हुए सहोदया की नेशनल कांफ्रेंस में इस बात का फैसला लिया गया. सीबीएसइ ये यह फैसला कई सालों से स्कूल बेस्ड बोर्ड को लेकर अभिभावकों की निगेटिविटी के कारण लिया है.
- सर्वे के बाद बदला जा रहा पैटर्न
कुछ महीनों पहले सीबीएसइ ने अभिभावक, छात्र, स्कूल प्रशासन के बीच एक सर्वे करवाया था. इसमें पूछा गया था कि स्कूल बेस्ड और बोर्ड बेस्ड में से कौन से पैटर्न 10वी बोर्ड परीक्षा के लिए पसंद किये जा रहे है और क्यूं. इसमें अधिकांश लोगों ने बोर्ड बेस्ड बोर्ड परीक्षा को चूना था. स्कूल बेस्ड बोर्ड पर अभी भी कई प्रश्न चिन्ह लग रहे है. सर्वे में बताया गया था कि स्कूल के टीचर स्कूल बेस्ड पैटर्न का काफी दुरूपयोग करते है. इससे स्टूडेंट्स इस पैटर्न के पीछे नही पड़ना चाहते. इसके अलावा स्कूल बेस्ड बोर्ड पैटर्न के सर्टिफिकेट का दूसरे बोर्ड में मान्यता नहीं होने का भी असर इस पर काफी पड़ा है. 2010 से चल रहे इस पैटर्न को सीबीएसइ 2016 में पूरी तरह से बंद कर देगी. 
- घट रही स्टूडेंट्स की संख्या 
स्कूल बेस्ड बोर्ड होने के बाद सीबीएसइ में 9वीं और 10वीं में स्टूडेंट्स की संख्या पर भी असर हुआ है. बोर्ड के अनुसार जितनी संख्या 8वीं तक स्टूडेंट्स की रहती है. वो संख्या 9वीं के रजिस्ट्रेशन में कम हो जाती है. अधिकांश स्टूडेंट्स 8वीं के बाद सीबीएसइ से आइसीएसइ या स्टेट बोर्ड में नाम लिखवा कर वहीं से 10वीं बोर्ड की परीक्षा देते है. उसके बाद प्लस टू में फिर सीबीएसई में स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ जाती है. इसको देखते हुए सीबीएसइ के 2014 की बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट की संख्या बढ़ी और स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट्स की संख्या कम हो गयी. इतना ही नहीं 10वीं में सीसीइ पैटर्न लागू होने के बाद इसकी कई खामियां समय-समय पर सामने आयी है शिक्षकों पर मर्जी से कम या ज्यादा अंक देने के आरोप लगते रहे है. स्कूल भी अपनी लोकप्रियता बदलने के लिए सभी छात्रों को 10 सीजीपीए देने के आरोप में जांच के दायरे में आते रहे है. 
- 2015 की परीक्षा में चेंज करने का दिया गया आप्सन
सीबीएसइ ने 2015 की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स को स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा में परिवर्तन करने का आप्सन दिया है. जिन स्टूडेंट्स ने स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा का फार्म भरा है. वो अगर चाहे तो इसे परिवर्तन कर बोर्ड परीक्षा के लिए फार्म भर सकते है. सीबीएसइ यह सुविधा स्टूडेंट को पहली बार दिया है. अगर कोई स्टूडेंट्स स्कूल बेस्ड बोर्ड से बोर्ड परीक्षा देना चाह रहें हो तो वह स्कूल के माध्यम से या फिर रीजनल ऑफिस के एग्जामिनेशन कंट्रोलर को आवेदन दे सकते है. इसके अलावा 2015 की 10वीं बोर्ड परीक्षा में कई और परिवर्तन किया जायेगा. 

कोट
सीबीएसइ का यह फैसला स्वागत योग्य है. सहोदया के नेशनल कांफ्रेंस में नयी शिक्षा नीति को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई है. उसमें से 10वीं बोर्ड परीक्षा पैटर्न को लेकर गंभीर चर्चाएं हुई. क्योंकि दो सालों पहले शुरू हुआ स्कूल बेस्ड बोर्ड को आज भी अभिभावक पूरी तरह से एक्सेप्ट नहीं कर पा रहे है. इस कारण बोर्ड अब इसे परिवर्तन करने की सोच रहा है. 

सीबी सिंह, अध्यक्ष, पाटलिपुत्र सहोदया 

30 nov 2015 

हर प्रश्न के जवाब पर मिले जीरो अंक

हर प्रश्न के जवाब पर मिले जीरो अंक

- कटिहार की पिंकी मैट्रिक के हर विषय मे है पास और हिंदी में कर गयी फेल
- सूचना के अधिकार के तहत निकाली उत्तर पुस्तिका तो निकला सादा कागज
संवाददाता, पटना
मैट्रिक परीक्षा केंद्र से ऑरिजनल उत्तर पुस्तिका गायब हो जाता है और उसकी जगह पर दूसरे उत्तर पुस्तिका को डाल दिया जाता है, जो पूरा सादा है. यह सारा कुछ मुख्य परीक्षक के आंखों के सामने होता है और कोई इसे रोकने की कोशिश नहीं करता है. जब उत्तर पुस्तिका की जांच होती है तो परीक्षक उसमें जीरो अंक देते है. इसका परिणाम यह हुआ कि छात्र मैट्रिक की परीक्षा में फेल कर गयी. इस बात का खुलासा तब हुआ जब सूचना के अधिकार के तहत इस उत्तर पुस्तिका को मांगा गया. उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बारसोईघाट, कटिहार की मैट्रिक 2014 की छात्र पिंकी प्रकाश (रॉल नंबर 1400008, रॉल कोड 14315) हर विषय में प्रथम श्रेणी का अंक लायी, लेकिन वो मातृभाषा हिंदी में फेल हो गयी. जब इस बात का पता लगाने के लिए सूचना के अधिकार के तहत पिंकी प्रकाश ने उत्तर पुस्तिका बिहार बोर्ड से प्राप्त किया तो पता चला कि स्टूडेंट ने जिस उत्तर पुस्तिका में अपना उत्तर लिखा था, वो कॉपी गायब है और उसकी जगह पर दूसरी उत्तर पुस्तिका है. उत्तर पुस्तिका का उपर का पेज और अंतिम पेज तो सही है, लेकिन बीच के सारे पेज की जगह दूसरे पेज को डाल दिया गया है. ये सारे पेज सादे थे और जब उत्तर पुस्तिका की जांच हुई तो सादा पेज रहने के कारण उसे परीक्षक ने हिंदी में जीरो अंक दे दिया.
- पांच महीने बात मिला उत्तर पुस्तिका
रिजल्ट खराब होने की सही जानकारी पिंकी प्रकाश को तब मिला जब सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका प्राप्त हुआ. रिजल्ट निकलने के तुरंत बाद पिंकी ने सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका की मांग की. लेकिन सूचना के अधिकार के तहत एक महीने के बदले उसे पांच महीने बाद ऑरिजनल उत्तर पुस्तिका प्राप्त हुआ. अब इस उत्तर पुस्तिका को लेकर पिंकी प्रकाश के पिता सुशील कुमार गुप्ता बिहार बोर्ड का चक्कर लगा रहे है. ना तो अध्यक्ष से मिल पा रहे है और ना ही सचिव के पास ही अपनी बात पहुंचा पा रहे है. सुशील कुमार गुप्ता ने बताया कि बोर्ड के कर्मचारी मोटी रकम का डिमांड कर रहे है. कई दिनों तक दौड़ने के बाद मंगलवार को बोर्ड संयुक्त सचिव के पास अपनी बातें रखने का मौका मिला. जब संयुक्त सचिव ने उत्तर पुस्तिका देखा तो उन्होंने कहा कि इस उत्तर पुस्तिका के अंदर का सारा पेज बदला हुआ है.
- स्क्रूटनी के लिए भी दिया आवेदन
रिजल्ट खराब होने के बाद पिंकी प्रकाश ने अंक पत्र में सुधार के आवेदन भी किया. 21 जून 2014 को पिंकी प्रकाश ने स्क्रूटनी के आवेदन के लिए शुल्क जमा कर आवेदन किया. पांच महीने बीत जाने के बाद भी उसे अभी तक रिजल्ट नहीं मिला. पिंकी प्रकाश के पिता सुशील कुमार गुप्ता ने बताया कि कई महीनों से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन अभी तक अंक पत्र में सुधार नहीं हुआ है. रिजल्ट नहीं होने के कारण बेटी का नामांकन अभी तक नहीं किया जा सका है. एक साल बरबाद हो गया. समय पर पिंकी के रिजल्ट  में सुधार हो इसके लिए सुशील कुमार गुप्ता ने बिहार बोर्ड के सचिव के नाम से 24 जुलाई 2014 को एक आवेदन के माध्यम से सारी बातों से अवगत करवाया.
- उत्तर पुस्तिका सामने आने पर परेशान है बिहार बोर्ड
सूचना के अधिकार के तहत निकले इस उत्तर पुस्तिका के बाद बिहार बोर्ड में अफरा तफरी मची हुई है. सूत्रों के मुताबिक बोर्ड परीक्षा में पूरी तरह से सर्तकता बरती जाती है. ऐसे में किसी टीचर द्वारा किया गया यह काम बोर्ड परीक्षा के उपर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है. बोर्ड ने पिंकी प्रकाश के एटेंडेंस सीट की भी जांच की. पता चला कि पिंकी प्रकाश उस दिन परीक्षा में शामिल हुई थी. उत्तर पुस्तिका की प्रथम पृष्ठ पर पिंकी के हैंडराइटिंग में महत्वपूर्ण सूचना भरी हुई है. 11 मार्च 2014 को हिंदी की परीक्षा हुई थी. इस पृष्ठ पर परीक्षक के हस्ताक्षर भी मौजूद है. उत्तर पुस्तिका का नंबर 3379609 है और इस पर केंद्राधीक्षक का पूर्ण हस्ताक्षर भी है. लेकिन इसके अंदर के तमाम पृष्ठ बदला हुआ है.

पिंकी ने इन विषयों में प्राप्त किये अंक
मैथ     -   62 अंक
साइंस  -   57  अंक
सोशल साइंस  -  62 अंक
संस्कृत    -  73 अंक
इंगलिश   -   41 अंक
हिंदी   -  00

कोट
यह काफी गंभीर मामला है. हमारे पास अभी तक यह आया नहीं है. लेकिन मै इसे तुरंत देख कर इस पर जांच करवायेंगे. क्योंकि इससे तो एक स्टूडेंट का साल बरबाद हो गया है. इसकी पूरी जांच करवायी जायेगी.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

20 nev. 2015 on prabhat khabar patna 


पिंकी प्रकाश के साधे उत्तर पुस्तिका पर बिहार बोर्ड ने दिया 60 अंक

- प्रभात खबर में छपी खबर के बाद बोर्ड हुई एक्टिव, 309 अंक के साथ पिंकी प्रकाश हुई मैट्रिक पास 
संवाददाता, पटना
आखिर पिंकी प्रकाश की मेहनत सामने आया. तमाम विषयों के अंक देखकर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने  पिंकी प्रकाश को हिंदी में एवरेज मार्किग कर 60 अंक दिया है. इस अंक के मिलने से पिंकी प्रकाश मैट्रिक 309 अंक से प्रथम श्रेणी में पास हुई. लेकिन यहां तक पहुंचने में पिंकी प्रकाश को लंबा इंतजार करना पड़ा. बिहार बोर्ड का कई बार चक्कर लगाने के बाद भी उसे न्याय नहीं मिल रहा था. लेकिन प्रभात खबर ने पिंकी प्रकाश की परेशानी समझी और उसकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. प्रभात खबर के 20 नवंबर के अखबार में इस खबर को काफी प्रमुखता से छापा गया. प्रभात खबर को धन्यवाद देते हुए पिंकी प्रकाश के अभिभावक सुशील कुमार गुप्ता ने कहा कि प्रभात खबर के कारण ही मेरी बेटी को न्याय मिला है. मै जून से ही बिहार बोर्ड में न्याय के लिए आ रहा था, लेकिन प्रभात खबर में छपने के बाद इस मामले में गति आयी और मेरी बेटी का रिजल्ट सही हुआ. 
- हिंदी में जीरो अंक थे पिंकी को 
ज्ञात हो कि उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बारसोईघाट, कटिहार की मैट्रिक 2014 की छात्र पिंकी प्रकाश (रॉल नंबर 1400008, रॉल कोड 14315) हर विषय में प्रथम श्रेणी का अंक लायी, लेकिन वो मातृभाषा हिंदी में फेल हो गयी.  सूचना के अधिकारी के तहत पिंकी प्रकाश के हिंदी के उत्तर पुस्तिका को निकाला गया. तब इस बात का पता चला कि पिंकी प्रकाश ने जिस उत्तर पुस्तिका में आंसर लिखा है वो ये उत्तर पुस्तिका नहीं है.  जिस उत्तर पुस्तिका में अपना उत्तर लिखा था, वो कॉपी गायब है और उसकी जगह पर दूसरी उत्तर पुस्तिका है. उत्तर पुस्तिका का उपर का पेज और अंतिम पेज तो सही है, लेकिन बीच के सारे पेज की जगह दूसरे पेज को डाल दिया गया है. ये सारे पेज सादे थे और जब उत्तर पुस्तिका की जांच हुई तो सादा पेज रहने के कारण उसे परीक्षक ने हिंदी में जीरो अंक दे दिया. इसके बाद बिहार बोर्ड की ओर से इसकी जांच हुई. और इसके बाद पिंकी प्रकाश को एवरेज मार्किग हिंदी में किया गया. 

कोट
पिंकी प्रकाश का अंक पत्र शुक्रवार को मेरे पास आया है. इसमें उसे हिंदी मे 60 अंक दिया गया है. पिंकी प्रकाश प्रथम श्रेणी से पास हुई है. हमने अभिभावक को बुलाकर मार्क्‍स 

महेंद्र पाल, अनुमंडल पदाधिकारी, बारसोई

28 nov 2015 

कम्यूनिकेशन सिस्टम की पढ़ाई अब फिजिक्स में

कम्यूनिकेशन सिस्टम की पढ़ाई अब फिजिक्स में

- सीबीएसइ ने 12वीं में जोड़ा नया चैप्टर
- 2015 सत्र से फिजिक्स में पढ़ाई जायेगी कम्यूनिकेशन सिस्टम
संवाददाता, पटना
कंप्यूटर पर नेटवर्किग का काम कैसा होता है. लोकल एरिया नेटवर्क, वाइड एरिया नेटवर्क कैसे काम करता है. इसकी स्पीड और रेंज से कम्यूनिकेशन का वर्क कैसे होता है. इंटरनेट सर्फिग, ई-मेल आदि को फिजिक्स के प्वाइंट से अब सीबीएसइ स्कूलों में पढ़ाया जायेगा. सीबीएसइ 12वीं में 2015 सत्र से एक नया चैप्टर कम्यूनिकेशन सिस्टम शुरू किया जायेगा. फिजिक्स थ्योरी के सिलेबस में इसे शामिल किया गया है. इसके अंतर्गत कम्यूनिकेशन सिस्टम की हर जानकारी स्टूडेंट्स को दी जायेगी. कम्यूनिकेशन में फिजिक्स का क्या रोल है और यह किस तरह से काम करता है, इसी मकसद से इसे शुरू किया जा रहा है.
- 24 सेटेलाइट से चलता है जीपीएस
जीपीएस सिस्टम से किसी अंजान जगह के सही लोकेशन के बारे में जानकारी आसानी से मिल जाती है. यह सिस्टम 24 सेटेलाइट से चलता है. इसमें मैप की मदद से  लगभग 20 हजार किलोमीटर तक की दूरी की मॉनिटरिंग की जाती है. यह एक राउंड में काम करता है. इस सिस्टम की तमाम जानकारी 12वीं के स्टूडेंट्स को दी जायेगी. इस सिस्टम मे फिजिक्स का क्या भूमिका होती है, इसे भी स्टूडेंट्स समझ पायेंगे . सेटेलाइट के लाइट,टाइम और डिस्टेंस के बारे में स्टूडेंट्स जान पायेंगे. इसके अलावा पानी, हवा और जमीन पर जीपीएस सिस्टम कैसे काम करता है, इसे भी बताया जायेगा.
- मोबाइल सिस्टम को जान पायेंगे स्टूडेंट
मोबाइल के वन-जी, टू-जी, थ्री-जी और फोर-जी सिस्टम कैसे काम करता है. इसके और दूसरा एडवांस टेक्नोलॉजी को कैसे तैयार किया जा सकता है. किस तरह से इसके एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ इसके स्पीड में फर्क आता है. इन चीजों की जानकारी स्टूडेंट्स को मिल सकेगी. इसके अलावा मोबाइल के सिम कार्ड और नंबर सिस्टम को भी स्टूडेंट जान सकेंगे. मोबाइल में नौ डिजिट वाले ही नंबर सिस्टम क्यूं होता है, इन चीजों के बारे में स्टूडेंट्स जान सकेंगे.

इन चीजों की होगी पढ़ायी
1. इंटरनेट
- नेटवर्किग ऑफ कंप्यूटर (लोकल एरिया नेटवर्क, वाइड एरिया नेटवर्क)
- अप्लीकेशन ऑफ इंटरनेट (ई-मेल, इंटरनेट सर्फिग, ई-बैंकिंग, ई-शॉपिंग, ई-बुकिंग या ई-टिकटिंग, सोशल नेटवर्क)
2. मोबाइल टेलिफोनी
- माबाइल फोन का सिद्धांत
- साइंटिफिक प्रोसेस ऑफ मोबाइल फोन सेल
- मोबाइल टेलिफोन स्विच ऑफिस
- मोबाइल फोन नंबर सिस्टम
- मोबाइल नेटवर्क जेनरेशन
3. ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस)
- इस सिस्टम के बारे में जानकारी
- जीपीएस डिवाइस के सिद्धांत
- अप्लीकेशन ऑफ जीपीएस

कोट
आज कल कम्यूनिकेशन सिस्टम हमारे लाइफ का पार्ट बन गया है. कंप्यूटर कोर्स में तो इसकी पढ़ाई स्टूडेंट करते आयें है. लेकिन इस सिस्टम को फिजिक्स के प्वाइंट से अगर स्टूडेंट्स को पढ़ाया जायेगा तो स्टूडेंट्स को काफी फायदा होगा. इससे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कॅरियर बनाने में स्टूडेंट्स को मदद मिलेगी.
अमरेंद्र कुमार, फिजिक्स टीचर, लोयेला हाई स्कूल

19 nev. 2015 on prabhat khabar patna 

सीबीएसइ 2016 से 10वीं बोर्ड परीक्षा पैटर्न में चेंज करने की कर रहा तैयारी

सीबीएसइ 2016 से 10वीं बोर्ड परीक्षा पैटर्न में चेंज करने की कर रहा तैयारी

- मार्च में होने पर स्कूल बेस्ड बोर्ड के साथ सीबीएसइ बोर्ड परीक्षा की भी करेगा जांच
- कई प्वाइंट पर स्कूल की खामियों पर होगी नजर
संवारददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) अगले साल यानी 2016 से 10वीं बोर्ड की परीक्षा पैटर्न में परिवर्तन करने जा रहा है. इसको लेकर सीबीएसइ ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. इसकी पहली कड़ी में सीबीएसइ 2015 मार्च में आयोजित 10वीं बोर्ड की परीक्षा और स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर रिसर्च करेगा.  इस रिसर्च के बेस पर स्कूलों को गाइडलाइंस जारी की जायेगी. साथ में बोर्ड परीक्षा पैटर्न की जांच की जायेगी.  जिससे परीक्षा की खामियों को पकड़ा जा सके.  हाल में बोर्ड द्वारा आयोजित करिकुलम कमिटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया है. सीबीएसइ बोर्ड परीक्षा के जमीनी स्तर तक रिसर्च और जांच करने के बाद स्कूलों को एक  गाइडलाइन दिया जायेगा. इसी गाइड लाइन के आधार पर अगले साल यानी 2016 की बोर्ड परीक्षा को रिफॉम किया जायेगा और इसे लागू किया जायेगा.
- हो सकता है स्कूल बेस्ड परीक्षा खत्म
सीबीएसइ के पास जिस तरह से स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा को लेकर शिकायतें आ रही है, उसको लेकर सीबीएसइ स्कूल बेस्ड बोर्ड पैटर्न को खत्म कर सकती है. बोर्ड सूत्रों के मुताबिक स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा मे पारदर्शिता की कमी है. हर साल इसको लेकर अभिभावक और छात्रों की कई शिकायतें इस पैटर्न को लेकर आते है. तभी तो 2014 की 10वी बोर्ड परीक्षा में स्कूल बेस्ड परीक्षा देने में छात्रों की संख्या बोर्ड बेस्ड देने वाले छात्रों से काफी कम थी. इसी शिकायत के आधार पर सीबीएसइ ने 2015 में इस बैरियर को खत्म कर दिया था जिसके तहत छात्रों से स्कूल बेस्ड बोर्ड देने की अपील की जाती थी.
- बोर्ड में ईजी पैटर्न होने से घट रहा क्वालिटी एजुकेशन
बोर्ड परीक्षा स्कूल कैसे आयोजित करता है. प्रश्न पत्र का पैटर्न कैसा दिया जा रहा है. कहीं क्वालिटी एजुकेशन को ताक पर रख कर तो स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा नहीं ली जा रही है. 10वीं बोर्ड की स्कूल बेस्ड बोर्ड को लेकर कई कंप्लेन सीबीएसइ के पास हर साल आते है. करिकुलम कमेटी के अनुसार पिछले साल जिन स्कूलों के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को 10 सीजीपीए अवॉर्ड किये जाने की कंप्लेन मिली थी. उन स्कूलों को हिदायत जारी कर दी गयी है. इस बार बोर्ड स्कूल द्वारा तैयार किये जाने वाले क्वेशचन पेपरों पर रिसर्च करेगा, ताकि यह पता चल सके कि कहां पर कमियां हैं.
- परीक्षा पैटर्न में नहीं होगा कोई समझौता
बोर्ड सूत्रों का कहना है कि बेशक स्कूल बेस्ड एग्जाम हो रहे है लेकिन एग्जाम के स्टैंडर्ड को लेकर कोई समझौता नहीं होगा. बोर्ड बेस्ड व स्कूल बेस्ड एग्जाम में अपीयर होने वाले स्टूडेंट्स को कॉमन सर्टिफिकेट मिलता है. मार्किग स्कीम एक जैसी होती है. एग्जामिनेशन रूल्स में कोई अंतर नहीं होता. ऐसे में क्वेशचन पेपरों के पैटर्न में भी अंतर नहीं होना चाहिए. बोर्ड इस बार स्कूलों को कुछ गाइडलाइंस जारी करेगा. बोर्ड की ओर से स्कूलों को क्वेशचन पेपर भी भेजे जाते है. यह स्कूलों पर निर्भर करता है कि वे बोर्ड के क्वेशचन पेपरों को यूज करें या फिर अपने पेपर सेट करें. बोर्ड को यह कंप्लेन भी मिल रही थी कि बहुत से स्कूलों में बच्चों को ज्यादा मार्क्‍स दिये जाते है व क्वेशचन पेपर का स्टैंडर्ड भी बोर्ड से काफी कम होता है. इन सब कंप्लेन को देखते हुए बोर्ड ने स्कूल और बोर्ड एग्जाम में आने वाले क्वेशचन पेपरों के पैटर्न, पेपरों के डिजाइन, स्टूडेंट्स के पास ऑप्शन और मार्किग पैटर्न पर रिसर्च करने का फैसला किया है.
- अभी दो तरह से होता है 10वी बोर्ड परीक्षा
सीबीएसइ द्वारा ग्रेडिंग सिस्टम करने के बाद 10वीं बोर्ड की परीक्षा पैटर्न में बिल्कुल की परिवर्तन कर दिया गया है. 10वी बोर्ड की परीक्षा को ऑप्शन बना दिया गया.  पिछले तीन सालों से सीबीएसइ 10वीं क्लास में बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ स्कूल बेस्ड एग्जाम भी होते है. स्टूडेंट्स के पास यह ऑप्शन होता है कि दोनों में से कौन सा एग्जाम चुने. अगर स्टूडेंट्स बोर्ड परीक्षा का ऑप्शन चुनते है तो उन्हें पहले जैसे ही बोर्ड परीक्षा में शामिल होना होता है. लेकिन अगर स्टूडेंट्स स्कूल बेस्ड बोर्ड परीक्षा का ऑप्शन चुनते है तो उनकी परीक्षा स्कूल द्वारा आयोजित की जाती है. बोर्ड की तरफ से प्रश्न पत्र आते है, लेकिन परीक्षा पूरी तरह से स्कूल द्वारा दिया जाता है. स्कूल के टीचर ही उत्तर पुस्तिका की जांच आदि करते है. उत्तर पुस्तिका की जांच करने के बाद उसे सीबीएसइ के पास भेज दिया जाता है. रिजल्ट फिर सीबीएसइ द्वारा ही जारी की जाती है.

कोट
बोर्ड द्वारा नया एजुकेशन प्लान लाने की तैयारी की जा रही है. अभी हाल में सहोदया की नेशनल बैठक में भी यह निर्णय लिया गया है. इसी के तहत 10वीं बोर्ड की परीक्षा को लेकर यह फैसला लिया गया है. अलग एक साल में कई और परिवर्तन किये जायेंगे.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया, पटना


17 nev. 2015 on prabhat khabar patna 

विकलांग स्टूडेंट्स के लिए स्कूल में हो व्यवस्था, नहीं तो जायेगी मान्यता

विकलांग स्टूडेंट्स के लिए स्कूल में हो व्यवस्था, नहीं तो जायेगी मान्यता

- सीबीएसइ ने पटना के सयश कुमार के प्रोजेक्ट को स्कूलों में लागू करने को कहा
- नये सत्र के शुरू होने से पहले तमाम स्कूल में बने विकलांग बच्चों के लिए स्लोपिंग
संवाददाता, पटना
डिसएबल स्टूडेंट्स को यह फील ना हो कि वो मजबूर है. उनकी सुविधा के लिए हर स्कूल में ऐसी व्यवस्था हो जिससे डिसएबल स्टूडेंट्स को शिक्षा ग्रहण करने में किसी तरह की परेशानी ना हो. क्लास रूम के साथ प्ले ग्राउंड, लंच रूम और स्कूल बस में स्लोपिंग (रैंप) बनायी जायें. जिससे डिसएबल स्टूडेंट्स दूसरे पर निर्भर ना होकर, आत्मनिर्भर बने. सीबीएसइ की ओर से यह निर्देश तमाम स्कूलों को दिया गया है. बोर्ड की ओर से इसके लिए स्कूलों को नये सत्र शुरू होने तक का समय दिया है. नये सत्र 2015 के शुरू होने से पहले हर स्कूल को डिसएबल स्टूडेंट्स के एजुकेशन की व्यवस्था को सही करना होगा. बोर्ड ने अपने निर्देश में कहा है कि अगर नये सत्र के शुरू होने तक स्कूलों में यह स्लोपिंग के साथ और दूसरी व्यवस्था नहीं की जायेगी, उस स्कूल की मान्यता पर असर हो सकता है. समान शिक्षा प्रणाली को लागू करने के लिए सीबीएसइ की ओर से यह व्यवस्था की जा रही है.
- पटना के सयश कुमार के प्रोजेक्ट कों करे प्रमोट
सीबीएसइ ने पटना के वाल्डविन एकेडमी का 12वीं का स्टूडेंट सयश कुमार के प्रोजेक्ट को स्कूलों में लागू करने को कहा है. वाल्डविन एकेडमी का स्टूडेंट सयश कुमार ने कुछ सालों पहले डिसएबल स्टूडेंट्स को स्कूल में किसी तरह की दिक्कतें ना हो, इसके लिए स्लोपिंग (रैंप) कांसेप्ट पर एक प्रोजेक्ट बनाया था. इसको लेकर सयश कुमार को एनसीइआरटी के नेशनल साइंस एग्जीविशन और सीबीएसइ के साइंस एग्जीविशन में प्रथम पुरस्कार दिया गया था. सयश कुमार ने बताया कि प्रोजेक्ट के चुने जाने के बाद पटना के तमाम स्कूलों में भी उसका प्रेजेंटेशन हुआ था. लेकिन एक दो स्कूलों को छोड़ कर किसी भी स्कूल ने इसे एडाप्ट नहीं किया था. सयश ने बताया कि अगर इस प्रोजेक्ट को स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी लेवल पर लागू किया जायें तो शारीरिक रूप से असमर्थ स्टूडेंट्स के लिए काफी सुविधाजनक होगी.
- सीबीएसइ ने मांगा है डिसएबल स्टूडेंट्स की लिस्ट
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से डिसएलब स्टूडेंट्स की लिस्ट मांगी है. किस क्लास में कितने स्टूडेंट्स शारीरिक रूप से विकलांग है, उसकी जानकारी देनी होगी. बोर्ड के अनुसार डिसएबल बच्चें दूसरे बच्चों से बिल्कुल ही अलग होते है. कई बार ऐसे बच्चे डिप्रेशन में चले जाते है. इन बच्चों को स्पेशल ट्रीटमेंट ना मिले तो इन्हें सफलता मिलने में काफी कठिनाई आयेगा. ऐसे बच्चों के लिए टीचर्स के साथ अभिभावक की जिम्मेवारी भी बढ़ जाती है. स्कूल में उनके लिए स्पेशल व्यवस्था होने से उनका कांफिडेंस बढ़ेगा.
- हर स्कूल में है 50 से 100 बच्चे है विकलांग
पटना के लगभग स्कूलों में विकलांग बच्चे मिल जायेंगे. शारीरिक रूप से कमजोर इन स्टूडेंट्स के लिए स्कूलों में किसी तरह की व्यवस्था नहीं है. उन्हें हमेशा अपने फ्रेंड आदि पर निर्भर रहना पड़ता है. पटना के एक स्कूल 9वीं में पढ़ रहा रोहित ने बताया कि मेरा क्लास रूम नीचे के फ्लोर पर है और वाशरूम, पीने के पानी पीने का व्यवस्था फस्र्ट फ्लोर पर है. ऐसे में मुङो उपर जाने में काफी दिक्कतें होती है. पीने के पानी तो फिर भी फ्रेंड आदि की मदद से मिल जाता है. लेकिन वाशरूम जाने में मुङो काफी समय लग जाता है. सीढ़ी चढ़ने में मुङो काफी परेशानी होती है. वहीं अंजली सिंह ने बताया कि एक एक्सीडेंट में मेरे एड़ी के पास थोड़ा मुड़ गया है. इससे मुङो चलने में परेशानी होती है. क्लास रूम सेकेंड फ्लोर पर होने से मुङो दिक्कतें होती है. एक बार क्लास रूम में जाने के बाद मै स्कूल में छुट्टी के बाद ही निकल पाती हूं.

सीबीएसइ ने स्कूलों ने कहा ये सारी हो व्यवस्था
- डिसएबल स्टूडेंट के लिए व्हील चेयर की हो व्यवस्था
- स्कूल में जहां पर भी सीढ़ी हो, वहां पर स्लोपिंग बनाया जायें
- डिसएबल बच्चों की बेसिक जरूरत की चीजें क्लास रूम या क्लास रूम के बाहर रखी रहें. जिससे उन्हें दूसरे पर निर्भर ना रहना पड़े
- स्कूल बस में भी सीढ़ी के पास स्लोपिंग बनाया जायें, जिससे बच्चे आसानी से बस में चढ़ सके
- बस में डिसएबल स्टूडेंट्स के बैठने की अलग से व्यवस्था हो
- डिसएबल स्टूडेंट्स के लिए सप्ताह में एक दिन मोटिवेशनल क्लास होना चाहिए
- प्ले ग्राउंड में डिसएबल स्टूडेंट्स के खेलने के लिए अलग से व्यवस्था हो

कोट
बोर्ड की ओर से कई सालों से स्कूल में डिसएबल बच्चों के लिए व्यवस्था करने को कहा गया है. कई स्कूलों ने इसे शुरू भी किया है. लेकिन पूरी तरह से इसे लागू नहीं किया जा सका है. इस पर हमें ध्यान देना होगा. स्कूल में बच्चे अधिक समय रहते है, ऐसे में स्कूल में स्लोपिंग की व्यवस्था होने से डिसएबल बच्चों में कांफिडेंस आयेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना

14 nev. 2015 on prabhat khabar patna 

बच्चों की बदली पसंद, कार्मिक्स में आया रामायण और महाभारत

बच्चों की बदली पसंद, कार्मिक्स में आया रामायण और महाभारत

इसकी फोटो पटना ब्यूरो में रखी है

- चाचा चौधरी की जगह अब दिखते है भगवान राम और कृष्ण
- बाल शब्दकोश के साथ बाल कविताएं और चुटकुले बन रहे बच्चों की पसंद
संवाददाता, पटना
कंप्यूटर से भी तेज चल रहे चाचा चौधरी की कहानी अब मन को नहीं लुभाती है,  टॉम एंड जेरी की कहानी अब पुरानी लगती है. अब तो कुछ ऐसा हो जिससे ज्ञान बढ़ने के साथ मजा भी आये. तभी तो इस बार पटना बुक फेयर में हर स्टॉल पर कॉर्मिक्स तो मिलता है, लेकिन चाचा चौधरी या दूसरे पुराने कॉर्मिक्स के कैरेक्टर नहीं दिखते है. अब इन कैरेक्टर की जगह भगवान राम, भगवान कृष्ण और दूसरे एतिहासिक लोगों ने ले लिया है. एक तरफ जहां राम, कृष्ण, चाणक्य, भगवान हनुमान, पंचतंत्र, जातक कथाएं कॉमिक्स के स्टाइल में आया है वहीं कई बड़े लेखक (अमृतलाल नागर, शिवानी, प्रेमचंद आदि) द्वारा लिखी गयी बाल पुस्तक को नये कलेवर के साथ बच्चों के लिए लाया गया है.
- कॉर्मिक्स में आयें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
राम, कृष्ण, अकबर-बीरबल, चाणक्य, शिव और पार्वती, अजरुन, गुरु नानक के साथ कॉर्मिक्स में नरेंद्र मोदी भी इस बार नजर आ रहे है. प्रभात प्रकाशन में मिल रहे इस किताब दो दिनों में काफी बिक्री हुई है. ¨हंदी और इंगलिश में मिल रहे इस किताब में नरेंद्र मोदी की जीवनी को चित्र के द्वारा दर्शाया गया है. प्रभात प्रकाशन के अमित शर्मा ने बताया कि बच्चों के लिए नरेंद्र मोदी पर चार बुक आयें है. इसमें एक कहानी नरेंद्र मोदी, नमों 7 रेसकोर्स की ओर के साथ नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू भी शामिल है.
- 7 साल का अत्रि ने लिया सौ बाल कविताएं
अभी तक बड़े लेखक के बुक ही बच्चे पढ़ा करते थे और उस पर अमल करते थे. लेकिन इस बार पटना बुक फेयर मे कुछ ऐसी भी बुक है जो बच्चों ने लिखा है. ऐसा ही एक नन्हा लेखक हेै अत्रि. 7 साल के अत्रि ने अपने जैसे सैकड़ों बच्चों के लिए सौ कविताओं का एक संग्रह तैयार किया है. किताबघर में मिल रही इस कविता संग्रह में अत्रि ने साफ सफाई के साथ लाइफ स्टाइल संबंधी कई चीजों को शामिल किया है. किताब घर के सुनील शर्मा ने बताया कि बच्चों से संबंधित कई किताबें इस बार मेले में है. पहली बार बाल शब्दकोश आया है. इसमें हिंदी के लगभग पांच हजार शब्दों को कहानी के अनुसार समझाया गया है. किस शब्द का प्रयोग कहां किया जायें, इसे बताया गया है. इसके अलावा चुटकुले आदि पर भी कई किताबें आयें है.

11 nev. 2015 on prabhat khabar patna 

विद्यापति भवन में खुलेगा मिथिला अस्पताल

विद्यापति भवन में खुलेगा मिथिला अस्पताल

- पटना के सात डॉक्टरों की बनायी गयी टीम
- फ्री चेकअप के साथ मिलेगा फ्री में दवा
संवाददाता, पटना
जे बाजत मैथिली, हुनकर इलाज हेतै मुफ्त में.. मैथिली भाषा के प्रचार प्रसार और लोगों तक मिथिलांचल की पहुंच बनाने के लिए जल्द ही एक मिथिला अस्पताल राजधानीवासियों को मिलेगा.  इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गयी है. मिथिला अस्पताल में मैथिली बोलने वाले मरीज का इलाज फ्री में होगा. इसके अलावा दवा भी डॉक्टर फ्री में देंगे. जमीनी स्तर पर चल रही इस योजना को तीन दिवसीय विद्यापति समारोह होने के बाद अमलीजामा पहनाया जायेगा. विद्यापति समारोह होने के बाद चेतना समिति की एक बैठक में इस पर विचार किया जायेगा. विद्यापति भवन या राजेंद्र नगर स्थिति मिथिला भवन में इस अस्पताल के खोले जाने का प्रस्ताव डॉक्टरों ने चेतना समिति को दिया है.
- सात डॉक्टरों की बनायी गयी टीम
अपने-अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध डॉक्टरों की टीम इसके लिए बनायी गयी है. हर डॉक्टर अपने समय के अनुसार इस अस्पताल को देंगे. सात डॉक्टरों की टीम में हर फील्ड में स्पेशलिस्ट को रखा जायेगा. चर्म रोग विशेषज्ञ डा. अमरकांत झा अमर ने बताया कि मिथिलांचल वाले अब अपनी भाषा और पर्व त्योहार आदि को भूलते जा रहे है. मिथिलांचल की परंपरागत चीजें अब विदेशों में देखने को मिलती है. राजधानी की बात हो या मिथिलांचल की हम गिने चुने लोगों को ही मैथिली गीत आता है. ऐसे में अगर हम अवेयर नहीं हुए तो ये सारी चीजों अब विलुप्त हो जायेगी. मिथिलांचल का यह हाल है कि अब विदेशों में रह रहे मैथिल भाषी लोग मैथिली गीत की ट्रेनिंग ले कर सीडी और कैसेज देश में भेजते है. उसी को लेकर हमारे यहां शादी विवाह संपन्न हो रहा है. ऐसे में राजधानी के कुछ डॉक्टरों ने मिलकर इस अस्पताल को खोलने की सोची है. इस संबंध में डा. सीएम झा ने बताया कि मैथिली का रंग हर जगहों पर हो, इस कारण इस अस्पताल की शुरुआत हम करने जा रहे है.

यह है डॉक्टरों की टीम
1. डा. अरूण कुमार ठाकुर,  चाइल्ड स्पेशलिस्ट
2. डा. अमर कांत झा अमर, चर्म रोग विशेषज्ञ
3. डा. एसएस चौधरी, नेत्र रोग विशेषज्ञ
4. डा. सीएम झा,  न्यूरो सजर्न
5. विनय कारक, न्यूरो फिजिशियन
6. डा. एसएस झा,  हड्डी रोग विशेषज्ञ
7. वीणा मिश्र,  गाइनोकोलॉजिस्ट

कोट
हम लोगों की यह योजना है. जल्द ही हम इसे शुरू करेंगे. इसमें कमजोर और गरीब तबकों के लोगों का इलाज किया जायेगा. इसके लिए हमने मैथिली भाषी लोगों को अधिक फोकस किया है. हर दिन एक डॉक्टर यहां पर समय देंगे.
डा, अरुण कुमार ठाकुर, चाइल्ड स्पेशलिस्ट

विदेशों में मैथिली भाषा को लेकर कई तरह की चीजें चल रही है. मैथिली गीत को लेकर लोग ट्रेनिंग लेते है. लेकिन हमारे देश में इन चीजों को इगAोर किया जा रहा है. इस कारण इसकी शुरुआत की जा रही है. इस अस्पताल में मैथिली भाषी का इलाज फ्री में होगा. इस अस्पताल को लेकर चेतना समिति के पास एक प्रस्ताव हमने दिया है. विद्यापति समारोह के बाद इसे कार्यरूप दिया जायेगा.
डा. अमरकांत झा अमर, चर्म रोग विशेषज्ञ

हमारे पास इसकी चर्चा हुई है. अभी विद्यापति समारोह चल रहा है. समारोह होने के बाद हम लोग एक बैठक करेंगे. उसमें इस पर विचार किया जायेगा. मौखिक प्रस्ताव हमारे पास आया है. बैठक के बाद ही कुछ तय किया जायेगा.
विवेकानंद ठाकुर, उपाध्यक्ष, चेतना समिति

6 nev. 2015 on prabhat khabar patna 

लर्निग सेफ इंवायरमेंट दे स्कूल

लर्निग सेफ इंवायरमेंट दे स्कूल

- सीबीएसइ तैयार कर रहा सुरक्षा संबंधी निर्देश
- कैंपस के अंदर और बाहर स्टूडेंट्स को सुरक्षा देने की जिम्मेवारी स्कूल की
संवाददाता, पटना
किसी भी बच्चे का 5 से 6 घंटे का समय स्कूल में निकलता है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा का दायित्व स्कूल की उतनी है जितना घर में अभिभावक की होती है. हर स्कूल को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल में पढ़ने वाले तमाम स्टूडेंट्स के लिए सुरक्षा के क्या और कैसे इंतजाम है. सीबीएसइ जल्द ही इस संबंध में एक सकरूलर जारी करने जा रहा है. इसके तहत स्कूलों को स्टूडेंट्स के सुरक्षा के लिए कई निर्देश जारी किये जायेंगे. हाल में बोर्ड के पास अभिभावकों की शिकायत आयी है. इस शिकायत में स्कूल की लापरवाही को दिखाया गया है. सेफ्टी नहीं मिलने के कारण जहां कई स्कूलों में लैब वर्क के समय स्टूडेंट को शारीरिक नुकसान हुआ तो वहीं प्ले ग्राउंड सेफ नही होने से गिरने और पांव और हाथ टूटने की घटना घटी है. इसके अलावा सीबीएसइ ने देश के लगभग 4 हजार स्कूलों पर एक सर्वे भी किया है. जिसके रिपोर्ट में यह देखा गया है कि अधिकांश स्कूल सेफ्टी के नाम पर जीरो है.
- स्कूलों में चलेगा सेफ्टी का क्लास
एकेडेमिक सेशन के अलावा अब स्कूल में सेफ्टी के लिए भी एक क्लास चलाये जायेंगे. इसके लिए हर दिन एक क्लास के स्टूडेंट को दिया जायेगा. इसमें स्कूल कैंपस में सेफ्टी के साथ कैंपस के बाहर भी खुद को कैसे सुरक्षित रखें, इनकी जानकारी दी जायेगी. सीबीएसइ के अनुसार सुरक्षा संबंधी लिस्ट स्कूलों को भेजा जायेगा. इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के साथ भूकंप आदि आने पर स्टूडेंट्स को क्या कुछ सेफ्टी के लिए करना चाहिए, इन चीजों की जानकारी दी जायेगी.
- हर प्रोग्राम का थीम होगा सेफ्टी
सीबीएसइ नये सेशन 2015 में हर कार्यक्रम का थीम भी सेफ्टी ही रखेगा. इससे सेफ्टी को लेकर स्टूडेंट्स अधिक से अधिक अवेयर होंगे. सीबीएसइ के अनुसार आज भी काफी संख्या में स्टूडेंट्स है जिन्हें सुरक्षा को लेकर बेसिक बातों की जानकारी नहीं है. स्कूल भी इस संबंध में जानकारी नहीं देता है. यहां तक की सेल्फ सेफ्टी के बारे में भी स्टूडेंट्स अंजान होते है. इस कारण अलग-अलग थीम पर सेफ्टी के बारे में स्टूडेंट्स को अवेयर किया गया था.
- लैब को सुरक्षित रखें स्कूल
स्कूल में साइंस लैब पर अधिक फोकस करना चाहिए. हर स्कूल को लैब में नये कैमिकल और नये इंट्रमेंट को रखना होगा. लैब में काम करते समय कई बार दुर्घटना हो जाती है. ऐसे मे बच्चे घायल हो जाते है. सीबीएसइ के एक डाटा के अनुसार देश में 10 फीसदी बच्चों लैब मे काम करते समय घायल हो जाते है. जिसकी मुख्य वजह एक्सपायरी केमिकल और लापरवाही होती है. इसको देखते हुए लैब मे हर दस स्टूडेंट्स पर एक लैब एटेंडेंट होना जरूरी है. लैब में लाइट के साथ बाहर से आने वाली रोशनी का पूरा इंतजाम होना चाहिए. लैब में उपयोग में आने वाले गैस को बाहर निकालने की पूरी और सही व्यवस्था हो.
 - स्कूल आने जाने में मिले सुरक्षा
हर स्कूल को अब अपना कंवियेंस रखना होगा. स्टूडेंट के स्कूल आने और स्कूल से घर तक पहुंचने में स्कूल की पूरी जिम्मेवारी होगी. इसके लिए स्कूल को सुनिश्चत करना होगा कि वो हर बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें. पटना के कई स्कूल हैं जिनके पास अपना कंवियेंस नहीं है. ऐसे में वो स्टूडेंट्स की सुरक्षा बस स्कूल कैंपस तक ही दे पाते है. ऐसे तमाम स्कूल सीबीएसइ के जांच के कटघरे में आयेंगे. बोर्ड के अनुसार आये दिन अपहरण की मामले सामने आयें जिसमें यह देखा गया है कि बच्चों का अपहरण स्कूल आने और जाने के क्रम में हुआ है.
- स्कूल टूर से हुई शुरुआत
सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत स्कूल टूर से किया है. पिछले कई महीनों में एकेडेमिक टूर को लेकर घटी घटनाओं पर सीबीएसइ ने स्कूल टूर के नियम में परिवर्तन कर दिया है. अब कोई भी स्कूल जबदस्ती किसी भी बच्चों को स्कूल टूर पर नहीं ले जा सकता है. अभिभावक के चाहने पर ही स्टूडेंट को स्कूल टूर पर भेजा जायेगा. बच्चों जहां एकेडेमिक टूर के लिए जायेंगे, इसकी जानकारी संबंधित शहर के जिला प्रशासन को पहले ही दिया जायेगा. हर बच्चे का हेल्थ इंशोरेंस होना जरूरी होगा

कोट
सहोदया के हाल में हुए नेशनल कांफ्रेंस में भी स्कूलों में सेफ इंवायरमेंट पर फोकस किया गया था. सेफ इंवायरमेंट संबंधी जानकारी स्टूडेंट्स को अधिक से अधिक मिले, इस बार नेशनल कांफ्रेंस का एक टॉपिक था. बोर्ड के अनुसार आज भी अधिकांश स्कूल इस पर ध्यान नहीं देते है, जिस कारण कई तरह की घटनाएं स्कूल कैंपस या बाहर में घटती है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

8 nev. 2014 on prabhat khabar patna 

Monday, February 23, 2015

अब इ-मेल पर आयेगी आंसर सीट

अब इ-मेल पर आयेगी आंसर सीट

- सीबीएसइ रिजल्ट में एलओसी का करेगा उपयोग
- 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षार्थी को मिलेगा आंसर सीट
संवाददाता, पटना
अब रिजल्ट को लेकर ना तो कंफ्यूजन रहेगा और ना ही कोई शिकायत ही रहेगी. क्योंकि अब आंसर सीट परीक्षार्थी को उपलब्ध करवायें जायेंगे. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से 2015 की बोर्ड परीक्षा का आंसर कॉपी परीक्षार्थी को इ-मेल पर भेजे जायेंगे.  पहली बार सीबीएसइ की ओर से ऐसा किया जायेगा. इससे परीक्षार्थी अपना उत्तर इ-मेल पर ही देख पायेंगे. किस प्रश्न का उत्तर उन्होंने कैसा दिया और किस प्रश्न के उत्तर में उन्हें कितने अंक दिये गये. अगर किसी प्रश्न के उत्तर में अंक काटे गये तो इसकी वजह भी परीक्षार्थी को पता चल जायेगा. स्टेप वाइज मार्किग  सीबीएसइ के महत्वाकांक्षी इस योजना से बोर्ड परीक्षार्थी को काफी मदद मिलेगी.
- रिजल्ट निकलने के साथ मिलेगा आंसर कॉपी
सीबीएसइ की बोर्ड परीक्षा मार्च के प्रथम सप्ताह में शुरू हो रही है. मई के सेकेण्ड वीक में रिजल्ट निकलेगा. सीबीएसइ सूत्रों के मुताबिक रिजल्ट निकलने के सप्ताह भर के अंदर ही तमाम परीक्षार्थी को इ-मेल पर उनके आंसर कॉपी को भेज दिया जायेगा. इससे परीक्षार्थी आंसर कॉपी देख ही बोर्ड के पास चैलेंज कर पायेंगे. अभी तक कई बार परीक्षार्थी मार्क्‍स कम आने पर बोर्ड के पास चैलेंज कर देते हैं. ऐसे में कई बार ना तो अंक बढ़ते है और चैलेंज करने में फी के पैसे भी लग जाते है. अगर परीक्षार्थी अपना आंसर कॉपी पहले देख लेगे तो उन्हें पता चल जायेगा कि उनके मार्क्‍स किसी भी विषय में कम क्यूं आयें. सीबीएसइ के अनुसार अब वहीं परीक्षार्थी चैलेंज कर पायेंगे जिनके आंसर कॉपी जांच में किसी तरह की गड़बड़ी हो गयी होगी. ऐसे में परीक्षार्थी को न्याय मिलने की उम्मीद अधिक होगी.
- एलओसी वाले स्टूडेंट्स ही होंगे शामिल
सीबीएसइ ने 2014 अप्रैल से एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) की शुरुआत की थी. इसके तहत 9वीं से 12वीं तक के तमाम स्टूडेंट्स को अपना सारा डिटेल्स (मोबाइल नंबर, इ-मेल आइडी, लोकेशन आदि) देना था. सीबीएसइ बोर्ड से भी जो भी स्टूडेंट्स एक बार रजिस्टर हो जाते है, वो सारे के सारे एलओसी के तहत आ जाते है. इस योजना का कई जगहों पर विरोध भी हुआ था. अब जिस स्कूल ने एलओसी संबंधी जानकारी देने में कमी की होगी, तो उस स्कूल के परीक्षार्थी को आंसर कॉपी नहीं मिल पायेगा. क्योंकि बोर्ड उन्हें ही आंसर कॉपी उपलब्ध करवायेगा जिस स्टूडेंट्स के बारे में बोर्ड के पास पूरी जानकारी होगी.
- 30 जून तक सारे रिजल्ट करना है क्लियर
सीबीएसइ की अब तक  15 अगस्त तक सारे रिजल्ट को क्लियर करता आया हैं. लेकिन 2015 सत्र में 30 जून तक सारे रिजल्ट (कंपार्टमेंटल सहित) को सीबीएसइ को क्लियर कर लेना है. इस कारण इस बा चैलेंज करने की तिथि और कंपार्टमेंटल की परीक्षा जून में ही लिया जायेगा. सीबीएसइ के अनुसार 30 जून तक इस बार कंपार्टमेंटल परीक्षा का रिजल्ट भी निकाल दिया जायेगा. चैलेंज करने में परीक्षार्थी को अधिक समय बर्बाद ना हो इसके लिए इ-मेल पर आंसर सीट भेजा जायेगा. आंसर सीट देखकर परीक्षार्थी तुरंत चैलेंज कर सकेंगे और सप्ताह भर में उन्हें रिजल्ट भी दे दिया जायेगा.

कोट
एलओसी होने से बोर्ड के पास सारे स्टूडेंट्स की पूरी डाटा हो गयी है. ऐसे में किसी भी तरह की फरजी काम नहीं हो पायेगा. बोर्ड जब चाहे किसी भी स्टूडेंटस से संपर्क कर सकता है. ऐसे में स्टूडेंट्स बोर्ड से सीधे जुड़ जायेंगे.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ

24 feb. 2015 on prabhat khabar patna 

क्वेशचन समझ में नहीं आयें तो करें कंप्लेन

क्वेशचन समझ में नहीं आयें तो करें कंप्लेन

- सीबीएसइ ने पहली बार स्कूलों में परीक्षा के दौरान बनाया ऑबजर्वेशन शेड्यूल सिस्टम
- 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा करा सकते है शिकायत दर्ज
संवाददाता, पटना
पेंपर लेंदी हैं. क्वेशचन समझ में नहीं आ रहा है. क्वेशचन पेपर में मिस प्रिंट हैं या फिर सवाल गलत हैं. एग्जामिनेशन हॉल में अगर ऐसी कोई भी प्रॉब्लम है, इसे तुरंत सॉल्व कर दिया जायेगा.  बस इसके लिए परीक्षा हॉल में टीचर्स से संपर्क करना होगा. पहली बार सीबीएसइ की ओर से 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा के लिए एक ऑब्जर्वेशन श्ेाड्यूल सिस्टम बनाया गया हैं. इसके तहत स्टूडेंट्स अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है. सीबीएसइ की माने तो बोर्ड परीक्षा के दौरान परीक्षार्थी अपने क्वेशचन पेपर के संबंध में शिकायत दर्ज करवा सकेंगे. इस कंप्लेन को सीबीएसइ के पास भेजा जायेगा. कंप्लेन के दौरान टीचर स्टूडेंट्स के नाम, कॉट्रैक्ट नंबर, कॉपी नंबर, क्वेश्चन नंबर, विषय आदि को दर्ज करेगा.
कंप्लेन होगी रिकार्ड
टीचर द्वारा लिये गये कंप्लेन को सीधे बोर्ड के पास भेजा जायेगा. सीबीएसइ के अनुसार यह शेड्यूल हर स्कूलों के प्रिंसिपल को दिया गया है. प्रिंसिपल उस शेड्यूल को बोर्ड के पास ऑन लाइन भेजेगें. किसी परीक्षार्थी को अगर एग्जाम देते समय क्वेशचन पेपर में किसी तरह की प्रॉब्लम हो तो उसे तुरंत कंप्लेन करना होगा. परीक्षा शुरू होने के बाद किया गया कंप्लेन एक्सेप्ट नहीं होगा. इस संबंध में सीबीएसइ सिटी को ऑडिनेटर राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि कभी-कभी प्रिंटिंग के कारण क्वेशचन पेपर में मिस प्रिंट हो जाता है. अगर किसी स्टूडेट्स को ऐसा क्वेशचन मिलता है. तो उन्हें आंसर करने में प्रॉब्लम होती हो तो ऐसे में उन्हें यह सुविधा दी गयी है. इसमें कंप्लेन को रिकार्ड करने के बाद उस कॉपी को रिवैल्यूएशन के टाइम देखा जायेगा. अगर स्टूडेंट्स की शिकायत सही निकली तो स्टूडेट्स को मार्क्‍स भी मिल सकते है.
- हर जोन से शिकायत को देखा जायेगा
सीबीएसइ के अनुसार यह ऑबजर्वेशन सिस्टम देश भर में लागू किया गया है. इसके तहत जो भी शिकायत आयेगी उसे रिकार्ड के तौर पर रखा जायेगा. हर विषय के लिए आबजर्वेशन शेड्यूल सिस्टम बनाया गया है. सारे पेपर की परीक्षाएं हो जाने के बाद बोर्ड सारे कंप्लेन को उस इवैल्यूएशन सेंटर पर भेजेगा जहां पर कॉपी की जांच होगी. परीक्षार्थी के शिकायत की जांच होगी. अगर कंप्लेन में दी गयी बातें उत्तर पुस्तिका में सही दिखी तो परीक्षार्थी को उस विषय में उस प्रश्न के हिसाब से मार्क्‍स भी मिल सकते हैं.
चेयरमैन के साथ करें चैटिंग
सीबीएसइ के चेयरमैन अभी निश्चित नहीं होने के कारण ऑन लाइन चैटिंग करना संभव नहीं हो पायेगा. इस कारण इस ाबर ऑन लाइन चैटिंग एकेडेमिक हेड और एग्जामिनेशन कंट्रोलर से ही की जा सकेगी. अभी तक सीबीएसइ के पूर्व चेयरमैन परीक्षा के दौरान ऑन लाइन चैटिंग परीक्षार्थी से करते रहे है. लेकिन इस बार एकेडेमिक, रिसर्च, ट्रेनिंग इनोवेशन और कंट्रोल ऑफ एग्जामिनेशन के डायरेक्टर के साथ भी चैटिंग कर सकते है. इसके लिए इस इ-मेल आइडी 2ंँिंल्लंस्र.ूु2ील्ल्रू.्रल्ल,  ेू2ँं1ें20071ी्िराों्र’.ूे पर संपर्क किया जा सकता है.

कोट
परीक्षा संबंधी कई बार शिकायत हमारे पास परीक्षा बाद आती है. कई बार क्वेशचन पेपर में मिस प्रिंट, प्रश्न समझने में दिक्कतें आदि होती है. ऐसे में परीक्षार्थी आता हुआ प्रश्न का उत्तर नहीं लिख पाते है. इस कारण हर परीक्षा केंद्र पर एक ऑबजर्वेशन शेड्यूल सिस्टम बनाया जायेगा. इससे परीक्षार्थी को शिकायत दर्ज करवाने का मौका मिलेगा. इवैल्यूएशन के समय शिकातय को दर्ज किया जायेगा.
रमा शर्मा, मीडिया को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ


टीचर्स के सीधे संपर्क में रहेगा सीबीएसइ

- स्कूलों से मांगी गयी टीचर्स की जानकारी
- हर स्कूलों का टीचर्स का डाटा तैयार करेगा सीबीएसइ
संवाददाता, पटना
स्टूडेंट्स का एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) तैयार करने के बाद अब टीचर्स की जानकारी ली जायेगी. इसकी शुरुआत कर दी गयी है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से नये सेशन से टीचर्स की डाटा बेस तैयार किया जा रहा है. इसमें सीबीएसइ स्कूलों के तमाम टीचर्स को शामिल किया जायेगा. इसकी सूचना भी स्कूलों को दिया जा रहा है. इसका एक फार्मेट बोर्ड ने स्कूलों को भेजा है और दूसरा फार्मेट सीबीएसइ के वेबसाइट पर डाला गया है. टीचर्स चाहे तो इसे स्कूल की ओर से व्यक्तिगत रूप से भी भर कर सीबीएसइ के पास भेज सकते है. नये सेशन के शुरू होने से पहले सीबीएसइ टीचर्स को पूरा डाटा बेस तैयार कर लेगा. इस डाटा बेस से बोर्ड के पास उन तमाम टीचर्स की जानकारी होगी जो स्कूल में पढ़ा रहें होंगे.
- नहीं चलेगा फर्जीगीरी
 डाटा बेस में शुरुआती दौर में सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी लेवल के क्लास के टीचर्स को शामिल किया जा रहा है. इसके बाद इसमें प्रायमरी लेवल के टीचर्स को शामिल किया जायेगा. सीबीएसइ के पास टीचर्स का डाटा बेस तैयार होने से उन स्कूलों की मुश्किलें बढ़ जायेगी जो फर्जी टीचर्स का लिस्ट सीबीएसइ के पास दिखाते हैं. ऐसे में तमाम टीचर्स सीबीएसइ की नजर पर रहेंगे. अगर कोई टीचर स्कूल चेंज करता है तो इसकी भी जानकारी स्कूल को सीबीएसइ के पास देना होगा. रेंडमली जांच में टीचर्स की संख्या और नाम आदि की भी जांच की जायेगी.

इन विषयों के टीचर्स का लिस्ट हो रहा तैयार
इंगलिश, हिंदी, मैथेमेटिक्स, साइंस, सोशल साइंस, फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, इकोनॉमिक्स, जोगरफी, पोलिटिकल साइंस, हिस्ट्री, एकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडीज, साइकोलॉजी, कंप्यूटर साइंस

इन चीजों की देनी होगी जानकारी
- टीचर का नाम
- टीचर की उम्र
- टीचर महिला हैं या पुरूष
- स्कूल मे सेकेंडरी या सीनियर सेकेंडरी लेवल के टीचर हैं
- कांटैक्ट नंबर के साथ स्कूल का नाम और पूरा एड्रेंस
- इ-मेल आइडी और मोबाइल नंबर
- क्वालिफिकेशन (बोर्ड का नाम जहां से पास हो, यूनिविर्सिटी की जानकारी)
- टिचिंग एक्सपेरियेंस
- रिसर्च वर्क या कोई आर्टिकल पब्लिश हुई हो, कोई बुक या जर्नल निकाला हो
- हाल में किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल हुए हो
- कोई अवार्ड मिला हो

24 feb. 2015 on prabhat khabar patna 


Sunday, February 22, 2015

आधार नंबर से होगा, तभी जमा होंगे केंद्रीय विद्यालय में फी

आधार नंबर से होगा, तभी जमा होंगे केंद्रीय विद्यालय में फी

- केंद्रीय विद्यालय संगठन ने दिया तमाम केंद्रीय विद्यालय को निर्देश
- फी कलेक्शन के ऑन लाइन प्रक्रिया में स्टूडेंट्स की कई चीजों की मांगी गयी जानकारी
संवाददाता, पटना
केंद्रीय विद्यालय में हाल में ऑन लाइन फ्री कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू हुई है. अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार ऑन लाइन ही फी स्कूलों में जमा कर सकते है. लेकिन अब इसके लिए अभिभावक को स्टूडेंट्स का आधार यूनिक आइडेंटिटी नंबर (यूआइडी) स्कूल को उपलब्ध करवाना होगा. हाल में हुई केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के बोर्ड ऑफ गवर्नर की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया है. बोर्ड ऑॅफ गवर्नेस की बैठक में यह कहा गया है कि हर केंद्रीय विद्यालय को इसका अनुपालन जल्द से जल्द करके देना है. इसके लिए केवीएस की ओर से एक फार्मेट तैयार किया गया है. इसे क्रिसमस की छुट्टी के बाद स्कूलों को भरना होगा.  हर केवी प्रशासन को उस फार्मेट को भर कर बोर्ड बॉफ गवर्नेस को डायरेक्ट उपलब्ध करवानी है. पूरी प्रक्रिया होने के बाद केंद्रीय विद्यालय के तमाम स्टूडेंट्स के फी कलेक्शन आधार नंबर पर ही किया जायेगा. जिन स्टूडेंट्स के पास आधार नंबर नहीं होगा उन्हें ऑन लाइन फी जमा करने में प्राब्लम हो सकती है. केवीएस ने स्कूलों से स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया को एक महीने के अंदर पूरी कर लेनी है. हर बच्चे का फी कलेक्शन आधार नंबर पर ही होगा.
- जनवरी में लिया जायेगा आधार नंबर
केवीएस की ओर से तमाम केवी को निर्देश दिया गया है कि हर क्लास के स्टूडेंट्स का जल्द से जल्द आधार नंबर कलेक्ट करें. इसकी प्रक्रिया क्रिसमस की छुट्टी के बाद शुरू कर देना है. केवीएस के अनुसार जनवरी के अंतिम तक इस फार्मेट को भर कर हर केवी को केवीएस के पास भेज देना है. जनवरी में तमाम स्टूडेंट्स के आधार नंबर लेने के बाद ऑन लाइन फी कलेक्शन में यूआइडी नंबर का इस्तेमाल नये सत्र से शुरू कर दिया जायेगा. हर बच्चे से यूआइडी नंबर लेने के बाद फार्मेट भरा जायेगा. इसके लिए जल्द ही केवी के अभिभावकों को भी निर्देश दिया जायेगा.
- क्लास टीचर को तैयार करना है जानकारी
केंद्रीय विद्यालय के क्लास वन से 12ठीं तक के स्टूडेंट्स का यूआइडी तैयार करना है. केवीएस की ओर से हर स्टूडेंट्स से संबंधित 27 तरह की जानकारी मांगी गयी है. केवीएस से मिली जानकारी के अनुसार स्टूडेंट्स की जानकारी को हर क्लास के क्लास टीचर को तैयार करना है. तमाम स्टूडेंट्स का ब्लड ग्रुप भी हर टीचर से लेने को कहा गया है.

स्टूडेंट की इन जानकारी को केवीएस करेगा एकीकृत
1. स्टूडेंट का नाम  2. नामांकन की साल  3. स्टूडेंट्स के नामांकन का नंबर (हर स्टूडेंट को केवीएस की ओर एक नंबर दिया जाता है) 4. गाजिर्यन का नाम  5. स्टूडेंट्स किस क्लास और सेक्शन की जानकारी. 6. स्टूडेंट का नामांकन की केटगरी (केवीएस के किस केटेगरी के तहत नामांकित है) 7. जन्म तिथि के साथ जेंडर की जानकारी 8. स्टूडेंट एससी, एसटी, ओबीसी और जेनरल किस केटेगरी में आता है. 9. मोबाइल नंबर और इ-मेल आइडी (फी जमा होने की जानकारी एसएमएस से दी जायेगी) 10. स्टूडेंट का ब्लड ग्रुप 11. स्टूडेंट आधार नंबर  12. जुड़वां बच्चे की जानकारी 13. बच्चे के आरटीइ की जानकारी देना 14. सिंगल गर्ल चाइल्ड की जानकारी


25 dec. 2015 on prabhat khabar patna 

विद्यालय हट जायेगा तो हमारी पढ़ाई रूक जायेगी

विद्यालय हट जायेगा तो हमारी पढ़ाई रूक जायेगी

- 113 साल पुराने  नारायणी कन्या विद्यालय की 350वीं गुरू पर्व को लेकर शिफ्ट करने की चल रही बात
- स्कूल दूर चले जाने से सैकड़ों छात्रएं की बंद हो जायेगी पढ़ाई
संवाददाता, पटना
केस वन - सलोनी शर्मा नारायणी कन्या मध्य विद्यालय में क्लास तीसरी की छात्र है. दोनों पांव से विकलांग (पोलियो ग्रस्त) सलोनी को उसके पिता रीतेश शर्मा हर दिन गोदी में उठा कर विद्यालय ले जाते है. इसमें उन्हें 10 से 15 मिनट का समय लगता है. अब जब विद्यालय के दूसरे जगह पर जाने की बात हो रही है तो रीतेश शर्मा को सबसे दुख इस बात का है कि वो अपनी बेटी को आगे नहीं पढ़ा पायेंगे. क्योंकि आस पास कोई विद्यालय नहीं होने से वो सलोनी को शिक्षा नहीं दिलवा पायेंगे. डाक्टर बनने की इच्छा रख रही सलोनी को जब कोई विद्यालय के हट जाने की बात कहता है तो वो उदास हो जाती है.
केस टू  -  नीता कुमारी नारायणी कन्या उच्च विद्यालय में 10वीं क्लास में पढ़ती है. एक साल पहले उसकी शादी कर दी गयी थी. लेकिन पढ़ने की तीव्र इच्छा के कारण नीता दुबारा मायके आ गयी. ससुराल के विरोध क बावजूद वो मायके में रह कर शिक्षा पूरी कर रही है. टीचर बनने की इच्छा लिये नीता ने बताया कि अगर नारायणी कन्या उच्च विद्यालय दूसरी जगह पर चला जायेगा तो उसकी पढ़ायी छूूट जायेगी. क्योंकि अभी विद्यालय पास में है तो मां बाप का सहयोग मिलता है. लेकिन दूर होने पर उसकी पढ़ाई बीच में ही रूक जायेगी.
यह हाल विकलांग सलोनी और नीता जैसी केवल एक दो छात्रओं का ही नहीं है, बल्कि सैकड़ों छात्रएं ऐसी है जिसका पढ़ाई बीच में रूक जायेगी अगर नारायणी कन्या मध्य और उच्च विद्यालय को कचौड़ी गली से हटा कर दूसरे जगहों पर ले जाया जायेगा. पटना सिटी स्थिति गुरूद्वारे के बगल में कचौड़ी गली में मौजूद इस विद्यालय में 5 हजार के लगभग लड़कियां शिक्षा ले रही है. अभी 2017 में गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती समारोह को लेकर विद्यालय के यहां से शिफ्ट होने की बात की जा रही है. विद्यालय समिति के भोला पासवान ने बताया कि गुरु पर्व को लेकर तैयारी चल रही है. चुकी यह विद्यालय गुरुद्वारा के बगल में है . इससे गुरुद्वारा प्रबंध समिति इस विद्यालय के जमीन पर धर्मशाला बनाना चाहती है. इस स्कूल को मालसलामी में शिफ्ट करने की बात कहीं जा रही है.
- 113 साल पुराना है यह विद्यालय
10 कट्ठा में बना यह विद्यालय वर्तमान में आस पास के लगभग 5 से 6 लाख लोगों से जुड़ा है. नारायणी कन्या मध्य विद्यालय की स्थापना 1899 में हुआ वहीं 1938 में नारायणी कन्या उच्च विद्यालय की स्थापना की गयी. एक ही परिसर में चल रहे इस विद्यालय को जमीन दान स्वरूप मिला था. पटना सिटी की रहने वाली राजकुंवर देवी ने लड़कियों की शिक्षा के लिए एक विद्यालय हो, इसको लेकर अपनी जमीन दान स्वरूप दिया था. स्कूल के आस पास के चार किमी तक में कोई भी कन्या विद्यालय नहीं है. पटना सिटी की पहली गल्र्स स्कूल में विख्यात नारायणी कन्या विद्यालय में नामांकन लेना अपने आप में बड़ी बात है. स्कूल का माहौल, पास में चौक थाना, हास्पीटल की उपलब्धता के कारण आस पास के लोग दूसरी जगह पर बेटी का नामांकन नहीं करवा कर इसी विद्यालय में नामांकन करवाते है.
- 18 सौ से 5 हजार हो गयी छात्रएं
शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इस विद्यालय के प्राचार्य के साथ तमाम शिक्षक भी लोगों को जागरूक करते है. लड़कियों का पढ़ाने और स्कूल भेजने को लेकर लोगों से बात करते है. पिछले दस सालों से विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत अशोक कुमार ने बताया कि पिछले कई सालों में यहां पर लड़कियों की संख्या काफी बढ़ी है. दस साल पहले जहां 18 सौ लड़कियां ही इस विद्यालय में पढ़ती थी. वहीं दस सालों के बाद वर्तमान में 5 हजार से अधिक छात्रएं यहां पर शिक्षा ग्रहण कर रही है. वहीं शिक्षक ललित किशोर ने बताया कि पिछले एक साल से विद्यालय के बिजली कनेक्शन को काट दिया गया है. क्योंकि 2007 से बिजली बिल बकाया है. कई क्लास रूम में काफी अंधेरा रहता है. इसके बावजूद हर साल सैकड़ों लड़कियों यहां पर नामांकन लेती है.
- मुख्यमंत्री को किया गया है फैक्स
एक तरफ जहां विद्यालय प्रशासन विद्यालय के जाने और रहने को लेकर कंफ्यूज्ड है. वहीं इसको लेकर तमाम जानकारी भी जुटाये जाने लगे है. नारायणी कन्या मध्य विद्यालय की छात्रओं ने कुछ दिनों पहले मशाल जुलूस निकाला, वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कपूर ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांग डाली है. पटना जिला सुधार समिति के सचिव राकेश कपूर ने बताया कि 28 नवंबर को मुख्यमंत्री को फैक्स किया है. इसमें इस विद्यालय के हट जाने से सैकड़ों लड़कियों की पढ़ाई कैसे रूक जायेगी, इसकी जानकारी दी गयी है. इसके अलावा पर्यटन मंत्री और नगर विकास मंत्री को भी फैक्स पर इसकी जानकारी दी गयी है.
- जनवरी के पहले सप्ताह से धरने पर बैठेंगे लोग
मुख्यमंत्री को सूचना देने के बाद अब लोग धरने पर बैठने की तैयारी कर रहे है. छात्रएं, अभिभावक और आस पास के लोग गुरु पर्व के बाद जनवरी के प्रथम सप्ताह में विद्यालय को हटाये जाने के विरोध मे धरने पर बैठने की तैयारी कर रहे है. सामाजिक कार्यकर्ता वैजनाथ प्रसाद गुप्ता ने बताया कि हमने कई बैठक की है. हर साल गुरुपर्व को लेकर विद्यालय को बंद कर दिया जाता है. डीएम के आदेश पर गुरु पर्व में शामिल होने आये हजारों लोग स्कूल परिसर में रूकते है. एक सप्ताह के लिए गुरुद्वारे को विद्यालय परिसर दे दिया जाता है. हम लोग सहयोग करते है. लेकिन अब विद्यालय को हटाने की बात हो रही है. ऐसे में सैकड़ों लड़कियां पढ़ नहीं पायेगी. आस पास कोई और विद्यालय नहीं है. ऐसे में हम लोग अब धरने पर बैठेंगे जब तक हमें यह आश्वासन नहीं मिल जाता कि यह विद्यालय यहीं पर रहेगा.

कोट
मै इस विद्यालय में 1998 से टीचर के रूप में कार्यरत हूं. यहां पर जो लड़की क्लास वन में नामांकन लेती है वो 12वीं तक पढ़ाई करती हैं. ऐसे में एक परिवार की तरह शिक्षक और छात्रओं का संबंध बन जाता है. काफी संख्या में ऐसी छात्रएं हैं जो काफी गरीब है और वो दूर जाकर पढ़ाई नही कर पायेंगी. ऐसे में इस विद्यालय के यहां से हटाये जाने से सैकड़ों छात्रओं की पढ़ाई बीच में ही रूक जायेगी. हर साल गुरू पर्व को लेकर हम स्कूल बंद करते है. इस बार भी 26 से 1 जनवरी तक स्कूल बंद रहेगा.
कुमारी माया, प्राचार्य, नारायणी कन्या उच्च विद्यालय

2017 में गुरु गोविंद सिंह जी ही 350वीं जयंती को लेकर तैयारी अभी शुरू कर दिया गया है. आस पास के एरिया में होटल और धर्मशालाएं बनायी जायेगी. हम कई स्कूल को शिफ्ट करने की सोच रहे है. नारायणी कन्या विद्यालय को सरकार खुद शिफ्ट करने की सोच रही है. इसका एक प्रपोजल भी सरकार की ओर से हमारे पास आया है.
चरणजीत सिंह, जेनरल सेक्रेटरी, तख्त श्री हरिमंदिर ही पटना साहिब

24 dec. 2015 on prabhat khabar patna 

पढ़ाई पर नजर, सुरक्षा की अनदेखी

पढ़ाई पर नजर, सुरक्षा की अनदेखी

- पटना के 90 फीसदी स्कूलों के क्लास रूम में सीसी टीवी कैमरा है लगा
- खेल के मैदान और स्कूूल के मुख्य द्वार के बारे में प्रिंसिपल को कोई जानकारी नहीं
संवाददाता, पटना
क्लास रूम में टीचर की एक्टिविटी सही चल रही है या नहीं. क्लास रूम में स्टूडेंट्स प्रॉपर वे में पढ़ाई कर रहे है या नहीं. आपस में कोई स्टूडेंट बातें तो नहीं कर रहें है. टीचर समय पर क्लास रूम में पहुंच रहे है या नहीं. इन चीजों पर नजर रखने के लिए स्कूलों ने क्लास रूम में सीसी टीवी कैमरा लगवा दिये. इससे प्रिंसिपल अपने चैंबर में बैठे ही हर क्लास की एक्टिविटी पर नजर रख लेते है. इसके अलावा प्रिंसिपल के पास स्टूडेंट्स पर नजर रखने के लिए और कोई साधन नहीं है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के निर्देश के बाद स्कूलों ने पढ़ाई पर नजर रखने के लिए क्लास रूम में तो सीसी टीवी लगवा दिये, लेकिन क्लास रूम के बाहर कहीं पर भी सीसी टीवी नहीं लगवाया. अब चाहे लंच आवर का समय हो या फिर खेल का मैदान या फिर छुट्टी के समय मुख्य द्वार पर सैकड़ों की संख्या में स्टूडेंट्स मौजूद हो.  
- क्लास रूम के अलावा बाहर भी हो सीसी टीवी
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की ओर से स्कूल परिसर के अंदर और बाहर सीसी टीवी कैमरा लगवाने को कहा गया था. स्कूल में किसी तरह की घटना ना घटे और स्टूडेंटस का सीसी टीवी कैमरे के बारे में जानकारी हो, इसके लिए बोर्ड ने सीसी टीवी कैमरा लगवाने का निर्देश दिया था. लेकिन 90 फीसदी ऐसे स्कूल है जिन्होंने क्लास रूम में तो सीसी टीवी लगवा दिये, पर दूसरे जगहों पर नहीं लगवाया. अब ऐसे में क्लास रूम के बाहर किसी तरह की बातें होती है तो स्कूल प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है.
- छुट्टी होने पर प्रिंसिपल निकलते मुख्य द्वार पर
कई स्कूलों के प्रिंसिपल स्कूल के छुट्टी और लंच आवर के समय अपने चैंबर से बाहर निकलते है. सेंट जेवियर हाई स्कूल प्रशासन की माने तो प्रिंसिपल के रूटीन में यह शामिल है. स्कूल में लंच होता है तो प्रिंसिपल फादर जैबक एक बार राउंड लगाते है. उसी तरह जब स्कूल की छुट्टी होती है तो कुछ देर के लिए फादर स्कूल के बाहर निकल कर बच्चों को सड़क क्रास आदि करने में मदद करते है. कुछ ऐसा ही हाल सेट माइकल हाई स्कूल में भी है. छुट्टी के समय प्रिंसिपल खुद बाहर मौजूद रहते है.
- छेड़खानी से बचने के लिए लगाया है सीसी टीवी
पटना के कुछ ही स्कूलों में बाहर मुख्य द्वार के पास सीसी टीवी कैमरा लगा हुआ है. गांधी मैदान स्थिति क्राइस्ट चर्च स्कूल के बाहर मेन गेट पर सीसी टीवी गेट के बाहर लगा हुआ है. स्कूल प्रशासन के अनुसार स्कूल के बाहर हमेशा काफी भीड़ जमा होती है. ऐसे कई स्कूलों ने हाल के दिनों में स्कूल के मुख्य द्वार पर सीसी टीवी कैमरा लगवाया है. लोयेला हाई स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार स्कूल के तमाम क्लास रूम के अलावा मुख्य द्वार और खेल के मैदान में भी सीसी टीवी कैमरा लगा हुआ है. ऐसे में स्कूल में कौन आता है और कौन कहां जाता है  इसकी जानकारी प्रिंसिपल को चैंबर में बैठे ही पता चल जाता है. स्कूल में हाल में हुए स्मार्ट क्लास करने के दौरान सीसी टीवी कैमरा लगाया गया है.

सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के अनुसार इन जगहों पर स्कूल प्रशासन की हो नजर
- तमाम क्लास रूम में
- लाइब्रेरी और तमाम लैब में
 - हर क्लास रूम के बाहर बरामदे या गैलरी में
 - अगर स्कूल में सीढ़ी हो तो वहां पर भी सीसी टीवी कैमरा लगा हो
- खेल के मैदान और कैंटीन में सीसी टीवी कैमरा होना चाहिए
- स्कूल के मेन गेट पर गेट के दोनों ओर सीसी टीवी लगा हो
- स्टाफ रूम में
- ऑडिटोरियम और स्टेज आदि पर

कोट
पाकिस्तान में आतंकवादी घटना के बाद एक बार बोर्ड फिर स्कूलों को सीसी टीवी कैमरा लगाने को लेकर सक्रूलर जारी करने वाली है. अभी क्रिसमस के बाद स्कूलों के पास निर्देश भेजा जायेगा. हर स्कूलों को क्लास रूम के बाहर भी कई जगहों पर सीसी टीवी कैमरा लगवाना है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ

23 dec 2015 on prabhat khabar patna 

90 फीसदी स्कूलों में सुरक्षा गार्डो का वेरिफिकेशन नहीं

90 फीसदी स्कूलों में सुरक्षा गार्डो का वेरिफिकेशन नहीं

- बिना वेरिफिकेशन के स्कूलों में है सुरक्षा गार्ड
- सीबीएसइ के अनुसार जिस थाना का स्कूल वहां पर हो सुरक्षा गार्ड का वेरिफिकेशन
संवाददाता, पटना
क्राइस्ट चर्च का सुरक्षा गार्ड मंटू पिछले तीन सालों से स्कूल में कार्यरत है. स्कूल में बच्चों के आने-जाने की देखभाल करना मंटू के जिम्मे ही है. लेकिन मंटू के बारे में पटना पुलिस के पास कोई रिकार्ड नहीं है. कुछ ऐसा ही हाल लोयेला हाई स्कूल के सुरक्षा गार्ड की है. स्कूल के मुख्य द्वार पर बंग बहादुर नाम का सुरक्षा गार्ड पिछले 20 साल से कार्यरत है. लेकिन बंग बहादुर के बारे में संबंधित थाने के पास कोई रिकार्ड नहीं है. यह हाल कोई एक दो स्कूलों का नहीं है, बल्कि तमाम स्कूलों के पास सुरक्षा गार्ड का यहीं हाल है. कई स्कूलों ने प्राइवेट तो कई स्कूलों ने एजेंसी के माध्यम से सुरक्षा गार्ड को नियुक्त कर रखा है. किस स्कूल के पास एजेंसी के माध्यम से सुरक्षा गार्ड है या फिर प्राइवेट सुरक्षा गार्ड को स्कूल ने रखा है. इसकी कोई जानकारी संबंधित थाना के पास नहीं होता है. और ना ही अभी तक एक भी स्कूल के किसी सुरक्षा गार्ड का वेरिफिकेशन ही किया जा सका है.  संबंधित थाना को यहां तक नहीं पता कि किस स्कूल के पास कितने सुरक्षा गार्ड, कितने माली, कितने चपरासी है. लेकिन अब सीबीएसइ ने स्कूलों को यह निर्देश दिया है कि वो संबंधित थाने में इसकी जानकारी उपलब्ध करवायें.
स्कूल प्रशासन के विश्वास पर नियुक्त होते है सुरक्षा गार्ड
पटना में अधिकांश स्कूलों में सुरक्षा गार्ड विश्वास पर नियुक्त किये जाते है. किसी टीचर या फिर प्राचार्य के जान पहचान वाले किसी व्यक्ति को सुरक्षा गार्ड के रूप में रख लिया जाता है. ऐसे में स्कूल यह भी नहीं देखती है कि यह सुरक्षा गार्ड ट्रेंड है भी या नहीं. एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार वहां पर प्राइवेट सुरक्षा गार्ड को रखा गया है. प्राइवेट सुरक्षा गार्ड को स्कूल के एक टीचर ने रखवाया था. क्योंकि वह सुरक्षा गार्ड को वो टीचर कई सालों से जान रहे थे. सुरक्षा गार्ड को हथियार संबंधी कितनी जानकारी है, इससे भी स्कूल अनभिज्ञ रहता है. कई स्कूल तो ऐसे है
संबंधित थाने के पास हो रिकार्ड
सीबीएसइ के अनुसार जो भी स्कूल जिस थाना क्षेत्र में आता है. उस थाना क्षेत्र में उस स्कूल के सुरक्षा गार्ड, माली, कीपर आदि का पूरा रिकार्ड होना चाहिए. सीबीएसइ ने इसके लिए कई बार स्कूलों को नोटिस भी जारी किया है. बोर्ड के अनुसार स्कूल का मुख्य द्वार और अंदर सुरक्षा गार्ड, माली, चपरासी आदि के बारे में पूरी जानकारी संबंधित थाने के पास होना चाहिए. अगर कोई स्कूल इन लोगों में किसी तरह की परिवर्तन करता है. या फिर नये सुरक्षा गार्ड को नियुक्त करता है तो ऐसे में संबंधित थाना को तुरंत जानकारी दी जायें. बोर्ड के अनुसार जब भी स्कूल सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति करें तो वो ट्रेंड सुरक्षा गार्ड होने चाहिए. क्योंकि अगर किसी तरह की घटना घटती है तो सुरक्षा गार्ड के बारे पूरी जानकारी स्कूल के पास मौजूद हो.
नहीं मिली आज तक ट्रेनिंग
स्कूल के गेट पर सुरक्षा को लेकर सुरक्षा गार्ड को रखा तो जाता है, लेकिन इन्हें कभी किसी तरह की ट्रेनिंग नहीं दी जाती है. ऐसे में भगवान भरोसे ही स्कूल कैंपस मे सुरक्षा गार्ड रहते है. जिन स्कूलों ने प्राइवेट सुरक्षा गार्ड को रखा है उन्हें तो हथियार चलाने तक नहीं आती है. एक स्कूल के मुख्य द्वार पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड ने बताया कि वो एजेंसी से स्कूल के गेट पर नियुक्त है. लेकिन अभी तक उसे बस एक बार ट्रेनिंग दी गयी थी. इसके बाद कोई ट्रेनिंग अभी तक नहीं दिया गया है. वहीं एक सुरक्षा गार्ड ने बताया कि नियुक्ति के समय एक बार ट्रेनिंग दी गयी थी. उसके बाद पिछले चार साल से कोई ट्रेनिंग नहीं दी गयी हैं.

कोट
शहर के लगभग हर थाने क्षेत्र में कोई ना कोई स्कूल आता है. स्कूल में कार्यरत सुरक्षा गार्डो के बारे में किसी भी थाना में कोई रिकार्ड नहीं है. हर स्कूल को जल्द से जल्द अपने सुरक्षा गार्ड के बारे में जानकारी संबंधित थाना को देना चाहिए. अभी तक एक भी स्कूल ने ऐसा नहीं किया है. बच्चों की सिक्यूरिटी को लेकर हम जल्द ही स्कूलों को नोटिस देने वाले है. ... जितेंद्र राणा, एसएसपी, पटना पुलिस

सीबीएसइ की ओर से कई बार सुरक्षा गार्ड को लेकर बोर्ड को सूचना देने के लिए कहा गया है. लेकिन कोई भी स्कूल ने अभी तक ऐसा नहीं किया है. सुरक्षा गार्ड के अलावा स्कूल के माली, स्वीपर, चपरासी आदि की भी जानकारी बोर्ड के पास स्कूलों के पास उपलब्ध करवाना है. ... सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

22 dec 2015 on prabhat khabar patna 

सीटें देखें, फिर ले 11वीं में नामांकन

सीटें देखें, फिर ले 11वीं में नामांकन

- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 2015 के नामांकन सीटों की लिस्ट की जारी
- निर्धारित सीट से अधिक का नामांकन लेने पर रिजेक्ट हो जायेंगे छात्र
संवाददाता, पटना
जितनी सीटें निर्धारित हो, उतने ही सीटों पर नामांकन लिया जाये. नये सत्र के शुरू होने में अभी कई महीने बचे है. लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने अभी से स्कूलों और कॉलेजों को सीटों की संबंधता की जानकारी देनी शुरू कर दी है. जहां इंटर काउंसिल की ओर से सीटों की जानकारी कॉलेजों और स्कूलों को भेजा जा रहा है. वहीं समिति ने अपने वेबसाइट पर भी पूरी लिस्ट जारी कर दिया है. लिस्ट में कॉलेज और स्कूल के कोड के साथ सीटों की जानकारी दी गयी है. किस कॉलेज में किस संकाय को मान्यता दी गयी है और किस संकाय के लिए कितना नामांकन लेना है, इसकी भी जानकारी बोर्ड ने जारी किया है. समिति के सूत्रों के मुताबिक 11वीं का रजिस्ट्रेशन और 12वीं के परीक्षा फार्म भराये जाने के समय इसी लिस्ट के अनुसार सारी प्रक्रिया पूरी की जायेगी.
- छंट जायेंगे छात्र
इस लिस्ट के देखे बगैर या लिस्ट में निर्धारित सीटों से अधिक अगर किसी कॉलेज या स्कूल में छात्रों का नामांकन लिया जायेगा तो उन छात्रों को रजिस्ट्रेशन नहीं हो पायेगा. जिस कॉलेज या स्कूल के पास जितने सीटों के लिए संबंधता की गयी है, उतने ही सीटों पर नामांकन लिया जायेगा. इससे अधिक सीटों पर नामांकन लेने से बांकी बचे हुए सीटों को बिहार बोर्ड मान्यता नहीं देगी. ऐसे में उन छात्रों का नामांकन रदद हो जायेगा जो निर्धारित सीटों के अतिरिक्त नामांकन लिस्ट में शामिल होंगे. समिति ने इसकी सूचना अभी से स्कूलों और कॉलेजों को दे दिया है.
- कॉमर्स की पढ़ाई महाविद्यालयों में ही
इंटर काउंसिल की जांच में मूलभूत आधार की कमी होने के कारण इस सत्र के लिए भी प्लस टू स्कूलों को कॉमर्स संकाय के लिए मान्यता नही दी गयी है. अगर हम बात पटना जिला का ही करें तो पटना जिला में प्लस टू स्कूलों की संख्या 138 है. लेकिन इसमें एक भी स्कूल को कॉमर्स संकाय के लिए मान्यता नहीं दी गयी है. समिति सूत्रों के मुताबिक कॉमर्स की पढ़ाई के लिए इंन्फ्रास्ट्रर की कमी है. ना तो शिक्षक उपलब्ध है और ना ही स्कूलों में वो सुविधा ही मौजूद है जिससे कॉमर्स की पढ़ाई स्कूल लेवल पर किया जा सके.
- 20 कॉलेजों में कॉमर्स की पढ़ाई
पटना जिला में 38 कॉलेज है जहां पर प्लस टू की पढ़ाई होती है. इसमें प्रस्वीकृत महाविद्यालय से लेकर डिग्री कॉलेज और अनुशंसित कॉलेज शामिल है. इसमें मात्र 20 कॉलेजों को कॉमर्स संकाय के लिए मान्यता दी गयी है. समिति के अनुसार आर्ट्स की पढ़ाई की मान्यता तो अधिकांश को दिया गया है. लेकिन साइंस में भी आधार भूत संरचना के अनुसार ही सीटों की संबंधता दी गयी है. सुबोध कुमार मेमोरियल महिला महाविद्यालय पुनपुन को साइंस संकाय के लिए 120 सीटों की ही मान्यता दी गयी है. इसके अलावा मो. उस्मान जकारिया कॉलेज साई, मसौढ़ी को साइंस के लिए 128 सीटों की मान्यता दी गयी है. पटना जिला के 12 डिग्री कॉलेजों में छह कॉलेजों में कॉमर्स की मान्यता नहीं दी गयी है.
- सीमित अवधि के लिए मिली है मान्यता
पटना जिला के जो भी डिग्री महाविद्यालय है. उन्हें सीटों की मान्यता सीमित अवधि के लिए दिया गया है. 12 डिग्री महाविद्यालय है. इसमें साइंस और आर्ट्स के लिए 384 सभी महाविद्यालय को मान्यता दी गयी है. वहीं छह महाविद्यालय को 384 सीट कॉमर्स संकाय के लिए मान्यता दी गयी है. लेकिन यह मान्यता राज्य सरकार से सीमित अवधि के लिए दिया गया है. अवधि समाप्त होने के बाद इन्हें दुबारा इन सीटों के लिए मान्यता लेनी होगी.
- महंत हनुमान शरण महाविद्यालय में होगी कॉमर्स की पढ़ाई
बिहार बोर्ड ने महंत हनुमान शरण महाविद्यालय को कॉमर्स संकाय के लिए स्वीकृति दे दी है. महंत हनुमान शरण कॉलेज में 120 सीटों पर कॉमर्स संकाय में छात्र नामांकन ले सकते है. इसके अलावा साइंस और आर्ट्स के लिए 384-384 सीटें निर्धारित की गयी है.

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा प्रस्वीकृत सीटों जानकारी
जिला - पटना
1. प्रस्वीकृत महाविद्यालय  -  19
सीटों की अधिकतम संख्या - 384 सीटें (कुछ कॉलेजों को 128 और 120 सीटें भी दी गयी है)

2. डिग्री महाविद्यलय -  12
सीटों की अधिकतम संख्या  -  384 सीटें

3. अनुशंसित महाविद्यालय  -  7
सीटों की अधिकतम संख्या  -  384 (सात में तीन कॉलेजों को कॉमर्स की संबंधता नहीं मिली है)

4. प्लस टू विद्यालय  - 31
सीटों की अधिकतम संख्या  - 256 (एक भी विद्यालय को कॉमर्स की संबंधता नहीं मिली है)

5. प्लस टू उत्क्रमित विद्यालय  -  138
सीटों की अधिकतम संख्या   - 120 (एक भी विद्यालय को कॉमर्स की संबंधता नहीं मिली है)

कोट
इस बार से तमाम महाविद्यालय और विद्यालय में इंटर के सीटों के लिए संकाय वार निर्धारण कर दिया गया है. जो सीटें निर्धारित की गयी है. उसी सीटों के अंतर्गत नामांकन लेना है. इस सीटों के आधार पर रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म भराने की प्रक्रिया की जायेगी. समिति की ओर से अभी ही तमाम महाविद्यालय और विद्यालय को सूची भेज दिया गया है. हर विषय में समिति द्वारा निर्धारित सीटों पर ही नामांकन लेना चाहिए. नहीं तो ऐसे छात्र बाद में छंट जायेगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

20 dec. 2015 on prabhat khabar patna 

नये सेशन से लंच आवर एक घंटे का

नये सेशन से लंच आवर एक घंटे का

- अभिभावकों की शिकायत पर सीबीएसइ लंच आवर बढ़ाने की कर रहा तैयारी
- 20 मिनट के लंच आवर में बच्चे नहीं कर पाते है पूरा लंच
संवाददाता, पटना
नये सेशन की तैयारी अभी से स्कूलों के साथ संबंधित बोर्ड ने करनी शुरू दी है. नये कोर्स और नये सिलेबस को लेकर तैयारी जोरो पर है. इसके अलावा नये सेशन से कुछ ऐसे नियम भी बनाने की तैयारी चल रही है जिसकी ओर पिछले एक साल में अभिभावक ने ध्यान आकृष्ट करवाया है. ऐसी ही एक तैयारी सीबीएसइ 2015 सेशन से करने जा रहा है. अभिभावकों के शिकायत और रिक्वेस्ट पर सीबीएसइ स्कूलों में 45 मिनट से 1 घंटे तक का लंच आवर करने का निर्णय लिया गया है. सीबीएसइ की हाल में हुई एकेडेमिक कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया है. इस संबंध में जल्द ही स्कूलों को सूचना भेजी जायेगी. बोर्ड सूत्रों के मुताबिक लंच आवर बढ़ाने में बोर्ड का फोकस 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स अधिक है. बोर्ड के अनुसार अधिक देर तक पेट खाली रहने से गैस आदि की बीमारी होने से हेल्थ पर इसका बुरा असर पड़ता है.
- दो पीरियड के बाद होगा लंच आवर
सीबीएसइ के गाइड लाइन के अनुसार हर स्कूल में दो पीरियड पढ़ाई के बाद लंच का समय रखा जायेगा. इससे स्टूडेंट्स लंबे समय तक भूखे नहीं रह पायेंगे और उनकी एनर्जी बनी रहेगी. सीबीएसइ के अनुसार लंच समय पर होने से स्टूडेंट्स में आलसीपन, नींद, सुस्ती आदि जैसी प्राब्लम नहीं होगी. इससे भूख भी लगेगी. गैस आदि प्राब्लम से भी बच्चे बचेंगे. बोर्ड ने कहा है कि छोटे क्लास (1 से 5वीं तक) के लिए 15-15 मिनट का दो बार लंच ब्रेक रखा जायें. वहीं क्लास 6ठीं से 12वीं तक के लिए 45 से 1 घंटे का लंच हो.
- सुबह 5 बजे से 2 बजे से भूखे रहते है स्टूडेंट्स
सीबीएसइ ने हाल में एक हेल्थ सर्वे किया है. इसमें पता चला कि 70 फीसदी स्कूली बच्चे गैस, बदहजमी आदि बीमारी से ग्रसित है. इसमें ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या अधिक है जो 9वीं से 12वीं क्लास में पढ़ते है. सर्वे रिपोर्ट से जानकारी मिली कि इसकी सबसे बड़ी वजह कई घंटों तक लगातार भूखे रहने के कारण होता है. काफी संख्या में स्टूडेंट्स ऐसे हैें कि वो स्कूल भूखे ही आते है. ऐसे में स्कूल में लंच आवर कम समय का होने से स्टूडेंट्स लंच पूरा नहीं कर पाते और इससे लंबा गैप उनके कुछ खाने को लेकर हो जाता है. ऐसे में पूरा 8 घंटे स्टूडेंट्स भूखे रह जाते है. हर दिन लगातार भूखे रहने से गैस आदि की समस्या स्टूडेंट्स में आम होती जा रही है.

सीबीएसइ ने स्कूलों के पास भेजा निर्देश
- हर क्लास के लिए 45 से 1 घंटे का लंच आवर हो
- छोटे या बड़े दोनों की क्लास के स्टूडेंट्स के लंच के समय टीचर की उपस्थिति हो
- लंच शुरू करने और लंच समाप्त करने के लिए अलग से वेल बजाया जायें
- जाड़े में 45 मिनट और गर्मी में 1 घंटे का लंच ब्रेक हो
- 9वीं से 12वीं के स्टूडेंट्स के लंच पर टीचर्स विशेष ध्यान दे
- लंच हमेशा थोड़ा हेवी हो
- लंच समाप्त करें स्टूडेंटस, इसे हर दिन टीचर खुद चेक करें

अभिभावकों ने ये की थी शिकायत
- लंच आवर कम होने से बच्चे पूरा लंच नहीं कर पाते है
- लंच का आधा हिस्सा छुटटी बाद ऑटो या बस में करते है
- 15 से 20 मिनट के लंच आवर को बढ़ाया जायें
- लंच आवर होने और लंच बॉक्स खोलने में ही समय निकल जाता है
- गर्मी में लंच आवर को थोड़ा जल्दी रखा जायें
- लंच आवर के लिए एक फिक्स जगह हो. इससे बच्चे एक दूसरे को देख कर भी अपना लंच कर सके
- लंच हमेशा टीचर्स के सामने करवाया जायें

कोट
लंच में स्टूडेंट्स खेलने कूदने पर अधिक ध्यान देते है. ऐसे में लंच आवर निकल जाता है. टीचर को इस पर फोकस करना चाहिए. सीबीएसइ ने लंच को लेकर जो नियम बनाये जा रहे हैं. वो काफी सराहनीय है. इसे हर स्कूल को लागू करना चाहिए.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

17 dec. 2015 on prabhat khabar patna 

स्कूल को टॉपर बनने के लिए चाहिए 518 मार्क्‍स

स्कूल को टॉपर बनने के लिए चाहिए 518 मार्क्‍स

- सीबीएसइ के तीन दिनों के वर्कशॉप में निकल कर आयी बातें
- स्टूडेंट की तरह अब स्कूल को भी देना होगा परीक्षा
संवाददाता, पटना
अभी तक स्टूडेंट्स का ही टॉपर लिस्ट बनता था. लेकिन अब इस केटेगरी में स्कूलों को भी शामिल किया जायेगा. स्टूडेंट्स को टॉपर बनने के लिए मैट्रिक में एक साल और प्लस टू में दो सालों का समय दिया जाता है. लेकिन स्कूल को टॉपर बनने के लिए पांच साल का समय दिया जायेगा. अब यह स्कूल पर निर्भर करता है कि वो टॉपर बनने के लिए कितना अंक प्राप्त करते है. क्योंकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से इसके लिए 518 अंक रखा गया है. बोर्ड द्वारा लिये गये टेस्ट में जो स्कूल 518 अंक प्राप्त करेगा वो टॉपर लिस्ट में शामिल होगा. इतना ही नहीं उस स्कूल को देश भर के स्कूलों के लिए मॉडल स्कूल के रूप में पायलेट स्कूल के रूप में सीबीएसइ शामिल करेगी. ये तमाम जानकारी सीबीएसइ की ओर से आयोजित एक वर्कशॉप के दौरान स्कूलों के प्रिंसिपल को दिया जा रहा था. तीन दिनों तक चले इस वर्कशॉप का आयोजन होटल विंडसर में चला. इस मौके पर सीबीएसइ की ओर से रिसोर्स पर्सन रूचिरा मुखर्जी मौजूद थीं.
- पांच सालों का दिया जायेगा समय
इस वर्कशॉप में 34 स्कूलों के प्रिंसिपल शामिल हुए. वर्कशॉप के बारे में पटना सीबीएसइ सिटी को-ऑडिनेटर राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि अब हर स्कूलों को सीबीएसइ का एक्रेडेशन लेना होगा. इसके लिए बोर्ड में स्कूल को अप्लाई करना होगा. अप्लाई के कुछ दिनो बाद सीबीएसइ की एक टीम स्कूल की जांच करने आयेगी. अगर टीम सैटिसफाइड हो गयी तो मार्क्‍स देकर जायेगी. अगर नहीं हुई तो एक निश्चित समय स्कूल को दिया जायेगा. इस समय के अंतर्गत स्कूल को टारगेट पूरा करना होगा. पांच साल के इस समय में स्कूल को 518 अंक प्राप्त करने होंगे. इतना अंक प्राप्त करने के बाद ही स्कूल को सीबीएसइ का एक्रेडेशन मिल पायेगा.

सीबीएसइ अब होगा स्कोर कार्ड
1. स्कूलिस्टीक प्रोसेस
कुल अंक -  126 (25 फीसदी)
2. को-स्कूलिस्टीक प्रोसेस
कुल अंक  -  56 (15 फीसदी)
3. इन्फ्रास्ट्रर
कुल अंक  -  84  (15 फीसदी)
4. हिन्यूम रिसोर्स
कुल अंक  -  77 (10 फीसदी)
5. मैनेजमेंट एंड एडमिनिस्ट्रेशन
कुल अंक  -  77 (10 फीसदी)
6. लीडरशिप
कुल अंक  -  42  (15 फीसदी)
7. वेनिफिसियल सैटिसफैक्शन
कुल अंक   -  56 (10 फीसदी)

ये सारी नियम को स्कूलों को पूरा करना होगा
- सीबीएसइ के तमाम कॉरिकुलम की जानकारी प्रिंसिपल और टीचर को होनी चाहिए
- स्कूलिस्टीक स्कील के विकास के लिए वार्षिक प्लानिंग हो
- टीचर और स्टूडेंट का रेसियो बोर्ड के अनुसार हो
- समय पर सिलेबस पूरा हो
- म्यूजिक, डांस, थियेटर, मैथ लैब, इको क्लब, हेल्थ एंड वेलनेस क्लब, इंवायरमेंटल क्लब आदि होनी चाहिए
- स्कूल इनोवेटिव प्रोग्राम को मोटिवेट करें
- सीसीइ इंप्लीमेंटेशन
- स्टूडेंट्स की संख्या
- 75 फीसदी एटेंडेंस पर फोकस
- हेल्थ एंड फिजिकल एक्टिविटी, हेल्थ कार्ड
- क्लास रूम, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब, प्ले ग्राउंड
- स्पोर्ट्स एंड गेम फैसिलिटी, हॉबी रूम, आर्ट्स एंड म्यूजिक फैसिलिटी
- मेडिकल रूम, पीने की पानी और सैनिटेशन, हेल्थ एंड मैनेजमेंट फैसिलिटी
- फर्निचर, लाइटिंग और आपदा प्रबंधन की सुविधा
- अभिभावक का स्कूल में इंवाल्वमेंट

कोट
सीबीएसइ की ओर से अब हर साल प्रिंसिपल के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया जायेगा. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के माध्यम से प्रिंसिपल को बोर्ड के नियमों आदि की जानकारी दी जायेगी. कई बार नियम को लेकर कंफ्यूजन और जानकारी का अभाव होता है. ऐसे में बोर्ड के रिसोर्स पर्सन से तमाम कंफ्यूजन दूर हो जाती है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

17 dec. 2015 on prabhat khabar patna