- सीबीएसइ की ओर से स्कूलों के पास आया निर्देश
- सीबीएसइ ने टीचर्स को कोड ऑफ कंडक्ट में रहने की दिया हैं सलाह
संवाददाता, पटना
पटना के एक बड़े स्कूल में एक स्टूडेंट के साथ टीचर पर मारपीट का आरोप लगा था. टीचर के मारने से स्टूडेंट के कान में इंटर्नल चोट आयी थी. इससे स्टूडेंट के कान में गहरी चोट आयी और काफी दिनों तक इलाज के बाद उसका कान सही हो पाया था. टीचर्स द्वारा स्टूडेंट्स के साथ मारपीट की घटना कोई एक नही और ना ही नया हैं. आयें दिन स्कूलों में इस तरह की घटनाएं घटती रहती हैं. अब इसकी सूचना सीबीएसइ के पास तक भी पहुंचने लगी हैं. स्कूल कैंपस में टीचर्स अपनी जिम्मेवारी सही से करें, इसके लिए सीबीएसइ ने स्कूलों को टीचर्स एप्वाइंटमेंट के समय ही सावधानी बरतने को कहा हैं. सीबीएसइ की ओर से तमाम स्कूलों को निर्देश आया हैं. अब सीबीएसइ स्कूलों में भी टीचर्स की नियुक्ति केंद्रीय विद्यालय संगठन की तरह की होगी. इसमें हर नये टीचर्स को तीन महीने का समय दिया जायेगा. जिसमें उनके विहेवियर, पढ़ाई का स्टाइल, टाइमिंग आदि को देखा जायेगा. टीचर्स अपने ड्यूटी के प्रति कितने इमानदार हैं, इसकी जांच स्कूल अपने स्तर से करेगी. इसके साथ सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को पुराने टीचर्स के लिए भी कोड ऑफ कंडक्ट में रहने की सलाह दी हैं. इसके लिए बोर्ड ने स्कूलो को सलाह की लिस्ट भी भेजी हैं.
- स्कूल के परमिशन के बिना टीचर नहीं कर सकते हैं ट्यूशन
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को निर्देश दिया है कि कोई भी टीचर्स ट्यूशन करने के लिए पहले स्कूल से परमिशन लेगा. स्कूल के परमिशन के बाद ही टीचर्स घर में या कोचिंग संस्थान में ट्यूशन देंगे. बोर्ड के अनुसार कई बार टीचर स्कूल में क्लास बंक कर कोचिंग संस्थान में पढ़ाने जाते है. या फिर घर में ही ट्यूशन पर अधिक समय देते हैं. ऐसे भी केस सीबीएसइ के पास आये हैं जिसमें टीचर स्कूल के स्टूडेट्स को इस बात के लिए फोर्स करते हैं कि जो क्लास में समझ में नहीं आता हैं, उसे वो ट्यूशन में आयें तो अच्छे से समझाया जायेगा. टीचर्स के द्वारा स्टूडेंट्स को गुमराह करने वाले इन तमाम विहेवियर पर नजर रखने के लिए भी स्कूलों को निर्देश दिया गया है .
- स्टूडेंटस के साथ बस के अंतिम स्टॉपेज तक जायेंगे टीचर
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से टीचर्स को स्टूडेंट्स के साथ बस में ही घर जाने को लेकर सलाह दिया हैं. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि टीचर्स या तो अपने वेहिकल्स से स्कूल आते और जाते हैं. या फिर अगर कोई टीचर स्कूल कंवियेंस का उपयोग भी करते हैं तो अपने डेस्टिनेशन तक ही जाते है. लेकिन सीबीएसइ ने अब इस पर स्ट्रीक्ली स्कूल को फॉलो करने को कहा हैं. इसके तहत स्कूल का कोई भी टीचर अपने वेहिकल्स से घर आने और जाने काम नहीं करेगा. जिस रूट में बस जायेगी, टीचर भी उसी बस में स्कूल आयेंगे. इसके अलावा हर दिन एक टीचर अंतिम स्टॉपेज तक बस में जायेगा, जब तक की सारे स्टूडेंट बस से उतर नहीं जाते हैं.
सीबीएसइ ने टीचर्स को कोड ऑफ कंडक्ट में रहने को लेकर दिया सलाह
- स्कूल लेट आना और अपने ड्यूटी के प्रति लापरवाही ना करें
- गाली, गलत वर्ड, अपशब्द आदि से स्टूडेंट्स का संबोधन ना करें.
- व्यवहार में शालीनता और फ्रेंडली हो
- डिसरिस्पेक्टफुल विहेवियर से बचे. ऐसा काम नहीं करें जिससे अफवाहें हों
- झूठ बोलने से बचे
- ऐसा कोई काम नहीं करें जिससे स्कूल के माहौल में चेंज आयें
- स्कूल के किसी भी तरह के रिकार्ड के साथ छेड़छाड़ ना करें
- किसी भी तरह के राजनीतिक व्यवहार ना रखें.
- स्टूडेंट्स और पैरेंट्स के साथ पर्सनल व्यवहार सही रखें. पैरेंट्स के हर जिज्ञासा को उन्हें अच्छे से समझा कर दूर करें
- क्लास वर्क या होम वर्क को निगलेक्ट ना करें. स्टूडेंट्स के साथ विहेवियर अच्छा रख कर उनसे वर्क करवायें
कोट
टीचर्स को चुने जाने के लिए यह रास्ता बहुत ही कारगर होगा. पाटलिपुत्र सहोदया की ओर से भी यह प्रयास पिछले साल शुरू किया गया हैं. इसके तहत टीचर्स एप्वाइंटमेंट के लिए स्कूल और टीचर्स के बीच सहोदया कड़ी का काम करता हैं. किस स्कूल में किस विषय के टीचर्स की आवश्यकता हैं, यह जानकारी टीचर्स को देना और उनका बायोडाटा स्कूल तक पहुंचाने का काम सहोदया की ओर से शुरू किया गया हैं.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
- सीबीएसइ ने टीचर्स को कोड ऑफ कंडक्ट में रहने की दिया हैं सलाह
संवाददाता, पटना
पटना के एक बड़े स्कूल में एक स्टूडेंट के साथ टीचर पर मारपीट का आरोप लगा था. टीचर के मारने से स्टूडेंट के कान में इंटर्नल चोट आयी थी. इससे स्टूडेंट के कान में गहरी चोट आयी और काफी दिनों तक इलाज के बाद उसका कान सही हो पाया था. टीचर्स द्वारा स्टूडेंट्स के साथ मारपीट की घटना कोई एक नही और ना ही नया हैं. आयें दिन स्कूलों में इस तरह की घटनाएं घटती रहती हैं. अब इसकी सूचना सीबीएसइ के पास तक भी पहुंचने लगी हैं. स्कूल कैंपस में टीचर्स अपनी जिम्मेवारी सही से करें, इसके लिए सीबीएसइ ने स्कूलों को टीचर्स एप्वाइंटमेंट के समय ही सावधानी बरतने को कहा हैं. सीबीएसइ की ओर से तमाम स्कूलों को निर्देश आया हैं. अब सीबीएसइ स्कूलों में भी टीचर्स की नियुक्ति केंद्रीय विद्यालय संगठन की तरह की होगी. इसमें हर नये टीचर्स को तीन महीने का समय दिया जायेगा. जिसमें उनके विहेवियर, पढ़ाई का स्टाइल, टाइमिंग आदि को देखा जायेगा. टीचर्स अपने ड्यूटी के प्रति कितने इमानदार हैं, इसकी जांच स्कूल अपने स्तर से करेगी. इसके साथ सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को पुराने टीचर्स के लिए भी कोड ऑफ कंडक्ट में रहने की सलाह दी हैं. इसके लिए बोर्ड ने स्कूलो को सलाह की लिस्ट भी भेजी हैं.
- स्कूल के परमिशन के बिना टीचर नहीं कर सकते हैं ट्यूशन
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को निर्देश दिया है कि कोई भी टीचर्स ट्यूशन करने के लिए पहले स्कूल से परमिशन लेगा. स्कूल के परमिशन के बाद ही टीचर्स घर में या कोचिंग संस्थान में ट्यूशन देंगे. बोर्ड के अनुसार कई बार टीचर स्कूल में क्लास बंक कर कोचिंग संस्थान में पढ़ाने जाते है. या फिर घर में ही ट्यूशन पर अधिक समय देते हैं. ऐसे भी केस सीबीएसइ के पास आये हैं जिसमें टीचर स्कूल के स्टूडेट्स को इस बात के लिए फोर्स करते हैं कि जो क्लास में समझ में नहीं आता हैं, उसे वो ट्यूशन में आयें तो अच्छे से समझाया जायेगा. टीचर्स के द्वारा स्टूडेंट्स को गुमराह करने वाले इन तमाम विहेवियर पर नजर रखने के लिए भी स्कूलों को निर्देश दिया गया है .
- स्टूडेंटस के साथ बस के अंतिम स्टॉपेज तक जायेंगे टीचर
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से टीचर्स को स्टूडेंट्स के साथ बस में ही घर जाने को लेकर सलाह दिया हैं. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि टीचर्स या तो अपने वेहिकल्स से स्कूल आते और जाते हैं. या फिर अगर कोई टीचर स्कूल कंवियेंस का उपयोग भी करते हैं तो अपने डेस्टिनेशन तक ही जाते है. लेकिन सीबीएसइ ने अब इस पर स्ट्रीक्ली स्कूल को फॉलो करने को कहा हैं. इसके तहत स्कूल का कोई भी टीचर अपने वेहिकल्स से घर आने और जाने काम नहीं करेगा. जिस रूट में बस जायेगी, टीचर भी उसी बस में स्कूल आयेंगे. इसके अलावा हर दिन एक टीचर अंतिम स्टॉपेज तक बस में जायेगा, जब तक की सारे स्टूडेंट बस से उतर नहीं जाते हैं.
सीबीएसइ ने टीचर्स को कोड ऑफ कंडक्ट में रहने को लेकर दिया सलाह
- स्कूल लेट आना और अपने ड्यूटी के प्रति लापरवाही ना करें
- गाली, गलत वर्ड, अपशब्द आदि से स्टूडेंट्स का संबोधन ना करें.
- व्यवहार में शालीनता और फ्रेंडली हो
- डिसरिस्पेक्टफुल विहेवियर से बचे. ऐसा काम नहीं करें जिससे अफवाहें हों
- झूठ बोलने से बचे
- ऐसा कोई काम नहीं करें जिससे स्कूल के माहौल में चेंज आयें
- स्कूल के किसी भी तरह के रिकार्ड के साथ छेड़छाड़ ना करें
- किसी भी तरह के राजनीतिक व्यवहार ना रखें.
- स्टूडेंट्स और पैरेंट्स के साथ पर्सनल व्यवहार सही रखें. पैरेंट्स के हर जिज्ञासा को उन्हें अच्छे से समझा कर दूर करें
- क्लास वर्क या होम वर्क को निगलेक्ट ना करें. स्टूडेंट्स के साथ विहेवियर अच्छा रख कर उनसे वर्क करवायें
कोट
टीचर्स को चुने जाने के लिए यह रास्ता बहुत ही कारगर होगा. पाटलिपुत्र सहोदया की ओर से भी यह प्रयास पिछले साल शुरू किया गया हैं. इसके तहत टीचर्स एप्वाइंटमेंट के लिए स्कूल और टीचर्स के बीच सहोदया कड़ी का काम करता हैं. किस स्कूल में किस विषय के टीचर्स की आवश्यकता हैं, यह जानकारी टीचर्स को देना और उनका बायोडाटा स्कूल तक पहुंचाने का काम सहोदया की ओर से शुरू किया गया हैं.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
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