- पांच साल में बदल गया मदरसा बोर्ड का सेनेरियो, छात्रों को पीछे छोड़ छात्रएं हुई आगे
- वस्तानिया से लेकर फोकानिया और मौलवी में बढ़ी छात्रओं की संख्या
संवाददाता, पटना
नकाब हटा कर हाथ में थामा किताब, मंजिल घर की चारदीवारी नहीं, आसमां पर जा पहुंचा. घर तक ही सीमित रहने के तमाम बातों को दरकिनार कर आज मुसलिम लड़कियां खुद अपने पांव पर खड़ा होना चाह रहीं हैं. तभी तो हर साल मदरसों में नामांकन से लेकर बोर्ड परीक्षा देने में छात्रओं की संख्या छात्रों को काफी पीछे छोड़ रही हैं. प्रदेश भर में जहां मदरसों में शिक्षा लेने में छात्रएं आगे आ रही हैं वहीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने में भी छात्रएं छात्रों को काफी पीछे छोड़ दे रही हैं. वस्तानिया (8वीं बोर्ड), फोकानिया (10वीं बोर्ड), मौलवी (12वीं बोर्ड) तीनों स्तर पर ही छात्रएं अपनी स्थिति मजबूत कर चुकी हैं. बिहार राज्य मदरसा बोर्ड की माने तो जहां हर साल लड़कियां परीक्षा देने मे आगे हैं वहीं लड़कों की तुलना में लड़कियां 60 फीसदी अधिक लड़कियां विभिन्न मदरसों में पढ़ रही हैं.
- हर साल बढ़ रही संख्या
मदरसा बोर्ड में वस्तानिया के अलावा फोकानिया और मौलवी की परीक्षा देने में हर साल छात्रओं की संख्या बढ़ रही हैं. मदरसा बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार जहां वस्तानिया में दुगुने से अधिक छात्रएं अब शामिल हो रही हैं, वहीं फोकानिया और मौलवी में भी छात्रओं की संख्या तीन गुणा तक पहुंच गया हैं. बोर्ड के अनुसार छात्रों की संख्या में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हर साल नहीं हो रहा हैं. वहीं छात्रओं की संख्या में हर साल दुगुना से तीन गुणा तक छात्रएं बढ़ रही हैं.
- कैरियर में बन रहा ऑप्सन
मदरसा से फोकानिया और मौलवी करने वाले विद्यार्थियों के लिए कैरियर ऑप्सन भी काफी बढ़ रहा हैं. उर्दू टीइटी के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति के अलावा कई कैरियर ऑप्सन ऐसे हैं जहां पर उर्दू को माध्यम बनाया जा रहा है. बोर्ड के अनुसार अब फोकानिया और मौलवी में छात्रओं की संख्या अधिक हो रही है. इसमें नॉन मुसलिम भी अब मदरसा बोर्ड से ही 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास करना चाहते हैं. क्योंकि शिक्षक के साथ सिविल सर्विसेज में भी उर्दू के लिए अधिक ऑप्सन बनने लगा हैं.
- सरकारी योजनाओं का हुआ असर
मदरसा बोर्ड में लड़कियों की संख्या बढ़ने की एक वजह तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलना हैं. पोशाक योजना, साइकिल योजना आदि का लाभ मिलन से मदरसों में शिक्षा का स्तर काफी बढ़ा हैं. पहले स्कूल जाने और आने की समस्याएं अधिक होती थी. लेकिन साइकिल योजना के इस समस्या को दूर कर दिया. इससे अब दूर दराज की लड़कियां भी आसानी से स्कूल तक पहुंच जा रही हैं.
आंकड़ा बताता हैं कि छात्रों को काफी पीछे छोड़ रही छात्रएं
2010
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 22, 188 - 10,882
फोकानिया - 32,317 - 50, 556
मौलवी - 11,797 - 17,570
2011
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 23, 277 - 17, 677
फोकानिया - 43, 233 - 66,988
मौलवी - 29, 438 - 40,285
2012
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 42,967 - 73,585
फोकानिया - 26,167 - 44,631
मौलवी - 26,728 - 40,244
2013
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 46,702 - 81,834
फोकानिया - 18,565 - 32,167
मौलवी - 28,986 - 44,828
2014
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 48, 845 - 81,503
फोकानिया - 27,086 - 47,562
मौलवी - 19, 554 - 30,881
2015
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 50, 577 - 81, 988
फोकानिया - 30,245 - 53,313
मौलवी - 13, 394 - 21,673
कोट
पिछले पांच सालों में मदरसा बोर्ड में छात्रओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई हैं. गल्र्स एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए हम समय-समय पर अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाते हैं. इसका असर अब दिखने लगा हैं. वस्तानिया के साथ फोकानिया और मौलवी में भी छात्रओं की संख्या काफी बढ़ी हैं.
खुर्शीद आलम, सचिव, बिहार राज्य मदरसा बोर्ड
- वस्तानिया से लेकर फोकानिया और मौलवी में बढ़ी छात्रओं की संख्या
संवाददाता, पटना
नकाब हटा कर हाथ में थामा किताब, मंजिल घर की चारदीवारी नहीं, आसमां पर जा पहुंचा. घर तक ही सीमित रहने के तमाम बातों को दरकिनार कर आज मुसलिम लड़कियां खुद अपने पांव पर खड़ा होना चाह रहीं हैं. तभी तो हर साल मदरसों में नामांकन से लेकर बोर्ड परीक्षा देने में छात्रओं की संख्या छात्रों को काफी पीछे छोड़ रही हैं. प्रदेश भर में जहां मदरसों में शिक्षा लेने में छात्रएं आगे आ रही हैं वहीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने में भी छात्रएं छात्रों को काफी पीछे छोड़ दे रही हैं. वस्तानिया (8वीं बोर्ड), फोकानिया (10वीं बोर्ड), मौलवी (12वीं बोर्ड) तीनों स्तर पर ही छात्रएं अपनी स्थिति मजबूत कर चुकी हैं. बिहार राज्य मदरसा बोर्ड की माने तो जहां हर साल लड़कियां परीक्षा देने मे आगे हैं वहीं लड़कों की तुलना में लड़कियां 60 फीसदी अधिक लड़कियां विभिन्न मदरसों में पढ़ रही हैं.
- हर साल बढ़ रही संख्या
मदरसा बोर्ड में वस्तानिया के अलावा फोकानिया और मौलवी की परीक्षा देने में हर साल छात्रओं की संख्या बढ़ रही हैं. मदरसा बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार जहां वस्तानिया में दुगुने से अधिक छात्रएं अब शामिल हो रही हैं, वहीं फोकानिया और मौलवी में भी छात्रओं की संख्या तीन गुणा तक पहुंच गया हैं. बोर्ड के अनुसार छात्रों की संख्या में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हर साल नहीं हो रहा हैं. वहीं छात्रओं की संख्या में हर साल दुगुना से तीन गुणा तक छात्रएं बढ़ रही हैं.
- कैरियर में बन रहा ऑप्सन
मदरसा से फोकानिया और मौलवी करने वाले विद्यार्थियों के लिए कैरियर ऑप्सन भी काफी बढ़ रहा हैं. उर्दू टीइटी के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति के अलावा कई कैरियर ऑप्सन ऐसे हैं जहां पर उर्दू को माध्यम बनाया जा रहा है. बोर्ड के अनुसार अब फोकानिया और मौलवी में छात्रओं की संख्या अधिक हो रही है. इसमें नॉन मुसलिम भी अब मदरसा बोर्ड से ही 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास करना चाहते हैं. क्योंकि शिक्षक के साथ सिविल सर्विसेज में भी उर्दू के लिए अधिक ऑप्सन बनने लगा हैं.
- सरकारी योजनाओं का हुआ असर
मदरसा बोर्ड में लड़कियों की संख्या बढ़ने की एक वजह तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलना हैं. पोशाक योजना, साइकिल योजना आदि का लाभ मिलन से मदरसों में शिक्षा का स्तर काफी बढ़ा हैं. पहले स्कूल जाने और आने की समस्याएं अधिक होती थी. लेकिन साइकिल योजना के इस समस्या को दूर कर दिया. इससे अब दूर दराज की लड़कियां भी आसानी से स्कूल तक पहुंच जा रही हैं.
आंकड़ा बताता हैं कि छात्रों को काफी पीछे छोड़ रही छात्रएं
2010
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 22, 188 - 10,882
फोकानिया - 32,317 - 50, 556
मौलवी - 11,797 - 17,570
2011
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 23, 277 - 17, 677
फोकानिया - 43, 233 - 66,988
मौलवी - 29, 438 - 40,285
2012
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 42,967 - 73,585
फोकानिया - 26,167 - 44,631
मौलवी - 26,728 - 40,244
2013
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 46,702 - 81,834
फोकानिया - 18,565 - 32,167
मौलवी - 28,986 - 44,828
2014
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 48, 845 - 81,503
फोकानिया - 27,086 - 47,562
मौलवी - 19, 554 - 30,881
2015
परीक्षा - छात्रों की संख्या - छात्रओं की संख्या
वस्तानिया - 50, 577 - 81, 988
फोकानिया - 30,245 - 53,313
मौलवी - 13, 394 - 21,673
कोट
पिछले पांच सालों में मदरसा बोर्ड में छात्रओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई हैं. गल्र्स एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए हम समय-समय पर अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाते हैं. इसका असर अब दिखने लगा हैं. वस्तानिया के साथ फोकानिया और मौलवी में भी छात्रओं की संख्या काफी बढ़ी हैं.
खुर्शीद आलम, सचिव, बिहार राज्य मदरसा बोर्ड
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