- सीबीएसइ ने पटना जोन के स्कूलों को भेजा नोटिस
- एफिलिएशन बाइ लॉज के तहत स्कूलों की जांच में निकल कर आया सर्वे
रिंकू झा, पटना
केस वन : रश्मि प्रिया क्लास सातवीं की छात्र हैं. स्कूल में रश्मि को आठ घंटे रहना पड़ता था. स्कूल में टायलेट नहीं होने के कारण रश्मि प्रिया टायलेट नहीं जा पाती थी. कई घंटे टायलेट रोकने के कारण रश्मि प्रिया को कुछ दिनों के बाद पेट में प्राब्लम शुरू हो गया. टायलेट नहीं जाना पड़े, इस कारण रश्मि प्रिया स्कूल में रहते हुए पानी भी काफी कम पीती थी. पेट का प्राब्लम जब काफी बढ़ गया तो डाक्टर से दिखाने पर पता चला कि किडनी में इफेक्शन हो गया हैं. काफी इलाज के बाद रश्मि प्रिया सही हो पायी.
केस टू : आसीन सुबह 7 बजे से 2 बजे तक टायलेट नहीं जाती थी. कई-कई घंटे टायलेट रोकने के कारण आसीन यूरिन इफेक्शन हो गया. आसीन अभी 12वीं की स्टूडेंट हैं. लेकिन यूरिन इफेक्शन का असर उसे अभी भी ङोलना पड़ रहा हैं. आसीन बताती के जिस स्कूल में वो पढ़ती हैं, वहां पर एक भी गल्र्स टायलेट नहीं हैं. इस कारण तमाम गल्र्स को काफी प्राब्लम होता हैं. यूरिन इफेक्शन होने के कारण आसीन को 10वीं बोर्ड की परीक्षा ओपेन स्कूलिंग से प्राइवेट कैंडिडेंट्स के रूप में देना पड़ा
- सीबीएसइ के सर्वे रिपोर्ट में निकली बात, 537 में नहीं टायलेट
सीबीएसइ की ओर से देश भर के स्कूलों पर किये गये एक सर्वे के अनुसार अधिकांश सीबीएसइ स्कूलों में टॉयलेट और पीने के पानी की दिक्कतें हैं. काफी संख्या में ऐसे स्कूल हैं जहां पर लड़के और लड़कियां दोनों ही पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल ऑथोरिटी ने टॉयलेट अलग-अलग नहीं बनवाया हैं. सर्वे में कहा गया है कि पटना जोन के 1014 स्कूल अभी सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त हैं. इसमें कुल 537 स्कूल ऐसे हैं जहां पर टॉयलेट नहीं हैं. इन स्कूलों को सीबीएसइ ने नोटिस जारी किया है . इन स्कूलों से पूछा गया है कि टॉयलेट और पीने के पानी की व्यवस्था स्कूल ने क्यूं नहीं किया. टॉयलेट नहीं होने के कारण आये दिन क्लास में स्टूडेंट्स की अनुपस्थिति भी देखी गयी है. जब सीबीएसइ ने स्कूल नहीं आने का कारण जाना तो पता चला कि अधिकांश स्टूडेंट्स बीमार हो रहें हैं. बीमार होने का कारण पेट से संबंधित अधिक हैं. इसमें छात्रओं में अधिक देर तक पेशाब रोके रखना पाया गया है.
- स्कूल छोड़ने की वजह भी बन रहा टायलेट
अभी तक सरकारी स्कूलों में ही टॉयलेट के कारण छात्रएं स्कूल नहीं जाती है, ये सुनते आ रहे थे. लेकिन ऐसा नहीं हैं. सीबीएसइ ने जो एफिलिएशन बाइलॉज के तहत स्कूलों की जांच की हैं, उसके मुताबिक टॉयलेट के कारण सीबीएसइ स्कूल से भी स्टूडेंट्स नाम कटवा कर दूसरे स्कूल में नामांकन ले रहें हैं. कई स्कूलों में तो डिसिप्लीनरी कमेटी के पास भी स्टूडेंट्स ने शिकायत किया हैं. डीएवी से मिली जानकारी के अनुसार कई छात्रओं ने सिर्फ इस कारण स्कूल आना बंद कर दिया क्योंकि स्कूल मे टॉयलेट नहीं था.
-अधिकांश स्कूलों ने नहीं दी है सीबीएसइ को जानकारी
स्कूल के सैनिटेशन और पीने के पानी के सर्वे के लिए सीबीएसइ ने स्कूलों के पास छह महीने पहले कुल प्रश्न भेजे थे. लेकिन अधिकांश स्कूलों ने सीबीएसइ को इसकी जानकारी नहीं दी. इसके बाद सीबीएसइ की ओर से एफिलिएशन के तहत की गयी जांच में इन प्वाइंट को देखा गया. इसके बाद सीबीएसइ को सारी जानकारी प्राप्त हुई.
- 537 में 400 में नहीं है पीने की पानी की व्यवस्था
सीबीएसइ के सैनिटेशन और ड्रिकिंग वाटर की उपलब्धता वाली रिपोर्ट के अनुसार पटना जोन के 400 ऐसे स्कूल हैं जहां पर पीने की पानी की व्यवस्था नहीं है . ऐसे में उन स्कूलों में स्टूडेंट्स को पानी भी अपने घर से ही लेकर आना होता हैं. स्कूल में ना तो आरओ ही लगे हैं और ना ही पानी को प्यूरिफाई करने की व्यवस्था की गयी है . लंच आवर में भी स्टूडेंट्स को घर के पानी पर ही निर्भर होना होता है . सीबीएसइ के अनुसार लगभग 2 सौ ऐसे स्कूल हैं जहां पीने के पानी की व्यवस्था तो हैं लेकिन चारों ओर काफी गंदगी पायी गयी है .
- सैनिटेशन और टायलेट हैं गंदा
सैनिटेशन में भी सीबीएसइ के रिपोर्ट के अनुसार कई स्कूल जीरो अंक प्राप्त करते हैं. सीबीएसइ के अनुसार स्कूल की साफ सफाई में स्कूल आथोरिटी बिलकुल ही ध्यान नहीं देता है . सीबीएसइ ने पटना जोन के 365 ऐसे स्कूलों की लिस्टींग की है जहां पर साफ सफाई नगण्य है. स्कूल के बाहर और अंदर कूड़ा का ढेर लगा होता हैं. इतना ही नहीं अगर किसी स्कूल में टायलेट हैं तो वह इतना गंदा हैं कि उससे भी काफी बीमारियां फैलती हैं. सीबीएसइ के अनुसार इन टायलेट की सफाई महीनों में एक बार होती हैं. टायलेट की बदबू भी आस पास फैली रहती हैं.
पेशाब रोकने से होती ये सारी बीमारियां
- यूरिन इफैक्शन (इसके अंतर्गत यूकोलाइ, बीकोलाई आदि बीमारी आता हैं)
- किडनी प्राब्लम
- किडनी स्टोन
- यूरिन बर्निग (जलन)
- पेट के नीचे में दर्द होना
- रिकोलिया
पटना जोन के स्कूल संबंधित कुछ जानकारी
पटना जोन में स्कूलों की कुल संख्या - 1014
कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं - 537
बिहार में स्कूूलों की कुल संख्या - 610
झारखंड में स्कूलों की कुल संख्या - 404
बिहार में कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं - 341
पटना में कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं - 12
झारखंड में कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं - 196
बिहार के कितने स्कूलों में लड़के और लड़कियों दोनों के लिए टॉयलेट हैं - 155
कितने स्कूलों में लड़कों के लिए ही बस टॉयलेट हैं - 114
स्कूल का नाम स्टूडेंट्स की संख्या - टायलेट की संख्या
1. एएएम चिल्ड्रेन एकेडमी (एफिलिएशन नंबर 330108) - 2014 - जीरो
2. आर्मी पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 380001) - 1933 - जीरो
3. भागवत विद्यापीठ (एफिलिएशन नंबर 330171) - 1576 - जीरो
4. डीएवी पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330006) - 1324 - जीरो
5. दिग्दर्शन सेकेंडरी स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330189) - 1200 - जीरो
6. दुखम राम डीएवी पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330124) - 1098 - जीरो
7. ज्ञान भारती मॉडल स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330173) - 1356 - जीरो
8. हिमालय पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330183) - 1176 - जीरो
9. सेंट पॉल स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330045) - 987 - जीरो
10. विद्या बिहार रेजिडेंसियल हाई स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330063) - 1765 - जीरो
नोट - स्कलों की यह लिस्ट सीबीएसइ ने अपने वेबसाइट पर जारी किया हैं. इस लिस्ट में उन तमाम स्कूलों की पूरी रिपोर्ट हैं जहां पर टायलेट और पीने की पानी की व्यवस्था नहीं हैं. सैनिटेशन और ड्रिकिंग वाटर नाम के इस रिपोर्ट में सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों की पूरी रिपोर्ट डाली हैं.
स्टूडेंट्स स्पीक
हमारे स्कूल में गल्र्स के लिए दो टॉयलेट हैं. इस कारण हमें टॉयलेट जाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता हैं. कभी कभी तो लंच आवर में इतनी लंबी लाइन लगी होती हैं कि टॉयलेट जाने का मौका ही नहीं मिलता. इससे दिन भर बिना टॉयलेट के रहने से पेट में दर्द होने लगता हैं. कई बार तो क्लास के बीच में जा कर अपना काम निकालते हैं.
सोनम गुप्ता, स्टूडेंट
मेरे स्कूल में एक भी टॉयलेट नहीं हैं. ब्वायज तो स्कूल के बाहर जाकर अपना काम निकाल लेते हैं. लेकिन गल्र्स के लिए बहुत ही मुश्किल हो जाती है. कई बार तो कई लड़कियों की तबीयत भी खराब हो गयी हैं. टॉयलेट की वजह से कई लड़कियों ने स्कूल से नाम भी कटवा लिया हैं.
पिंकी सिंह, स्टूडेंट
पैरेंट्स स्पीक
मैने अपने बेटी का नाम पटना के बड़े स्कूल में लिखवाया. स्कूल का नाम मै नहीं लूंगा. गल्र्स स्कूल होने के वाबजूद उस स्कूल में टॉयलेट नहीं हैं. ऐसे में छह महीने में ही मेरी बेटी बीमार रहने लगी. उसके किडनी में प्राब्लम होने लगा. पता नहीं चल रहा था कि क्या हुआ. फिर बेटी से पूछा तो पता चला कि वो टॉयलेट नहीं जा पा रही हैं. मैने तुरंत उस स्कूल से बेटी का नाम कटवा दिया.
अभिषेक कुमार, अभिभावक
पटना में स्कूल वाले बिल्डिंग तो खड़ा कर देते हैं, लेकिन टॉयलेट नहीं बनवाते हैं. मेरे दोनों की बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं. 800 बच्चे पर मात्र दो टॉयलेट लड़कों के लिए और तीन टॉयलेट लड़कियों के लिए हैं. इन दोनों टॉयलेट की स्थिति बहुत ही बुरी हैं. गंदगी इतनी की बच्चे जाना नहीं चाहते हैं.
सत्यप्रकाश, अभिभावक
कोट
यूरिन का प्राब्लम एक बड़ी समस्या टीन एजर्स में देखी जा रही है . आए दिन हमारे पास स्कूल की लड़कियां आती है जिन्हें यूरिन इफेक्शन की प्राब्लम होती हैं. बातचीत में पता चलता हैं टायलेट को देर तक रोकती हैं. अधिक देर तक टायलेट रोकने के कारण कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं. कभी भी टायलेट अधिक से अधिक आधे घंटे तक रोका जा सकता हैं. अधिक देर तक टायलेट रोकने से यह पूरे शरीर को इफेक्टेड कर देता हैं.
डा. रेखा रस्तोगी, गाइनोकोलॉजिस्ट
- एफिलिएशन बाइ लॉज के तहत स्कूलों की जांच में निकल कर आया सर्वे
रिंकू झा, पटना
केस वन : रश्मि प्रिया क्लास सातवीं की छात्र हैं. स्कूल में रश्मि को आठ घंटे रहना पड़ता था. स्कूल में टायलेट नहीं होने के कारण रश्मि प्रिया टायलेट नहीं जा पाती थी. कई घंटे टायलेट रोकने के कारण रश्मि प्रिया को कुछ दिनों के बाद पेट में प्राब्लम शुरू हो गया. टायलेट नहीं जाना पड़े, इस कारण रश्मि प्रिया स्कूल में रहते हुए पानी भी काफी कम पीती थी. पेट का प्राब्लम जब काफी बढ़ गया तो डाक्टर से दिखाने पर पता चला कि किडनी में इफेक्शन हो गया हैं. काफी इलाज के बाद रश्मि प्रिया सही हो पायी.
केस टू : आसीन सुबह 7 बजे से 2 बजे तक टायलेट नहीं जाती थी. कई-कई घंटे टायलेट रोकने के कारण आसीन यूरिन इफेक्शन हो गया. आसीन अभी 12वीं की स्टूडेंट हैं. लेकिन यूरिन इफेक्शन का असर उसे अभी भी ङोलना पड़ रहा हैं. आसीन बताती के जिस स्कूल में वो पढ़ती हैं, वहां पर एक भी गल्र्स टायलेट नहीं हैं. इस कारण तमाम गल्र्स को काफी प्राब्लम होता हैं. यूरिन इफेक्शन होने के कारण आसीन को 10वीं बोर्ड की परीक्षा ओपेन स्कूलिंग से प्राइवेट कैंडिडेंट्स के रूप में देना पड़ा
- सीबीएसइ के सर्वे रिपोर्ट में निकली बात, 537 में नहीं टायलेट
सीबीएसइ की ओर से देश भर के स्कूलों पर किये गये एक सर्वे के अनुसार अधिकांश सीबीएसइ स्कूलों में टॉयलेट और पीने के पानी की दिक्कतें हैं. काफी संख्या में ऐसे स्कूल हैं जहां पर लड़के और लड़कियां दोनों ही पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल ऑथोरिटी ने टॉयलेट अलग-अलग नहीं बनवाया हैं. सर्वे में कहा गया है कि पटना जोन के 1014 स्कूल अभी सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त हैं. इसमें कुल 537 स्कूल ऐसे हैं जहां पर टॉयलेट नहीं हैं. इन स्कूलों को सीबीएसइ ने नोटिस जारी किया है . इन स्कूलों से पूछा गया है कि टॉयलेट और पीने के पानी की व्यवस्था स्कूल ने क्यूं नहीं किया. टॉयलेट नहीं होने के कारण आये दिन क्लास में स्टूडेंट्स की अनुपस्थिति भी देखी गयी है. जब सीबीएसइ ने स्कूल नहीं आने का कारण जाना तो पता चला कि अधिकांश स्टूडेंट्स बीमार हो रहें हैं. बीमार होने का कारण पेट से संबंधित अधिक हैं. इसमें छात्रओं में अधिक देर तक पेशाब रोके रखना पाया गया है.
- स्कूल छोड़ने की वजह भी बन रहा टायलेट
अभी तक सरकारी स्कूलों में ही टॉयलेट के कारण छात्रएं स्कूल नहीं जाती है, ये सुनते आ रहे थे. लेकिन ऐसा नहीं हैं. सीबीएसइ ने जो एफिलिएशन बाइलॉज के तहत स्कूलों की जांच की हैं, उसके मुताबिक टॉयलेट के कारण सीबीएसइ स्कूल से भी स्टूडेंट्स नाम कटवा कर दूसरे स्कूल में नामांकन ले रहें हैं. कई स्कूलों में तो डिसिप्लीनरी कमेटी के पास भी स्टूडेंट्स ने शिकायत किया हैं. डीएवी से मिली जानकारी के अनुसार कई छात्रओं ने सिर्फ इस कारण स्कूल आना बंद कर दिया क्योंकि स्कूल मे टॉयलेट नहीं था.
-अधिकांश स्कूलों ने नहीं दी है सीबीएसइ को जानकारी
स्कूल के सैनिटेशन और पीने के पानी के सर्वे के लिए सीबीएसइ ने स्कूलों के पास छह महीने पहले कुल प्रश्न भेजे थे. लेकिन अधिकांश स्कूलों ने सीबीएसइ को इसकी जानकारी नहीं दी. इसके बाद सीबीएसइ की ओर से एफिलिएशन के तहत की गयी जांच में इन प्वाइंट को देखा गया. इसके बाद सीबीएसइ को सारी जानकारी प्राप्त हुई.
- 537 में 400 में नहीं है पीने की पानी की व्यवस्था
सीबीएसइ के सैनिटेशन और ड्रिकिंग वाटर की उपलब्धता वाली रिपोर्ट के अनुसार पटना जोन के 400 ऐसे स्कूल हैं जहां पर पीने की पानी की व्यवस्था नहीं है . ऐसे में उन स्कूलों में स्टूडेंट्स को पानी भी अपने घर से ही लेकर आना होता हैं. स्कूल में ना तो आरओ ही लगे हैं और ना ही पानी को प्यूरिफाई करने की व्यवस्था की गयी है . लंच आवर में भी स्टूडेंट्स को घर के पानी पर ही निर्भर होना होता है . सीबीएसइ के अनुसार लगभग 2 सौ ऐसे स्कूल हैं जहां पीने के पानी की व्यवस्था तो हैं लेकिन चारों ओर काफी गंदगी पायी गयी है .
- सैनिटेशन और टायलेट हैं गंदा
सैनिटेशन में भी सीबीएसइ के रिपोर्ट के अनुसार कई स्कूल जीरो अंक प्राप्त करते हैं. सीबीएसइ के अनुसार स्कूल की साफ सफाई में स्कूल आथोरिटी बिलकुल ही ध्यान नहीं देता है . सीबीएसइ ने पटना जोन के 365 ऐसे स्कूलों की लिस्टींग की है जहां पर साफ सफाई नगण्य है. स्कूल के बाहर और अंदर कूड़ा का ढेर लगा होता हैं. इतना ही नहीं अगर किसी स्कूल में टायलेट हैं तो वह इतना गंदा हैं कि उससे भी काफी बीमारियां फैलती हैं. सीबीएसइ के अनुसार इन टायलेट की सफाई महीनों में एक बार होती हैं. टायलेट की बदबू भी आस पास फैली रहती हैं.
पेशाब रोकने से होती ये सारी बीमारियां
- यूरिन इफैक्शन (इसके अंतर्गत यूकोलाइ, बीकोलाई आदि बीमारी आता हैं)
- किडनी प्राब्लम
- किडनी स्टोन
- यूरिन बर्निग (जलन)
- पेट के नीचे में दर्द होना
- रिकोलिया
पटना जोन के स्कूल संबंधित कुछ जानकारी
पटना जोन में स्कूलों की कुल संख्या - 1014
कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं - 537
बिहार में स्कूूलों की कुल संख्या - 610
झारखंड में स्कूलों की कुल संख्या - 404
बिहार में कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं - 341
पटना में कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं - 12
झारखंड में कितने स्कूलों के पास टॉयलेट नहीं - 196
बिहार के कितने स्कूलों में लड़के और लड़कियों दोनों के लिए टॉयलेट हैं - 155
कितने स्कूलों में लड़कों के लिए ही बस टॉयलेट हैं - 114
स्कूल का नाम स्टूडेंट्स की संख्या - टायलेट की संख्या
1. एएएम चिल्ड्रेन एकेडमी (एफिलिएशन नंबर 330108) - 2014 - जीरो
2. आर्मी पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 380001) - 1933 - जीरो
3. भागवत विद्यापीठ (एफिलिएशन नंबर 330171) - 1576 - जीरो
4. डीएवी पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330006) - 1324 - जीरो
5. दिग्दर्शन सेकेंडरी स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330189) - 1200 - जीरो
6. दुखम राम डीएवी पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330124) - 1098 - जीरो
7. ज्ञान भारती मॉडल स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330173) - 1356 - जीरो
8. हिमालय पब्लिक स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330183) - 1176 - जीरो
9. सेंट पॉल स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330045) - 987 - जीरो
10. विद्या बिहार रेजिडेंसियल हाई स्कूल (एफिलिएशन नंबर 330063) - 1765 - जीरो
नोट - स्कलों की यह लिस्ट सीबीएसइ ने अपने वेबसाइट पर जारी किया हैं. इस लिस्ट में उन तमाम स्कूलों की पूरी रिपोर्ट हैं जहां पर टायलेट और पीने की पानी की व्यवस्था नहीं हैं. सैनिटेशन और ड्रिकिंग वाटर नाम के इस रिपोर्ट में सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों की पूरी रिपोर्ट डाली हैं.
स्टूडेंट्स स्पीक
हमारे स्कूल में गल्र्स के लिए दो टॉयलेट हैं. इस कारण हमें टॉयलेट जाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता हैं. कभी कभी तो लंच आवर में इतनी लंबी लाइन लगी होती हैं कि टॉयलेट जाने का मौका ही नहीं मिलता. इससे दिन भर बिना टॉयलेट के रहने से पेट में दर्द होने लगता हैं. कई बार तो क्लास के बीच में जा कर अपना काम निकालते हैं.
सोनम गुप्ता, स्टूडेंट
मेरे स्कूल में एक भी टॉयलेट नहीं हैं. ब्वायज तो स्कूल के बाहर जाकर अपना काम निकाल लेते हैं. लेकिन गल्र्स के लिए बहुत ही मुश्किल हो जाती है. कई बार तो कई लड़कियों की तबीयत भी खराब हो गयी हैं. टॉयलेट की वजह से कई लड़कियों ने स्कूल से नाम भी कटवा लिया हैं.
पिंकी सिंह, स्टूडेंट
पैरेंट्स स्पीक
मैने अपने बेटी का नाम पटना के बड़े स्कूल में लिखवाया. स्कूल का नाम मै नहीं लूंगा. गल्र्स स्कूल होने के वाबजूद उस स्कूल में टॉयलेट नहीं हैं. ऐसे में छह महीने में ही मेरी बेटी बीमार रहने लगी. उसके किडनी में प्राब्लम होने लगा. पता नहीं चल रहा था कि क्या हुआ. फिर बेटी से पूछा तो पता चला कि वो टॉयलेट नहीं जा पा रही हैं. मैने तुरंत उस स्कूल से बेटी का नाम कटवा दिया.
अभिषेक कुमार, अभिभावक
पटना में स्कूल वाले बिल्डिंग तो खड़ा कर देते हैं, लेकिन टॉयलेट नहीं बनवाते हैं. मेरे दोनों की बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं. 800 बच्चे पर मात्र दो टॉयलेट लड़कों के लिए और तीन टॉयलेट लड़कियों के लिए हैं. इन दोनों टॉयलेट की स्थिति बहुत ही बुरी हैं. गंदगी इतनी की बच्चे जाना नहीं चाहते हैं.
सत्यप्रकाश, अभिभावक
कोट
यूरिन का प्राब्लम एक बड़ी समस्या टीन एजर्स में देखी जा रही है . आए दिन हमारे पास स्कूल की लड़कियां आती है जिन्हें यूरिन इफेक्शन की प्राब्लम होती हैं. बातचीत में पता चलता हैं टायलेट को देर तक रोकती हैं. अधिक देर तक टायलेट रोकने के कारण कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं. कभी भी टायलेट अधिक से अधिक आधे घंटे तक रोका जा सकता हैं. अधिक देर तक टायलेट रोकने से यह पूरे शरीर को इफेक्टेड कर देता हैं.
डा. रेखा रस्तोगी, गाइनोकोलॉजिस्ट
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