- 2013 में बने सेक्सुल हेरेसमेंट ऑफ वीमेन एट वर्कप्लेस का नहीं हो रहा पालन
- आये दिन महिलाएं करतीं हैं मामले दर्ज
संवाददाता, पटना
केस वन - पटना के प्राइवेट ऑफिस में काम कर रही एक युवती ने महिला थाना में मामला दर्ज करवाया. मामले में युवती ने ऑफिस के एक कर्मचारी पर सेक्सुल हेरेसेमेंट करने का आरोप लगाया. ऑफिस में रहते हुए वो कर्मचारी युवती पर गंदे शब्दों का भी इस्तेमाल करता था. युवती के मामला दर्ज करवाने के बाद दोनों की काउंसिलिंग कर मामले को खत्म किया गया.
केस टू - आइजीआइएमएस में काम कर ही रूपाश्री ने आइजीआइएमएस के निदेशक के खिलाफ कई सालों तक अपनी लड़ाई लड़ी. इस लड़ाई में रूपा श्री की नौकरी भी चली गयी. उसे आइजीआइएमएस से भी निकाला गया. बाद में मामला हाई कोट पहुंचा. फिर रूपा श्री को केस वापस लेने के बाद नौकरी मिली.
कार्य स्थल पर सेक्सुअल हेरेसमेंट को लेकर कानून तो बन गया, लेकिन इसका पालन नहीं हो पाता है. आयें दिन महिला थाना या लोकल थाने में ऐसे मामले देखे जाते हैं जिसके तहत कामकाजी महिलाएं यह आरोप लगाती हैं कि उसके साथ ऑफिस के अंदर में गलत व्यवहार किया जाता है. वर्क प्लेस पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न के विरूद्ध संरक्षण 2013 में कानून का रूप लिया. इसे देश भर में लागू भी किया गया, लेकिन यह प्रॉपर वे में अभी शुरू नहीं हो पाया हैं. सरकारी संस्थान कहें या निजी संस्थान, सभी जगहों पर कामकाजी महिलाओं के साथ सेक्सुअल हेरेसमेट की घटनाएं घटती रहती हैं.
- हर ऑफिस में होगा सेक्सुअल हेरेसमेंट विंग
महिलाओं को समानता दिलाने के लिए मूल अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 21 में संशोधन कर इस कानून को बनाया गया. इसके तहत महिलाओं के गरिमा को बचाने का प्रयास किया गया हैं. महिलाओं को किसी भी पेशा में काम करने का अधिकार देते हुए कहा गया कि किसी भी कारोबार को करने का अधिकार महिलाओं को हैं. ऐसे में महिलाओं को सुरक्षित ऑफिस का वातावरण मिले, इसके लिए हर ऑफिस सेक्सुअल हेरेसमेंट विंग खोलने को कहा गया. लेकिन आज अधिकांश ऑफिस में सेक्सुअल हेरेसमेंट विंग नहीं हैं. महिला थाना की माने तो हर महीने एक से दो केस इस तरह के आते हैं जिसमें कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ सेक्सुअल हेरेसमेंट की घटनाएं होती हैं.
- कर्मचारी पर दोष होने पर लगेगा 50 हजार का जुर्माना
कोई महिला किसी ऑफिस में काम करते हुए किसी कर्मचारी पर सेक्सुअल हेरेसमेंट का आरोप लगाती हैं. और जांच के बाद अगर आरोप सही हो जाता है तो ऐसे कर्मचारी पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाने का प्रावधान हैं. कर्मचारी पर दोषसिद्ध किये जाने पर उसे अपने कारोबार से भी बेदखल किया जा सकता हैं. रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जा सकता हैं.
इन चीजों पर वर्क प्लेस पर समझा जाता हैं सेक्सुल हेरेसमेंट
- शारीरिक स्पर्श या स्पर्श करने की कोशिश
- यौन स्वीकृति की मांग या अनुरोध
- कॉमेंट करना
- गलत शब्दों का इस्तेमाल करना
- गलत शब्द या ऐसी बातें बोलना हो सेक्सुल हेरेसमेंट के अंतर्गत आता हैं
- अशोभनीय शारीरिक, मौखिक या सांकेतिक आचरण करना
कार्यस्थल पर ऐसा हो माहौल
- सुरक्षित कार्य करने का वातावरण प्रदान करना. जिससे आने वाले व्यक्ति को सुरक्षा महसूस हो
- हर ऑफिस में सेक्सुल हेरेसमेंट के अंतर्गत एक आंतरिक समिति का गठन करना
- ऑफिस में नियमित अंतराल पर कार्यशाला और जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाना
- आंतरिक समिति ऑफिस में काम कर रही तमाम महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करेगी
- कामकाजी महिलाओं के शिकायत करने पर जांच की सुविधा होना
- महिला द्वारा किसी के उपर आरोप लगाने पर समिति पूरी मदद करेगा
- अगर कोई महिला कार्य स्थल पर किसी कर्मचारी पर आरोप लगाती हैं तो समिति कार्यवाही प्रारंभ करायेगा, जिससे लैंगिक उत्पीड़न की घटना घटी थी
- ऑफिस में लैंगिक उत्पीड़न को सवा नियमावली के अधीन गलत मान कर नौकरी से भी निकाला जा सकता हैं
कोट
सेक्सुअल हेरेसमेंट के केस आये दिन हमारे पास आते हैं. पटना में अभी भी 70 फीसदी ऐसे सरकारी और निजी संस्थान हैं जहां पर महिलाओं के सुरक्षा के लिए सेक्सुअल हेरेसमेंट सेल नहीं बनाया गया है. इससे महिलाओं के साथ कोई घटना घटती है तो मामले आगे नहीं बढ़ पाती हैं. क्योंकि इस मामले में कानून होते हुए भी उसका पालन नहीं हो पाता हैं. लोग इस कानून के प्रति अलर्ट हो या डरे तभी तो इसे रोका जा सकेगा. अभी भी इसे लोग हल्के रूप में लेते हैं.
श्रुति सिंह, वकील, पटना हाई कोर्ट
- आये दिन महिलाएं करतीं हैं मामले दर्ज
संवाददाता, पटना
केस वन - पटना के प्राइवेट ऑफिस में काम कर रही एक युवती ने महिला थाना में मामला दर्ज करवाया. मामले में युवती ने ऑफिस के एक कर्मचारी पर सेक्सुल हेरेसेमेंट करने का आरोप लगाया. ऑफिस में रहते हुए वो कर्मचारी युवती पर गंदे शब्दों का भी इस्तेमाल करता था. युवती के मामला दर्ज करवाने के बाद दोनों की काउंसिलिंग कर मामले को खत्म किया गया.
केस टू - आइजीआइएमएस में काम कर ही रूपाश्री ने आइजीआइएमएस के निदेशक के खिलाफ कई सालों तक अपनी लड़ाई लड़ी. इस लड़ाई में रूपा श्री की नौकरी भी चली गयी. उसे आइजीआइएमएस से भी निकाला गया. बाद में मामला हाई कोट पहुंचा. फिर रूपा श्री को केस वापस लेने के बाद नौकरी मिली.
कार्य स्थल पर सेक्सुअल हेरेसमेंट को लेकर कानून तो बन गया, लेकिन इसका पालन नहीं हो पाता है. आयें दिन महिला थाना या लोकल थाने में ऐसे मामले देखे जाते हैं जिसके तहत कामकाजी महिलाएं यह आरोप लगाती हैं कि उसके साथ ऑफिस के अंदर में गलत व्यवहार किया जाता है. वर्क प्लेस पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न के विरूद्ध संरक्षण 2013 में कानून का रूप लिया. इसे देश भर में लागू भी किया गया, लेकिन यह प्रॉपर वे में अभी शुरू नहीं हो पाया हैं. सरकारी संस्थान कहें या निजी संस्थान, सभी जगहों पर कामकाजी महिलाओं के साथ सेक्सुअल हेरेसमेट की घटनाएं घटती रहती हैं.
- हर ऑफिस में होगा सेक्सुअल हेरेसमेंट विंग
महिलाओं को समानता दिलाने के लिए मूल अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 21 में संशोधन कर इस कानून को बनाया गया. इसके तहत महिलाओं के गरिमा को बचाने का प्रयास किया गया हैं. महिलाओं को किसी भी पेशा में काम करने का अधिकार देते हुए कहा गया कि किसी भी कारोबार को करने का अधिकार महिलाओं को हैं. ऐसे में महिलाओं को सुरक्षित ऑफिस का वातावरण मिले, इसके लिए हर ऑफिस सेक्सुअल हेरेसमेंट विंग खोलने को कहा गया. लेकिन आज अधिकांश ऑफिस में सेक्सुअल हेरेसमेंट विंग नहीं हैं. महिला थाना की माने तो हर महीने एक से दो केस इस तरह के आते हैं जिसमें कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ सेक्सुअल हेरेसमेंट की घटनाएं होती हैं.
- कर्मचारी पर दोष होने पर लगेगा 50 हजार का जुर्माना
कोई महिला किसी ऑफिस में काम करते हुए किसी कर्मचारी पर सेक्सुअल हेरेसमेंट का आरोप लगाती हैं. और जांच के बाद अगर आरोप सही हो जाता है तो ऐसे कर्मचारी पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाने का प्रावधान हैं. कर्मचारी पर दोषसिद्ध किये जाने पर उसे अपने कारोबार से भी बेदखल किया जा सकता हैं. रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जा सकता हैं.
इन चीजों पर वर्क प्लेस पर समझा जाता हैं सेक्सुल हेरेसमेंट
- शारीरिक स्पर्श या स्पर्श करने की कोशिश
- यौन स्वीकृति की मांग या अनुरोध
- कॉमेंट करना
- गलत शब्दों का इस्तेमाल करना
- गलत शब्द या ऐसी बातें बोलना हो सेक्सुल हेरेसमेंट के अंतर्गत आता हैं
- अशोभनीय शारीरिक, मौखिक या सांकेतिक आचरण करना
कार्यस्थल पर ऐसा हो माहौल
- सुरक्षित कार्य करने का वातावरण प्रदान करना. जिससे आने वाले व्यक्ति को सुरक्षा महसूस हो
- हर ऑफिस में सेक्सुल हेरेसमेंट के अंतर्गत एक आंतरिक समिति का गठन करना
- ऑफिस में नियमित अंतराल पर कार्यशाला और जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाना
- आंतरिक समिति ऑफिस में काम कर रही तमाम महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करेगी
- कामकाजी महिलाओं के शिकायत करने पर जांच की सुविधा होना
- महिला द्वारा किसी के उपर आरोप लगाने पर समिति पूरी मदद करेगा
- अगर कोई महिला कार्य स्थल पर किसी कर्मचारी पर आरोप लगाती हैं तो समिति कार्यवाही प्रारंभ करायेगा, जिससे लैंगिक उत्पीड़न की घटना घटी थी
- ऑफिस में लैंगिक उत्पीड़न को सवा नियमावली के अधीन गलत मान कर नौकरी से भी निकाला जा सकता हैं
कोट
सेक्सुअल हेरेसमेंट के केस आये दिन हमारे पास आते हैं. पटना में अभी भी 70 फीसदी ऐसे सरकारी और निजी संस्थान हैं जहां पर महिलाओं के सुरक्षा के लिए सेक्सुअल हेरेसमेंट सेल नहीं बनाया गया है. इससे महिलाओं के साथ कोई घटना घटती है तो मामले आगे नहीं बढ़ पाती हैं. क्योंकि इस मामले में कानून होते हुए भी उसका पालन नहीं हो पाता हैं. लोग इस कानून के प्रति अलर्ट हो या डरे तभी तो इसे रोका जा सकेगा. अभी भी इसे लोग हल्के रूप में लेते हैं.
श्रुति सिंह, वकील, पटना हाई कोर्ट
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